Media24Media.com: वैज्ञानिकों की बड़ी खोज: छोटे अणुओं से उन्नत स्मार्ट मैटेरियल विकसित करने का नया तरीका

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वैज्ञानिकों की बड़ी खोज: छोटे अणुओं से उन्नत स्मार्ट मैटेरियल विकसित करने का नया तरीका

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नई दिल्ली- भारतीय वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए यह समझ विकसित की है कि छोटे ऑर्गेनिक अणुओं (मॉलिक्यूल्स) को कैसे नियंत्रित कर उन्नत कार्यात्मक मैटेरियल तैयार किए जा सकते हैं। यह खोज भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, ट्यून करने योग्य ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, स्मार्ट मैटेरियल और बायोइलेक्ट्रॉनिक इंटरफेस के विकास में मददगार साबित हो सकती है।

बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS) और जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR) के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने इस दिशा में काम किया। दोनों संस्थान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के अंतर्गत स्वायत्त संस्थाएं हैं।

शोध में वैज्ञानिकों ने नैफ्थलीन डाइइमाइड (NDI) नामक एक विशेष अणु का अध्ययन किया, जो एम्फीफिलिक (जल और वसा दोनों के साथ प्रतिक्रिया करने वाला) होता है। यह अणु पानी में स्वयं को एक व्यवस्थित संरचना में बदलने की क्षमता रखता है, जिसे ‘सुप्रामॉलिक्यूलर सेल्फ-असेंबली’ कहा जाता है।

अध्ययन में पाया गया कि सामान्य तापमान पर ये अणु मिलकर छोटे-छोटे गोलाकार नैनोस्ट्रक्चर (नैनोडिस्क) बनाते हैं। इन नैनोडिस्क में एक विशेष ऑप्टिकल गुण (काइरोऑप्टिकल एक्टिविटी) होता है, जिससे वे प्रकाश के साथ खास तरीके से प्रतिक्रिया करते हैं।

जब तापमान बढ़ाया जाता है, तो ये नैनोडिस्क अपनी संरचना बदलकर दो-आयामी नैनोशीट्स में परिवर्तित हो जाते हैं, और उनकी यह विशेष ऑप्टिकल क्षमता समाप्त हो जाती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल तापमान के बदलाव से ही मैटेरियल के संरचनात्मक और ऑप्टिकल गुणों को बदला जा सकता है।

शोध में यह भी पाया गया कि नैनोडिस्क की विद्युत चालकता (इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी) अधिक होती है, जबकि नैनोशीट्स में बदलने पर यह लगभग सात गुना तक कम हो जाती है। इसका मतलब है कि इस मैटेरियल के विद्युत गुणों को भी नियंत्रित किया जा सकता है, जो छोटे ऑर्गेनिक अणुओं में बहुत दुर्लभ माना जाता है।

यह तकनीक ऐसे स्मार्ट और अनुकूलनशील (adaptive) मैटेरियल विकसित करने का रास्ता खोलती है, जो अपने परिवेश के अनुसार खुद को बदल सकते हैं।

यह शोध हाल ही में ACS Applied Nano Materials जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन का नेतृत्व डॉ. गौतम घोष (CeNS) ने किया, उनके साथ शोध छात्र सौरव मोयरा (CeNS) और सहयोगी तारक नाथ दास (JNCASR) शामिल रहे।

यह खोज अगली पीढ़ी के सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्ट तकनीकों के विकास में नई संभावनाएं प्रदान करती है।

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