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DPIIT और NPC द्वारा हैदराबाद में ‘बॉयलर चिंतन शिविर’ का आयोजन

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उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार ने राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) के सहयोग से हैदराबाद में “बॉयलर पर चिंतन शिविर” का आयोजन किया।

इस चिंतन शिविर का उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना, नीतियों के क्रियान्वयन की समीक्षा करना और “विजन 2047” जैसे दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप रणनीतियों को समन्वित करना था। चर्चा का मुख्य फोकस बॉयलर उद्योग के लिए एक रोडमैप तैयार करना था, जिसमें उद्योग से जुड़े प्रमुख हितधारकों को शामिल किया गया।

उच्चस्तरीय सहभागिता

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद की महानिदेशक नीरजा शेखर,DPIIT के संयुक्त सचिव जय प्रकाश शिवहरे,और तकनीकी सलाहकार (बॉयलर) एवं सचिव, केंद्रीय बॉयलर बोर्ड, संदीप सदानंद कुंभार शामिल हुए।

इसके अलावा राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, बॉयलर निर्माता, बॉयलर उपयोगकर्ता, थर्ड पार्टी निरीक्षण प्राधिकरण (TPIA) और अन्य हितधारक भी चर्चा में शामिल हुए।

Boilers Act, 2025 पर चर्चा

प्रतिभागियों को बताया गया कि बॉयलर अधिनियम, 1923 (संविधान से पूर्व का कानून) की वर्तमान प्रासंगिकता की समीक्षा की गई थी। चूंकि यह कानून जीवन और संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसे बनाए रखने का निर्णय लिया गया, लेकिन इसके प्रावधानों को अद्यतन किया गया।

इसके परिणामस्वरूप कानून को Boilers Act, 2025 के रूप में पुनः अधिनियमित किया गया, जो 1 मई 2025 से लागू है।चिंतन शिविर का उद्देश्य इस नए कानून पर फीडबैक लेना और नियामक ढांचे को मजबूत बनाने के सुझाव आमंत्रित करना था।

तकनीकी सत्र और उद्योग विषय

तकनीकी सत्रों में निम्न विषयों पर चर्चा हुई:

  • Boilers Act, 2025 और इसके नियम व विनियम

  • ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यापार सुगमता)

  • थर्ड पार्टी निरीक्षण प्राधिकरण और सक्षम व्यक्तियों की भूमिका

  • पुराने बॉयलरों की शेष जीवन अवधि का आकलन

  • बॉयलर निर्माण में उन्नत तकनीक

  • सुपरक्रिटिकल बॉयलरों की स्थापना में आने वाली चुनौतियाँ

खुली चर्चा और सुझाव

कार्यक्रम का समापन पैनल चर्चा और ओपन हाउस संवाद के साथ हुआ, जिसमें हितधारकों से नियमों को सरल बनाने, अनुपालन बोझ कम करने और व्यापार सुगमता बढ़ाने के सुझाव मांगे गए, जबकि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न करने पर जोर दिया गया।


अनुसंधान, विकास और नवाचार को नई गति: आरडीआई फंड के तहत टीडीबी की पहली ओपन कॉल लॉन्च

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मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) फंड के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) की पहली ओपन कॉल का शुभारंभ किया। यह पहल अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के तहत शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को संरचित और दीर्घकालिक वित्तीय सहायता प्रदान कर भारत के नवाचार पारितंत्र को सुदृढ़ बनाना है।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पहल पारंपरिक सरकारी वित्तपोषण मॉडल से एक महत्वपूर्ण और दुर्लभ बदलाव को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि अब तक सरकारें मुख्यतः परोपकार या कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से निजी क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करती रही हैं, जबकि निजी नवाचार को सीधे सरकारी वित्तीय समर्थन सीमित रहा है। आरडीआई फंड इस अंतर को पाटने का प्रयास है, जिससे निजी उद्यमों को उन क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों को विस्तार देने में सहायता मिलेगी, जो अब तक मुख्यतः सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित थे।

मंत्री ने बताया कि अंतरिक्ष और परमाणु जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोलने से दशकों पुरानी परंपराओं में बदलाव आया है। आरडीआई फंड इसी परिवर्तन को समर्थन देने के लिए तैयार किया गया है, जो वित्तीय जोखिम को कम करते हुए जवाबदेही भी सुनिश्चित करता है। यह फंड दीर्घकालिक, किफायती वित्तपोषण प्रदान करता है और इसमें जोखिम साझा करने के लिए इक्विटी-लिंक्ड विकल्प भी शामिल हैं, जिससे जिम्मेदार व्यावसायीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

डॉ. सिंह ने जानकारी दी कि आरडीआई फंड का कुल कोष ₹1 लाख करोड़ है। इसके अंतर्गत लगभग 2 से 4 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर 15 वर्ष तक की अवधि के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें मोरेटोरियम का प्रावधान भी शामिल है। यह ढांचा प्रौद्योगिकी डेवलपर्स के लिए पूंजी तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है।

पहली कॉल के तहत प्राप्त प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि लगभग 191 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से अधिकांश निजी क्षेत्र से आए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रतिक्रिया नवाचार-आधारित विकास को समर्थन देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर निजी उद्योग के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आवेदनों को योजना की मूल भावना के अनुरूप होना चाहिए और धनराशि का उपयोग वास्तविक प्रौद्योगिकी विकास और विस्तार के लिए किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पारितंत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और हितधारक उपस्थित रहे। मंच पर प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव राजेश पाठक और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर भी मौजूद थे।

कार्यक्रम में बताया गया कि आरडीआई फंड के तहत टीडीबी की पहली कॉल उन परियोजनाओं पर केंद्रित है, जो टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL) 4 या उससे ऊपर की अवस्था में हैं। वित्तीय सहायता सेकेंड लेवल फंड मैनेजर्स (SLFMs) के माध्यम से ऋण, इक्विटी या हाइब्रिड साधनों के रूप में प्रदान की जाएगी। किसी भी परियोजना के लिए अधिकतम 50 प्रतिशत तक का वित्तपोषण उपलब्ध होगा, जबकि शेष राशि कंपनियों या निजी निवेशकों द्वारा वहन की जाएगी।

इस फंडिंग व्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की जमानत, व्यक्तिगत या कॉर्पोरेट गारंटी की आवश्यकता नहीं होगी। प्रस्तावों का मूल्यांकन वैज्ञानिक, तकनीकी, वित्तीय और व्यावसायिक आधार पर किया जाएगा तथा मूल्यांकन और धनराशि निर्गमन के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है। यह योजना अनुदान (ग्रांट) आधारित नहीं है, बल्कि टिकाऊ और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य प्रौद्योगिकियों के विस्तार पर केंद्रित है।

उल्लेखनीय है कि आरडीआई फंड को जुलाई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी और नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शुभारंभ किया था। यह पहल स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं के निर्माण और भारत की नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दीर्घकालिक दृष्टि का हिस्सा है।

कार्यक्रम के दौरान आरडीआई फंड के तहत टीडीबी की पहली ओपन कॉल का औपचारिक शुभारंभ किया गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने नवोन्मेषकों, उद्योग जगत और मीडिया से आह्वान किया कि वे इस पहल की जानकारी व्यापक रूप से प्रसारित करें, ताकि देशभर के पात्र उद्यम भारत की प्रौद्योगिकी विकास यात्रा में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।

ड्रोन परीक्षण एवं प्रमाणन में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम, एनटीएच और एसटीक्यूसी के बीच समझौता

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मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और विज़न 2047 के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करते हुए, नेशनल टेस्ट हाउस (NTH) ने भारत को सुरक्षित, विश्वसनीय और प्रमाणित ड्रोन प्रौद्योगिकियों का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है।

इसी क्रम में नेशनल टेस्ट हाउस (NTH) ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत मानकीकरण परीक्षण एवं गुणवत्ता प्रमाणन निदेशालय (STQC) – इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रीय परीक्षण प्रयोगशाला (उत्तर) [ERTL (North)] के साथ सरकार-से-सरकार सहयोग स्थापित किया है। इस सहयोग के तहत ड्रोन के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस (EMI) और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कम्पैटिबिलिटी (EMC) परीक्षण किए जाएंगे, जिससे भारत के ड्रोन परीक्षण और प्रमाणन ढांचे को और मजबूती मिलेगी।

यह सहयोग ड्रोन नियम, 2021 तथा मानवरहित विमान प्रणालियों के लिए प्रमाणन योजना (CSUAS), 2022 के तहत एक महत्वपूर्ण नियामक आवश्यकता को पूरा करता है और सुरक्षित, भरोसेमंद तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप ड्रोन प्रणालियों के प्रमाणन की भारत की क्षमता को सशक्त करेगा।

इस संबंध में समझौता ज्ञापन (MoU) पर 2 फरवरी 2026 को हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर उपभोक्ता कार्य विभाग की सचिव निधि खरे, नेशनल टेस्ट हाउस के महानिदेशक डॉ. आलोक कुमार श्रीवास्तव, एसटीक्यूसी निदेशालय के वैज्ञानिक ‘जी’ विवेक कश्यप तथा ईआरटीएल (उत्तर) के निदेशक एवं वैज्ञानिक ‘एफ’ प्रदीप गुंज्याल उपस्थित रहे।

समझौते के तहत ड्रोन एवं उनके उप-प्रणालियों का EMI/EMC तथा इम्युनिटी परीक्षण ईआरटीएल (उत्तर) में आईईसी 61000 / आईएस 14700 मानकों के अनुसार किया जाएगा, जबकि अन्य परीक्षण एनटीएच द्वारा अपने परिसरों में संपन्न किए जाएंगे। इस सहयोग से तैयार परीक्षण रिपोर्ट्स को टाइप सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे विशेषकर स्टार्टअप्स और एमएसएमई को एक पारदर्शी, सरल, विश्वसनीय और सरकारी समर्थन वाला प्रमाणन मार्ग उपलब्ध होगा।

यह साझेदारी महंगे परीक्षण अवसंरचना की अनावश्यक पुनरावृत्ति से बचाते हुए राष्ट्रीय संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करती है तथा ड्रोन सुरक्षा और विश्वसनीयता के लिए भारत के नियामक ढांचे को मजबूत बनाती है। साथ ही, एनटीएच के माध्यम से प्रमाणित ड्रोन अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसे IEC/ISO, MIL-STD, ASTM और RTCA के अनुरूप होंगे, जिससे भारतीय ड्रोन की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ेगी।

सरकारी सुविधाओं के माध्यम से कम लागत पर विश्वस्तरीय ड्रोन परीक्षण और प्रमाणन उपलब्ध होने से कृषि, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, अवसंरचना निगरानी और स्मार्ट सिटी जैसे क्षेत्रों में नवाचार को नई गति मिलेगी।

एनटीएच और एसटीक्यूसी–ईआरटीएल (उत्तर) के बीच यह सहयोग भारत के लिए एक मजबूत, स्वदेशी और भविष्य के अनुरूप ड्रोन प्रमाणन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

उल्लेखनीय है कि नेशनल टेस्ट हाउस को डीजीसीए और क्यूसीआई द्वारा सीएसयूएएस के तहत प्रमाणन निकाय / अधिकृत परीक्षण संस्था के रूप में मान्यता प्राप्त है और यह ड्रोन सहित उभरती प्रौद्योगिकियों की सुरक्षा, गुणवत्ता और नियामक अनुपालन सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

1912 में स्थापित नेशनल टेस्ट हाउस, भारत सरकार का एक प्रमुख वैज्ञानिक एवं परीक्षण संस्थान है, जो उपभोक्ता कार्य विभाग, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। देशभर में एनएबीएल-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं के नेटवर्क के साथ एनटीएच विभिन्न क्षेत्रों में परीक्षण, निरीक्षण, गुणवत्ता आश्वासन और प्रमाणन सेवाएं प्रदान करता है।

विकसित छत्तीसगढ़ का रोडमैप है छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में छत्तीसगढ अंजोर विजन 2047 पर चर्चा करते हुए कहा कि यह विजन प्रदेश को वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ बनाने का स्पष्ट रोडमैप है। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज आने वाले वर्षाे में राज्य के विकास की दिशा तय करेगा। उन्होंने इस मौके पर विकसित छत्तीसगढ के निर्माण में सहभागी बनने के लिए सभी सदस्यों से आव्हान किया। उन्होंने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए राज्य के अतीत, वर्तमान उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डाला।

भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि 14 दिसंबर 2000 को राजकुमार कॉलेज के जशपुर हॉल में छत्तीसगढ़ विधानसभा की पहली बैठक आयोजित हुई थी। यह जशपुर हॉल स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव द्वारा अपने सांसद निधि से निर्मित कराया गया था। उन्होंने इस स्मृति का उल्लेख करते हुए प्रदेश की लोकतांत्रिक यात्रा को नमन किया। मुख्यमंत्री साय ने विज़न डॉक्यूमेंट के निर्माण के लिए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी को बधाई देते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में यह दस्तावेज तैयार हुआ है, जो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ के विकास की दिशा तय करेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद वे अब तीसरी बार देश का नेतृत्व कर रहे हैं और उनके प्रयासों से भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

विकसित छत्तीसगढ़ की यात्रा के लिए हमने कुछ महत्वपूर्ण चरण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का जो लक्ष्य रखा है। उनके अनुरूप हमने भी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का लक्ष्य तय किया है। विकसित छत्तीसगढ़ की यात्रा के लिए हमने कुछ महत्वपूर्ण चरण बनाये हैं। हमने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए समय अवधि तय की है। जैसे वर्ष 2030 तक हम निकटवर्ती लक्ष्य हासिल करेंगे। इसी तरह साल 2035 तक मध्यवर्ती और 2047 तक दीर्घकालिक लक्ष्य हासिल करेंगे।

अंजोर विजन में 13 क्षेत्रों को किया गया चिन्हांकित

छत्तीसगढ़ अंजोर विजन डाक्यूमेंट जनभागीदारी का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसे तैयार करने के लिए हमने किसान, युवा, महिला, उद्यमी, कारोबारी समेत समाज के हर वर्ग से सुझाव मांगे। मुझे स्वयं उनसे प्रत्यक्ष बातचीत करने का मौका मिला। इस अंजोर विजन में हमने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, अधोसंरचना जैसे 13 क्षेत्रों को चिन्हांकित कर इनके विकास के लिए 10 मिशन गठित करने का निर्णय लिया। हम ग्रामीण विकास के साथ.साथ अर्बन प्लानिंग के बेहतरीन मॉडल खड़े कर रहे हैं। नवा रायपुर भविष्य का सबसे तेजी से बढ़ने वाला शहर है। यह शहर मेडिकलए एजुकेशन, टेक्सटाइल, आईटी और एआई का ग्लोबल हब बनने जा रहा है। हम ग्रामीण विकास के साथ.साथ अर्बन प्लानिंग के बेहतरीन मॉडल खड़े कर रहे हैं। नवा रायपुर भविष्य का सबसे तेजी से बढ़ने वाला शहर है। यह शहर मेडिकल, एजुकेशन, टेक्सटाइल, आईटी और एआई का ग्लोबल हब बनने जा रहा है। 

गरीबों, किसानों और वंचित वर्गों के सर्वांगीण विकास के लिए अनेक योजनाएं

 मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बीते वर्षों में गरीबों, किसानों और वंचित वर्गों के लिए अनेक योजनाएं चलाई गईं और राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए सतत प्रयास किए गए। उन्होंने बताया कि सरकार की पहली ही कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 18 लाख आवासों को स्वीकृति दी गई। महिला सशक्तीकरण के लिए महतारी वंदन योजना एक ऐतिहासिक पहल बनी। लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता दी जा रही है। डीबीटी के माध्यम से अब तक 22 किस्तों में 14 हजार 306 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज और वनोपज संग्राहकों के हित में तेंदूपत्ता पारिश्रमिक 4000 से बढ़ाकर 5500 रुपये किया गया है। 13 लाख परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है। चरणपादुका योजना पुनः प्रारंभ की गई है तथा 73 लाख गरीब परिवारों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है।

इको-टूरिज्म, बस्तर पंडुम तथा बस्तर ओलंपिक से बनी बस्तर की पहचानबस्तर में बस्तर ओलंपिक एवं बस्तर पांडुम जैसे कार्यकमों के माध्यम से बस्तर की आम जनता तक पहुंच रहे है।इस साल बस्तर पांडुम में इस बार 3 गुना लोगों के हिस्सा लेने का अनुमान है। जो हमारी सरकार की सफलता को दिखाती है। आइए इस ऐतिहासिक दिन में हम सभी संकल्प ले की प्रदेश की विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को पूरा करे।  इको-टूरिज्म, बस्तर पंडुम तथा बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन नई पहचान बना रहे हैं।  

  8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त 

 साय ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापार और उद्योग के लिए नई औद्योगिक नीति लागू की गई है। अब तक 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। लॉजिस्टिक पार्क, एयर कार्गाे सुविधा और औद्योगिक पार्क स्थापित किए गए हैं। स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारी सरकार 2 साल में 10 हजार से ज्यादा बेटी बेटा को सरकारी नौकरी दिया गया है। ऊर्जा क्षेत्र में साढ़े तीन लाख करोड़ का निवेश हुआ है।

आत्मसमर्पण करने वाले और गिरफ्तार हुए माओवादी का पुनर्वास 

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी की दूरदृष्टि एवं केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी के संकल्प के साथ हमारे बहादुर जवानों के अदम्य साहस से माओवाद अब अंतिम पड़ाव पर है। हम मार्च 2026 तक माओवाद की समाप्ति की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले और गिरफ्तार हुए माओवादी का पुनर्वास किया जा रहा है। सुरक्षा के साथ-साथ विकास के जरिए बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के तहत सुदूर गांवों में राशन, आधार, आयुष्मान कार्ड, आवास, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं। बस्तर में स्कूल पुनः शुरू हुए हैं और इको-टूरिज्म, बस्तर पंडुम तथा बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन नई पहचान बना रहे हैं। 

छत्तीसगढ़ खनिज और वन संपदा से समृद्ध राज्य   

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में 10 हजार से अधिक बेटियों और बेटों को सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज और वन संपदा से समृद्ध राज्य है। मुख्यमंत्री ने सदन और प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि सभी मिलकर विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने का संकल्प लें।    

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में डबल सब्सिडी 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हम सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों पर सोलर रूफटॉप लगाने पर केंद्र और राज्य की डबल सब्सिडी प्रदान कर रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र में साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी दी जा रही है। सौर ऊर्जा के एक किलोवॉट क्षमता के प्लांट के लिए केन्द्र सरकार द्वारा 30 हजार रूपए और राज्य सरकार द्वारा 15 हजार रूपए इस प्रकार कुल 45 हजार रूपए की सब्सिडी दी जा रही है। 

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के द्वारा प्रस्तुत विज़न 2047 की चर्चा में भाग लेने वालों में उप मुख्यमंत्री अरूण साव, विजय शर्मा, मंत्री रामविचार नेताम, विधायक अजय चन्द्राकर, धरमलाल कौशिक, राजेश मूणत, धरमजीत सिंह, सुनील सोनी, भावना बोहरा, लता उसेंडी, अनुज शर्मा, सुशांत शुक्ला तथा किरण देव शामिल रहे।

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओडिशा विधानसभा को संबोधित किया

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज (27 नवंबर, 2025) भुवनेश्वर में ओडिशा विधानसभा के सदस्यों को संबोधित किया।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में Assembly के पुराने दिनों की यादें साझा करते हुए कहा कि यहाँ बिताए वर्षों के दौरान उन्हें विधायक के रूप में प्रश्न पूछने और मंत्री के रूप में उत्तर देने का अनुभव प्राप्त हुआ।

राष्ट्रपति ने कहा कि ओडिशा ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह भूमि चंद्रशोक से धर्मशोक में परिवर्तन की गवाह रही है और यहाँ की आदिवासी समुदायों ने विदेशी शासन के खिलाफ संघर्ष कर देश के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है।

उन्होंने कहा कि ओडिशा में महिलाओं को सशक्त बनाने की प्राचीन परंपरा रही है। यह गर्व की बात है कि ओडिशा विधानसभा में सदैव महिलाओं का प्रतिनिधित्व रहा है। स्वतंत्रता से पहले और बाद में कभी भी ओडिशा में ऐसी विधानसभा नहीं रही जिसमें महिलाओं का प्रतिनिधित्व न हो। ओडिशा की महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर देश का नाम रोशन कर रही हैं।

राष्ट्रपति ने विधानसभा द्वारा पारित किए गए जनकल्याणकारी कानूनों की सराहना की। उन्होंने कहा कि 17वीं विधानसभा ने बहुत कम समय में कई उत्पादक बैठकें आयोजित की हैं और यहाँ संवाद की स्वस्थ परंपरा बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि ओडिशा तेजी से प्रगति कर रहा है। राज्य सरकार की कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदिवासी और अन्य वंचित समूहों के विकास, आवास और आपदा प्रबंधन जैसी नई पहलों की उन्होंने सराहना की। साथ ही औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया भी केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से नई दिशा ले रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि ओडिशा प्राकृतिक रूप से समृद्ध है। यहाँ खनिज, वन, जल और मानव संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं। यह कृषि, उद्योग और वाणिज्य के विकास के लिए अत्यंत अनुकूल है। इन सभी संसाधनों का सही उपयोग करके ओडिशा को देश का अग्रणी राज्य बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ओडिशा की स्थापना की शताब्दी 2036 में मनाई जाएगी। यदि सभी हितधारक मिलकर 2036 तक समृद्ध ओडिशा बनाने में सहयोग करें, तो यह 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में ओडिशा का सबसे बड़ा योगदान होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी 'Nation First' के भाव के साथ कार्य करेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि विधायक जनता के प्रतिनिधि हैं और जनता ने उनमें अपनी आशाएँ और भरोसा व्यक्त किया है। यह उनका कर्तव्य है कि वे नागरिकों की अपेक्षाओं को पूरा करें, उनके सपनों को साकार करें और उनके चेहरे पर मुस्कान लाएँ।

उन्होंने कहा कि यह तकनीकी युग है। विधायक के शब्द और आचरण अनुयायियों और प्रशंसकों के लिए मार्गदर्शन का काम करते हैं। उनका व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि उनके अनुयायी उसका अनुसरण करके समाज और राज्य के निर्माण में योगदान दें।

विजन 2047 की ओर सशक्त कदम: छत्तीसगढ़ टेक स्टार्ट 2025 ने खोले नवाचार के नए द्वार

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छत्तीसगढ़ बन रहा है टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का नया पावर सेंटर - मुख्यमंत्री साय

छत्तीसगढ़ के युवा नवाचार से रच रहे तकनीकी भविष्य – मुख्यमंत्री ने किया आइडियाथॉन विजेताओं का सम्मान

रायपुर-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज नया रायपुर स्थित मेफेयर होटल में आयोजित ‘छत्तीसगढ़ टेक स्टार्ट’ कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘टेक स्टार्ट’ का यह आयोजन राज्य में नवाचार और तकनीकी उद्यमिता को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इस अवसर पर उन्होंने ‘आइडियाथॉन 2025’ के विजेताओं को सम्मानित किया और छत्तीसगढ़ शासन के साथ पार्टनरशिप एक्सचेंज करने वाली इकाइयों को एग्रीमेंट पत्र सौंपे। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञों, उद्यमियों एवं प्रबुद्धजनों को रजत जयंती वर्ष की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे विजनरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदैव बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया है। उनके ‘विकसित भारत’ के संकल्प से प्रेरणा लेते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 2047 तक ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का लक्ष्य तय किया है, जिसके लिए विजन डॉक्यूमेंट भी तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में आज भारत में लाखों स्टार्टअप कार्यरत हैं, जिनमें से अनेक यूनिकॉर्न बन चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी युवाओं की उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए पूर्ण समर्पण के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की अद्भुत क्षमता रखते हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश की बेटी आकांक्षा सत्यवंशी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की फिजियोथैरेपिस्ट हैं, वहीं स्क्वाड्रन लीडर गौरव पटेल नया रायपुर एयरो शो में फाइटर प्लेन उड़ाकर राज्य का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस और सिंगल विंडो सिस्टम को सशक्त करते हुए 350 से अधिक सुधार किए हैं, जिससे छत्तीसगढ़ निवेश के लिए देश के सबसे आकर्षक राज्यों में शामिल हो गया है। औद्योगिक विकास के साथ-साथ आईटी और आईटीईएस सेक्टर में भी राज्य तीव्र गति से प्रगति कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में आयोजित ‘आइडियाथॉन 2025’ में प्रदेशभर से 1800 से अधिक स्टार्टअप आइडिया प्राप्त हुए, जिनमें दूरस्थ अंचलों के युवाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन नवाचारों को मंच, मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि रायपुर को आईटी और तकनीकी सेवाओं का केंद्र बनाने की दिशा में कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। एआई डेटा सेंटर पार्क और सेमीकंडक्टर प्लांट जैसी परियोजनाएं भी साकार हो रही हैं। साय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अब तक राज्य सरकार को साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने राज्य में तीव्र आर्थिक गतिविधियों और युवाओं के लिए रोजगार सृजन के बढ़ते अवसरों पर भी विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने उद्यमियों से कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार आपके साथ चट्टान की तरह खड़ी है। अपनी मेहनत और प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर ले जाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि आप सभी की सफलता ही छत्तीसगढ़ का गौरव बनेगी।

मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि नई औद्योगिक नीति 2024 का उद्देश्य उद्यमिता को बढ़ावा देना और विजन 2047 के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है। उन्होंने बताया कि इस नीति में नवाचार, निवेश, रोजगार और स्टार्टअप के अवसरों को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने ई-वेस्ट मैनेजमेंट, राइजिंग सेक्टर और स्किल डेवलपमेंट जैसे उभरते क्षेत्रों में कार्य करने की आवश्यकता बताई तथा उद्यमियों से अपने सुझाव साझा करने का आग्रह किया। 

मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार युवाओं और उद्यमियों के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ को तकनीकी और औद्योगिक विकास का हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि उद्यमियों और शासन के मध्य संवाद केवल विशेष अवसरों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि निरंतर होना चाहिए ताकि विचारों का आदान-प्रदान सतत रूप से होता रहे।

मुख्यमंत्री ने ‘आइडियाथॉन 2025’ के विजेताओं को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री साय ने टेक स्टार्ट कार्यक्रम के दौरान हाल ही में आयोजित ‘आइडियाथॉन 2025’ के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया। उन्होंने युवाओं द्वारा प्रस्तुत नवाचारी सृजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि जब युवा नवाचार से जुड़ते हैं, तो यह अत्यंत सुखद होता है और तकनीकी भविष्य को मजबूती प्रदान करता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने एनआईटी रायपुर, रुंगटा बिजनेस इनक्यूबेटर और आईजीकेवीआर को इनक्यूबेटर के रूप में उत्कृष्ट कार्य हेतु सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने आइडियाथॉन 2025 में दिव्यांगजनों के लिए स्मार्ट बैंड के आइडिया के लिए आदर्श वर्मा को प्रथम पुरस्कार, सड़क किनारे पौधों की सुरक्षा हेतु ‘अटल कवच ट्री गार्ड’ के लिए जागृति और नरेंद्र शर्मा को द्वितीय पुरस्कार तथा स्मार्ट सुरक्षा हेलमेट के आइडिया के लिए अथर्व दुबे को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया। उन्होंने निपुण वर्मा और अनुष्का सोनकर को भी उनके नवाचारी विचारों के लिए सम्मानित किया। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एग्रोफेब सस्टेनेबल स्टार्टअप के लिए करण चंद्राकर, वर्टेक्स सुइट के लिए सजल मल्होत्रा और लैरक एआई के लिए अमित पटेल को सम्मानित किया।

राज्य सरकार के साथ ‘पार्टनरशिप एक्सचेंज’ हेतु समझौता पत्र सौंपे

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में माइटी स्टार्टअप हब, नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन, वाधवानी फाउंडेशन, नैस्कॉम फाउंडेशन, स्टार्टअप मिडिल ईस्ट, कार्व स्टार्टअप लैब और छत्तीसगढ़ शासन के मध्य पार्टनरशिप एक्सचेंज के लिए समझौता पत्र भी वितरित किए।

एआई आधारित नवाचारों का अवलोकन – युवाओं का उत्साहवर्धन

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एआई (Artificial Intelligence) आधारित नवाचार स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने स्टार्टअप टीमों द्वारा विकसित मॉडलों, तकनीकों और अनुप्रयोगों की बारीकी से जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने युवा नवाचारकर्ताओं द्वारा तैयार किए गए समाधान, सॉफ्टवेयर, ऐप्लिकेशन और तकनीकी मॉडलों को देखकर उनकी उद्यमशीलता एवं शोध-क्षमता की सराहना की। निरीक्षण के दौरान उपस्थित युवा उद्यमियों ने अपने प्रोजेक्ट्स की उपयोगिता, बाज़ार संभावनाओं और भविष्य की योजनाओं की जानकारी मुख्यमंत्री को दी।

मुख्यमंत्री ने सभी युवाओं को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे निरंतर नई तकनीक के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी पहचान बनाएँ।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, निवेश आयुक्त ऋतु सैन, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, डीजी एसटीपीआई अरविंद कुमार, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, संचालक उद्योग प्रभात मलिक, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की उप सचिव रेना जमील, सीएसआईडीसी के प्रबंध निदेशक विश्वेश कुमार तथा बड़ी संख्या में उद्यमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।


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