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शिवालयों की नगरी आरंग में गूंजेगी भक्ति की तान, भव्य शिवभक्ति गीत की शूटिंग पूरी

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​डिजिटल डेस्क, आरंग: "शिवालयों की नगरी" के नाम से सुप्रसिद्ध नगर आरंग अब भक्ति, संगीत और कला के क्षेत्र में अपनी एक नई पहचान बनाने जा रहा है। अंचल के उभरते व सुप्रसिद्ध कलाकारों द्वारा भगवान शिव को समर्पित एक भव्य और अत्यंत मधुर शिवभक्ति गीत का निर्माण किया जा रहा है।

इस भक्ति गीत के बोल "कांशी जैइसे नगरी मोर आरिंग" हैं, जिसे आरंग अंचल के लोकप्रिय लोकगायक गंगा साहू ने कलमबद्ध किया है। इस गीत की परिकल्पना पीपला फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने की है।

​गीत की प्रमुख विशेषताएँ और टीम वर्क:

​मधुर स्वर: छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध गायक विवेक शर्मा और लोकगायक गंगा साहू ने गीत को अपनी सुरीली आवाज दी है।

​संगीत संयोजन: भिलाई के प्रख्यात संगीतकार देवेंद्र साहू ने इस गीत को मनमोहक संगीत से सजाया है।

​फिल्मांकन व कोरियोग्राफी: प्रख्यात कोरियोग्राफर उत्तम साहू की टीम और कैमरामैन वीरू साहू ने गीत के फिल्मांकन में अहम भूमिका निभाई है।

​नगर के सभी शिवालयों के होंगे एक साथ दर्शन

​इस शिवभक्ति गीत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आरंग नगर में स्थापित सभी प्रमुख शिवलिंगों और मंदिरों को प्रमुखता से दिखाया जाएगा। हाल ही में सोमवार को पंचमुखी महादेव मंदिर, बाबा बागेश्वर नाथ मंदिर, बस स्टैंड तथा समलेश्वरी मंदिर परिसर सहित नगर के विभिन्न शिवालयों में गीत के दृश्यों को शूट किया गया।

​शूटिंग के दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जो पूरे दिन कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बनी रही।

​स्थानीय लोगों में उत्साह

​आरंग के नागरिकों ने इस सांस्कृतिक व धार्मिक पहल की जमकर सराहना की है। लोगों का कहना है कि इस गीत के माध्यम से न केवल देश-प्रदेश के लोग आरंग के पावन शिवालयों के दर्शन कर सकेंगे, बल्कि इससे आरंग की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान भी और अधिक मजबूत होगी।

सावन का पहला सोमवार: आस्था, शिव भक्ति और शुभ आरंभ का पावन पर्व

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सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस महीने का प्रत्येक सोमवार विशेष महत्व रखता है, लेकिन सावन का पहला सोमवार भक्तों के लिए नई ऊर्जा, श्रद्धा और शुभ संकल्प का प्रतीक होता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है।

सावन के पहले सोमवार का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में सावन मास को भगवान शिव का प्रिय महीना माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकले विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। इसके बाद देवताओं ने उन्हें जल अर्पित कर शीतलता प्रदान की। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।

सावन का पहला सोमवार इस पावन माह की आध्यात्मिक शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और शिवभक्त "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

पूजा की विधि

सावन के पहले सोमवार को प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव का अभिषेक गंगाजल, दूध, दही, शहद और शुद्ध जल से करें। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और चंदन अर्पित करें। पूजा के दौरान शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र तथा शिव पंचाक्षरी मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

व्रत का महत्व

इस दिन कई श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं। मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं। अविवाहित युवक-युवतियाँ मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए तथा विवाहित महिलाएँ परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करती हैं।

आध्यात्मिक संदेश

सावन का पहला सोमवार केवल धार्मिक अनुष्ठानों का दिन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, सेवा और सकारात्मक सोच अपनाने का भी अवसर है। भगवान शिव हमें सादगी, धैर्य, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उनके जीवन से यह संदेश मिलता है कि त्याग, संतुलन और प्रेम ही जीवन की सबसे बड़ी शक्तियाँ हैं।

निष्कर्ष

सावन का पहला सोमवार श्रद्धा, भक्ति और विश्वास का पावन पर्व है। इस दिन भगवान शिव की आराधना से मन को शांति, जीवन को नई दिशा और आत्मा को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। आइए, इस शुभ अवसर पर हम सभी भगवान भोलेनाथ का स्मरण करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का स्वागत करें।

हर हर महादेव!


सावन: शिव भक्ति, हरियाली और भारतीय संस्कृति का उत्सव

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"रिमझिम बरसती फुहारें, मिट्टी की सौंधी खुशबू, पेड़ों पर झूलों की मस्ती और 'हर-हर महादेव' के जयघोष..." यही है सावन की पहचान। श्रावण मास केवल हिंदू धर्म का एक पवित्र महीना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, प्रकृति और लोकजीवन का जीवंत उत्सव है।


बरसात की पहली बूंद जब धरती को स्पर्श करती है, तो सूखी वसुंधरा हरियाली की चादर ओढ़ लेती है। खेतों में नई फसल की उम्मीद अंकुरित होती है, नदियां और तालाब जीवन से भर उठते हैं और प्रकृति अपनी अनुपम छटा बिखेर देती है। यही कारण है कि सावन को नवजीवन, समृद्धि और उल्लास का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले कालकूट विष को भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। तब से सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। श्रद्धालु शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा विश्व कल्याण की कामना करते हैं। सावन के सोमवार और कांवड़ यात्रा इस आस्था को और अधिक प्रगाढ़ बनाते हैं।

सावन भारतीय लोक संस्कृति का भी सबसे रंगीन अध्याय है। गांवों में पेड़ों पर झूले पड़ते हैं, महिलाएं और युवतियां हरे परिधानों में सजकर कजरी और सावनी गीत गाती हैं। हरियाली तीज, नाग पंचमी और रक्षाबंधन जैसे पर्व सामाजिक सौहार्द, पारिवारिक प्रेम और सांस्कृतिक परंपराओं को नई ऊर्जा देते हैं। यह महीना रिश्तों में अपनापन और जीवन में सकारात्मकता का संदेश लेकर आता है।

आज जब पर्यावरण संरक्षण पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है, तब सावन हमें प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है। हरियाली तभी बचेगी, जब हम पेड़ लगाएंगे, जल स्रोतों का संरक्षण करेंगे और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। भगवान शिव स्वयं प्रकृति के देवता माने जाते हैं, इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना भी उनकी सच्ची आराधना है।

सावन केवल धार्मिक अनुष्ठानों का महीना नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम, सेवा, प्रेम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। आइए, इस पावन मास में भगवान शिव से यही प्रार्थना करें कि हमारे जीवन में शांति, समाज में सद्भाव और प्रकृति में सदैव हरियाली बनी रहे।

हर-हर महादेव! जय भोलेनाथ!

महाशिवरात्रि 2026: श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का महापर्व

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नई दिल्ली/महासमुंद-आज देशभर में महाशिवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। भगवान शिव की आराधना के लिए मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। शिवालयों में “हर हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया है।

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे भगवान शिव और माता पार्वती के पावन विवाह की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।

देशभर में भव्य आयोजन

काशी विश्वनाथ, उज्जैन महाकालेश्वर, केदारनाथ, सोमनाथ और बैद्यनाथ धाम सहित देश के प्रमुख शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। कई जगहों पर भजन-कीर्तन, शिव बारात और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ।

आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व

महाशिवरात्रि केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और शिव भक्ति करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनुष्य को शांति, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

युवाओं और श्रद्धालुओं की भागीदारी

इस वर्ष युवाओं में भी महाशिवरात्रि को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। कई स्थानों पर युवाओं ने सेवा कार्य, रक्तदान शिविर और स्वच्छता अभियान भी चलाए, जिससे पर्व के साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश भी दिया गया।

निष्कर्ष

महाशिवरात्रि का पर्व भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और आस्था का प्रतीक है। यह पर्व हमें सत्य, तप, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

हर हर महादेव!


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