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भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में बड़ी प्रगति, जल्द हो सकता है समझौता

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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण वार्ताएं जारी हैं। हालिया बातचीत में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है, जिससे निकट भविष्य में समझौते के संपन्न होने की संभावना मजबूत हुई है।

इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और सुदृढ़ बनाना, बाजार तक पहुंच को आसान बनाना तथा विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में आने वाली बाधाओं को कम करना है। भारत और अमेरिका लंबे समय से शुल्क, कृषि उत्पादों, विनिर्माण वस्तुओं तथा डिजिटल व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अंतरिम व्यापार समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इससे द्विपक्षीय व्यापार को नई गति मिलेगी, निवेश के अवसर बढ़ेंगे और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ होगा। साथ ही भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अधिक अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

दोनों पक्षों ने बातचीत में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए शेष मुद्दों के समाधान के लिए वार्ता जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है। यह समझौता भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


भारत-फिलीपींस संयुक्त कार्य समूह (JWGTI) की 14वीं बैठक मनीला में आयोजित

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फिलीपींस- भारत और फिलीपींस के बीच व्यापार एवं निवेश सहयोग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से भारत-फिलीपींस संयुक्त कार्य समूह (JWGTI) की 14वीं बैठक 5 जून 2026 को मनीला में आयोजित की गई।

बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव अमित वर्मा तथा फिलीपींस के व्यापार एवं उद्योग विभाग (इंटरनेशनल ट्रेड ग्रुप) के अवर सचिव एलन बी. गेप्ती ने की। दोनों देशों के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लिया।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने भारत और फिलीपींस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में हुई उल्लेखनीय वृद्धि का स्वागत किया। वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार 3.9 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो मजबूत आर्थिक संबंधों को दर्शाता है।

चर्चा में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के रुझानों, प्राथमिकता वाले उत्पादों एवं सेवाओं की पहचान तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने फिल्म, ऊर्जा, निर्माण एवं बुनियादी ढांचा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), आईटी-बीपीएम, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा औषधि क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

व्यापार को सुगम बनाने के लिए कारोबारी माहौल में सुधार भी बैठक का प्रमुख विषय रहा। इस दौरान सीमा शुल्क सहयोग, कृषि क्षेत्र में सहयोग, विशेष उत्पादों के लिए बाजार पहुंच तथा राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापारिक लेन-देन जैसे मुद्दों पर विचार किया गया।

बैठक में आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) की समीक्षा को शीघ्र पूरा करने और उसके बाद भारत-फिलीपींस प्राथमिकता व्यापार समझौते (PTA) पर आगे बढ़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

बैठक ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने की रणनीतिक आवश्यकता को रेखांकित किया तथा एक गतिशील और पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दोहराया।

इसके अलावा, 4 जून 2026 को 14वीं JWGTI बैठक के अवसर पर फिलीपींस में कार्यरत भारतीय व्यवसायों के प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में व्यापार, निवेश, बाजार अवसरों और भारत-फिलीपींस वाणिज्यिक संबंधों को और गहरा करने के उपायों पर चर्चा की गई।

JWGTI की अगली बैठक नई दिल्ली, भारत में आयोजित की जाएगी। यह मंच दोनों देशों को वैश्विक, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करने तथा वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार और निवेश संबंधों को और सुदृढ़ बनाने का अवसर प्रदान करता है।


भारत और दक्षिण कोरिया ने CEPA अपग्रेड वार्ता में प्रगति पर चर्चा, डिजिटल ट्रेड और निवेश सहयोग पर जोर

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नई दिल्ली- India-Korea Comprehensive Economic Partnership Agreement (IK CEPA) के उन्नयन को लेकर 12वें दौर की वार्ता 25 से 27 मई 2026 के बीच नई दिल्ली में आयोजित की गई। यह वार्ता 20 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षरित संयुक्त घोषणा के बाद हुई, जिसमें दोनों देशों ने CEPA अपग्रेड वार्ता को तेज करने पर सहमति जताई थी।

यह वार्ता भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और कोरिया के व्यापार, उद्योग एवं ऊर्जा मंत्रालय के बीच हुई। भारतीय पक्ष का नेतृत्व कपिल चौधरी ने किया, जबकि कोरियाई पक्ष का नेतृत्व Park Geun-oh ने किया।

प्रमुख चर्चा बिंदु

वार्ता के दौरान दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया, जिनमें शामिल हैं:

  • वस्तु व्यापार (Trade in Goods)

  • सेवाओं का व्यापार (Trade in Services)

  • मूल नियम (Rules of Origin)

  • निवेश (Investment)

  • स्वच्छता एवं फाइटोसैनिटरी मानक (SPS)

दोनों पक्षों ने डिजिटल व्यापार, सप्लाई चेन सहयोग और रणनीतिक औद्योगिक सहयोग के लिए अलग-अलग उप-समूह बनाने पर भी सहमति जताई।

व्यापार घाटे पर चर्चा

भारत और कोरिया ने स्वीकार किया कि वर्ष 2010 में CEPA लागू होने के बाद भारत का व्यापार घाटा बढ़ा है। इस मुद्दे को CEPA ढांचे के भीतर संतुलित समाधान के साथ हल करने पर सहमति बनी।

रणनीतिक साझेदारी को मजबूती

दोनों देशों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के दृष्टिकोण के अनुरूप “फ्यूचरिस्टिक पार्टनरशिप” को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

समयबद्ध निष्कर्ष का लक्ष्य

भारत और कोरिया ने CEPA अपग्रेड वार्ता को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और एक आधुनिक, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौता तैयार करने का लक्ष्य दोहराया, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और सहयोग को नई दिशा मिल सके।

भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता: व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे

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भारत और न्यूज़ीलैंड ने आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस समझौते पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूज़ीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने हस्ताक्षर किए।

न्यूज़ीलैंड के मंत्री टॉड मैक्ले ने इसे “एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाला अवसर” बताते हुए कहा कि यह समझौता निर्यात को बढ़ावा देगा, रोजगार सृजित करेगा और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा। उन्होंने भारतीय प्रवासी समुदाय और दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक एवं खेल संबंधों का भी उल्लेख किया।

वहीं, पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता विकसित देशों के साथ भारत की आर्थिक साझेदारी में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। उन्होंने बताया कि यह समझौता किसानों, महिलाओं, युवाओं, कारीगरों और उद्यमियों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस समझौते के तहत न्यूज़ीलैंड की ओर से भारत में लगभग 20 अरब डॉलर के निवेश की संभावना जताई गई है।

यह FTA भारत के “विकसित भारत 2047” विजन के अनुरूप है और पिछले कुछ वर्षों में भारत द्वारा किए गए प्रमुख व्यापार समझौतों में शामिल है। इस समझौते के लागू होने के बाद भारत को न्यूज़ीलैंड के बाजार में 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, जिससे MSME सेक्टर और श्रम-प्रधान उद्योगों को बड़ा लाभ होगा।

समझौते के तहत भारत ने लगभग 70% टैरिफ लाइनों पर रियायत दी है, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी, कृषि उत्पाद और कुछ औद्योगिक वस्तुओं को संरक्षण दिया गया है। इससे घरेलू उद्योगों और किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे।

कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा। सेब, कीवी और मनुका शहद जैसे उत्पादों के आयात के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे संतुलन बना रहे।

सेवा क्षेत्र में भारत को 118 सेक्टरों में बाजार पहुंच मिलेगी, जिसमें आईटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और वित्तीय सेवाएं शामिल हैं। साथ ही, भारतीय पेशेवरों के लिए 5000 विशेष वीज़ा का प्रावधान किया गया है, जिससे रोजगार और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के अवसर बढ़ेंगे।

छात्रों के लिए भी यह समझौता लाभकारी है। अब भारतीय छात्रों को न्यूज़ीलैंड में पढ़ाई के दौरान काम करने और पढ़ाई के बाद नौकरी के अधिक अवसर मिलेंगे। युवाओं के लिए वर्किंग हॉलिडे वीज़ा की सुविधा भी दी गई है।

यह समझौता MSME, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों और नवाचार को बढ़ावा देगा। साथ ही, भारत के फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को न्यूज़ीलैंड के बाजार में आसान प्रवेश मिलेगा।

बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के तहत भारतीय भौगोलिक संकेत (GI) उत्पादों को भी न्यूज़ीलैंड में मान्यता मिलने का रास्ता साफ होगा।

यह समझौता व्यापार प्रक्रियाओं को आसान बनाने, लागत कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर देता है। सीमा शुल्क निकासी को तेज किया जाएगा और डिजिटल सिस्टम को बढ़ावा मिलेगा।

सांस्कृतिक और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में भी यह समझौता ऐतिहासिक है। AYUSH और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक पहचान दिलाने में यह अहम भूमिका निभाएगा।

कुल मिलाकर, यह समझौता भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच व्यापार, निवेश, रोजगार और सांस्कृतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत करेगा।

भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति का प्रधानमंत्री मोदी ने किया स्वागत

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) की रूपरेखा पर सहमति का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के लिए बड़ी और सकारात्मक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत–अमेरिका संबंधों की बढ़ती मजबूती, आपसी विश्वास और गतिशील साझेदारी को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह रूपरेखा भारत–अमेरिका साझेदारी की गहराई और व्यापकता को प्रतिबिंबित करती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ पहल को और मजबूती प्रदान करेगा तथा किसानों, उद्यमियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), स्टार्ट-अप नवोन्मेषकों और मछुआरों के लिए नए अवसर खोलेगा। साथ ही, इससे महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

उन्होंने आगे कहा कि यह रूपरेखा निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारी को गहरा करेगी, विश्वसनीय और लचीली आपूर्ति शृंखलाओं को सशक्त बनाएगी तथा वैश्विक आर्थिक विकास में योगदान देगी।

विकसित भारत के निर्माण के भारत के संकल्प को दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भविष्य-उन्मुख वैश्विक साझेदारियों के लिए प्रतिबद्ध है, जो लोगों को सशक्त बनाएं और साझा समृद्धि को बढ़ावा दें।

इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते पर किए गए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा:

“भारत और अमेरिका के लिए शानदार समाचार!
हमने अपनी दो महान राष्ट्रों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति व्यक्त की है। मैं हमारे देशों के बीच मजबूत संबंधों के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के लिए उनका धन्यवाद करता हूँ।

यह रूपरेखा हमारी साझेदारी की बढ़ती गहराई, विश्वास और गतिशीलता को दर्शाती है। यह भारत के मेहनती किसानों, उद्यमियों, MSMEs, स्टार्ट-अप नवोन्मेषकों, मछुआरों और अन्य के लिए नए अवसर खोलकर ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती प्रदान करेगी। इससे महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे।

भारत और अमेरिका नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और यह रूपरेखा निवेश एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी को और गहरा करेगी।

यह समझौता मजबूत और विश्वसनीय आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करेगा और वैश्विक विकास में योगदान देगा। विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ते हुए, हम भविष्य-उन्मुख वैश्विक साझेदारियों के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो हमारे लोगों को सशक्त बनाएं और साझा समृद्धि को बढ़ावा दें।”


भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति

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संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) और भारत को यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि दोनों देशों ने पारस्परिक और परस्पर लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते (इंटरिम एग्रीमेंट) के लिए एक रूपरेखा पर सहमति प्राप्त कर ली है। यह रूपरेखा आज उस व्यापक भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) वार्ताओं के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करती है, जिनकी शुरुआत 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। इस बीटीए में अतिरिक्त बाज़ार पहुँच प्रतिबद्धताएँ शामिल होंगी तथा अधिक सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं को समर्थन मिलेगा।

संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच यह अंतरिम समझौता हमारी साझेदारी में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतिनिधित्व करेगा, जो पारस्परिक हितों और ठोस परिणामों पर आधारित संतुलित एवं प्रत्युत्तरात्मक व्यापार के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत–अमेरिका अंतरिम समझौते की प्रमुख शर्तें निम्नलिखित होंगी:

• भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों तथा अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क समाप्त करेगा या कम करेगा। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), पशु आहार हेतु रेड सॉरघम, वृक्ष मेवे, ताजे एवं प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन एवं स्पिरिट्स तथा अन्य उत्पाद शामिल हैं।

• संयुक्त राज्य अमेरिका, 2 अप्रैल 2025 के कार्यकारी आदेश 14257 (बड़े और लगातार वार्षिक अमेरिकी वस्तु व्यापार घाटे में योगदान देने वाली व्यापार प्रथाओं को सुधारने हेतु प्रत्युत्तरात्मक शुल्क के अंतर्गत आयात विनियमन), यथा संशोधित, के अंतर्गत भारत से उत्पन्न वस्तुओं पर 18 प्रतिशत की प्रत्युत्तरात्मक शुल्क दर लागू करेगा। इनमें वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा एवं जूते, प्लास्टिक एवं रबर, जैविक रसायन, होम डेकोर, हस्तशिल्प उत्पाद और कुछ मशीनरी शामिल हैं।

अंतरिम समझौते के सफल निष्कर्ष के अधीन, संयुक्त राज्य अमेरिका 5 सितंबर 2025 के कार्यकारी आदेश 14346 (समान सोच वाले भागीदारों के लिए प्रत्युत्तरात्मक शुल्क के दायरे में संशोधन) के अंतर्गत सूचीबद्ध कई वस्तुओं पर प्रत्युत्तरात्मक शुल्क हटाएगा। इनमें जेनेरिक दवाइयाँ, रत्न एवं हीरे तथा विमान पुर्जे शामिल हैं।

• संयुक्त राज्य अमेरिका भारत से आने वाले कुछ विमानों और विमान पुर्जों पर लगाए गए शुल्क भी हटाएगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित घोषणाओं के अंतर्गत लगाए गए थे—जिनमें एल्यूमिनियम (घोषणा 9704), स्टील (घोषणा 9705) और तांबा (घोषणा 10962) शामिल हैं।

इसी प्रकार, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप, भारत को ऑटोमोबाइल एवं ऑटोमोबाइल पुर्जों पर लागू शुल्क के अंतर्गत एक अधिमान्य शुल्क-कोटा प्रदान किया जाएगा।
फार्मास्यूटिकल्स और उनके अवयवों पर अमेरिकी सेक्शन 232 जांच के निष्कर्षों के अधीन, भारत को जेनेरिक दवाओं और उनके अवयवों के संबंध में वार्तित परिणाम प्राप्त होंगे।

• संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत, दोनों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक-दूसरे को स्थायी आधार पर अधिमान्य बाज़ार पहुँच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

• दोनों देश ऐसे उत्पत्ति नियम (रूल्स ऑफ ओरिजिन) स्थापित करेंगे, जिससे यह सुनिश्चित हो कि समझौते का लाभ मुख्य रूप से भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका को ही प्राप्त हो।

• भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-शुल्क बाधाओं को दोनों देश संबोधित करेंगे। भारत अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों के व्यापार से जुड़ी दीर्घकालिक बाधाओं को दूर करने, अमेरिकी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उत्पादों पर लागू प्रतिबंधात्मक आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को समाप्त करने तथा समझौते के लागू होने के छह माह के भीतर यह निर्धारित करने पर सहमत है कि अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानक (परीक्षण आवश्यकताओं सहित) भारतीय बाज़ार में स्वीकार्य हैं या नहीं।

इसके अतिरिक्त, भारत अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों से जुड़ी दीर्घकालिक गैर-शुल्क बाधाओं को भी संबोधित करने पर सहमत है।

• तकनीकी विनियमों के अनुपालन को सरल बनाने के उद्देश्य से, दोनों देश पारस्परिक रूप से सहमत क्षेत्रों में अपने मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर चर्चा करेंगे।

• यदि किसी भी देश द्वारा सहमत शुल्कों में परिवर्तन किया जाता है, तो दूसरा देश अपनी प्रतिबद्धताओं में समुचित संशोधन कर सकता है।

• दोनों देश बीटीए वार्ताओं के माध्यम से बाज़ार पहुँच के अवसरों को और विस्तार देने की दिशा में कार्य करेंगे। संयुक्त राज्य अमेरिका यह भी पुष्टि करता है कि बीटीए वार्ताओं के दौरान वह भारतीय वस्तुओं पर शुल्क कम करने के भारत के अनुरोध पर विचार करेगा।

• दोनों देश आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में समन्वय को सुदृढ़ करेंगे, ताकि आपूर्ति शृंखला की लचीलापन और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके। इसमें तीसरे पक्ष की गैर-बाज़ार नीतियों से निपटने हेतु समन्वित कदम, निवेश समीक्षा और निर्यात नियंत्रण में सहयोग शामिल होगा।

• भारत अगले पाँच वर्षों में अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों, विमानों एवं विमान पुर्जों, कीमती धातुओं, प्रौद्योगिकी उत्पादों और कोकिंग कोयले की लगभग 500 अरब अमेरिकी डॉलर की खरीद करने का इरादा रखता है। दोनों देश डेटा केंद्रों में उपयोग होने वाले जीपीयू सहित प्रौद्योगिकी उत्पादों के व्यापार को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएंगे और संयुक्त तकनीकी सहयोग का विस्तार करेंगे।

• संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत डिजिटल व्यापार से जुड़ी भेदभावपूर्ण या बोझिल प्रथाओं और अन्य बाधाओं को संबोधित करने तथा बीटीए के अंतर्गत मजबूत, महत्वाकांक्षी और परस्पर लाभकारी डिजिटल व्यापार नियमों के लिए एक स्पष्ट मार्ग निर्धारित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

• दोनों देश इस रूपरेखा को शीघ्र लागू करेंगे और संदर्भ शर्तों (Terms of Reference) में निर्धारित रोडमैप के अनुरूप एक परस्पर लाभकारी बीटीए के निष्कर्ष की दिशा में अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने हेतु कार्य करेंगे।


भारत–ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA): व्यापार, निवेश और रोज़गार के नए अवसर

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भारत–ओमान CEPA वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, पेशेवर गतिशीलता और विनियामक सहयोग को कवर करने वाला एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है।

  • वित्त वर्ष 2024–25 में द्विपक्षीय व्यापार USD 10.61 बिलियन रहा, जो भारत–ओमान आर्थिक साझेदारी के बढ़ते विस्तार को दर्शाता है।

  • भारत को ओमान में 98.08% टैरिफ लाइनों पर 100% शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुंच प्राप्त हुई है, जो भारत के 99.38% निर्यात मूल्य को कवर करती है—यह लाभ समझौते के पहले दिन से लागू होगा।

  • इंजीनियरिंग वस्तुओं, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य, समुद्री उत्पाद, वस्त्र, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक और रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों में नए निर्यात अवसर खुलेंगे।

  • संतुलित उदारीकरण और एक्सक्लूज़न लिस्ट के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए MSMEs, श्रम-प्रधान उद्योगों और क्षेत्रीय निर्यात वृद्धि को समर्थन।

परिचय

व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA)

CEPA एक ऐसा व्यापक समझौता है जो केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित न रहकर सेवाओं, निवेश, सरकारी खरीद, विवाद निपटान और अन्य विनियामक पहलुओं को भी शामिल करता है। इसमें म्यूचुअल रिकग्निशन एग्रीमेंट्स (पारस्परिक मान्यता) भी शामिल हैं, जिससे विभिन्न देशों की नियामक प्रणालियों को समान परिणामों के आधार पर स्वीकार किया जाता है।

भारत–ओमान CEPA दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, पेशेवर गतिशीलता और नियामक सहयोग को एक समग्र ढांचे में समाहित करता है, जिससे दीर्घकालिक और स्थिर आर्थिक जुड़ाव को बढ़ावा मिलेगा।

भारत–ओमान आर्थिक जुड़ाव

वित्त वर्ष 2024–25 में द्विपक्षीय व्यापार USD 10.61 बिलियन रहा, जो 2023–24 के USD 8.94 बिलियन से अधिक है।
अप्रैल–अक्टूबर 2025 के दौरान व्यापार USD 6.48 बिलियन दर्ज किया गया।

वस्तु व्यापार

  • भारत का ओमान को निर्यात: USD 4.06 बिलियन (FY 2024–25)

  • ओमान से आयात: USD 6.55 बिलियन (FY 2024–25)

सेवा व्यापार

  • भारत की सेवा निर्यात: 2020 में USD 397 मिलियन से बढ़कर 2023 में USD 617 मिलियन

  • ओमान से सेवा आयात: USD 101 मिलियन से बढ़कर USD 159 मिलियन

वस्तुओं में बाज़ार पहुंच: भारत के लाभ

CEPA के तहत भारत को ओमान में लगभग पूर्ण शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त हुई है। पहले MFN व्यवस्था में जहां केवल 15.33% निर्यात मूल्य ही शून्य शुल्क पर जाता था, वहीं अब लगभग पूरा निर्यात शुल्क-मुक्त होगा। इससे भारतीय उत्पादों की मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

भारत की बाज़ार पहुंच पेशकश और सुरक्षा उपाय

भारत ने 77.79% टैरिफ लाइनों पर उदारीकरण की पेशकश की है, जबकि कई संवेदनशील क्षेत्रों को एक्सक्लूज़न लिस्ट में रखा गया है, जैसे—

  • परिवहन उपकरण, प्रमुख रसायन, अनाज, मसाले, चाय–कॉफी

  • डेयरी, खाद्य तेल, फल-सब्ज़ियां

  • रबर, चमड़ा, वस्त्र, पेट्रोलियम उत्पाद

इससे घरेलू उद्योगों और किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे।

क्षेत्रवार प्रभाव

इंजीनियरिंग वस्तुएं

  • FY 2024–25 में निर्यात: USD 875.83 मिलियन

  • CEPA के तहत सभी इंजीनियरिंग उत्पादों पर शून्य शुल्क

  • 2030 तक निर्यात USD 1.3–1.6 बिलियन तक पहुंचने की संभावना

फार्मास्यूटिकल्स

  • ओमान का फार्मा बाज़ार 2031 तक USD 473.71 मिलियन होने का अनुमान

  • दवाओं और APIs पर शुल्क-मुक्त पहुंच

  • USFDA, EMA आदि से स्वीकृत दवाओं के लिए फास्ट-ट्रैक अनुमोदन

समुद्री उत्पाद

  • ओमान का आयात: USD 118.91 मिलियन

  • CEPA से झींगा और मछली निर्यात में वृद्धि, तटीय क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य

  • FY 2024 में भारत ओमान का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता

  • बासमती चावल, अंडे, मांस, बिस्कुट, मक्खन, शहद आदि पर बड़ा लाभ

  • संवेदनशील उत्पादों के लिए चरणबद्ध शुल्क कटौती

वस्त्र, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक, रत्न एवं आभूषण

  • इन सभी क्षेत्रों में शून्य शुल्क से प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त

  • MSME आधारित उद्योगों को विशेष लाभ

सेवाएं, निवेश और पेशेवर गतिशीलता

  • 2024 में सेवा व्यापार: USD 863 मिलियन

  • ओमान ने 127 सेवा उप-क्षेत्रों में बाज़ार पहुंच प्रतिबद्धताएं दीं

  • आईटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, पेशेवर सेवाओं में अवसर

  • इंट्रा-कॉरपोरेट ट्रांसफरीज़ (ICT) की सीमा 20% से बढ़ाकर 50%

  • सामाजिक सुरक्षा समझौते (SSA) पर भविष्य में वार्ता का प्रावधान

निष्कर्ष

भारत–ओमान CEPA एक संतुलित, व्यापक और भविष्यन्मुखी समझौता है, जो व्यापार, निवेश, रोज़गार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करेगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी, रोज़गार सृजन और क्षेत्रीय एकीकरण को मजबूती प्रदान करेगा।

भारत-ओमान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) : द्विपक्षीय व्यापार और सेवा क्षेत्र में नई संभावनाएँ

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भारत और ओमान ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मजबूत आर्थिक साझेदारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसके तहत दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement – CEPA) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ओमान के वाणिज्य, उद्योग और निवेश संवर्धन मंत्री क़ैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ ने हस्ताक्षर किए।


यह CEPA समझौता भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच आर्थिक समेकन को गहरा करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ओमान इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और भारतीय वस्त्र एवं सेवाओं के लिए मध्य पूर्व और अफ्रीका की ओर एक प्रमुख मार्गदर्शक है। ओमान में लगभग 7 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं, जिनमें 200–300 वर्षों से उपस्थित भारतीय व्यापारी परिवार भी शामिल हैं, जो ओमान की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। भारतीय उद्यमों की ओमान में मजबूत उपस्थिति है, जहाँ 6,000 से अधिक भारतीय संस्थान विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। वार्षिक प्रेषण लगभग 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर पर है, जो आर्थिक जुड़ाव की गहराई को दर्शाता है। भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है, और CEPA ढांचे के तहत इसके विस्तार की मजबूत संभावनाएँ हैं।

यह समझौता हाल के छह महीनों में ब्रिटेन के बाद दूसरा मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) है और इसका उद्देश्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार समझौते करना है, जो भारत के श्रम-गहन क्षेत्रों से प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं और भारतीय व्यवसायों के लिए अवसर प्रदान करती हैं।

मुख्य लाभ और प्रावधान:

  • CEPA के तहत ओमान ने भारत को अभूतपूर्व शुल्क छूट दी है। ओमान ने अपने 98.08% टैरिफ लाइनों पर शून्य-शुल्क प्रवेश की पेशकश की है, जो भारत के ओमान निर्यात का 99.38% कवर करती है। प्रमुख श्रम-गहन क्षेत्र जैसे आभूषण, वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, खेल सामग्री, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण और ऑटोमोबाइल पर पूर्ण टैरिफ समाप्ति लागू होगी। इसमें से 97.96% टैरिफ लाइनों पर तत्काल शुल्‍क उन्मूलन लागू होगा।

  • भारत ने अपने कुल 12,556 टैरिफ लाइनों में से 77.79% पर टैरिफ उदारीकरण की पेशकश की है, जो ओमान से भारत के आयात का 94.81% मूल्य कवर करता है। संवेदनशील उत्पादों को भारत ने बिना कोई छूट दिए बहिष्करण श्रेणी में रखा है, जिसमें कृषि उत्पाद (डेयरी, चाय, कॉफ़ी, रबर, तंबाकू), सोना और चांदी की धातुएँ, आभूषण, अन्य श्रम-गहन उत्पाद जैसे फुटवियर और खेल सामग्री, और कई बेस मेटल्स का स्क्रैप शामिल है।

  • सेवा क्षेत्र, जो भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख चालक है, को भी व्यापक लाभ मिलेगा। ओमान के वैश्विक सेवा आयात लगभग 12.52 बिलियन अमेरिकी डॉलर हैं, जिसमें भारत के हिस्से का 5.31% है, जो भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए महत्वपूर्ण अप्रयुक्त अवसर दिखाता है। समझौते में व्यापक सेवाओं का पैकेज शामिल है, जिसमें ओमान ने कंप्यूटर सेवाएँ, व्यावसायिक एवं पेशेवर सेवाएँ, ऑडियो-विज़ुअल सेवाएँ, अनुसंधान और विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रतिबद्धताएँ दी हैं।

  • CEPA के तहत भारतीय पेशेवरों के लिए बेहतर गतिशीलता का प्रावधान किया गया है। पहली बार, ओमान ने मोड 4 के तहत व्यापक प्रतिबद्धताएँ दी हैं, जिसमें इन्ट्रा-कार्पोरेट ट्रांसफरीज़ की कोटा 20% से बढ़ाकर 50% कर दी गई है और कॉन्ट्रैक्चुअल सर्विस सप्लायर्स के लिए रहने की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 2 वर्ष कर दी गई है, जिसे आगे और 2 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इसमें लेखा, कराधान, वास्तुकला, चिकित्सा और संबद्ध सेवाओं में कुशल पेशेवरों के लिए प्रवेश और रहने की अधिक उदार शर्तें भी शामिल हैं।

  • CEPA भारतीय कंपनियों को ओमान में प्रमुख सेवा क्षेत्रों में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति देता है, जिससे भारत की सेवा उद्योग के लिए क्षेत्र में विस्तार के नए अवसर खुलते हैं।

  • एक महत्वपूर्ण पहलू है पारंपरिक चिकित्सा (Traditional Medicine) में ओमान की प्रतिबद्धता, जो सभी आपूर्ति मोड्स में लागू होगी, और यह किसी भी अन्य देश द्वारा पहले नहीं दी गई इतनी व्यापक प्रतिबद्धता है। इससे भारत के आयुष और वेलनेस क्षेत्रों को खाड़ी क्षेत्र में अपने कौशल को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।

  • समझौते में गैर-शुल्क बाधाओं (Non-Tariff Barriers) को भी संबोधित किया गया है, जिससे वास्तविक बाजार पहुँच में सुधार होगा।

यह समझौता 2006 के बाद ओमान द्वारा किसी देश के साथ किया गया पहला द्विपक्षीय समझौता है (अमेरिका के बाद)।

पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा:

"भारत-ओमान CEPA भारत और ओमान के ऐतिहासिक मजबूत संबंधों को और सशक्त करता है और एक संतुलित आर्थिक ढांचा प्रस्तुत करता है, जो भारतीय निर्यातकों और पेशेवरों के लिए अवसरों को बढ़ाता है। यह भारतीय वस्तुओं के लिए ओमान के बाजार में लगभग सार्वभौमिक शून्य-शुल्क पहुँच प्रदान करता है, उच्च विकास वाले प्रमुख क्षेत्रों में सेवाओं के विस्तार को सुनिश्चित करता है और भारतीय पेशेवरों के गतिशीलता को बेहतर बनाता है।"

CEPA से द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि, रोजगार सृजन, निर्यात विस्तार, आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ करना और भारत व ओमान के बीच दीर्घकालिक आर्थिक जुड़ाव के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

भारत–स्लोवेनिया JCTEC का 10वां सत्र नई दिल्ली में सम्पन्न

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भारत–स्लोवेनिया व्यापार एवं आर्थिक सहयोग संयुक्त समिति (JCTEC) के 10वें सत्र का आयोजन नई दिल्ली में हुआ। यह बैठक भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव साकेत कुमार और स्लोवेनिया के विदेश और यूरोपीय मामलों के मंत्रालय में आर्थिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कूटनीति के महानिदेशक पीटर जापेल्ज़ की सह-अध्यक्षता में संपन्न हुई।

यह सत्र भारत और स्लोवेनिया के बीच वर्तमान आर्थिक संबंधों की समीक्षा, प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने और व्यापार एवं निवेश के लिए एक अग्रदृष्टि-आधारित रोडमैप तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

पिछले कई वर्षों में भारत और स्लोवेनिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार निरंतर बढ़ोतरी दर्शाता रहा है, जो इस साझेदारी की गहराई और मजबूती को प्रतिबिंबित करता है।

स्लोवेनिया की मध्य यूरोप के चौराहे पर स्थित रणनीतिक स्थिति और यूरोप के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी, दोनों देशों के लिए क्षेत्रों को और नज़दीक लाने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है। भौगोलिक और आर्थिक हितों का यह संगम व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार और संपर्कता (कनेक्टिविटी) में सहयोग को और मजबूत करने का ठोस आधार है।

बैठक के दौरान वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिदृश्य की व्यापक समीक्षा की गई, साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों का मूल्यांकन भी किया गया। कृषि, रसायन एवं फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य, परिवहन, ऊर्जा, पर्यटन, MSMEs, तथा आयुर्वेद एवं पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने एक संतुलित और परस्पर लाभकारी भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के शीघ्र निष्कर्ष पर आशावाद व्यक्त किया।

अपनी यात्रा के दौरान,पीटर जापेल्ज़ ने भारत सरकार के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की।

10वें JCTEC सत्र ने भारत और स्लोवेनिया की मजबूत आर्थिक साझेदारी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्टि की, जो आपसी विश्वास, साझा मूल्यों और दीर्घकालिक मित्रता पर आधारित है। यह सत्र यूरोप और भारत के बीच व्यापक सहयोग के लिए एक सुदृढ़ आधार भी स्थापित करता है।


भारत–कनाडा 7वें मंत्रीस्तरीय व्यापार और निवेश संवाद का सारांश (MDTI 2025)

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भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के आमंत्रण पर, कनाडा के निर्यात प्रोत्साहन, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक विकास मंत्री, माननीय मनींदर सिद्धू ने 11 से 14 नवंबर 2025 तक भारत की आधिकारिक यात्रा की।

कनाडा के कananaskis में हुए G7 सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की द्विपक्षीय बैठक में प्रदान किए गए निर्देशों, तथा 13 अक्टूबर 2025 को जारी विदेश मंत्रियों के संयुक्त बयान “एक मजबूत साझेदारी की ओर नवीनीकृत गति”—जिसमें व्यापार को द्विपक्षीय आर्थिक वृद्धि और लचीलापन का आधार स्तंभ बताया गया था—के अनुरूप, दोनों व्यापार मंत्रियों ने व्यापार और निवेश पर मंत्रीस्तरीय संवाद (MDTI) के 7वें संस्करण का आयोजन किया।

मंत्रियों ने भारत–कनाडा आर्थिक साझेदारी की मजबूती और निरंतरता की पुनः पुष्टि की और सतत संवाद, पारस्परिक सम्मान, और भावी पहलों के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

मंत्रियों ने वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार में मजबूत वृद्धि का उल्लेख किया, जो 2024 में 23.66 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें माल व्यापार का मूल्य लगभग 8.98 अरब अमेरिकी डॉलर था—जो पिछले वर्ष की तुलना में 10% की महत्वपूर्ण वृद्धि है। मंत्रियों ने भारत–कनाडा आर्थिक साझेदारी की ताकत और लचीलापन दोहराया और व्यापार और निवेश के नए अवसरों को खोलने के लिए निजी क्षेत्र के साथ निरंतर सहभागिता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने द्विपक्षीय निवेश प्रवाह में steady विस्तार का स्वागत किया, जिसमें भारत में कनाडा के संस्थागत निवेश और कनाडा में भारतीय कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति शामिल है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं में हजारों नौकरियों का समर्थन करती हैं। मंत्रियों ने एक खुला, पारदर्शी और पूर्वानुमेय निवेश माहौल बनाए रखने और प्राथमिकता एवं उभरते क्षेत्रों में गहरी साझेदारी के नए रास्तों की तलाश करने की प्रतिबद्धता जताई।

मंत्रियों ने टिकाऊ विकास और नवाचार को बढ़ावा देने वाले रणनीतिक क्षेत्रों में भारत और कनाडा के बीच मजबूत पूरकताओं का भी उल्लेख किया, जो व्यापार के लिए नए अवसर प्रदान करती हैं। यह स्वीकार करते हुए कि इन क्षेत्रों में दोनों पक्षों के संबंधित हितधारकों के बीच अलग-अलग डोमेन-स्तरीय सहभागिता की आवश्यकता होगी, मंत्रियों ने:

• ऊर्जा संक्रमण और नई औद्योगिक वृद्धि के लिए आवश्यक क्रिटिकल मिनरल्स और स्वच्छ ऊर्जा सहयोग में दीर्घकालिक आपूर्ति शृंखला साझेदारी को प्रोत्साहित करने पर सहमति व्यक्त की।

• भारत में कनाडा की स्थापित उपस्थिति और भारत के विमानन क्षेत्र की वृद्धि का उपयोग करते हुए एयरोस्पेस और द्वि-उपयोग क्षमताओं में निवेश और व्यापारिक अवसरों की पहचान और विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की।

सप्लाई चेन लचीलापन के महत्व को स्वीकार करते हुए, मंत्रियों ने वैश्विक घटनाक्रम पर विचार-विमर्श किया और हालिया व्यवधानों से मिले सबक पर चर्चा की। उन्होंने कृषि सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लचीलापन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए विविध और विश्वसनीय सप्लाई चेन की अनिवार्यता पर बल दिया।

मंत्रियों ने द्विपक्षीय आर्थिक सहभागिता को मजबूत करने में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और वैश्विक विकास तथा बदलती सप्लाई चेन और व्यापार गतिशीलता को प्रतिबिंबित करने के लिए आर्थिक साझेदारी को ऊंचा उठाने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने द्विपक्षीय संवाद में गति बनाए रखने और लोगों-से-लोगों के संबंधों को समर्थन देने के महत्व पर जोर दिया, जो साझेदारी की मजबूत नींव प्रदान करते हैं।

मंत्रियों ने आने वाले वर्ष की शुरुआत में कनाडा और भारत दोनों में व्यापार और निवेश समुदाय के साथ सतत मंत्रीस्तरीय सहभागिता के लिए सहमति व्यक्त की।

उन्होंने अगले कदमों पर विचार करते हुए निकट संपर्क में बने रहने पर सहमति व्यक्त की और नई दिल्ली में आयोजित रचनात्मक और दूरदर्शी चर्चाओं को स्वीकार करते हुए बैठक का समापन किया।


भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर प्रगति: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की ब्रुसेल्स में सार्थक वार्ताएं

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 26 से 28 अक्टूबर 2025 तक ब्रुसेल्स का दौरा किया और यूरोपीय संघ के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोश शेफचोविच (Mr. Maroš Šefčovič) और उनकी टीम के साथ भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से संबंधित लंबित मुद्दों पर सार्थक और उत्पादक वार्ताएं कीं।

दोनों पक्षों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा फरवरी 2025 में नई दिल्ली में आयोजित कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स की यात्रा के दौरान दिए गए स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप, वर्ष 2025 के अंत तक भारत-ईयू एफटीए को संपन्न करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया। इस वार्ता का उद्देश्य एक ऐसा पारस्परिक रूप से लाभकारी, संतुलित और न्यायसंगत व्यापार समझौता करना था, जो भारत और यूरोपीय संघ के बीच गहरे राजनीतिक विश्वास और रणनीतिक संबंधों को दर्शाता हो, साथ ही एक-दूसरे की प्राथमिकताओं और संवेदनशीलताओं का सम्मान करता हो।

भारत ने यह स्वीकार किया कि एफटीए में टैरिफ और गैर-टैरिफ दोनों प्रकार की बाधाओं को संतुलित रूप से संबोधित करना आवश्यक है, ताकि आने वाले वर्षों में दोनों भागीदारों के बीच व्यापार को गति देने वाले पारदर्शी और पूर्वानुमेय विनियामक ढांचे तैयार किए जा सकें।

दोनों पक्षों के बीच लंबित मुद्दों पर संभावित समाधान क्षेत्रों की पहचान के लिए गहन चर्चा हुई। भारत की गैर-टैरिफ उपायों और नई यूरोपीय संघ की विनियमों से संबंधित चिंताओं पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। वार्ता के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने भारत के प्रमुख मांग वाले क्षेत्रों, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों में, वरीयतापूर्ण व्यवहार (preferential treatment) की आवश्यकता पर जोर दिया।

दोनों पक्षों ने यह सहमति व्यक्त की कि गैर-संवेदनशील औद्योगिक टैरिफ श्रेणियों को अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करेंगे। साथ ही यह भी माना गया कि इस्पात, ऑटोमोबाइल, CBAM और अन्य ईयू विनियमों से संबंधित विषय अधिक संवेदनशील हैं और उन पर आगे चर्चा की आवश्यकता है।

भारत यूरोपीय संघ के साथ घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से इस साझा दृष्टिकोण को साकार करने की आशा रखता है — ऐसा सहयोग जो नवाचार, संतुलित और सार्थक व्यापार, तथा शांति और समृद्धि के सामूहिक संकल्प पर आधारित हो। इन चर्चाओं को आगे बढ़ाने के लिए, यूरोपीय संघ की तकनीकी टीम, व्यापार महानिदेशक (Director General for Trade) के नेतृत्व में, अगले सप्ताह भारत का दौरा करेगी ताकि बीते दो दिनों में पहचाने गए संभावित समाधानों के आधार पर रचनात्मक निष्कर्ष तक पहुँचा जा सके।

जर्मनी में पीयूष गोयल ने लक्ज़मबर्ग के उपप्रधानमंत्री और जर्मनी की प्रमुख कंपनियों के सीईओ से की महत्वपूर्ण मुलाकातें

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23 अक्टूबर 2025 को जर्मनी के संघीय आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्रालय तथा संघीय चांसलरी में उच्च स्तरीय बैठकों के बाद, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लक्ज़मबर्ग के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश और वाणिज्य मंत्री जेवियर बेट्टेल से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आर्थिक संबंधों की प्रगति की समीक्षा की और द्विपक्षीय व्यापार और व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने के और अवसरों का पता लगाया। उन्होंने लक्ज़मबर्ग के आगामी भारत राज्य दौरे के अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर भी चर्चा की।

पीयूष गोयल ने जर्मनी की प्रमुख कंपनियों के सीईओ से व्यक्तिगत बैठकों में भी भाग लिया। उन्होंने निम्नलिखित सीईओ से मुलाकात की:

  • जोचेन हानेबेक, सीईओ, Infineon Technologies AG

  • क्लॉस रोसेनफेल्ड, सीईओ, Schaeffler Group

  • माइकल मासुर, सीईओ, Renk Vehicle Mobility

  • मार्टिन हरेनकनेच्ट, सीईओ, Herrenknecht AG

  • टोबियास बिशॉफ-निएम्ज़, बोर्ड सदस्य, Enertrag

  • ओला कैलेनियस, सीईओ, Mercedes-Benz

बैठकों में भारत और जर्मनी की कंपनियों के बीच सहयोग की संभावनाओं और समन्वय पर चर्चा की गई, विशेषकर रक्षा, ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियाँ और मोबिलिटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में। व्यापारिक नेताओं ने भारत में व्यवसाय करने के प्रति अपने सकारात्मक दृष्टिकोण और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने के इरादे को दोहराया।

आज बाद में,पीयूष गोयल बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में वैश्विक व्यापार पर उच्च स्तरीय पैनल में भाग लेंगे और जर्मनी की व्यवसाय और उद्योग संघों के नेताओं के साथ अपने संवाद को जारी रखेंगे।

भारत–यूरोप आर्थिक संबंधों का नया अध्याय: भारत–EFTA व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA)

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भारत–यूरोप आर्थिक संबंधों में एक निर्णायक क्षण

WHAT IS EFTA? / EFTA क्या है?

EFTA (European Free Trade Association) एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसमें आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, नॉर्वे और स्विट्ज़रलैंड शामिल हैं। इसकी स्थापना 1960 में सात सदस्य देशों द्वारा मुक्त व्यापार और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। यूरोप में यह तीन प्रमुख आर्थिक समूहों में से एक है — अन्य दो हैं यूरोपीय संघ (EU) और यूनाइटेड किंगडम (UK)

भारत–EFTA व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA), 10 मार्च 2024 को नई दिल्ली में हस्ताक्षरित हुआ और 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हुआ। यह भारत की बाह्य व्यापार नीति में एक ऐतिहासिक और निर्णायक क्षण है।
यह समझौता भारत का चार विकसित यूरोपीय देशों — स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टाइन — के साथ पहला मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है, जो अपने पैमाने और दृष्टिकोण दोनों में अत्यंत महत्वाकांक्षी है।
यह भारत के “आत्मनिर्भर भारत” दृष्टिकोण और EFTA के लचीले व विविधीकृत साझेदारी की खोज के बीच रणनीतिक एकता को दर्शाता है।

यह समझौता 14 अध्यायों से मिलकर बना है, जिनमें प्रमुख रूप से निम्न विषय शामिल हैं —

  • वस्तुओं के लिए बाज़ार पहुँच,

  • उत्पत्ति के नियम,

  • व्यापार सुगमीकरण,

  • व्यापार उपचार,

  • स्वास्थ्य और फाइटोसैनिटरी उपाय,

  • तकनीकी व्यापार अवरोध,

  • निवेश संवर्धन,

  • सेवाएँ,

  • बौद्धिक संपदा अधिकार,

  • सतत विकास और अन्य कानूनी प्रावधान।

इस समझौते का मुख्य लक्ष्य अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश को आकर्षित करना और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करना है। यह भारत के आर्थिक इतिहास के सबसे दूरदर्शी समझौतों में से एक माना जा रहा है।

WHAT IS TEPA? / TEPA क्या है?

TEPA (Trade and Economic Partnership Agreement) एक आधुनिक और महत्वाकांक्षी समझौता है, जिसमें पहली बार भारत द्वारा किए गए किसी भी FTA में निवेश और रोजगार सृजन पर बाध्यकारी प्रतिबद्धताएँ शामिल की गई हैं।

मुख्य विशेषताएँ (Key Features of TEPA)

1. उद्देश्यपूर्ण निवेश (Investment with Purpose)

अनुच्छेद 7.1 के तहत, चारों EFTA देश भारत में पहले 10 वर्षों में 50 अरब डॉलर, और अगले 5 वर्षों में अतिरिक्त 50 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

ये निवेश दीर्घकालिक और क्षमता-विकास आधारित हैं, जो विनिर्माण, नवाचार और अनुसंधान पर केंद्रित रहेंगे। इससे अगले 15 वर्षों में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है, जो भारत के कुशल श्रमिक बल को यूरोप की प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी से जोड़ेंगे।

भारत–EFTA डेस्क (स्थापित फरवरी 2025) निवेशकों के लिए एक सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य कर रही है, जो नवीकरणीय ऊर्जा, जीवन विज्ञान, इंजीनियरिंग और डिजिटल परिवर्तन जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है।

2. संतुलित बाजार पहुँच (Balanced Market Access)

TEPA में महत्वाकांक्षा और सावधानी के बीच संतुलन बनाया गया है।

  • EFTA ने 92.2% टैरिफ लाइनों पर छूट दी है, जो भारत के 99.6% निर्यात को कवर करती है।

  • भारत ने 82.7% टैरिफ लाइनों पर पहुँच दी है, जो EFTA के 95.3% निर्यात को कवर करती है, लेकिन इसमें मजबूत सुरक्षा उपाय भी शामिल हैं।

80% से अधिक आयात सोने से संबंधित हैं, जिन पर कोई बदलाव नहीं किया गया है।
डेयरी, सोया, कोयला, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण, और कुछ खाद्य उत्पादों को अपवर्जन सूची में रखा गया है।
“मेक इन इंडिया” और PLI योजना के अंतर्गत आने वाले उत्पादों के लिए शुल्क कटौती 5–10 वर्षों में चरणबद्ध रूप से लागू की जाएगी।

3. सेवाओं और कुशल प्रतिभा के लिए अवसर (Gateway for Services and Skilled Talent)

सेवाओं का क्षेत्र भारत के GVA का 55% से अधिक योगदान देता है। TEPA डिजिटल और ज्ञान-आधारित सेवाओं के लिए नया प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।

भारत ने 105 उप-क्षेत्रों में प्रतिबद्धताएँ दी हैं, जबकि
EFTA देशों ने —

  • स्विट्ज़रलैंड: 128

  • नॉर्वे: 114

  • आइसलैंड: 110

  • लिकटेंस्टाइन: 107

इसमें IT, बिज़नेस सर्विसेज़, शिक्षा, मीडिया, सांस्कृतिक और पेशेवर सेवाएँ शामिल हैं।

TEPA में नर्सिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंसी और आर्किटेक्चर जैसी प्रोफेशन के लिए पारस्परिक मान्यता समझौते (MRAs) भी शामिल हैं, जिससे पेशेवर गतिशीलता में सुगमता आएगी।

4. बौद्धिक संपदा, नवाचार और विश्वास (IPR, Innovation and Trust)

TEPA के IPR प्रावधान TRIPS समझौते के अनुरूप हैं।
भारत को सार्वजनिक स्वास्थ्य और जेनेरिक दवाओं पर अपनी लचीलापन बनाए रखने की अनुमति है।
स्विट्ज़रलैंड जैसे नवाचार-प्रधान देशों के लिए यह भारत के नियामक ढाँचे पर विश्वास का प्रतीक है।
यह अध्याय नवाचार और समावेशन के बीच संतुलित सहयोग का मॉडल प्रस्तुत करता है।

5. सतत और समावेशी विकास (Sustainable and Inclusive Development)

TEPA सतत विकास, सामाजिक प्रगति, और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देता है।
यह व्यापार प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, दक्षता और सरलीकरण को प्रोत्साहित करेगा।

क्षेत्रवार अवसर (Sectoral Opportunities)

कृषि और संबद्ध उत्पाद (Agriculture and Allied Goods)

वित्त वर्ष 2024–25 में भारत का EFTA को निर्यात 72.37 मिलियन डॉलर रहा, जिसमें मुख्य रूप से ग्वार गम, प्रसंस्कृत सब्ज़ियाँ, बासमती चावल, दालें, फल और अंगूर शामिल हैं।
TEPA के तहत स्विट्ज़रलैंड और नॉर्वे में इन पर शुल्कों में बड़ी कटौती हुई है, जिससे भारतीय किसानों और निर्यातकों को सीधा लाभ होगा।

देशवार लाभ (Country-Specific Gains)

  • देश

  • उत्पाद

  • टैरिफ रियायतें / अवसर

  • स्विट्ज़रलैंड

  • खाद्य उत्पाद, बिस्किट, अंगूर, मेवे और सब्जियाँ

  • 127.5 CHF/100kg तक के शुल्क समाप्त; भारतीय निर्यात को बड़ा अवसर

  • नॉर्वे

  • खाद्य उत्पाद, चावल, सब्जियाँ, पेय पदार्थ

  • कई उत्पादों पर शुल्क-मुक्त पहुँच; भारतीय ब्रांडों के लिए बाजार खुला

  • आइसलैंड   

  • प्रसंस्कृत खाद्य, चॉकलेट, सब्जियाँ

  • उच्च शुल्क (97 ISK/kg तक) समाप्त; भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य के लिए नए अवसर

कॉफी और चाय (Coffee and Tea)

EFTA देश विश्व के कॉफी आयात का लगभग 3% ($175 मिलियन) हिस्सा हैं।
TEPA के तहत सभी कॉफी उत्पादों पर शून्य शुल्क (Zero Duty) लागू है, जिससे भारतीय कॉफी उत्पादकों को प्रीमियम बाजारों तक पहुँच मिलेगी।

चाय के निर्यात में भी लाभ हुआ है —
2024–25 में भारत की औसत निर्यात कीमत $6.77/kg रही, जो पिछले वर्ष के $5.93/kg से अधिक है।

समुद्री उत्पाद (Marine Products)

TEPA के अंतर्गत, भारतीय मछली, झींगा, स्क्विड आदि उत्पादों पर प्रमुख EFTA देशों में महत्वपूर्ण शुल्क कटौती की गई है —

  • नॉर्वे: मछली और झींगा फीड पर 13.16% तक की शुल्क छूट।

  • आइसलैंड: 10% तक शुल्क समाप्त; झींगा, स्क्विड, फिश फीड पर 55% तक कमी।

  • स्विट्ज़रलैंड: मछली के तेल (लिवर ऑयल को छोड़कर) पर शून्य शुल्क।

औद्योगिक और विनिर्माण लाभ (Industrial and Manufacturing Gains)

EFTA को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात FY 2024–25 में $315 मिलियन रहा, जो 18% की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है।
TEPA से इलेक्ट्रिकल मशीनरी, कॉपर उत्पाद, ऊर्जा-कुशल प्रणालियों और सटीक इंजीनियरिंग के निर्यात में नए अवसर खुलेंगे।
टेक्सटाइल्स, चमड़ा, फुटवियर, खेल सामग्री, और खिलौनों को भी शून्य शुल्क और मानकीकरण में सुगमता का लाभ मिलेगा।
रत्न और आभूषण क्षेत्र में, समझौते से स्थायी शुल्क-मुक्त पहुँच सुनिश्चित हुई है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर (Electronics and Software)

$100 अरब निवेश प्रतिबद्धता और उच्च-आय यूरोपीय बाजारों तक पहुँच के साथ, TEPA भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और MSME क्षेत्रों के लिए वैश्विक विस्तार का आधार बनेगा।

देशवार अवसर:

  • स्विट्ज़रलैंड: मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्ट सेंसर, फिनटेक संचार प्रणालियाँ

  • नॉर्वे: ईवी बैटरी सिस्टम, मरीन इलेक्ट्रॉनिक्स

  • आइसलैंड: स्मार्ट होम, शिक्षा तकनीक उपकरण

  • लिकटेंस्टाइन: औद्योगिक नियंत्रण प्रणाली, बैंकिंग हार्डवेयर

रसायन, प्लास्टिक और संबंधित उत्पाद (Chemicals, Plastics & Allied Products)

EFTA ने भारत के 95% रासायनिक निर्यात पर शुल्क समाप्त या कम किए हैं।
निर्यात $49 मिलियन से बढ़कर $65–70 मिलियन तक पहुँचने की उम्मीद है।
प्लास्टिक और शेलक उत्पादों के लिए भी उच्च-मूल्य यूरोपीय बाजारों में विविधीकरण के अवसर बढ़ेंगे।

विश्वास पर आधारित साझेदारी (A Partnership Rooted in Mutual Confidence)

भारत के लिए TEPA केवल व्यापार समझौता नहीं, बल्कि नियम-आधारित, पारदर्शी और नवाचार-केंद्रित अर्थव्यवस्थाओं के साथ एक रणनीतिक विश्वास का प्रतीक है।
यह घरेलू हितों की रक्षा करते हुए भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का विश्वसनीय भागीदार बनाता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

भारत–EFTA व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
यह भारत का चार विकसित यूरोपीय देशों के साथ पहला FTA है, जिसमें अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियों की प्रतिबद्धता शामिल है।
यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाजार पहुँच को बढ़ाता है, बौद्धिक संपदा अधिकारों को सुदृढ़ करता है, और सतत व समावेशी विकास को प्रोत्साहित करता है — जिससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को नई गति मिलती है।


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