Media24Media.com: #SpiritualIndia

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #SpiritualIndia. Show all posts
Showing posts with label #SpiritualIndia. Show all posts

कलिबेश्वर महादेव मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

No comments Document Thumbnail

मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और संस्कृति-परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का सशक्त माध्यम: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

कलिबा में सामुदायिक भवन और हनुमान टेकरी में सूर्य नमस्कार प्रतिकृति निर्माण की घोषणा

कलिबेश्वर महादेव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में उमड़ा श्रद्धा और आस्था का सैलाब

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज अपने जशपुर प्रवास के दौरान विकासखंड कुनकुरी के ग्राम कलिबा में नवनिर्मित कलिबेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी कौशल्या साय भी उपस्थित थीं। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यज्ञमंडप में हरिनाम संकीर्तन करते हुए परिक्रमा की तथा यज्ञशाला में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। उन्होंने मंदिर निर्माण को क्षेत्र की आस्था, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकजुटता से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य बताते हुए सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति सेवा, सद्भाव, सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश देती है। मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने तथा संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का सशक्त माध्यम भी हैं।  ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने ग्रामवासियों को नवनिर्मित मंदिर के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए ग्राम कलिबा में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 25 लाख रुपये की घोषणा की। साथ ही हनुमान टेकरी में सामुदायिक भवन तथा सूर्य नमस्कार की मुद्राओं की प्रतिकृति निर्माण की घोषणा भी की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने अपने 28 माह के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अधिकांश गारंटियों को तेजी से लागू किया है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना के अंतर्गत अब तक 27वीं किस्त के रूप में महिलाओं के खातों में 17 हजार 500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान श्री राम का ननिहाल है और राज्य सरकार रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 42 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को भगवान श्री राम के दर्शन करा चुकी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से देशभर के 19 प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा भी कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रदेशभर में सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही राजस्व प्रकरणों के निराकरण हेतु विशेष राजस्व शिविर भी लगाए गए हैं। उन्होंने लोगों से इन शिविरों का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जल्द ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शुरू की जाएगी, जिसके लिए एक टोल फ्री नंबर जारी किया जाएगा। इस माध्यम से नागरिक अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे तथा निर्धारित समय-सीमा में उनके समाधान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। समय पर समाधान नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई भी की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के अंतर्गत प्रदेशभर में शिविर लगाकर लोगों की समस्याओं का निराकरण किया जाएगा तथा 757 करोड़ रुपये के बिजली बिल माफ किए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से योजना का लाभ लेने के लिए पंजीयन कराने की अपील की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हाल ही में प्रदेश की नवगठित 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) का वर्चुअल शुभारंभ किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश में सहकारी समितियों की संख्या बढ़कर 2 हजार 573 हो गई है। अब पैक्स समितियां बहुउद्देश्यीय सोसायटी के रूप में कार्य करेंगी, जिससे किसानों को खाद, बीज और अल्पकालीन ऋण जैसी सुविधाएं गांव के नजदीक ही उपलब्ध हो सकेंगी तथा धान खरीदी प्रक्रिया भी अधिक सरल और सुविधाजनक बनेगी।

इस अवसर पर पद्मश्री जागेश्वर यादव, छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष शंभूनाथ चक्रवर्ती, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, मंदिर समिति अध्यक्ष उपेंद्र यादव, जनपद अध्यक्ष सुशीला साय, पूर्व संसदीय सचिव भरत साय, जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

जलेश्वर महादेव धाम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया जलाभिषेक: प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की

No comments Document Thumbnail

किसानों, श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के हित में मुख्यमंत्री साय की महत्वपूर्ण घोषणाएं: जलेश्वर महादेव धाम के विकास के साथ क्षेत्रीय अधोसंरचना को मिलेगा विस्तार

क्षीरपानी मध्यम परियोजना के नहर विस्तार से सिंचाई क्षमता बढ़ेगी, किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत डोंगरिया गांव पहुंचे, जहां उन्होंने प्रसिद्ध जलेश्वर महादेव धाम में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर जलाभिषेक किया। मुख्यमंत्री साय ने भगवान भोलेनाथ से प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक पंडरिया भावना बोहरा, विधायक तखतपुर धर्मजीत सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, समाज के पदाधिकारी और श्रद्धालुगण उपस्थित थे। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराएं हमारी पहचान हैं। ऐसे पवित्र धाम केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने वाले प्रेरणा स्थल भी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर क्षेत्र के विकास और जनसुविधाओं के विस्तार हेतु कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने क्षीरपानी जलाशय मध्यम परियोजना अंतर्गत 50 करोड़ की लागत से नहर विस्तारीकरण कार्य कराने की घोषणा की।  इस परियोजना से लगभग 1100 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा और किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री साय ने जलेश्वर महादेव धाम के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए 50 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा भी की। साथ ही उन्होंने खरहट्टा से डोंगरिया तक लगभग 2.5 किलोमीटर सड़क के उन्नयन कार्य की घोषणा करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में आवागमन अधिक सुगम और सुविधाजनक होगा।

उल्लेखनीय है कि कबीरधाम जिले के डोंगरिया गांव स्थित जलेश्वर महादेव धाम स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत पूजनीय स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां स्थित शिवलिंग प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह शिवधाम विशेष रूप से सावन माह, सावन सोमवार और महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। पहाड़ी और नदी-घाट के रमणीय वातावरण में स्थित यह धाम शिवभक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए विशेष पहचान रखता है।

लद्दाख में पवित्र पिपरहवा अवशेषों का आगमन, ऐतिहासिक आध्यात्मिक उत्सव की शुरुआत

No comments Document Thumbnail

गहरे आध्यात्मिक उत्साह और भक्ति से भरे वातावरण के बीच, भगवान  गौतम बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेष आज लेह पहुंचे। इसके साथ ही लद्दाख में एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक उत्सव का शुभारंभ हुआ।

इन अवशेषों को दिल्ली से विशेष वायुसेना विमान द्वारा लाया गया, जिनके साथ ड्रुकपा थुकसे रिनपोछे और खेनपो थिनलास चोसाल मौजूद थे। आगमन पर विनय कुमार सक्सेना (लद्दाख के उपराज्यपाल) ने धार्मिक और सामाजिक नेताओं की उपस्थिति में इनका भव्य स्वागत किया।

 भव्य स्वागत और धार्मिक अनुष्ठान

  • पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित हुए

  • लद्दाख पुलिस द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया

  • बौद्ध भिक्षुओं ने विशेष प्रार्थनाएं कीं

इसके बाद अवशेषों को भव्य शोभायात्रा के साथ जीवेत्सल ले जाया गया, जहां 1 मई (2569वीं बुद्ध पूर्णिमा) से आम जनता के दर्शन के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। हजारों श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में इस शोभायात्रा में भाग लिया।

विशेष महत्व

उपराज्यपाल ने इस अवसर को अत्यंत शुभ बताते हुए कहा कि इन पवित्र अवशेषों के आगमन से पूरा क्षेत्र धन्य हो गया है। उन्होंने नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया कि लद्दाख को इस आयोजन के लिए चुना गया।

यह पहली बार है जब इन अवशेषों को भारत में सार्वजनिक दर्शन के लिए उनके मूल स्थान से बाहर लाया गया है, जबकि इससे पहले इन्हें कई देशों में प्रदर्शित किया जा चुका है।

 वैश्विक महत्व और कार्यक्रम

  • थाईलैंड, मंगोलिया, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, भूटान, श्रीलंका और म्यांमार में प्रदर्शन

  • 2–10 मई: जीवेत्सल (लेह)

  • 11–12 मई: जांस्कर

  • 13–14 मई: धर्मा सेंटर, लेह

  • 15 मई: दिल्ली वापसी

विशिष्ट अतिथि

इस पवित्र अवसर पर अमित शाह सहित कई केंद्रीय मंत्री, राजदूत, मुख्यमंत्री और बौद्ध संगठनों के प्रतिनिधि लेह पहुंचेंगे।

विशेष तैयारियां

श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए:

  • वृक्षारोपण अभियान

  • फूलों की सजावट

  • शहरभर में स्वच्छता अभियान

यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि लद्दाख की बौद्ध परंपरा और सांस्कृतिक एकता को भी दर्शाता है।

हनुमान जन्मोत्सव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी देशवासियों को शुभकामनाएं

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हनुमान जयंती के पावन अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस शुभ अवसर पर उन्होंने भगवान हनुमान से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और ऊर्जा का संचार करने की प्रार्थना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि यह पावन पर्व हर किसी के जीवन में नई ऊर्जा और स्फूर्ति लेकर आए। उन्होंने कामना की कि पवनपुत्र हनुमान जी सभी को बल, बुद्धि और विद्या का भरपूर आशीर्वाद दें, जिससे देश का सामर्थ्य और अधिक मजबूत हो।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर भी अपनी शुभकामनाएं साझा करते हुए लिखा:

“सभी देशवासियों को हनुमान जन्मोत्सव की अनंत शुभकामनाएं। यह पावन अवसर हर किसी के जीवन में नई ऊर्जा और स्फूर्ति लेकर आए। मेरी कामना है कि पवनपुत्र हनुमान जी सभी को बल, बुद्धि और विद्या का भरपूर आशीर्वाद दें, जिससे देश का सामर्थ्य और बढ़े। जय बजरंगबली!”

हनुमान जयंती के अवसर पर देशभर में भक्तजन पूजा-अर्चना कर रहे हैं और मंदिरों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ादेव की पूजा कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की

No comments Document Thumbnail

शहीद वीर नारायण सिंह एवं वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमाओं का किया अनावरण

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम ओड़ान में गोंड समाज के पवित्र पूजा स्थल पर आयोजित बड़ादेव स्थापना कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विधि-विधान से बड़ादेव की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि ऐसे पारंपरिक और आध्यात्मिक आयोजन हमारी संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता को और अधिक सुदृढ़ करते हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह एवं वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमाओं का अनावरण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया। 10 दिसंबर 1857 को रायपुर के जयस्तंभ चौक पर उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमिट प्रेरणा का स्रोत है। इसी प्रकार रानी दुर्गावती ने अपने अदम्य साहस और स्वाभिमान से गोंडवाना की गरिमा को अक्षुण्ण रखा। मुगल सेना के सामने आत्मसमर्पण करने के बजाय उन्होंने रणभूमि में वीरगति प्राप्त कर मातृभूमि के प्रति अपने समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर जांजगीर-चांपा सांसद कमलेश जांगड़े, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, विधायक संदीप साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, उपाध्यक्ष पवन साहू, पूर्व विधायक डॉ. सनम जांगड़े सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री साय ने जुनवानी नर्मदा धाम में की पंच कुंडीय श्री रुद्र महायज्ञ की परिक्रमा

No comments Document Thumbnail

व्यासपीठ की पूजा-अर्चना कर लिया आशीर्वाद, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना

मुख्यमंत्री पंच कुंडीय श्री रुद्र महायज्ञ एवं श्री शिव महापुराण कथा में हुए शामिल

रायपुर- चैत्र नवरात्रि की पावन चतुर्थी तिथि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कबीरधाम जिले के ग्राम जुनवानी नर्मदा धाम में आयोजित पंच कुंडीय श्री रुद्र महायज्ञ एवं श्री शिव महापुराण कथा में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ विधि-विधान से यज्ञ की परिक्रमा की तथा व्यासपीठ की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री साय ने इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान प्रदेशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं का आत्मीय अभिवादन किया और सभी को चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जिला साहू संघ द्वारा आयोजित पंच कुंडीय श्री रुद्र महायज्ञ एवं श्री शिव महापुराण कथा में शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने कहा कि आज इस पावन यज्ञ में शामिल होने का अवसर मिलना उनके लिए बड़े सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि साहू समाज एक विशाल, शिक्षित और समृद्ध समाज है, जो सदैव समाज को दिशा देने का कार्य करता रहा है। उन्होंने दानवीर भामाशाह का उल्लेख करते हुए कहा कि वे इसी समाज से थे, जिन्होंने अपने त्याग और दान से इतिहास में अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने आगे कहा कि रायगढ़ में पूज्य श्री सत्यनारायण बाबा भी इसी समाज से हैं, जो पिछले 28 वर्षों से खुले आसमान के नीचे तपस्या में लीन हैं। ऐसे महान संत समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई समाज संगठित होकर कार्य करता है, तो उसका लाभ केवल उस समाज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे पूरे राष्ट्र का विकास होता है। उन्होंने कहा कि साहू समाज इसी तरह संगठित और सशक्त होकर निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहेगा। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यहां आयोजित रुद्र महाशिव यज्ञ एवं कथा से छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संत-महात्माओं की तपोभूमि रही है। यह माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का अधिकांश समय इसी धरती पर बिताया है, वहीं माता शबरी का पावन स्थान भी छत्तीसगढ़ में स्थित है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि व्यासपीठ पर विराजमान संत-महात्माओं की कृपा से प्रदेश में सवा लाख शिवलिंग स्थापना का पावन कार्य भी किया जा रहा है, जो आध्यात्मिक चेतना को और सशक्त करेगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा “रामलला दर्शन योजना” संचालित की जा रही है। छत्तीसगढ़ के लोग भगवान श्रीराम को अपना भांचा मानते हैं, इसलिए उन्हें अयोध्या धाम में रामलला के दर्शन कराने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई है। अब तक 40 हजार से अधिक रामभक्त अयोध्या जाकर दर्शन कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि “मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना” के तहत प्रदेश के बुजुर्गों को देशभर के प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा कराई जा रही है, ताकि वे अपने जीवन में धार्मिक आस्था के इन पवित्र स्थलों का दर्शन कर सकें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत किए हैं। इनमें छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक प्रमुख है, जिसे समाज में बढ़ती संवेदनशील परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लाया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले कुछ समय से समाज के कमजोर वर्गों को निशाना बनाकर प्रलोभन, दबाव और भ्रम फैलाकर धर्मांतरण कराने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस गंभीर विषय को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सख्त और स्पष्ट प्रावधानों के साथ यह विधेयक लागू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी प्रकार के छल, प्रलोभन या दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन न हो सके। साथ ही विवाह के माध्यम से धर्मांतरण की आड़ में हो रहे दुरुपयोग पर भी अब पूर्ण विराम लगेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि धर्म की रक्षा और समाज की सुरक्षा ही सरकार का संकल्प है, और इसी उद्देश्य के साथ यह विधेयक लाया गया है, ताकि प्रदेश में सामाजिक सद्भाव और शांति बनी रहे।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि जुनवानी स्थित नर्मदा धाम के नर्मदा कुंड में स्नान करना, पूजा-अर्चना करना और ऐसे धार्मिक आयोजनों में शामिल होना क्षेत्रवासियों के लिए हमेशा से आस्था और प्रतीक्षा का विषय रहा है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र स्थल से लोगों की गहरी भावनात्मक और धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त करते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मकता, एकता और सद्भाव का संदेश भी देते हैं। 

पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने अपने संबोधन में कहा कि जब भी श्रीमद्भागवत, शिव महापुराण कथा एवं यज्ञ जैसे आयोजन होते हैं, तो सभी को इसमें अवश्य शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्सर घर के बुजुर्ग ही कथा सुनने आते हैं, लेकिन बच्चों और युवाओं की सहभागिता भी उतनी ही जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ी हमारी सनातन संस्कृति और परंपराओं से परिचित हो सके और उसे आगे बढ़ा सके।

इस अवसर पर पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, पूर्व विधायक डॉ. सियाराम साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी पंच कुंडीय श्री रुद्र महायज्ञ की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री ने कुदरगढ़ी माता मंदिर में पूजा-अर्चना कर की प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना

No comments Document Thumbnail

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज चैत्र नवरात्रि की तृतीया तिथि के पावन अवसर पर कुदरगढ़ी माता के दर्शन करने सूरजपुर जिले स्थित कुदरगढ़ी माता मंदिर पहुंचे। कुदरगढ़ महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने मंदिर के नीचे प्रांगण स्थल पर ही हिंगुलाज माता एवं झगरा खाड़ देवता की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और  खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार चंदन लगाकर एवं चुनरी चढ़ाकर श्रद्धापूर्वक माता का नमन किया। इस दौरान स्थानीय बैगा राम कुमार बंछोर ने पूजा-अर्चना संपन्न कराई। उनके परिवार की लगभग 10 पीढ़ियां कुदरगढ़ी माता की सेवा में निरंतर लगी हुई हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने उपस्थित श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और सभी को कुदरगढ़ महोत्सव की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वन विकास निगम एवं कुदरगढ़ी मंदिर मां बागेश्वरी लोक न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष रामसेवक पैंकरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि जनश्रुतियों के अनुसार कुदरगढ़ी माता मंदिर की मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। इसी कारणवश जिले सहित प्रदेश एवं अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर में किए दर्शन, ‘राम राज्य’ के आदर्श पर दिया जोर

No comments Document Thumbnail

अयोध्या- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर का दौरा किया और राम लला के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में विभिन्न स्थलों पर पूजा-अर्चना और आरती की तथा श्री राम यंत्र स्थापना एवं पूजन भी किया।

यह पावन अवसर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, नव संवत्सर 2083 के आरंभ और नवरात्रि के प्रथम दिन के रूप में विशेष महत्व रखता है।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि अयोध्या की पवित्र भूमि पर आना उनके लिए “सर्वोच्च सौभाग्य” है। उन्होंने श्री राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक अवसरों—जैसे भूमि पूजन, प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार के उद्घाटन और मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण—को भारत की संस्कृति और इतिहास के स्वर्णिम क्षण बताया।

अपने संबोधन में उन्होंने ‘राम राज्य’ की अवधारणा पर विशेष बल देते हुए कहा कि यह आदर्श समाज आर्थिक समृद्धि, सामाजिक समानता और नैतिक मूल्यों पर आधारित होता है। गोस्वामी तुलसीदास के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राम राज्य में कोई भी व्यक्ति दुखी, वंचित या असहाय नहीं होता।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत आज समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य, भगवान श्रीराम के आशीर्वाद और नागरिकों की एकजुटता से अवश्य प्राप्त होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि देश में इस समय आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो रहा है, और सभी नागरिकों को एकता, भाईचारे और समर्पण के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।

यह दौरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान और विकसित राष्ट्र के संकल्प को भी दर्शाता है।


सुदूर अंचलों के श्रद्धालुओं को मिला अयोध्या धाम का सौभाग्य, मुख्यमंत्री ने कहा — यही जनसेवा की प्रेरणा

No comments Document Thumbnail

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कोरिया प्रवास के दौरान झुमका जलाशय परिसर में ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ के तहत अयोध्या धाम की पावन यात्रा कर लौटे श्रद्धालुओं से आत्मीय भेंट की। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं का हाल-चाल जाना और उनके आध्यात्मिक एवं भक्तिमय अनुभवों को बड़े ध्यानपूर्वक सुना। श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री को बताया कि छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से उन्हें निःशुल्क अयोध्या धाम के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा सम्मानपूर्वक यात्रा की समुचित व्यवस्था किए जाने से यह यात्रा उनके लिए अत्यंत सहज और अविस्मरणीय बन गई। 

श्रद्धालुओं ने बताया कि अपने सुदूर गांवों से अयोध्या तक पहुँचना उनके लिए पहले कठिन था, किंतु सरकार की पहल ने इसे संभव कर दिया। श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री साय को ‘हमारे राम’  तैलचित्र भेंट कर आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने श्रद्धालुओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम छत्तीसगढ़ के भांचा हैं और प्रदेशवासियों को उनके दर्शन कराना शासन के लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि सुदूर अंचलों में रहने वाले लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना ही जनसेवा की वास्तविक संतुष्टि है, और सरकार इसी भावना के साथ कार्य कर रही है।


महाशिवरात्रि 2026: श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का महापर्व

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली/महासमुंद-आज देशभर में महाशिवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। भगवान शिव की आराधना के लिए मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। शिवालयों में “हर हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया है।

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे भगवान शिव और माता पार्वती के पावन विवाह की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।

देशभर में भव्य आयोजन

काशी विश्वनाथ, उज्जैन महाकालेश्वर, केदारनाथ, सोमनाथ और बैद्यनाथ धाम सहित देश के प्रमुख शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। कई जगहों पर भजन-कीर्तन, शिव बारात और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ।

आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व

महाशिवरात्रि केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और शिव भक्ति करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनुष्य को शांति, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

युवाओं और श्रद्धालुओं की भागीदारी

इस वर्ष युवाओं में भी महाशिवरात्रि को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। कई स्थानों पर युवाओं ने सेवा कार्य, रक्तदान शिविर और स्वच्छता अभियान भी चलाए, जिससे पर्व के साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश भी दिया गया।

निष्कर्ष

महाशिवरात्रि का पर्व भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और आस्था का प्रतीक है। यह पर्व हमें सत्य, तप, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

हर हर महादेव!


नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हुए शामिल

No comments Document Thumbnail

सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जशपुर प्रवास के दौरान दुलदुला विकास खंड के ग्राम सिरीमकेला स्थित श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के पावन प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में सम्मिलित हुए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देवाधिदेव महादेव से समस्त छत्तीसगढ़वासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना की। महाशिवरात्रि के पावन पर्व के एक दिन पूर्व आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन को उन्होंने श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बताया। 

मुख्यमंत्री साय ने ग्राम सिरीमकेला में सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा करते हुए कहा कि इससे स्थानीय नागरिकों को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारिवारिक आयोजनों के लिए सुदृढ़ आधार मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कल हम सब महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाएंगे और इस अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि सिरीमकेला में भक्तों और अपने परिवारजनों के बीच आकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और आनंद की अनुभूति हो रही है। भक्ति और श्रद्धा के इस अनूठे आयोजन में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सनातन परंपरा को पुनर्स्थापित करते हुए अयोध्या धाम दर्शन योजना एवं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं को धार्मिक यात्राएँ करा रही है। श्रवण कुमार के पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करते हुए अब तक प्रदेश के 42 हजार से अधिक तीर्थ यात्रियों को श्रीरामलला के दर्शन कराए जा चुके हैं। 

उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या धाम में श्री रामलला का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है और हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर आज ध्वज लहरा रहा है। प्रत्येक राम भक्त की आस्था 500 वर्षों तक प्रज्वलित रही — यह एक ऐसा यज्ञ था जिसकी लौ कभी नहीं डगमगाई। हम सब निमित्त मात्र हैं, जो अपने भांचा राम के दर्शन उनके भव्य मंदिर में कर रहे हैं और श्रद्धालुओं को करा पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नीलकंठेश्वर महादेव का दर्शन पाकर वे स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। दशहरा पर्व के दिन नीलकंठ के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है और आज प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत यहाँ निरंतर दर्शन लाभ मिलना हम सबके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि जशपुर में मधेश्वर महादेव स्थित हैं, जिसे लोक मान्यता के अनुसार एशिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग कहा जाता है। सनातन परंपरा में भक्ति का विशेष महत्व है और राज्य सरकार भक्तों का सम्मान करती है। सावन माह में भोरमदेव मंदिर में कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर हर वर्ष आस्था प्रकट की जाती है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाले राजिम त्रिवेणी संगम में इन दिनों राजिम कुंभ कल्प का भव्य आयोजन हो रहा है, जहाँ आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान कुलेश्वरनाथ महादेव के दर्शन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। राजिम कुंभ कल्प की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित किया गया है, ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की पहचान देश-विदेश तक है तथा छत्तीसगढ़ के पाँच शक्ति पीठों के विकास के लिए कार्य योजना बनाकर सतत कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। 

कार्यक्रम के समापन अवसर पर उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि के इस पावन कालखंड में नीलकंठेश्वर महादेव की कृपा हम सभी पर बनी रहे, प्रदेश में सुख-शांति, समृद्धि और विकास की नई धाराएँ प्रवाहित हों तथा छत्तीसगढ़ आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक वैभव के साथ निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर रहे — यही उनकी हार्दिक कामना है।

इस अवसर पर सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, पूर्व राज्यसभा सांसद रणविजय सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुशीला साय, कृष्णा राय, पवन साय, भरत सिंह,अरविन्द प्रसाद साय, कपिल देव साय, सरगुजा आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह, वनमंडलाधिकारी शशि कुमार तथा महादेव मंदिर समिति के सदस्यगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026: सहस्राब्दी की दृढ़ता, आस्था और भारत के सभ्यतागत आत्मसम्मान का उत्सव

No comments Document Thumbnail

 मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (8–11 जनवरी 2026) महमूद ग़ज़नवी द्वारा 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए प्रथम आक्रमण के 1,000 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित।

  • यह पर्व भारत की सभ्यतागत दृढ़ता, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का उत्सव है।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10–11 जनवरी 2026 को सोमनाथ में प्रमुख स्मरणीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

  • सोमनाथ मंदिर में प्रतिवर्ष 92–97 लाख श्रद्धालु दर्शन करते हैं।

  • महिला सहभागिता: सोमनाथ ट्रस्ट के 906 कर्मचारियों में 262 महिलाएं; कुल मिलाकर लगभग 363 महिलाओं को रोजगार, जिससे प्रतिवर्ष लगभग ₹9 करोड़ की आय सृजित होती है।

परिचय

“सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालम् ओंकारममलेश्वरम्॥”

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का यह श्लोक सोमनाथ को बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान देता है, जो भारत की आध्यात्मिक भूगोल में इसके केंद्रीय महत्व को दर्शाता है। गुजरात के वेरावल के समीप प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ केवल एक उपासना स्थल नहीं, बल्कि भारत की अखंड सभ्यतागत निरंतरता का जीवंत प्रतीक है।

स्वाभिमान पर्व: सामूहिक गौरव की राष्ट्रीय अभिव्यक्ति

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 8 से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जो 1026 में हुए प्रथम आक्रमण के एक सहस्राब्दी पूर्ण होने का राष्ट्रीय स्मरण है। यह आयोजन विनाश की स्मृति नहीं, बल्कि आस्था, पुनर्निर्माण और आत्मसम्मान का उत्सव है।
देवी अहिल्याबाई होलकर जैसे असंख्य भक्तों के संकल्प से हर बार सोमनाथ का पुनर्निर्माण हुआ—यही इसकी अमर पहचान है।

वर्ष 2026, 11 मई 1951 को स्वतंत्रता के बाद पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 75 वर्ष भी पूर्ण करता है। इन दोनों ऐतिहासिक पड़ावों ने स्वाभिमान पर्व की आधारशिला रखी है।

चार दिनों में 72 घंटे का अखंड ओंकार जप, भजन-संकीर्तन, आध्यात्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं—जो एकता, आस्था और राष्ट्रीय स्मृति का प्रतीक हैं।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: सहस्राब्दी की दृढ़ता

प्रभास तीर्थ का संबंध चंद्रदेव और भगवान शिव की उपासना से है। परंपरा के अनुसार, चंद्रदेव ने यहीं शिव की आराधना कर अपने श्राप से मुक्ति पाई।
जनवरी 1026 में महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण के बाद भी सोमनाथ का अस्तित्व लोकचेतना में अमिट रहा। विनाश और पुनर्निर्माण का यह चक्र विश्व इतिहास में अद्वितीय है।

12 नवंबर 1947 (दीपावली) को सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। 11 मई 1951 को राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में मंदिर का पुनः उद्घाटन हुआ—यह भारत के सभ्यतागत आत्मसम्मान की पुनर्स्थापना थी।

31 अक्टूबर 2001 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1951 के 50 वर्ष पूर्ण होने के कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें सरदार पटेल, के. एम. मुंशी सहित पुनर्निर्माण के अग्रदूतों के योगदान को स्मरण किया गया।

सोमनाथ मंदिर: वैभव, आस्था और जीवंत धरोहर

सोमनाथ आदि ज्योतिर्लिंग है। मंदिर परिसर में गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप हैं। 150 फीट ऊँचा शिखर, 10 टन का कलश, 27 फीट का ध्वजदंड, 1,666 स्वर्ण-कलश और 14,200 ध्वज इसकी भव्यता दर्शाते हैं।

वार्षिक दर्शन संख्या 92–97 लाख; बिल्व पूजा में 13.77 लाख से अधिक श्रद्धालु; महाशिवरात्रि 2025 में 3.56 लाख दर्शनार्थी।
2003 में शुरू और 2017 में उन्नत लाइट एंड साउंड शो ने पिछले तीन वर्षों में 10 लाख से अधिक दर्शक आकर्षित किए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष) के नेतृत्व में प्रशासनिक सुधार, अवसंरचना उन्नयन और धरोहर संरक्षण से सोमनाथ एक नए पुनरुत्थान चरण में प्रवेश कर चुका है।

आध्यात्मिक वातावरण और पदयात्रा

पर्व से पूर्व गिरनार तीर्थक्षेत्र सहित संतों ने शंख चौक से सोमनाथ मंदिर तक पदयात्रा की। डमरू, पारंपरिक वाद्य, सिद्धिविनायक ढोल समूह के 75 वादकों की गूंज और “हर हर महादेव” के जयघोष से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

महिला सशक्तिकरण और सतत विकास

2018 में “स्वच्छ आइकॉनिक प्लेस” घोषित सोमनाथ में—

  • पुष्प अपशिष्ट से वर्मी-कम्पोस्ट (1,700 बिल्व वृक्ष)

  • प्लास्टिक से पावर ब्लॉक्स (मासिक 4,700)

  • वर्षा जल संचयन (मासिक 30 लाख लीटर)

  • मियावाकी वन (7,200 वृक्ष; वार्षिक ~93,000 किग्रा CO₂ अवशोषण)

  • शुद्ध अभिषेक जल से सोमगंगाजल (दिसंबर 2024 तक 1.13 लाख परिवार)

महिला रोजगार: 906 में 262 महिलाएं; बिल्व वन पूर्णतः महिलाओं द्वारा संचालित; प्रसाद व भोजन सेवाओं में व्यापक सहभागिता—कुल 363 महिलाएं, वार्षिक आय ~₹9 करोड़।

प्रधानमंत्री का दौरा और कार्यक्रम

10 जनवरी 2026: प्रधानमंत्री ओंकार मंत्र जप (72 घंटे के अखंड जप में सहभाग), ड्रोन शो।
11 जनवरी 2026: शौर्य यात्रा का नेतृत्व, दर्शन-पूजन और जनसभा को संबोधन—जहाँ सोमनाथ के सभ्यतागत महत्व, स्वाभिमान पर्व और आस्था-संकल्प का संदेश देंगे।

निष्कर्ष

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास की पुनर्पुष्टि है—विनाश पर दृढ़ता, भय पर आस्था की विजय। सौराष्ट्र के तट पर स्थित सोमनाथ विश्वभर के भारतीयों को स्मरण कराता है कि धर्म, एकता और आत्मसम्मान पर आधारित आस्था शाश्वत है।

प्रधानमंत्री द्वारा उद्धृत श्लोक—

“आदिनाथेन शर्वेण सर्वप्राणिहिताय वै।
आद्यतत्त्वान्यथानीयं क्षेत्रमेतन्महाप्रभम्॥
प्रभासितं महादेवि यत्र सिद्ध्यन्ति मानवाः॥”

अर्थ: आदिनाथ शिव ने समस्त प्राणियों के कल्याण हेतु प्रभास क्षेत्र को प्रकट किया—यह दिव्य प्रकाश से आलोकित भूमि मनुष्य को सिद्धि, पुण्य और मोक्ष प्रदान करती है।

प्रकाश उत्सव पर प्रधानमंत्री मोदी ने गुरु गोबिंद सिंह जी को किया नमन

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पावन प्रकाश उत्सव के अवसर पर गुरु गोबिंद सिंह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी साहस, करुणा और बलिदान के सजीव प्रतीक हैं और उनका जीवन व शिक्षाएँ सत्य, न्याय, धर्म और मानव गरिमा की रक्षा के लिए सदैव प्रेरित करती रहेंगी।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा,

“गुरु गोबिंद सिंह जी के पावन प्रकाश उत्सव पर हम श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। वे साहस, करुणा और त्याग के प्रतीक हैं। उनका जीवन और उनकी शिक्षाएँ हमें सत्य, न्याय, धर्म और मानव गरिमा की रक्षा के लिए प्रेरित करती हैं। गुरु गोबिंद सिंह जी की दृष्टि पीढ़ियों को सेवा और निस्वार्थ कर्तव्य के मार्ग पर आगे बढ़ाती रहेगी।”

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर अपने उस दौरे की तस्वीरें भी साझा कीं, जब उन्होंने इसी वर्ष तख्त  हरमंदिर जी, पटना साहिब में दर्शन किए थे। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्हें गुरु गोबिंद सिंह जी और माता साहिब कौर जी के पावन जोड़े साहिब के भी दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

प्रधानमंत्री के इस संदेश ने देशवासियों को गुरु साहिब के आदर्शों—सेवा, त्याग और मानवता—को अपने जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी।


आस्था ने छुआ हृदय: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रामनामी समाज के प्रतिनिधियों की आत्मीय भेंट

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया पर साझा किया यह भावनात्मक पल

रायपुर-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रामनामी समाज के बीच आत्मीय संवाद का एक वीडियो देश में तेजी से वायरल हुआ है । इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इसे भावनात्मक और प्रेरणादायी पल बताया है ।

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित रजत महोत्सव के दौरान एक हृदयस्पर्शी दृश्य उस समय देखने को मिला, जब रामनाम में लीन जीवन जीने वाले रामनामी समाज के प्रतिनिधियों ने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आत्मीय भेंट की।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि प्रधानमंत्री जी के रायपुर प्रवास से कुछ ही घंटे पहले मंत्रालय में रामनामी समुदाय के प्रतिनिधियों से उनकी भेंट हुई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री जी से मिलने की अपनी प्रबल इच्छा व्यक्त की थी, जिसके अनुरूप इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जब रजत महोत्सव के दौरान रामनामी समुदाय के ये श्रद्धालु प्रधानमंत्री मोदी से मिले, तब उन्होंने बड़े आदर और प्रेम से प्रधानमंत्री जी को अपने पारंपरिक मोर मुकुट से मुख्य मंच पर अलंकृत करने की अभिलाषा प्रकट की। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस सहजता, स्नेह और आत्मीय भाव से उनके इस अनुरोध को स्वीकार किया, वह क्षण वहां उपस्थित सभी लोगों के लिए अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायी बन गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाम ही जिनका धर्म, रामभक्ति ही जिनका कर्म - ऐसे अद्भुत और राममय रामनामी समाज के सदस्यों के तन पर अंकित ‘राम’ केवल एक नाम नहीं, बल्कि समर्पण, तपस्या और अटूट आस्था का प्रतीक है। यह समुदाय अपने तन, मन और जीवन को प्रभु श्रीराम के चरणों में अर्पित कर देता है — यही उनकी जीवन साधना है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की इस आत्मीयता में भक्ति और कर्म का अद्वितीय संगम झलकता है। यह दृश्य इस सत्य को पुष्ट करता है कि रामभक्ति केवल पूजा नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पवित्र साधना है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आचरण और जीवन मूल्यों से सार्थक किया है।

शांति शिखर रिट्रीट सेंटर: नवा रायपुर में शांति और आध्यात्मिकता का प्रतीक

No comments Document Thumbnail

नवा रायपुर के सेक्टर-20 में स्थित ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान का “शांति शिखर रिट्रीट सेंटर – एकेडमी फॉर ए पीसफुल वर्ल्ड” आज छत्तीसगढ़ में शांति और आध्यात्मिकता का नया प्रतीक बनकर खड़ा है। यह भव्य केंद्र राजयोगी ओम प्रकाश भाईजी और राजयोगिनी कमला दीदी के पवित्र संकल्पों से साकार हुआ है। इस भवन का निर्माण 15 जनवरी 2018 को प्रारंभ हुआ और सात वर्षों की निष्ठापूर्ण साधना के बाद यह स्वप्न हकीकत में बदला। 105 फीट ऊँचा, 150 फीट चौड़ा और 225 फीट लंबा यह पाँच मंजिला शांति-धाम राजस्थानी महल की शैली में जोधपुर के कारीगरों ने विशिष्ट पिंक स्टोन से तैयार किया। निर्माण हेतु 150 से अधिक ट्रकों में यह गुलाबी पत्थर विशेष रूप से जोधपुर से लाया गया था। यह न केवल ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की पहली पिंक स्टोन इमारत है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहली ऐसी संरचना भी है जो प्रेसटेंसाइल बीम तकनीक से निर्मित हुई है—जो आमतौर पर बड़े पुलों में प्रयुक्त होती है।

भवन की प्रमुख विशेषताएँ 

  1. 2000 लोगों की क्षमता वाला आधुनिक एलईडी स्क्रीनयुक्त एसी ऑडिटोरियम
  2. 400 लोगों हेतु दो उन्नत सेमिनार हॉल
  3. 100 साधकों के लिए विशाल ध्यान कक्ष
  4. 25 व्यक्तियों की क्षमता वाली आध्यात्मिक व नैतिक साहित्य से समृद्ध लाइब्रेरी
  5. 100 अतिथियों के लिए आरामदायक विश्राम कक्ष
  6. 300 लोगों का डायनिंग हॉल
  7. 200 से अधिक लोगों का वीडियो थिएटर, जहाँ संस्था की प्रेरक फिल्में प्रदर्शित होंगी

दो एकड़ में बना है शांति शिखर 

लगभग दो एकड़ भूमि में फैले इस केंद्र को ब्रह्माकुमारीज़ के देश-विदेश के रिट्रीट केंद्रों में अद्वितीय माना जा रहा है। रायपुर क्षेत्र की संचालिका राजयोगिनी बीके सविता दीदी के अनुसार, “शांति शिखर” में समाज के प्रत्येक वर्ग को ध्यान में रखकर विविध आध्यात्मिक कार्यक्रम संचालित होंगे। यहाँ आने वाला हर व्यक्ति आत्मशांति, पवित्रता और सकारात्मकता का अनुभव करेगा।

11 हजार लोगों का योगदान 

इस केंद्र के निर्माण में ब्रह्माकुमारीज़ के 50 सेवाकेंद्रों और 500 उपसेवाकेंद्रों से जुड़े लगभग 11 हजार सदस्यों का सहयोग रहा। वर्ष 2018 से प्रत्येक सदस्य ने प्रतिदिन एक रुपया देकर इस दिव्य धरोहर को साकार किया। यह सामूहिक सेवाभाव आने वाले समय में न जाने कितने जीवनों में शांति, एकता और सद्भाव की ज्योति प्रज्वलित करेगा।“शांति शिखर” केवल एक इमारत नहीं, बल्कि मानवता में शांति और सकारात्मकता का जीवंत मंदिर है—जो आने वाली पीढ़ियों को ‘आत्मबल से विश्व-कल्याण’ का संदेश देगा।

छठ पूजा: सूर्य उपासना का पवित्र पर्व, आस्था, पर्यावरण और संस्कृति का संगम

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली-चार दिनों तक चलने वाला लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सूर्य देव और छठी मैया की उपासना को समर्पित यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक एकता, पर्यावरण संरक्षण और अनुशासन का प्रतीक भी है।

 पर्व की पौराणिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि

छठ पूजा की परंपरा वैदिक काल से जुड़ी मानी जाती है। कहा जाता है कि सूर्य उपासना के माध्यम से प्रकृति और पंचतत्वों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम और माता सीता ने भी अयोध्या लौटने के बाद छठ व्रत किया था। वहीं महाभारत काल में द्रौपदी और पांडवों ने भी राज्य की समृद्धि के लिए इस व्रत का पालन किया था।

चार दिवसीय अनुष्ठान और उसका महत्व

छठ पूजा चार दिनों तक अत्यंत नियम, संयम और शुद्धता के साथ मनाई जाती है—

  1. नहाय-खाय (पहला दिन): व्रत की शुरुआत पवित्र स्नान और सात्विक भोजन से होती है। इस दिन घर की सफाई और शुद्ध भोजन का विशेष महत्व होता है।

  2. खरना (दूसरा दिन): व्रती पूरे दिन निर्जल उपवास रखकर सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर, रोटी और केला प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

  3. संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): अस्ताचलगामी सूर्य को नदी, तालाब या घाट पर खड़े होकर अर्घ्य दिया जाता है। लाखों श्रद्धालु पारंपरिक गीतों और लोकसंगीत के साथ यह पूजा संपन्न करते हैं।

  4. उषा अर्घ्य (चौथा दिन): अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन किया जाता है। इसे छठ व्रत का सबसे पवित्र क्षण माना जाता है।

आस्था और अनुशासन का अनूठा उदाहरण

छठ पूजा का सबसे बड़ा आकर्षण इसका सामूहिक स्वरूप है। यह पर्व न केवल बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में, बल्कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, छत्तीसगढ़ और देश के कई अन्य हिस्सों में भी पूरे उत्साह से मनाया जाता है। विदेशों में बसे भारतीय समुदाय भी इसे बड़े हर्षोल्लास से मनाते हैं।

व्रती महिलाएँ (और कई पुरुष भी) बिना किसी भोग-विलास के, कठिन तप और आत्मसंयम के साथ व्रत रखते हैं। पूजा में इस्तेमाल होने वाले सभी प्रसाद — जैसे ठेकुआ, केला, नारियल, और गुड़ की खीर — पूरी तरह प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल होते हैं।

पर्यावरण और सामाजिक संदेश

छठ पूजा पर्यावरण के प्रति जागरूकता का भी प्रतीक है। यह पर्व जलाशयों की स्वच्छता, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के सम्मान की भावना को बढ़ाता है। कई राज्यों में प्रशासन और स्थानीय समुदाय मिलकर नदी घाटों की सफाई और प्लास्टिक-मुक्त पूजा सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चला रहे हैं।

लोक संस्कृति और संगीत की आत्मा

छठ के अवसर पर गाए जाने वाले लोकगीत — जैसे “केलवा जरा जरा हो रा…”, “उग हो सूरज देव…” — श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और उल्लास का वातावरण बना देते हैं। पारंपरिक वेशभूषा, गीत-संगीत, और घाटों की सजावट इस पर्व को एक लोकसांस्कृतिक उत्सव का रूप देते हैं।

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सहित कई राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों ने देशवासियों को छठ पूजा की शुभकामनाएँ दी हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि “छठी मैया की कृपा से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य आए।”

निष्कर्ष

छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, अनुशासन और सामूहिकता का उत्सव है। यह पर्व हमें सिखाता है कि मनुष्य और प्रकृति का संबंध परस्पर सम्मान और संतुलन पर आधारित होना चाहिए। इस वर्ष भी देशभर के घाटों पर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते श्रद्धालुओं की आस्था यह संदेश दे रही है कि भारत की परंपराएँ आज भी जीवंत हैं — आधुनिकता के साथ संतुलन बनाते हुए।


राज्यपाल रमेन डेका ने भिलाई स्कंदाश्रम में की पूजा-अर्चना, प्रदेश की खुशहाली के लिए की कामना

No comments Document Thumbnail

 रायपुर - राज्यपाल रमेन डेका ने आज  भिलाई के हुडको स्थित स्कंदाश्रम में विधिवत पूजा-अर्चना की और प्रदेश की समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। तीन दिवसीय चलने वाले इस 28वीं स्कंद षष्ठी महोत्सव के महायज्ञ में राज्यपाल डेका धर्मपत्नी रानी डेका ककोटी के साथ सम्मिलित हुए तथा संकल्प लेकर देवी सप्तसती का पहला अध्याय पूर्ण किया। यह महायज्ञ हर वर्ष दिवाली के बाद स्कंद षष्ठी तिथि को दक्षिण भारतीय वेदाचार्यों द्वारा विधिवत सम्पन्न कराया जाता है। इस अवसर पर  राज्यपाल के सचिव सी.आर.प्रसन्ना, संभाग आयुक्त एस.एन. राठौर, कलेक्टर अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल, स्कंदाश्रम के पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।



महादेव घाट पर गूंजे मंत्र, 21 सौ दीपों से खारुन मईया आरती सम्पन्न

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय खारुन मईया समरसता भव्य महाआरती में हुए शामिल : महाआरती में मंत्रोच्चार से गूंजा खारुन नदी का महादेव घाट

रायपुर-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज शाम महादेव घाट, रायपुर में आयोजित खारुन मईया समरसता भव्य महाआरती में शामिल हुए। इस भव्य आयोजन का संयुक्त रूप से आयोजन सनातन ध्वज वाहिनी एवं महिला मोर्चा द्वारा देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में किया गया। इस अवसर पर खारुन नदी तट पर 21 सौ दीपों का दीपदान भी किया गया।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश का गौरव पूरी दुनिया में बढ़ा है। वे आज आधुनिक भारत के शिल्पकार हैं और विकसित भारत के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इसका लाभ देश की 140 करोड़ जनता को मिल रहा है। उन्होंने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। उसके अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य का दर्जा दिलाने के लिए हमारी डबल इंजन की सरकार दृढ़ता और प्रतिबद्धता के साथ हर मोर्चे पर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि साध्वी प्रज्ञा भारती के नेतृत्व में चंद्रपुर स्थित महानदी तट पर गंगा आरती की शुरुआत हुई थी, जो आज भी निरंतर जारी है। उस आरती में वे स्वयं उपस्थित रहे। इसके बाद रायगढ़ की केलो नदी में भी गंगा आरती प्रारंभ हुई, जो नदी संरक्षण की दिशा में एक उत्कृष्ट पहल है। उन्होंने खारुन नदी में भी समय-समय पर गंगा आरती आयोजित करने की अपील की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं। साथ ही उन्होंने पूरे प्रदेशवासियों को विश्वकर्मा जयंती की भी शुभकामनाएँ दी तथा इस भव्य आयोजन के लिए सनातन ध्वज वाहिनी एवं महिला मोर्चा के सदस्यों की सराहना की।

रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि नदियों की आरती हमारी आस्था का प्रतीक है। इसके माध्यम से हम नदियों से जुड़ते हैं और उनके संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाते हैं। यह परंपरा नई नहीं, बल्कि सदियों से हमारे सनातन धर्म का अभिन्न हिस्सा रही है। नदियाँ आदि काल से ही हमारी आस्था और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रही हैं। सांसद अग्रवाल ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बधाई और शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर पूज्य साध्वी प्रज्ञा भारती, रायपुर ग्रामीण विधायक मोती लाल साहू, महापौर मीनल चौबे, अपेक्स अध्यक्ष केदार गुप्ता, नॉन अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित थे।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.