Media24Media.com: कर्मयोगी साधना सप्ताह का शुभारंभ, जन-केंद्रित शासन को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम

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कर्मयोगी साधना सप्ताह का शुभारंभ, जन-केंद्रित शासन को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम

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नई दिल्ली- भारत सरकार ने आज मिशन कर्मयोगी के तहत ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य देशभर के लोक सेवकों की क्षमता, प्रतिबद्धता और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को मजबूत करना है। यह कार्यक्रम 2 अप्रैल से 8 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शासन को नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए और “नागरिक देवो भव” की भावना से प्रेरित होना चाहिए। उन्होंने निरंतर सीखने, तकनीक और डेटा के उपयोग तथा कर्तव्य-आधारित सेवा दृष्टिकोण पर जोर दिया।

नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम के साथ इस पहल की शुरुआत हुई, जो मिशन कर्मयोगी के पांच वर्ष पूरे होने का भी प्रतीक है। यह कार्यक्रम ‘टेक्नोलॉजी, ट्रेडिशन और टैंजिबल आउटकम्स’ के तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है।

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने कहा कि यह पहल एक सक्षम, प्रतिबद्ध और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवा के निर्माण को मजबूत करती है। उन्होंने बताया कि अब प्रशिक्षण पारंपरिक तरीके से आगे बढ़कर ‘कभी भी, कहीं भी’ सीखने की दिशा में विकसित हुआ है, जिसे iGOT जैसे प्लेटफॉर्म संभव बना रहे हैं।

क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने कहा कि मिशन कर्मयोगी ने सार्वजनिक सेवा में ज्ञान, कौशल और मूल्यों को एकीकृत कर एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि ‘कर्मयोगी’ वह है जो ज्ञान और कर्म को जोड़ते हुए सहानुभूति के साथ शासन करता है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव रचना शाह ने बताया कि iGOT प्लेटफॉर्म पर 1.5 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं, 8 करोड़ से अधिक कोर्स पूरे किए जा चुके हैं और 4,600 से अधिक कोर्स उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि 130 से अधिक क्षमता निर्माण योजनाएं तैयार की गई हैं।

कर्मयोगी भारत के अध्यक्ष सुब्रमण्यम रामदोराई ने कहा कि यह पहल सिविल सेवाओं में निरंतर सीखने और आत्म-विकास की संस्कृति को मजबूत करती है। उन्होंने अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों में दक्षता विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण पहलें भी शुरू की गईं, जिनमें ‘कर्मयोगी गीत’, ‘कर्मयोगी क्षमता कनेक्ट’, ‘कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम’ और ‘ट्रस्ट-बेस्ड पीयर असेसमेंट फ्रेमवर्क’ शामिल हैं। साथ ही AI आधारित ‘अमृत ज्ञान कोश’ केस स्टडी सूट भी लॉन्च किया गया।

मिशन कर्मयोगी, जो अब पांच वर्ष पूरे कर चुका है, ने पारंपरिक नियम-आधारित प्रणाली से हटकर एक दक्षता-आधारित ढांचा स्थापित किया है। ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है, जो 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में सहायक होगा।

इस कार्यक्रम में विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों, प्रशिक्षण संस्थानों और अन्य हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

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