Media24Media.com: खेत बचाओ अभियान को जन आंदोलन बनाने का आह्वान, 1 जून से शुरू होगा माहभर का अभियान

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खेत बचाओ अभियान को जन आंदोलन बनाने का आह्वान, 1 जून से शुरू होगा माहभर का अभियान

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “खेत बचाओ अभियान” को केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि खेत, किसान और गांवों को जोड़ने वाला व्यापक राष्ट्रीय अभियान बनाने का संदेश दिया है। आज दिल्ली में अभियान की तैयारियों को लेकर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि अभियान का मुख्य फोकस उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग, मौसम संबंधी चुनौतियों के अनुसार किसानों को समय पर सलाह, पंचायत स्तर पर सक्रिय भागीदारी तथा सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे गांवों तक पहुंचाने पर रहेगा।

1 जून से शुरू होने वाले इस एक माह के अभियान को प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को खेतों की सुरक्षा, लागत में संतुलन तथा किसानों को सही समय पर उचित मार्गदर्शन देने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह अभियान ऊपर से नीचे (Top-Down) मॉडल पर नहीं चलेगा, बल्कि पंचायत, राज्य और केंद्र की साझेदारी से संचालित होगा।

बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग को कम करना अभियान का प्रमुख उद्देश्य होगा। किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों और अन्य कृषि आदानों के संतुलित उपयोग के लिए जागरूक किया जाएगा। साथ ही, हरी खाद, जैविक एवं जैव-उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के जीवंत प्रदर्शन भी आयोजित किए जाएंगे।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आने वाले दिनों में मौसम संबंधी चुनौतियों को देखते हुए किसानों को व्यावहारिक सलाह दी जाएगी। उन्हें क्या करें और क्या न करें, उपयुक्त फसल चयन, फसल विविधीकरण तथा जल संकट या जोखिम की स्थिति में खेती के बारे में रचनात्मक सुझाव दिए जाएंगे। अभियान का उद्देश्य केवल संदेश देना नहीं, बल्कि खेत स्तर पर परिस्थितियों के अनुरूप सही सलाह पहुंचाना होगा।

उन्होंने पंचायत स्तर पर अभियान की मजबूत नींव रखने पर जोर देते हुए निर्देश दिया कि कृषि यंत्रीकरण उपकरणों के वितरण तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभों को भी इस अभियान के अंतर्गत पंचायत स्तर तक पहुंचाया जाए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह अभियान केवल विभागीय दायरे तक सीमित नहीं रहेगा। राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सहयोग का आग्रह किया जाएगा तथा मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि यह प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर जनभागीदारी का सशक्त मॉडल बन सके।

बैठक में बताया गया कि कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) को अभियान में भाग लेने वाली सभी संस्थाओं के प्रमुख समन्वयक की भूमिका सौंपी गई है। अभियान के लिए 1600 से अधिक टीमों का गठन किया गया है। उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग वाले 100 जिलों के लिए 500 विशेष टीमें बनाई गई हैं, जिनमें कृषि विज्ञान केंद्रों, Indian Council of Agricultural Research के संस्थानों, एआईसीआरपी केंद्रों तथा कृषि विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा आईसीएआर संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों की 1150 से अधिक बहु-विषयक टीमें भी समानांतर रूप से कार्य करेंगी।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभियान केवल उर्वरक प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगा। इसके माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी खेत तक पहुंचाया जाएगा। किसान क्रेडिट कार्ड, PM-KISAN, दलहन-तिलहन मिशन, ऑयल पाम मिशन, कपास मिशन, संतुलित पोषण, मृदा स्वास्थ्य, जल संरक्षण तथा क्षेत्र-विशिष्ट कृषि सलाह जैसी गतिविधियों को एकीकृत कर अभियान को बहुउद्देशीय और प्रभावी बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता की कुंजी यह है कि इसका संदेश व्यावहारिक हो, जमीनी स्तर पर दिखाई दे और स्थानीय संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो। अभियान के मूल बिंदु हैं—उर्वरकों का संतुलित एवं कम उपयोग, मौसम के अनुसार खेती की सलाह, पंचायत स्तर पर सक्रियता, कृषि यंत्रों एवं योजनाओं का लाभ तथा जनप्रतिनिधियों की सहभागिता। अभियान की स्पष्ट दिशा है—खेत बचाना, लागत नियंत्रित करना, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारना, किसानों को जागरूक बनाना और गांव स्तर पर कृषि प्रबंधन की नई संस्कृति विकसित करना।

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