Media24Media.com: आर्थिक सर्वेक्षण से स्पष्ट: कृषि और ग्रामीण विकास में अभूतपूर्व प्रगति – शिवराज सिंह चौहान

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आर्थिक सर्वेक्षण से स्पष्ट: कृषि और ग्रामीण विकास में अभूतपूर्व प्रगति – शिवराज सिंह चौहान

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सर्वेक्षण के आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने कृषि और ग्रामीण विकास—दोनों मोर्चों पर अभूतपूर्व प्रगति की है।

कृषि क्षेत्र में सतत और स्थिर विकास

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पिछले पाँच वर्षों में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में स्थिर मूल्यों पर औसतन 4.4 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो वैश्विक औसत से अधिक है। वित्त वर्ष 2016 से 2025 की दशक अवधि में कृषि क्षेत्र ने 4.45 प्रतिशत की दशकगत वृद्धि दर हासिल की है, जो पिछले दशकों की तुलना में सर्वाधिक है।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025–26 की दूसरी तिमाही में भी कृषि क्षेत्र ने 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो इसकी मजबूती और लचीलेपन को दर्शाती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2024–25 में देश का खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 357.73 मिलियन टन तक पहुंच गया। यह वृद्धि मुख्य रूप से धान, गेहूं, मक्का और मोटे अनाजों—जिसमें ‘श्री अन्न’ (मिलेट्स) भी शामिल हैं—के बेहतर उत्पादन के कारण हुई है। आज भारत न केवल खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है, बल्कि कई फसलों में वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका भी निभा रहा है।

बागवानी कृषि विकास का उज्ज्वल पक्ष

शिवराज चौहान ने कहा कि कृषि सकल मूल्य वर्धन (GVA) में लगभग 33 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बागवानी क्षेत्र भारतीय कृषि का सबसे उज्ज्वल पक्ष बनकर उभरा है। बागवानी उत्पादन वित्त वर्ष 2013–14 में 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024–25 में 367.72 मिलियन टन हो गया है।

इस अवधि में फल उत्पादन 114.51 मिलियन टन, सब्जी उत्पादन 219.67 मिलियन टन तथा अन्य बागवानी फसलों का उत्पादन 33.54 मिलियन टन रहा।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारत अब विश्व का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक देश बन गया है, जो वैश्विक प्याज उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत योगदान देता है। साथ ही, भारत सब्जियों, फलों और आलू का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जिनमें प्रत्येक श्रेणी में वैश्विक हिस्सेदारी लगभग 12–13 प्रतिशत है।

ग्रामीण भारत में अवसंरचना का ऐतिहासिक विस्तार

ग्रामीण विकास की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए शिवराज चौहान ने कहा कि ग्रामीण अवसंरचना—जिसमें सड़कें, आवास, पेयजल और डिजिटल कनेक्टिविटी शामिल हैं—में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत अब 99.6 प्रतिशत से अधिक पात्र बसावटों को सभी मौसमों में चलने योग्य सड़कों से जोड़ दिया गया है।

उन्होंने बताया कि पीएमजीएसवाई के विभिन्न चरणों के अंतर्गत लाखों किलोमीटर सड़कों और हजारों पुलों का निर्माण किया गया है। पीएमजीएसवाई-IV के तहत 10,000 किलोमीटर से अधिक सड़क परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिससे जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान, सिक्किम और हिमाचल प्रदेश की लगभग 3,270 असंपर्कित बसावटों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित होगी।

आवास, डिजिटल सशक्तिकरण और आजीविका में परिवर्तन

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘सबके लिए आवास’ मिशन के तहत पिछले 11 वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में 3.70 करोड़ पक्के मकानों का निर्माण किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के अंतर्गत 4.14 करोड़ आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिनमें से अधिकांश को स्वीकृति दी जा चुकी है।

डिजिटल और तकनीकी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्वामित्व (SVAMITVA) योजना के तहत 3.28 लाख गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरे किए जा चुके हैं और 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड जारी किए गए हैं। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 99.8 प्रतिशत भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अब 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं 90 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। ‘लखपति दीदी’ की संख्या 2.5 करोड़ के पार पहुंच चुकी है, जो ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में एक बड़ी उपलब्धि है।

शिवराज चौहान ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण यह दर्शाता है कि सतत नीतिगत फोकस, संस्थागत सुधारों और लक्षित निवेशों ने कृषि को मजबूत किया है और ग्रामीण भारत का व्यापक रूप से रूपांतरण किया है। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां समावेशी विकास, किसान कल्याण और सतत ग्रामीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं, जिससे भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में गांवों की केंद्रीय भूमिका सुनिश्चित होती है।


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