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GENESIS EIR 3.0: नए उद्यमियों और नवोन्मेषकों को मिलेगा ₹10 लाख तक का सहयोग

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नई दिल्ली- इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने MeitY Startup Hub (MSH) के माध्यम से GENESIS Entrepreneur-in-Residence (EIR) Cohort 3 की शुरुआत की है। यह राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम महत्वाकांक्षी उद्यमियों, नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं, छात्रों और शुरुआती चरण के स्टार्टअप संस्थापकों को अपने नवीन विचारों को तकनीक-आधारित व्यावसायिक उपक्रमों में बदलने के लिए सहायता प्रदान करेगा।

GENESIS EIR 3.0 का शुभारंभ 4 अगस्त 2026 को कोयंबटूर स्थित रथिनम ग्लोबल यूनिवर्सिटी में आयोजित GENESIS NextGen Startup Summit – Coimbatore Edition के दौरान किया गया। कार्यक्रम के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक आवेदक 3 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।

शुरुआती चरण के नवाचारों को मिलेगा बढ़ावा

GENESIS EIR 3.0, GENESIS (Gen-Next Support for Innovative Startups) योजना का एक महत्वपूर्ण घटक है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से टियर-II और टियर-III शहरों में उभर रहे स्टार्टअप और नवोन्मेषकों की पहचान करना, उन्हें सहयोग देना और आगे बढ़ाना है।

Entrepreneur-in-Residence घटक के तहत चयनित नवोन्मेषकों को शुरुआती विचारों को प्रोटोटाइप और पायलट-रेडी समाधान में बदलने के लिए वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन, मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता

MeitY Startup Hub द्वारा लागू GENESIS EIR Cohort-3 के तहत चयनित आवेदकों को ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता मिल सकती है। इसके अलावा प्रतिभागियों को GENESIS इनक्यूबेटरों तक पहुंच, विशेषज्ञों से मार्गदर्शन, उत्पाद विकास, MVP तैयार करने, प्रोटोटाइपिंग, तकनीकी सत्यापन और व्यावसायीकरण के लिए सहायता प्रदान की जाएगी।

चयनित नवोन्मेषकों को प्रमुख रूप से मिलेंगे:

  • ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता

  • GENESIS इनक्यूबेटरों तक पहुंच

  • विशेषज्ञों से वन-टू-वन मेंटरशिप

  • उत्पाद विकास और MVP तैयार करने में सहयोग

  • इनक्यूबेशन और बिजनेस ग्रोथ सपोर्ट

  • प्रोटोटाइप और तकनीकी विकास के लिए सहायता

  • उद्योग एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम से संपर्क

  • व्यावसायीकरण और स्टार्टअप विकास के लिए मार्गदर्शन

DeepTech और उभरती तकनीकों पर विशेष फोकस

GENESIS EIR 3.0 के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT, DeepTech, Artificial Intelligence/Machine Learning (AI/ML), Internet of Things (IoT), Semiconductor/VLSI, Cybersecurity, Blockchain, Quantum Technologies तथा AR/VR, Spatial & Immersive Technologies जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले नवोन्मेषकों को समर्थन दिया जाएगा।

कार्यक्रम में Technology Readiness Level (TRL) 1 से 4 तक के विचारों और समाधानों को पात्र माना गया है। इसमें आइडिएशन, Proof of Concept, प्रोटोटाइप, MVP और शुरुआती वैलिडेशन चरण शामिल हैं।

कौन कर सकता है आवेदन?

इस कार्यक्रम के लिए भारतीय नागरिक आवेदन कर सकते हैं। पात्र आवेदकों में उद्यमी, नवोन्मेषक, शोधकर्ता, छात्र तथा शुरुआती चरण के स्टार्टअप के संस्थापक या सह-संस्थापक शामिल हैं।

स्टार्टअप टियर-II या टियर-III शहर में आधारित होना चाहिए और यदि स्टार्टअप पहले से पंजीकृत है, तो आवेदन की तारीख तक उसकी आयु दो वर्ष से कम होनी चाहिए। साथ ही, उसी प्रस्तावित विचार या स्टार्टअप के लिए किसी केंद्रीय या राज्य सरकार की योजना के तहत ₹10 लाख से अधिक की वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं हुई होनी चाहिए।

3 सितंबर तक आवेदन का मौका

GENESIS EIR Cohort-3 के लिए आवेदन विंडो 4 अगस्त 2026 से 3 सितंबर 2026 तक खुली है। इच्छुक नवोन्मेषक और उद्यमी MeitY Startup Hub के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

₹490 करोड़ के GENESIS मिशन का हिस्सा

GENESIS यानी Gen-Next Support for Innovative Startups MeitY Startup Hub की प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के टियर-II और टियर-III शहरों में स्टार्टअप को खोजने, सहयोग देने, विकसित करने और गति प्रदान करने के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है।

कुल ₹490 करोड़ के बजट प्रावधान वाली इस योजना में Entrepreneur-in-Residence, Pilot, Investment और DeepTech Funding जैसे घटक शामिल हैं। यह योजना स्टार्टअप्स को शुरुआती विचार और प्रयोग से लेकर वैलिडेशन, निवेश और विस्तार तक सहायता देने पर केंद्रित है।

GENESIS EIR 3.0 के माध्यम से MeitY Startup Hub का लक्ष्य देशभर के नवोन्मेषकों को आवश्यक वित्तीय सहायता, मेंटरशिप और इनक्यूबेशन उपलब्ध कराकर विचारों को बाजार के लिए तैयार तकनीकी समाधानों और स्केलेबल स्टार्टअप में बदलना है। यह पहल भारत के DeepTech और तकनीकी स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के विजन को भी गति प्रदान करेगी।

युवाओं को ‘जॉब सीकर’ नहीं, ‘जॉब क्रिएटर’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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वर्ल्ड लीडर्स फोरम में छत्तीसगढ़ ने रखा युवा-केंद्रित अर्थव्यवस्था का रोडमैप

6 लाख विद्यार्थियों को एआई प्रशिक्षण, वर्ष 2030 तक 5 हजार स्टार्टअप का लक्ष्य

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वैश्विक मंच से निवेशकों को दिया छत्तीसगढ़ में निवेश का आमंत्रण

नई औद्योगिक नीति के बाद प्रदेश को मिले 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव

एआई, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी और फार्मा बनेंगे नई अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन

बस्तर में शांति के साथ खुल रहे विकास, पर्यटन, निवेश और रोजगार के नए द्वार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय वर्ल्ड लीडर्स फोरम में वैश्विक आर्थिक जगत की प्रमुख हस्तियों के समक्ष छत्तीसगढ़ की तेजी से बदलती आर्थिक तस्वीर, निवेश की व्यापक संभावनाओं और भविष्य के विकास का रोडमैप प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब अपनी पारंपरिक औद्योगिक और खनिज आधारित पहचान से आगे बढ़कर युवा शक्ति, नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक विनिर्माण पर आधारित नई अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल बड़े निवेश आकर्षित करना नहीं है, बल्कि निवेश को रोजगार, उद्यमिता, बेहतर आय और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य से जोड़ना है। छत्तीसगढ़ के युवा केवल रोजगार तलाशने वाले न रहें, बल्कि अपने नवाचार और उद्यमिता के बल पर दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करें, इसी सोच के साथ राज्य की नीतियों और योजनाओं को नया स्वरूप दिया जा रहा है।

फोरम में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन सहित भारत और विश्व की अनेक प्रमुख हस्तियां शामिल हो रही हैं।

6.31 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था, 11.57 प्रतिशत की विकास दर

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 में राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 6.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और आर्थिक वृद्धि दर 11.57 प्रतिशत रही है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय भी बढ़कर 1 लाख 79 हजार 244 रुपये हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के आर्थिक विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए विकास और जनकल्याण को समान प्राथमिकता दी गई है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के 1.72 लाख करोड़ रुपये के बजट में अधोसंरचना निर्माण, पूंजीगत व्यय और सामाजिक कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है। सड़क, रेल, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और औद्योगिक अधोसंरचना को मजबूत कर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।

नई औद्योगिक नीति के बाद 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए अनुकूल और पारदर्शी वातावरण तैयार करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30, वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़े सुधारों के माध्यम से निवेश प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 450 से अधिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है। इन सुधारों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है और नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद प्रदेश को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अब स्टील, सीमेंट और खनिज आधारित उद्योगों के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और फूड प्रोसेसिंग जैसे भविष्य के क्षेत्रों में निवेश के लिए नई संभावनाएं तैयार हुई हैं।

2030 तक 5 हजार स्टार्टअप, युवा बनेंगे रोजगार सृजक

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई अर्थव्यवस्था के केंद्र में युवा हैं। सरकार चाहती है कि प्रदेश के युवा केवल नौकरी की प्रतीक्षा करने वाले ‘जॉब सीकर’ नहीं, बल्कि ‘जॉब क्रिएटर’ बनें।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2030 तक 5 हजार स्टार्टअप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नए उद्यमियों को अपने अभिनव विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए 10 लाख रुपये तक सीड फंड सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के साथ युवाओं को तकनीक, नवाचार, कौशल और बाजार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलने से न केवल नए व्यवसाय खड़े होंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी निर्मित होंगे।

6 लाख विद्यार्थियों को एआई प्रशिक्षण, 50 से अधिक एआई आधारित सेवाएं

मुख्यमंत्री साय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को छत्तीसगढ़ के भविष्य के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि प्रदेश में 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख शासकीय कर्मचारियों को एआई प्रशिक्षण देने की योजना है। इसके साथ ही नागरिकों को बेहतर और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 50 से अधिक एआई आधारित सरकारी सेवाएं विकसित की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि एआई का उद्देश्य केवल तकनीकी बदलाव नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, युवाओं के लिए भविष्य के रोजगार और उद्यमिता के अवसर तैयार करना तथा सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाना है।

500 करोड़ का एआई मिशन, नवा रायपुर में एआई डेटा सेंटर पार्क

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 500 करोड़ रुपये के राज्य एआई मिशन पर काम किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 100 एआई डेटा लैब और 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे तथा 300 से अधिक एआई स्टार्टअप्स को सहयोग देने का लक्ष्य है।

नवा रायपुर में करीब 1,000 करोड़ रुपये की लागत से एआई डेटा सेंटर पार्क विकसित किया जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ को देश के उभरते डिजिटल और एआई इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण स्थान मिलेगा तथा युवाओं के लिए नई पीढ़ी के रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

बस्तर बनेगा छत्तीसगढ़ की नई अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बदलता हुआ बस्तर छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है। सुरक्षा की स्थिति में तेजी से हुए सुधार के बाद अब बस्तर में विकास, निवेश, रोजगार और उद्यमिता के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के करीब 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से 4,824 करोड़ रुपये की आजीविका उन्नयन योजना तैयार की जा रही है। बस्तर में 421 बंद स्कूलों को पुनः शुरू किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ते हुए 34 लाख से अधिक लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 3,513 करोड़ रुपये की जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना बस्तर के आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी। इससे बस्तर की औद्योगिक और व्यापारिक कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

बस्तर में पर्यटन और स्थानीय उत्पाद बनेंगे रोजगार का बड़ा माध्यम

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और सिरपुर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को विश्वस्तरीय पर्यटन मानचित्र से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

राज्य में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से इस क्षेत्र में निजी निवेश के साथ होटल, हॉस्पिटैलिटी, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के वनांचलों में मिलने वाले लघु वनोपज, औषधीय पौधों, मिलेट और कृषि उत्पादों की स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। लक्ष्य यह है कि छत्तीसगढ़ केवल कच्चे माल का उत्पादक न रहे, बल्कि यहीं तैयार उत्पाद बनें और उनकी अधिकतम आर्थिक मूल्य स्थानीय लोगों को मिले।

ग्रीन एनर्जी से जुड़ेगा छत्तीसगढ़ का विकास

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। अब पारंपरिक ऊर्जा में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखते हुए राज्य तेजी से ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

आने वाले वर्षों में प्रदेश में करीब 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश के 90 हजार से अधिक घर सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं। भिलाई में प्रदेश का पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट भी स्थापित किया गया है।

उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी का विस्तार राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ नए निवेश और ग्रीन जॉब्स के लिए भी महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

कच्चे माल से आगे बढ़कर वैल्यू एडिशन पर फोकस

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन राज्य की नई आर्थिक नीति का लक्ष्य केवल इन संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि प्रदेश के भीतर ही उनका अधिकतम वैल्यू एडिशन करना है।

इसी दिशा में नवा रायपुर और राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी अधोसंरचना विकसित की जा रही है। राजनांदगांव में प्रस्तावित स्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, 142 एकड़ का फार्मा पार्क तथा टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट पार्क भविष्य के औद्योगिक विकास को नई गति देंगे। कोरबा में लिथियम की खोज से प्रदेश में बैटरी निर्माण, ऊर्जा भंडारण और न्यू एनर्जी सेक्टर में भी नई संभावनाएं खुली हैं।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम से निवेश प्रक्रिया होगी और आसान

मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 लागू किया गया है। कम जोखिम वाले उद्योगों के प्रकरणों में निर्धारित समय में निर्णय नहीं होने पर स्वतः अनुमति का प्रावधान किया गया है।

इसके अंतर्गत आठ विभागों की 43 सेवाओं को शामिल किया गया है। इससे प्रदेश के लगभग 15 लाख एमएसएमई को लाभ मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को अनुमति और प्रक्रियाओं में अनावश्यक समय न लगे और वे अपना ध्यान उद्योग तथा रोजगार सृजन पर केंद्रित कर सकें।

संसाधन से नवाचार तक - नए छत्तीसगढ़ का निवेश मॉडल

मुख्यमंत्री साय ने वैश्विक निवेशकों के समक्ष छत्तीसगढ़ को ऐसे राज्य के रूप में प्रस्तुत किया, जहां प्राकृतिक संसाधन, पर्याप्त ऊर्जा, भूमि, कुशल और युवा मानव संसाधन, बेहतर होती कनेक्टिविटी, आधुनिक अधोसंरचना और निवेश-अनुकूल नीतियां एक साथ उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का अगला चरण संसाधन आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर ज्ञान, तकनीक, नवाचार और उद्यमिता आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण का है। निवेश इस परिवर्तन का माध्यम है, जबकि इसका अंतिम उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को बेहतर रोजगार, उद्यमिता और आय के अवसर उपलब्ध कराकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार  आर. कृष्णा दास, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद एवं राहुल भगत, विशेष सचिव एवं जनसम्पर्क आयुक्त रजत बंसल, आवासीय आयुक्त श्रुति सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

“स्थानीय से वैश्विक: डिजिटल कॉमर्स के माध्यम से निर्यात-तैयार MSMEs को सशक्त बनाना”

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भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अधीन MSME विकास एवं सुविधा कार्यालय, चेन्नई ने IIT मद्रास के उद्यमिता प्रकोष्ठ के सहयोग से 18 अगस्त को IIT मद्रास, चेन्नई में “स्थानीय से वैश्विक: डिजिटल कॉमर्स के माध्यम से निर्यात-तैयार MSMEs को सक्षम बनाना” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया।

संगोष्ठी में MSMEs, उद्यमियों, विद्यार्थियों, नीति-निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों, निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े हितधारकों तथा डिजिटल कॉमर्स विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य MSMEs को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच बनाने के लिए व्यावहारिक मार्गों पर चर्चा करना था।

उद्घाटन सत्र में तमिलनाडु सरकार के MSME विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रवीण यादव ने विशेष संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल कॉमर्स भौगोलिक सीमाओं को पार करते हुए MSMEs की वैश्विक बाजारों तक पहुँच को बदल रहा है। उन्होंने MSMEs की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को तेज करने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय तथा सक्षम वातावरण बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

IIT मद्रास के IC&SR के डीन प्रो. मनु संथानम ने अपने विशेष संबोधन में नवाचार तथा अकादमिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे सहयोग से MSMEs नए उत्पादों और प्रौद्योगिकियों का विकास कर अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सकते हैं।

हंसराज वर्मा, महानिदेशक, Council of State Industrial Development & Investment Corporation of India, ने भी विशेष संबोधन दिया। उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने के लिए गुणवत्ता को बुनियादी तत्व बताया और MSMEs की बाजार पहुँच बढ़ाने में डिजिटलीकरण के महत्व को रेखांकित किया।

धयालन, निदेशक एवं प्रमुख, MSME DFO चेन्नई ने मुख्य वक्तव्य दिया और विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित किया। रेशमा राजीवन, उप निदेशक, MSME DFO चेन्नई ने स्वागत भाषण दिया और संगोष्ठी की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की। उन्होंने MSMEs को घरेलू बाजारों से आगे बढ़ाकर वैश्विक अवसरों से जोड़ने के लिए आवश्यक सहयोग पर जोर दिया।

संगोष्ठी में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बदलते स्वरूप तथा MSMEs को भौगोलिक सीमाओं से परे ग्राहकों तक पहुँचाने में डिजिटल कॉमर्स, प्रौद्योगिकी, नवाचार और बाजार संपर्क की बढ़ती भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया।

तकनीकी सत्रों में DGFT, EXIM Bank, ECGC, IIT मद्रास तथा निर्यात और ई-कॉमर्स परामर्श क्षेत्र के विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भाग लिया। उन्होंने MSMEs को निर्यात प्रक्रियाओं, व्यापार वित्त, निर्यात जोखिम प्रबंधन, बाजार की पहचान, अंतरराष्ट्रीय भुगतान, अनुपालन, डिजिटल ऑनबोर्डिंग तथा वैश्विक बाजार तक पहुँच के लिए ई-कॉमर्स का लाभ उठाने के अवसरों के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी।

चर्चाएँ सरकार द्वारा MSMEs की बाजार पहुँच मजबूत करने के निरंतर प्रयासों के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहीं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की Procurement & Marketing Support (PMS) Scheme में क्षमता निर्माण के अंतर्गत राष्ट्रीय कार्यशालाओं/संगोष्ठियों को एक समर्पित घटक के रूप में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य MSMEs को बाजार पहुँच, पैकेजिंग, आयात-निर्यात प्रक्रियाओं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तथा बाजार विस्तार से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विकासों के बारे में जागरूक करना और शिक्षित करना है।

चेन्नई में आयोजित यह राष्ट्रीय संगोष्ठी इसी घटक के तहत आयोजित की गई, जिसके माध्यम से MSMEs को डिजिटल कॉमर्स और निर्यात के लिए तैयार होने से संबंधित विशेषज्ञों तथा व्यावहारिक जानकारी तक सीधे पहुँच प्रदान की गई।

संगोष्ठी ने विद्यार्थियों और उभरते उद्यमियों को डिजिटल कॉमर्स, उद्यमिता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उभरते अवसरों को समझने के लिए भी एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं, विशेषज्ञों, पैनलिस्टों, भाग लेने वाले MSMEs, विद्यार्थियों, सहयोगी संस्थानों तथा आयोजन टीम के योगदान के लिए आभार व्यक्त किया गया।

यह पहल MSMEs की बाजार पहुँच, डिजिटल अपनाने, निर्यात तैयारी और हैंडहोल्डिंग सहायता को मजबूत करने के लिए MSME मंत्रालय की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है और भारतीय उद्यमों को “स्थानीय से वैश्विक” बनाने के दृष्टिकोण में योगदान देती है।

एआईएम–नीति आयोग और एसटीपीआई ने बेंगलुरु में आयोजित किया ‘जीसीसी कॉन्क्लेव ऑन इनोवेशन 2026’

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भारत के नवाचार एवं उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने के लिए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग पर जोर

अटल इनोवेशन मिशन (AIM), नीति आयोग ने सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के सहयोग से बेंगलुरु में ‘जीसीसी कॉन्क्लेव ऑन इनोवेशन 2026’ का आयोजन किया। इस सम्मेलन में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के प्रमुख, अनुसंधान एवं विकास (R&D) विशेषज्ञ, नवाचार क्षेत्र के अग्रणी, स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े संस्थान, इनक्यूबेटर और नीति-निर्माता एक मंच पर आए। सम्मेलन का उद्देश्य भारत के नवाचार एवं उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत बनाने के लिए सहयोग के नए अवसर तलाशना था।

सम्मेलन में इंटेल, आईबीएम, बॉश, अमेज़न, एसएपी, थर्मो फिशर साइंटिफिक, सीजीआई, शेल, मर्सिडीज-बेंज, फिलिप्स, मॉर्गन स्टेनली, एनवीडिया, सैमसंग, सैंडिस्क, विप्रो, याहू सहित अनेक प्रमुख वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL), अटल इन्क्यूबेशन सेंटर (AIC), अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर (ACIC), एसटीपीआई के सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप, कर्नाटक डिजिटल इकोनॉमी मिशन (KDEM) तथा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े अन्य हितधारक भी उपस्थित रहे।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत के नवाचार तंत्र और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करना था। इसके अंतर्गत विद्यालय स्तर पर अटल टिंकरिंग लैब्स, स्टार्टअप इनक्यूबेशन के लिए AIC और ACIC, तथा आगामी AACESS (Atal Acceleration Centres for Scale-up of Startups) औद्योगिक एक्सेलेरेटर कार्यक्रम के माध्यम से स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई।

एसटीपीआई की भूमिका पर जोर

एसटीपीआई के महानिदेशक अरविंद कुमार ने कहा कि एसटीपीआई वर्ष 1991 से भारत के तकनीकी और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि आज भारत में 2,100 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर कार्यरत हैं, जो लगभग 100 अरब अमेरिकी डॉलर का वार्षिक राजस्व अर्जित कर रहे हैं। यह भारत की प्रतिभा और वैश्विक महत्वाकांक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि एसटीपीआई के टेक्नोलॉजी पार्क, सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप और डिजिटल अवसंरचना को अब अटल इनोवेशन मिशन के नवाचार नेटवर्क से जोड़कर जीसीसी को भारतीय स्टार्टअप्स के साथ सह-नवाचार, अत्याधुनिक तकनीकों के परीक्षण तथा नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण का अवसर मिलेगा। उन्होंने सभी जीसीसी से इस मिशन में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

‘जय अनुसंधान’ बने विकसित भारत की शक्ति : दीपक बागला

अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग के मिशन निदेशक दीपक बागला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘जय अनुसंधान’ के मंत्र को विकसित भारत की आधारशिला बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में AIM ने देशभर में 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब्स और 100 से अधिक इनक्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से नवाचार की मजबूत आधारशिला तैयार की है। उन्होंने कहा कि जीसीसी ने भारत को वैश्विक तकनीक, इंजीनियरिंग और उत्पाद नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाया है। यदि AIM और GCC मिलकर कार्य करें, तो प्रतिभा विकास, उद्यमिता, उद्योग आधारित नवाचार तथा वैश्विक स्तर के उद्यमों का निर्माण और तेज़ी से संभव होगा।

उन्होंने जीसीसी को मेंटरशिप, नवाचार चुनौतियों, पायलट प्रोजेक्ट, बाजार उपलब्ध कराने और स्टार्टअप-उद्योग साझेदारी के माध्यम से AIM की पहलों से जुड़ने का आह्वान किया।

बेंगलुरु नवाचार की राजधानी

एसटीपीआई बेंगलुरु के निदेशक डॉ. संजय त्यागी ने कहा कि बेंगलुरु देश के सबसे बड़े ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर इकोसिस्टम का केंद्र है। उन्होंने कहा कि एसटीपीआई पिछले तीन दशकों से तकनीकी अवसंरचना, नीति समर्थन और अनुपालन सेवाओं के माध्यम से जीसीसी को सशक्त बना रहा है।

उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से जीसीसी को अटल टिंकरिंग लैब्स में युवा नवाचारकों का मार्गदर्शन, अटल इन्क्यूबेशन सेंटरों के स्टार्टअप्स के साथ सह-निर्माण, तथा आगामी AACESS औद्योगिक एक्सेलेरेटर कार्यक्रम में भागीदारी जैसे ठोस अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

सम्मेलन में चार प्रमुख विषयों पर चर्चा

सम्मेलन में निम्नलिखित चार प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया गया—

  • अटल टिंकरिंग लैब्स के माध्यम से विद्यालय स्तर पर नवाचार को नई दिशा देना।

  • AIC एवं ACIC के माध्यम से नवाचार को उद्यम में बदलना।

  • AACESS औद्योगिक एक्सेलेरेटर कार्यक्रम के जरिए बड़े स्तर पर नवाचार को बढ़ावा देना।

  • संयुक्त एक्सेलेरेटर प्लेटफॉर्म एवं एसटीपीआई सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से उद्योग आधारित नवाचार को प्रोत्साहित करना।

प्रतिभागियों ने मेंटरशिप, तकनीकी सत्यापन, पायलट परियोजनाओं, नवाचार चुनौतियों, बाजार तक पहुंच और क्षेत्र-विशिष्ट एक्सेलेरेटर कार्यक्रमों के माध्यम से जीसीसी और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की।

AACESS कार्यक्रम पर विशेष फोकस

सम्मेलन में AIM के आगामी AACESS औद्योगिक एक्सेलेरेटर कार्यक्रम पर विशेष चर्चा हुई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विकास के चरण में पहुंच चुके स्टार्टअप्स को उद्योगों के साथ जोड़कर उन्हें औद्योगिक परीक्षण, पायलट प्रोजेक्ट, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और व्यावसायीकरण के अवसर उपलब्ध कराना है।

AIM ने उद्योगों और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स से इस कार्यक्रम के स्वरूप, सहयोग मॉडल, प्राथमिकताओं और स्टार्टअप्स के विस्तार में योगदान को लेकर सक्रिय सुझाव देने का आग्रह किया।

सम्मेलन में AIM और STPI के बीच भविष्य में नवाचार, स्टार्टअप्स, उद्यमिता और तकनीकी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सभी हितधारक संरचित परामर्श, साझेदारी और सहयोगी पहलों के माध्यम से नवाचार को गति देंगे, उद्यमिता को प्रोत्साहित करेंगे और भारत को वैश्विक नवाचार एवं प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में और अधिक सशक्त बनाएंगे।

विकसित भारत 2047 की आधारशिला है एमएसएमई क्षेत्र : उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन

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नई दिल्ली- भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 2026 समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) केवल एक आर्थिक क्षेत्र नहीं, बल्कि पहली पीढ़ी के उद्यमियों के साहस, युवाओं की आकांक्षाओं, महिला उद्यमियों के संकल्प और लाखों छोटे व्यवसायों के संघर्ष व सफलता का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत @2047' का सपना एक मजबूत और गतिशील एमएसएमई क्षेत्र के बिना संभव नहीं है।

उद्यमिता का अपना अनुभव साझा किया

उपराष्ट्रपति ने अपने उद्यमिता के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता की आर्थिक सहायता से एक छोटा गारमेंट व्यवसाय शुरू किया था। शुरुआती कठिनाइयों के बावजूद लगातार सीखने, मेहनत और धैर्य के बल पर उन्होंने इसे एक सफल निटवियर निर्यात व्यवसाय में बदल दिया। उन्होंने युवाओं से कहा कि शुरुआती चुनौतियों से घबराने के बजाय अपने काम को सीखने और बेहतर बनाने पर ध्यान दें।

गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं

उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में गुणवत्ता (Quality) ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। लागत कम करने के प्रयास में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि असली सफलता वही है, जब कम लागत में बेहतर गुणवत्ता और उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान की जाएं।

हर छोटा उद्यम आगे बढ़ने का लक्ष्य रखे

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्येक सूक्ष्म उद्यम को लघु उद्यम बनने और प्रत्येक लघु उद्यम को मध्यम उद्यम बनने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुटीर उद्योगों को एक ही स्तर पर सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें निवेश, नवाचार और तकनीक के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए। इसके लिए आसान वित्तीय सहायता और अनुकूल नीतियों की आवश्यकता है।

एमएसएमई का सार्वभौमिक पंजीकरण जरूरी

उन्होंने एमएसएमई मंत्रालय से सभी उद्यमों का व्यापक पंजीकरण सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि इससे सरकार को वास्तविक आंकड़े मिलेंगे और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बेहतर नीतियां बनाई जा सकेंगी।

एआई को अवसर के रूप में अपनाएं

संयुक्त राष्ट्र की इस वर्ष की थीम "AI-Driven Future में Human-Centered Entrepreneurship" का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को खतरे के बजाय अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे कंप्यूटर आने पर रोजगार खत्म होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद में उसी तकनीक ने नए अवसर पैदा किए। एआई भी भविष्य में नए रोजगार और व्यवसायिक संभावनाएं लेकर आएगा।

खादी और ग्रामोद्योग की सराहना

उन्होंने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने शहद उत्पादन और खादी वस्त्रों के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन किया है। उन्होंने कहा कि गांधीवादी विचारों से प्रेरित खादी को आधुनिक तकनीक और बदलती उपभोक्ता आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर विकसित होना चाहिए।

कई नई डिजिटल पहल की शुरुआत

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (NSIC) को शेड्यूल 'A' कंपनी का दर्जा मिलने पर सम्मानित किया। साथ ही उन्होंने कई नई डिजिटल पहलों की शुरुआत की, जिनमें शामिल हैं—

  • PMEGP 2.0 पोर्टल

  • समाधान 2.0 पोर्टल

  • प्रोक्योरमेंट एंड मार्केटिंग सपोर्ट (PMS) 2.0 पोर्टल

  • MSME ग्लोबल मार्ट 2.0 पोर्टल

  • टेस्टिंग सेंटर पोर्टल

  • एमएसएमई मंत्रालय की बहुभाषी डिजिटल पहल

  • MSME आइडिया हैकाथॉन 6.0

इसके अलावा सेल्फ रिलायंट इंडिया (SRI) फंड और पीएम विश्वकर्मा योजना पर आधारित ई-बुक्स का विमोचन तथा KVIC के नए उत्पादों का भी शुभारंभ किया गया।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी, राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, KVIC के अध्यक्ष मनोज कुमार, एमएसएमई मंत्रालय के सचिव भारत खेड़ा, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में उद्यमी उपस्थित रहे।

ASPIRE: ग्रामीण सपनों को उद्यम में बदलने की कहानी

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मेघालय के मावसिनराम की बारिश भरी एक सुबह, दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले इस इलाके में रहने वाले बंशैलांग मारबानियांग आसमान में छाए बादलों को देख रहे थे। लेकिन उनके मन में बारिश नहीं, बल्कि एक सवाल था—देश के सबसे दूरदराज़ इलाकों में रहने वाला एक युवा, जहां अवसर बेहद सीमित हों, अपना भविष्य कैसे बनाए?

वर्षों तक उन्होंने अपने दोस्तों और पड़ोसियों को रोजगार की तलाश में गांव छोड़ते देखा। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के कारण अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना असंभव लगता था। लेकिन स्थानीय कृषि उत्पादों की प्रचुरता ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि क्या इन्हीं संसाधनों के आधार पर कोई उद्यम खड़ा किया जा सकता है।

ASPIRE योजना बनी जीवन का टर्निंग प्वाइंट

बंशैलांग के जीवन में बदलाव तब आया जब उन्हें भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), गुवाहाटी द्वारा दिए जा रहे उद्यमिता प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम की जानकारी मिली। IIE, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) की ASPIRE (A Scheme for Promotion of Innovation, Rural Industries and Entrepreneurship) योजना के अंतर्गत मेंटर संस्थान है।

इस प्रशिक्षण ने उन्हें तकनीकी ज्ञान, व्यावसायिक कौशल और आत्मविश्वास प्रदान किया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय कृषि उत्पादों पर आधारित फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू की और यह साबित किया कि सही मार्गदर्शन और कौशल के साथ कहीं भी अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

ग्रामीण भारत में उद्यमिता को बढ़ावा

बंशैलांग की कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में हो रहे बड़े बदलाव का प्रतीक है।

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा और संसाधनों की कमी नहीं थी, लेकिन प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग के अभाव में लोग अपने विचारों को व्यवसाय में नहीं बदल पाते थे। इसी चुनौती को देखते हुए 2015 में MSME मंत्रालय ने ASPIRE योजना शुरू की, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और कृषि आधारित उद्योगों में उद्यमिता तथा रोजगार को बढ़ावा देना है।

2018 और 2023 में योजना के दिशा-निर्देशों में संशोधन कर इसे और प्रभावी बनाया गया। अब इसका मुख्य केंद्र लाइवलीहुड बिजनेस इन्क्यूबेटर्स (LBIs) हैं, जो लोगों को कौशल से लेकर व्यवसाय स्थापित करने तक हर स्तर पर सहायता प्रदान करते हैं।

कैसे काम करते हैं LBI?

लाइवलीहुड बिजनेस इन्क्यूबेटर केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं हैं, बल्कि ऐसे संस्थान हैं जो नए उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराते हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • आधुनिक मशीनों और तकनीक तक पहुंच

  • बिजनेस मेंटरिंग

  • उत्पाद विकास

  • ब्रांडिंग और पैकेजिंग

  • गुणवत्ता प्रमाणन

  • नियामकीय अनुमतियां

  • बाजार से जुड़ाव

  • वित्तीय सहायता तक पहुंच

इन इन्क्यूबेटर्स के संचालन में भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), कृषि विश्वविद्यालय, तकनीकी संस्थान और IIT जोधपुर जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

देशभर में बढ़ रहा ASPIRE का दायरा

ASPIRE के तहत देशभर में खाद्य प्रसंस्करण, शहद उत्पादन, बांस उत्पाद, मशरूम उत्पादन, मसाला प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और कॉयर उद्योग जैसे क्षेत्रों में हजारों उद्यम विकसित किए जा रहे हैं।

जून 2026 तक—

  • 27 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में 109 LBI स्वीकृत

  • 1.23 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण

  • वर्ष 2022-23 से अब तक 1,200 से अधिक सूक्ष्म उद्यम स्थापित

महिलाओं और वंचित वर्गों को मिला बड़ा लाभ

ASPIRE योजना उद्यमिता को अधिक समावेशी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

2022-23 से अब तक—

  • 28,500 से अधिक महिलाओं को उद्यमिता के अवसर

  • 8,700 से अधिक अनुसूचित जाति (SC) लाभार्थी

  • 9,600 से अधिक अनुसूचित जनजाति (ST) लाभार्थी

  • 17,600 से अधिक अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) लाभार्थी

ये आंकड़े बताते हैं कि अब उद्यमिता केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांवों और छोटे कस्बों में भी आत्मनिर्भरता और रोजगार का नया माध्यम बन रही है।

मावसिनराम से कर्तव्य पथ तक

बंशैलांग मारबानियांग की सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला। उन्हें 75वें गणतंत्र दिवस समारोह में कर्तव्य पथ, नई दिल्ली पर विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। वे पूर्वोत्तर भारत के उन दस उद्यमियों में शामिल थे जिन्होंने अपने प्रयासों और ASPIRE योजना के सहयोग से रोजगार खोजने वाले से रोजगार देने वाले बनने तक का सफर तय किया।

आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदम

ASPIRE योजना हजारों युवाओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराकर उनके सपनों को सफल उद्यमों में बदल रही है। यह योजना केवल नए व्यवसाय नहीं बना रही, बल्कि ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाते हुए रोजगार सृजन, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती दे रही है।

युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना राज्य की सर्वाेच्च प्राथमिकता : राज्य नीति आयोग उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा

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मोबाइल और ड्रग्स की बढ़ती लत, बेरोजगारी तथा सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार होगा विशेष कार्ययोजना

उपाध्यक्ष मिश्रा ने यूएनडीपी को ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण परियोजना तैयार करने के दिए निर्देश

रायपुर- छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने कहा है कि राज्य के सामने वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में ग्रामीण युवाओं की बेरोजगारी, मोबाइल एडिक्शन, ड्रग्स की बढ़ती लत, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और बढ़ती आपराधिक गतिविधियां शामिल हैं। इन चुनौतियों का समाधान केवल रोजगार सृजन और कौशल विकास के माध्यम से ही संभव है।

छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग नवा रायपुर में में आयोजित एसएसएम पीआईयू एवं एम एंड ई यूनिट्स के इंडक्शन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मिश्रा ने कहा कि आज गांवों में बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं जो खेती-किसानी से जुड़ना नहीं चाहते, लेकिन उनके पास रोजगार के पर्याप्त अवसर भी नहीं हैं। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार का लक्ष्य 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़कर उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

उपाध्यक्ष जी एस मिश्रा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की अब तक की सबसे बड़ी टीम छत्तीसगढ़ में कार्य कर रही है और अगले छह महीनों में युवाओं के कौशल विकास और रोजगार सृजन के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होंने यूएनडीपी के विशेषज्ञों को निर्देश दिए कि ग्रामीण युवाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप प्लंबर, गार्डनर, कारपेंटर, इलेक्ट्रीशियन, टी.वी. मैकेनिक, मोबाईल रिपेयरिंग तथा अन्य रोजगारपरक व्यवसायों में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए व्यापक परियोजना तैयार की जाए।

मिश्रा ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को केवल कौशल तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि ऐसा मॉडल विकसित किया जाएगा जिससे प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को तत्काल रोजगार के अवसर मिल सकें। इसके लिए उद्योगों, निजी संस्थानों और सिविल सोसायटी संगठनों के सहयोग से प्रत्येक जिले में विशेष रोजगार आयोजन किए जाएंगे, जहां प्रशिक्षित युवाओं को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें सम्मानजनक आजीविका से जोड़ना है। इससे न केवल बेरोजगारी दर में कमी आएगी, बल्कि युवाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, सामाजिक चुनौतियों पर नियंत्रण मिलेगा और राज्य के समग्र विकास को नई गति प्राप्त होगी। 

उपाध्यक्ष मिश्रा ने विश्वास व्यक्त किया कि कौशल विकास, उद्योगों की सहभागिता और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से छत्तीसगढ़ देश में युवा सशक्तिकरण का एक सफल मॉडल बनकर उभरेगा।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के 11 साल: करोड़ों उद्यमियों को मिला सशक्तिकरण

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 अप्रैल 2015 को शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) ने आज 11 सफल वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह योजना देश के छोटे और सूक्ष्म उद्यमियों को बिना गारंटी के आसान ऋण उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

इस योजना के तहत गैर-कॉर्पोरेट और गैर-कृषि क्षेत्र के छोटे व्यवसायों को ₹20 लाख तक का कोलेटरल-फ्री लोन दिया जाता है, जिससे वे अपने व्यवसाय को शुरू या विस्तार कर सकें।

MSME सेक्टर की रीढ़ बनी योजना

MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ये न केवल बड़े उद्योगों के सहयोगी हैं बल्कि रोजगार सृजन और संतुलित आर्थिक विकास में भी अहम योगदान देते हैं। PMMY ने इन उद्यमों को नई ऊर्जा और वित्तीय पहुंच प्रदान की है।

वित्त मंत्री का बयान

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा:
“पिछले एक दशक में भारत में एक शांत क्रांति हुई है, जहां करोड़ों लोगों ने आत्मविश्वास के साथ उद्यमिता की ओर कदम बढ़ाया। PMMY ने ‘Funding the Unfunded’ के सिद्धांत पर काम करते हुए उन लोगों तक ऋण पहुंचाया, जो पहले बैंकिंग प्रणाली से बाहर थे।”

उन्होंने आगे कहा कि इस योजना ने उद्यमिता को लोकतांत्रिक बनाते हुए क्रेडिट तक पहुंच की बाधाओं को खत्म किया है।


बड़ी उपलब्धियां

  • अब तक 57.79 करोड़ से अधिक लोन स्वीकृत

  • कुल ₹40.07 लाख करोड़ का वितरण

  • लगभग 2/3 लोन महिलाओं को मिले

  • करीब 20% लोन पहली बार व्यवसाय शुरू करने वालों को दिए गए

  • नए उद्यमियों को 12.15 करोड़ लोन (₹12 लाख करोड़)

समावेशी विकास की दिशा में कदम

योजना का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचा है:

  • महिलाएं: 67% लाभार्थी

  • OBC वर्ग: 51% लाभार्थी

  • SC/ST और अन्य वंचित वर्गों को भी बड़ा लाभ

योजना के मुख्य स्तंभ

भारत के वित्तीय समावेशन कार्यक्रम के तीन प्रमुख आधार हैं:

  1. Banking the Unbanked (बैंकिंग से वंचित लोगों को जोड़ना)

  2. Securing the Unsecured (असुरक्षित को सुरक्षा देना)

  3. Funding the Unfunded (बिना वित्तीय सहायता वालों को ऋण देना)

PMMY इसी तीसरे स्तंभ का मुख्य आधार है।

लोन की श्रेणियां

  • शिशु: ₹50,000 तक

  • किशोर: ₹50,000 से ₹5 लाख तक

  • तरुण: ₹5 लाख से ₹10 लाख तक

  • तरुण प्लस: ₹10 लाख से ₹20 लाख तक

ये लोन मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग, सर्विस सेक्टर और कृषि से जुड़े व्यवसायों के लिए दिए जाते हैं।

वर्षवार प्रगति (संक्षेप)

  • 2015-16: ₹1.37 लाख करोड़

  • 2020-21: ₹3.22 लाख करोड़

  • 2023-24: ₹5.41 लाख करोड़

  • 2025-26 (मार्च तक): ₹5.65 लाख करोड़

राज्य मंत्री का बयान

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा:
“मुद्रा योजना ने छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाते हुए उन्हें औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और आर्थिक विकास को गति मिली है।”

निष्कर्ष

11 वर्षों में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने वित्तीय समावेशन को मजबूत करते हुए लाखों लोगों के उद्यमी बनने के सपनों को साकार किया है। यह योजना ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत आधार साबित हो रही है।

DPIIT और KRAFTON के बीच समझौता: स्टार्टअप और इनोवेशन को मिलेगा नया बढ़ावा

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भारत के स्टार्टअप और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने देशभर के स्टार्टअप्स, नवोन्मेषकों और उद्यमियों को समर्थन देने के लिए एक डिजिटल एंटरटेनमेंट कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस सहयोग का उद्देश्य डिजिटल एंटरटेनमेंट, ऑनलाइन गेमिंग, ई-स्पोर्ट्स, इंटरएक्टिव मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों जैसे क्षेत्रों में कार्य कर रहे प्रोडक्ट स्टार्टअप्स के विकास को बढ़ावा देना है। इसके तहत स्टार्टअप्स को संरचित उद्योग सहभागिता के माध्यम से स्केलेबल और उद्योग-उन्मुख समाधान विकसित करने में सहायता मिलेगी।

इस पहल के तहत स्टार्टअप्स को मेंटरशिप, उद्योग संबंधी जानकारी, नॉलेज एक्सचेंज प्लेटफॉर्म और विशेष सहभागिता के अवसर प्रदान किए जाएंगे। साथ ही, उन्हें प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट (PoC) विकास, बाजार तक पहुंच और उद्योग तंत्र में एकीकरण जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों को हासिल करने में भी सहयोग मिलेगा।

इस अवसर पर DPIIT के संयुक्त सचिव संजीव ने कहा कि यह सहयोग भारत की डिजिटल और क्रिएटिव अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की साझेदारियां स्टार्टअप्स को नवाचार, विस्तार और उभरती प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समाधान विकसित करने में सक्षम बनाती हैं।

इस सहयोग के अंतर्गत DPIIT, KRAFTON इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर भारत स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज के तहत नवाचार प्रतियोगिताएं आयोजित करने, साथ ही गेम डिजाइन, एनीमेशन, इमर्सिव टेक्नोलॉजी, ई-स्पोर्ट्स प्रबंधन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हैकाथॉन, वर्कशॉप और मास्टरक्लास आयोजित करने की संभावनाओं पर कार्य करेगा।

यह साझेदारी उद्योग से जुड़ाव, ज्ञान साझा करने और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुभव का अवसर भी प्रदान करेगी। चयनित स्टार्टअप्स को पायलट प्रोजेक्ट्स में भागीदारी और परिणामों के आधार पर आगे सहयोग के अवसर मिल सकते हैं।

इसके अलावा, यह पहल स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रमों में भागीदारी और आउटरीच गतिविधियों के माध्यम से स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने में भी मदद करेगी।

यह समझौता DPIIT के उप सचिव टी. एल. के. सिंह और KRAFTON इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के गवर्नमेंट रिलेशंस प्रमुख विभोर कुकरेती द्वारा दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया।

DPIIT और Razorpay की साझेदारी से स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा

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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए अग्रणी फिनटेक प्लेटफॉर्म Razorpay के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है। इस सहयोग को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करके औपचारिक रूप दिया गया है, जिसका उद्देश्य देशभर के स्टार्टअप्स, नवाचारकर्ताओं और उद्यमियों को समर्थन प्रदान करना है।

इस साझेदारी का उद्देश्य स्टार्टअप्स को वित्तीय उपकरणों, फाउंडर एनेबलमेंट प्रोग्राम्स और इकोसिस्टम सपोर्ट तक पहुंच प्रदान कर उनकी वृद्धि को तेज करना है। इससे शुरुआती और विकासशील चरण के स्टार्टअप्स को डिजिटल भुगतान समाधान, वित्तीय ढांचा और अन्य सहायता के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, यह सहयोग कंपनी पंजीकरण, मेंटरशिप और संरचित मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराएगा।

इस पहल के तहत ‘स्टार्टअप सहायक (Startup Sahayak)’ नामक एक विशेष प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है, जो शुरुआती चरण के उद्यमियों को एंड-टू-एंड सहायता प्रदान करेगा। इसमें कंपनी रजिस्ट्रेशन, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं तक पहुंच, फंडिंग के अवसरों पर मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

डीपीआईआईटी के संयुक्त सचिव संजीव ने कहा कि यह साझेदारी विभाग की स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि वित्तीय ढांचे और उपकरणों तक आसान पहुंच स्टार्टअप्स की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Razorpay के सह-संस्थापक एवं सीईओ हर्षिल माथुर ने कहा कि यह साझेदारी नवाचार को बढ़ावा देने और उद्यमिता को अधिक सुलभ एवं विस्तार योग्य बनाने के साझा उद्देश्य से प्रेरित है। उन्होंने विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ते स्टार्टअप्स के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और मेंटरशिप की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस सहयोग के तहत DPIIT और Razorpay, Startup India Hub के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मार्केटिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और वित्तीय प्रबंधन जैसे विषयों पर नियमित ज्ञान सत्र आयोजित करेंगे। DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को कंपनी पंजीकरण में शून्य प्रोफेशनल फीस (सरकारी शुल्क को छोड़कर) और विभिन्न वित्तीय एवं व्यावसायिक टूल्स पर क्रेडिट और प्रोत्साहन भी दिए जाएंगे।

स्टार्टअप्स को मेंटरशिप, पिच डेक समीक्षा, आवेदन मार्गदर्शन और क्यूरेटेड संसाधनों तक पहुंच भी मिलेगी। चयनित स्टार्टअप्स को फाउंडर कम्युनिटीज से जोड़ा जाएगा, जिससे नेटवर्किंग, अनुभव साझा करने और अतिरिक्त सहायता प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

यह सहयोग भारत स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज के तहत फिनटेक और डिजिटल नवाचार पर आधारित चुनौतियों के आयोजन की भी संभावनाओं को तलाशेगा।

इस समझौते पर DPIIT के उप सचिव टी.एल.के. सिंह और Razorpay के मुख्य सूचना अधिकारी आरिफ खान ने हस्ताक्षर किए, जिसमें दोनों संगठनों के अधिकारी उपस्थित रहे।

मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण से छात्राओं को मिला आत्मनिर्भरता का मार्ग

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शासकीय माता कर्मा कन्या महाविद्यालय के मशरूम उत्पादन इनक्यूबेशन सेंटर द्वारा स्किल एन्हांसमेंट कोर्स के अंतर्गत छात्राओं के लिए मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग द्वारा BA एवं BSc की छात्राओं के लिए विशेष रूप से महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित किया गया।

कार्यक्रम के समन्वयक एवं विभागाध्यक्ष डॉ स्वेतलाना नागल ने छात्राओं को मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने धान की पुआल (पैरा कुट्टी) को रासायनिक विधि से उपचारित करने  मशरूम स्पॉन से बैग तैयार करने तथा लगभग 25 दिनों के बाद तैयार बैग से मशरूम की तुड़ाई तक की तकनीकी जानकारी प्रदान की।इस अवसर पर बताया गया कि मशरूम एक पौष्टिक एवं स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ है, जिसमें प्रोटीन, विटामिन एवं खनिज लवण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि वसा एवं कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है। इसे बिना मिट्टी के धान के पुआल एवं गेहूं के भूसे पर आसानी से उगाया जा सकता है। मशरूम उत्पादन के लिए  25C डिग्री तापमान तथा 70% प्रतिशत आर्द्रता उपयुक्त मानी जाती है। इसके प्रमुख प्रकार बटन पैडी स्ट्रॉ एवं ढींगरी (ऑयस्टर) मशरूम हैं। साथ ही इसमें औषधीय गुण जैसे एंटी-कैंसर एंटी-डायबिटिक एवं एंटी-ऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं।

प्रायोगिक प्रशिक्षण में अतिथि शिक्षिका प्रेरणा कापसे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा लगभग 30 छात्राओं को रासायनिक विधि से ऑयस्टर मशरूम उत्पादन हेतु स्पॉन तैयार करने की प्रक्रिया सिखाई।कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की कार्यक्रम अधिकारी डॉ सरस्वती वर्मा ने मशरूम उत्पादन को ग्रामीण महिलाओं के लिए आय सृजन एवं कुपोषण दूर करने का प्रभावी साधन बताया।महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ एस बी कुमार ने छात्राओं के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को कम लागत में स्वरोजगार स्थापित करने की दिशा में प्रेरित किया गया जिससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।

सोनिपत स्टार्टअप समिट 4.0 में युवाओं और नवाचार पर जोर, राज्य मंत्री रक्ष खड़से ने किया संबोधन

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युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्ष खड़से (Raksha Khads)ने IIT दिल्ली टेक्नोपार्क में आयोजित सोनिपत स्टार्टअप समिट 4.0 में भाग लिया और नवाचार-प्रधान विकास और युवाओं द्वारा संचालित औद्योगिक परिवर्तन के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

अपने संबोधन में मंत्री खड़से ने कहा कि भारत, दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में, अनुसंधान, पूंजी निवेश और वैश्विक विस्तार द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण डीप-टेक चरण में प्रवेश कर रहा है। “इंडस्ट्री एक्सेलेरेशन एडिशन” थीम के तहत आयोजित इस समिट में स्टार्टअप, MSME, शोधकर्ता, कॉर्पोरेट और सरकारी प्रतिनिधि एक मंच पर आए ताकि टेक्नोलॉजी-आधारित उद्यम विकास को तेजी से बढ़ाया जा सके।

मंत्री खड़से ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि का उल्लेख करते हुए कहा कि स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों के माध्यम से एक आधुनिक, नवाचार-प्रधान और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार तैयार हो रहा है, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ा है।

समिट ने रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, रक्षा प्रौद्योगिकी और कृषि-प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र में स्टार्टअप को लॉन्चपैड प्रदान किया। विशेष रूप से हरियाणा एनसीआर औद्योगिक गलियारे में टीयर II और टीयर III क्षेत्रों के स्टार्टअप को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

उन्होंने बताया कि अटल इनोवेशन मिशन (NITI Aayog), स्टार्टअप इंडिया और सार्वजनिक-निजी सहयोग प्लेटफार्म स्टार्टअप को 50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता, इंक्यूबेशन सुविधाएँ, मेंटरशिप और बाजार से जोड़ने की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संधान और विकास, डीप-टेक नवाचार, सेमीकंडक्टर निर्माण, स्टार्टअप और MSME के लिए क्रेडिट गारंटी और हरित विकास पहल के लिए 2026 के केंद्रीय बजट ने भी समर्थन बढ़ाया है।

समिट ने सार्वजनिक-निजी साझेदारी का मजबूत मॉडल पेश किया, जहां युवा उद्यमियों को बौद्धिक संपदा, फंडिंग मार्ग, नियामक ढांचे और उत्पाद-बाजार संरेखण पर मार्गदर्शन मिला।

मंत्री खड़से ने खेल विज्ञान और विनिर्माण नवाचार के संबंधित क्षेत्रों जैसे कि स्पोर्ट्स एनालिटिक्स, वियरेबल तकनीक, बायोमैकेनिक्स, रिकवरी साइंस और AI-आधारित प्रदर्शन निगरानी पर भी प्रकाश डाला, जो भारत में खेल-केंद्रित स्टार्टअप के लिए नए अवसर खोल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के युवा नवप्रवर्तनकर्ता केवल स्टार्टअप नहीं बना रहे, बल्कि औद्योगिक क्षमता मजबूत करने, तकनीकी स्वतंत्रता बढ़ाने और विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान भी कर रहे हैं।

कार्यक्रम में अशोक कुमार (कुलपति, स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी हरियाणा), डॉ. बिपिन कुमार (सहायक प्रोफेसर, IIT दिल्ली), टी. के. सुन्दरमूर्ति (पूर्व मिशन डायरेक्टर, ISRO), शोभित माथुर (कुलपति, ऋषिउड यूनिवर्सिटी), प्रो. सैमुअल राज (SRM यूनिवर्सिटी), प्रो. अंबिका प्रसाद शाह (IIT जम्मू) सहित कई विद्वान और उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मंत्री खड़से ने आलोक पांडे, CEO, AIC IIT दिल्ली के योगदान और नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने में उनके नेतृत्व की सराहना की।

सोनिपत स्टार्टअप समिट 4.0 भारत की तेजी से विकसित हो रही नवाचार पारिस्थितिकी और युवाओं की रचनात्मकता, ऊर्जा और उद्यमिता के माध्यम से वैश्विक स्तर पर विस्तार की महत्वाकांक्षा का प्रतीक है।


डॉ. जितेंद्र सिंह ने AIM SUMVAAD में भारत के स्टार्टअप और नवाचार पर जोर दिया

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आज अटल इनोवेशन मिशन (AIM) वार्षिक इन्क्यूबेटर कॉन्क्लेव "AIM SUMVAAD" में संबोधित करते हुए, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान विभाग, और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन विभाग के मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने “अटल इनोवेशन मिशन” को मोदी सरकार की नवाचार-आधारित विकास और स्केलेबल स्टार्टअप नीति से जोड़ा। उन्होंने इस अवसर पर संघीय बजट 2026 में “Ease of Doing Business” पर भी ध्यान आकर्षित किया।

मंत्री ने कहा कि संघीय बजट 2026–27 भारत के स्टार्टअप और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती प्रदान करता है, जिसमें विशेष रूप से इन्क्यूबेशन, नवाचार और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप, बायोमैन्युफैक्चरिंग और महिलाओं में Self-Help Entrepreneurs (SHE) की अवधारणा जैसे नए सक्षम फ्रेमवर्क इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार समावेशी और सतत आर्थिक विकास की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने AIM SUMVAAD में मुख्य भाषण दिया, जो Bhim Auditorium, Dr. Ambedkar International Centre, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। यह कॉन्क्लेव अटल इनोवेशन मिशन का प्रमुख वार्षिक मंच है, जिसमें 150+ अटल इन्क्यूबेशन सेंटर और अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर देशभर से शामिल होते हैं। साथ ही इसमें नीति निर्माता, उद्योग के नेता, CSR प्रमुख, मेंटर्स और पारिस्थितिकी तंत्र के अन्य हितधारक भी भाग लेते हैं।

उद्घाटन सत्र में सुमन बेरी (उपाध्यक्ष, नीति आयोग), प्रो. अजय सूद (प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार), बी. वी. आर. सुब्रह्मण्यम (सीईओ, नीति आयोग), डॉ. राजेश एस. गोखले (सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग),  एंजेला लुसिजी (निवासी प्रतिनिधि, UNDP India), दीपक बागला (मिशन डायरेक्टर, AIM) सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

मंत्री ने कहा कि भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का विचार 2014 के बाद निर्णायक राजनीतिक समर्थन प्राप्त हुआ, जिससे बड़े पैमाने पर अटल टिंकरिंग लैब्स और स्टार्टअप-केंद्रित नीति हस्तक्षेप संभव हुए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगभग 50,000 अटल टिंकरिंग लैब्स संचालित हो रही हैं, जो छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों सहित सभी जिलों में नवाचार तक व्यापक पहुँच सुनिश्चित करती हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत का स्टार्टअप सफर एक दशक पहले कुछ सैकड़ों स्टार्टअप से बढ़कर अब दो लाख से अधिक स्टार्टअप तक पहुँच गया है, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हुआ और पारंपरिक वेतनभोगी करियर के विकल्प उपलब्ध हुए। इस बदलाव ने युवाओं को उद्यमिता को एक भरोसेमंद और प्रेरणादायक करियर विकल्प के रूप में देखने में मदद की है।

संघीय बजट 2026–27 का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि बायोमैन्युफैक्चरिंग शक्ति मिशन भारत की बायोटेक्नोलॉजी, बायोफार्मा, प्राकृतिक संसाधन और मानव संसाधन में ताकत के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही बायोमैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक अग्रणी देशों में शामिल है, और भविष्य में डीप-सी रिसोर्सेज, ओशन इकॉनमी और हिमालयी बायो-रिसोर्सेज जैसे क्षेत्रों पर ध्यान नवाचार के अवसर और बढ़ाएगा।

मंत्री ने नेशनल इन्क्यूबेटर असेसमेंट फ्रेमवर्क का भी उल्लेख किया, जिसे एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के रूप में डिज़ाइन किया गया है। यह देश भर के इन्क्यूबेटर के डेटा और प्रदर्शन इनसाइट्स को एकत्र करता है, और राष्ट्रीय स्तर पर बेंचमार्किंग, सहयोग, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और क्षमता निर्माण के लिए मंच प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि AIM SUMVAAD जैसे प्लेटफ़ॉर्म स्टार्टअप, इन्क्यूबेटर, मेंटर्स, उद्योग और नीति निर्माताओं के बीच सहयोग, नेटवर्किंग और दीर्घकालिक साझेदारी के अवसर प्रदान करते हैं, जिनमें स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

डॉ. सिंह ने बताया कि स्टार्टअप, इन्क्यूबेशन और महिला-केंद्रित आर्थिक पहल का एकीकृत दृष्टिकोण, जैसे लखपति दीदी और Self-Help Groups से Self-Help Entrepreneurs (SHE) तक का विकास, सरकार की समावेशी उद्यमिता और नवाचार-आधारित विकास में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।


स्टार्टअप इंडिया के एक दशक: भारत के नवाचार और आर्थिक परिवर्तन की कहानी

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • दिसंबर 2025 तक 2 लाख से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स के साथ भारत विश्व के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में मजबूती से स्थापित है।

  • स्टार्टअप इंडिया के एक दशक में विचार (Ideation) से लेकर फंडिंग, मेंटरशिप और स्केल-अप तक पूर्ण जीवन-चक्र समर्थन प्रणाली विकसित हुई है।

  • लगभग 50% स्टार्टअप टियर-II और टियर-III शहरों से उभर रहे हैं, जो उद्यमिता के लोकतंत्रीकरण का संकेत है।

  • AIM 2.0 का फोकस इकोसिस्टम की कमियों को दूर करने हेतु नए प्रयोगों (पायलट) और सफल मॉडलों के विस्तार पर है, जिसमें सरकार, उद्योग, शिक्षा संस्थान और समुदायों के साथ सहयोग किया जा रहा है।

  • SVEP, ASPIRE और PMEGP जैसे ग्रामीण और जमीनी कार्यक्रम सूक्ष्म उद्यमों, महिला-नेतृत्व वाले उपक्रमों और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दे रहे हैं।

स्टार्टअप्स: आर्थिक परिवर्तन में निर्णायक भूमिका

16 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर स्टार्टअप इंडिया पहल के एक ऐतिहासिक दशक को चिह्नित किया जा रहा है। 2016 में उद्यमिता को गति देने के लिए शुरू हुई यह पहल आज विश्व के सबसे बड़े और विविध स्टार्टअप इकोसिस्टम में परिवर्तित हो चुकी है।
“स्टार्टअप इंडिया” के माध्यम से यह आंदोलन विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से गहराई से जुड़ा है, जिसमें आर्थिक आधुनिकीकरण के साथ समावेशी और क्षेत्रीय विकास को भी प्राथमिकता दी गई है।

पिछले एक दशक में स्टार्टअप्स भारत के आर्थिक परिवर्तन के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभरे हैं—जो नवाचार, रोजगार सृजन और समावेशी विकास को आगे बढ़ा रहे हैं। दिसंबर 2025 तक भारत में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं। बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रमुख केंद्रों के साथ-साथ छोटे शहर भी इस गति में योगदान दे रहे हैं, जहाँ से लगभग 50% स्टार्टअप्स उभर रहे हैं।

आर्थिक विकास के प्रेरक के रूप में स्टार्टअप्स

स्टार्टअप्स:

  • तकनीकी नवाचार और उत्पादकता को बढ़ावा देते हैं

  • बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करते हैं

  • वित्तीय समावेशन और डिजिटल पहुँच को मजबूत करते हैं

  • क्षेत्रीय और जमीनी स्तर की उद्यमिता को प्रोत्साहित करते हैं

एग्री-टेक, टेलीमेडिसिन, माइक्रोफाइनेंस, पर्यटन और एड-टेक जैसे क्षेत्रों में समाधान देकर स्टार्टअप्स ग्रामीण–शहरी अंतर को पाट रहे हैं।
दिसंबर 2025 तक 45% से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक/भागीदार हैं, जो समावेशी और संतुलित विकास का स्पष्ट संकेत है।

स्टार्टअप इंडिया पहल: भारत के नवाचार तंत्र की रीढ़

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत DPIIT द्वारा संचालित स्टार्टअप इंडिया पहल आज एक बहुआयामी मंच बन चुकी है, जो विचार से लेकर विस्तार तक स्टार्टअप्स का समर्थन करती है।
2014 में जहाँ केवल 4 यूनिकॉर्न थे, वहीं आज 120 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियाँ हैं, जिनका संयुक्त मूल्यांकन 350 बिलियन डॉलर से अधिक है।

स्टार्टअप्स भारत की युवा जनसंख्या का लाभ उठाते हुए प्रौद्योगिकी, सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्रों में रोजगार सृजित कर रहे हैं, साथ ही गिग इकॉनमी और सप्लाई चेन के माध्यम से अप्रत्यक्ष रोजगार भी बढ़ा रहे हैं।

स्टार्टअप इंडिया के प्रमुख कार्यक्रम

फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स (FFS)

  • कुल कोष: ₹10,000 करोड़

  • 140+ AIFs के माध्यम से 1,370+ स्टार्टअप्स में ₹25,500+ करोड़ निवेश

क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर स्टार्टअप्स (CGSS)

  • 330+ ऋण, ₹800 करोड़ से अधिक की गारंटी

स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (SISFS)

  • कुल कोष: ₹945 करोड़

  • 215+ इनक्यूबेटर्स को स्वीकृति

स्टार्टअप इंडिया हब

  • निवेशकों, मेंटर्स, इनक्यूबेटर्स और उद्यमियों को जोड़ने वाला डिजिटल मंच

स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क (SRF)

  • राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा

राष्ट्रीय मेंटरशिप पोर्टल (MAARG)

  • देशभर के स्टार्टअप्स को अनुभवी मार्गदर्शकों से जोड़ता है

स्टार्टअप इंडिया इन्वेस्टर कनेक्ट पोर्टल

  • SIDBI के सहयोग से स्टार्टअप्स और निवेशकों को जोड़ने वाला मंच

स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त करने वाली अन्य योजनाएँ

अटल इनोवेशन मिशन (AIM)

  • कुल परिव्यय: ₹2,750 करोड़ (2028 तक)

  • 10,000+ अटल टिंकरिंग लैब्स, 1.1 करोड़ से अधिक छात्र लाभान्वित

AIM 2.0 में नई पहलें:

  • LIPI (भाषा समावेशन)

  • फ्रंटियर प्रोग्राम (J&K, NE, आकांक्षी जिले)

  • डीपटेक रिएक्टर

  • इंटरनेशनल इनोवेशन सहयोग

GENESIS (MeitY)

  • बजट: ₹490 करोड़

  • टियर-II/III शहरों में 1,600 डीपटेक स्टार्टअप्स को समर्थन

MeitY स्टार्टअप हब

  • 6,148+ स्टार्टअप्स, 517+ इनक्यूबेटर्स

TIDE 2.0

  • 51 इनक्यूबेटर्स के माध्यम से ICT आधारित स्टार्टअप्स को समर्थन

NIDHI (DST)

  • 12,000+ स्टार्टअप्स, 1.3 लाख+ रोजगार, 1,100+ IP

ग्रामीण और जमीनी स्तर की पहल

SVEP

  • 3.74 लाख उद्यमों को समर्थन (जून 2025 तक)

ASPIRE

  • ग्रामीण उद्योगों और माइक्रो-एंटरप्राइज को बढ़ावा

PMEGP

  • स्वरोजगार हेतु मार्जिन मनी सब्सिडी

  • विनिर्माण क्षेत्र में ₹50 लाख तक परियोजना समर्थन

आगे की राह: नवाचार और क्रियान्वयन का भविष्य

स्टार्टअप इंडिया के एक दशक बाद, भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेज़ विस्तार से टिकाऊ विकास की ओर अग्रसर है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, युवा जनसंख्या और सुधार-आधारित नीतियों के बल पर स्टार्टअप्स भारत की $7.3 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था (2030) और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में केंद्रीय भूमिका निभाते रहेंगे।

स्टार्टअप्स अब केवल विकास के उत्प्रेरक नहीं, बल्कि भारत के भविष्य-तैयार, नवाचार-आधारित आर्थिक मॉडल के प्रतीक बन चुके हैं।

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