Media24Media.com: प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के 11 साल: करोड़ों उद्यमियों को मिला सशक्तिकरण

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प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के 11 साल: करोड़ों उद्यमियों को मिला सशक्तिकरण

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 अप्रैल 2015 को शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) ने आज 11 सफल वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह योजना देश के छोटे और सूक्ष्म उद्यमियों को बिना गारंटी के आसान ऋण उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

इस योजना के तहत गैर-कॉर्पोरेट और गैर-कृषि क्षेत्र के छोटे व्यवसायों को ₹20 लाख तक का कोलेटरल-फ्री लोन दिया जाता है, जिससे वे अपने व्यवसाय को शुरू या विस्तार कर सकें।

MSME सेक्टर की रीढ़ बनी योजना

MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ये न केवल बड़े उद्योगों के सहयोगी हैं बल्कि रोजगार सृजन और संतुलित आर्थिक विकास में भी अहम योगदान देते हैं। PMMY ने इन उद्यमों को नई ऊर्जा और वित्तीय पहुंच प्रदान की है।

वित्त मंत्री का बयान

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा:
“पिछले एक दशक में भारत में एक शांत क्रांति हुई है, जहां करोड़ों लोगों ने आत्मविश्वास के साथ उद्यमिता की ओर कदम बढ़ाया। PMMY ने ‘Funding the Unfunded’ के सिद्धांत पर काम करते हुए उन लोगों तक ऋण पहुंचाया, जो पहले बैंकिंग प्रणाली से बाहर थे।”

उन्होंने आगे कहा कि इस योजना ने उद्यमिता को लोकतांत्रिक बनाते हुए क्रेडिट तक पहुंच की बाधाओं को खत्म किया है।


बड़ी उपलब्धियां

  • अब तक 57.79 करोड़ से अधिक लोन स्वीकृत

  • कुल ₹40.07 लाख करोड़ का वितरण

  • लगभग 2/3 लोन महिलाओं को मिले

  • करीब 20% लोन पहली बार व्यवसाय शुरू करने वालों को दिए गए

  • नए उद्यमियों को 12.15 करोड़ लोन (₹12 लाख करोड़)

समावेशी विकास की दिशा में कदम

योजना का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचा है:

  • महिलाएं: 67% लाभार्थी

  • OBC वर्ग: 51% लाभार्थी

  • SC/ST और अन्य वंचित वर्गों को भी बड़ा लाभ

योजना के मुख्य स्तंभ

भारत के वित्तीय समावेशन कार्यक्रम के तीन प्रमुख आधार हैं:

  1. Banking the Unbanked (बैंकिंग से वंचित लोगों को जोड़ना)

  2. Securing the Unsecured (असुरक्षित को सुरक्षा देना)

  3. Funding the Unfunded (बिना वित्तीय सहायता वालों को ऋण देना)

PMMY इसी तीसरे स्तंभ का मुख्य आधार है।

लोन की श्रेणियां

  • शिशु: ₹50,000 तक

  • किशोर: ₹50,000 से ₹5 लाख तक

  • तरुण: ₹5 लाख से ₹10 लाख तक

  • तरुण प्लस: ₹10 लाख से ₹20 लाख तक

ये लोन मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग, सर्विस सेक्टर और कृषि से जुड़े व्यवसायों के लिए दिए जाते हैं।

वर्षवार प्रगति (संक्षेप)

  • 2015-16: ₹1.37 लाख करोड़

  • 2020-21: ₹3.22 लाख करोड़

  • 2023-24: ₹5.41 लाख करोड़

  • 2025-26 (मार्च तक): ₹5.65 लाख करोड़

राज्य मंत्री का बयान

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा:
“मुद्रा योजना ने छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाते हुए उन्हें औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और आर्थिक विकास को गति मिली है।”

निष्कर्ष

11 वर्षों में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने वित्तीय समावेशन को मजबूत करते हुए लाखों लोगों के उद्यमी बनने के सपनों को साकार किया है। यह योजना ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत आधार साबित हो रही है।

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