Media24Media.com: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में पुसा में खरीफ अभियान 2026 सम्मेलन, कृषि विकास को गति देने पर जोर

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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में पुसा में खरीफ अभियान 2026 सम्मेलन, कृषि विकास को गति देने पर जोर

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पुसा,नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन – खरीफ अभियान 2026 के दूसरे दिन, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों के साथ भारतीय कृषि के समग्र विकास पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने कहा कि कृषि विकास को अब समयबद्ध, परिणामोन्मुख और किसान-केंद्रित कार्यों के माध्यम से नीति, नवाचार और प्रतिबद्धता के साथ तेज करने की आवश्यकता है। राज्यों के कृषि मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी ने इस सम्मेलन को कृषि उन्नति के लिए एक सशक्त ‘टीम इंडिया’ मंच में बदल दिया।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार द्वारा आयोजित इस सम्मेलन के दूसरे दिन देशभर से आए कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भगीरथ चौधरी भी उपस्थित थे। इसके अलावा ओडिशा के उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री कनक वर्धन सिंह देव, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा, महाराष्ट्र के मंत्री जयप्रकाश जयकुमार रावल, मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना, छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम, गुजरात के कृषि मंत्री जीतूभाई सवजीभाई वाघानी, तमिलनाडु के कृषि मंत्री आर. विनोद, हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, अरुणाचल प्रदेश के कृषि मंत्री गेब्रियल डी. वांगसू, मेघालय की कृषि मंत्री अम्पारीन लिंगदोह, मिजोरम के कृषि मंत्री पी. सी. वनलालरुआता, त्रिपुरा के कृषि मंत्री रतन लाल नाथ, सिक्किम के कृषि मंत्री पूरण कुमार गुरूंग, पश्चिम बंगाल के मंत्री अशोक कीर्तनिया तथा असम के पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अतुल बोरा सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। कृषि सचिव अतिश चंद्र, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट तथा विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस विस्तृत विचार-विमर्श में शामिल हुए।

जनता को संबोधित करते हुए चौहान ने इस सम्मेलन को ‘भारत की कृषि टीम’ की ऐतिहासिक बैठक बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन ‘मिनी इंडिया’ की भावना को दर्शाता है, जहां सभी एक साझा संकल्प के साथ राष्ट्रीय हित, किसान कल्याण और कृषि विकास के लिए एकजुट हैं। नेतृत्व के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जब मंत्री स्वयं योजनाओं का नेतृत्व करते हैं, तो अधिक गति, गंभीरता और ठोस परिणाम दिखाई देते हैं।

चौहान ने कहा कि भारत ने खाद्यान्न उत्पादन में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 376.563 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जो अब तक का सर्वाधिक है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, किसानों की मेहनत, वैज्ञानिक अनुसंधान और राज्यों के सक्रिय सहयोग को दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत चावल उत्पादन में विश्व में अग्रणी बन गया है, जबकि गेहूं, मक्का, दलहन और तिलहन उत्पादन में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों के बावजूद गति को धीमा नहीं किया जा सकता। भारत को खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को अधिक लाभकारी बनाने और पोषण सुरक्षा को भी समान महत्व देना होगा। उन्होंने कहा कि कृषि केवल उत्पादन का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की जीवनरेखा है, इसलिए सभी संबंधितों को मिशन मोड में काम करना होगा।

सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से दलहन मिशन, तिलहन मिशन, कपास मिशन और अन्य प्रमुख कृषि अभियानों की व्यक्तिगत समीक्षा करने का आग्रह किया। उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप तेज, व्यावहारिक और मांग-आधारित अनुसंधान करने को कहा। विशेष रूप से तूर, सोयाबीन और तिलहन फसलों के लिए अल्प अवधि और उपयुक्त किस्मों के विकास पर जोर दिया गया।

बीज उपलब्धता के मुद्दे पर चौहान ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज कृषि उत्पादकता की पहली और सबसे आवश्यक शर्त है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि देश में पर्याप्त बीज उपलब्ध होने के बावजूद किसानों को समय पर बीज नहीं मिल पाते। उन्होंने सभी राज्यों को समय पर बीज उठाने, वितरण प्रणाली मजबूत करने और खरीफ मौसम में किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में खराब गुणवत्ता वाले बीज बाजार में नहीं आने चाहिए और इसके खिलाफ सख्त निगरानी एवं कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि आपात स्थिति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बीज भंडार प्रणाली स्थापित की गई है।

उन्होंने उर्वरक, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और फार्मर आईडी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड केवल दस्तावेज न रहकर खेत स्तर पर उपयोग में लाए जाएं। उन्होंने ‘खेत बचाओ अभियान’ के माध्यम से संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की।

फार्मर आईडी को पारदर्शी और कुशल प्रणाली की आधारशिला बताते हुए उन्होंने कहा कि उर्वरक वितरण में पारदर्शिता, कालाबाजारी की रोकथाम और वास्तविक किसानों तक आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड पर उन्होंने कहा कि समय पर पूंजी उपलब्धता लाभकारी खेती के लिए आवश्यक है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में कृषि ऋण की पहुंच बढ़ाने के लिए बैंकों के साथ जल्द चर्चा की जाएगी।

कृषि यंत्रीकरण पर उन्होंने कहा कि केवल मशीनों का वितरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही किसान तक सही मशीन पहुंचनी चाहिए। कस्टम हायरिंग सेंटर की समीक्षा और पारदर्शी चयन प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

बागवानी क्षेत्र में उन्होंने कहा कि भारत में फल और सब्जी उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, और अब लक्ष्य केवल उत्पादन नहीं बल्कि निर्यात गुणवत्ता का उत्पादन होना चाहिए।

उन्होंने नकली बीज, घटिया कीटनाशक और खराब कृषि इनपुट पर कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि राष्ट्रीय नुकसान है।

फसल बीमा योजना पर उन्होंने समय पर राहत, बैंक, बीमा कंपनियों और राज्यों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता बताई।

दलहन और तिलहन की खरीद पर उन्होंने कहा कि किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किए बिना आत्मनिर्भरता संभव नहीं है।

एफपीओ, कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका पर उन्होंने कहा कि ये संस्थान नवाचार और अनुसंधान को सीधे किसानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अंत में उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य को अपनी कृषि कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए और केंद्र सरकार हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि नियम किसानों की सुविधा के लिए हैं, न कि किसान नियमों के लिए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, राज्यों, वैज्ञानिकों और किसानों के सहयोग से भारत कृषि क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा और वैश्विक उदाहरण बनेगा।

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