Media24Media.com: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘कलाम एंड कवच 3.0’ में आत्मनिर्भरता और संयुक्तता पर दिया जोर

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘कलाम एंड कवच 3.0’ में आत्मनिर्भरता और संयुक्तता पर दिया जोर

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा— “किसी भी राष्ट्र की शक्ति इस बात पर निर्भर करेगी कि उसकी सेना, प्रयोगशालाएं और उद्योग कितनी तेजी से एक साथ सोच और काम कर सकते हैं,” उन्होंने आत्मनिर्भरता और जॉइंटनेस के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि उभरती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए रणनीतिक स्वायत्तता आवश्यक है। वे 14 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित रक्षा रणनीतिक संवाद “कलाम एंड कवच 3.0” के दौरान वीडियो संदेश के माध्यम से नीति निर्माताओं, सैन्य नेतृत्व, रक्षा उद्योग, राजनयिकों, स्टार्टअप्स, अकादमिक जगत और रणनीतिक विशेषज्ञों को संबोधित कर रहे थे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आने वाले समय का युद्धक्षेत्र उन लोगों का साथ देगा जो विचार, प्रोटोटाइप और उसके वास्तविक उपयोग के बीच के समय को कम कर सकेंगे। उन्होंने वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों, चल रहे संघर्षों, साइबर खतरों, आपूर्ति-श्रृंखला की कमजोरियों और हाइब्रिड युद्ध के नए स्वरूपों को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को पुराने सिद्धांतों पर आधारित नहीं रखा जा सकता।

उन्होंने आत्मनिर्भरता को केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं बल्कि रणनीतिक आवश्यकता बताया और कहा कि जो देश महत्वपूर्ण रक्षा क्षमताओं के लिए दूसरों पर अत्यधिक निर्भर रहता है, वह संकट के समय असुरक्षित हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्रमुख प्रणालियों को देश के अपने पारिस्थितिकी तंत्र में ही विकसित, उत्पादित, मेंटेन और अपग्रेड करना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक युद्ध अब साइलो में काम नहीं करता, बल्कि भूमि, समुद्र, वायु, साइबर और अंतरिक्ष—इन सभी क्षेत्रों में समन्वय की आवश्यकता है, साथ ही प्रयोगशालाओं, उद्योगों, स्टार्टअप्स, नीति-निर्माताओं और सैन्य संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है।

उद्घाटन संबोधन में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने “कलाम एंड कवच” को एक ऐसा मंच बताया जहाँ विचार राष्ट्रीय उद्देश्य के साथ मिलते हैं। उन्होंने कहा कि “कलाम” ज्ञान, विज्ञान और नवाचार का प्रतीक है, जबकि “कवच” सुरक्षा और राष्ट्र रक्षा का प्रतिनिधित्व करता है।

उन्होंने बदलते युद्ध परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के खतरे पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़ चुके हैं और पूर्वानुमान आधारित तैयारी आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत JAI (Jointness, Aatmanirbharta & Innovation) की अवधारणा को भारत की भविष्य की सुरक्षा संरचना का आधार बताया।

उन्होंने हालिया ऑपरेशनल उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए “ऑपरेशन सिंदूर” को भारत की क्षमताओं का उदाहरण बताया और कहा कि यह आत्मनिर्भर प्रणालियों, तेज प्रतिक्रिया और संयुक्त सैन्य समन्वय का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि पिछले दशक में भारत का रक्षा निर्यात ₹686 करोड़ से बढ़कर ₹38,424 करोड़ तक पहुंच गया है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन ₹1.54 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य 2029-30 तक ₹50,000 करोड़ रक्षा निर्यात और ₹3 लाख करोड़ रक्षा उत्पादन हासिल करना है।

एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित ने अपने विशेष संबोधन में स्वदेशी नवाचार को भारत की रणनीतिक भविष्य सुरक्षा का आधार बताया।

“कलाम एंड कवच 3.0” में AI आधारित युद्ध, स्वायत्त प्रणाली, हाइपरसोनिक तकनीक, क्वांटम C4ISR, रक्षा उत्पादन विस्तार और रणनीतिक साझेदारियों जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय, सशस्त्र बलों, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत, स्टार्टअप्स और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की भागीदारी रही।

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