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विक्रम-1 मिशन की ऐतिहासिक सफलता पर टीडीबी ने स्काईरूट एयरोस्पेस को दी बधाई

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने स्काईरूट एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड को विक्रम-1 मिशन की सफल उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी है। यह सफलता भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह उपलब्धि स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान को और सशक्त बनाती है तथा देश में विकसित डीप-टेक नवाचारों की परिवर्तनकारी क्षमता को प्रदर्शित करती है।

यह ऐतिहासिक सफलता टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड की उस दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की भी पुष्टि करती है, जिसके तहत बोर्ड व्यावसायीकरण की मजबूत संभावनाओं वाली स्वदेशी प्रौद्योगिकियों की पहचान, सम्मान और प्रोत्साहन देता रहा है।

स्वदेशी प्रक्षेपण यान (Launch Vehicle) प्रौद्योगिकियों के विकास में स्काईरूट एयरोस्पेस के अग्रणी योगदान को देखते हुए, कंपनी को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2022 के अवसर पर टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा नेशनल टेक्नोलॉजी स्टार्ट-अप अवॉर्ड 2022 से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार तत्कालीन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर तत्कालीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. श्रीवारी चंद्रशेखर तथा टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक भी उपस्थित थे।

यह पुरस्कार स्काईरूट एयरोस्पेस को छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण बाजार के लिए विकसित स्वदेशी क्रायोजेनिक, लिक्विड और सॉलिड प्रोपल्शन तकनीकों के विकास के लिए प्रदान किया गया था। इससे कंपनी की तकनीकी उत्कृष्टता और व्यावसायिक क्षमता को उसके शुरुआती चरण में ही मान्यता मिली। आज विक्रम-1 मिशन की सफलता इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी पुरस्कारों का उद्देश्य भारत की उन कंपनियों को प्रोत्साहित करना है, जो क्रांतिकारी तकनीकों के माध्यम से राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालने की क्षमता रखती हैं।

स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई देते हुए टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा,

"स्काईरूट एयरोस्पेस की सफलता पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप पुरस्कार से सम्मानित एक उभरते स्टार्ट-अप से लेकर भारत के निजी अंतरिक्ष कार्यक्रम में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने तक की उनकी यात्रा, भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती को दर्शाती है। अपने नवाचार-आधारित विकास को आगे बढ़ाते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस ने अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI Fund) के अंतर्गत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड को एक प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया है, जो वर्तमान में विचाराधीन है।"

टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड लगातार स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए एयरोस्पेस, रक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत विनिर्माण तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में नवाचार-आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करता रहा है। स्काईरूट एयरोस्पेस जैसी कंपनियों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि समय पर संस्थागत पहचान और निरंतर सहयोग भारत के नवाचार-आधारित उद्यमियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

टीडीबी ने एयरोस्पेस, रक्षा और ईवी चार्जिंग कनेक्टरों के स्वदेशी व्यावसायीकरण हेतु टीआईईए कनेक्टर्स को दिया समर्थन

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भारत को उन्नत विनिर्माण और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने बेंगलुरु स्थित TIEA Connectors Pvt. Ltd. को “एयरोस्पेस, रक्षा एवं इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एयरबोर्न कनेक्टर्स और चार्जिंग कनेक्टर्स के व्यावसायीकरण” परियोजना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है।

इस परियोजना का उद्देश्य एयरोस्पेस, रक्षा, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे रणनीतिक एवं उभरते क्षेत्रों के लिए उच्च-विश्वसनीयता (High-Reliability) वाले विद्युत इंटरकनेक्ट सिस्टम के डिजाइन और निर्माण में भारत की स्वदेशी क्षमताओं को सुदृढ़ करना है।

विद्युत कनेक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक एवं इलेक्ट्रोमैकेनिकल प्रणालियों के अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं, जो कठिन परिचालन परिस्थितियों में भी ऊर्जा, सिग्नल और डेटा के निर्बाध संचार को सुनिश्चित करते हैं। एयरोस्पेस, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में इनकी विश्वसनीयता और सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इन्हें अत्यधिक कंपन, झटकों, तापमान और पर्यावरणीय दबावों के बीच कार्य करना पड़ता है।

टीआईईए द्वारा विकसित तकनीक उन्नत कंपन-प्रतिरोधी (Vibration-Resistant) संपर्क संरचना पर आधारित है, जो अत्यधिक गतिशील परिस्थितियों में भी स्थिर विद्युत प्रदर्शन सुनिश्चित करती है। इसमें एक स्वामित्वयुक्त (Proprietary) मल्टी-पॉइंट इलास्टिक कॉन्टैक्ट मैकेनिज्म का उपयोग किया गया है, जो संपर्क स्थिरता बढ़ाने, विद्युत प्रतिरोध कम करने और तीव्र कंपन के दौरान भी सिग्नल बाधित होने से रोकने में सक्षम है।

यह तकनीक 100G तक के कंपन स्तर पर भी विश्वसनीय विद्युत संपर्क बनाए रखने में सक्षम है, जिससे यह मिशन-क्रिटिकल एयरोस्पेस, रक्षा और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त बनती है। इन कनेक्टरों का निर्माण उच्च-प्रदर्शन बेरीलियम कॉपर (BeCu) मिश्रधातु से किया जाता है और इनमें विशेष लॉकिंग मैकेनिज्म लगाए गए हैं ताकि कठोर परिस्थितियों में भी सुरक्षित एवं स्थायी विद्युत संपर्क बना रहे।

रणनीतिक उपयोगों के लिए इन कनेक्टरों पर चांदी और सोने की प्लेटिंग भी की जाती है, जिससे बेहतर चालकता, जंग-प्रतिरोध और दीर्घकालिक विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।

यह परियोजना भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल और रक्षा, एयरोस्पेस तथा उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के स्वदेशीकरण के लक्ष्य के अनुरूप है। कंपनी ने उत्पाद डिजाइन, इंजीनियरिंग, टूलिंग, प्रोटोटाइपिंग, परीक्षण और विनिर्माण तक की संपूर्ण क्षमताएं देश में विकसित की हैं, जिससे आयातित तकनीकों पर निर्भरता कम होगी।

यह तकनीक भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र की आवश्यकताओं को भी पूरा करेगी और मजबूत एवं विश्वसनीय चार्जिंग कनेक्टर समाधान उपलब्ध कराएगी। इससे घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी, तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और उच्च-मूल्य इलेक्ट्रॉनिक घटकों के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता विकसित होगी।

इस अवसर पर टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि एयरोस्पेस, रक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में भारत की बढ़ती क्षमताओं के लिए स्वदेशी उच्च-प्रदर्शन घटकों का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि टीडीबी रणनीतिक और उच्च-विकास वाले क्षेत्रों के लिए वैश्विक स्तर की तकनीक विकसित करने वाले भारतीय उद्यमों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

टीआईईए कनेक्टर्स के प्रवर्तकों ने टीडीबी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे कंपनी को अपनी स्वदेशी कनेक्टर तकनीकों के व्यावसायीकरण में तेजी लाने और एयरोस्पेस, रक्षा, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रिक वाहन तथा औद्योगिक बाजारों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विनिर्माण क्षमता का विस्तार करने में सहायता मिलेगी।


भारत में स्वदेशी टाइप-IV CNG कंपोजिट सिलेंडर निर्माण सुविधा स्थापित करने हेतु TDB और NTF Energy Solutions के बीच समझौता

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भारत सरकार के स्वच्छ ऊर्जा गतिशीलता को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने तथा आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत स्वदेशी विनिर्माण को सशक्त करने के दृष्टिकोण के अनुरूप, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार ने दिल्ली स्थित M/s NTF Energy Solutions Private Limited के साथ “टाइप-IV CNG सिलेंडर के व्यावसायीकरण हेतु विनिर्माण सुविधा की स्थापना” नामक परियोजना के लिए एक समझौता किया है।

इस परियोजना का उद्देश्य उन्नत विनिर्माण सुविधा स्थापित करना है, जिसके माध्यम से अत्याधुनिक फिलामेंट वाइंडिंग, ब्लो मोल्डिंग और उच्च-दबाव परीक्षण तकनीकों का उपयोग कर स्वदेशी रूप से विकसित टाइप-IV कंपोजिट CNG सिलेंडरों का उत्पादन और व्यावसायीकरण किया जाएगा। यह पहल स्वच्छ परिवहन और उभरते ऊर्जा अनुप्रयोगों के लिए उन्नत गैस भंडारण प्रणालियों में भारत की घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

टाइप-IV कंपोजिट सिलेंडर पारंपरिक इस्पात सिलेंडरों का अगली पीढ़ी का विकल्प हैं, जो लगभग 75% तक वजन में कमी प्रदान करते हैं, जिससे वाहन की दक्षता बढ़ती है और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आती है। इन सिलेंडरों में जंग-रोधी पॉलिमर लाइनर, अनुकूलित CFRP ले-अप और उन्नत मैकेनिकल लॉकिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है, जो सुरक्षा, टिकाऊपन तथा रिसाव, कंपन और दबाव चक्रों के प्रति प्रतिरोध को बढ़ाते हैं। इनका डिज़ाइन 600 बार से अधिक बर्स्ट प्रेशर प्राप्त करता है, जो नियामक मानकों से काफी अधिक है और संचालन सुरक्षा को मजबूत बनाता है।

यह तकनीक NTF Energy Solutions Pvt. Ltd. द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित की गई है और इसे भारत के तेजी से बढ़ते CNG मोबिलिटी इकोसिस्टम को समर्थन देने के लिए डिजाइन किया गया है। यह परियोजना सरकार के स्वच्छ परिवहन, स्वच्छ ईंधन और उन्नत मोबिलिटी घटकों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।

प्रस्तावित सुविधा स्थानीय रूप से उपलब्ध कच्चे माल और उन्नत विनिर्माण प्रक्रियाओं का उपयोग कर उच्च-दबाव कंपोजिट सिलेंडरों के लिए एक लागत-प्रतिस्पर्धी और भविष्य-उन्मुख उत्पादन प्रणाली विकसित करेगी। यह परियोजना आयात प्रतिस्थापन, तकनीकी आत्मनिर्भरता और देश में एक मजबूत स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

इस अवसर पर TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा, “उन्नत टाइप-IV कंपोजिट सिलेंडरों का विकास और व्यावसायीकरण भारत के स्वच्छ गतिशीलता ढांचे और स्वदेशी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। NTF Energy Solutions को TDB का समर्थन सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत वह सतत परिवहन, ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत में योगदान देने वाली अगली पीढ़ी की तकनीकों को सक्षम बना रही है।”

NTF Energy Solutions Pvt. Ltd. के प्रबंध निदेशक नवीन जैन और निदेशक नमन जैन ने TDB के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सहायता स्वदेशी हल्के कंपोजिट सिलेंडर तकनीकों के व्यावसायीकरण को तेज करेगी, जिससे कंपनी भारत के स्वच्छ और अधिक दक्ष गतिशीलता समाधान की दिशा में संक्रमण में योगदान दे सकेगी।

Technology Development Board का बड़ा कदम: CAR-NK थेरेपी के लिए East Ocyon Bio Private Limited को समर्थन

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भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत Technology Development Board (TDB) ने गुरुग्राम स्थित East Ocyon Bio Private Limited को “CAR-NK आधारित सेल थेरेपी विकास एवं कठिन-उपचार योग्य ट्यूमर तथा लीशमैनियासिस के लिए क्लिनिकल परीक्षण” परियोजना हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की है। यह परियोजना भारत में पहली बार ऑफ-द-शेल्फ CAR-NK सेल थेरेपी के लिए एक प्लेटफॉर्म-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो उन्नत इम्यूनोथेरेपी और बायोथेरेप्यूटिक्स निर्माण क्षमता को सुदृढ़ करेगा।

CAR-NK (काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर–नेचुरल किलर) सेल थेरेपी पारंपरिक ऑटोलॉगस CAR-T थेरेपी की तुलना में अधिक सुरक्षित और स्केलेबल विकल्प के रूप में उभर रही है। इसमें स्वस्थ दाताओं से NK कोशिकाओं को अलग कर उनका विस्तार किया जाता है और उन्हें रोग-विशिष्ट लक्ष्यों के विरुद्ध CAR संरचना के साथ इंजीनियर किया जाता है। CAR-T थेरेपी के विपरीत, CAR-NK थेरेपी तुरंत उपलब्ध होती है, निर्माण प्रक्रिया सरल होती है, ग्राफ्ट-वर्सस-होस्ट डिजीज (GvHD) का जोखिम कम होता है तथा साइटोकाइन रिलीज सिंड्रोम (CRS) और न्यूरोटॉक्सिसिटी की संभावना भी अपेक्षाकृत कम रहती है।

इस परियोजना के अंतर्गत कंपनी निम्नलिखित विकसित और व्यावसायीकरण करने का प्रस्ताव रखती है:

  • मल्टीपल प्रतिरोधी ठोस ट्यूमर के लिए Anti-PD-L1 CAR-NK सेल थेरेपी

  • लीशमैनियासिस के उपचार हेतु CAR-NK आधारित नई इम्यूनोथेरेप्यूटिक रणनीति

“यह स्वदेशी तकनीकी प्लेटफॉर्म एलोजेनिक, ऑफ-द-शेल्फ CAR-NK और CAR-गामा डेल्टा (γδ) टी-सेल थेरेपी पर आधारित है…”,जिन्हें स्वस्थ दाताओं से प्राप्त कर बड़े पैमाने पर इंजीनियर किया जाएगा, GMP-अनुकूल प्रणालियों के अंतर्गत क्रायो-प्रिजर्व किया जाएगा और बिना रोगी-मैचिंग के उपयोग में लाया जाएगा। यह प्रक्रिया लागत-प्रभावशीलता, तीव्र उपलब्धता और व्यापक पहुंच सुनिश्चित करेगी। प्रमुख नवाचार में PD-L1 लक्षित CAR संरचना को NK कोशिकाओं में गामा-रेट्रोवायरल प्लेटफॉर्म के माध्यम से समाहित किया गया है, जिससे उच्च अभिव्यक्ति दक्षता और दीर्घकालिक कार्यक्षमता सुनिश्चित होती है।

इस अवसर पर TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि यह समर्थन उच्च-प्रभाव वाली उन्नत तकनीकों को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो अपूर्ण चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ स्वदेशी निर्माण क्षमताओं को भी मजबूत करती हैं। उन्होंने कहा कि देश में उन्नत सेल थेरेपी प्लेटफॉर्म विकसित होने से आयातित उपचारों पर निर्भरता कम होगी और भारत अगली पीढ़ी की इम्यूनोथेरेपी में प्रतिस्पर्धी भूमिका निभा सकेगा।

कंपनी के सह-संस्थापक डॉ. रेनु और डॉ. दिनेश कुंडू ने कहा कि TDB का सहयोग CAR-NK प्लेटफॉर्म के क्लिनिकल अनुवाद को गति देगा और प्रयोगशाला नवाचार से मरीजों तक पहुंच के बीच की दूरी को कम करेगा। उनका मानना है कि स्वदेशी, स्केलेबल और किफायती सेल थेरेपी प्लेटफॉर्म का विकास भारत और विश्व स्तर पर कैंसर एवं संक्रामक रोगों के उपचार परिदृश्य में परिवर्तन ला सकता है।

यह परियोजना भारत के बायो-इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत करने, तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाने और अत्याधुनिक उपचारों की सुलभता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की परिकल्पना के अनुरूप है।

TDB ने एंटीबायोटिक-मुक्त स्मार्ट प्रोटीन परियोजना के लिए एलमेंटोज़ रिसर्च के साथ समझौता किया

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आत्मनिर्भर भारत के सरकार के दृष्टिकोण और टिकाऊ तथा एंटीबायोटिक-मुक्त पशु पोषण समाधान को बढ़ावा देने के रणनीतिक उद्देश्य के अनुरूप, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार ने भुवनेश्वर स्थित एम/एस एलमेंटोज़ रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के साथ “पोल्ट्री, जलीय कृषि और पालतू पशु आहार के लिए एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड (AMP)-समृद्ध, टिकाऊ प्रिसिशन स्मार्ट प्रोटीन का विकास और वाणिज्यीकरण” परियोजना के लिए वित्तीय सहायता हेतु एक समझौता किया है।

यह परियोजना ELGROW™ स्मार्ट प्रोटीन के वाणिज्यिक-स्तरीय उत्पादन की स्थापना का लक्ष्य रखती है। यह एक एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड (AMP)-समृद्ध, प्रिसिशन-इंजीनियर्ड कार्यात्मक प्रोटीन है, जिसे कंपनी के स्वामित्व वाले कीट-आधारित जैव-निर्माण (insect biomanufacturing) प्लेटफॉर्म के माध्यम से विकसित किया गया है।

ओडिशा के भुवनेश्वर में मुख्यालय वाली इस कंपनी को डॉ. जयशंकर दास ने प्रवर्तित किया है। कंपनी पोल्ट्री, जलीय कृषि और पालतू पशु आहार क्षेत्रों के लिए एंटीबायोटिक-मुक्त, टिकाऊ और प्रिसिशन प्रोटीन समाधान प्रदान करने पर केंद्रित है। अपने स्वदेशी कीट-आधारित जैव-निर्माण प्लेटफॉर्म के माध्यम से, कंपनी ने ELGROW™ स्मार्ट प्रोटीन विकसित किया है, जिसे एंटीबायोटिक ग्रोथ प्रमोटर्स (AGPs) के विकल्प के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिससे फीड कन्वर्ज़न रेशियो (FCR) में सुधार, रोगों की घटनाओं में कमी और परिपत्र अपशिष्ट मूल्यवर्धन (circular waste valorisation) में योगदान मिलता है।

यह प्रौद्योगिकी स्थानीय रूप से उपलब्ध कृषि-खाद्य और औद्योगिक अपशिष्ट धाराओं को फीडस्टॉक के रूप में उपयोग करती है, जिससे घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत होती हैं, आयात निर्भरता कम होती है और परिपत्र अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के अनुरूप कार्य होता है। ELGROW™ प्रोटीन मील और AMP-समृद्ध स्मार्ट प्रोटीन फॉर्मूलेशन के अलावा, कंपनी ELGROW™ ऑयल भी बनाती है, जिसमें आवश्यक फैटी एसिड (जैसे लिनोलिक एसिड – ओमेगा-6) होते हैं, जो पोल्ट्री और जलीय कृषि के विकास और प्रजनन के लिए लाभकारी हैं।

समर्थित परियोजना से न केवल बड़े पोल्ट्री और जलीय कृषि एकीकृत उद्यमों को, बल्कि छोटे और मध्यम किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि यह भारतीय कृषि प्रणालियों के अनुरूप लागत-प्रभावी और प्रदर्शन-वर्धक फीड विकल्प प्रदान करेगी। यह पहल एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR), फीड सुरक्षा और बढ़ती इनपुट लागत जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करती है, साथ ही पर्यावरणीय स्थिरता में भी योगदान देती है।

समझौता हस्ताक्षर के अवसर पर, राजेश कुमार पाठक, सचिव, TDB ने कहा कि एलमेंटोज़ रिसर्च को बोर्ड का समर्थन स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास से उभरती प्रौद्योगिकियों के वाणिज्यीकरण को बढ़ावा देने के उसके दायित्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक-मुक्त प्रिसिशन पोषण समाधान खाद्य सुरक्षा, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता और भारत के पशुधन एवं जलीय कृषि क्षेत्रों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।

एम/एस एलमेंटोज़ रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के प्रवर्तक ने TDB के समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता कंपनी के स्वामित्व वाले कीट-आधारित जैव-निर्माण प्लेटफॉर्म के विस्तार में सक्षम बनाएगी। उन्होंने बताया कि यह परियोजना भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप टिकाऊ, लागत-प्रभावी और प्रदर्शन-आधारित प्रोटीन समाधान प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे आयातित फीड एडिटिव्स पर निर्भरता कम होगी और राष्ट्रीय फीड सुरक्षा मजबूत होगी।


अनुसंधान, विकास और नवाचार को नई गति: आरडीआई फंड के तहत टीडीबी की पहली ओपन कॉल लॉन्च

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मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) फंड के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) की पहली ओपन कॉल का शुभारंभ किया। यह पहल अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के तहत शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को संरचित और दीर्घकालिक वित्तीय सहायता प्रदान कर भारत के नवाचार पारितंत्र को सुदृढ़ बनाना है।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पहल पारंपरिक सरकारी वित्तपोषण मॉडल से एक महत्वपूर्ण और दुर्लभ बदलाव को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि अब तक सरकारें मुख्यतः परोपकार या कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से निजी क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करती रही हैं, जबकि निजी नवाचार को सीधे सरकारी वित्तीय समर्थन सीमित रहा है। आरडीआई फंड इस अंतर को पाटने का प्रयास है, जिससे निजी उद्यमों को उन क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों को विस्तार देने में सहायता मिलेगी, जो अब तक मुख्यतः सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित थे।

मंत्री ने बताया कि अंतरिक्ष और परमाणु जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोलने से दशकों पुरानी परंपराओं में बदलाव आया है। आरडीआई फंड इसी परिवर्तन को समर्थन देने के लिए तैयार किया गया है, जो वित्तीय जोखिम को कम करते हुए जवाबदेही भी सुनिश्चित करता है। यह फंड दीर्घकालिक, किफायती वित्तपोषण प्रदान करता है और इसमें जोखिम साझा करने के लिए इक्विटी-लिंक्ड विकल्प भी शामिल हैं, जिससे जिम्मेदार व्यावसायीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

डॉ. सिंह ने जानकारी दी कि आरडीआई फंड का कुल कोष ₹1 लाख करोड़ है। इसके अंतर्गत लगभग 2 से 4 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर 15 वर्ष तक की अवधि के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें मोरेटोरियम का प्रावधान भी शामिल है। यह ढांचा प्रौद्योगिकी डेवलपर्स के लिए पूंजी तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है।

पहली कॉल के तहत प्राप्त प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि लगभग 191 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से अधिकांश निजी क्षेत्र से आए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रतिक्रिया नवाचार-आधारित विकास को समर्थन देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर निजी उद्योग के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आवेदनों को योजना की मूल भावना के अनुरूप होना चाहिए और धनराशि का उपयोग वास्तविक प्रौद्योगिकी विकास और विस्तार के लिए किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पारितंत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और हितधारक उपस्थित रहे। मंच पर प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव राजेश पाठक और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर भी मौजूद थे।

कार्यक्रम में बताया गया कि आरडीआई फंड के तहत टीडीबी की पहली कॉल उन परियोजनाओं पर केंद्रित है, जो टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL) 4 या उससे ऊपर की अवस्था में हैं। वित्तीय सहायता सेकेंड लेवल फंड मैनेजर्स (SLFMs) के माध्यम से ऋण, इक्विटी या हाइब्रिड साधनों के रूप में प्रदान की जाएगी। किसी भी परियोजना के लिए अधिकतम 50 प्रतिशत तक का वित्तपोषण उपलब्ध होगा, जबकि शेष राशि कंपनियों या निजी निवेशकों द्वारा वहन की जाएगी।

इस फंडिंग व्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की जमानत, व्यक्तिगत या कॉर्पोरेट गारंटी की आवश्यकता नहीं होगी। प्रस्तावों का मूल्यांकन वैज्ञानिक, तकनीकी, वित्तीय और व्यावसायिक आधार पर किया जाएगा तथा मूल्यांकन और धनराशि निर्गमन के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है। यह योजना अनुदान (ग्रांट) आधारित नहीं है, बल्कि टिकाऊ और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य प्रौद्योगिकियों के विस्तार पर केंद्रित है।

उल्लेखनीय है कि आरडीआई फंड को जुलाई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी और नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शुभारंभ किया था। यह पहल स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं के निर्माण और भारत की नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दीर्घकालिक दृष्टि का हिस्सा है।

कार्यक्रम के दौरान आरडीआई फंड के तहत टीडीबी की पहली ओपन कॉल का औपचारिक शुभारंभ किया गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने नवोन्मेषकों, उद्योग जगत और मीडिया से आह्वान किया कि वे इस पहल की जानकारी व्यापक रूप से प्रसारित करें, ताकि देशभर के पात्र उद्यम भारत की प्रौद्योगिकी विकास यात्रा में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।

टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड ने स्वदेशी EV चार्जर्स के व्यावसायीकरण हेतु Electrowaves Electronics को दी वित्तीय सहायता

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टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार ने हिमाचल प्रदेश के परवाणू स्थित M/s Electrowaves Electronics Pvt. Ltd. को स्वदेशी रूप से डिज़ाइन, विकसित और निर्मित ईवी चार्जर्स के व्यावसायीकरण के लिए वित्तीय सहायता स्वीकृत की है। यह कदम स्वच्छ गतिशीलता और आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को सुदृढ़ करते हुए विदेशी आयात पर निर्भरता कम करेगा और देश में इलेक्ट्रिक परिवहन के प्रसार को गति देगा।

कंपनी द्वारा विकसित तकनीक में शामिल हैं:

  • 30–240 kW श्रेणी के DC फास्ट चार्जर्स

  • 15 kW और 30 kW पावर कनवर्टर मॉड्यूल (100–1000 VDC आउटपुट, 100A अधिकतम करंट)

  • PLC कम्युनिकेशन कंट्रोलर (DIN SPEC 70121 के अनुरूप, ISO 15118 के आंशिक अनुरूप)

  • OCPP कंट्रोलर (OCPP 1.6J एवं OCPP 2.0.1 के अनुरूप)

  • यूनिवर्सल DC चार्ज कंट्रोलर और पूर्ण HMI डिज़ाइन

  • घरेलू एवं सार्वजनिक उपयोग हेतु AC टाइप-2 चार्जर्स

TDB का यह सहयोग भारत में उच्च गुणवत्ता वाले स्वदेशी ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के उत्पादन को बढ़ावा देगा, जिससे स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और EV सेक्टर में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूती मिलेगी।

TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि कंपनी का यह प्रयास नवाचार-आधारित आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह परियोजना ऊर्जा सुरक्षा, सतत औद्योगिक विकास और स्वच्छ गतिशीलता की दिशा में देश के प्रयासों को गति प्रदान करेगी।

Electrowaves Electronics Pvt. Ltd. के प्रमोटर्स ने इस सहायता के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग उनकी निर्माण क्षमता को विस्तार देने और भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य में महत्वपूर्ण योगदान देने में मदद करेगा।

यह पहल मेकिन इंडिया को बढ़ावा देने, स्वदेशी तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करने और अगली पीढ़ी की परिवहन प्रणालियों में घरेलू क्षमताओं को सुदृढ़ करने की TDB की निरंतर प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करती है।

TDB ने स्वदेशी 16-वेलेन्ट न्यूमोकोकल वैक्सीन विकास को दी मंज़ूरी, उन्नत टीका निर्माण में बढ़ेगी भारत की आत्मनिर्भरता

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प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार ने नवी मुंबई स्थित टेकइन्वेंशन लाइफकेयर लिमिटेड को स्वदेशी रूप से विकसित 16-वलेंट न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCV-16) के वाणिज्यिक स्तर पर cGMP उत्पादन सुविधा स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। यह परियोजना देश में अगली पीढ़ी के कंजुगेट वैक्सीन के विकास और निर्माण क्षमता को मजबूत करेगी तथा आयातित उत्पादों पर दीर्घकालिक निर्भरता कम करेगी।

इस PCV-16 तकनीक में न्यूमोकोकल बैक्टीरिया के 16 रणनीतिक रूप से चुने गए सीरोटाइप शामिल हैं। इनमें वे प्रकार शामिल हैं जो भारत तथा अन्य निम्न और मध्यम-आय वाले देशों में गंभीर संक्रमण (IPD), एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस और अधिक मृत्यु दर के लिए ज़िम्मेदार हैं। जहाँ 13 सीरोटाइप मौजूदा वैश्विक वैक्सीन प्लेटफॉर्म से मेल खाते हैं, वहीं 12F, 15A और 22F जैसे तीन उभरते सीरोटाइप को जोड़कर इसके कवरेज को और व्यापक बनाया गया है, जिससे इस स्वदेशी वैक्सीन का सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व बढ़ता है।

परियोजना सेरोटाइप प्राथमिकता निर्धारण का वैज्ञानिक पुनर्मूल्यांकन दर्शाती है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील समूहों के लिए किफायती प्रतिरक्षण समाधान संभव हो सकेगा। इस तकनीक का प्रारंभिक शोध एवं विकास कार्य फरीदाबाद स्थित BSC BioNEST Bio-Incubator के BSL-2 सुविधा में किया गया, जिसके बाद इसे नवी मुंबई स्थित कंपनी के GMP-संगत हाई-कंटेनमेंट R&D केंद्र ‘HORIZON’ में आगे बढ़ाया गया। अनोखे सेरोटाइप डिजाइन और प्रक्रिया नवाचारों की सुरक्षा के लिए भारतीय पेटेंट भी दायर किया गया है।

TDB के समर्थन से अब यह परियोजना पूर्ण पैमाने पर cGMP निर्माण की ओर बढ़ेगी, जिससे उन्नत कंजुगेट वैक्सीन तकनीकों का देश में ही विकास, प्रमाणीकरण और व्यावसायीकरण संभव होगा। यह पहल भारत की वैक्सीन आत्मनिर्भरता बढ़ाने, घरेलू बायोमैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करने और भविष्य की बहुवैलेंट वैक्सीन प्लेटफॉर्म का मार्ग खोलने में मदद करेगी।

टेकइन्वेंशन लाइफकेयर लिमिटेड अब तक 15 से अधिक पेटेंट दर्ज कर चुकी है और कई स्वदेशी वैक्सीन उम्मीदवारों—जैसे भारत का पहला 6-इन-1 मेनिंगोकोकल कंजुगेट वैक्सीन—पर काम कर रही है। कंपनी को अगली पीढ़ी के वैक्सीन नवाचार में योगदान के लिए राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा सराहा भी गया है।

इस अवसर पर TDB के सचिव  राजेश कुमार पाठक ने कहा:

“PCV-16 परियोजना उन उच्च-प्रभाव वाली, अगली पीढ़ी की वैक्सीन तकनीकों का प्रतिनिधित्व करती है, जिन्हें TDB समर्थन देना चाहता है। स्वदेशी विकास और बड़े पैमाने के निर्माण को सक्षम बनाकर हम भारत की स्वास्थ्य तैयारी को मजबूत कर रहे हैं तथा घरेलू, विश्वसनीय समाधान उपलब्ध करा रहे हैं।”

टेकइन्वेंशन के प्रवर्तकों ने कहा:

“TDB का सहयोग हमारे PCV-16 को उन्नत R&D से बड़े पैमाने पर, किफायती उत्पादन की ओर तेजी से ले जाएगा। यह साझेदारी भारत और निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए विस्तृत कवरेज वाली वैक्सीन उपलब्ध कराने के हमारे प्रयास की आधारशिला है।”

शहरी जल वितरण में डिजिटल क्रांति: भारत-इज़राइल साझेदारी से विकसित होगा AI आधारित अनुकूली डिजिटल ट्विन फ्रेमवर्क

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प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार ने पुणे स्थित एम/एस कपिह डीप टेक प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है। यह समझौता “शहरी जल वितरण प्रणालियों के लिए अनुकूली डिजिटल ट्विन फ्रेमवर्क: भारतीय अवसंरचना हेतु एक संकल्पनात्मक कार्यान्वयन रणनीति” नामक परियोजना के लिए किया गया है।

इस पहल के तहत, TDB कुल परियोजना लागत ₹5.82 करोड़ में से ₹4.07 करोड़ की सशर्त अनुदान सहायता प्रदान करेगा। यह परियोजना भारत-इज़राइल औद्योगिक अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचार कोष (I4F) कॉल फॉर प्रपोज़ल के अंतर्गत, इज़राइली साझेदार एम/एस रियाली टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के सहयोग से समर्थित है।

इस परियोजना का फोकस एक AI-आधारित अनुकूली डिजिटल ट्विन फ्रेमवर्क विकसित करना है, जो शहरी जल वितरण प्रणालियों के प्रदर्शन को वास्तविक समय में सिमुलेट, मॉनिटर और प्रेडिक्ट कर सके। इस समाधान में RealiteQ क्लाउड-आधारित SCADA प्लेटफॉर्म को उन्नत एनालिटिक्स के साथ एकीकृत किया गया है, ताकि भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप एक स्केलेबल और किफायती उपकरण विकसित किया जा सके।

डिजिटल ट्विन समाधान के कार्यान्वयन में जोखिम निवारण रणनीतियों को शामिल करके, यह परियोजना भारत के जल क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों को हल करने का प्रयास करेगी, जैसे कि:

  • पुराना और दबावग्रस्त बुनियादी ढांचा

  • नॉन-रेवेन्यू वॉटर (NRW) की उच्च हानियाँ

  • खंडित और सीमित मॉनिटरिंग सिस्टम

  • शहरी आपूर्ति श्रृंखलाओं में संसाधनों की अक्षमताएँ

इसकी व्यापक उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए, परियोजना के तहत कई पायलट परिनियोजन किए जाएंगे। इसके माध्यम से यह प्रदर्शित किया जाएगा कि भारतीय शहर किस प्रकार धीरे-धीरे AI-सक्षम मॉनिटरिंग और नियंत्रण प्रणालियाँ अपना सकते हैं। यह चरणबद्ध दृष्टिकोण शुरुआती लागत को कम करने और पुरानी अवसंरचना के साथ एकीकरण को आसान बनाने की उम्मीद है।

समझौते पर बोलते हुए, टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा:

“भारत की शहरी जल प्रणालियाँ गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही हैं, जिनके लिए नवाचारपूर्ण और प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों की आवश्यकता है। अनुकूली डिजिटल ट्विन फ्रेमवर्क के विकास का समर्थन करके, TDB ऐसे स्केलेबल और व्यावहारिक उपकरण उपलब्ध करा रहा है, जो दक्षता बढ़ा सकते हैं, अपव्यय घटा सकते हैं और शहरी अवसंरचना को अधिक लचीला बना सकते हैं।”

स्वदेशी तकनीक से बनेगी भारत की पहली 240-वोल्ट इलेक्ट्रिक बाइक

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टीडीबी ने दी मंजूरी: भारत की पहली 240-वोल्ट इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल प्लेटफॉर्म का विकास

नई दिल्ली-विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने चेन्नई स्थित Raptee Energy Pvt. Ltd. को सहयोग प्रदान करते हुए भारत की पहली 240-वोल्ट इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल प्लेटफॉर्म के विकास और व्यावसायीकरण को मंजूरी दी है।

यह तकनीक इलेक्ट्रिक कारों में सफल हाई-वोल्टेज सिस्टम को दोपहिया वाहनों तक लाएगी। 240-वोल्ट डीसी आर्किटेक्चर से बनी यह मोटरसाइकिल तेज़ चार्जिंग, अधिक दक्षता और पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से बेहतर अनुकूलता प्रदान करेगी।

कंपनी ने एआरएआई-प्रमाणित बैटरी पैक भी विकसित किया है और स्मार्ट फीचर्स जैसे रिमोट डायग्नोस्टिक्स और ओवर-द-एयर अपडेट्स को जोड़ा है। परियोजना शून्य अपशिष्ट और शून्य उत्सर्जन निर्माण पद्धतियों पर आधारित है, जो आत्मनिर्भर भारत और सतत विकास लक्ष्यों (SDG 11 व 13) को आगे बढ़ाती है।

टीडीबी सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि यह तकनीक भारत में ईवी अपनाने की गति तेज करेगी। वहीं Raptee Energy के सीईओ दिनेश अर्जुन ने इसे देश के लिए भविष्य-तैयार और स्वदेशी ईवी समाधान की दिशा में बड़ा कदम बताया।


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