Media24Media.com: भारत की रक्षा यात्रा में तकनीक और आत्मनिर्भरता का नया युग: डॉ. जितेंद्र सिंह

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भारत की रक्षा यात्रा में तकनीक और आत्मनिर्भरता का नया युग: डॉ. जितेंद्र सिंह

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान, और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष मामलों के राज्य मंत्री  जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अपने रक्षा क्षेत्र के निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां तकनीक, स्वदेशी नवाचार और निजी क्षेत्र की भागीदारी देश की वैश्विक पहचान को नया आकार दे रही है।

प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक संगोष्ठी 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल भौतिक शक्ति पर आधारित नहीं रह गया है, बल्कि यह उन्नत तकनीक, रियल-टाइम डेटा सिस्टम और स्वचालित प्लेटफॉर्म पर निर्भर हो गया है।

उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत रक्षा उपकरणों के बड़े आयातक से उभरते हुए निर्यातक के रूप में बदल गया है। इस अवधि में रक्षा उत्पादन ₹1.54 लाख करोड़ तक पहुंचा, जो 174% की वृद्धि दर्शाता है, जबकि रक्षा निर्यात ₹23,622 करोड़ तक पहुंच गया, जिसमें 34 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

मंत्री ने कहा कि निजी क्षेत्र ने लगभग ₹15,000 करोड़ के निर्यात में योगदान दिया है, जो रक्षा उत्पादन में एक बड़े परिवर्तन को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान बजट 2026-27 में रक्षा क्षेत्र के लिए ₹6,81,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.5% अधिक है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र अब रक्षा तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। भारत ने क्वांटम-सुरक्षित संचार तकनीक में भी तेजी से प्रगति की है, जो भविष्य के युद्ध प्रणालियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और फंडिंग से अनुसंधान, विकास और नवाचार का मजबूत इकोसिस्टम तैयार हो रहा है।

नॉर्थ टेक संगोष्ठी 2026 का आयोजन 4 से 6 मई तक “रक्षा त्रिवेणी संगम – जहां तकनीक, उद्योग और सैनिक मिलते हैं” थीम पर किया जा रहा है। यह कार्यक्रम भारतीय सेना के उत्तरी और केंद्रीय कमांड तथा SIDM द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया है।

इसमें 280 से अधिक उद्योग भागीदार और 284 स्टॉल शामिल हैं, जहां अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है। कार्यक्रम में लाइव डेमो, तकनीकी प्रदर्शनी और स्टार्टअप्स, उद्योग एवं सेना के बीच संवाद सत्र भी शामिल हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता तकनीकी संप्रभुता पर आधारित है और सहयोगात्मक प्रयासों से देश भविष्य की रक्षा तकनीक में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है।

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