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भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में बड़ी प्रगति, जल्द हो सकता है समझौता

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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण वार्ताएं जारी हैं। हालिया बातचीत में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है, जिससे निकट भविष्य में समझौते के संपन्न होने की संभावना मजबूत हुई है।

इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और सुदृढ़ बनाना, बाजार तक पहुंच को आसान बनाना तथा विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में आने वाली बाधाओं को कम करना है। भारत और अमेरिका लंबे समय से शुल्क, कृषि उत्पादों, विनिर्माण वस्तुओं तथा डिजिटल व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अंतरिम व्यापार समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इससे द्विपक्षीय व्यापार को नई गति मिलेगी, निवेश के अवसर बढ़ेंगे और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ होगा। साथ ही भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अधिक अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

दोनों पक्षों ने बातचीत में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए शेष मुद्दों के समाधान के लिए वार्ता जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है। यह समझौता भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति

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संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) और भारत को यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि दोनों देशों ने पारस्परिक और परस्पर लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते (इंटरिम एग्रीमेंट) के लिए एक रूपरेखा पर सहमति प्राप्त कर ली है। यह रूपरेखा आज उस व्यापक भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) वार्ताओं के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करती है, जिनकी शुरुआत 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। इस बीटीए में अतिरिक्त बाज़ार पहुँच प्रतिबद्धताएँ शामिल होंगी तथा अधिक सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं को समर्थन मिलेगा।

संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच यह अंतरिम समझौता हमारी साझेदारी में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतिनिधित्व करेगा, जो पारस्परिक हितों और ठोस परिणामों पर आधारित संतुलित एवं प्रत्युत्तरात्मक व्यापार के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत–अमेरिका अंतरिम समझौते की प्रमुख शर्तें निम्नलिखित होंगी:

• भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों तथा अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क समाप्त करेगा या कम करेगा। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), पशु आहार हेतु रेड सॉरघम, वृक्ष मेवे, ताजे एवं प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन एवं स्पिरिट्स तथा अन्य उत्पाद शामिल हैं।

• संयुक्त राज्य अमेरिका, 2 अप्रैल 2025 के कार्यकारी आदेश 14257 (बड़े और लगातार वार्षिक अमेरिकी वस्तु व्यापार घाटे में योगदान देने वाली व्यापार प्रथाओं को सुधारने हेतु प्रत्युत्तरात्मक शुल्क के अंतर्गत आयात विनियमन), यथा संशोधित, के अंतर्गत भारत से उत्पन्न वस्तुओं पर 18 प्रतिशत की प्रत्युत्तरात्मक शुल्क दर लागू करेगा। इनमें वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा एवं जूते, प्लास्टिक एवं रबर, जैविक रसायन, होम डेकोर, हस्तशिल्प उत्पाद और कुछ मशीनरी शामिल हैं।

अंतरिम समझौते के सफल निष्कर्ष के अधीन, संयुक्त राज्य अमेरिका 5 सितंबर 2025 के कार्यकारी आदेश 14346 (समान सोच वाले भागीदारों के लिए प्रत्युत्तरात्मक शुल्क के दायरे में संशोधन) के अंतर्गत सूचीबद्ध कई वस्तुओं पर प्रत्युत्तरात्मक शुल्क हटाएगा। इनमें जेनेरिक दवाइयाँ, रत्न एवं हीरे तथा विमान पुर्जे शामिल हैं।

• संयुक्त राज्य अमेरिका भारत से आने वाले कुछ विमानों और विमान पुर्जों पर लगाए गए शुल्क भी हटाएगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित घोषणाओं के अंतर्गत लगाए गए थे—जिनमें एल्यूमिनियम (घोषणा 9704), स्टील (घोषणा 9705) और तांबा (घोषणा 10962) शामिल हैं।

इसी प्रकार, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप, भारत को ऑटोमोबाइल एवं ऑटोमोबाइल पुर्जों पर लागू शुल्क के अंतर्गत एक अधिमान्य शुल्क-कोटा प्रदान किया जाएगा।
फार्मास्यूटिकल्स और उनके अवयवों पर अमेरिकी सेक्शन 232 जांच के निष्कर्षों के अधीन, भारत को जेनेरिक दवाओं और उनके अवयवों के संबंध में वार्तित परिणाम प्राप्त होंगे।

• संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत, दोनों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक-दूसरे को स्थायी आधार पर अधिमान्य बाज़ार पहुँच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

• दोनों देश ऐसे उत्पत्ति नियम (रूल्स ऑफ ओरिजिन) स्थापित करेंगे, जिससे यह सुनिश्चित हो कि समझौते का लाभ मुख्य रूप से भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका को ही प्राप्त हो।

• भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-शुल्क बाधाओं को दोनों देश संबोधित करेंगे। भारत अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों के व्यापार से जुड़ी दीर्घकालिक बाधाओं को दूर करने, अमेरिकी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उत्पादों पर लागू प्रतिबंधात्मक आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को समाप्त करने तथा समझौते के लागू होने के छह माह के भीतर यह निर्धारित करने पर सहमत है कि अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानक (परीक्षण आवश्यकताओं सहित) भारतीय बाज़ार में स्वीकार्य हैं या नहीं।

इसके अतिरिक्त, भारत अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों से जुड़ी दीर्घकालिक गैर-शुल्क बाधाओं को भी संबोधित करने पर सहमत है।

• तकनीकी विनियमों के अनुपालन को सरल बनाने के उद्देश्य से, दोनों देश पारस्परिक रूप से सहमत क्षेत्रों में अपने मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर चर्चा करेंगे।

• यदि किसी भी देश द्वारा सहमत शुल्कों में परिवर्तन किया जाता है, तो दूसरा देश अपनी प्रतिबद्धताओं में समुचित संशोधन कर सकता है।

• दोनों देश बीटीए वार्ताओं के माध्यम से बाज़ार पहुँच के अवसरों को और विस्तार देने की दिशा में कार्य करेंगे। संयुक्त राज्य अमेरिका यह भी पुष्टि करता है कि बीटीए वार्ताओं के दौरान वह भारतीय वस्तुओं पर शुल्क कम करने के भारत के अनुरोध पर विचार करेगा।

• दोनों देश आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में समन्वय को सुदृढ़ करेंगे, ताकि आपूर्ति शृंखला की लचीलापन और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके। इसमें तीसरे पक्ष की गैर-बाज़ार नीतियों से निपटने हेतु समन्वित कदम, निवेश समीक्षा और निर्यात नियंत्रण में सहयोग शामिल होगा।

• भारत अगले पाँच वर्षों में अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों, विमानों एवं विमान पुर्जों, कीमती धातुओं, प्रौद्योगिकी उत्पादों और कोकिंग कोयले की लगभग 500 अरब अमेरिकी डॉलर की खरीद करने का इरादा रखता है। दोनों देश डेटा केंद्रों में उपयोग होने वाले जीपीयू सहित प्रौद्योगिकी उत्पादों के व्यापार को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएंगे और संयुक्त तकनीकी सहयोग का विस्तार करेंगे।

• संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत डिजिटल व्यापार से जुड़ी भेदभावपूर्ण या बोझिल प्रथाओं और अन्य बाधाओं को संबोधित करने तथा बीटीए के अंतर्गत मजबूत, महत्वाकांक्षी और परस्पर लाभकारी डिजिटल व्यापार नियमों के लिए एक स्पष्ट मार्ग निर्धारित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

• दोनों देश इस रूपरेखा को शीघ्र लागू करेंगे और संदर्भ शर्तों (Terms of Reference) में निर्धारित रोडमैप के अनुरूप एक परस्पर लाभकारी बीटीए के निष्कर्ष की दिशा में अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने हेतु कार्य करेंगे।


भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता: वित्तीय सेवाओं पर ऐतिहासिक समझौते की वार्ता संपन्न

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भारत और न्यूज़ीलैंड ने 22 दिसंबर 2025 को भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के अंतर्गत वित्तीय सेवाओं पर परिशिष्ट (Financial Services Annex) से संबंधित वार्ताओं को सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। यह उपलब्धि द्विपक्षीय आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को 10 दिसंबर 2025 को आयोजित अंतिम दौर की वार्ताओं के दौरान अंतिम रूप दिया गया।


भारत और न्यूज़ीलैंड वित्तीय सेवा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए दृढ़ प्रतिबद्धता साझा करते हैं। इस संबंध के महत्व को स्वीकार करते हुए, दोनों देशों ने एक दूरदर्शी, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौता विकसित करने के लिए सहयोग किया है, जो उनके-अपने वित्तीय सेवा क्षेत्रों के लिए नए अवसर खोलेगा। यह एफटीए द्विपक्षीय सहयोग को गति देने, बाजार पहुंच को सुगम बनाने और दोनों अर्थव्यवस्थाओं की वित्तीय प्रणालियों के गहन एकीकरण के लिए आवश्यक संस्थागत और नियामक ढांचा प्रदान करेगा।

भारत–न्यूज़ीलैंड वित्तीय सेवाएं परिशिष्ट, सामान्य GATS प्रतिबद्धताओं से आगे बढ़ते हुए, कुल 18 अनुच्छेदों तक विस्तारित है। इसके प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:

इलेक्ट्रॉनिक भुगतान और रियल-टाइम लेन-देन अवसंरचना:

भारत और न्यूज़ीलैंड ने घरेलू भुगतान अंतर्संचालनीयता विकसित करने तथा एकीकृत फास्ट पेमेंट सिस्टम (FPS) के माध्यम से रियल-टाइम सीमा-पार रेमिटेंस और व्यापारी भुगतान को समर्थन देने पर सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह प्रावधान भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम और फिनटेक क्षेत्र को सशक्त करेगा, भारतीय प्रवासी समुदाय से रेमिटेंस प्रवाह को बढ़ाएगा, भारतीय भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए बाजार के अवसर पैदा करेगा और UPI व NPCI जैसी भारत की डिजिटल भुगतान प्रणालियों की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाएगा।

वित्तीय प्रौद्योगिकी और नियामक नवाचार:

दोनों देशों ने वित्तीय सेवाओं में नवाचार के लिए सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की है। समझौते में एक-दूसरे के रेगुलेटरी सैंडबॉक्स और डिजिटल सैंडबॉक्स फ्रेमवर्क से सीखने के प्रावधान शामिल हैं, जिनका सीमा-पार अनुप्रयोग संभव होगा। इससे भारत को द्विपक्षीय साझेदारी में एक फिनटेक हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी तथा भारतीय फिनटेक कंपनियों के लिए सहयोग के नए अवसर सृजित होंगे।

वित्तीय सूचना का हस्तांतरण और संरक्षण:

भारत और न्यूज़ीलैंड ने वित्तीय सूचना के हस्तांतरण, प्रसंस्करण और भंडारण से संबंधित प्रत्येक पक्ष के विधायी और नियामक अधिकारों को मान्यता दी है। साथ ही, डेटा संप्रभुता और उपभोक्ता गोपनीयता की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सीमा-पार डिजिटल संचालन को सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

क्रेडिट रेटिंग और गैर-भेदभाव:

इस प्रावधान के तहत भारतीय वित्तीय संस्थानों को न्यूज़ीलैंड के बाजार में मनमाने या भेदभावपूर्ण क्रेडिट आकलन से सुरक्षा मिलेगी। इससे भारतीय बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय सेवा प्रदाताओं के लिए बाजार पहुंच सुगम होगी और उनके संचालन पर किसी प्रकार के भेदभावपूर्ण नियामक प्रतिबंध से बचाव होगा।

बैक-ऑफिस और सहायक सेवाएं:

वित्तीय सेवाओं परिशिष्ट के अंतर्गत दोनों देशों ने बैक-ऑफिस और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी सहायक गतिविधियों को समर्थन देने पर सहमति जताई है। यह भारत की विश्वस्तरीय आईटी और बिजनेस प्रोसेस सर्विस क्षमताओं का लाभ उठाएगा तथा लागत-कुशल वित्तीय सेवा वितरण को सक्षम बनाएगा, साथ ही भारत के वित्तीय सेवाओं, आईटी और बीपीओ क्षेत्रों की वृद्धि को समर्थन देगा।

एफडीआई सीमा और बैंक शाखाएं:

विशिष्ट प्रतिबद्धताओं की अनुसूचियां बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों में बाजार पहुंच और राष्ट्रीय उपचार पर प्रगतिशील सहयोग को दर्शाती हैं। भारत ने बैंकिंग और बीमा में एफडीआई सीमा बढ़ाने तथा चार वर्षों की अवधि में 15 बैंक शाखाएं स्थापित करने की अनुमति देने वाला उदार बैंक शाखा लाइसेंसिंग ढांचा प्रस्तावित किया है, जो GATS के तहत पहले प्रस्तावित 12 शाखाओं की सीमा से अधिक है। इससे भारतीय वित्तीय सेवा प्रदाताओं को न्यूज़ीलैंड में अपने संचालन का विस्तार करने में मदद मिलेगी और वित्तीय सेवाओं के निर्यात में भारत की स्थिति मजबूत होगी।

कुल मिलाकर, भारत–न्यूज़ीलैंड वित्तीय सेवाएं परिशिष्ट पर वार्ताओं का सफल समापन दोनों सरकारों की आर्थिक संबंधों को गहरा करने और तेजी से विकसित हो रहे वित्तीय सेवा परिदृश्य में पारस्परिक अवसरों का लाभ उठाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह समझौता दूरदर्शी, संतुलित और बेहतर बाजार पहुंच, नियामक स्पष्टता तथा सहयोगी ढांचे प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, जिससे दोनों देशों के वित्तीय संस्थानों और सेवा प्रदाताओं को लाभ होगा।

वर्तमान में, भारतीय बैंक—बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ इंडिया—न्यूज़ीलैंड में चार शाखाओं के साथ सहायक संचालन कर रहे हैं, जबकि न्यूज़ीलैंड की कोई भी बैंकिंग या बीमा इकाई भारत में मौजूद नहीं है और न ही कोई भारतीय बीमा कंपनी न्यूज़ीलैंड में स्थापित है। यह एफटीए स्पष्ट बाजार पहुंच प्रतिबद्धताओं, नियामक पारदर्शिता और द्विपक्षीय सहयोग ढांचे के माध्यम से द्विपक्षीय निवेश, संस्थागत उपस्थिति और सेवाओं के विस्तार को प्रोत्साहित करेगा तथा दोनों देशों के वित्तीय सेवा बाजारों के बीच संबंधों को नई गति देगा।

भारत-ओमान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) : द्विपक्षीय व्यापार और सेवा क्षेत्र में नई संभावनाएँ

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भारत और ओमान ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मजबूत आर्थिक साझेदारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसके तहत दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement – CEPA) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ओमान के वाणिज्य, उद्योग और निवेश संवर्धन मंत्री क़ैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ ने हस्ताक्षर किए।


यह CEPA समझौता भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच आर्थिक समेकन को गहरा करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ओमान इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और भारतीय वस्त्र एवं सेवाओं के लिए मध्य पूर्व और अफ्रीका की ओर एक प्रमुख मार्गदर्शक है। ओमान में लगभग 7 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं, जिनमें 200–300 वर्षों से उपस्थित भारतीय व्यापारी परिवार भी शामिल हैं, जो ओमान की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। भारतीय उद्यमों की ओमान में मजबूत उपस्थिति है, जहाँ 6,000 से अधिक भारतीय संस्थान विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। वार्षिक प्रेषण लगभग 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर पर है, जो आर्थिक जुड़ाव की गहराई को दर्शाता है। भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है, और CEPA ढांचे के तहत इसके विस्तार की मजबूत संभावनाएँ हैं।

यह समझौता हाल के छह महीनों में ब्रिटेन के बाद दूसरा मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) है और इसका उद्देश्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार समझौते करना है, जो भारत के श्रम-गहन क्षेत्रों से प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं और भारतीय व्यवसायों के लिए अवसर प्रदान करती हैं।

मुख्य लाभ और प्रावधान:

  • CEPA के तहत ओमान ने भारत को अभूतपूर्व शुल्क छूट दी है। ओमान ने अपने 98.08% टैरिफ लाइनों पर शून्य-शुल्क प्रवेश की पेशकश की है, जो भारत के ओमान निर्यात का 99.38% कवर करती है। प्रमुख श्रम-गहन क्षेत्र जैसे आभूषण, वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, खेल सामग्री, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण और ऑटोमोबाइल पर पूर्ण टैरिफ समाप्ति लागू होगी। इसमें से 97.96% टैरिफ लाइनों पर तत्काल शुल्‍क उन्मूलन लागू होगा।

  • भारत ने अपने कुल 12,556 टैरिफ लाइनों में से 77.79% पर टैरिफ उदारीकरण की पेशकश की है, जो ओमान से भारत के आयात का 94.81% मूल्य कवर करता है। संवेदनशील उत्पादों को भारत ने बिना कोई छूट दिए बहिष्करण श्रेणी में रखा है, जिसमें कृषि उत्पाद (डेयरी, चाय, कॉफ़ी, रबर, तंबाकू), सोना और चांदी की धातुएँ, आभूषण, अन्य श्रम-गहन उत्पाद जैसे फुटवियर और खेल सामग्री, और कई बेस मेटल्स का स्क्रैप शामिल है।

  • सेवा क्षेत्र, जो भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख चालक है, को भी व्यापक लाभ मिलेगा। ओमान के वैश्विक सेवा आयात लगभग 12.52 बिलियन अमेरिकी डॉलर हैं, जिसमें भारत के हिस्से का 5.31% है, जो भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए महत्वपूर्ण अप्रयुक्त अवसर दिखाता है। समझौते में व्यापक सेवाओं का पैकेज शामिल है, जिसमें ओमान ने कंप्यूटर सेवाएँ, व्यावसायिक एवं पेशेवर सेवाएँ, ऑडियो-विज़ुअल सेवाएँ, अनुसंधान और विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रतिबद्धताएँ दी हैं।

  • CEPA के तहत भारतीय पेशेवरों के लिए बेहतर गतिशीलता का प्रावधान किया गया है। पहली बार, ओमान ने मोड 4 के तहत व्यापक प्रतिबद्धताएँ दी हैं, जिसमें इन्ट्रा-कार्पोरेट ट्रांसफरीज़ की कोटा 20% से बढ़ाकर 50% कर दी गई है और कॉन्ट्रैक्चुअल सर्विस सप्लायर्स के लिए रहने की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 2 वर्ष कर दी गई है, जिसे आगे और 2 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इसमें लेखा, कराधान, वास्तुकला, चिकित्सा और संबद्ध सेवाओं में कुशल पेशेवरों के लिए प्रवेश और रहने की अधिक उदार शर्तें भी शामिल हैं।

  • CEPA भारतीय कंपनियों को ओमान में प्रमुख सेवा क्षेत्रों में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति देता है, जिससे भारत की सेवा उद्योग के लिए क्षेत्र में विस्तार के नए अवसर खुलते हैं।

  • एक महत्वपूर्ण पहलू है पारंपरिक चिकित्सा (Traditional Medicine) में ओमान की प्रतिबद्धता, जो सभी आपूर्ति मोड्स में लागू होगी, और यह किसी भी अन्य देश द्वारा पहले नहीं दी गई इतनी व्यापक प्रतिबद्धता है। इससे भारत के आयुष और वेलनेस क्षेत्रों को खाड़ी क्षेत्र में अपने कौशल को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।

  • समझौते में गैर-शुल्क बाधाओं (Non-Tariff Barriers) को भी संबोधित किया गया है, जिससे वास्तविक बाजार पहुँच में सुधार होगा।

यह समझौता 2006 के बाद ओमान द्वारा किसी देश के साथ किया गया पहला द्विपक्षीय समझौता है (अमेरिका के बाद)।

पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा:

"भारत-ओमान CEPA भारत और ओमान के ऐतिहासिक मजबूत संबंधों को और सशक्त करता है और एक संतुलित आर्थिक ढांचा प्रस्तुत करता है, जो भारतीय निर्यातकों और पेशेवरों के लिए अवसरों को बढ़ाता है। यह भारतीय वस्तुओं के लिए ओमान के बाजार में लगभग सार्वभौमिक शून्य-शुल्क पहुँच प्रदान करता है, उच्च विकास वाले प्रमुख क्षेत्रों में सेवाओं के विस्तार को सुनिश्चित करता है और भारतीय पेशेवरों के गतिशीलता को बेहतर बनाता है।"

CEPA से द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि, रोजगार सृजन, निर्यात विस्तार, आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ करना और भारत व ओमान के बीच दीर्घकालिक आर्थिक जुड़ाव के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

भारत-जॉर्डन व्यापार फोरम: प्रधानमंत्री मोदी और राजा अब्दुल्ला द्वितीय ने द्विपक्षीय व्यापार और सहयोग बढ़ाने पर बल दिया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जॉर्डन के महामहिम राजा अब्दुल्ला द्वितीय ने आज अम्मान में आयोजित इंडिया-जॉर्डन बिजनेस फोरम को संबोधित किया। फोरम में जॉर्डन के क्राउन प्रिंस हुसैन तथा जॉर्डन के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री और निवेश मंत्री भी उपस्थित थे। महामहिम और प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच व्यापार-से-व्यापार संबंधों को बढ़ाने के महत्व को स्वीकार किया और उद्योग जगत के प्रमुखों से इस संभावनाओं और अवसरों को विकास और समृद्धि में बदलने का आह्वान किया। महामहिम ने उल्लेख किया कि जॉर्डन के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स और भारत की आर्थिक शक्ति को मिलाकर दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया तथा उससे आगे तक एक आर्थिक कॉरिडोर तैयार किया जा सकता है।

फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जॉर्डन और भारत एक जीवंत समकालीन साझेदारी साझा करते हैं, जो उनके गहरे सभ्यतागत संबंधों पर आधारित है। उन्होंने महामहिम की नेतृत्व क्षमता की सराहना की, जिनके नेतृत्व में जॉर्डन एक ऐसा सेतु बन गया है जो बाजारों और क्षेत्रों को जोड़ता है तथा व्यापार और विकास को बढ़ावा देता है। प्रधानमंत्री ने अगले पांच वर्षों में भारत-जॉर्डन द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक दोगुना करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने भारत की तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होने और विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के मार्ग पर होने का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत जॉर्डन और विश्व भर के साझेदारों के लिए अपार व्यावसायिक अवसर प्रदान करता है। उन्होंने जॉर्डन की कंपनियों को भारत के 1.4 अरब उपभोक्ता बाजार, मजबूत विनिर्माण आधार और स्थिर, पारदर्शी व पूर्वानुमेय नीति परिवेश का लाभ उठाने के लिए भारत के साथ साझेदारी करने का आमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश मिलकर विश्व के लिए भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला साझेदार बन सकते हैं। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की 8% से अधिक वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि यह उत्पादकता-उन्मुख शासन और नवाचार-उन्मुख नीतियों का परिणाम है।

प्रधानमंत्री ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी, फिनटेक, हेल्थ-टेक और एग्री-टेक क्षेत्रों में भारत-जॉर्डन व्यापार सहयोग के अवसरों को भी उजागर किया और इन क्षेत्रों में दोनों देशों के स्टार्ट-अप्स को सहयोग करने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर में भारत की ताकत और जॉर्डन का भौगोलिक लाभ एक-दूसरे को पूरक कर सकते हैं और जॉर्डन को पश्चिम एशिया और अफ्रीका के लिए एक विश्वसनीय हब बना सकते हैं। उन्होंने कृषि, कोल्ड चेन, फूड पार्क, उर्वरक, इन्फ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, हरित गतिशीलता और विरासत एवं सांस्कृतिक पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी व्यापारिक अवसरों को उजागर किया। भारत की हरित पहलों के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन फाइनेंसिंग, डिज़लिनेशन और जल पुनर्चक्रण के क्षेत्रों में भारत-जॉर्डन व्यापार सहयोग बढ़ाने का सुझाव दिया।

फोरम में दोनों देशों के व्यापार नेताओं ने इन्फ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ, फार्मा, उर्वरक, कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, रक्षा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल में FICCI और जॉर्डन चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि भी शामिल थे, जिनके बीच पहले से ही दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए MoU है।

भारत–यूएई सीईपीए संयुक्त समिति की तीसरी बैठक में व्यापार वृद्धि और सहयोग पर जोर

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भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भारत–यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के तहत संयुक्त समिति की तीसरी बैठक नई दिल्ली में सफलतापूर्वक आयोजित की। बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव अजय भाडू और यूएई के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मामलों के सहायक अवर सचिव ह.E. जुमा अल कैत ने की। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार में तेज वृद्धि का स्वागत किया, जो वित्त वर्ष 2024–25 में 100.06 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गया, जो 19.6% की मजबूत बढ़ोतरी को दर्शाता है और भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदार के रूप में यूएई की स्थिति की पुन: पुष्टि करता है। भारत-यूएई संयुक्त आयोग सीईपीए के कार्यान्वयन, प्रगति की समीक्षा और चुनौतियों के समाधान के लिए प्रमुख संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करता है।

दोनों पक्षों ने सीईपीए के तहत हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की और बाजार पहुंच संबंधी मुद्दों, डेटा साझाकरण, गोल्ड TRQ आवंटन, एंटी-डंपिंग मामलों, सेवाओं, मूल नियम (Rules of Origin), बीआईएस लाइसेंसिंग आदि पर विस्तृत चर्चा की। भारतीय पक्ष ने यूएई को गोल्ड TRQ को पारदर्शी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से आवंटित करने के अपने हालिया निर्णय की भी जानकारी दी।

दोनों पक्षों ने हाल के उच्च-स्तरीय संपर्कों की समीक्षा की, जिनमें मुंबई और दुबई में माननीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ह.E. डॉ. थानी के बीच हुई बैठकें शामिल थीं। उन्होंने 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के लक्ष्य की दिशा में गैर-तेल/ गैर-कीमती धातु व्यापार के विस्तार के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। चर्चाओं में औषधि क्षेत्र में नियामक सहयोग, मूल प्रमाणपत्र (Certificates of Origin) से संबंधित मुद्दों के समाधान, बीआईएस समन्वय तथा भारत के APEDA और यूएई के MoCCAE के बीच खाद्य सुरक्षा और तकनीकी आवश्यकताओं पर एमओयू के शीघ्र हस्ताक्षर को भी शामिल किया गया।

बैठक का समापन दोनों पक्षों द्वारा व्यापार सुगमता, नियामक सहयोग, डेटा साझाकरण को मजबूत करने और सेवाओं की उपसमिति की बैठक बुलाने पर सहमति के साथ हुआ। यूएई प्रतिनिधिमंडल ने वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल से भी मुलाकात की, जहां सीईपीए के सर्वोत्तम उपयोग से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई। यूएई प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा व्यापार संतुलन को गहरा करने, बाजार अवसरों के विस्तार और सीईपीए के तहत सामरिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।


भारत–न्यूज़ीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट: द्विपक्षीय बैठक में व्यापार और निवेश बढ़ाने पर जोर

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज मुंबई में न्यूज़ीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैकले के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें प्रस्तावित भारत–न्यूज़ीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर चर्चा की गई। यह बैठक चल रही वार्ताओं में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसमें दोनों मंत्रियों ने वस्तु और सेवा व्यापार से संबंधित प्रमुख विषयों में सहमति बनाने पर ध्यान केंद्रित किया।

दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि हाल की बैठक में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, कई तत्वों पर अंतिम निर्णय हो गया और जल्द से जल्द और परस्पर संतोषजनक समझौते के मार्ग पर स्पष्ट साझा समझ विकसित हुई है।

मंत्रियों ने यह भी नोट किया कि भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार वित्तीय वर्ष 2024–25 में 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जो लगभग 49 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक व्यापक और संतुलित FTA न केवल व्यापार प्रवाह को तेज करेगा, बल्कि निवेश संबंधों को गहरा करेगा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ाएगा और दोनों देशों के व्यवसायों के लिए एक पारदर्शी, स्थिर और पूर्वानुमेय ढांचा प्रदान करेगा।

दोनों मंत्रियों ने महत्वाकांक्षी और भविष्य-केंद्रित साझेदारी के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुन: पुष्टि की और व्यक्त किया कि यह FTA विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अवसर खोल सकता है, जिसमें सेवाएँ, नवाचार और तकनीकी सहयोग शामिल हैं। उन्होंने सहमति व्यक्त की कि सकारात्मक गति बनाए रखी जाए और जल्द से जल्द संतुलित और परस्पर लाभकारी समझौते की सुविधा के लिए आगामी सप्ताहों में प्रयास तेज किए जाएँ।


भारत–EAEU मुक्त व्यापार समझौता: वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने मास्को में प्रगति की समीक्षा की

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वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने मास्को में एक श्रृंखला की बैठकों में भारत–यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ता की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने यूरेशियन इकोनॉमिक कमिशन के व्यापार मंत्री आंद्रेई स्लीपनेव, रूसी संघ के उद्योग और व्यापार उपमंत्री मिखाइल यूरीन से मुलाकात की और भारतीय और रूसी उद्योग के सदस्यों के साथ एक व्यवसाय नेटवर्किंग प्लेनरी में भी संबोधित किया।

बैठकें और चर्चा

इन वार्ताओं का आधार भारत–रूस ट्रेड और आर्थिक सहयोग कार्य समूह की निष्कर्षों पर था। चर्चा का मुख्य फोकस बाजार विविधीकरण, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण, नियामक पूर्वानुमान सुनिश्चित करना और साझेदारी में संतुलित वृद्धि को बढ़ावा देना था। ये प्रयास दोनों देशों के नेताओं द्वारा 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन USD तक पहुँचाने और औद्योगिक एवं तकनीकी सहयोग के माध्यम से भारतीय निर्यात का विस्तार करने के लक्ष्य के अनुरूप हैं।

मंत्री आंद्रेई स्लीपनेव के साथ बैठक

वाणिज्य सचिव ने भारत–EAEU FTA (सामान) के अगले चरणों की समीक्षा की। 20 अगस्त 2025 को हस्ताक्षरित टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) में 18 महीने की कार्य योजना का उल्लेख है, जिसका उद्देश्य भारतीय व्यवसायों, एमएसएमई, किसानों और मछुआरों के लिए बाजार विविधीकरण करना है। नेताओं के मार्गदर्शन के अनुसार, सेवाओं और निवेश के क्षेत्रों पर भी आगे की प्रक्रिया में विचार किया जाएगा।

उपमंत्री मिखाइल यूरीन के साथ चर्चा

वाणिज्य सचिव ने व्यापार विविधीकरण, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने फार्मास्यूटिकल्स, टेलीकॉम उपकरण, मशीनरी, चमड़ा, ऑटोमोबाइल और रसायन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में समयबद्ध मार्गदर्शिका पर विचार किया।

  • प्रमाणन आवश्यकताओं, कृषि और मछली व्यवसायों की सूची, प्रतियोगिता विरोधी प्रथाओं की रोकथाम और अन्य गैर-शुल्क मुद्दों को हल करने के लिए त्रैमासिक नियामक-से-नियामक बैठकें आयोजित करने पर सहमति बनी।

  • लॉजिस्टिक्स, भुगतान और मानकों से संबंधित व्यावहारिक उपायों पर भी चर्चा हुई, जिससे दोनों देशों के फर्मों के लिए व्यवसाय करना आसान और पूर्वानुमान योग्य हो।

उद्योग प्लेनरी

भारतीय और रूसी वरिष्ठ उद्योग नेताओं की उपस्थिति में वाणिज्य सचिव ने कंपनियों से 2030 द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य के अनुरूप अपने प्रोजेक्ट्स को संरेखित करने का आग्रह किया। उन्होंने भारत में लॉजिस्टिक्स सुधार, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और वस्तुओं और सेवाओं में सह-निवेश और सह-उत्पादन के अवसरों पर जोर दिया।

चर्चाओं में निर्यात बैलेंस बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखलाओं के जोखिम को कम करने और योजनाबद्ध प्रोजेक्ट्स को क्रियाशील अनुबंधों में बदलने पर बल दिया गया, जिससे दोनों देशों के लोगों के लिए रोजगार और दीर्घकालिक समृद्धि पैदा हो।

भारत, एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में, रूस के साथ अपने व्यापार और आर्थिक सहयोग को गहरा करने का लक्ष्य रखता है और 2047 तक विकसित राष्ट्र, ‘विकसित भारत’ बनने की दिशा में काम कर रहा है।

भारत–कनाडा 7वें मंत्रीस्तरीय व्यापार और निवेश संवाद का सारांश (MDTI 2025)

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भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के आमंत्रण पर, कनाडा के निर्यात प्रोत्साहन, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक विकास मंत्री, माननीय मनींदर सिद्धू ने 11 से 14 नवंबर 2025 तक भारत की आधिकारिक यात्रा की।

कनाडा के कananaskis में हुए G7 सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की द्विपक्षीय बैठक में प्रदान किए गए निर्देशों, तथा 13 अक्टूबर 2025 को जारी विदेश मंत्रियों के संयुक्त बयान “एक मजबूत साझेदारी की ओर नवीनीकृत गति”—जिसमें व्यापार को द्विपक्षीय आर्थिक वृद्धि और लचीलापन का आधार स्तंभ बताया गया था—के अनुरूप, दोनों व्यापार मंत्रियों ने व्यापार और निवेश पर मंत्रीस्तरीय संवाद (MDTI) के 7वें संस्करण का आयोजन किया।

मंत्रियों ने भारत–कनाडा आर्थिक साझेदारी की मजबूती और निरंतरता की पुनः पुष्टि की और सतत संवाद, पारस्परिक सम्मान, और भावी पहलों के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

मंत्रियों ने वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार में मजबूत वृद्धि का उल्लेख किया, जो 2024 में 23.66 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें माल व्यापार का मूल्य लगभग 8.98 अरब अमेरिकी डॉलर था—जो पिछले वर्ष की तुलना में 10% की महत्वपूर्ण वृद्धि है। मंत्रियों ने भारत–कनाडा आर्थिक साझेदारी की ताकत और लचीलापन दोहराया और व्यापार और निवेश के नए अवसरों को खोलने के लिए निजी क्षेत्र के साथ निरंतर सहभागिता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने द्विपक्षीय निवेश प्रवाह में steady विस्तार का स्वागत किया, जिसमें भारत में कनाडा के संस्थागत निवेश और कनाडा में भारतीय कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति शामिल है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं में हजारों नौकरियों का समर्थन करती हैं। मंत्रियों ने एक खुला, पारदर्शी और पूर्वानुमेय निवेश माहौल बनाए रखने और प्राथमिकता एवं उभरते क्षेत्रों में गहरी साझेदारी के नए रास्तों की तलाश करने की प्रतिबद्धता जताई।

मंत्रियों ने टिकाऊ विकास और नवाचार को बढ़ावा देने वाले रणनीतिक क्षेत्रों में भारत और कनाडा के बीच मजबूत पूरकताओं का भी उल्लेख किया, जो व्यापार के लिए नए अवसर प्रदान करती हैं। यह स्वीकार करते हुए कि इन क्षेत्रों में दोनों पक्षों के संबंधित हितधारकों के बीच अलग-अलग डोमेन-स्तरीय सहभागिता की आवश्यकता होगी, मंत्रियों ने:

• ऊर्जा संक्रमण और नई औद्योगिक वृद्धि के लिए आवश्यक क्रिटिकल मिनरल्स और स्वच्छ ऊर्जा सहयोग में दीर्घकालिक आपूर्ति शृंखला साझेदारी को प्रोत्साहित करने पर सहमति व्यक्त की।

• भारत में कनाडा की स्थापित उपस्थिति और भारत के विमानन क्षेत्र की वृद्धि का उपयोग करते हुए एयरोस्पेस और द्वि-उपयोग क्षमताओं में निवेश और व्यापारिक अवसरों की पहचान और विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की।

सप्लाई चेन लचीलापन के महत्व को स्वीकार करते हुए, मंत्रियों ने वैश्विक घटनाक्रम पर विचार-विमर्श किया और हालिया व्यवधानों से मिले सबक पर चर्चा की। उन्होंने कृषि सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लचीलापन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए विविध और विश्वसनीय सप्लाई चेन की अनिवार्यता पर बल दिया।

मंत्रियों ने द्विपक्षीय आर्थिक सहभागिता को मजबूत करने में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और वैश्विक विकास तथा बदलती सप्लाई चेन और व्यापार गतिशीलता को प्रतिबिंबित करने के लिए आर्थिक साझेदारी को ऊंचा उठाने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने द्विपक्षीय संवाद में गति बनाए रखने और लोगों-से-लोगों के संबंधों को समर्थन देने के महत्व पर जोर दिया, जो साझेदारी की मजबूत नींव प्रदान करते हैं।

मंत्रियों ने आने वाले वर्ष की शुरुआत में कनाडा और भारत दोनों में व्यापार और निवेश समुदाय के साथ सतत मंत्रीस्तरीय सहभागिता के लिए सहमति व्यक्त की।

उन्होंने अगले कदमों पर विचार करते हुए निकट संपर्क में बने रहने पर सहमति व्यक्त की और नई दिल्ली में आयोजित रचनात्मक और दूरदर्शी चर्चाओं को स्वीकार करते हुए बैठक का समापन किया।


भारत–कनाडा मंत्री स्तरीय संवाद: व्यापार और निवेश में साझेदारी को नई गति

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नई दिल्ली में आज भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री,पीयूष गोयल, और कनाडा के निर्यात संवर्धन, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक विकास मंत्री, मनींदर सिद्धू, ने 7वें भारत–कनाडा मंत्री स्तरीय संवाद (MDTI) की सह-अध्यक्षता की। यह बैठक द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को पुनर्जीवित करने और सहयोग के लिए भविष्य की रूपरेखा तय करने की दिशा में एक नया चरण थी, जो 13 अक्टूबर 2025 के संयुक्त बयान "Renewing Momentum towards a Stronger Partnership" के अनुरूप थी, जिसमें व्यापार को द्विपक्षीय आर्थिक वृद्धि और स्थिरता की नींव के रूप में देखा गया।

मंत्रियों ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, सांस्कृतिक विविधता और बढ़ती आर्थिक सामर्थ्य पर आधारित भारत–कनाडा संबंधों की मजबूती की पुष्टि की। उन्होंने कनाडा में लगभग 29 लाख भारतीय प्रवासी और 4,27,000 से अधिक भारतीय छात्रों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला, जिनका योगदान दोनों समाजों को समृद्ध करता है और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देता है।

भारत और कनाडा के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 2023 में 18.38 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। मंत्रियों ने द्विपक्षीय निवेश में निरंतर वृद्धि का स्वागत किया और सतत एवं समावेशी विकास के लिए एक खुला, पारदर्शी और अनुमानित व्यावसायिक वातावरण बनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

मंत्री स्तरीय संवाद में पोषण सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला मजबूती, स्वास्थ्य क्षेत्र सहयोग और निवेश संवर्धन जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। साथ ही व्यापार नीतियों, सेवाओं और वस्तुओं में बाजार पहुँच बढ़ाने, नियामक समन्वय को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के उपायों की समीक्षा की गई।

संवाद के निष्कर्ष में, मंत्रियों ने साझा दृष्टि की पुष्टि की कि वे भारत–कनाडा आर्थिक साझेदारी को पुनर्जीवित और सशक्त करेंगे, जो परस्पर सम्मान, विश्वास और सहयोग की भावना पर आधारित होगी। उन्होंने आज की रचनात्मक चर्चाओं को ठोस परिणामों में बदलने और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सहमति व्यक्त की।

भारत–रोमानिया व्यापार मंच में राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने किया भारत के व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व

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राज्य वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री जितिन प्रसाद ने आज ब्रासोव वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (CCIBv) द्वारा भारत के बुखारेस्ट स्थित भारतीय दूतावास और भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) के सहयोग से आयोजित भारत–रोमानिया व्यापार मंच में भारत के व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।

इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय निवेश और औद्योगिक सहयोग का विस्तार करना था। इसमें ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, इंजीनियरिंग सेवाओं और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) जैसे प्रमुख क्षेत्रों के उद्योग जगत के नेताओं ने भाग लिया।

अपने संबोधन में जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, और उन्होंने रोमानियाई उद्यमों को ‘मेक इन इंडिया’ और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के तहत भारत के गतिशील विनिर्माण और नवाचार तंत्र में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।

“भारत में व्यापार के अवसर” पर दिए गए एक प्रस्तुतीकरण में हाल के नीति सुधारों, व्यवसाय करने में सुगमता से जुड़ी पहलों और प्रमुख औद्योगिक कॉरिडोरों में राज्य-स्तरीय प्रोत्साहनों का विवरण प्रस्तुत किया गया। सत्र के दौरान भारतीय और रोमानियाई कंपनियों के बीच संयुक्त उपक्रमों और प्रौद्योगिकी साझेदारी की संभावनाओं का पता लगाने के लिए समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए और व्यवसायिक मिलान सत्रों का भी आयोजन किया गया।

ब्रासोव मंच भारत और मध्य एवं पूर्वी यूरोप के बीच व्यापार और निवेश संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ, जिसने दोनों देशों की सतत् विनिर्माण, हरित ऊर्जा और उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों में दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी बनाने की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्टि की।

ब्रासोव आधुनिक रोमानिया का प्रतीक है — जहाँ परंपरागत उद्योग नई तकनीकों से मिलते हैं, जहाँ लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) को प्रोत्साहन मिलता है, और जहाँ नवाचार फलता-फूलता है। यह भावना भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ पहलों की दृष्टि से मेल खाती है, जहाँ MSME और स्टार्ट-अप्स समावेशी विकास के इंजन के रूप में कार्य करते हैं। ब्रासोव की औद्योगिक क्षमता और भारत की विनिर्माण, डिज़ाइन और इंजीनियरिंग क्षमताओं के बीच सहयोग की असीम संभावनाएँ मौजूद हैं।

जर्मनी में पीयूष गोयल ने लक्ज़मबर्ग के उपप्रधानमंत्री और जर्मनी की प्रमुख कंपनियों के सीईओ से की महत्वपूर्ण मुलाकातें

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23 अक्टूबर 2025 को जर्मनी के संघीय आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्रालय तथा संघीय चांसलरी में उच्च स्तरीय बैठकों के बाद, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लक्ज़मबर्ग के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश और वाणिज्य मंत्री जेवियर बेट्टेल से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आर्थिक संबंधों की प्रगति की समीक्षा की और द्विपक्षीय व्यापार और व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने के और अवसरों का पता लगाया। उन्होंने लक्ज़मबर्ग के आगामी भारत राज्य दौरे के अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर भी चर्चा की।

पीयूष गोयल ने जर्मनी की प्रमुख कंपनियों के सीईओ से व्यक्तिगत बैठकों में भी भाग लिया। उन्होंने निम्नलिखित सीईओ से मुलाकात की:

  • जोचेन हानेबेक, सीईओ, Infineon Technologies AG

  • क्लॉस रोसेनफेल्ड, सीईओ, Schaeffler Group

  • माइकल मासुर, सीईओ, Renk Vehicle Mobility

  • मार्टिन हरेनकनेच्ट, सीईओ, Herrenknecht AG

  • टोबियास बिशॉफ-निएम्ज़, बोर्ड सदस्य, Enertrag

  • ओला कैलेनियस, सीईओ, Mercedes-Benz

बैठकों में भारत और जर्मनी की कंपनियों के बीच सहयोग की संभावनाओं और समन्वय पर चर्चा की गई, विशेषकर रक्षा, ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियाँ और मोबिलिटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में। व्यापारिक नेताओं ने भारत में व्यवसाय करने के प्रति अपने सकारात्मक दृष्टिकोण और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने के इरादे को दोहराया।

आज बाद में,पीयूष गोयल बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में वैश्विक व्यापार पर उच्च स्तरीय पैनल में भाग लेंगे और जर्मनी की व्यवसाय और उद्योग संघों के नेताओं के साथ अपने संवाद को जारी रखेंगे।

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