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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से जापान के प्रतिनिधिमंडल की सौजन्य मुलाकात: निवेश, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विस्तार को लेकर हुई विस्तृत चर्चा

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जापान से आए प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। 

मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत करते हुए छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक विकास और तकनीकी सहयोग के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। 

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर अपने जापान प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार की उद्योगोन्मुखी और निवेश प्रोत्साहनकारी नीतियों के कारण छत्तीसगढ़ वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जापान तकनीकी दृष्टि से अग्रणी देश है और वहां की उन्नत विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के निवेश और सहयोग से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

जापान से आए प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ सरकार की नई औद्योगिक नीति की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में निवेश के लिए अनुकूल और पारदर्शी वातावरण तैयार हुआ है, जिससे उद्योगों के विस्तार के लिए बेहतर संभावनाएं उपलब्ध हो रही हैं। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश में अपने निवेश को और बढ़ाने की इच्छा भी व्यक्त की।

इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, एफसेनल के डायरेक्टर युकीहिरो मोमोसे, कोनोइके ट्रांसपोर्ट के एक्जीक्यूटिव ऑफिसर तोशीहीरो फूजीवारा, एफएसएनएल के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील कुमार दीक्षित तथा हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के पूर्व सीएमडी के. डी. दीवान उपस्थित थे।

आईएनएस त्रिकंड की केन्या यात्रा संपन्न, भारत-केन्या नौसैनिक सहयोग हुआ मजबूत

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भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंड ने 10 अप्रैल 2026 को केन्या के मोम्बासा बंदरगाह पर अपनी यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की।

यह पोर्ट कॉल पश्चिमी नौसेना कमान के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की केन्या यात्रा के साथ हुआ। इस दौरान एक औपचारिक समारोह में INSAS राइफल और गोला-बारूद केन्या नौसेना को सौंपे गए।

प्रमुख गतिविधियां:

  • छोटे हथियारों की हैंडलिंग और मेंटेनेंस प्रशिक्षण

  • VBSS (Visit, Board, Search and Seizure) अभ्यास

  • क्रॉस-डेक विजिट और संयुक्त अभ्यास

  • सामुदायिक सेवा और खेल प्रतियोगिताएं

  • योग सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम

आईएनएस त्रिकंड के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी ने केन्या नौसेना के अधिकारियों से मुलाकात कर सहयोग को और मजबूत किया।

महत्व:

यह यात्रा भारत के MAHASAGAR विजन (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) को दर्शाती है। इससे भारत और केन्या के बीच नौसैनिक सहयोग, मित्रता और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलेगी।



भारत-उज़्बेकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक-7’ के लिए भारतीय दल रवाना

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भारतीय सेना का दल आज भारत-उज़्बेकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक’ (Exercise DUSTLIK) के 7वें संस्करण में भाग लेने के लिए रवाना हुआ। यह अभ्यास 12 से 25 अप्रैल 2026 तक उज़्बेकिस्तान के नामंगन स्थित गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में आयोजित किया जाएगा।

यह अभ्यास हर वर्ष भारत और उज़्बेकिस्तान में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। पिछला संस्करण अप्रैल 2025 में पुणे (औंध) में हुआ था।

दल की भागीदारी

  • भारतीय दल में कुल 60 सैनिक शामिल हैं

    • 45 सैनिक भारतीय सेना (मुख्यतः महार रेजिमेंट से)

    • 15 कर्मी भारतीय वायुसेना

  • उज़्बेकिस्तान की ओर से भी लगभग 60 सैनिक भाग ले रहे हैं

अभ्यास का उद्देश्य

  • दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करना

  • संयुक्त अभियानों में क्षमता और समन्वय बढ़ाना

  • अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में ऑपरेशन की तैयारी

प्रमुख गतिविधियां

  • भूमि नेविगेशन और स्ट्राइक मिशन

  • दुश्मन के ठिकानों पर कार्रवाई

  • विशेष हथियारों के उपयोग का प्रशिक्षण

  • संयुक्त योजना और टैक्टिकल ड्रिल्स

  • 48 घंटे का अंतिम संयुक्त अभ्यास

महत्व

यह अभ्यास दोनों देशों के बीच सैन्य तालमेल, ऑपरेशनल क्षमता और आपसी विश्वास को बढ़ाएगा। साथ ही सैनिकों के बीच सौहार्द और सहयोग को भी मजबूत करेगा, जिससे द्विपक्षीय संबंध और बेहतर होंगे।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के नए उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को दी बधाई

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के जनरल फान वान जियांग को सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ वियतनाम के उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय रक्षा मंत्री के रूप में नियुक्त होने पर बधाई दी है।

रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में कहा कि भारत वियतनाम के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों को और मजबूत करने तथा सुरक्षा, सैन्य आदान-प्रदान और रक्षा उद्योग में सहयोग को गहरा करने के लिए उत्सुक है।

उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत-वियतनाम साझेदारी और अधिक मजबूत होगी तथा नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।

INS त्रिकंड तंजानिया पहुँचा, भारत-तंजानिया समुद्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

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भारतीय नौसेना का अग्रिम पंक्ति का गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS त्रिकंड 03 अप्रैल 2026 को दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी तैनाती के तहत तंजानिया के दार-एस-सलाम पहुँचा। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और तंजानिया के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करना है।

इस पोर्ट कॉल के दौरान कई गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी, जिनमें पेशेवर संवाद और तंजानिया नौसेना के साथ संयुक्त प्रशिक्षण शामिल है, ताकि आपसी तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) और समुद्री सहयोग को बढ़ाया जा सके। इसके अलावा, सामाजिक और सामुदायिक कार्यक्रमों के तहत मैत्रीपूर्ण खेल मुकाबले और योग सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। जहाज पर एक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया जाएगा, जो आपसी सद्भाव और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करेगा।

इस यात्रा के दौरान भारत से लाए गए आवश्यक सामग्रियों (क्रिटिकल स्टोर्स) को भी सौंपा जाएगा।

जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी तंजानिया पीपुल्स डिफेंस फोर्स और यूनाइटेड रिपब्लिक ऑफ तंजानिया सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।

INS त्रिकंड का यह दौरा भारत की ‘महासागर’ (MAHASAGAR – Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) दृष्टि के अनुरूप है।


भारत-कोरिया साझेदारी से शिपबिल्डिंग क्षेत्र में कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

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भारत की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) ने 2 अप्रैल 2026 को कोरिया इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (KOICA) के साथ एक कार्यान्वयन योजना (Plan of Implementation) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता भारतीय शिपबिल्डिंग क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए किया गया है।

यह परियोजना ‘Maritime Amrit Kaal Vision 2047’ के तहत निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप है। ‘Support the Establishment of Development Strategies and to Build a Foundation for Skilled and Professional Talents for the Indian Shipbuilding and Marine Sector’ नामक इस पहल का उद्देश्य भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब के रूप में स्थापित करना है।

इस सहयोग के तहत KOICA, कोरिया रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग सहित अन्य संस्थाओं के सहयोग से भारत के शिपबिल्डिंग और मरीन इंजीनियरिंग क्षेत्र का व्यापक अध्ययन करेगा। इसमें कार्यबल का आकलन, कौशल अंतर (स्किल गैप) की पहचान और मानव संसाधन विकास के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह साझेदारी भारत के समुद्री क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपने समुद्री क्षेत्र को आर्थिक विकास और रणनीतिक मजबूती के प्रमुख स्तंभ के रूप में विकसित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से एक नई पीढ़ी के कुशल और तकनीकी रूप से सशक्त समुद्री पेशेवर तैयार किए जाएंगे, जो भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

परियोजना के तहत भारत और कोरिया में संयुक्त कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिसमें उद्योग विशेषज्ञ, नीति निर्माता और शिक्षाविद भाग लेंगे। इससे दोनों देशों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा, भारत में ‘शिपबिल्डिंग वर्कफोर्स डेवलपमेंट एंड टेक्नोलॉजी कोऑपरेशन सेंटर’ की स्थापना पर भी अंतिम चरण की चर्चा चल रही है। यह केंद्र व्यावसायिक प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यह पहल भारत को वैश्विक स्तर पर शिपबिल्डिंग और समुद्री सेवाओं के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है और आत्मनिर्भर समुद्री क्षेत्र के निर्माण की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

INS त्रिकंड की मोज़ाम्बिक यात्रा संपन्न, भारत–मोज़ाम्बिक नौसैनिक सहयोग हुआ मजबूत

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भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS त्रिकंड ने 29 मार्च 2026 को मापुटो, मोज़ाम्बिक की अपनी पोर्ट कॉल सफलतापूर्वक पूरी की।

इस दौरान भारतीय नौसेना और मोज़ाम्बिक नौसेना के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिससे आपसी समन्वय (इंटरऑपरेबिलिटी) और समुद्री सहयोग को और मजबूती मिली।

भारत की ओर से मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) सामग्री मोज़ाम्बिक को सौंपी गई। इस अवसर पर मोज़ाम्बिक के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. उस्सेने हिलारियो इस्से, भारत के उच्चायुक्त रॉबर्ट शेटकिंटोंग सहित अन्य वरिष्ठ सरकारी और सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा, मोज़ाम्बिक नौसेना अस्पताल में एक चिकित्सा शिविर भी आयोजित किया गया।

INS त्रिकंड के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी ने मोज़ाम्बिक में भारत के उच्चायुक्त से भी मुलाकात की।

पोर्ट कॉल के समापन पर, जहाज ने मोज़ाम्बिक नौसेना के कर्मियों के साथ संयुक्त विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) निगरानी और प्रशिक्षण गतिविधियाँ कीं, जिसके बाद वह अपने निर्धारित ऑपरेशनल तैनाती के लिए आगे बढ़ा।

यह पोर्ट कॉल ‘महासागर’ (MAHASAGAR - क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति) की भारत की नीति को दर्शाता है और हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की एक विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार और प्रथम प्रतिक्रिया बल के रूप में प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।


IOS सागर 2026 की शुरुआत, समुद्री सहयोग को नया बल

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हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, इंडियन ओशन शिप (IOS) सागर का दूसरा संस्करण 16 मार्च 2026 को प्रारंभ हुआ।

फरवरी 2026 में भारतीय नौसेना ने इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम (IONS) की अध्यक्षता संभाली। इसलिए इस संस्करण में हिंद महासागर क्षेत्र के 16 IONS देशों की भागीदारी शामिल है।

यह पहल भारत के लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग प्रयासों पर आधारित है और “सागर” (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के भारत सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाती है, साथ ही “महासागर” (क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) के व्यापक ढांचे को भी आगे बढ़ाती है।

IOS सागर एक अनूठा परिचालन कार्यक्रम है, जिसके तहत मित्र देशों के नौसैनिक कर्मियों को भारतीय नौसेना के जहाज पर साथ प्रशिक्षण और यात्रा करने का अवसर मिलता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को जहाज पर गतिविधियों और पेशेवर प्रशिक्षण मॉड्यूल में शामिल कर यह पहल व्यावहारिक सहयोग, इंटरऑपरेबिलिटी और समुद्री संचालन की साझा समझ को बढ़ावा देती है।

IOS सागर के इस संस्करण में 16 मित्र देशों के नौसैनिक कर्मी भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत कोच्चि स्थित भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण संस्थानों में पेशेवर प्रशिक्षण सत्रों से होगी, जहां प्रतिभागियों को नौसैनिक संचालन, समुद्री कौशल और समुद्री सुरक्षा के प्रमुख पहलुओं से अवगत कराया जाएगा। इसके बाद प्रतिभागियों को भारतीय नौसेना के जहाज पर तैनात किया जाएगा, जहां वे भारतीय नौसेना के कर्मियों के साथ समुद्र में परिचालन गतिविधियों में भाग लेंगे।

यात्रा के दौरान जहाज विभिन्न समुद्री सहभागिता गतिविधियों और बंदरगाह दौरों को अंजाम देगा, जिससे क्षेत्र के साझेदार नौसेनाओं और समुद्री एजेंसियों के साथ संवाद संभव होगा। इन गतिविधियों का उद्देश्य पेशेवर संबंधों को मजबूत करना, श्रेष्ठ प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान करना और साझा समुद्री चुनौतियों की गहरी समझ विकसित करना है।

भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति का प्रधानमंत्री मोदी ने किया स्वागत

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) की रूपरेखा पर सहमति का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के लिए बड़ी और सकारात्मक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत–अमेरिका संबंधों की बढ़ती मजबूती, आपसी विश्वास और गतिशील साझेदारी को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह रूपरेखा भारत–अमेरिका साझेदारी की गहराई और व्यापकता को प्रतिबिंबित करती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ पहल को और मजबूती प्रदान करेगा तथा किसानों, उद्यमियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), स्टार्ट-अप नवोन्मेषकों और मछुआरों के लिए नए अवसर खोलेगा। साथ ही, इससे महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

उन्होंने आगे कहा कि यह रूपरेखा निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारी को गहरा करेगी, विश्वसनीय और लचीली आपूर्ति शृंखलाओं को सशक्त बनाएगी तथा वैश्विक आर्थिक विकास में योगदान देगी।

विकसित भारत के निर्माण के भारत के संकल्प को दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भविष्य-उन्मुख वैश्विक साझेदारियों के लिए प्रतिबद्ध है, जो लोगों को सशक्त बनाएं और साझा समृद्धि को बढ़ावा दें।

इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते पर किए गए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा:

“भारत और अमेरिका के लिए शानदार समाचार!
हमने अपनी दो महान राष्ट्रों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति व्यक्त की है। मैं हमारे देशों के बीच मजबूत संबंधों के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के लिए उनका धन्यवाद करता हूँ।

यह रूपरेखा हमारी साझेदारी की बढ़ती गहराई, विश्वास और गतिशीलता को दर्शाती है। यह भारत के मेहनती किसानों, उद्यमियों, MSMEs, स्टार्ट-अप नवोन्मेषकों, मछुआरों और अन्य के लिए नए अवसर खोलकर ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती प्रदान करेगी। इससे महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे।

भारत और अमेरिका नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और यह रूपरेखा निवेश एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी को और गहरा करेगी।

यह समझौता मजबूत और विश्वसनीय आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करेगा और वैश्विक विकास में योगदान देगा। विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ते हुए, हम भविष्य-उन्मुख वैश्विक साझेदारियों के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो हमारे लोगों को सशक्त बनाएं और साझा समृद्धि को बढ़ावा दें।”


वाणिज्य और उद्योग मंत्री पियुष गोयल ने वेनेजुएला के खनन विकास मंत्री से की द्विपक्षीय बैठक

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विजयवाड़ा- वाणिज्य और उद्योग मंत्री पियुष गोयल ने 14–15 नवंबर 2025 को विशाखापत्तनम में आयोजित 30वें CII पार्टनरशिप समिट के अवसर पर वेनेजुएला के मंत्री ऑफ इकोलॉजिकल माइनिंग डेवलपमेंट, Mr. Hector Silva के साथ द्विपक्षीय बैठक की।

बैठक के दौरान, वेनेजुएला की ओर से भारत के साथ तेल क्षेत्र से परे आर्थिक सहयोग बढ़ाने में रुचि दिखाई गई, जिसमें महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग और भारतीय निवेश आकर्षित करना शामिल है।

मंत्री गोयल ने इंडिया–वेनेजुएला जॉइंट कमिटी मैकेनिज्म को पुनः सक्रिय करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसकी पिछली बैठक एक दशक पहले हुई थी। उन्होंने कहा कि ONGC के वेनेजुएला में चल रहे संचालन खनन और अन्वेषण में गहन सहयोग की संभावना प्रदान करते हैं।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने सुझाव दिया कि वेनेजुएला भारतीय फार्माकोपिया को स्वीकार कर सकता है, ताकि फार्मास्यूटिकल ट्रेड को सुगम बनाया जा सके।मंत्री गोयल ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि भारत वेनेजुएला में निवेश की संभावनाओं का पता लगाने वाले व्यवसायों के साथ सक्रिय रूप से संवाद करेगा।

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की बोत्सवाना की प्रथम राजकीय यात्रा : द्विपक्षीय संबंधों में नया अध्याय

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भारत की राष्ट्रपति,द्रौपदी मुर्मु, अपने अंगोला और बोत्सवाना की राजकीय यात्रा के अंतिम चरण में कल (11 नवम्बर 2025) बोत्सवाना की राजधानी गाबोरोन पहुंचीं। यह भारत की ओर से बोत्सवाना की पहली राष्ट्रपति स्तरीय यात्रा है। इस राजकीय यात्रा में राष्ट्रपति के साथ जल शक्ति और रेल मंत्रालय के राज्य मंत्री वी. सोमनाअ, तथा संसद सदस्य पर्भुभाई नगरभाई वसावा और डी. के. अरुणा भी शामिल हैं।

आज (12 नवम्बर 2025) राष्ट्रपति ने अपने कार्यक्रमों की शुरुआत गाबोरोन स्थित राष्ट्रपति भवन से की, जहाँ उनका स्वागत बोत्सवाना गणराज्य के राष्ट्रपति माननीय एडवोकेट डूमा गिडियन बोको ने गर्मजोशी से किया।

राष्ट्रपति बोको ने राष्ट्रपति मुर्मु का स्वागत करते हुए कहा कि भारत, जो “लोकतंत्र की जननी” है, बोत्सवाना की विकास यात्रा में प्रेरणा और समर्थन का एक दृढ़ स्रोत रहा है। उन्होंने शिक्षा, लैंगिक समानता और वंचित समुदायों के उत्थान में राष्ट्रपति मुर्मु की भूमिका की सराहना की। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह उनके कार्यभार ग्रहण करने के बाद किसी भी देश से बोत्सवाना की पहली राजकीय यात्रा है, जो भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को दर्शाती है।

राष्ट्रपति मुर्मु और राष्ट्रपति बोको के बीच एकांतवार्ता एवं प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठकें हुईं, जिनमें व्यापार एवं निवेश, कृषि, अक्षय ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, रक्षा और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि यह यात्रा भारत-बोत्सवाना द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि यह बोत्सवाना की पहली भारतीय राष्ट्रपति स्तरीय यात्रा है। यह यात्रा वर्ष 2026 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ से पहले आयोजित हो रही है, जिससे इसका विशेष महत्व है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत, अफ्रीका के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने तथा भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन के ढांचे के अंतर्गत बोत्सवाना के साथ अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

राष्ट्रपति ने यह बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि बोत्सवाना, भारत में “प्रोजेक्ट चीता” के अगले चरण के तहत चीता पुन:स्थापन में सहायता करेगा। उन्होंने कहा कि यह भारत सरकार की एक अनूठी वन्यजीव संरक्षण पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के पारिस्थितिकी तंत्र में चीतों को पुनर्स्थापित करना है। राष्ट्रपति ने बोत्सवाना के राष्ट्रपति और जनता का भारत को चीते भेजने के निर्णय के लिए धन्यवाद दिया।

दोनों नेताओं ने फार्माकोपिया (औषध संहिता) पर एक समझौते पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया देखी, जिससे बोत्सवाना के नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली और सुलभ भारतीय दवाओं तक आसान पहुँच सुनिश्चित होगी।

राष्ट्रपति ने यह भी घोषणा की कि भारत सरकार, बोत्सवाना सरकार के अनुरोध पर आवश्यक एंटीरेट्रोवायरल (ARV) दवाओं की आपूर्ति करेगी।


भारत ने CoP30 में जलवायु कार्रवाई और साझा जिम्मेदारी की प्रतिबद्धता दोहराई

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07 नवंबर 2025 को ब्राजील के बेलें शहर में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC) के 30वें पक्षकार सम्मेलन (CoP30) के नेताओं के शिखर सम्मेलन में भारत के राजदूत दिनेश भाटिया ने भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य (National Statement) प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत की जलवायु कार्रवाई के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया, जो समानता (Equity), राष्ट्रीय परिस्थितियों (National Circumstances) और सामान्य किंतु विभेदित दायित्वों और संबंधित क्षमताओं (CBDR-RC) के सिद्धांतों पर आधारित है।

भारत ने ब्राजील को CoP30 की मेजबानी के लिए धन्यवाद दिया और पेरिस समझौते की 10वीं वर्षगांठ तथा रियो सम्मेलन की 33वीं वर्षगांठ को याद किया। भारत के वक्तव्य में कहा गया कि यह अवसर वैश्विक ऊष्मीकरण की चुनौती पर वैश्विक प्रतिक्रिया की समीक्षा करने और रियो सम्मेलन की उस विरासत का उत्सव मनाने का है, जिसने समानता और CBDR-RC के सिद्धांतों को अपनाकर अंतरराष्ट्रीय जलवायु ढांचे की नींव रखी, जिसमें पेरिस समझौता भी शामिल है।

भारत ने ब्राजील की नई पहल Tropical Forests Forever Facility (TFFF) की सराहना की और इसे उष्णकटिबंधीय वनों के संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर सामूहिक और सतत कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। भारत ने इस पहल में पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में शामिल होने की घोषणा की।

भारत का सतत विकास और जलवायु नेतृत्व

भारत के वक्तव्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपनाए गए कम-कार्बन विकास मार्ग (Low-Carbon Development Path) को रेखांकित किया गया।

  • 2005 से 2020 के बीच भारत ने GDP की उत्सर्जन तीव्रता (Emission Intensity) में 36% की कमी हासिल की।

  • भारत की स्थापित विद्युत क्षमता में अब 50% से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों (Non-Fossil Sources) से आता है, जिससे भारत ने अपने संशोधित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्य को 5 वर्ष पहले ही प्राप्त कर लिया।

वक्तव्य में यह भी बताया गया कि भारत ने वन और वृक्ष आवरण में निरंतर वृद्धि की है, जिससे 2005 से 2021 के बीच 2.29 अरब टन CO₂ समकक्ष का अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाया गया है। भारत अब लगभग 200 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक बन गया है।

साथ ही, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के माध्यम से अब 120 से अधिक देश सस्ती सौर ऊर्जा और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं।

साझा जिम्मेदारी और वैश्विक जलवायु न्याय

भारत ने कहा कि पेरिस समझौते के दस वर्ष बाद भी कई देशों के NDC लक्ष्य अपर्याप्त हैं। विकासशील देश निर्णायक जलवायु कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि वैश्विक महत्वाकांक्षा अभी भी अपेक्षाओं से कम है।

भारत ने जोर दिया कि कार्बन बजट की तीव्र कमी को देखते हुए विकसित देशों को अपने उत्सर्जन में तेजी से कमी लानी चाहिए और वित्त, प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण के लिए पूर्वानुमेय एवं पर्याप्त समर्थन प्रदान करना चाहिए।

भारत ने कहा कि न्यायसंगत, सस्ती और पूर्वानुमेय जलवायु वित्त (Climate Finance), वैश्विक जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति का मूल आधार है। भारत ने यह भी दोहराया कि वह अन्य देशों के साथ मिलकर सततता, समावेशिता और समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाधान लागू करने के लिए तैयार है।

बहुपक्षवाद और सहयोग की पुनर्पुष्टि

भारत ने बहुपक्षवाद (Multilateralism) और पेरिस समझौते की संरचना को सुरक्षित रखने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया और सभी देशों से आह्वान किया कि आने वाला दशक केवल लक्ष्यों का नहीं, बल्कि क्रियान्वयन, लचीलापन और साझा जिम्मेदारी का दशक होना चाहिए — आपसी विश्वास और निष्पक्षता के आधार पर।


भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चौथा दौर की वार्ता संपन्न, दोनों देशों ने किया समयबद्ध और संतुलित समझौते के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त

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ऑकलैंड और रोटोरुआ-भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement - FTA) पर चौथे दौर की वार्ताएँ आज ऑकलैंड और रोटोरुआ में सफलतापूर्वक संपन्न हुईं। यह दौर पाँच दिनों तक चला, जिसमें दोनों पक्षों के बीच रचनात्मक और दूरदर्शी चर्चाएँ हुईं।

भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के वाणिज्य मंत्री टॉड मैकक्ले ने इस दौर के दौरान हुई निरंतर प्रगति की सराहना की और एक आधुनिक, व्यापक एवं भविष्य-उन्मुख मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में काम जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

मुख्य बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा

वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने कई प्रमुख विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया, जिनमें शामिल हैं —

  • वस्तुओं का व्यापार (Trade in Goods)

  • सेवाओं का व्यापार (Trade in Services)

  • आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग (Economic and Trade Cooperation)

  • उत्पत्ति के नियम (Rules of Origin)

इन चर्चाओं में दोनों देशों की यह साझा भावना परिलक्षित हुई कि भारत–न्यूजीलैंड साझेदारी को और सशक्त बनाते हुए एक संतुलित, समावेशी और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ा जाए।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत वैश्विक समृद्धि और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) को सुनिश्चित करने के लिए गहरे आर्थिक साझेदारी संबंध स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

दोनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) से भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार प्रवाह में वृद्धि, निवेश संबंधों को गहराई, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, और व्यवसायों के लिए अधिक स्थिरता और बाजार पहुँच सुनिश्चित होगी।

व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि

वित्त वर्ष 2024–25 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार (Bilateral Merchandise Trade) लगभग 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 49 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

प्रस्तावित FTA से कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, दवा निर्माण, शिक्षा और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएँ खुलने की उम्मीद है, जिससे व्यवसायों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ मिलेगा।

समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने पर जोर

दोनों देशों ने यह सहमति जताई कि अंतर-सत्रीय कार्य (Inter-sessional Work) के माध्यम से बातचीत की गति को बनाए रखा जाएगा। सभी अध्यायों पर विस्तृत चर्चा जारी रहेगी ताकि भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी रूप में अंतिम रूप दिया जा सके।


न्यूजीलैंड में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान भारत–न्यूजीलैंड व्यापार मंच ने द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी को दी नई गति

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की न्यूजीलैंड की ऐतिहासिक यात्रा के अवसर पर, जहाँ वे अब तक के सबसे बड़े भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुँचे, भारत–न्यूजीलैंड व्यापार मंच (India–New Zealand Business Forum) का आयोजन ऑकलैंड चैंबर ऑफ कॉमर्स और भारतीय उच्चायोग, वेलिंगटन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

इस मंच में दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, प्रमुख उद्योगपति, और व्यापारिक जगत के प्रतिनिधि एक साथ आए। इसका उद्देश्य भारत–न्यूजीलैंड के आर्थिक संबंधों की गहराई को प्रदर्शित करना और साझेदारी एवं सहयोग के नए अवसरों की खोज करना था।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण था एक “फायरसाइड चैट” — जिसमें पीयूष गोयल और टॉड मॅक्ले, न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री, के बीच विचार-विमर्श हुआ। इस संवाद ने दोनों देशों की सरकारों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दोहराया और भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की चल रही वार्ताओं के महत्व को रेखांकित किया। यह चर्चा मार्च 2025 में भारत में हुए उस उच्चस्तरीय बैठक की भावना को आगे बढ़ाती है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने एक समग्र और प्रगतिशील व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी।

ऑकलैंड और रोटोरुआ प्रवास के दौरान, गोयल ने न्यूजीलैंड के कई प्रमुख उद्योग नेताओं से मुलाकात की, जिनमें कारमेन विसेलिच (सीईओ, Valocity),]रंजय सिक्का (सीईओ, Slumberzone), नाथन गाय (अध्यक्ष, Meat Industry Association), और टोनी क्लिफर्ड (प्रबंध निदेशक, Pan Pac) शामिल थे। इन बैठकों में कृषि, पर्यटन, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, खेल, गेमिंग, और ड्रोन तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

भारत की अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रगति—विशेषकर हालिया चंद्र अभियानों—के चलते स्पेस सहयोग को भी भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदारी क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया।

रोटोरुआ में गोयल ने एक सीईओ राउंडटेबल को संबोधित किया, जिसमें भारतीय प्रतिनिधिमंडल और न्यूजीलैंड के अग्रणी उद्योगों के सीईओ शामिल हुए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों देशों के बीच मित्रता, विश्वास और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है। उन्होंने भारत को एक वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए नवाचार और मूल्यवर्धन के व्यापक अवसरों पर प्रकाश डाला।

गोयल और टॉड मॅक्ले ने ऑकलैंड और रोटोरुआ दोनों स्थानों पर भारतीय प्रवासी समुदाय से भी संवाद किया। ऑकलैंड में इस अवसर पर न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और भारतीय समुदाय को संबोधित किया। उन्होंने भारतीय प्रवासियों को भारत और न्यूजीलैंड के बीच “जीवंत सेतु (Living Bridge)” बताया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावना को प्रतिध्वनित करता है।

गोयल ने प्रवासी भारतीयों से आग्रह किया कि वे न्यूजीलैंड — अपनी “कर्मभूमि” — के विकास में योगदान देते हुए भारत से अपने सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव को बनाए रखें और दोनों देशों के समुदायों को सशक्त बनाने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएँ।

भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल ने भी न्यूजीलैंड की कई प्रमुख कंपनियों के साथ व्यापारिक और निवेश संभावनाओं पर चर्चा की।  उन्होंने रेड स्टैग (न्यूजीलैंड की सबसे बड़ी सॉमिल), फॉनटेरा कोऑपरेटिव ग्रुप के डेयरी और फूड इनोवेशन मुख्यालय, और ऑकलैंड यूनिवर्सिटी इनोवेशन हब का दौरा किया, जहाँ द्विपक्षीय सहयोग के नए अवसरों पर सार्थक बातचीत हुई।

इस यात्रा ने भारत–न्यूजीलैंड संबंधों में नए युग की शुरुआत को चिह्नित किया और इस बात को पुनः स्थापित किया कि भारत, न्यूजीलैंड को अपनी विकास यात्रा में एक रणनीतिक भागीदार के रूप में देखता है। दोनों देशों ने लंबी अवधि के आर्थिक सहयोग और आपसी समृद्धि को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता को मजबूत किया।


भारत–न्यूजीलैंड संबंधों में नई ऊर्जा: रोटोरुआ में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की उच्च-स्तरीय वार्ताएं

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूजीलैंड की अपनी आधिकारिक यात्रा के दूसरे दिन व्यापार, निवेश, संपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से कई उच्च-स्तरीय बैठकों में भाग लिया।

दिन की शुरुआत में, रोटोरुआ जाते समय मंत्री ने एयर न्यूजीलैंड के सीईओ निखिल रविशंकर से मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक संपर्क को बढ़ाने में एयर न्यूजीलैंड की भूमिका पर चर्चा हुई। पीयूष गोयल ने भारत के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र पर प्रकाश डाला और एयर सेवाओं तथा पर्यटन को मजबूत करने के लिए सहयोग के बड़े अवसरों का उल्लेख किया।

रोटोरुआ पहुंचने पर, रोटोरुआ की मेयर तानिया टैप्सेल ने मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। पीयूष गोयल ने शहर की प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि बढ़ते द्विपक्षीय संबंध व्यापार और पर्यटन के क्षेत्र में नए अवसर लेकर आएंगे।

इसके बाद, न्यूजीलैंड के ट्रेड मंत्री टॉड मैक्ले की उपस्थिति में, पीयूष गोयल का ते पुइया — माओरी संस्कृति और कला के राष्ट्रीय केंद्र — में पारंपरिक माओरी स्वागत समारोह (पोह्विरी) के साथ स्वागत किया गया। समारोह में पारंपरिक गीतों और "होंगी" अभिवादन ने दोनों देशों के बीच गहरे सम्मान और गर्मजोशी को दर्शाया। मंत्री ने माओरी समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की प्रशंसा की और कहा कि माओरी मूल्यों और भारतीय सभ्यता के सिद्धांतों में गहरा साम्य है — विशेष रूप से प्रकृति और समुदाय के प्रति आदर में।

इसके बाद, पीयूष गोयल और मंत्री टॉड मैक्ले ने भारत–न्यूजीलैंड सीईओ राउंडटेबल की संयुक्त अध्यक्षता की, जिसमें दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों ने भाग लिया। इस अवसर पर पीयूष गोयल ने भारत की तेजी से बदलती आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डाला और तकनीक, कृषि, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, पर्यटन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाओं पर बल दिया। उन्होंने न्यूजीलैंड के उद्योग जगत को भारत के साथ और गहरी साझेदारी की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

पीयूष गोयल ने मंत्री टॉड मैक्ले को उनके गृह नगर रोटोरुआ में मिले स्नेहपूर्ण आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि भारत और न्यूजीलैंड आपसी मित्रता, समृद्धि और साझा प्रगति के मार्ग पर अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।


भारत–इज़राइल संयुक्त कार्य समूह की 17वीं बैठक: रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु नया समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षरित

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भारत–इज़राइल रक्षा सहयोग पर संयुक्त कार्य समूह (JWG) की 17वीं बैठक रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और इज़राइल के रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अमीर बाराम की सह-अध्यक्षता में 4 नवंबर 2025 को तेल अवीव में आयोजित की गई। इस बैठक के दौरान रक्षा सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जो दोनों देशों के बीच पहले से ही मज़बूत रक्षा सहयोग को और गहरा करने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण और नीतिगत दिशा प्रदान करेगा।

इस समझौते में सहयोग के कई क्षेत्रों की पहचान की गई है, जो दोनों देशों के लिए लाभकारी होंगे। प्रमुख क्षेत्रों में आपसी रुचि के रणनीतिक संवाद, प्रशिक्षण, रक्षा औद्योगिक सहयोग, तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास, तकनीकी नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और साइबर सुरक्षा सहयोग जैसी क्षमताओं का विकास शामिल है। यह MoU उन्नत प्रौद्योगिकियों के साझा उपयोग को सक्षम करेगा और संयुक्त विकास एवं सह-उत्पादन को बढ़ावा देगा।

बैठक में JWG ने चल रही रक्षा सहयोग पहलों की समीक्षा की और इस बात पर सहमति व्यक्त की कि दोनों देशों ने एक-दूसरे की क्षमताओं से लाभ उठाया है। दोनों पक्षों ने भविष्य में तकनीकी क्षेत्र में सहयोग और परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के संभावित अवसरों पर भी चर्चा की। इसके साथ ही, उन्होंने आतंकवाद जैसी साझा चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया और इस खतरे के खिलाफ मिलकर लड़ने के अपने सामूहिक संकल्प को दोहराया।

भारत–इज़राइल रक्षा साझेदारी लंबे समय से चली आ रही है, जो आपसी विश्वास और साझा सुरक्षा हितों पर आधारित है।


भारत और रोमानिया के बीच व्यापार, निवेश एवं आपूर्ति श्रृंखला सहयोग को सुदृढ़ करने पर द्विपक्षीय बैठक

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वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने आज रोमानिया की विदेश मंत्री महामहिम ओआना-सिल्विया त्सोइउ के साथ बुखारेस्ट में द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में व्यापार विस्तार, निवेश आकर्षण और भारत–यूरोपीय संघ (EU) के व्यापक आर्थिक ढांचे के अंतर्गत मजबूत एवं लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने पर चर्चा की गई।

दोनों पक्षों ने इस वर्ष के भीतर एक न्यायसंगत, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभदायक भारत–ईयू मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में कार्य करने पर सहमति व्यक्त की, जो चल रही वार्ताओं के लिए निर्धारित राजनीतिक मार्गदर्शन के अनुरूप है।

बैठक के दौरान मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच स्थिर व्यापार और निवेश संबंधों की समीक्षा की। भारत का रोमानिया को निर्यात वित्तीय वर्ष 2024–25 में 1.03 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा, जबकि कुल द्विपक्षीय व्यापार FY 2023–24 में लगभग 2.98 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। दोनों पक्षों ने पेट्रोलियम उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएं, दवाइयाँ और सिरेमिक जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला संबंधों को और गहरा करने तथा मानकों, परीक्षण और निवेश साझेदारियों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की ताकि दोनों देशों के बाजारों तक पहुँच को सुदृढ़ किया जा सके। उन्होंने उत्पादन के विविधीकरण और विश्वसनीय साझेदारों के रूप में मजबूत, अधिक लचीली आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने के लिए मिलकर कार्य करने का भी निर्णय लिया, जिससे दोनों देशों के व्यवसायों में स्थिरता और विश्वास सुनिश्चित हो सके।

भारत और रोमानिया के नेतृत्व के बीच हालिया उच्च-स्तरीय संवादों पर आधारित होकर, दोनों पक्षों ने इस गति को बनाए रखने और नियमित द्विपक्षीय संपर्क कार्यक्रम जारी रखने पर सहमति जताई। साथ ही, उन्होंने व्यापार को सुगम बनाने, मोबिलिटी टूलकिट विकसित करने और निवेशकों तक पहुंच को मजबूत करने के लिए फॉलो-अप कार्रवाइयों का समन्वय करने का निर्णय लिया ताकि संभावनाओं को ठोस परिणामों में बदला जा सके।

यह यात्रा दोनों देशों की भारत–रोमानिया आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है — जो व्यापार का विस्तार करती है, निवेश प्रवाह को बढ़ाती है, और कौशल-आधारित गतिशीलता के नए मार्ग खोलती है, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को पारस्परिक लाभ प्राप्त होगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कुआलालंपुर में भारत-आसियान द्वितीय अनौपचारिक रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लिया

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कुआलालंपुर (मलेशिया)-रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत-आसियान द्वितीय अनौपचारिक रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लिया, जो कुआलालंपुर, मलेशिया में आयोजित हुई। बैठक के दौरान आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में भारत की प्रमुख भूमिका की सराहना की और नई दिल्ली के साथ रक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करने की इच्छा व्यक्त की।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह बैठक भारत और आसियान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है, विशेषकर आसियान-भारत कार्ययोजना 2026–2030 के रक्षा एवं सुरक्षा घटकों के संदर्भ में। उन्होंने दो भविष्यमुखी पहलें घोषित कीं —

  1. आसियान-भारत पहल: संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में महिलाओं की भागीदारी, तथा

  2. आसियान-भारत रक्षा थिंक-टैंक संवाद (Defence Think-Tank Interaction)।

मलेशिया के रक्षा मंत्री (ADMM के अध्यक्ष) ने राजनाथ सिंह का स्वागत करते हुए भारत को एक “सुपरपावर” बताया। उन्होंने कहा कि आसियान समुदाय भारत के साथ साइबर एवं डिजिटल रक्षा, रक्षा उद्योग और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग गहरा करके लाभान्वित होगा। उन्होंने भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग और तकनीकी अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र की सराहना की, जिससे आसियान सदस्य देशों को भी लाभ मिल सकता है।

फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने भी भारत की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षवाद के प्रति सम्मान का उदाहरण है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून (UNCLOS) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की सराहना की और कहा कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने आगामी भारत-आसियान समुद्री अभ्यास (Maritime Exercise) में पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की और फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में होने वाली संयुक्त गतिविधियों का उल्लेख किया।

कंबोडिया के रक्षा मंत्री ने भी भारत के उदय की सराहना की और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों, मानवीय सहायता (HMA) और सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में भारत के योगदान के लिए धन्यवाद दिया।

सिंगापुर के रक्षा मंत्री ने कहा कि आसियान को भारत की क्षमता और विश्वसनीयता पर पूर्ण विश्वास है। उन्होंने भारत और आसियान के बीच संयुक्त अभ्यास, नीति संवाद, और युवा पीढ़ी के स्तर पर अधिक सहभागिता का सुझाव दिया, ताकि भविष्य के सहयोग के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सके।

थाईलैंड के रक्षा मंत्री ने भी भारत की रक्षा तकनीक और उद्योग पारिस्थितिकी की प्रशंसा की और “क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता” की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक के अंत में आसियान रक्षा मंत्रियों ने भारत की पहलों का स्वागत किया और भारत-आसियान रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।



भारत-अमेरिका ने किया ‘मेजर डिफेंस पार्टनरशिप फ्रेमवर्क 2025’ पर हस्ताक्षर — रक्षा सहयोग के नए युग की शुरुआत

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 31 अक्टूबर 2025 को मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित 12वें आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) के दौरान अमेरिका के युद्ध सचिव पीट हिगसेथ से मुलाकात की। यह बैठक रचनात्मक रही और प्रतिनिधिमंडल-स्तरीय वार्ता के बाद दोनों नेताओं के बीच एकल बैठक हुई।

दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका के बीच जारी रक्षा सहयोग की सकारात्मक प्रगति की सराहना की और आपसी लाभ पर आधारित साझेदारी को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने मौजूदा रक्षा मुद्दों और चुनौतियों की समीक्षा की तथा रक्षा उद्योग और तकनीकी सहयोग पर विचार-विमर्श किया। बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच, दोनों पक्षों ने मिलकर इन चुनौतियों का समाधान करने पर सहमति व्यक्त की।

अमेरिकी युद्ध सचिव ने कहा कि रक्षा सहयोग के क्षेत्र में भारत अमेरिका के लिए एक प्राथमिकता वाला देश है और अमेरिका एक मुक्त एवं खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए भारत के साथ निकटता से कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।

बैठक के बाद दोनों नेताओं ने ‘यूएस-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप फ्रेमवर्क’ पर हस्ताक्षर किए, जो पहले से मजबूत रक्षा साझेदारी को एक नए युग में ले जाएगा। यह 2025 फ्रेमवर्क अगले 10 वर्षों में इस साझेदारी को और परिवर्तित करने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इसका उद्देश्य रक्षा सहयोग को गहराई देने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण और नीति दिशा प्रदान करना है।

एक्स (X) पर पोस्ट के माध्यम से, रक्षा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह फ्रेमवर्क भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के पूरे परिदृश्य को नीति दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा, “यह हमारी बढ़ती रणनीतिक समानता का संकेत है और साझेदारी के एक नए दशक का शुभारंभ करेगा। रक्षा हमारे द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख स्तंभ बना रहेगा। हमारी साझेदारी एक मुक्त, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।”

अपने पोस्ट में, पीट हिगसेथ ने कहा कि यह फ्रेमवर्क द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और प्रतिरोधक क्षमता का आधार है। उन्होंने लिखा, “हम समन्वय, सूचना साझाकरण और तकनीकी सहयोग को बढ़ा रहे हैं। हमारे रक्षा संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं।”

भारत और अमेरिका सैन्य अभ्यासों एवं गतिविधियों, सूचना साझाकरण, समान विचारधारा वाले क्षेत्रीय और वैश्विक साझेदारों के साथ सहयोग, रक्षा उद्योग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग और रक्षा समन्वय तंत्र के माध्यम से अपने रक्षा संबंधों का विस्तार और सुदृढ़ीकरण कर रहे हैं।

ईयू-भारत व्यापार वार्ता से निवेशकों के विश्वास को मिला बल

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नई दिल्ली-भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं ने निवेशकों के विश्वास को नई मजबूती दी है। यूरोपीय निवेश बैंक (EIB) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इन वार्ताओं से यह संकेत मिलता है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी और निवेश का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।

अधिकारी ने कहा कि “भारत में नीतिगत स्थिरता, आर्थिक सुधारों की रफ्तार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बढ़ती भूमिका ने यूरोपीय निवेशकों का भरोसा और गहरा किया है।” उन्होंने बताया कि यूरोप की कई कंपनियाँ भारत में विनिर्माण, हरित ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी और परिवहन अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की तैयारी में हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर तेजी से प्रगति हो रही है। दोनों पक्ष बाजार पहुंच, निवेश संरक्षण, और पर्यावरणीय मानकों पर सहमति के करीब हैं। समझौते के लागू होने के बाद द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।

अधिकारियों का कहना है कि भारत-ईयू व्यापार समझौता न केवल यूरोप के लिए एशिया में आर्थिक संतुलन को मजबूत करेगा, बल्कि भारत के लिए निर्यात, रोजगार और तकनीकी साझेदारी के नए अवसर खोलेगा।

ईयू वर्तमान में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, और दोनों के बीच वार्षिक व्यापार मूल्य 130 अरब डॉलर से अधिक का है। भारत की ओर से सरकार ने कहा है कि यह समझौता “विन-विन साझेदारी” का नया अध्याय साबित होगा।


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