Media24Media.com: निजी क्षेत्र को R&D में आगे आना होगा: डॉ. जितेंद्र सिंह का आह्वान

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निजी क्षेत्र को R&D में आगे आना होगा: डॉ. जितेंद्र सिंह का आह्वान

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नई दिल्ली- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने निजी क्षेत्र से अनुसंधान एवं विकास (R&D) गतिविधियों में अपनी भागीदारी तेज करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए उद्योगों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

नीति आयोग द्वारा R&D प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर आधारित दो रिपोर्ट जारी करने के अवसर पर बोलते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार ने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिए खोलने तथा RDI फंड जैसी व्यवस्थाएं बनाने सहित कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब उद्योगों को भी निवेश बढ़ाकर और साझेदारी के माध्यम से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि शोध तभी फल-फूल सकता है, जब उसमें अनावश्यक बाधाएं, देरी और व्यवधान न हों। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नीतियों का मूल्यांकन केवल उनके डिजाइन से नहीं, बल्कि शोधकर्ताओं के वास्तविक अनुभव के आधार पर होना चाहिए।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है और देश के वैज्ञानिकों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है, लेकिन संस्थागत और प्रक्रियागत जटिलताएं अभी भी प्रगति में बाधा बन रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज का शोध बहु-विषयक (interdisciplinary) हो गया है, जिसमें उद्योग, वित्त और वैश्विक सहयोग की अहम भूमिका है।

उन्होंने निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी पर चिंता जताते हुए कहा कि केवल सरकारी समर्थन से दीर्घकालिक नवाचार संभव नहीं है। उन्होंने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत R&D में निवेश बढ़ाने और वैज्ञानिक कार्यों के लिए मजबूत सहयोग संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता बताई।

डॉ. सिंह ने ‘वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान तक आसान पहुंच शोध को गति देती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अनुमोदन, फंडिंग और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में छोटे-छोटे सुधार भी शोध उत्पादकता पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने कहा कि R&D प्रक्रियाओं को आसान बनाने की पहल वैज्ञानिक समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर आधारित है। उन्होंने पूरे शोध चक्र में समन्वय बढ़ाने और अनावश्यक देरी को कम करने पर जोर दिया।

नीति आयोग के सदस्य वी. के. सारस्वत ने कहा कि भारत का शोध पारिस्थितिकी तंत्र एक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहां फंडिंग में देरी और प्रशासनिक बाधाएं अभी भी चुनौती बनी हुई हैं। उन्होंने अधिक स्वायत्तता और उद्योग-शोध के बेहतर संबंधों की आवश्यकता बताई।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. ए.के. सूद ने कहा कि R&D को आसान बनाना एक सतत प्रक्रिया है और इसमें अभी भी कई सुधार की आवश्यकता है, जैसे फंडिंग सफलता दर, भर्ती और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियां।

नीति आयोग की रिपोर्टों में शोध प्रणाली में अधिक पारदर्शिता, लचीलापन और स्पष्टता लाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, ताकि वैज्ञानिक अपने कार्य को बेहतर तरीके से योजना बनाकर आगे बढ़ा सकें।

अंत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के शोध पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए सरकार के साथ-साथ उद्योग, संस्थान और समाज की संयुक्त भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा, “विज्ञान आज इतना महत्वपूर्ण विषय है कि इसे केवल वैज्ञानिकों तक सीमित नहीं रखा जा सकता,” और सभी हितधारकों से इसमें सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

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