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सीमाओं की मजबूती, विकास की रफ्तार: बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन बना भारत की रणनीतिक रीढ़

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नई दिल्ली- हिमालय की बर्फीली चोटियों से लेकर रेगिस्तानों की तपती रेत और घने जंगलों तक, जहां सामान्य पहुंच कठिन है, वहां बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने अपने परिश्रम और साहस की अमिट छाप छोड़ी है। वर्ष 1960 में स्थापित BRO आज केवल एक निर्माण एजेंसी नहीं, बल्कि भारत की सीमाओं का मूक प्रहरी और विकास का मजबूत स्तंभ बन चुका है।

‘श्रमेन सर्वं साध्यम्’ यानी कठोर परिश्रम से सब कुछ संभव है — इस मूल मंत्र के साथ BRO ने पिछले छह दशकों में देश की सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाई है।

रिकॉर्ड उपलब्धियां और बढ़ता बजट

अब तक BRO देश के सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में 64,100 किलोमीटर से अधिक सड़कों, 1,179 पुलों, 7 सुरंगों और 22 हवाई पट्टियों का निर्माण कर चुका है।
वित्त वर्ष 2024–25 में BRO ने ₹16,690 करोड़ का अब तक का सबसे अधिक व्यय दर्ज किया, जबकि 2025–26 के लिए ₹17,900 करोड़ का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। सरकार ने इसके योगदान को देखते हुए बजट आवंटन भी बढ़ाया है।

सीमावर्ती राज्यों में रणनीतिक परियोजनाएं

अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, पूर्वोत्तर राज्यों और राजस्थान तक BRO की परियोजनाएं राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ हैं।

  • लद्दाख में अटल टनल, डीएस-डीबीओ रोड और शिंकू ला टनल जैसी परियोजनाएं सालभर संपर्क सुनिश्चित कर रही हैं।

  • अरुणाचल प्रदेश में सेला टनल और नेचिफू टनल से तवांग क्षेत्र तक निर्बाध पहुंच संभव हुई है।

  • सिक्किम और जम्मू-कश्मीर में पुलों और सड़कों ने सैन्य और नागरिक आवाजाही को मजबूती दी है।

आपदा में भी सबसे आगे BRO

चाहे भूकंप हो, बाढ़ या हिमस्खलन — BRO आपदा के समय सबसे पहले टूटे संपर्क को बहाल करता है। ज़ोजिला, रोहतांग और सेला जैसे दर्रों को रिकॉर्ड समय में खोलना इसकी दक्षता का प्रमाण है। राहत और बचाव कार्यों में BRO की भूमिका जीवनरेखा साबित होती है।

पड़ोसी देशों में भी विकास का सेतु

BRO ने भूटान, म्यांमार, अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान में सड़कें, पुल और हवाई अड्डे बनाकर भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और कूटनीतिक साझेदारी को मजबूत किया है। अफगानिस्तान की दिलाराम–जरंज हाईवे परियोजना आज भी भारत की विकास कूटनीति का प्रतीक मानी जाती है।

भविष्य की तैयारी

आने वाले वर्षों में BRO सीमावर्ती इलाकों में 27,000 किलोमीटर से अधिक नई सड़कों और कई सुरंगों के निर्माण की योजना पर काम कर रहा है। ट्रांस-कश्मीर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट जैसे उपक्रम भारत की रणनीतिक तैयारी को नई ऊंचाई देंगे।

निष्कर्ष

छह दशकों से अधिक समय से BRO ने यह सिद्ध किया है कि कठिन से कठिन भूभाग भी मजबूत इरादों के आगे झुक जाता है। BRO केवल सड़कें नहीं बनाता, बल्कि सुरक्षा, विकास और विश्वास की नींव रखता है।
भारत की सीमाओं पर खड़ा यह संगठन आज भी उसी संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है — रास्ता मिलेगा, नहीं तो बनाया जाएगा।

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