Media24Media.com: भारत के सीफूड निर्यात में 11 वर्षों में दोगुनी बढ़ोतरी, झींगा निर्यात बना प्रमुख आधार

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भारत के सीफूड निर्यात में 11 वर्षों में दोगुनी बढ़ोतरी, झींगा निर्यात बना प्रमुख आधार

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भारत के समुद्री उत्पाद (सीफूड) निर्यात में पिछले 11 वर्षों में मजबूत और निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान निर्यात में औसतन 7% की वार्षिक वृद्धि हुई है। वर्ष 2013-14 में ₹30,213 करोड़ के मुकाबले 2024-25 में यह बढ़कर ₹62,408 करोड़ हो गया है, जिसमें प्रमुख योगदान झींगा (श्रिम्प) निर्यात का रहा, जिसकी कीमत ₹43,334 करोड़ रही।

भारत का सीफूड निर्यात काफी विविध है, जिसमें 350 से अधिक उत्पादों की किस्में शामिल हैं और ये लगभग 130 देशों में भेजे जाते हैं। 2024-25 में कुल निर्यात मूल्य का 36.42% हिस्सा अमेरिका को गया, जो सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। इसके बाद चीन, यूरोपीय संघ, दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान और मध्य-पूर्व प्रमुख गंतव्य हैं।

निर्यात में फ्रोजन श्रिम्प का दबदबा बना हुआ है, इसके बाद फ्रोजन मछली, स्क्विड, सूखे उत्पाद, कटलफिश, सुरिमी आधारित उत्पाद और जीवित व चिल्ड सीफूड का स्थान है। साथ ही, वैल्यू-एडेड उत्पादों की हिस्सेदारी 2.5% से बढ़कर 11% हो गई है, जिसकी निर्यात कीमत 742 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है।

सरकार सीफूड निर्यात में विविधता लाने और वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत मछली उत्पादन, ब्रैकिश वाटर एक्वाकल्चर का विस्तार, नई तकनीकों को अपनाने, रोग प्रबंधन और ट्रेसबिलिटी सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही कोल्ड-चेन नेटवर्क, आधुनिक मछली बंदरगाह और फिश लैंडिंग सेंटर विकसित किए जा रहे हैं।

उच्च मूल्य वाली प्रजातियों जैसे टूना, सीबास, कोबिया, पोम्पानो, मड क्रैब, GIFT तिलापिया, ग्रूपर और टाइगर श्रिम्प के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भारत के निर्यात उत्पादों का दायरा और बढ़ सके।

अंतरराष्ट्रीय मानकों और नियमों के अनुरूप बनने के लिए भारत ने कई कदम उठाए हैं। अमेरिका के मरीन मैमल प्रोटेक्शन एक्ट (MMPA) के तहत आवश्यक शर्तों को पूरा करते हुए भारत को 2025 में मंजूरी मिली, जिससे अमेरिकी बाजार में निर्यात जारी रहेगा। साथ ही, टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (TEDs) के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

व्यवसाय को आसान बनाने के लिए सैनिटरी इम्पोर्ट परमिट (SIP) प्रणाली को डिजिटल कर दिया गया है, जिससे मंजूरी का समय 30 दिनों से घटकर 72 घंटे रह गया है। कुछ उत्पादों के लिए SIP की आवश्यकता भी समाप्त कर दी गई है, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिला है।

आने वाले पांच वर्षों में सरकार का लक्ष्य उच्च मूल्य वाले उत्पादों का निर्यात बढ़ाना, नए बाजारों तक पहुंच बनाना और गुणवत्ता मानकों को मजबूत करना है। यूके, यूरोपीय संघ, आसियान और पश्चिम एशिया जैसे बाजारों में विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इन प्रयासों के साथ भारत वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद और प्रीमियम सीफूड निर्यातक के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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