Media24Media.com: #SmallBusiness

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #SmallBusiness. Show all posts
Showing posts with label #SmallBusiness. Show all posts

विकसित भारत 2047 की आधारशिला है एमएसएमई क्षेत्र : उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 2026 समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) केवल एक आर्थिक क्षेत्र नहीं, बल्कि पहली पीढ़ी के उद्यमियों के साहस, युवाओं की आकांक्षाओं, महिला उद्यमियों के संकल्प और लाखों छोटे व्यवसायों के संघर्ष व सफलता का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत @2047' का सपना एक मजबूत और गतिशील एमएसएमई क्षेत्र के बिना संभव नहीं है।

उद्यमिता का अपना अनुभव साझा किया

उपराष्ट्रपति ने अपने उद्यमिता के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता की आर्थिक सहायता से एक छोटा गारमेंट व्यवसाय शुरू किया था। शुरुआती कठिनाइयों के बावजूद लगातार सीखने, मेहनत और धैर्य के बल पर उन्होंने इसे एक सफल निटवियर निर्यात व्यवसाय में बदल दिया। उन्होंने युवाओं से कहा कि शुरुआती चुनौतियों से घबराने के बजाय अपने काम को सीखने और बेहतर बनाने पर ध्यान दें।

गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं

उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में गुणवत्ता (Quality) ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। लागत कम करने के प्रयास में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि असली सफलता वही है, जब कम लागत में बेहतर गुणवत्ता और उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान की जाएं।

हर छोटा उद्यम आगे बढ़ने का लक्ष्य रखे

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्येक सूक्ष्म उद्यम को लघु उद्यम बनने और प्रत्येक लघु उद्यम को मध्यम उद्यम बनने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुटीर उद्योगों को एक ही स्तर पर सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें निवेश, नवाचार और तकनीक के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए। इसके लिए आसान वित्तीय सहायता और अनुकूल नीतियों की आवश्यकता है।

एमएसएमई का सार्वभौमिक पंजीकरण जरूरी

उन्होंने एमएसएमई मंत्रालय से सभी उद्यमों का व्यापक पंजीकरण सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि इससे सरकार को वास्तविक आंकड़े मिलेंगे और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बेहतर नीतियां बनाई जा सकेंगी।

एआई को अवसर के रूप में अपनाएं

संयुक्त राष्ट्र की इस वर्ष की थीम "AI-Driven Future में Human-Centered Entrepreneurship" का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को खतरे के बजाय अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे कंप्यूटर आने पर रोजगार खत्म होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद में उसी तकनीक ने नए अवसर पैदा किए। एआई भी भविष्य में नए रोजगार और व्यवसायिक संभावनाएं लेकर आएगा।

खादी और ग्रामोद्योग की सराहना

उन्होंने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने शहद उत्पादन और खादी वस्त्रों के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन किया है। उन्होंने कहा कि गांधीवादी विचारों से प्रेरित खादी को आधुनिक तकनीक और बदलती उपभोक्ता आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर विकसित होना चाहिए।

कई नई डिजिटल पहल की शुरुआत

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (NSIC) को शेड्यूल 'A' कंपनी का दर्जा मिलने पर सम्मानित किया। साथ ही उन्होंने कई नई डिजिटल पहलों की शुरुआत की, जिनमें शामिल हैं—

  • PMEGP 2.0 पोर्टल

  • समाधान 2.0 पोर्टल

  • प्रोक्योरमेंट एंड मार्केटिंग सपोर्ट (PMS) 2.0 पोर्टल

  • MSME ग्लोबल मार्ट 2.0 पोर्टल

  • टेस्टिंग सेंटर पोर्टल

  • एमएसएमई मंत्रालय की बहुभाषी डिजिटल पहल

  • MSME आइडिया हैकाथॉन 6.0

इसके अलावा सेल्फ रिलायंट इंडिया (SRI) फंड और पीएम विश्वकर्मा योजना पर आधारित ई-बुक्स का विमोचन तथा KVIC के नए उत्पादों का भी शुभारंभ किया गया।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी, राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, KVIC के अध्यक्ष मनोज कुमार, एमएसएमई मंत्रालय के सचिव भारत खेड़ा, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में उद्यमी उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के 11 साल: करोड़ों उद्यमियों को मिला सशक्तिकरण

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 अप्रैल 2015 को शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) ने आज 11 सफल वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह योजना देश के छोटे और सूक्ष्म उद्यमियों को बिना गारंटी के आसान ऋण उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

इस योजना के तहत गैर-कॉर्पोरेट और गैर-कृषि क्षेत्र के छोटे व्यवसायों को ₹20 लाख तक का कोलेटरल-फ्री लोन दिया जाता है, जिससे वे अपने व्यवसाय को शुरू या विस्तार कर सकें।

MSME सेक्टर की रीढ़ बनी योजना

MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ये न केवल बड़े उद्योगों के सहयोगी हैं बल्कि रोजगार सृजन और संतुलित आर्थिक विकास में भी अहम योगदान देते हैं। PMMY ने इन उद्यमों को नई ऊर्जा और वित्तीय पहुंच प्रदान की है।

वित्त मंत्री का बयान

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा:
“पिछले एक दशक में भारत में एक शांत क्रांति हुई है, जहां करोड़ों लोगों ने आत्मविश्वास के साथ उद्यमिता की ओर कदम बढ़ाया। PMMY ने ‘Funding the Unfunded’ के सिद्धांत पर काम करते हुए उन लोगों तक ऋण पहुंचाया, जो पहले बैंकिंग प्रणाली से बाहर थे।”

उन्होंने आगे कहा कि इस योजना ने उद्यमिता को लोकतांत्रिक बनाते हुए क्रेडिट तक पहुंच की बाधाओं को खत्म किया है।


बड़ी उपलब्धियां

  • अब तक 57.79 करोड़ से अधिक लोन स्वीकृत

  • कुल ₹40.07 लाख करोड़ का वितरण

  • लगभग 2/3 लोन महिलाओं को मिले

  • करीब 20% लोन पहली बार व्यवसाय शुरू करने वालों को दिए गए

  • नए उद्यमियों को 12.15 करोड़ लोन (₹12 लाख करोड़)

समावेशी विकास की दिशा में कदम

योजना का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचा है:

  • महिलाएं: 67% लाभार्थी

  • OBC वर्ग: 51% लाभार्थी

  • SC/ST और अन्य वंचित वर्गों को भी बड़ा लाभ

योजना के मुख्य स्तंभ

भारत के वित्तीय समावेशन कार्यक्रम के तीन प्रमुख आधार हैं:

  1. Banking the Unbanked (बैंकिंग से वंचित लोगों को जोड़ना)

  2. Securing the Unsecured (असुरक्षित को सुरक्षा देना)

  3. Funding the Unfunded (बिना वित्तीय सहायता वालों को ऋण देना)

PMMY इसी तीसरे स्तंभ का मुख्य आधार है।

लोन की श्रेणियां

  • शिशु: ₹50,000 तक

  • किशोर: ₹50,000 से ₹5 लाख तक

  • तरुण: ₹5 लाख से ₹10 लाख तक

  • तरुण प्लस: ₹10 लाख से ₹20 लाख तक

ये लोन मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग, सर्विस सेक्टर और कृषि से जुड़े व्यवसायों के लिए दिए जाते हैं।

वर्षवार प्रगति (संक्षेप)

  • 2015-16: ₹1.37 लाख करोड़

  • 2020-21: ₹3.22 लाख करोड़

  • 2023-24: ₹5.41 लाख करोड़

  • 2025-26 (मार्च तक): ₹5.65 लाख करोड़

राज्य मंत्री का बयान

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा:
“मुद्रा योजना ने छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाते हुए उन्हें औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और आर्थिक विकास को गति मिली है।”

निष्कर्ष

11 वर्षों में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने वित्तीय समावेशन को मजबूत करते हुए लाखों लोगों के उद्यमी बनने के सपनों को साकार किया है। यह योजना ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत आधार साबित हो रही है।

झोपड़ियों से स्वयं सहायता समूहों तक: गोवा की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करते जीएसटी सुधार

No comments Document Thumbnail

 परिचय

अपनी सुसेगाद भावना के लिए प्रसिद्ध, गोवा की अर्थव्यवस्था पर्यटन, पारंपरिक उद्योगों और आधुनिक उद्यमों के जीवंत मिश्रण पर आधारित है। अकेले पर्यटन ही गोवा के जीएसडीपी का करीब 16% है, जबकि फार्मास्यूटिकल्स,  मत्स्य पालन, काजू प्रसंस्करण और हस्तशिल्प इसके कस्बों और गाँवों में असंख्य आजीविकाओं को सहारा देते हैं।

हाल ही में किए गए जीएसटी सुधारों से इस विविध अर्थव्यवस्था क सही वक्त पर बढ़ावा मिला है, जिससे सामर्थ्य में वृद्धि हुई हैइनपुट लागत में कमी आई है और विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ी है।

पर्यटन एवं परिवहन उद्योग

पर्यटन और आतिथ्य

नई जीएसटी दरों से गोवा के मज़बूत पर्यटन तथा आतिथ्य उद्योग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद हैजिसमें उत्तरी गोवा के तटीय क्षेत्र जैसे कलंगुटकैंडोलिमबागा और अंजुनापणजी और दक्षिण गोवा के कोल्वाबेनौलिम और पालोलेम क्षेत्र शामिल हैं।

मार्च 2025 तकइस क्षेत्र में करीब 2.5 लाख लोग कार्यरत थेजो गोवा के कुल कार्यबल का लगभग 40% है। पर्यटन राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपीमें 16.43% का योगदान देता हैजिससे यह स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक मज़बूत चालक बन जाता है।

जीएसटी दरों में कटौती से इनपुट लागत में खासी कमी आने की उम्मीद है। टॉयलेटरीज़टेबलवेयर और नाश्ते के सामान जैसी सामान्य सुविधाओं के 18% से घटकर 5% की श्रेणी में आने से इनकी कीमतों में करीब 11% की कमी आने की संभावना है। इसके अलावापहले से पैक किया हुआ नारियल पानी और इसी तरह की अन्य वस्तुओं के भी 12% से 5% की श्रेणी में आने से इनकी कीमतें लगभग 6.25% सस्ती हो सकती हैं। ये सुधार सामूहिक रूप से परिचालन लागत को कम करते हैं और गोवा की पर्यटन मूल्य श्रृंखला में सामर्थ्य को बढ़ाते हैं।

रेस्टोरेंट और पेय पदार्थों के कियोस्क

गोवा में रेस्टोरेंट और पेय पदार्थ कियोस्कजिनमें बीच शैककैफ़े और जूस स्टॉल शामिल हैंफलों के रस पर जीएसटी की दर 12% से घटकर 5% होने से लाभान्वित होंगे। करीब 8,000 लोगों को रोजगार देने वाले इस क्षेत्र में शैक विक्रेताफलों के रस विक्रेता और छोटे कियोस्क संचालक शामिल हैंजो दैनिक पर्यटकों की आमद पर बहुत अधिक निर्भर हैं।

जीएसटी में कटौती से लागत में करीब 6.25% की कमी आने की उम्मीद हैजिससे उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता बढ़ेगी। इससे छोटे विक्रेताओं की बिक्री बढ़ेगी और स्थानीय उद्यमियों की आय में भी सुधार होगा।

ऑटो/टैक्सी और बाइक-रेंटल व्यवस्था

गोवा में ऑटोटैक्सी और बाइक-रेंटल व्यवस्था को भी हाल ही में हुए जीएसटी सुधारों से लाभ होने की उम्मीद हैजिसके तहत छोटी कारों (1200 सीसी) और बाइक (350 सीसी) पर कर की दर 28% से घटाकर 18% कर दी गई है। यह बदलाव हवाई अड्डोंरेलवे स्टेशनों और तटीय क्षेत्रों में संचालित टैक्सी यूनियनों और रेंटल फर्मों पर सीधा असर डालता है। यह क्षेत्र लगभग 40,000 लोगों की आजीविका का साधन हैजिनमें टैक्सी चालकबाइक किराए पर देने वाले और मैकेनिक शामिल हैंजो आम तौर पर स्व-नियोजित हैं और पर्यटकों की मांग पर निर्भर हैं।



वित्त वर्ष 2023-24 के दौरानऑटोटैक्सी और किराये के परिवहन खंड ने गोवा के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपीमें लगभग 2% का योगदान दिया। जीएसटी दर में कटौती के साथऑन-रोड टैक्स घटक में वाहन की अंतिम कीमत में करीब 7.8% की कमी आने की उम्मीद है। वित्तीय लाभ इस सामर्थ्य को और बढ़ाते हैंस्थानीय ऑपरेटरों की मदद करते हैंसाथ ही पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए परिवहन की सुलभता में सुधार करते हैं।

फार्मास्युटिकल फ़ॉर्मूलेशंस और डायग्नोस्टिक्स

फार्मास्युटिकल फ़ॉर्मूलेशंस और डायग्नोस्टिक्स क्षेत्र वर्नापिलेर्नकुंडैमकॉर्लिमबिचोलिम और पोंडा औद्योगिक क्षेत्रों में केंद्रित हैजिसे मोरमुगाओ बंदरगाह के ज़रिए रसद द्वारा समर्थन दिया जाता है। इसमें कुशल रसायनज्ञप्रयोगशाला तकनीशियनकार्यशाला कर्मचारी और क्यूसी कर्मचारी कार्यरत हैंजिनमें प्रवासी और स्थानीय दोनों प्रकार के कार्यबल फ़ॉर्मूलेशंस और आईवीडी इकाइयों में स्थिर नौकरियों पर निर्भर हैं।

2022 तकइस उद्योग ने 75,000 से अधिक लोगों को रोजगार दियाजो राज्य के कुल कारखाना कर्मचारियों का 22.5% है। यह क्षेत्र भारतीय डायग्नोस्टिक्स बाजार के साथ-साथ एशिया और अफ्रीका के निर्यात खरीदारों के साथ भी कार्यरत है। 2023-24 मेंगोवा के कुल व्यापारिक निर्यात में दवाओं और फार्मास्यूटिकल्स का योगदान 51% था।

संशोधित जीएसटी दरों के बादकई इनपुट और सेवाओं पर कर 18% से घटाकर 5% कर दिया गया हैजबकि कुछ चिकित्सा वस्तुओं पर कर शून्य हो गया है। इन संशोधनों से कीमतों में लगभग 11% की कमी आने की उम्मीद हैजबकि प्रयोगशालाओं में इस्तेमाल होने वाली किताबें और स्टेशनरी जैसी शून्य दर वाली वस्तुएं करीब 4.8% सस्ती होने की उम्मीद है। इन बदलावों से गोवा के फार्मास्युटिकल इकोसिस्टम में सामर्थ्य और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की उम्मीद है।

निर्माण एवं रियल एस्टेट इनपुट

गोवा में निर्माण और रियल एस्टेट क्षेत्र को हाल ही में हुए जीएसटी सुधारों से काफी लाभ हुआ हैजिसके तहत सीमेंट पर कर की दर 28% से घटाकर 18% कर दी गई हैसाथ ही कई अन्य सामग्रियों पर भी कर में कटौती की गई है। इन सुधारों से उत्तर और दक्षिण गोवा में रियल एस्टेट और होटल परियोजनाओं के साथ-साथ बुनियादी ढाँचे और होमस्टे विकास को भी लाभ हुआ है। इस क्षेत्र में लगभग 35,000 लोग कार्यरत हैंजिनमें दिहाड़ी राजमिस्त्रीप्लंबरइलेक्ट्रीशियन और बढ़ई शामिल हैं। 2023-24 में निर्माण और रियल एस्टेट ने मिलकर गोवा के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपीमें लगभग 13.4% का योगदान दिया।

कम जीएसटी दरें, डेवलपर्स और बिल्डरों के लिए इनपुट लागत को सीधे कम करती हैंजिससे आवासीय और व्यावसायिक दोनों परियोजनाओं के लिए मार्जिन और सामर्थ्य में सुधार होता है। अकेले सीमेंट पर दर में 28% से 18% की कमी सेउसी एक्स-फैक्ट्री दर पर कीमतों में लगभग 7.8% की कमी आने का अनुमान हैजिसके नतीजतन प्रति बैग लगभग 25-30 रुपए की बचत होगी।

मत्स्य पालन और समुद्री खाद्य उद्योग

गोवा में मत्स्य पालन और समुद्री खाद्य मूल्य श्रृंखलाजो खारीवाड़ा (वास्को)कटबोना (बेतुल)तलपोनामालिमचापोरा और कोरटालिम के केंद्र में हैअब 5% की कम जीएसटी दर का लाभ उठा रही है। गोवा के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में लगभग 2.5% का योगदान देने वाला यह उद्योग, नाव चालक दलछोटे पैमाने के मछुआरोंप्रवासी डेकहैंड्सनीलामकर्ताओं और महिला विक्रेताओं को आजीविका प्रदान करता हैऔर कई तटीय परिवार मौसमी मछली पकड़ने पर निर्भर रहते हैं। 2016 मेंइस क्षेत्र में करीब 15,000 लोग कार्यरत थे।

जीएसटी सुधारों ने इनपुट सामग्री और समुद्री खाद्य उत्पादोंदोनों को कवर करते हुएसंपूर्ण मूल्य श्रृंखला में राहत प्रदान की है। जालचारा और जलीय कृषि इनपुट पर जीएसटी घटाकर 5% करने से, उत्पादन लागत में कमी आने और लाभ मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। जिन वस्तुओं पर पहले 12% और 18% कर लगता थाअब उन पर केवल 5% कर लगता हैजिससे उपभोक्ता कीमतों में क्रमशः लगभग 6.25% और 11% की अनुमानित कमी आई है।

इससे मडगांव और वास्को में फ्रोजन मछली और झींगा निर्यातकों को सीधे तौर पर लाभ होगाऔर अमेरिकायूरोपीय संघ और जापान सहित स्थानीय और वैश्विक बाजारों में निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता लाने में मदद मिलेगी।

बेकरी और पैकेज्ड फ़ूड



गोवा के बेकरी और पैकेज्ड फ़ूड सेक्टरजिसमें पेस्ट्रीबिस्कुटनमकीनपास्तानूडल्स और चॉकलेट शामिल हैंको जीएसटी दर 12%/18% से घटाकर 5% करने से काफ़ी फ़ायदा होगा। इस कटौती से उत्पादों की कीमतों में लगभग 6.25-11% की कमी आने की उम्मीद हैजिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकोंदोनों के लिए सामान खरीदना आसान हो जाएगा।

यह उद्योग मुख्यतः राज्य भर में फैली छोटी बेकरियों पर आधारित हैजिनके प्रमुख बाज़ार मापुसा और मडगांव में हैं। यह बेकरी मालिकोंपेस्ट्री शेफ़पैकर्स और डिलीवरी कर्मचारियों सहित करीब 3,000 लोगों के विविध कार्यबल को बनाए रखता है।

कम जीएसटी दर से एमएसएमई बेकरियों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़नेबिक्री को बढ़ावा मिलने और लाभ मार्जिन में सुधार होने की उम्मीद हैखासकर पर्यटकों को उपहार देने और निर्यात करने वाले छोटे उद्यमों के लिए।

कृषि तथा बागवानी

गोवा काजू

सत्तारीबिचोलिमक्यूपेम और संगुएम प्रसंस्करण समूहों में फैले गोवा काजू उद्योग को काजू की गुठली और मूल्यवर्धित उत्पादों पर जीएसटी में कमी का लाभ मिला है, क्योंकि कुछ मेवों और राशन के सामान पर जीएसटी की दरें 12%/18% से घटाकर 5% कर दी गई हैं। इस क्षेत्र में करीब 18,500 लोग कार्यरत हैंजिनमें किसानकाजू बीनने वालेअखरोट छीलने वाले (मुख्यतः महिलाएँ) और प्रसंस्करणकर्ता शामिल हैं और कई परिवार मौसम आधारित मजदूरी चक्रों पर निर्भर हैं। यह उद्योग संयुक्त अरब अमीरातअमेरिका और यूरोपीय संघ सहित घरेलू खुदरा और निर्यात दोनों बाजारों में अपनी सेवाएँ प्रदान करता है।

जीएसटी सुधार से लागत कम हुई हैजिससे गोवा के काजू उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी हो गए हैं। मूल्यवर्धित वस्तुएँजिन पर 18% कर लगता थाअब 5% कर दिया गया हैजैसे चॉकलेट और कॉफ़ी से बनी वस्तुएँउनके खुदरा मूल्य में लगभग 11% की गिरावट आने की उम्मीद है। इसके अलावाफल या मेवे के पेस्ट जैसी वस्तुएँजिन पर पहले 12% कर लगता थाकरीब 6.25% सस्ती हो सकती हैंजिससे उनकी सामर्थ्य और लाभ में सुधार होगा।

गोवा काजू फेनी

गोवा का जीआई-टैग प्राप्त काजू फेनीराज्य में सांस्कृतिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टि से अहम है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से कुन्कोलिमसंवोर्देम और क्यूपेम में केंद्रित हैजहाँ ताड़ी निकालने वालेछोटे पैमाने के डिस्टिलर और बोतल बनाने वाले इस कला को आगे बढ़ाते हैं।

हालाँकि शराब को जीएसटी से बाहर रखा गया हैलेकिन पैकेजिंग सामग्री पर कर में कमी से इस उद्योग को भी लाभ होगा। इससे उद्योग के पैकेजिंग क्षेत्र में कार्यरत लगभग 2,000 लोगों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है। जीएसटी को 18% से घटाकर 5% करने से पैकेजिंग लागत लगभग 11% कम होने की उम्मीद है।

हालाँकि यह पेय ज़्यादातर गोवा में ही बेचा जाता हैजिस पर राज्य उत्पाद शुल्क लगता हैपैकेजिंग सामग्री की कम लागत से लाभप्रदता में सुधार होने और गोवा की अनूठे फेनी व्यवस्था में योगदान देने वाले छोटे डिस्टिलर्स और स्थानीय उद्यमों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

खोला मिर्च

खोला मिर्च एक जीआई-टैग वाला उत्पाद है, जिसकी खेती और प्रसंस्करण कैनाकोना (खोला) के मसाला बाज़ारों और कॉटेज सॉस इकाइयों में किया जाता है। इस क्षेत्र में छोटे किसानमसाला पीसने वाले और कुटीर उद्योग प्रसंस्करणकर्ता शामिल हैंजो करीब 1,000 परिवारों या करीब 3,000 लोगों को रोजगार देते हैं। यह उत्पाद मुख्य रूप से घरेलू खुदरा बाज़ारों और विदेशों में प्रवासी स्टोरों को सेवा प्रदान करता है।

कृषि उत्पाद के रूप में बेची जाने वाली कच्ची खोला मिर्चजीएसटी से मुक्त है। नए सुधारों के तहतसॉस और अचार जैसे प्रसंस्कृत उत्पादों पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे शेल्फ कीमतों में लगभग 11% की कमी आने की उम्मीद है। कर में कमी से प्रतिस्पर्धात्मकता में इजाफा होगाबाजार पहुँच का विस्तार होगा और लाभ मार्जिन में सुधार होगा।

हरमल (पेरनेम) मिर्च

जीआई-टैग वाली हरमल (पेरनेम) मिर्चजो पेरनेम के हरमल-अरम्बोल क्षेत्र में उगाई जाती हैगोवा की मसाला और सॉस मूल्य श्रृंखला का हिस्सा है। इस क्षेत्र में छोटे किसानोंमसाला पीसने वालों और कुटीर उद्योग प्रसंस्करणकर्ताओं सहित करीब 500 लोग कार्यरत हैं।

यह उत्पाद विशेष खुदरा विक्रेताओं और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए बेचा जाता है। प्रसंस्कृत मसाला उत्पादों पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% करने से लागत में करीब 11% की कमी आने का अनुमान है। इस दर परिवर्तन से छोटे पैमाने के प्रसंस्करणकर्ताओं के लिए उत्पादन और खुदरा लागत कम हो जाती हैजिससे बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा और बेहतर सामर्थ्य संभव होता है।

मिंडोली (मोइरा) केला

मोइरा (बारदेज़) और आसपास के इलाकों में उगाया जाने वाला मिंडोली (मोइरा) केला, एक जीआई-टैग्ड कृषि उत्पाद है, जिसका उपयोग केले के चिप्स और मिठाइयाँ बनाने में किया जाता है। करीब 1,000 लोग इसकी खेती में लगे हुए हैं और इस क्षेत्र में बागवानमहिलाओं द्वारा संचालित स्नैक बनाने वाली इकाइयाँ और चिप्स बनाने वाली इकाइयाँ शामिल हैं।

इसके प्राथमिक बाज़ार में पर्यटन खुदरा दुकानें और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म शामिल हैं। नई 5% जीएसटी दर से पैकेज्ड केला-आधारित उत्पादों की कीमतों में करीब 6.25% कटौती होने की उम्मीद है। इस दर में कटौती से इस क्षेत्रीय विशेषता के संरक्षण में लगे छोटे उद्यमों और महिलाओं द्वारा संचालित इकाइयों को लाभ होगा।

अगसेची वैयिंगिम (अगासैम बैंगन)

अगासैम (तिस्वाड़ी) में उगाया जाने वाला अगसेची वैयिंगिम (अगासैम बैंगन) एक जीआई-टैग्ड उत्पाद है, जिसका उपयोग अचार और सॉस बनाने में किया जाता है। इस क्षेत्र में रसोई-बागान के किसान और महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूह शामिल हैं, जो अचार और निर्जलित मिश्रण बनाने में लगे हुए हैं। यह क्षेत्र लगभग 300 लोगों को रोजगार देता हैजो मुख्य रूप से विशिष्ट खुदरा बाजारों के लिए कार्य करता है।

प्रसंस्कृत उत्पादों पर जीएसटी दर 18% से घटाकर 5% करने से अचार और सॉस की कीमतों में लगभग 11% की गिरावट आने की उम्मीद हैजिससे छोटे उत्पादकों को लाभ होगा और स्थानीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा।

सत शिरो भेनो (स्थानीय भिंडी)

गोवा की स्थानीय भिंडी किस्मसत शिरो भेनोतिस्वाड़ी और बर्देज़ के किचन गार्डन और उपनगरीय खेतों में उगाई जाती है। इस क्षेत्र में लगभग 300 लोग कार्यरत हैंजो छोटे किसानों और महिलाओं द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को सहायता प्रदान करते हैं।

यह उत्पाद मुख्य रूप से घरेलू विशिष्ट दुकानों और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए बेचा जाता है। प्रसंस्कृत किस्मों पर जीएसटी 18%/12% से घटाकर 5% करने से कीमतों में लगभग 6.25% की गिरावट आने की उम्मीद हैजिससे लागत कम होगी और छोटे उत्पादकों को होने वाले लाभ में सुधार होगा।

निष्कर्ष

जीएसटी दरों में होने वाले सुधार, गोवा की विविध अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के लिए तैयार हैंजो फार्मास्यूटिकल्स और मत्स्य पालन से लेकर पर्यटननिर्माण और कृषि तककरीब हर उत्पादक क्षेत्र को प्रभावित करेगा। कर दरों को युक्तिसंगत बनाकरइन सुधारों ने सभी उद्योगों में लागत बचतप्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि और उपभोग को बढ़ावा दिया है।

कुल मिलाकरये बदलाव न केवल उपभोक्ताओं के लिए मूल्य राहत प्रदान करते हैंबल्कि ग्रामीण और शहरी उद्योगों के विकास को भी बढ़ावा देते हैं। भारत के सबसे अधिक पर्यटन-प्रधान राज्यों में से एक होने के नातेगोवा की अर्थव्यवस्था को जीएसटी 2.0 से महत्वपूर्ण लाभ होने की उम्मीद है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.