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राष्ट्रपति का गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में संबोधन

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (15 जनवरी, 2026) पंजाब के अमृतसर स्थित गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की शोभा बढ़ाई और समारोह को संबोधित किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि औपचारिक शिक्षा पूर्ण करने के बाद विद्यार्थी विभिन्न दिशाओं में अपने जीवन की यात्रा प्रारंभ करेंगे। कुछ सरकारी या निजी क्षेत्र में सेवाएँ देंगे, कुछ उच्च शिक्षा या अनुसंधान का मार्ग अपनाएँगे, जबकि अनेक विद्यार्थी अपने स्वयं के उद्यम स्थापित करेंगे या शिक्षण के क्षेत्र में अपना करियर बनाएँगे। यद्यपि प्रत्येक क्षेत्र के लिए अलग-अलग योग्यताओं और कौशलों की आवश्यकता होती है, फिर भी कुछ गुण ऐसे हैं जो हर क्षेत्र में प्रगति के लिए समान रूप से आवश्यक और उपयोगी होते हैं। ये गुण हैं—सीखते रहने की निरंतर इच्छा और प्रवृत्ति; प्रतिकूल और कठिन परिस्थितियों में भी नैतिक मूल्यों, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के प्रति दृढ़ निष्ठा; परिवर्तन को अपनाने का साहस; असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ने का संकल्प; टीमवर्क और सहयोग की भावना; समय और संसाधनों का अनुशासित उपयोग; तथा ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के व्यापक हित के लिए करना। उन्होंने कहा कि ये गुण विद्यार्थियों को न केवल एक अच्छा पेशेवर बनाएँगे, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक भी बनाएँगे।

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को यह स्मरण रखने की सलाह दी कि शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र की सेवा का भी माध्यम है। उन्होंने कहा कि समाज ने उनकी शिक्षा में योगदान दिया है और वे समाज के प्रति ऋणी हैं। विकास की यात्रा में पीछे रह गए लोगों के उत्थान के लिए प्रयास करना इस ऋण को चुकाने का एक तरीका हो सकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने प्रौद्योगिकी विकास और उद्यमिता संस्कृति के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज कृषि से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तक और रक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक, युवाओं के लिए अनेक उद्यमी अवसर उपलब्ध हैं। हमारे उच्च शिक्षण संस्थान अनुसंधान को बढ़ावा देकर, उद्योग–शिक्षा सहयोग को सुदृढ़ बनाकर और सामाजिक रूप से प्रासंगिक नवाचारों को प्रोत्साहित करके इस प्रगति को और तेज कर सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि हाल के वर्षों में पंजाब में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की समस्या एक गंभीर चुनौती के रूप में उभरी है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव युवाओं पर पड़ रहा है। यह समस्या न केवल स्वास्थ्य, बल्कि समाज की सामाजिक, आर्थिक और नैतिक संरचना को भी प्रभावित कर रही है। एक स्वस्थ समाज के लिए इस समस्या का स्थायी समाधान आवश्यक है। इस संदर्भ में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय के सभी हितधारकों को युवाओं को सही दिशा में मार्गदर्शन देने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए अगले दो दशक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत का भविष्य ऐसे युवाओं पर निर्भर करता है जिनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण हो, जो जिम्मेदारी से कार्य करें और निःस्वार्थ भाव से सेवा करें। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों से आग्रह किया कि वे अपने विद्यार्थियों में इन मूल्यों का समावेश करें। साथ ही, उन्होंने युवाओं से भी आग्रह किया कि वे जिस भी पेशे को चुनें, उसमें उनका योगदान राष्ट्र को सशक्त बनाए और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करे।

राष्ट्रपति को यह जानकर प्रसन्नता हुई कि गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की स्थापना गुरु नानक देव जी की 500वीं जयंती के अवसर पर की गई थी और उनके उपदेश व मूल्य इस विश्वविद्यालय के मार्गदर्शक सिद्धांत हैं। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी की शिक्षाएँ हमारी साझा विरासत हैं और उनके विचार एवं आदर्श समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर हम समाज की अनेक समस्याओं का समाधान पा सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि गुरु नानक देव जी ने हमें यह शिक्षा दी कि समाज में महिलाओं को समान अधिकार दिए जाने चाहिए। उन्होंने यह देखकर प्रसन्नता व्यक्त की कि गुरु नानक देव विश्वविद्यालय गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं के अनुरूप महिला सशक्तिकरण के लिए प्रयासरत है, जो दीक्षांत समारोह में डिग्रियाँ और पदक प्राप्त करने वालों में छात्राओं की बहुलता से स्पष्ट होता है। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र के हित में यह आवश्यक है कि महिलाओं को पूर्ण आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के अवसर मिलें और इसके लिए सभी को प्रयासरत रहना चाहिए।


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