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केंद्रीय सचिव अभिलक्ष लिखी ने रायगढ़ में अलंकरणीय मत्स्य ब्रूड बैंक का दौरा किया

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अभिलक्ष लिखी, सचिव, मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार ने महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मंगरूल गांव में स्थापित अलंकरणीय मत्स्य ब्रूड बैंक का दौरा किया। यह ब्रूड बैंक यशोधरा संजय खंडागले द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत स्थापित किया गया है। दौरे के बाद केंद्रीय सचिव ने पीएमएमएसवाई के लाभार्थियों से संवाद कर जमीनी स्तर पर मौजूद चुनौतियों और कमियों की जानकारी ली।

केंद्रीय सचिव द्वारा दौरा किया गया यह ब्रूड बैंक भारत में अपनी तरह की पहली पहल है, जहां 25 से अधिक प्रजातियों की अलंकरणीय मछलियों का संरक्षण और प्रजनन किया जाता है। यशोधरा संजय खंडागले ने अपने ब्रांड “Sam Discus” को देश में उच्च गुणवत्ता वाली डिस्कस मछलियों के प्रमुख उत्पादकों में स्थापित किया है। इस ब्रूड बैंक ने 20 प्रजातियों की लगभग 7.7 लाख अलंकरणीय मछलियों का उत्पादन किया है, जिससे लगभग 1.93 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ तथा 25–30 लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।

700 से अधिक टैंकों से सुसज्जित यह केंद्र कौशल विकास, रोजगार सृजन और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को अपनाने में भी सहयोग करता है तथा अलंकरणीय मत्स्य क्षेत्र के निर्यात को बढ़ावा देता है। यह ब्रूड बैंक नियामकीय मानकों का पालन करता है और GAIS तथा NFDP जैसी सरकारी योजनाओं के अंतर्गत कवर है। यहां से अलंकरणीय मछलियों का निर्यात अमेरिका, इटली, फ्रांस, मॉरीशस, दक्षिण कोरिया, कतर, कुवैत, मलेशिया, चीन, उज्बेकिस्तान, नाइजीरिया और इज़राइल सहित कई देशों में किया जाता है। यह मत्स्य क्षेत्र में नवाचार, सतत विकास और वृद्धि को बढ़ावा देने में सरकारी सहायता के प्रभावी उपयोग को दर्शाता है।

भारत में लगभग 700 स्वदेशी मीठे पानी की तथा 300 से अधिक समुद्री प्रजातियां उपलब्ध हैं, जो विशाल संसाधन क्षमता को दर्शाती हैं। भारत से अलंकरणीय मत्स्य निर्यात का अनुमान लगभग 41 करोड़ रुपये है, जो इस क्षेत्र के बढ़ते आर्थिक योगदान को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अलंकरणीय मत्स्य पालन भारत में एक उच्च संभावनाओं वाले क्षेत्र के रूप में उभर रहा है, जिसे समृद्ध जैव विविधता तथा घरेलू और वैश्विक मांग का समर्थन प्राप्त है।

पीएमएमएसवाई के अंतर्गत अब तक 1,986 बैकयार्ड अलंकरणीय मछली पालन इकाइयों, 6,018 फिश कियोस्क एवं एक्वेरियम, तथा 117 खुदरा बाजारों को सहायता प्रदान की गई है, जिनमें विशेष अलंकरणीय मछली एवं एक्वेरियम बाजार भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त पांच मीठे पानी के अलंकरणीय मछली ब्रूड बैंक और 199 एकीकृत अलंकरणीय मछली इकाइयां स्थापित की गई हैं, जिससे उत्पादन, विपणन और आजीविका के अवसरों को मजबूती मिली है।

भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने देशभर में 34 मत्स्य उत्पादन एवं प्रसंस्करण क्लस्टरों को अधिसूचित किया है, जिनमें तमिलनाडु के मदुरै में अलंकरणीय मत्स्य क्लस्टर भी शामिल है।

महाराष्ट्र का मत्स्य क्षेत्र समुद्री और अंतर्देशीय दोनों संसाधनों के कारण मजबूत स्थिति में है। राज्य की 877.97 किलोमीटर लंबी तटरेखा, 173 मत्स्य अवतरण केंद्र और 526 मत्स्य गांव 15 लाख से अधिक मत्स्यजीवियों को आजीविका प्रदान करते हैं। वर्ष 2022–23 में राज्य में लगभग 5.9 लाख टन मछली उत्पादन हुआ। अंतर्देशीय मत्स्य पालन 4.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है, जिसमें जलाशय, नदियां, तालाब और खारे पानी के क्षेत्र शामिल हैं। ब्लू रिवोल्यूशन और पीएमएमएसवाई जैसी योजनाओं के माध्यम से महाराष्ट्र ने मत्स्य पालन, हैचरी, केज कल्चर, बुनियादी ढांचे और मत्स्यजीवियों के कल्याण में उल्लेखनीय प्रगति की है।

यह दौरा अलंकरणीय मत्स्य क्षेत्र को और अधिक सशक्त एवं प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, क्योंकि इससे जमीनी स्तर का आकलन, हितधारकों की भागीदारी और लक्षित नीतिगत सहायता को बढ़ावा मिलेगा।

थाईलैंड में लघु-स्तरीय मत्स्य सम्मेलन में भारत की सक्रिय भागीदारी, डॉ. अभिलक्ष लिखी ने रखा पक्ष

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डॉ. अभिलक्ष लिखी सचिव, मत्स्य विभाग, भारत सरकार, ने 27 से 30 अप्रैल 2026 तक हुआ हिन में आयोजित 5वें विश्व लघु-स्तरीय मत्स्य कांग्रेस में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इस सम्मेलन का आयोजन Food and Agriculture Organization (FAO) और TBTI ग्लोबल द्वारा किया गया। सम्मेलन का विषय “न्यायपूर्ण समन्वय, युवा भविष्य और पुनर्योजी ज्ञान के लिए लघु-स्तरीय मत्स्य” रहा।

अपने संबोधन में डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि लघु-स्तरीय मत्स्य और जलीय कृषि सामाजिक-आर्थिक विकास, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा पर्यावरणीय संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जहां 19.7 मिलियन टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। साथ ही, आधुनिक तकनीक और निवेश के कारण समुद्री उत्पादों के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

उन्होंने सतत और ट्रेसएबल मत्स्य पालन, डिजिटल परिवर्तन तथा सामुदायिक भागीदारी आधारित दृष्टिकोण पर जोर दिया। साथ ही बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन (BOBP-IGO) के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की बात कही, जिसमें भारत वर्तमान में अध्यक्ष है।

डॉ. लिखी ने FAO द्वारा आयोजित एक पैनल चर्चा में भी भाग लिया, जिसमें राष्ट्रीय कार्ययोजना (NPOA-SSF) के माध्यम से लघु-स्तरीय मत्स्य क्षेत्र को सशक्त बनाने पर विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र खाद्य सुरक्षा, आजीविका, सांस्कृतिक पहचान और तटीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

चर्चा में यह बात सामने आई कि लघु-स्तरीय मछुआरों की संस्थागत और तकनीकी क्षमता बढ़ाना, वित्त और बुनियादी ढांचे तक पहुंच सुनिश्चित करना तथा नीति निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। साथ ही, सतत और समावेशी मत्स्य प्रबंधन के लिए सामुदायिक आधारित और पारिस्थितिकी तंत्र आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया।

वैश्विक स्तर पर लघु-स्तरीय मत्स्य क्षेत्र लगभग 90% मछुआरों को रोजगार देता है और कुल मछली उत्पादन का लगभग 40% योगदान करता है। एशिया में यह क्षेत्र करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है, लेकिन इसे जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी और औद्योगिक मत्स्य से प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत में लगभग 40 लाख समुद्री मछुआरे इस क्षेत्र से जुड़े हैं, जो मुख्यतः 12 समुद्री मील के भीतर कार्य करते हैं। सरकार द्वारा Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana (PMMSY) जैसी योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र को सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

भारत सरकार ने 2015 से अब तक मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र के विकास के लिए लगभग 39,272 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है। इन पहलों का उद्देश्य मछुआरों की आय बढ़ाना, संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करना और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।

यह सम्मेलन लघु-स्तरीय मत्स्य क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।

मत्स्य पालन विभाग ने नई दिल्ली में ‘सीफूड एक्सपोर्टर्स मीट 2026’ का किया आयोजन

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मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य पालन विभाग ने अंबेडकर भवन, नई दिल्ली में सीफूड एक्सपोर्टर्स मीट 2026 का आयोजन किया। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल और जॉर्ज कुरियन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए।

इस मीट का उद्देश्य सरकार और उद्योग के बीच संवाद स्थापित करना, निर्यातकों की समस्याओं को समझना तथा बाजार विस्तार, मूल्य संवर्धन और निर्यात बढ़ाने के उपायों पर चर्चा करना था।

प्रमुख बिंदु:

  • केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने निर्यातकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत के सीफूड निर्यात में मजबूत वृद्धि हुई है।

  • उन्होंने नए बाजारों की खोज, उत्पाद विविधीकरण और सख्त गुणवत्ता मानकों (जैसे एंटीबायोटिक प्रतिबंध और ट्रेसबिलिटी) के पालन पर जोर दिया।

  • अंडमान-निकोबार, EEZ और गहरे समुद्र में टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के निर्यात की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया।

  • बेहतर कोल्ड-चेन, पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई।

  • निर्यातकों को ₹1 लाख करोड़ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

अन्य महत्वपूर्ण बातें:

  • राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मत्स्य क्षेत्र को उच्च मूल्य और उच्च मांग वाले सेक्टर के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

  • सचिव डॉ. अभिलक्ष लिक्खी ने बताया कि लगभग 40 देशों के साथ मार्केट डाइवर्सिफिकेशन रणनीति पर काम किया जा रहा है।

  • रेडी-टू-ईट और वैल्यू एडेड उत्पादों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

चुनौतियां और सुझाव:

  • निर्यातकों ने मार्केट एक्सेस, उच्च अनुपालन लागत, कोल्ड-चेन की कमी और लॉजिस्टिक्स समस्याओं को प्रमुख चुनौतियां बताया।

  • कैच सर्टिफिकेट प्रक्रिया को सरल बनाने, समुद्री शैवाल (सीवीड) खेती को बढ़ावा देने और फिश फीड उत्पादन में सुधार की मांग उठाई गई।

पृष्ठभूमि:

  • भारत का सीफूड निर्यात पिछले 11 वर्षों में औसतन 7% वार्षिक वृद्धि के साथ बढ़ा है।

  • 2013-14 में ₹30,213 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹62,408 करोड़ हो गया।

  • झींगा (श्रिम्प) निर्यात का इसमें सबसे बड़ा योगदान है।

  • भारत लगभग 130 देशों में 350 से अधिक उत्पाद निर्यात करता है।

यह बैठक भारत के सीफूड निर्यात को और मजबूत करने तथा वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

PMMSY के तहत सिरसा में खारे पानी की झींगा पालन क्लस्टर की समीक्षा, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

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सिरसा (हरियाणा)- भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के तहत मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने आज हरियाणा के सिरसा जिले का दौरा कर प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत विकसित खारे पानी (Saline Water) एक्वाकल्चर क्लस्टर की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने झींगा (श्रिम्प) और मछली किसानों से संवाद कर जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं और चुनौतियों को समझा।

डॉ. लिखी ने किसानों को संबोधित करते हुए तकनीक आधारित झींगा पालन, वैज्ञानिक तालाब प्रबंधन और मजबूत बायो-सिक्योरिटी उपायों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिरसा जैसे खारे पानी वाले क्षेत्र झींगा पालन के लिए बेहद उपयुक्त हैं और इससे किसानों की आय में विविधता, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने MPEDA को किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने और निर्यात से जोड़ने के निर्देश भी दिए। साथ ही, स्थानीय स्तर पर परीक्षण किट की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया ताकि किसानों को दूर नहीं जाना पड़े।

चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय (CDLU) में आयोजित एक समीक्षा बैठक में PMMSY के तहत क्लस्टर आधारित मत्स्य विकास योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। इस बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी, ICAR के वैज्ञानिक, NABARD, NFDB, MPEDA, मत्स्य किसान, सहकारी संस्थाएं और देशभर के प्रतिनिधि शामिल हुए। 500 से अधिक प्रतिभागियों ने बैठक में हिस्सा लिया। किसानों ने इस दौरान बिजली की ऊंची लागत, गुणवत्तापूर्ण बीज की कमी और पानी की उपलब्धता जैसी समस्याएं उठाईं और पंचायत भूमि को स्वयं सहायता समूहों को लीज पर देने की मांग की।

डॉ. लिखी ने सिरसा के रघुआना गांव में PMMSY के तहत विकसित एक सफल झींगा फार्म का भी दौरा किया। करीब 3 हेक्टेयर में फैले 7 तालाबों वाले इस फार्म से सालाना 28 टन उत्पादन हो रहा है, जिससे लगभग ₹90 लाख का कारोबार और स्थानीय रोजगार सृजन हो रहा है। उन्होंने कहा कि झींगा पालन के विस्तार के लिए बेहतर बीज, फीड, बुनियादी ढांचा और बाजार तक पहुंच को मजबूत करना जरूरी है।

हरियाणा ने PMMSY के तहत उल्लेखनीय प्रगति की है, जहां ₹760.88 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ है। राज्य में 456 RAS और बायोफ्लॉक सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जबकि 3,766 हेक्टेयर तालाब और 2,204 हेक्टेयर खारे क्षेत्र में विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसके अलावा, सिरसा में ₹110 करोड़ का एकीकृत एक्वापार्क स्थापित किया जा रहा है और कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जा रहा है।

भारत का झींगा निर्यात समुद्री उत्पादों का प्रमुख हिस्सा है, जो कुल निर्यात का लगभग 69% है। देश का समुद्री निर्यात पिछले दशक में दोगुना होकर ₹62,408 करोड़ तक पहुंच गया है, जिसमें झींगा का योगदान ₹43,334 करोड़ है।

देश में 34 मत्स्य क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें सिरसा का खारा पानी क्लस्टर एक प्रमुख उदाहरण है। यह क्लस्टर झींगा, स्कैम्पी और सीबास जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा दे रहा है।

भारत का अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, जो कुल उत्पादन का 75% योगदान देता है। 2013-14 से 2024-25 के बीच उत्पादन 61 लाख टन से बढ़कर 153 लाख टन हो गया है। देश के विशाल जल संसाधनों को देखते हुए मत्स्य पालन क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं, जिसे सरकार प्राथमिकता दे रही है।

निष्कर्ष: सिरसा का यह मॉडल दर्शाता है कि सही नीति, तकनीक और सहयोग के जरिए खारे और अनुपयोगी क्षेत्रों को भी आय और रोजगार के मजबूत स्रोत में बदला जा सकता है।

भारत के सीफूड निर्यात में 11 वर्षों में दोगुनी बढ़ोतरी, झींगा निर्यात बना प्रमुख आधार

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भारत के समुद्री उत्पाद (सीफूड) निर्यात में पिछले 11 वर्षों में मजबूत और निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान निर्यात में औसतन 7% की वार्षिक वृद्धि हुई है। वर्ष 2013-14 में ₹30,213 करोड़ के मुकाबले 2024-25 में यह बढ़कर ₹62,408 करोड़ हो गया है, जिसमें प्रमुख योगदान झींगा (श्रिम्प) निर्यात का रहा, जिसकी कीमत ₹43,334 करोड़ रही।

भारत का सीफूड निर्यात काफी विविध है, जिसमें 350 से अधिक उत्पादों की किस्में शामिल हैं और ये लगभग 130 देशों में भेजे जाते हैं। 2024-25 में कुल निर्यात मूल्य का 36.42% हिस्सा अमेरिका को गया, जो सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। इसके बाद चीन, यूरोपीय संघ, दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान और मध्य-पूर्व प्रमुख गंतव्य हैं।

निर्यात में फ्रोजन श्रिम्प का दबदबा बना हुआ है, इसके बाद फ्रोजन मछली, स्क्विड, सूखे उत्पाद, कटलफिश, सुरिमी आधारित उत्पाद और जीवित व चिल्ड सीफूड का स्थान है। साथ ही, वैल्यू-एडेड उत्पादों की हिस्सेदारी 2.5% से बढ़कर 11% हो गई है, जिसकी निर्यात कीमत 742 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है।

सरकार सीफूड निर्यात में विविधता लाने और वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत मछली उत्पादन, ब्रैकिश वाटर एक्वाकल्चर का विस्तार, नई तकनीकों को अपनाने, रोग प्रबंधन और ट्रेसबिलिटी सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही कोल्ड-चेन नेटवर्क, आधुनिक मछली बंदरगाह और फिश लैंडिंग सेंटर विकसित किए जा रहे हैं।

उच्च मूल्य वाली प्रजातियों जैसे टूना, सीबास, कोबिया, पोम्पानो, मड क्रैब, GIFT तिलापिया, ग्रूपर और टाइगर श्रिम्प के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भारत के निर्यात उत्पादों का दायरा और बढ़ सके।

अंतरराष्ट्रीय मानकों और नियमों के अनुरूप बनने के लिए भारत ने कई कदम उठाए हैं। अमेरिका के मरीन मैमल प्रोटेक्शन एक्ट (MMPA) के तहत आवश्यक शर्तों को पूरा करते हुए भारत को 2025 में मंजूरी मिली, जिससे अमेरिकी बाजार में निर्यात जारी रहेगा। साथ ही, टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (TEDs) के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

व्यवसाय को आसान बनाने के लिए सैनिटरी इम्पोर्ट परमिट (SIP) प्रणाली को डिजिटल कर दिया गया है, जिससे मंजूरी का समय 30 दिनों से घटकर 72 घंटे रह गया है। कुछ उत्पादों के लिए SIP की आवश्यकता भी समाप्त कर दी गई है, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिला है।

आने वाले पांच वर्षों में सरकार का लक्ष्य उच्च मूल्य वाले उत्पादों का निर्यात बढ़ाना, नए बाजारों तक पहुंच बनाना और गुणवत्ता मानकों को मजबूत करना है। यूके, यूरोपीय संघ, आसियान और पश्चिम एशिया जैसे बाजारों में विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इन प्रयासों के साथ भारत वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद और प्रीमियम सीफूड निर्यातक के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

डॉ. अभिलक्ष लिंखी ने फतेहगढ़ साहिब, पंजाब में मछली पालन और आधुनिक मत्स्य परियोजनाओं का किया अवलोकन

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आज केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिंखी ने पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले का दौरा किया और मछली किसानों एवं मत्स्य उद्यमियों से Recirculatory Aquaculture Systems (RAS) और झींगा पालन से जुड़ी समस्याओं और चुनौतियों पर चर्चा की।

डालुतपुर गांव, बसी पठाना में आधुनिक RAS सुविधाओं का दौरा करते हुए, डॉ. लिंखी ने प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के अंतर्गत चल रही मत्स्य परियोजनाओं और गतिविधियों की समीक्षा की। उन्हें स्थानीय किसानों द्वारा अपनाई गई नवीनतम प्रथाओं के बारे में जानकारी दी गई, जिनकी मदद से बंजर भूमि को उत्पादक मत्स्य पालन केंद्र में बदलकर रोजगार और आजीविका के अवसर उत्पन्न किए गए हैं। इस बातचीत में लगभग 35–40 प्रगतिशील मछली किसान शामिल हुए और अपने अनुभव एवं सुझाव साझा किए।

डॉ. लिंखी ने प्रौद्योगिकी-संचालित मछली पालन, किसानों की क्षमता निर्माण और विविध प्रजातियों के पालन के महत्व पर जोर दिया ताकि आय में वृद्धि हो और ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ हो। उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार प्रधान मत्स्य योजनाओं के तहत आधुनिक मत्स्य पालन प्रथाओं को बुनियादी ढांचा, नवाचार और क्षमता संवर्धन के माध्यम से समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

 इस दौरे ने यह भी रेखांकित किया कि सरकार पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में खारी जल मत्स्य पालन को प्राथमिकता दे रही है। ये क्षेत्र, जो अक्सर कृषि क्षेत्रों से खारी जल के प्रभाव से प्रभावित होते हैं, मत्स्य पालन के माध्यम से भूमि उपयोग अनुकूलन के लिए अद्वितीय अवसर प्रदान करते हैं।

पृष्ठभूमि –

भारत के अंतर्देशीय जल संसाधनों की संभावना विशाल और अधिकांशतः अछूती है। देश में 1.95 लाख किलोमीटर नदियाँ और नहरें, 6.06 लाख हेक्टेयर खारी जल क्षेत्र, 3.65 लाख हेक्टेयर तालाब और ओक्सबो झीलें, 27.56 लाख हेक्टेयर टैंक और तालाब तथा 31.53 लाख हेक्टेयर जलाशय हैं। इससे सतत अंतर्देशीय मत्स्य विकास की अपार संभावनाएँ हैं।

भारत की अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन राष्ट्रीय मत्स्य उत्पादन का 75% योगदान देता है। 2024–25 में अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन 139.07 लाख मीट्रिक टन रहा। 2013–14 से 2024–25 के बीच अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन में 142% वृद्धि हुई, जो 61 लाख टन से बढ़कर 147.37 लाख टन हो गया। इस विस्तार ने भारत के कुल राष्ट्रीय मत्स्य उत्पादन को 195 लाख टन तक बढ़ा दिया।

प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत भारत में ₹3,300 करोड़ का निवेश किया गया है, जिससे 12,000 RAS यूनिट्स, 4,000 बायोफ्लॉक सिस्टम्स, 59,000 पिंजरे और 561 हेक्टेयर पेन बनाए गए हैं। इससे राष्ट्रीय औसत मत्स्य पालन उत्पादकता 4.77 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है।

पंजाब में प्रगति:

PMMSY के तहत पंजाब में ₹187 करोड़ का निवेश हुआ, जिसमें केंद्र का हिस्सा ₹72 करोड़ है। राज्य का मत्स्य उत्पादन लक्ष्य 2.21 लाख टन है, जबकि 2023–24 में वास्तविक उत्पादन 1.84 लाख टन रहा। आधुनिक मत्स्य पालन प्रथाओं के माध्यम से पिछले पांच वर्षों में किसानों की आय में लगभग ₹500 करोड़ की वृद्धि हुई और 2020–21 से मत्स्य उत्पादन में 35,000 टन की बढ़ोतरी हुई।

खारी जल मत्स्य पालन:

हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में 2024–25 के लिए 263.80 हेक्टेयर क्षेत्र में खारी जल मत्स्य पालन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिसमें ₹36.93 करोड़ का बजट आवंटित किया गया, जो प्रारंभिक लक्ष्य 200 हेक्टेयर से अधिक है। मुक्तसर साहिब (पंजाब) और सिरसा (हरियाणा) में खारी जल मत्स्य पालन क्लस्टर की स्वीकृति और अधिसूचना महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं। इसके अलावा, हरियाणा के सिरसा, पंजाब के मुक्तसर और राजस्थान के चूरू जिलों में खारी जल क्लस्टर के विकास के लिए अधिसूचना जारी की गई है।

झोपड़ियों से स्वयं सहायता समूहों तक: गोवा की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करते जीएसटी सुधार

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 परिचय

अपनी सुसेगाद भावना के लिए प्रसिद्ध, गोवा की अर्थव्यवस्था पर्यटन, पारंपरिक उद्योगों और आधुनिक उद्यमों के जीवंत मिश्रण पर आधारित है। अकेले पर्यटन ही गोवा के जीएसडीपी का करीब 16% है, जबकि फार्मास्यूटिकल्स,  मत्स्य पालन, काजू प्रसंस्करण और हस्तशिल्प इसके कस्बों और गाँवों में असंख्य आजीविकाओं को सहारा देते हैं।

हाल ही में किए गए जीएसटी सुधारों से इस विविध अर्थव्यवस्था क सही वक्त पर बढ़ावा मिला है, जिससे सामर्थ्य में वृद्धि हुई हैइनपुट लागत में कमी आई है और विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ी है।

पर्यटन एवं परिवहन उद्योग

पर्यटन और आतिथ्य

नई जीएसटी दरों से गोवा के मज़बूत पर्यटन तथा आतिथ्य उद्योग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद हैजिसमें उत्तरी गोवा के तटीय क्षेत्र जैसे कलंगुटकैंडोलिमबागा और अंजुनापणजी और दक्षिण गोवा के कोल्वाबेनौलिम और पालोलेम क्षेत्र शामिल हैं।

मार्च 2025 तकइस क्षेत्र में करीब 2.5 लाख लोग कार्यरत थेजो गोवा के कुल कार्यबल का लगभग 40% है। पर्यटन राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपीमें 16.43% का योगदान देता हैजिससे यह स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक मज़बूत चालक बन जाता है।

जीएसटी दरों में कटौती से इनपुट लागत में खासी कमी आने की उम्मीद है। टॉयलेटरीज़टेबलवेयर और नाश्ते के सामान जैसी सामान्य सुविधाओं के 18% से घटकर 5% की श्रेणी में आने से इनकी कीमतों में करीब 11% की कमी आने की संभावना है। इसके अलावापहले से पैक किया हुआ नारियल पानी और इसी तरह की अन्य वस्तुओं के भी 12% से 5% की श्रेणी में आने से इनकी कीमतें लगभग 6.25% सस्ती हो सकती हैं। ये सुधार सामूहिक रूप से परिचालन लागत को कम करते हैं और गोवा की पर्यटन मूल्य श्रृंखला में सामर्थ्य को बढ़ाते हैं।

रेस्टोरेंट और पेय पदार्थों के कियोस्क

गोवा में रेस्टोरेंट और पेय पदार्थ कियोस्कजिनमें बीच शैककैफ़े और जूस स्टॉल शामिल हैंफलों के रस पर जीएसटी की दर 12% से घटकर 5% होने से लाभान्वित होंगे। करीब 8,000 लोगों को रोजगार देने वाले इस क्षेत्र में शैक विक्रेताफलों के रस विक्रेता और छोटे कियोस्क संचालक शामिल हैंजो दैनिक पर्यटकों की आमद पर बहुत अधिक निर्भर हैं।

जीएसटी में कटौती से लागत में करीब 6.25% की कमी आने की उम्मीद हैजिससे उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता बढ़ेगी। इससे छोटे विक्रेताओं की बिक्री बढ़ेगी और स्थानीय उद्यमियों की आय में भी सुधार होगा।

ऑटो/टैक्सी और बाइक-रेंटल व्यवस्था

गोवा में ऑटोटैक्सी और बाइक-रेंटल व्यवस्था को भी हाल ही में हुए जीएसटी सुधारों से लाभ होने की उम्मीद हैजिसके तहत छोटी कारों (1200 सीसी) और बाइक (350 सीसी) पर कर की दर 28% से घटाकर 18% कर दी गई है। यह बदलाव हवाई अड्डोंरेलवे स्टेशनों और तटीय क्षेत्रों में संचालित टैक्सी यूनियनों और रेंटल फर्मों पर सीधा असर डालता है। यह क्षेत्र लगभग 40,000 लोगों की आजीविका का साधन हैजिनमें टैक्सी चालकबाइक किराए पर देने वाले और मैकेनिक शामिल हैंजो आम तौर पर स्व-नियोजित हैं और पर्यटकों की मांग पर निर्भर हैं।



वित्त वर्ष 2023-24 के दौरानऑटोटैक्सी और किराये के परिवहन खंड ने गोवा के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपीमें लगभग 2% का योगदान दिया। जीएसटी दर में कटौती के साथऑन-रोड टैक्स घटक में वाहन की अंतिम कीमत में करीब 7.8% की कमी आने की उम्मीद है। वित्तीय लाभ इस सामर्थ्य को और बढ़ाते हैंस्थानीय ऑपरेटरों की मदद करते हैंसाथ ही पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए परिवहन की सुलभता में सुधार करते हैं।

फार्मास्युटिकल फ़ॉर्मूलेशंस और डायग्नोस्टिक्स

फार्मास्युटिकल फ़ॉर्मूलेशंस और डायग्नोस्टिक्स क्षेत्र वर्नापिलेर्नकुंडैमकॉर्लिमबिचोलिम और पोंडा औद्योगिक क्षेत्रों में केंद्रित हैजिसे मोरमुगाओ बंदरगाह के ज़रिए रसद द्वारा समर्थन दिया जाता है। इसमें कुशल रसायनज्ञप्रयोगशाला तकनीशियनकार्यशाला कर्मचारी और क्यूसी कर्मचारी कार्यरत हैंजिनमें प्रवासी और स्थानीय दोनों प्रकार के कार्यबल फ़ॉर्मूलेशंस और आईवीडी इकाइयों में स्थिर नौकरियों पर निर्भर हैं।

2022 तकइस उद्योग ने 75,000 से अधिक लोगों को रोजगार दियाजो राज्य के कुल कारखाना कर्मचारियों का 22.5% है। यह क्षेत्र भारतीय डायग्नोस्टिक्स बाजार के साथ-साथ एशिया और अफ्रीका के निर्यात खरीदारों के साथ भी कार्यरत है। 2023-24 मेंगोवा के कुल व्यापारिक निर्यात में दवाओं और फार्मास्यूटिकल्स का योगदान 51% था।

संशोधित जीएसटी दरों के बादकई इनपुट और सेवाओं पर कर 18% से घटाकर 5% कर दिया गया हैजबकि कुछ चिकित्सा वस्तुओं पर कर शून्य हो गया है। इन संशोधनों से कीमतों में लगभग 11% की कमी आने की उम्मीद हैजबकि प्रयोगशालाओं में इस्तेमाल होने वाली किताबें और स्टेशनरी जैसी शून्य दर वाली वस्तुएं करीब 4.8% सस्ती होने की उम्मीद है। इन बदलावों से गोवा के फार्मास्युटिकल इकोसिस्टम में सामर्थ्य और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की उम्मीद है।

निर्माण एवं रियल एस्टेट इनपुट

गोवा में निर्माण और रियल एस्टेट क्षेत्र को हाल ही में हुए जीएसटी सुधारों से काफी लाभ हुआ हैजिसके तहत सीमेंट पर कर की दर 28% से घटाकर 18% कर दी गई हैसाथ ही कई अन्य सामग्रियों पर भी कर में कटौती की गई है। इन सुधारों से उत्तर और दक्षिण गोवा में रियल एस्टेट और होटल परियोजनाओं के साथ-साथ बुनियादी ढाँचे और होमस्टे विकास को भी लाभ हुआ है। इस क्षेत्र में लगभग 35,000 लोग कार्यरत हैंजिनमें दिहाड़ी राजमिस्त्रीप्लंबरइलेक्ट्रीशियन और बढ़ई शामिल हैं। 2023-24 में निर्माण और रियल एस्टेट ने मिलकर गोवा के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपीमें लगभग 13.4% का योगदान दिया।

कम जीएसटी दरें, डेवलपर्स और बिल्डरों के लिए इनपुट लागत को सीधे कम करती हैंजिससे आवासीय और व्यावसायिक दोनों परियोजनाओं के लिए मार्जिन और सामर्थ्य में सुधार होता है। अकेले सीमेंट पर दर में 28% से 18% की कमी सेउसी एक्स-फैक्ट्री दर पर कीमतों में लगभग 7.8% की कमी आने का अनुमान हैजिसके नतीजतन प्रति बैग लगभग 25-30 रुपए की बचत होगी।

मत्स्य पालन और समुद्री खाद्य उद्योग

गोवा में मत्स्य पालन और समुद्री खाद्य मूल्य श्रृंखलाजो खारीवाड़ा (वास्को)कटबोना (बेतुल)तलपोनामालिमचापोरा और कोरटालिम के केंद्र में हैअब 5% की कम जीएसटी दर का लाभ उठा रही है। गोवा के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में लगभग 2.5% का योगदान देने वाला यह उद्योग, नाव चालक दलछोटे पैमाने के मछुआरोंप्रवासी डेकहैंड्सनीलामकर्ताओं और महिला विक्रेताओं को आजीविका प्रदान करता हैऔर कई तटीय परिवार मौसमी मछली पकड़ने पर निर्भर रहते हैं। 2016 मेंइस क्षेत्र में करीब 15,000 लोग कार्यरत थे।

जीएसटी सुधारों ने इनपुट सामग्री और समुद्री खाद्य उत्पादोंदोनों को कवर करते हुएसंपूर्ण मूल्य श्रृंखला में राहत प्रदान की है। जालचारा और जलीय कृषि इनपुट पर जीएसटी घटाकर 5% करने से, उत्पादन लागत में कमी आने और लाभ मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। जिन वस्तुओं पर पहले 12% और 18% कर लगता थाअब उन पर केवल 5% कर लगता हैजिससे उपभोक्ता कीमतों में क्रमशः लगभग 6.25% और 11% की अनुमानित कमी आई है।

इससे मडगांव और वास्को में फ्रोजन मछली और झींगा निर्यातकों को सीधे तौर पर लाभ होगाऔर अमेरिकायूरोपीय संघ और जापान सहित स्थानीय और वैश्विक बाजारों में निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता लाने में मदद मिलेगी।

बेकरी और पैकेज्ड फ़ूड



गोवा के बेकरी और पैकेज्ड फ़ूड सेक्टरजिसमें पेस्ट्रीबिस्कुटनमकीनपास्तानूडल्स और चॉकलेट शामिल हैंको जीएसटी दर 12%/18% से घटाकर 5% करने से काफ़ी फ़ायदा होगा। इस कटौती से उत्पादों की कीमतों में लगभग 6.25-11% की कमी आने की उम्मीद हैजिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकोंदोनों के लिए सामान खरीदना आसान हो जाएगा।

यह उद्योग मुख्यतः राज्य भर में फैली छोटी बेकरियों पर आधारित हैजिनके प्रमुख बाज़ार मापुसा और मडगांव में हैं। यह बेकरी मालिकोंपेस्ट्री शेफ़पैकर्स और डिलीवरी कर्मचारियों सहित करीब 3,000 लोगों के विविध कार्यबल को बनाए रखता है।

कम जीएसटी दर से एमएसएमई बेकरियों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़नेबिक्री को बढ़ावा मिलने और लाभ मार्जिन में सुधार होने की उम्मीद हैखासकर पर्यटकों को उपहार देने और निर्यात करने वाले छोटे उद्यमों के लिए।

कृषि तथा बागवानी

गोवा काजू

सत्तारीबिचोलिमक्यूपेम और संगुएम प्रसंस्करण समूहों में फैले गोवा काजू उद्योग को काजू की गुठली और मूल्यवर्धित उत्पादों पर जीएसटी में कमी का लाभ मिला है, क्योंकि कुछ मेवों और राशन के सामान पर जीएसटी की दरें 12%/18% से घटाकर 5% कर दी गई हैं। इस क्षेत्र में करीब 18,500 लोग कार्यरत हैंजिनमें किसानकाजू बीनने वालेअखरोट छीलने वाले (मुख्यतः महिलाएँ) और प्रसंस्करणकर्ता शामिल हैं और कई परिवार मौसम आधारित मजदूरी चक्रों पर निर्भर हैं। यह उद्योग संयुक्त अरब अमीरातअमेरिका और यूरोपीय संघ सहित घरेलू खुदरा और निर्यात दोनों बाजारों में अपनी सेवाएँ प्रदान करता है।

जीएसटी सुधार से लागत कम हुई हैजिससे गोवा के काजू उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी हो गए हैं। मूल्यवर्धित वस्तुएँजिन पर 18% कर लगता थाअब 5% कर दिया गया हैजैसे चॉकलेट और कॉफ़ी से बनी वस्तुएँउनके खुदरा मूल्य में लगभग 11% की गिरावट आने की उम्मीद है। इसके अलावाफल या मेवे के पेस्ट जैसी वस्तुएँजिन पर पहले 12% कर लगता थाकरीब 6.25% सस्ती हो सकती हैंजिससे उनकी सामर्थ्य और लाभ में सुधार होगा।

गोवा काजू फेनी

गोवा का जीआई-टैग प्राप्त काजू फेनीराज्य में सांस्कृतिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टि से अहम है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से कुन्कोलिमसंवोर्देम और क्यूपेम में केंद्रित हैजहाँ ताड़ी निकालने वालेछोटे पैमाने के डिस्टिलर और बोतल बनाने वाले इस कला को आगे बढ़ाते हैं।

हालाँकि शराब को जीएसटी से बाहर रखा गया हैलेकिन पैकेजिंग सामग्री पर कर में कमी से इस उद्योग को भी लाभ होगा। इससे उद्योग के पैकेजिंग क्षेत्र में कार्यरत लगभग 2,000 लोगों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है। जीएसटी को 18% से घटाकर 5% करने से पैकेजिंग लागत लगभग 11% कम होने की उम्मीद है।

हालाँकि यह पेय ज़्यादातर गोवा में ही बेचा जाता हैजिस पर राज्य उत्पाद शुल्क लगता हैपैकेजिंग सामग्री की कम लागत से लाभप्रदता में सुधार होने और गोवा की अनूठे फेनी व्यवस्था में योगदान देने वाले छोटे डिस्टिलर्स और स्थानीय उद्यमों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

खोला मिर्च

खोला मिर्च एक जीआई-टैग वाला उत्पाद है, जिसकी खेती और प्रसंस्करण कैनाकोना (खोला) के मसाला बाज़ारों और कॉटेज सॉस इकाइयों में किया जाता है। इस क्षेत्र में छोटे किसानमसाला पीसने वाले और कुटीर उद्योग प्रसंस्करणकर्ता शामिल हैंजो करीब 1,000 परिवारों या करीब 3,000 लोगों को रोजगार देते हैं। यह उत्पाद मुख्य रूप से घरेलू खुदरा बाज़ारों और विदेशों में प्रवासी स्टोरों को सेवा प्रदान करता है।

कृषि उत्पाद के रूप में बेची जाने वाली कच्ची खोला मिर्चजीएसटी से मुक्त है। नए सुधारों के तहतसॉस और अचार जैसे प्रसंस्कृत उत्पादों पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे शेल्फ कीमतों में लगभग 11% की कमी आने की उम्मीद है। कर में कमी से प्रतिस्पर्धात्मकता में इजाफा होगाबाजार पहुँच का विस्तार होगा और लाभ मार्जिन में सुधार होगा।

हरमल (पेरनेम) मिर्च

जीआई-टैग वाली हरमल (पेरनेम) मिर्चजो पेरनेम के हरमल-अरम्बोल क्षेत्र में उगाई जाती हैगोवा की मसाला और सॉस मूल्य श्रृंखला का हिस्सा है। इस क्षेत्र में छोटे किसानोंमसाला पीसने वालों और कुटीर उद्योग प्रसंस्करणकर्ताओं सहित करीब 500 लोग कार्यरत हैं।

यह उत्पाद विशेष खुदरा विक्रेताओं और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए बेचा जाता है। प्रसंस्कृत मसाला उत्पादों पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% करने से लागत में करीब 11% की कमी आने का अनुमान है। इस दर परिवर्तन से छोटे पैमाने के प्रसंस्करणकर्ताओं के लिए उत्पादन और खुदरा लागत कम हो जाती हैजिससे बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा और बेहतर सामर्थ्य संभव होता है।

मिंडोली (मोइरा) केला

मोइरा (बारदेज़) और आसपास के इलाकों में उगाया जाने वाला मिंडोली (मोइरा) केला, एक जीआई-टैग्ड कृषि उत्पाद है, जिसका उपयोग केले के चिप्स और मिठाइयाँ बनाने में किया जाता है। करीब 1,000 लोग इसकी खेती में लगे हुए हैं और इस क्षेत्र में बागवानमहिलाओं द्वारा संचालित स्नैक बनाने वाली इकाइयाँ और चिप्स बनाने वाली इकाइयाँ शामिल हैं।

इसके प्राथमिक बाज़ार में पर्यटन खुदरा दुकानें और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म शामिल हैं। नई 5% जीएसटी दर से पैकेज्ड केला-आधारित उत्पादों की कीमतों में करीब 6.25% कटौती होने की उम्मीद है। इस दर में कटौती से इस क्षेत्रीय विशेषता के संरक्षण में लगे छोटे उद्यमों और महिलाओं द्वारा संचालित इकाइयों को लाभ होगा।

अगसेची वैयिंगिम (अगासैम बैंगन)

अगासैम (तिस्वाड़ी) में उगाया जाने वाला अगसेची वैयिंगिम (अगासैम बैंगन) एक जीआई-टैग्ड उत्पाद है, जिसका उपयोग अचार और सॉस बनाने में किया जाता है। इस क्षेत्र में रसोई-बागान के किसान और महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूह शामिल हैं, जो अचार और निर्जलित मिश्रण बनाने में लगे हुए हैं। यह क्षेत्र लगभग 300 लोगों को रोजगार देता हैजो मुख्य रूप से विशिष्ट खुदरा बाजारों के लिए कार्य करता है।

प्रसंस्कृत उत्पादों पर जीएसटी दर 18% से घटाकर 5% करने से अचार और सॉस की कीमतों में लगभग 11% की गिरावट आने की उम्मीद हैजिससे छोटे उत्पादकों को लाभ होगा और स्थानीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा।

सत शिरो भेनो (स्थानीय भिंडी)

गोवा की स्थानीय भिंडी किस्मसत शिरो भेनोतिस्वाड़ी और बर्देज़ के किचन गार्डन और उपनगरीय खेतों में उगाई जाती है। इस क्षेत्र में लगभग 300 लोग कार्यरत हैंजो छोटे किसानों और महिलाओं द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को सहायता प्रदान करते हैं।

यह उत्पाद मुख्य रूप से घरेलू विशिष्ट दुकानों और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए बेचा जाता है। प्रसंस्कृत किस्मों पर जीएसटी 18%/12% से घटाकर 5% करने से कीमतों में लगभग 6.25% की गिरावट आने की उम्मीद हैजिससे लागत कम होगी और छोटे उत्पादकों को होने वाले लाभ में सुधार होगा।

निष्कर्ष

जीएसटी दरों में होने वाले सुधार, गोवा की विविध अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के लिए तैयार हैंजो फार्मास्यूटिकल्स और मत्स्य पालन से लेकर पर्यटननिर्माण और कृषि तककरीब हर उत्पादक क्षेत्र को प्रभावित करेगा। कर दरों को युक्तिसंगत बनाकरइन सुधारों ने सभी उद्योगों में लागत बचतप्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि और उपभोग को बढ़ावा दिया है।

कुल मिलाकरये बदलाव न केवल उपभोक्ताओं के लिए मूल्य राहत प्रदान करते हैंबल्कि ग्रामीण और शहरी उद्योगों के विकास को भी बढ़ावा देते हैं। भारत के सबसे अधिक पर्यटन-प्रधान राज्यों में से एक होने के नातेगोवा की अर्थव्यवस्था को जीएसटी 2.0 से महत्वपूर्ण लाभ होने की उम्मीद है।

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