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अनुसंधान, विकास और नवाचार को नई गति: आरडीआई फंड के तहत टीडीबी की पहली ओपन कॉल लॉन्च

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मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) फंड के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) की पहली ओपन कॉल का शुभारंभ किया। यह पहल अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के तहत शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को संरचित और दीर्घकालिक वित्तीय सहायता प्रदान कर भारत के नवाचार पारितंत्र को सुदृढ़ बनाना है।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पहल पारंपरिक सरकारी वित्तपोषण मॉडल से एक महत्वपूर्ण और दुर्लभ बदलाव को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि अब तक सरकारें मुख्यतः परोपकार या कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से निजी क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करती रही हैं, जबकि निजी नवाचार को सीधे सरकारी वित्तीय समर्थन सीमित रहा है। आरडीआई फंड इस अंतर को पाटने का प्रयास है, जिससे निजी उद्यमों को उन क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों को विस्तार देने में सहायता मिलेगी, जो अब तक मुख्यतः सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित थे।

मंत्री ने बताया कि अंतरिक्ष और परमाणु जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोलने से दशकों पुरानी परंपराओं में बदलाव आया है। आरडीआई फंड इसी परिवर्तन को समर्थन देने के लिए तैयार किया गया है, जो वित्तीय जोखिम को कम करते हुए जवाबदेही भी सुनिश्चित करता है। यह फंड दीर्घकालिक, किफायती वित्तपोषण प्रदान करता है और इसमें जोखिम साझा करने के लिए इक्विटी-लिंक्ड विकल्प भी शामिल हैं, जिससे जिम्मेदार व्यावसायीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

डॉ. सिंह ने जानकारी दी कि आरडीआई फंड का कुल कोष ₹1 लाख करोड़ है। इसके अंतर्गत लगभग 2 से 4 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर 15 वर्ष तक की अवधि के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें मोरेटोरियम का प्रावधान भी शामिल है। यह ढांचा प्रौद्योगिकी डेवलपर्स के लिए पूंजी तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है।

पहली कॉल के तहत प्राप्त प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि लगभग 191 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से अधिकांश निजी क्षेत्र से आए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रतिक्रिया नवाचार-आधारित विकास को समर्थन देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर निजी उद्योग के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आवेदनों को योजना की मूल भावना के अनुरूप होना चाहिए और धनराशि का उपयोग वास्तविक प्रौद्योगिकी विकास और विस्तार के लिए किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पारितंत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और हितधारक उपस्थित रहे। मंच पर प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव राजेश पाठक और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर भी मौजूद थे।

कार्यक्रम में बताया गया कि आरडीआई फंड के तहत टीडीबी की पहली कॉल उन परियोजनाओं पर केंद्रित है, जो टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL) 4 या उससे ऊपर की अवस्था में हैं। वित्तीय सहायता सेकेंड लेवल फंड मैनेजर्स (SLFMs) के माध्यम से ऋण, इक्विटी या हाइब्रिड साधनों के रूप में प्रदान की जाएगी। किसी भी परियोजना के लिए अधिकतम 50 प्रतिशत तक का वित्तपोषण उपलब्ध होगा, जबकि शेष राशि कंपनियों या निजी निवेशकों द्वारा वहन की जाएगी।

इस फंडिंग व्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की जमानत, व्यक्तिगत या कॉर्पोरेट गारंटी की आवश्यकता नहीं होगी। प्रस्तावों का मूल्यांकन वैज्ञानिक, तकनीकी, वित्तीय और व्यावसायिक आधार पर किया जाएगा तथा मूल्यांकन और धनराशि निर्गमन के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है। यह योजना अनुदान (ग्रांट) आधारित नहीं है, बल्कि टिकाऊ और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य प्रौद्योगिकियों के विस्तार पर केंद्रित है।

उल्लेखनीय है कि आरडीआई फंड को जुलाई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी और नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शुभारंभ किया था। यह पहल स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं के निर्माण और भारत की नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दीर्घकालिक दृष्टि का हिस्सा है।

कार्यक्रम के दौरान आरडीआई फंड के तहत टीडीबी की पहली ओपन कॉल का औपचारिक शुभारंभ किया गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने नवोन्मेषकों, उद्योग जगत और मीडिया से आह्वान किया कि वे इस पहल की जानकारी व्यापक रूप से प्रसारित करें, ताकि देशभर के पात्र उद्यम भारत की प्रौद्योगिकी विकास यात्रा में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।

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