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सहकारी संस्थाओं को बड़ा बढ़ावा: NCDC को दिए गए बैंक ऋण होंगे प्राथमिकता क्षेत्र ऋण में शामिल

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नई दिल्ली- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भारत सरकार के परामर्श से घोषणा की है कि 19 जनवरी 2026 से बैंकों द्वारा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) को दिए गए ऋण, जो सहकारी संस्थाओं को आगे ऋण देने के लिए हैं, उन्हें प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending) के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।



यह प्रावधान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, शहरी सहकारी बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक और लोकल एरिया बैंक को छोड़कर अन्य बैंकों पर लागू होगा। ये ऋण RBI की प्राथमिकता क्षेत्र ऋण संबंधी मास्टर डायरेक्शन 2025 के तहत निर्धारित गतिविधियों के लिए होंगे।

NCDC की भूमिका

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), सहकारिता मंत्रालय के तहत एक वैधानिक संस्था है, जो सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करती है और सहकारी आंदोलन के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

सहकारी बैंकों को मजबूत करने के लिए सरकार और RBI के कदम

सरकार और RBI ने सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति, शासन व्यवस्था और डिजिटल समावेशन को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) को नई शाखाएं खोलने की अनुमति

  • UCBs के लिए हाउसिंग लोन सीमा 10% से बढ़ाकर 25%

  • सहकारी बैंकों के निदेशकों का कार्यकाल 8 से बढ़ाकर 10 वर्ष

  • आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) के लाइसेंस शुल्क में कमी

  • शहरी सहकारी बैंकों के लिए NUCFDC नामक अम्ब्रेला संस्था की स्थापना, जो IT और संचालन सहायता देगी

  • ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए “सहकार सारथी” साझा सेवा इकाई की स्थापना

  • ग्रामीण सहकारी बैंकों को एकीकृत लोकपाल योजना में शामिल किया गया

  • DICGC द्वारा सभी सहकारी बैंकों में प्रति जमाकर्ता ₹5 लाख तक जमा बीमा

राज्यसभा में दी गई जानकारी

यह जानकारी वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी।


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