Media24Media.com: भारत-कोरिया साझेदारी से शिपबिल्डिंग क्षेत्र में कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

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भारत-कोरिया साझेदारी से शिपबिल्डिंग क्षेत्र में कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

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भारत की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) ने 2 अप्रैल 2026 को कोरिया इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (KOICA) के साथ एक कार्यान्वयन योजना (Plan of Implementation) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता भारतीय शिपबिल्डिंग क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए किया गया है।

यह परियोजना ‘Maritime Amrit Kaal Vision 2047’ के तहत निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप है। ‘Support the Establishment of Development Strategies and to Build a Foundation for Skilled and Professional Talents for the Indian Shipbuilding and Marine Sector’ नामक इस पहल का उद्देश्य भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब के रूप में स्थापित करना है।

इस सहयोग के तहत KOICA, कोरिया रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग सहित अन्य संस्थाओं के सहयोग से भारत के शिपबिल्डिंग और मरीन इंजीनियरिंग क्षेत्र का व्यापक अध्ययन करेगा। इसमें कार्यबल का आकलन, कौशल अंतर (स्किल गैप) की पहचान और मानव संसाधन विकास के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह साझेदारी भारत के समुद्री क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपने समुद्री क्षेत्र को आर्थिक विकास और रणनीतिक मजबूती के प्रमुख स्तंभ के रूप में विकसित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से एक नई पीढ़ी के कुशल और तकनीकी रूप से सशक्त समुद्री पेशेवर तैयार किए जाएंगे, जो भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

परियोजना के तहत भारत और कोरिया में संयुक्त कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिसमें उद्योग विशेषज्ञ, नीति निर्माता और शिक्षाविद भाग लेंगे। इससे दोनों देशों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा, भारत में ‘शिपबिल्डिंग वर्कफोर्स डेवलपमेंट एंड टेक्नोलॉजी कोऑपरेशन सेंटर’ की स्थापना पर भी अंतिम चरण की चर्चा चल रही है। यह केंद्र व्यावसायिक प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यह पहल भारत को वैश्विक स्तर पर शिपबिल्डिंग और समुद्री सेवाओं के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है और आत्मनिर्भर समुद्री क्षेत्र के निर्माण की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

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