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भारत में अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट, 399 स्टार्टअप DPIIT में पंजीकृत

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भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के पास स्टार्टअप्स के लिए कोई अलग पंजीकरण प्रक्रिया नहीं है, क्योंकि यह उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) की भूमिका की पुनरावृत्ति होगी। स्टार्टअप्स इंडिया पोर्टल के अनुसार, वर्तमान में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुड़े 399 स्टार्टअप्स DPIIT में पंजीकृत हैं, जिनमें उपग्रह, प्रक्षेपण यान विकास एवं अन्य अंतरिक्ष गतिविधियों से जुड़े स्टार्टअप शामिल हैं। हालांकि, IN-SPACe राज्यवार स्टार्टअप्स का डेटा संधारित नहीं करता है।

अब तक भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स द्वारा 7 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण, 20 पेलोड्स का सफल लॉन्च, तथा 2 अंतरिक्ष यानों (सब-ऑर्बिटल लॉन्च) का सफल प्रक्षेपण किया जा चुका है।

निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष गतिविधियों को सुगम और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से IN-SPACe ने 3 मई 2024 को भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 के क्रियान्वयन हेतु Norms, Guidelines and Procedures (NGP) अधिसूचित किए हैं। यह ढांचा निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को अंतरिक्ष गतिविधियों की अनुमति देने के लिए एक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और पूर्वानुमेय नियामक व्यवस्था प्रदान करता है।

सरकार भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में भी सक्रिय सहयोग दे रही है। भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 के साथ उदारीकृत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक विस्तार के लिए वित्तीय और परिचालन सुविधा प्रदान करती है।

इसके अतिरिक्त, IN-SPACe विदेशी उद्योगों और सरकारी संस्थाओं के साथ सक्रिय रूप से संवाद कर भारतीय स्टार्टअप्स को बढ़ावा दे रहा है। अब तक 7 स्पेस डेज़ का आयोजन किया जा चुका है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों जैसे इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉटिकल कांग्रेस (IAC), GSTCE सिंगापुर और केन्या स्पेस एक्सपो में भारतीय प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स ने 25 से अधिक देशों में व्यावसायिक समझौते हासिल किए हैं।

यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी।

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