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महाशिवरात्रि 2026: श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का महापर्व

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नई दिल्ली/महासमुंद-आज देशभर में महाशिवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। भगवान शिव की आराधना के लिए मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। शिवालयों में “हर हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया है।

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे भगवान शिव और माता पार्वती के पावन विवाह की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।

देशभर में भव्य आयोजन

काशी विश्वनाथ, उज्जैन महाकालेश्वर, केदारनाथ, सोमनाथ और बैद्यनाथ धाम सहित देश के प्रमुख शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। कई जगहों पर भजन-कीर्तन, शिव बारात और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ।

आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व

महाशिवरात्रि केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और शिव भक्ति करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनुष्य को शांति, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

युवाओं और श्रद्धालुओं की भागीदारी

इस वर्ष युवाओं में भी महाशिवरात्रि को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। कई स्थानों पर युवाओं ने सेवा कार्य, रक्तदान शिविर और स्वच्छता अभियान भी चलाए, जिससे पर्व के साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश भी दिया गया।

निष्कर्ष

महाशिवरात्रि का पर्व भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और आस्था का प्रतीक है। यह पर्व हमें सत्य, तप, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

हर हर महादेव!


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