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PM मोदी–पुतिन की अहम मुलाकात शुक्रवार को, रक्षा से परमाणु ऊर्जा तक कई मुद्दों पर होगी चर्चा

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को प्रस्तावित अहम बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ रक्षा सहयोग, आधुनिक सैन्य तकनीक, Su-57 लड़ाकू विमान और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और भविष्य की सैन्य जरूरतों को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है। खासतौर पर Su-57 को लेकर संभावित सहयोग को रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

इसके अलावा भारत और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग, तकनीकी साझेदारी और दीर्घकालिक ऊर्जा सहयोग पर भी बातचीत की उम्मीद है। ऐसे समय में जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, मोदी-पुतिन की यह मुलाकात दोनों देशों के संबंधों की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बैठक से दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारत-उज़्बेकिस्तान के संबंध ऐतिहासिक और सभ्यतागत विरासत पर आधारित: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध हैं, जो दोनों देशों की स्थायी मित्रता की मजबूत नींव हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बढ़ता राजनीतिक विश्वास, व्यापार एवं निवेश में विस्तार तथा लोगों के बीच बढ़ते संपर्क आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय साझेदारी को और अधिक सशक्त बनाएंगे।


बिरला ने ये विचार उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री महामहिम बख्तियोर सईदोव से संसद भवन में हुई मुलाकात के दौरान व्यक्त किए। दोनों नेताओं के बीच भारत–उज़्बेकिस्तान संबंधों, संसदीय सहयोग, व्यापार एवं निवेश, शिक्षा, संस्कृति तथा क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।

भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की सराहना

बिरला ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां की संसदीय व्यवस्था देश की विविधता और जनता की आकांक्षाओं का प्रभावी प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने बताया कि 543 सदस्यीय लोकसभा देशभर के करोड़ों नागरिकों की आवाज़ का प्रतिनिधित्व करती है तथा भारत की बहुदलीय व्यवस्था सभी विचारों को समान अवसर प्रदान करती है।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि संसद वर्ष में तीन सत्रों में कार्य करती है और वर्तमान मानसून सत्र में राष्ट्रीय महत्व के अनेक विषयों पर गंभीर चर्चा जारी है।

भारत की विकास यात्रा और युवाओं की भूमिका

लोकसभा अध्यक्ष ने भारत की आधारभूत संरचना, डिजिटल नवाचार, प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी, निवेश और व्यापार के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा वैश्विक स्तर पर नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहे हैं तथा विश्व की प्रमुख विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने मार्च 2026 में गठित भारत–उज़्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह का उल्लेख करते हुए विश्वास जताया कि यह पहल दोनों देशों के बीच संसदीय संवाद को नई गति देगी और आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक तथा जन-से-जन संबंधों को और मजबूत करेगी।

आईपीयू सम्मेलन की यादें साझा कीं

बिरला ने अप्रैल 2025 में ताशकंद में आयोजित अंतर-संसदीय संघ (IPU) की 150वीं महासभा में अपनी भागीदारी को याद करते हुए बताया कि इस दौरान उनकी मुलाकात उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव, सीनेट की अध्यक्ष तंजिला नरबायेवा तथा विधानसभा अध्यक्ष नुरिद्दीन इस्माइलोव से हुई थी। उन्होंने कहा कि इन उच्चस्तरीय मुलाकातों ने दोनों देशों के संसदीय सहयोग को नई दिशा प्रदान की है।

उज़्बेकिस्तान ने भारत के साथ साझेदारी मजबूत करने की जताई प्रतिबद्धता

उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सईदोव ने भारत के साथ राजनीतिक, आर्थिक और संसदीय सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के संसदीय अनुभव से उज़्बेकिस्तान को महत्वपूर्ण सीख मिल सकती है।

उन्होंने व्यापार, निवेश, संयुक्त परियोजनाओं और उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए साझा दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया और कहा कि दोनों देशों के बीच संसदीय सहयोग व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

स्मृति प्रकाशन भेंट किया

इस अवसर पर विदेश मंत्री बख्तियोर सईदोव ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को उज़्बेकिस्तान द्वारा आयोजित आईपीयू की 150वीं महासभा पर आधारित एक विशेष स्मारक प्रकाशन भी भेंट किया।

भारत-जापान के बीच टोक्यो में 8वीं रक्षा नीति वार्ता आयोजित, रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति

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भारत और जापान के बीच 13 जुलाई 2026 को जापान की राजधानी टोक्यो में 8वीं रक्षा नीति वार्ता (Defence Policy Dialogue) आयोजित हुई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया, जबकि जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप रक्षा मंत्री  कानो कोजी ने किया।

बैठक में दोनों पक्षों ने पिछली रक्षा नीति वार्ता के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई उल्लेखनीय प्रगति की समीक्षा की और भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी (Special Strategic and Global Partnership) को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

वार्ता के दौरान दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर व्यापक चर्चा की तथा साझा हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। बैठक में सैन्य-से-सैन्य सहयोग, संयुक्त मुख्यालयों के बीच समन्वय, समुद्री सहयोग, रक्षा अभ्यास, क्षमता निर्माण, रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी सहयोग (विशेष रूप से समुद्री प्रौद्योगिकी) तथा संस्थागत सहयोग सहित रक्षा संबंधों के सभी प्रमुख पहलुओं की समीक्षा की गई।

दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग के लगातार विस्तार का स्वागत किया और नियमित उच्च-स्तरीय संवाद एवं आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया। इस वर्ष प्रस्तावित मंत्रिस्तरीय यात्राओं और 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता के संभावित परिणामों पर भी चर्चा हुई।

बैठक में रक्षा औद्योगिक सहयोग, तकनीकी नवाचार, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तथा अन्य उभरते रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर बढ़ती समानता पर संतोष व्यक्त किया और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में मिलकर कार्य जारी रखने पर सहमति जताई। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर आधारित स्वतंत्र, मुक्त और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भारत के रक्षा क्षेत्र में जापान के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के तहत व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत करना महत्वपूर्ण है। वहीं, कानो कोजी ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भारत के साथ रक्षा संबंधों के और विस्तार के प्रति जापान की प्रतिबद्धता दोहराई।

इससे पहले रक्षा सचिव ने जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी से मुलाकात कर उन्हें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने जापानी रक्षा मंत्री को भारत आने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का औपचारिक निमंत्रण भी सौंपा। दोनों पक्षों ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी में लगातार आ रही मजबूती पर संतोष व्यक्त किया।

अपने दौरे की शुरुआत में रक्षा सचिव ने टोक्यो स्थित सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज मेमोरियल स्टोन पर पुष्पांजलि अर्पित कर जापान सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के उन जवानों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया।

यह यात्रा भारत और जापान के बीच लगातार मजबूत होते रक्षा संबंधों, पारस्परिक सम्मान तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक रही।

भारत-जापान साझेदारी को नई मजबूती, 2036 तक 10 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य

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नई दिल्ली- भारत और जापान के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत का लक्ष्य वर्ष 2036 तक जापान से 10 ट्रिलियन येन (लगभग 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक) का निवेश आकर्षित करना है। साथ ही, भारत में कार्यरत जापानी कंपनियों की संख्या को भी दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।

दोनों देशों के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऊर्जा, धातु उद्योग और रक्षा सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का उद्देश्य तकनीकी सहयोग बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान की साझेदारी केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नवाचार, आधुनिक तकनीक, सतत विकास और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन समझौतों से भारत में निवेश, रोजगार सृजन, अत्याधुनिक तकनीक के विकास और विनिर्माण क्षेत्र को नई गति मिलेगी, जिससे 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।

फ्रांस के आधिकारिक दौरे पर रवाना हुईं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

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केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण आज फ्रांस की आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुईं। इस यात्रा का उद्देश्य भारत-फ्रांस सामरिक साझेदारी को और मजबूत करना, आर्थिक सहयोग बढ़ाना तथा निवेश, प्रौद्योगिकी और नवाचार को प्रोत्साहित करना है।

प्रमुख बिंदु

  • वित्त मंत्री भारत-फ्रांस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद (Economic & Financial Dialogue - EFD) की सह-अध्यक्षता फ्रांस के अर्थव्यवस्था, वित्त तथा औद्योगिक एवं ऊर्जा संप्रभुता मंत्री रोलां लेस्क्योर (Roland Lescure) के साथ ऐक्स-आं-प्रोवांस (Aix-en-Provence) में करेंगी।

  • इस संवाद के दौरान दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग बढ़ाने और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।

उद्योग जगत से संवाद

  •  सीतारमण वैश्विक कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों (CEOs) के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगी।

  • साथ ही, प्रमुख उद्योगपतियों के साथ राउंडटेबल चर्चा में भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, संरचनात्मक सुधारों, निवेश के अवसरों और दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को प्रस्तुत करेंगी।

वैश्विक आर्थिक मंच में भागीदारी

  • वित्त मंत्री Les Rencontres Économiques d'Aix-en-Provence में "नए मध्यम वर्ग की वृद्धि को कैसे बढ़ावा दिया जाए" विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में भाग लेंगी।

  • यह यूरोप के प्रमुख वार्षिक आर्थिक मंचों में से एक है, जहां विभिन्न देशों के सरकार प्रमुख, मंत्री, केंद्रीय बैंक प्रमुख, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, अर्थशास्त्री और शिक्षाविद वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं।

ITER और साइबर सुरक्षा केंद्र का दौरा

  •  सीतारमण कैडाराश (Cadarache) स्थित इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER) परियोजना का दौरा करेंगी।

  • ITER दुनिया की सबसे बड़ी नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है, जिसमें भारत और फ्रांस सहित 30 से अधिक देश सहभागी हैं।

  • वह Campus Cyber का भी दौरा करेंगी, जो फ्रांस का राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नवाचार, अनुसंधान और कौशल विकास केंद्र है। इस दौरे का उद्देश्य साइबर सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाना है।

क्षेत्रीय सहयोग पर चर्चा

  • वित्त मंत्री प्रोवांस-आल्प्स-कोट डी'अज़ूर (PACA) क्षेत्र के अध्यक्ष रेनो मुसेलियर (Renaud Muselier) से मुलाकात करेंगी।

  • दोनों पक्ष निवेश, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा करेंगे।

भारतीय समुदाय से संवाद

  • अपनी यात्रा के अंतिम चरण में सीतारमण फ्रांस में बसे भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ एक विशेष कार्यक्रम में भी भाग लेंगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में अमेरिका के भारत स्थित राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की

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केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में अमित शाह ने कहा:

“आज नई दिल्ली में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की। सुरक्षा के क्षेत्र में, विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी और मादक पदार्थों की तस्करी-रोधी सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई।”

उन्होंने आगे कहा:

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत, भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि दोनों देशों के लोग इस द्विपक्षीय संबंध से लाभान्वित हों।”

बैठक के दौरान भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग को और सुदृढ़ बनाने, आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयासों तथा मादक पदार्थों की तस्करी पर नियंत्रण के लिए सहयोग बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। यह मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने तथा दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

10वां भारत-थाईलैंड रक्षा संवाद: इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर

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10वां भारत-थाईलैंड रक्षा संवाद 16 जून 2026 को बैंकॉक में आयोजित किया गया। इस संवाद में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की गई तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा से जुड़े पारस्परिक हितों के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक की सह-अध्यक्षता थाईलैंड के रक्षा मंत्रालय के उप-स्थायी सचिव एडमिरल नुट्टापोल डियावानिच और भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव सत्यजीत मोहंती ने की।

दोनों पक्षों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बदलते सुरक्षा परिदृश्य पर चर्चा की और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रतिनिधिमंडलों ने पिछले रक्षा संवाद के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की। चर्चा के प्रमुख विषयों में सैन्य-से-सैन्य संपर्क, क्षमता निर्माण पहल, प्रशिक्षण आदान-प्रदान, समुद्री सहयोग तथा अन्य साझा हितों के क्षेत्र शामिल रहे।

बैठक में दोनों देशों के बीच चल रहे रक्षा उद्योग सहयोग की भी समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान, नवाचार और सैन्य क्षमताओं के विकास में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की, ताकि दोनों देशों के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी को प्रोत्साहन मिल सके।

इसके अतिरिक्त, प्रतिनिधिमंडलों ने Association of Southeast Asian Nations (आसियान) के नेतृत्व वाले तंत्रों सहित क्षेत्रीय और बहुपक्षीय रक्षा मंचों के अंतर्गत सहयोग पर भी विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने संवाद और सहयोग के माध्यम से साझा सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने तथा व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक का समापन भविष्य की गतिविधियों और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की आगामी दिशा पर चर्चा के साथ हुआ। उल्लेखनीय है कि भारत और थाईलैंड ने वर्ष 2025 में अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत किया था।

भारत–जर्मनी रक्षा सहयोग को नई गति, राजनाथ सिंह ने दिया बड़ा प्रस्ताव

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म्यूनिख/बर्लिन- भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मन रक्षा उद्योग को भारत के साथ सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में विश्वसनीय साझेदारियां अनिवार्य हो गई हैं। वे जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित रक्षा निवेशक सम्मेलन में उद्योग जगत को संबोधित कर रहे थे।

वैश्विक हालात में भारत की अहम भूमिका

रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय भूराजनैतिक बदलाव, सप्लाई चेन में व्यवधान और तेज तकनीकी परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में देश और उद्योग अपने साझेदारों को नए सिरे से चुन रहे हैं।
उन्होंने बताया कि भारत स्थिर नीतियों, कुशल युवाशक्ति और तेजी से बढ़ते औद्योगिक ढांचे के कारण निवेश के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है।

उन्नत तकनीकों में सहयोग की पेशकश

भारत ने जर्मनी के साथ कई हाई-टेक क्षेत्रों में साझेदारी का प्रस्ताव रखा, जिनमें शामिल हैं:

  • एडवांस्ड रडार और सेंसर सिस्टम

  • AI आधारित ड्रोन (Unmanned Aerial Systems)

  • मल्टी-सेंसर टेक्नोलॉजी

  • सोनोबॉय और अंडरवॉटर ट्रांसमीटर

‘आत्मनिर्भर भारत’ से वैश्विक साझेदारी तक

आत्मनिर्भर भारत का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत की आत्मनिर्भरता दुनिया से अलग होने की नहीं, बल्कि साथ मिलकर आगे बढ़ने की सोच है।

उन्होंने कहा कि भारत अब केवल रक्षा उपकरण खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि डिजाइन, विकास और निर्माण में भागीदार बन रहा है।

2047 के विकसित भारत का लक्ष्य

रक्षा मंत्री ने  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के विजन को दोहराया। उन्होंने कहा कि मजबूत अर्थव्यवस्था और स्पष्ट नीतियां इस लक्ष्य को संभव बना रही हैं।

स्टार्टअप और नवाचार की ताकत

भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से उभर रहा है, जहां
बेंगलुरु,हैदराबाद,पुणे जैसे शहर इनोवेशन के प्रमुख केंद्र हैं।
सरकार की पहलें जैसे Start-Up India, Digital India और Skill India इस दिशा में अहम भूमिका निभा रही हैं।

जर्मनी के साथ गहराते संबंध

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत-जर्मनी रक्षा संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं और दोनों देश मजबूत व भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

अहम दौरे और समझौते

  • कील में पनडुब्बी निर्माण सुविधा का दौरा

  • बर्लिन में जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस से मुलाकात

  • रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप और UN पीसकीपिंग प्रशिक्षण समझौते पर हस्ताक्षर

निष्कर्ष

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और जर्मनी के रिश्तों का अगला चरण नवाचार, क्षमता और रणनीतिक साझेदारी पर आधारित होगा, जो दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक लाभ और वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित करेगा।


भारत–मिस्र रक्षा सहयोग पर बड़ी खबर

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काहिरा- भारत और मिस्र के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली है। दोनों देशों की संयुक्त रक्षा समिति (JDC) की 11वीं बैठक 20 से 22 अप्रैल तक काहिरा में आयोजित हुई, जिसमें द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और आगे बढ़ाने पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।

बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) अमिताभ प्रसाद ने किया, जबकि मिस्र की ओर से रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

क्या रहे मुख्य फैसले?

दोनों देशों ने 2026–27 के लिए रक्षा सहयोग योजना पर सहमति जताई। इसके तहत:

  • सैन्य सहयोग तंत्र को और मजबूत किया जाएगा

  • संयुक्त प्रशिक्षण और अभ्यास बढ़ाए जाएंगे

  • समुद्री सुरक्षा में सहयोग को विस्तार दिया जाएगा

  • सैन्य अभ्यासों का दायरा और जटिलता बढ़ेगी

  • रक्षा उत्पादन और तकनीक में साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा

रक्षा उद्योग में बढ़ता सहयोग

भारत ने अपने तेजी से बढ़ते रक्षा उत्पादन पर प्रस्तुति दी:

  • कुल उत्पादन 20 अरब डॉलर से अधिक

  • 100 से ज्यादा देशों को लगभग 4 अरब डॉलर का निर्यात

दोनों देशों ने रक्षा निर्माण में साझा उत्पादन (co-production) और सह-विकास (co-development) के अवसर तलाशने पर सहमति जताई।

नौसेना और वायुसेना सहयोग

  • पहली बार नौसेना-से-नौसेना स्टाफ वार्ता आयोजित हुई

  • भारतीय नौसेना की हिंद महासागर में सुरक्षा भूमिका और सूचना साझाकरण तंत्र को सराहा गया

  • भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मिस्र वायुसेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अम्र अब्देल रहमान साकर से भी मुलाकात की

 शहीदों को श्रद्धांजलि

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने काहिरा के हेलियोपोलिस युद्ध स्मारक पर जाकर
प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

रणनीतिक महत्व

  • 2022 में रक्षा सहयोग पर समझौता (MoU) हुआ था

  • 2023 में संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिला

यह बैठक दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों और क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


आईएनएस सुनयना ने थाईलैंड से रवाना होकर समुद्री सहयोग को दिया नया आयाम

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फुकेट: INS Sunayna (आईओएस सागर) ने 17 अप्रैल 2026 को फुकेट, थाईलैंड से तीन दिवसीय ऑपरेशनल टर्नअराउंड (OTR) सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद प्रस्थान किया। यह मौजूदा तैनाती के दौरान उसका दूसरा पोर्ट कॉल था।

इस दौरान जहाज ने रॉयल थाई नौसेना के साथ कई पेशेवर, रणनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लिया, जिससे भारत और थाईलैंड के बीच नौसैनिक सहयोग और मजबूत हुआ।

जहाज के कमांडिंग ऑफिसर सिद्धार्थ चौधरी ने रियर एडमिरल सथापोर्न वाजरत से मुलाकात कर समुद्री सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

दोनों नौसेनाओं के बीच मैत्रीपूर्ण फुटबॉल मैच और संयुक्त योग सत्र का आयोजन किया गया, जिससे आपसी संबंध और मजबूत हुए। साथ ही, जहाज पर आयोजित डेक रिसेप्शन में वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों ने भाग लिया, जहां समुद्री सुरक्षा और सहयोग पर चर्चा हुई।

पैसेज एक्सरसाइज (PASSEX) के दौरान एचटीएमएस क्लोंगयाई के साथ संयुक्त अभ्यास किया गया, जिसमें संचार ड्रिल और फॉर्मेशन संचालन के जरिए दोनों नौसेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और क्षमता का प्रदर्शन हुआ।

यह दौरा भारत और थाईलैंड के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी को दर्शाता है, जो ‘MAHASAGAR’ दृष्टिकोण के अनुरूप है।

अब आईओएस सागर जकार्ता, इंडोनेशिया की ओर रवाना हो चुका है, जहां वह अपने अगले पोर्ट कॉल के तहत क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को और सशक्त करेगा।


भूटान दौरे पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, ऊर्जा सहयोग को मिलेगी नई गति

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नई दिल्ली/थिम्फू- केंद्रीय ऊर्जा तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल चार दिवसीय भूटान दौरे पर आज पहुंचे। उनका यह दौरा भारत-भूटान के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों को और गहराई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत और भूटान के बीच लंबे समय से आपसी विश्वास, समझ और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर आधारित उत्कृष्ट संबंध रहे हैं। यह दौरा विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

दौरे के दौरान मनोहर लाल ने भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

इसके अलावा, उन्होंने भूटान सरकार के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री ल्योंपो जेम त्शेरिंग के साथ भी बैठक की। इस दौरान जलविद्युत क्षेत्र में चल रहे सहयोग को मजबूत करने, नवीकरणीय ऊर्जा के नए अवसरों और क्षेत्रीय बिजली व्यापार को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।

ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के दायरे को विस्तारित करते हुए, भारत और भूटान ने एक सशक्त द्विपक्षीय संस्थागत ढांचा स्थापित किया है। यह तंत्र दोनों देशों के बीच चल रही और भविष्य की परियोजनाओं की नियमित समीक्षा और समन्वय सुनिश्चित करेगा। सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में गैर-जल ऊर्जा, सीमा-पार ट्रांसमिशन, परियोजना वित्तपोषण, क्षमता निर्माण और संस्थागत साझेदारी शामिल हैं।

इस अवसर पर दोनों देशों के बीच दो महत्वपूर्ण समझौते भी हुए—

  1. पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना का टैरिफ प्रोटोकॉल:

    1020 मेगावाट की इस परियोजना का संयुक्त उद्घाटन 11 नवंबर 2025 को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक द्वारा किया गया था। 19 सितंबर 2025 से इस परियोजना से अतिरिक्त बिजली का भारत को निर्यात शुरू हो चुका है।

  2. रिएक्टिव एनर्जी अकाउंटिंग की कार्यप्रणाली:

    यह तकनीकी ढांचा ग्रिड स्थिरता बढ़ाने, बिजली विनिमय की दक्षता सुधारने और दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार को सुगम बनाने में मदद करेगा।

इस दौरे के दौरान हुई चर्चाएं और समझौते भारत-भूटान संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ दोनों देशों की समृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के नए उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को दी बधाई

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के जनरल फान वान जियांग को सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ वियतनाम के उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय रक्षा मंत्री के रूप में नियुक्त होने पर बधाई दी है।

रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में कहा कि भारत वियतनाम के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों को और मजबूत करने तथा सुरक्षा, सैन्य आदान-प्रदान और रक्षा उद्योग में सहयोग को गहरा करने के लिए उत्सुक है।

उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत-वियतनाम साझेदारी और अधिक मजबूत होगी तथा नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।

हिंद महासागर में भारत की ताकत: INS त्रिकंड का शानदार प्रदर्शन

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भारतीय नौसेना का स्टील्थ फ्रिगेट INS त्रिकंड 20 मार्च 2026 को सेशेल्स के पोर्ट विक्टोरिया से एक सफल और उपयोगी पोर्ट कॉल पूरा करने के बाद रवाना हो गया।

जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी ने सेशेल्स के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और भारत के उच्चायुक्त से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान जहाज ने सेशेल्स सरकार को आवश्यक स्पेयर पार्ट्स और जरूरी सामग्री भी सौंपी।

INS त्रिकंड ने एक्सरसाइज लामीतिये 2026 के पहले त्रि-सेवा संस्करण में भाग लिया, जिसमें भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और सेशेल्स डिफेंस फोर्स (SDF) के सदस्य शामिल थे। यह इस अभ्यास के 11वें संस्करण में भारतीय नौसेना की पहली भागीदारी है।

अभ्यास के हार्बर चरण के दौरान, जहाज पर विज़िट, बोर्ड, सर्च एंड सीज़र (VBSS) प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें संयुक्त बोर्डिंग अभ्यास भी शामिल थे। इसके बाद समुद्री चरण में INS त्रिकंड ने SCGS Le Vigilant के साथ अभ्यास किया और भारतीय नौसेना के मरीन कमांडो तथा SDF के स्पेशल फोर्सेज की संयुक्त टीम द्वारा समुद्र में बोर्डिंग ऑपरेशन किए गए।

इसके पश्चात भारतीय सेना और सेशेल्स डिफेंस फोर्स के जवानों ने प्रस्लिन द्वीप पर लैंडिंग ऑपरेशन किया। इस दौरान SDF के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज मेजर जनरल माइकल रोसेट, डिप्टी चीफ ब्रिगेडियर जीन अटाला और अन्य वरिष्ठ अधिकारी समुद्री चरण का अवलोकन करने के लिए INS त्रिकंड पर सवार हुए।

यह अभ्यास भारत और सेशेल्स के बीच समुद्री सहयोग और आपसी तालमेल (interoperability) को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। “लामीतिये”, जिसका अर्थ क्रियोल भाषा में ‘मित्रता’ है, दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाता है।

यह पोर्ट कॉल भारत के MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Region) दृष्टिकोण को दर्शाता है और हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की प्रमुख सुरक्षा भागीदार और प्रथम प्रतिक्रिया देने वाली शक्ति (First Responder) के रूप में प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।


भारत और ब्राज़ील के बीच डाक क्षेत्र में सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन (MoU)

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भारत और ब्राज़ील ने डाक क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जो डाक सेवाओं, डिजिटल परिवर्तन और समावेशी सेवा वितरण में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया और फ्रेडरिको डी सिक्वेरा फिल्हो डाक क्षेत्र सहयोग पर MoU पर हस्ताक्षर के बाद दस्तावेजों का आदान-प्रदान करते हुए।

इस MoU पर भारत सरकार के संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और ब्राज़ील के संचार मंत्री महामहिम फ्रेडरिको डी सिक्वेरा फिल्हो ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता ब्राज़ील के राष्ट्रपति महामहिम लुईज़ इनासियो लूला दा सिल्वा के भारत राज्य दौरे के दौरान संपन्न हुआ।

यह समझौता भारतीय डाक विभाग और ब्राज़ील के संचार मंत्रालय के बीच सहयोग के लिए एक व्यापक ढांचा स्थापित करता है, जिसका उद्देश्य डाक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।

MoU के तहत निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा:

  • डाक क्षेत्र की नीतियों और संचालन में सर्वोत्तम प्रथाओं और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान

  • सार्वभौमिक सेवा और संबोधित प्रणाली को मजबूत करना

  • डिजिटल परिवर्तन, ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स और डाक वित्तीय सेवाओं में सहयोग

  • क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और तकनीकी आदान-प्रदान

  • आपसी हित के संयुक्त पहल और रणनीतिक परियोजनाएं

  • यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (UPU) सहित बहुपक्षीय मंचों में बेहतर समन्वय

  • समावेशी और सतत विकास के लिए दक्षिण–दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देना

इस साझेदारी को अधिकारियों और विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, संयुक्त कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन तथा संरचित सूचना साझा करने के माध्यम से लागू किया जाएगा।

यह MoU डाक प्रणालियों के आधुनिकीकरण और उनके नेटवर्क को आर्थिक विकास, वित्तीय समावेशन और अंतिम छोर तक सेवा वितरण के इंजन के रूप में उपयोग करने के लिए भारत और ब्राज़ील की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत अपने बड़े पैमाने पर डाक परिवर्तन के अनुभव साझा करेगा, जिसमें डिजिटल सेवाएं, ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स और नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक सेवा वितरण शामिल हैं। यह समझौता तेजी से विकसित हो रहे बाजार परिवेश में डाक ऑपरेटरों की वित्तीय स्थिरता और परिचालन दक्षता को मजबूत करने के प्रयासों में भी सहायक होगा।

यह MoU प्रारंभिक रूप से पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा, जिसमें स्वचालित नवीनीकरण का प्रावधान होगा, और इसे दोनों देशों के कानूनों और नियमों के अनुसार लागू किया जाएगा।

यह सहयोग भारत–ब्राज़ील रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता है तथा ग्लोबल साउथ के प्रमुख साझेदारों के रूप में दोनों देशों के बीच गहरे जुड़ाव में योगदान देता है।

भारत और ब्राज़ील के अधिकारी डाक सहयोग पर द्विपक्षीय बैठक करते हुए, जिसकी अध्यक्षता ज्योतिरादित्य सिंधिया और फ्रेडरिको डी सिक्वेरा फिल्हो ने की



रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ग्रीस के रक्षा मंत्री से की द्विपक्षीय बैठक, रणनीतिक साझेदारी को मिला नया बल

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में हेलेनिक गणराज्य (ग्रीस) के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री निकोलाओस-जॉर्जियोस डेंडियास के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों मंत्रियों ने दोहराया कि भारत-ग्रीस रणनीतिक साझेदारी शांति, स्थिरता, स्वतंत्रता और आपसी सम्मान जैसे साझा मूल्यों पर आधारित है।

दोनों देशों ने अपने-अपने स्वदेशी रक्षा उद्योगों की क्षमता को साझेदारी के माध्यम से विस्तार देने का निर्णय लिया। भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ग्रीस के ‘एजेंडा 2030’ रक्षा सुधारों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए रक्षा औद्योगिक सहयोग पर एक संयुक्त आशय घोषणा (Joint Declaration of Intent) पर हस्ताक्षर किए गए। यह अगले पांच वर्षों के रोडमैप के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।

बैठक के दौरान क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग तथा रणनीतिक संबंधों को और गहरा करने पर सहमति बनी। दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच सैन्य सहभागिता की रूपरेखा तय करने के लिए वर्ष 2026 के लिए द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना का भी आदान-प्रदान किया गया।

दोनों प्राचीन समुद्री राष्ट्रों के बीच प्रमुख समुद्री मुद्दों पर अभिसरण को भी रेखांकित किया गया। ग्रीस ने गुरुग्राम स्थित इंडियन ओशन रीजन इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर (IFC-IOR) में एक ग्रीक अंतरराष्ट्रीय संपर्क अधिकारी की तैनाती की घोषणा की।

बैठक से पहले ग्रीस के रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने मानेकशॉ सेंटर में त्रि-सेवा गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण भी किया।

अपने दौरे के दौरान हेलेनिक प्रतिनिधिमंडल ने बेंगलुरु में प्रमुख रक्षा और औद्योगिक प्रतिष्ठानों का दौरा किया तथा नई दिल्ली में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs), रक्षा उद्योग और स्टार्टअप प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। यह दौरा भारत और ग्रीस के बीच दीर्घकालिक और घनिष्ठ संबंधों पर आधारित रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता है।



भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति

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संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) और भारत को यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि दोनों देशों ने पारस्परिक और परस्पर लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते (इंटरिम एग्रीमेंट) के लिए एक रूपरेखा पर सहमति प्राप्त कर ली है। यह रूपरेखा आज उस व्यापक भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) वार्ताओं के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करती है, जिनकी शुरुआत 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। इस बीटीए में अतिरिक्त बाज़ार पहुँच प्रतिबद्धताएँ शामिल होंगी तथा अधिक सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं को समर्थन मिलेगा।

संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच यह अंतरिम समझौता हमारी साझेदारी में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतिनिधित्व करेगा, जो पारस्परिक हितों और ठोस परिणामों पर आधारित संतुलित एवं प्रत्युत्तरात्मक व्यापार के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत–अमेरिका अंतरिम समझौते की प्रमुख शर्तें निम्नलिखित होंगी:

• भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों तथा अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क समाप्त करेगा या कम करेगा। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), पशु आहार हेतु रेड सॉरघम, वृक्ष मेवे, ताजे एवं प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन एवं स्पिरिट्स तथा अन्य उत्पाद शामिल हैं।

• संयुक्त राज्य अमेरिका, 2 अप्रैल 2025 के कार्यकारी आदेश 14257 (बड़े और लगातार वार्षिक अमेरिकी वस्तु व्यापार घाटे में योगदान देने वाली व्यापार प्रथाओं को सुधारने हेतु प्रत्युत्तरात्मक शुल्क के अंतर्गत आयात विनियमन), यथा संशोधित, के अंतर्गत भारत से उत्पन्न वस्तुओं पर 18 प्रतिशत की प्रत्युत्तरात्मक शुल्क दर लागू करेगा। इनमें वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा एवं जूते, प्लास्टिक एवं रबर, जैविक रसायन, होम डेकोर, हस्तशिल्प उत्पाद और कुछ मशीनरी शामिल हैं।

अंतरिम समझौते के सफल निष्कर्ष के अधीन, संयुक्त राज्य अमेरिका 5 सितंबर 2025 के कार्यकारी आदेश 14346 (समान सोच वाले भागीदारों के लिए प्रत्युत्तरात्मक शुल्क के दायरे में संशोधन) के अंतर्गत सूचीबद्ध कई वस्तुओं पर प्रत्युत्तरात्मक शुल्क हटाएगा। इनमें जेनेरिक दवाइयाँ, रत्न एवं हीरे तथा विमान पुर्जे शामिल हैं।

• संयुक्त राज्य अमेरिका भारत से आने वाले कुछ विमानों और विमान पुर्जों पर लगाए गए शुल्क भी हटाएगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित घोषणाओं के अंतर्गत लगाए गए थे—जिनमें एल्यूमिनियम (घोषणा 9704), स्टील (घोषणा 9705) और तांबा (घोषणा 10962) शामिल हैं।

इसी प्रकार, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप, भारत को ऑटोमोबाइल एवं ऑटोमोबाइल पुर्जों पर लागू शुल्क के अंतर्गत एक अधिमान्य शुल्क-कोटा प्रदान किया जाएगा।
फार्मास्यूटिकल्स और उनके अवयवों पर अमेरिकी सेक्शन 232 जांच के निष्कर्षों के अधीन, भारत को जेनेरिक दवाओं और उनके अवयवों के संबंध में वार्तित परिणाम प्राप्त होंगे।

• संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत, दोनों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक-दूसरे को स्थायी आधार पर अधिमान्य बाज़ार पहुँच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

• दोनों देश ऐसे उत्पत्ति नियम (रूल्स ऑफ ओरिजिन) स्थापित करेंगे, जिससे यह सुनिश्चित हो कि समझौते का लाभ मुख्य रूप से भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका को ही प्राप्त हो।

• भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-शुल्क बाधाओं को दोनों देश संबोधित करेंगे। भारत अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों के व्यापार से जुड़ी दीर्घकालिक बाधाओं को दूर करने, अमेरिकी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उत्पादों पर लागू प्रतिबंधात्मक आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को समाप्त करने तथा समझौते के लागू होने के छह माह के भीतर यह निर्धारित करने पर सहमत है कि अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानक (परीक्षण आवश्यकताओं सहित) भारतीय बाज़ार में स्वीकार्य हैं या नहीं।

इसके अतिरिक्त, भारत अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों से जुड़ी दीर्घकालिक गैर-शुल्क बाधाओं को भी संबोधित करने पर सहमत है।

• तकनीकी विनियमों के अनुपालन को सरल बनाने के उद्देश्य से, दोनों देश पारस्परिक रूप से सहमत क्षेत्रों में अपने मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर चर्चा करेंगे।

• यदि किसी भी देश द्वारा सहमत शुल्कों में परिवर्तन किया जाता है, तो दूसरा देश अपनी प्रतिबद्धताओं में समुचित संशोधन कर सकता है।

• दोनों देश बीटीए वार्ताओं के माध्यम से बाज़ार पहुँच के अवसरों को और विस्तार देने की दिशा में कार्य करेंगे। संयुक्त राज्य अमेरिका यह भी पुष्टि करता है कि बीटीए वार्ताओं के दौरान वह भारतीय वस्तुओं पर शुल्क कम करने के भारत के अनुरोध पर विचार करेगा।

• दोनों देश आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में समन्वय को सुदृढ़ करेंगे, ताकि आपूर्ति शृंखला की लचीलापन और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके। इसमें तीसरे पक्ष की गैर-बाज़ार नीतियों से निपटने हेतु समन्वित कदम, निवेश समीक्षा और निर्यात नियंत्रण में सहयोग शामिल होगा।

• भारत अगले पाँच वर्षों में अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों, विमानों एवं विमान पुर्जों, कीमती धातुओं, प्रौद्योगिकी उत्पादों और कोकिंग कोयले की लगभग 500 अरब अमेरिकी डॉलर की खरीद करने का इरादा रखता है। दोनों देश डेटा केंद्रों में उपयोग होने वाले जीपीयू सहित प्रौद्योगिकी उत्पादों के व्यापार को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएंगे और संयुक्त तकनीकी सहयोग का विस्तार करेंगे।

• संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत डिजिटल व्यापार से जुड़ी भेदभावपूर्ण या बोझिल प्रथाओं और अन्य बाधाओं को संबोधित करने तथा बीटीए के अंतर्गत मजबूत, महत्वाकांक्षी और परस्पर लाभकारी डिजिटल व्यापार नियमों के लिए एक स्पष्ट मार्ग निर्धारित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

• दोनों देश इस रूपरेखा को शीघ्र लागू करेंगे और संदर्भ शर्तों (Terms of Reference) में निर्धारित रोडमैप के अनुरूप एक परस्पर लाभकारी बीटीए के निष्कर्ष की दिशा में अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने हेतु कार्य करेंगे।


थल सेना प्रमुख का यूएई और श्रीलंका का आधिकारिक दौरा सफलतापूर्वक संपन्न

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थल सेना प्रमुख (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 05 से 08 जनवरी 2026 तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और श्रीलंका की अपनी आधिकारिक यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण की। यह दौरा पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को गहरा करने, सैन्य-से-सैन्य संपर्क को सुदृढ़ करने तथा रणनीतिक साझेदारियों को मजबूती प्रदान करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा

05 से 06 जनवरी 2026 तक यूएई प्रवास के दौरान, थल सेना प्रमुख ने यूएई सशस्त्र बलों के वरिष्ठ नेतृत्व, विशेष रूप से यूएई थल सेना के कमांडर के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। इन चर्चाओं में रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने, आपसी संचालन क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) बढ़ाने तथा संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान के नए अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

जनरल द्विवेदी को यूएई थल सेना की संगठनात्मक संरचना, भूमिकाओं और परिचालन क्षमताओं पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों का दौरा किया और अधिकारियों तथा सैनिकों से संवाद किया। इन बैठकों से सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को तलाशने का अवसर मिला।

थल सेना प्रमुख ने यूएई नेशनल डिफेंस कॉलेज में अधिकारियों को संबोधित करते हुए रणनीतिक संवाद, नेतृत्व विकास तथा क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया।

दौरे के दौरान उन्होंने यूएई में भारत के राजदूत डॉ. दीपक मित्तल से भी मुलाकात की, जिसमें रक्षा कूटनीति और द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

श्रीलंका की यात्रा

07 से 08 जनवरी 2026 तक श्रीलंका दौरे के दौरान, थल सेना प्रमुख ने श्रीलंका सेना के कमांडर, रक्षा उप मंत्री तथा रक्षा सचिव सहित वरिष्ठ सैन्य और असैनिक नेतृत्व के साथ सार्थक चर्चाएं कीं। इन वार्ताओं में प्रशिक्षण सहयोग, क्षमता निर्माण, रक्षा शिक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया।

रक्षा क्षमता निर्माण के प्रति भारत की सतत प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, जनरल द्विवेदी ने डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज (DSCSC) में अधिकारियों को संबोधित किया तथा आर्मी वॉर कॉलेज, बुट्टाला में अधिकारियों और प्रशिक्षुओं से संवाद किया। आर्मी वॉर कॉलेज में उन्होंने एक खेल परिसर की आधारशिला रखी और एंबुलेंस वैन औपचारिक रूप से सौंपे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने श्रीलंका सेना को 20 महिंद्रा स्कॉर्पियो वाहन और सिमुलेटर भी प्रदान किए, जिससे परिचालन क्षमता और प्रशिक्षण अवसंरचना को और मजबूती मिली।

थल सेना प्रमुख ने आईपीकेएफ युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की, भारतीय सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया और भारत–श्रीलंका के साझा इतिहास तथा गहरे जन-जन संबंधों को पुनः रेखांकित किया। उन्होंने श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा से भी मुलाकात की।

प्रमुख उपलब्धियां और निष्कर्ष

इस यात्रा के माध्यम से यूएई और श्रीलंका दोनों के साथ रक्षा एवं सैन्य-से-सैन्य सहयोग में उल्लेखनीय प्रगति हुई। रणनीतिक संवाद को मजबूती मिली, पेशेवर सैन्य शिक्षा के आदान-प्रदान का विस्तार हुआ तथा ठोस क्षमता निर्माण पहलों को आगे बढ़ाया गया। इससे आपसी विश्वास सुदृढ़ हुआ, इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ी और एक विश्वसनीय एवं भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में भारत की भूमिका और मजबूत हुई।

यह सफल यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र और पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और सहकारी सुरक्षा को बढ़ावा देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करती है, साथ ही मित्र राष्ट्रों के साथ दीर्घकालिक रक्षा साझेदारियों को और गहराई प्रदान करती है।

भारत और नीदरलैंड्स के बीच रक्षा साझेदारी को मजबूत करने के लिए मंत्रियों की बैठक

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री डेविड वैन वील से भेंट की, जिसमें दोनों देशों के बीच मजबूत और बढ़ती रक्षा साझेदारी को पुनः पुष्टि की गई। दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन के प्राथमिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने रणनीतिक साझेदारी के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में रक्षा सहयोग को विकसित करने के उद्देश्य से सैन्य-से-सैन्य सहयोग को बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दोहराया।

चर्चाओं में भारत और नीदरलैंड्स की साझा प्रतिबद्धता को उजागर किया गया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित होना चाहिए। मंत्रियों ने दोनों देशों के रक्षा उद्योगों को जोड़ने और विशेष रूप से निच तकनीक के क्षेत्र में निकट रक्षा साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और नीदरलैंड्स के भारत में राजदूत मेरिसा गेरार्ड्स की उपस्थिति में रक्षा सहयोग पर एक समझौता पत्र (Letter of Intent) का आदान-प्रदान किया गया।

दोनों देश तकनीकी सहयोग, प्लेटफ़ॉर्म और उपकरणों के सह-उत्पादन और सह-विकास के लिए रक्षा औद्योगिक रोडमैप विकसित करके पहचाने गए क्षेत्रों में रक्षा सहयोग की संभावनाओं का अन्वेषण करने का इरादा रखते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच जन-संपर्क संबंध बहुत मजबूत हैं, और नीदरलैंड्स में बड़ी भारतीय प्रवासी समुदाय एक जीवित सेतु के रूप में कार्य कर रही है, जो मित्रता के बंधनों को और मजबूत करती है।


भारत–यूएई संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डेज़र्ट साइक्लोन–II’ में भाग लेने यूएई रवाना हुआ भारतीय सेना का दल

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भारतीय सेना का एक दल संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के लिए रवाना हो गया है, जहाँ भारत–यूएई संयुक्त सैन्य अभ्यास डेज़र्ट साइक्लोन–II का दूसरा संस्करण 18 से 30 दिसंबर 2025 तक अबू धाबी में आयोजित किया जाएगा।

भारतीय दल में 45 सैन्यकर्मी शामिल हैं, जो मुख्य रूप से मैकेनाइज़्ड इन्फैंट्री रेजिमेंट की एक बटालियन से हैं। यूएई थलसेना की ओर से समान संख्या में सैनिक भाग ले रहे हैं, जिनका प्रतिनिधित्व 53 मैकेनाइज़्ड इन्फैंट्री बटालियन कर रही है।

इस अभ्यास का उद्देश्य शहरी वातावरण में संयुक्त प्रशिक्षण के माध्यम से भारतीय सेना और यूएई थलसेना के बीच अंतर-संचालन क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) को बढ़ाना और रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करना है। अभ्यास में संयुक्त राष्ट्र के अधिदेश के तहत उप-पारंपरिक अभियानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे दोनों सेनाएँ शांति स्थापना, आतंकवाद-रोधी और स्थिरता अभियानों में मिलकर कार्य कर सकें।

लगभग दो सप्ताह तक चलने वाले इस अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिक निर्मित क्षेत्रों में युद्ध, हेलिबोर्न ऑपरेशन, और विस्तृत मिशन योजना सहित विभिन्न सामरिक अभ्यासों में संयुक्त रूप से प्रशिक्षण लेंगे। इसके अलावा, शहरी अभियानों के संचालन के लिए मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAS) और काउंटर-UAS तकनीकों का भी एकीकरण किया जाएगा।

27–28 अक्टूबर 2025 को यूएई थलसेना कमांडर और 15–19 दिसंबर 2025 को यूएई प्रेसिडेंशियल गार्ड के कमांडर की सफल यात्राओं के बाद, डेज़र्ट साइक्लोन–II अभ्यास भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगा।

यह अभ्यास भारत और यूएई के बीच गहराते रणनीतिक साझेदारी और सैन्य कूटनीति को दर्शाता है तथा क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। यह अभ्यास दोनों सेनाओं के बीच पेशेवर संबंधों को और सुदृढ़ करेगा, सामरिक प्रक्रियाओं की आपसी समझ बढ़ाएगा और संयुक्त रूप से कार्य करने की क्षमताओं के विकास में योगदान देगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 में कहा: भारत वैश्विक संतुलन और जिम्मेदारी का भरोसेमंद साझेदार बन रहा है

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 में कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि, तकनीकी क्षमताएँ और सिद्धांत आधारित विदेश नीति ने इसे बदलते वैश्विक परिदृश्य में संतुलन और जिम्मेदारी की आवाज़ बना दिया है। उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और ग्लोबल साउथ के देश भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखते हैं।

मंत्री ने जोर दिया कि भारत सांस्कृतिक मूल्यों, जिम्मेदारी, रणनीतिक स्वतंत्रता और आत्मविश्वास के साथ आज के वैश्विक मुद्दों को आकार दे रहा है। उन्होंने कहा कि देश द्वारा अपनाई गई पारदर्शी नीतियाँ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित रुख भारत की विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।

 सुरक्षा चुनौतियाँ और रणनीतिक सुधार

राजनाथ सिंह ने आतंकवाद, सीमा-पार चरमपंथियों का समर्थन, मौजूदा स्थिति में हस्तक्षेप, समुद्री दबाव और सूचना युद्ध जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे समय में सुधार केवल विकल्प नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता हैं। ये सुधार संस्थाओं की अनुकूलन क्षमता बढ़ाते हैं, सशस्त्र बलों की चुस्ती और तत्परता में वृद्धि करते हैं, और देश को अपनी दिशा तय करने का आत्मविश्वास देते हैं।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सुरक्षा, आधुनिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:

  • सीमा और समुद्री अवसंरचना को मजबूत करना

  • सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण नई तकनीकों, प्लेटफ़ॉर्म और संरचनाओं के माध्यम से

  • खरीद प्रक्रियाओं में सुधार ताकि गति, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो

  • आत्मनिर्भरता के माध्यम से रक्षा उद्योग में नवाचार और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना

  • स्टार्टअप्स, डीप-टेक और R&D में निवेश

  • सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के हितों को प्राथमिकता

सशक्त और लचीला भारत

रक्षा मंत्री ने कहा कि क्षमता के साथ-साथ लचीलापन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भारतीय सशस्त्र बल देश की लचीलापन की सबसे मजबूत कड़ी हैं। उनका कौशल, तत्परता और अनुशासन भारत को पड़ोसी चुनौतियों से निपटने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में सक्षम बनाता है।

उन्होंने कहा, "भारत शांति और संवाद में विश्वास करता है, लेकिन जब देश और नागरिकों की सुरक्षा की बात आती है, तो कोई समझौता नहीं करता।"

सशस्त्र बलों का व्यापक योगदान

राजनाथ सिंह ने बताया कि सशस्त्र बल केवल सीमा की रक्षा तक सीमित नहीं हैं।

  • आपदा के समय नागरिक प्रशासन का समर्थन

  • समुद्री हितों की सुरक्षा

  • अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करना, संयुक्त अभ्यास और शांति संचालन के माध्यम से

  • पेशेवरता और विश्वास निर्माण

इसलिए सशस्त्र बलों में सुधार और आधुनिकीकरण केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि भारत के दीर्घकालिक भविष्य में निवेश हैं।

वैश्विक शांति और मानव कल्याण में योगदान

मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा किए जा रहे सुधार केवल अलग-थलग कार्य नहीं हैं, बल्कि भारत को एक ऐसा राष्ट्र बनाने में मदद कर रहे हैं जो वैश्विक शांति और मानव कल्याण को मजबूत करे।

उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति, सुरक्षा और विकास की दिशा में कदम बढ़ाने से विश्व को कई लाभ होंगे:

  1. स्थिर भारत, स्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था में योगदान देगा

  2. डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर समावेशी और पारदर्शी शासन का मॉडल प्रस्तुत करता है

  3. एथिकल एप्रोच से उभरती तकनीकों (AI, साइबर, अंतरिक्ष) में मानक स्थापित होंगे

  4. शांति, जलवायु और मानवतावादी मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता अंतरराष्ट्रीय सहयोग में नैतिक वजन जोड़ती है

डिजिटल और ग्रीन पहलाओं का शुभारंभ

EKAM: AI as a Service – iDEX ADITI 2.0

  • सशस्त्र बलों के लिए स्वदेशी AI समाधान

  • डेटा सुरक्षा और मिलिट्री ऑपरेशनल डोctrines के लिए कस्टमाइज्ड प्लेटफ़ॉर्म

Prakshepan

  • मिलिट्री क्लाइमेटोलॉजी ऐप

  • भूस्खलन, बाढ़ और हिमस्खलन की भविष्यवाणी

  • दूरदराज क्षेत्रों में नागरिक प्रशासन के लिए चेतावनी प्रणाली

AI Handbook for Military Leaders

  • कमांड, कंट्रोल, इंटेलिजेंस, युद्ध प्रणाली और ऑटोनोमस प्लेटफ़ॉर्म में AI का उपयोग

Digitalisation 3.0 – From Boots to Bytes & Towards AI Readiness

  • भारतीय सेना का तकनीकी रूपांतरण

  • 100 डिजिटल एप्लिकेशन, आत्मनिर्भरता और नवाचार पर जोर

ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड प्रोजेक्ट (Ladakh, Chushul)

  • 4,500 मीटर ऊँचाई पर

  • फॉसिल ईंधन DG सेट्स की जगह

  • वार्षिक 1,500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी

उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ

  • सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी

  • रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार

  • अन्य वरिष्ठ सैन्य, कूटनीतिक, शैक्षिक और तकनीकी प्रतिनिधि

चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 ने भारत की सुरक्षा चुनौतियों और तकनीकी सीमाओं पर रणनीतिक विचार-विमर्श के लिए एक मंच उपलब्ध कराया। यह दो दिवसीय कार्यक्रम 27 नवंबर 2025 से आयोजित हुआ।



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