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डीआरडीओ के स्वदेशी ‘नेत्र’ AEW&C सिस्टम को मिली अंतिम परिचालन मंजूरी, भारतीय वायुसेना को सौंपा गया FOC प्रमाणपत्र

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बेंगलुरु- भारत ने रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) द्वारा विकसित स्वदेशी ‘नेत्र’ एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) सिस्टम को अंतिम परिचालन मंजूरी (Final Operational Clearance - FOC) मिल गई है। इस अवसर पर भारतीय वायुसेना को आधिकारिक रूप से FOC प्रमाणपत्र सौंपा गया।

यह प्रणाली भारतीय वायुसेना, डीआरडीओ और उद्योग जगत के सहयोग से विकसित की गई है। इसका उद्देश्य हवाई निगरानी, युद्धक्षेत्र की वास्तविक समय की जानकारी (Situational Awareness) और बैटल मैनेजमेंट क्षमताओं को मजबूत करना है। इससे भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता और रणनीतिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

बेंगलुरु में आयोजित समारोह की अध्यक्षता वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने की। कार्यक्रम में पूर्व वायुसेना प्रमुख आर.के.एस. भदौरिया, पूर्व डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ. एस. क्रिस्टोफर, डीआरडीओ और भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने स्वदेशी नेत्र AEW&C सिस्टम की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रणाली ने ऑपरेशन सिंदूर और 2019 बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसे अभियानों में अपनी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता साबित की है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीकें बदलते युद्ध परिदृश्यों के अनुसार आवश्यक संशोधन और उन्नयन की सुविधा प्रदान करती हैं।

डीआरडीओ के एरोनॉटिक्स क्लस्टर की महानिदेशक डॉ. के. राजलक्ष्मी मेनन ने नेत्र परियोजना की विकास यात्रा और सामने आई तकनीकी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मजबूत सिस्टम इंजीनियरिंग और सटीक परीक्षण प्रक्रिया ने परियोजना को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर के महानिदेशक डॉ. बी.के. दास ने कहा कि डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना और उद्योग क्षेत्र के बीच उत्कृष्ट तालमेल ही इस परियोजना की सफलता का आधार रहा है। उन्होंने नेत्र AEW&C को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

कार्यक्रम के दौरान परियोजना में योगदान देने वाले विभिन्न संगठनों और इकाइयों को सम्मानित भी किया गया। अधिकारियों ने कहा कि नेत्र AEW&C प्रणाली का सफल परिचालन भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई प्रदान करेगा और यह वैज्ञानिक संस्थानों, रक्षा उत्पादन इकाइयों तथा सैन्य बलों के बीच मजबूत सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।


आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को नई ताकत: नागपुर में 10,000 टन क्षमता वाले अत्याधुनिक एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस की आधारशिला रखी गई

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नागपुर- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज नागपुर स्थित आयुध निर्माणी अंबाझरी में अत्याधुनिक 10,000 टन क्षमता वाले एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस परियोजना का भूमि पूजन किया। यह परियोजना यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) द्वारा स्थापित की जा रही है और इसे देश की रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षमताओं को नई मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने कहा कि “जो राष्ट्र अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं करने में सक्षम होता है, वही अपने हितों की रक्षा के लिए सबसे अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है।” उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारत की उस सोच का प्रतीक है, जिसमें आयात पर निर्भरता छोड़कर महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों और सामग्रियों का स्वदेशी उत्पादन किया जा रहा है।

रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ

प्रस्तावित एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस देश की सबसे उन्नत सुविधाओं में से एक होगी। इसके माध्यम से रक्षा प्रणालियों, लड़ाकू विमानों, मिसाइल कार्यक्रमों, अंतरिक्ष अभियानों, रेलवे और परिवहन क्षेत्रों के लिए बड़े एवं जटिल एल्युमिनियम मिश्रधातु (Alloy) प्रोफाइल तैयार किए जाएंगे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइलें और अंतरिक्ष कार्यक्रम ऐसे धातुओं की मांग करते हैं जो हल्के होने के साथ अत्यधिक मजबूत भी हों। यह नई सुविधा देश में ऐसे महत्वपूर्ण धातु उत्पादों के निर्माण की क्षमता विकसित करेगी और आयात पर निर्भरता को कम करेगी।

ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख

राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में स्वदेशी रक्षा उपकरणों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय सैनिकों के साहस के साथ मजबूत स्वदेशी तकनीक का होना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बड़ी सैन्य प्रणालियों की वास्तविक ताकत हजारों छोटे-छोटे महत्वपूर्ण पुर्जों में छिपी होती है और यह परियोजना देश को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि

रक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन जहां 46,000 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि:

  • 2014 में रक्षा निर्यात 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था।

  • 2025-26 में रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो गया।

  • सरकार अगले कुछ वर्षों में 3 लाख करोड़ रुपये रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये रक्षा निर्यात का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल करने की दिशा में अग्रसर है।

यंत्र इंडिया लिमिटेड की उपलब्धियां

रक्षा मंत्री ने कहा कि आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) के निगमकरण के बाद स्थापित यंत्र इंडिया लिमिटेड आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

उन्होंने बताया कि:

  • OFB का उत्पादन 2019-20 में 12,755 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 26,282 करोड़ रुपये हो गया।

  • रक्षा निर्यात 81 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,561 करोड़ रुपये पहुंच गया है।

  • इसमें YIL का योगदान 397 करोड़ रुपये रहा।

आधुनिक तकनीक और अनुसंधान पर जोर

रक्षा मंत्री ने कहा कि अनुसंधान एवं विकास (R&D) और पूंजी निवेश किसी भी औद्योगिक इकाई की सफलता के दो प्रमुख आधार हैं। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों से आधुनिक मशीनरी, नई तकनीकों और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने का आह्वान किया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने भी की सराहना

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस परियोजना को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि आज भारत रक्षा क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ निर्यातक देश बन रहा है और दुनिया भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती क्षमताओं को पहचान रही है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना नागपुर और पूरे विदर्भ क्षेत्र को रक्षा विनिर्माण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में मदद करेगी।



टीडीबी ने एयरोस्पेस, रक्षा और ईवी चार्जिंग कनेक्टरों के स्वदेशी व्यावसायीकरण हेतु टीआईईए कनेक्टर्स को दिया समर्थन

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भारत को उन्नत विनिर्माण और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने बेंगलुरु स्थित TIEA Connectors Pvt. Ltd. को “एयरोस्पेस, रक्षा एवं इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एयरबोर्न कनेक्टर्स और चार्जिंग कनेक्टर्स के व्यावसायीकरण” परियोजना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है।

इस परियोजना का उद्देश्य एयरोस्पेस, रक्षा, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे रणनीतिक एवं उभरते क्षेत्रों के लिए उच्च-विश्वसनीयता (High-Reliability) वाले विद्युत इंटरकनेक्ट सिस्टम के डिजाइन और निर्माण में भारत की स्वदेशी क्षमताओं को सुदृढ़ करना है।

विद्युत कनेक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक एवं इलेक्ट्रोमैकेनिकल प्रणालियों के अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं, जो कठिन परिचालन परिस्थितियों में भी ऊर्जा, सिग्नल और डेटा के निर्बाध संचार को सुनिश्चित करते हैं। एयरोस्पेस, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में इनकी विश्वसनीयता और सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इन्हें अत्यधिक कंपन, झटकों, तापमान और पर्यावरणीय दबावों के बीच कार्य करना पड़ता है।

टीआईईए द्वारा विकसित तकनीक उन्नत कंपन-प्रतिरोधी (Vibration-Resistant) संपर्क संरचना पर आधारित है, जो अत्यधिक गतिशील परिस्थितियों में भी स्थिर विद्युत प्रदर्शन सुनिश्चित करती है। इसमें एक स्वामित्वयुक्त (Proprietary) मल्टी-पॉइंट इलास्टिक कॉन्टैक्ट मैकेनिज्म का उपयोग किया गया है, जो संपर्क स्थिरता बढ़ाने, विद्युत प्रतिरोध कम करने और तीव्र कंपन के दौरान भी सिग्नल बाधित होने से रोकने में सक्षम है।

यह तकनीक 100G तक के कंपन स्तर पर भी विश्वसनीय विद्युत संपर्क बनाए रखने में सक्षम है, जिससे यह मिशन-क्रिटिकल एयरोस्पेस, रक्षा और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त बनती है। इन कनेक्टरों का निर्माण उच्च-प्रदर्शन बेरीलियम कॉपर (BeCu) मिश्रधातु से किया जाता है और इनमें विशेष लॉकिंग मैकेनिज्म लगाए गए हैं ताकि कठोर परिस्थितियों में भी सुरक्षित एवं स्थायी विद्युत संपर्क बना रहे।

रणनीतिक उपयोगों के लिए इन कनेक्टरों पर चांदी और सोने की प्लेटिंग भी की जाती है, जिससे बेहतर चालकता, जंग-प्रतिरोध और दीर्घकालिक विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।

यह परियोजना भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल और रक्षा, एयरोस्पेस तथा उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के स्वदेशीकरण के लक्ष्य के अनुरूप है। कंपनी ने उत्पाद डिजाइन, इंजीनियरिंग, टूलिंग, प्रोटोटाइपिंग, परीक्षण और विनिर्माण तक की संपूर्ण क्षमताएं देश में विकसित की हैं, जिससे आयातित तकनीकों पर निर्भरता कम होगी।

यह तकनीक भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र की आवश्यकताओं को भी पूरा करेगी और मजबूत एवं विश्वसनीय चार्जिंग कनेक्टर समाधान उपलब्ध कराएगी। इससे घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी, तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और उच्च-मूल्य इलेक्ट्रॉनिक घटकों के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता विकसित होगी।

इस अवसर पर टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि एयरोस्पेस, रक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में भारत की बढ़ती क्षमताओं के लिए स्वदेशी उच्च-प्रदर्शन घटकों का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि टीडीबी रणनीतिक और उच्च-विकास वाले क्षेत्रों के लिए वैश्विक स्तर की तकनीक विकसित करने वाले भारतीय उद्यमों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

टीआईईए कनेक्टर्स के प्रवर्तकों ने टीडीबी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे कंपनी को अपनी स्वदेशी कनेक्टर तकनीकों के व्यावसायीकरण में तेजी लाने और एयरोस्पेस, रक्षा, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रिक वाहन तथा औद्योगिक बाजारों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विनिर्माण क्षमता का विस्तार करने में सहायता मिलेगी।


भारत–कनाडा 7वें मंत्रीस्तरीय व्यापार और निवेश संवाद का सारांश (MDTI 2025)

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भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के आमंत्रण पर, कनाडा के निर्यात प्रोत्साहन, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक विकास मंत्री, माननीय मनींदर सिद्धू ने 11 से 14 नवंबर 2025 तक भारत की आधिकारिक यात्रा की।

कनाडा के कananaskis में हुए G7 सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की द्विपक्षीय बैठक में प्रदान किए गए निर्देशों, तथा 13 अक्टूबर 2025 को जारी विदेश मंत्रियों के संयुक्त बयान “एक मजबूत साझेदारी की ओर नवीनीकृत गति”—जिसमें व्यापार को द्विपक्षीय आर्थिक वृद्धि और लचीलापन का आधार स्तंभ बताया गया था—के अनुरूप, दोनों व्यापार मंत्रियों ने व्यापार और निवेश पर मंत्रीस्तरीय संवाद (MDTI) के 7वें संस्करण का आयोजन किया।

मंत्रियों ने भारत–कनाडा आर्थिक साझेदारी की मजबूती और निरंतरता की पुनः पुष्टि की और सतत संवाद, पारस्परिक सम्मान, और भावी पहलों के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

मंत्रियों ने वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार में मजबूत वृद्धि का उल्लेख किया, जो 2024 में 23.66 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें माल व्यापार का मूल्य लगभग 8.98 अरब अमेरिकी डॉलर था—जो पिछले वर्ष की तुलना में 10% की महत्वपूर्ण वृद्धि है। मंत्रियों ने भारत–कनाडा आर्थिक साझेदारी की ताकत और लचीलापन दोहराया और व्यापार और निवेश के नए अवसरों को खोलने के लिए निजी क्षेत्र के साथ निरंतर सहभागिता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने द्विपक्षीय निवेश प्रवाह में steady विस्तार का स्वागत किया, जिसमें भारत में कनाडा के संस्थागत निवेश और कनाडा में भारतीय कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति शामिल है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं में हजारों नौकरियों का समर्थन करती हैं। मंत्रियों ने एक खुला, पारदर्शी और पूर्वानुमेय निवेश माहौल बनाए रखने और प्राथमिकता एवं उभरते क्षेत्रों में गहरी साझेदारी के नए रास्तों की तलाश करने की प्रतिबद्धता जताई।

मंत्रियों ने टिकाऊ विकास और नवाचार को बढ़ावा देने वाले रणनीतिक क्षेत्रों में भारत और कनाडा के बीच मजबूत पूरकताओं का भी उल्लेख किया, जो व्यापार के लिए नए अवसर प्रदान करती हैं। यह स्वीकार करते हुए कि इन क्षेत्रों में दोनों पक्षों के संबंधित हितधारकों के बीच अलग-अलग डोमेन-स्तरीय सहभागिता की आवश्यकता होगी, मंत्रियों ने:

• ऊर्जा संक्रमण और नई औद्योगिक वृद्धि के लिए आवश्यक क्रिटिकल मिनरल्स और स्वच्छ ऊर्जा सहयोग में दीर्घकालिक आपूर्ति शृंखला साझेदारी को प्रोत्साहित करने पर सहमति व्यक्त की।

• भारत में कनाडा की स्थापित उपस्थिति और भारत के विमानन क्षेत्र की वृद्धि का उपयोग करते हुए एयरोस्पेस और द्वि-उपयोग क्षमताओं में निवेश और व्यापारिक अवसरों की पहचान और विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की।

सप्लाई चेन लचीलापन के महत्व को स्वीकार करते हुए, मंत्रियों ने वैश्विक घटनाक्रम पर विचार-विमर्श किया और हालिया व्यवधानों से मिले सबक पर चर्चा की। उन्होंने कृषि सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लचीलापन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए विविध और विश्वसनीय सप्लाई चेन की अनिवार्यता पर बल दिया।

मंत्रियों ने द्विपक्षीय आर्थिक सहभागिता को मजबूत करने में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और वैश्विक विकास तथा बदलती सप्लाई चेन और व्यापार गतिशीलता को प्रतिबिंबित करने के लिए आर्थिक साझेदारी को ऊंचा उठाने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने द्विपक्षीय संवाद में गति बनाए रखने और लोगों-से-लोगों के संबंधों को समर्थन देने के महत्व पर जोर दिया, जो साझेदारी की मजबूत नींव प्रदान करते हैं।

मंत्रियों ने आने वाले वर्ष की शुरुआत में कनाडा और भारत दोनों में व्यापार और निवेश समुदाय के साथ सतत मंत्रीस्तरीय सहभागिता के लिए सहमति व्यक्त की।

उन्होंने अगले कदमों पर विचार करते हुए निकट संपर्क में बने रहने पर सहमति व्यक्त की और नई दिल्ली में आयोजित रचनात्मक और दूरदर्शी चर्चाओं को स्वीकार करते हुए बैठक का समापन किया।


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