Media24Media.com: भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति

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भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति

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संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) और भारत को यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि दोनों देशों ने पारस्परिक और परस्पर लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते (इंटरिम एग्रीमेंट) के लिए एक रूपरेखा पर सहमति प्राप्त कर ली है। यह रूपरेखा आज उस व्यापक भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) वार्ताओं के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करती है, जिनकी शुरुआत 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। इस बीटीए में अतिरिक्त बाज़ार पहुँच प्रतिबद्धताएँ शामिल होंगी तथा अधिक सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं को समर्थन मिलेगा।

संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच यह अंतरिम समझौता हमारी साझेदारी में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतिनिधित्व करेगा, जो पारस्परिक हितों और ठोस परिणामों पर आधारित संतुलित एवं प्रत्युत्तरात्मक व्यापार के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत–अमेरिका अंतरिम समझौते की प्रमुख शर्तें निम्नलिखित होंगी:

• भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों तथा अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क समाप्त करेगा या कम करेगा। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), पशु आहार हेतु रेड सॉरघम, वृक्ष मेवे, ताजे एवं प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन एवं स्पिरिट्स तथा अन्य उत्पाद शामिल हैं।

• संयुक्त राज्य अमेरिका, 2 अप्रैल 2025 के कार्यकारी आदेश 14257 (बड़े और लगातार वार्षिक अमेरिकी वस्तु व्यापार घाटे में योगदान देने वाली व्यापार प्रथाओं को सुधारने हेतु प्रत्युत्तरात्मक शुल्क के अंतर्गत आयात विनियमन), यथा संशोधित, के अंतर्गत भारत से उत्पन्न वस्तुओं पर 18 प्रतिशत की प्रत्युत्तरात्मक शुल्क दर लागू करेगा। इनमें वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा एवं जूते, प्लास्टिक एवं रबर, जैविक रसायन, होम डेकोर, हस्तशिल्प उत्पाद और कुछ मशीनरी शामिल हैं।

अंतरिम समझौते के सफल निष्कर्ष के अधीन, संयुक्त राज्य अमेरिका 5 सितंबर 2025 के कार्यकारी आदेश 14346 (समान सोच वाले भागीदारों के लिए प्रत्युत्तरात्मक शुल्क के दायरे में संशोधन) के अंतर्गत सूचीबद्ध कई वस्तुओं पर प्रत्युत्तरात्मक शुल्क हटाएगा। इनमें जेनेरिक दवाइयाँ, रत्न एवं हीरे तथा विमान पुर्जे शामिल हैं।

• संयुक्त राज्य अमेरिका भारत से आने वाले कुछ विमानों और विमान पुर्जों पर लगाए गए शुल्क भी हटाएगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित घोषणाओं के अंतर्गत लगाए गए थे—जिनमें एल्यूमिनियम (घोषणा 9704), स्टील (घोषणा 9705) और तांबा (घोषणा 10962) शामिल हैं।

इसी प्रकार, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप, भारत को ऑटोमोबाइल एवं ऑटोमोबाइल पुर्जों पर लागू शुल्क के अंतर्गत एक अधिमान्य शुल्क-कोटा प्रदान किया जाएगा।
फार्मास्यूटिकल्स और उनके अवयवों पर अमेरिकी सेक्शन 232 जांच के निष्कर्षों के अधीन, भारत को जेनेरिक दवाओं और उनके अवयवों के संबंध में वार्तित परिणाम प्राप्त होंगे।

• संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत, दोनों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक-दूसरे को स्थायी आधार पर अधिमान्य बाज़ार पहुँच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

• दोनों देश ऐसे उत्पत्ति नियम (रूल्स ऑफ ओरिजिन) स्थापित करेंगे, जिससे यह सुनिश्चित हो कि समझौते का लाभ मुख्य रूप से भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका को ही प्राप्त हो।

• भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-शुल्क बाधाओं को दोनों देश संबोधित करेंगे। भारत अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों के व्यापार से जुड़ी दीर्घकालिक बाधाओं को दूर करने, अमेरिकी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उत्पादों पर लागू प्रतिबंधात्मक आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को समाप्त करने तथा समझौते के लागू होने के छह माह के भीतर यह निर्धारित करने पर सहमत है कि अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानक (परीक्षण आवश्यकताओं सहित) भारतीय बाज़ार में स्वीकार्य हैं या नहीं।

इसके अतिरिक्त, भारत अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों से जुड़ी दीर्घकालिक गैर-शुल्क बाधाओं को भी संबोधित करने पर सहमत है।

• तकनीकी विनियमों के अनुपालन को सरल बनाने के उद्देश्य से, दोनों देश पारस्परिक रूप से सहमत क्षेत्रों में अपने मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर चर्चा करेंगे।

• यदि किसी भी देश द्वारा सहमत शुल्कों में परिवर्तन किया जाता है, तो दूसरा देश अपनी प्रतिबद्धताओं में समुचित संशोधन कर सकता है।

• दोनों देश बीटीए वार्ताओं के माध्यम से बाज़ार पहुँच के अवसरों को और विस्तार देने की दिशा में कार्य करेंगे। संयुक्त राज्य अमेरिका यह भी पुष्टि करता है कि बीटीए वार्ताओं के दौरान वह भारतीय वस्तुओं पर शुल्क कम करने के भारत के अनुरोध पर विचार करेगा।

• दोनों देश आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में समन्वय को सुदृढ़ करेंगे, ताकि आपूर्ति शृंखला की लचीलापन और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके। इसमें तीसरे पक्ष की गैर-बाज़ार नीतियों से निपटने हेतु समन्वित कदम, निवेश समीक्षा और निर्यात नियंत्रण में सहयोग शामिल होगा।

• भारत अगले पाँच वर्षों में अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों, विमानों एवं विमान पुर्जों, कीमती धातुओं, प्रौद्योगिकी उत्पादों और कोकिंग कोयले की लगभग 500 अरब अमेरिकी डॉलर की खरीद करने का इरादा रखता है। दोनों देश डेटा केंद्रों में उपयोग होने वाले जीपीयू सहित प्रौद्योगिकी उत्पादों के व्यापार को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएंगे और संयुक्त तकनीकी सहयोग का विस्तार करेंगे।

• संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत डिजिटल व्यापार से जुड़ी भेदभावपूर्ण या बोझिल प्रथाओं और अन्य बाधाओं को संबोधित करने तथा बीटीए के अंतर्गत मजबूत, महत्वाकांक्षी और परस्पर लाभकारी डिजिटल व्यापार नियमों के लिए एक स्पष्ट मार्ग निर्धारित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

• दोनों देश इस रूपरेखा को शीघ्र लागू करेंगे और संदर्भ शर्तों (Terms of Reference) में निर्धारित रोडमैप के अनुरूप एक परस्पर लाभकारी बीटीए के निष्कर्ष की दिशा में अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने हेतु कार्य करेंगे।


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