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युवाओं को ‘जॉब सीकर’ नहीं, ‘जॉब क्रिएटर’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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वर्ल्ड लीडर्स फोरम में छत्तीसगढ़ ने रखा युवा-केंद्रित अर्थव्यवस्था का रोडमैप

6 लाख विद्यार्थियों को एआई प्रशिक्षण, वर्ष 2030 तक 5 हजार स्टार्टअप का लक्ष्य

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वैश्विक मंच से निवेशकों को दिया छत्तीसगढ़ में निवेश का आमंत्रण

नई औद्योगिक नीति के बाद प्रदेश को मिले 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव

एआई, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी और फार्मा बनेंगे नई अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन

बस्तर में शांति के साथ खुल रहे विकास, पर्यटन, निवेश और रोजगार के नए द्वार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय वर्ल्ड लीडर्स फोरम में वैश्विक आर्थिक जगत की प्रमुख हस्तियों के समक्ष छत्तीसगढ़ की तेजी से बदलती आर्थिक तस्वीर, निवेश की व्यापक संभावनाओं और भविष्य के विकास का रोडमैप प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब अपनी पारंपरिक औद्योगिक और खनिज आधारित पहचान से आगे बढ़कर युवा शक्ति, नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक विनिर्माण पर आधारित नई अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल बड़े निवेश आकर्षित करना नहीं है, बल्कि निवेश को रोजगार, उद्यमिता, बेहतर आय और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य से जोड़ना है। छत्तीसगढ़ के युवा केवल रोजगार तलाशने वाले न रहें, बल्कि अपने नवाचार और उद्यमिता के बल पर दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करें, इसी सोच के साथ राज्य की नीतियों और योजनाओं को नया स्वरूप दिया जा रहा है।

फोरम में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन सहित भारत और विश्व की अनेक प्रमुख हस्तियां शामिल हो रही हैं।

6.31 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था, 11.57 प्रतिशत की विकास दर

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 में राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 6.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और आर्थिक वृद्धि दर 11.57 प्रतिशत रही है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय भी बढ़कर 1 लाख 79 हजार 244 रुपये हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के आर्थिक विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए विकास और जनकल्याण को समान प्राथमिकता दी गई है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के 1.72 लाख करोड़ रुपये के बजट में अधोसंरचना निर्माण, पूंजीगत व्यय और सामाजिक कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है। सड़क, रेल, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और औद्योगिक अधोसंरचना को मजबूत कर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।

नई औद्योगिक नीति के बाद 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए अनुकूल और पारदर्शी वातावरण तैयार करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30, वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़े सुधारों के माध्यम से निवेश प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 450 से अधिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है। इन सुधारों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है और नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद प्रदेश को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अब स्टील, सीमेंट और खनिज आधारित उद्योगों के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और फूड प्रोसेसिंग जैसे भविष्य के क्षेत्रों में निवेश के लिए नई संभावनाएं तैयार हुई हैं।

2030 तक 5 हजार स्टार्टअप, युवा बनेंगे रोजगार सृजक

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई अर्थव्यवस्था के केंद्र में युवा हैं। सरकार चाहती है कि प्रदेश के युवा केवल नौकरी की प्रतीक्षा करने वाले ‘जॉब सीकर’ नहीं, बल्कि ‘जॉब क्रिएटर’ बनें।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2030 तक 5 हजार स्टार्टअप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नए उद्यमियों को अपने अभिनव विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए 10 लाख रुपये तक सीड फंड सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के साथ युवाओं को तकनीक, नवाचार, कौशल और बाजार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलने से न केवल नए व्यवसाय खड़े होंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी निर्मित होंगे।

6 लाख विद्यार्थियों को एआई प्रशिक्षण, 50 से अधिक एआई आधारित सेवाएं

मुख्यमंत्री साय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को छत्तीसगढ़ के भविष्य के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि प्रदेश में 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख शासकीय कर्मचारियों को एआई प्रशिक्षण देने की योजना है। इसके साथ ही नागरिकों को बेहतर और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 50 से अधिक एआई आधारित सरकारी सेवाएं विकसित की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि एआई का उद्देश्य केवल तकनीकी बदलाव नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, युवाओं के लिए भविष्य के रोजगार और उद्यमिता के अवसर तैयार करना तथा सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाना है।

500 करोड़ का एआई मिशन, नवा रायपुर में एआई डेटा सेंटर पार्क

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 500 करोड़ रुपये के राज्य एआई मिशन पर काम किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 100 एआई डेटा लैब और 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे तथा 300 से अधिक एआई स्टार्टअप्स को सहयोग देने का लक्ष्य है।

नवा रायपुर में करीब 1,000 करोड़ रुपये की लागत से एआई डेटा सेंटर पार्क विकसित किया जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ को देश के उभरते डिजिटल और एआई इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण स्थान मिलेगा तथा युवाओं के लिए नई पीढ़ी के रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

बस्तर बनेगा छत्तीसगढ़ की नई अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बदलता हुआ बस्तर छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है। सुरक्षा की स्थिति में तेजी से हुए सुधार के बाद अब बस्तर में विकास, निवेश, रोजगार और उद्यमिता के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के करीब 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से 4,824 करोड़ रुपये की आजीविका उन्नयन योजना तैयार की जा रही है। बस्तर में 421 बंद स्कूलों को पुनः शुरू किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ते हुए 34 लाख से अधिक लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 3,513 करोड़ रुपये की जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना बस्तर के आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी। इससे बस्तर की औद्योगिक और व्यापारिक कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

बस्तर में पर्यटन और स्थानीय उत्पाद बनेंगे रोजगार का बड़ा माध्यम

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और सिरपुर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को विश्वस्तरीय पर्यटन मानचित्र से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

राज्य में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से इस क्षेत्र में निजी निवेश के साथ होटल, हॉस्पिटैलिटी, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के वनांचलों में मिलने वाले लघु वनोपज, औषधीय पौधों, मिलेट और कृषि उत्पादों की स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। लक्ष्य यह है कि छत्तीसगढ़ केवल कच्चे माल का उत्पादक न रहे, बल्कि यहीं तैयार उत्पाद बनें और उनकी अधिकतम आर्थिक मूल्य स्थानीय लोगों को मिले।

ग्रीन एनर्जी से जुड़ेगा छत्तीसगढ़ का विकास

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। अब पारंपरिक ऊर्जा में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखते हुए राज्य तेजी से ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

आने वाले वर्षों में प्रदेश में करीब 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश के 90 हजार से अधिक घर सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं। भिलाई में प्रदेश का पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट भी स्थापित किया गया है।

उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी का विस्तार राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ नए निवेश और ग्रीन जॉब्स के लिए भी महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

कच्चे माल से आगे बढ़कर वैल्यू एडिशन पर फोकस

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन राज्य की नई आर्थिक नीति का लक्ष्य केवल इन संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि प्रदेश के भीतर ही उनका अधिकतम वैल्यू एडिशन करना है।

इसी दिशा में नवा रायपुर और राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी अधोसंरचना विकसित की जा रही है। राजनांदगांव में प्रस्तावित स्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, 142 एकड़ का फार्मा पार्क तथा टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट पार्क भविष्य के औद्योगिक विकास को नई गति देंगे। कोरबा में लिथियम की खोज से प्रदेश में बैटरी निर्माण, ऊर्जा भंडारण और न्यू एनर्जी सेक्टर में भी नई संभावनाएं खुली हैं।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम से निवेश प्रक्रिया होगी और आसान

मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 लागू किया गया है। कम जोखिम वाले उद्योगों के प्रकरणों में निर्धारित समय में निर्णय नहीं होने पर स्वतः अनुमति का प्रावधान किया गया है।

इसके अंतर्गत आठ विभागों की 43 सेवाओं को शामिल किया गया है। इससे प्रदेश के लगभग 15 लाख एमएसएमई को लाभ मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को अनुमति और प्रक्रियाओं में अनावश्यक समय न लगे और वे अपना ध्यान उद्योग तथा रोजगार सृजन पर केंद्रित कर सकें।

संसाधन से नवाचार तक - नए छत्तीसगढ़ का निवेश मॉडल

मुख्यमंत्री साय ने वैश्विक निवेशकों के समक्ष छत्तीसगढ़ को ऐसे राज्य के रूप में प्रस्तुत किया, जहां प्राकृतिक संसाधन, पर्याप्त ऊर्जा, भूमि, कुशल और युवा मानव संसाधन, बेहतर होती कनेक्टिविटी, आधुनिक अधोसंरचना और निवेश-अनुकूल नीतियां एक साथ उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का अगला चरण संसाधन आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर ज्ञान, तकनीक, नवाचार और उद्यमिता आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण का है। निवेश इस परिवर्तन का माध्यम है, जबकि इसका अंतिम उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को बेहतर रोजगार, उद्यमिता और आय के अवसर उपलब्ध कराकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार  आर. कृष्णा दास, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद एवं राहुल भगत, विशेष सचिव एवं जनसम्पर्क आयुक्त रजत बंसल, आवासीय आयुक्त श्रुति सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

खिलाड़ियों का लंबा इंतजार खत्म, राज्य शासन ने जारी की उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची,20 खेलों के 156 खिलाड़ी शामिल

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रायपुर- राज्य के खिलाड़ियों का लंबा इंतजार आखिर आज खत्म हो गया। राज्य शासन ने बहुप्रतीक्षित उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची आज जारी कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा राजपत्र में इसका प्रकाशन कर दिया गया है। राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में नियुक्त करने की नीति, 2007 के प्रावधानों के तहत राजपत्र में इस सूची को अधिसूचित किया गया है।

विभाग द्वारा जारी सूची में 156 खिलाड़ियों को शामिल किया गया है, जिनमें 20 खेलों के खिलाड़ी शामिल हैं। विगत 30 जून को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समिति की बैठक में उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची को अनुमोदित कर राजपत्र में प्रकाशन के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा गया था। 

उच्च स्तरीय समिति की बैठक में उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव सहित समिति के सदस्यों ने वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 के लिए प्राप्त आवेदनों पर विस्तृत विचार-विमर्श तथा सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन को अंतिम स्वरूप प्रदान किया था। विभाग ने आवश्यक कार्यवाही पूर्ण कर आज राजपत्र में इसका प्रकाशन कर दिया है। 

खेल अधोसंरचना की मजबूती और खेलों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ का प्रावधान

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छत्तीसगढ़ में हॉकी लीग के आयोजन की तैयारी, छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के लिए 57 करोड़ का बजट

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों की दी जानकारी

रायपुर- उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने आज प्रेस-कॉन्फ्रेंस में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों, गतिविधियों, उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने, खेल अधोसंरचना की मजबूती, महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने तथा खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के तहत 57 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान रखा गया है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार और उप संचालक रश्मि ठाकुर भी प्रेस-कॉन्फ्रेंस में मौजूद थीं।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य में हॉकी लीग के आयोजन की तैयारी चल रही है। राज्य के खेल अकादमियों में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मुहैया कराने 14 प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए पटियाला भेजा गया है। उन्होंने बताया कि खेल गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए राज्य शासन ने 6 नए जिलों गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़-चौकी, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती में खेल अधिकारी के पदों का सृजन किया गया है। विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 44 प्रशिक्षकों, 4 जिला खेल अधिकारियों, 23 सहायक ग्रेड-3 और 8 वार्डन्स की भर्ती प्रक्रियाधीन है।

साव ने बताया कि राज्य में ज्यादा से ज्यादा बच्चे एवं युवा खेल के मैदानों में पहुंचे, इसके लिए सरकार सक्रियता और गंभीरता से काम कर रही है। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के समय केवल 4 करोड़ रुपए के बजट वाले खेल एवं युवा कल्याण विभाग का बजट चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 304 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। दूरस्थ आदिवासी वनांचलों को खेल की मुख्य धारा से जोड़ने की अभिनव पहल करते हुए पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक के आयोजन के साथ ही इस साल से सरगुजा ओलंपिक भी राज्य में शुरु किया गया है। देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शानदार मेजबानी ने छत्तीसगढ़ को देश के खेल मानचित्र में प्रतिष्ठित किया है।


शिक्षा से विकसित छत्तीसगढ़ तक: मुख्यमंत्री साय ने नीट क्वालीफाई विद्यार्थियों के साथ साझा किया भविष्य का रोडमैप

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रयास आवासीय विद्यालय के नीट क्वालीफाई विद्यार्थियों से किया प्रेरक संवाद

संवेदनशील डॉक्टर बनकर समाज और राष्ट्र की सेवा करने का दिया संदेश

मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों के सवालों का विस्तार से दिया जवाब:  शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, पर्यटन, रोजगार, सुशासन, नशामुक्ति और विकसित छत्तीसगढ़ के विजन पर रखे विचार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में प्रयास आवासीय विद्यालयों के नीट-2026 में सफल विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री ने सभी विद्यार्थियों का मुख्यमंत्री निवास में स्वागत करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि प्रदेश में संचालित प्रयास आवासीय विद्यालयों के गरीब एवं आदिवासी समुदाय के विद्यार्थियों ने नीट जैसी कठिन परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 17 प्रयास आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों का उद्देश्य दूरस्थ, आदिवासी एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की इस सफलता में उनके माता-पिता का आशीर्वाद, गुरुजनों का समर्पण और विद्यार्थियों की कठोर मेहनत समान रूप से शामिल है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों और शिक्षकों को भी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आप सभी भविष्य के डॉक्टर हैं। समाज में डॉक्टर का स्थान भगवान के बाद माना जाता है। भगवान हमें जन्म देते हैं और डॉक्टर जीवन बचाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल कुशल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, व्यवहारिक और मिलनसार डॉक्टर भी बनें। उन्होंने कहा कि मरीज के साथ अच्छा व्यवहार स्वयं कई बीमारियों के उपचार का माध्यम बन जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज, प्रदेश और देश की सेवा को अपना सर्वोच्च दायित्व मानने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज शिक्षा सहित हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अपनी संघर्षपूर्ण शिक्षा यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि आज विद्यार्थियों को शासन की ओर से पहले की तुलना में कहीं अधिक संसाधन और अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए प्रदेशभर में नालंदा परिसर संचालित किए जा रहे हैं तथा 34 नए नालंदा परिसर निर्माणाधीन हैं, जहां सातों दिन 24 घंटे ऑनलाइन एवं ऑफलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है। वहां विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास एवं भोजन की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि इसी वर्ष ट्रायबल यूथ हॉस्टल के 13 विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज निजी एवं शासकीय संस्थानों को मिलाकर 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। राज्य सरकार पांच नए मेडिकल कॉलेज भी स्थापित कर रही है, जिससे एमबीबीएस की 250 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी।

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए देशव्यापी 'नशा मुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान' का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज देशभर में करोड़ों लोगों ने नशा नहीं करने की शपथ ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह अभियान स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जो आगामी दो वर्षों तक संचालित होगा तथा इसमें माय भारत वालंटियर्स सहित बड़ी संख्या में युवा सहभागी बन रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि यदि युवा स्वस्थ, संस्कारित, परिश्रमी और नशामुक्त रहेंगे तो स्वस्थ छत्तीसगढ़ और स्वस्थ भारत का निर्माण संभव होगा। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति के शरीर और मस्तिष्क दोनों को प्रभावित करता है, अपराध को बढ़ावा देता है, पारिवारिक संबंधों को कमजोर करता है तथा पूरे परिवार को संकट में डाल देता है। उन्होंने युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने और समाज को भी इसके प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।

जगदलपुर प्रयास आवासीय विद्यालय की छात्रा नेल्सा के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा के संसाधनों को लगातार बढ़ा रही है। प्रयास आवासीय विद्यालय इसका एक उदाहरण हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिक परिवारों के बच्चे यदि विदेश में अध्ययन करना चाहते हैं तो उनका संपूर्ण व्यय राज्य सरकार वहन करती है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जिला मुख्यालयों एवं प्रमुख शहरों में 34 नालंदा परिसर निर्माणाधीन हैं, जहां सातों दिन 24 घंटे ऑनलाइन एवं ऑफलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि संसाधनों की कमी किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बने।

अंबिकापुर प्रयास विद्यालय की छात्रा यामिनी पैकरा के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नई शिक्षा नीति लागू की गई है, जिसके अंतर्गत रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है। शासकीय विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष विकसित करने के लिए स्मार्ट क्लास प्रारंभ की जा रही हैं, विद्यालयों का नवीनीकरण किया जा रहा है तथा शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब शासकीय विद्यालयों में भी निजी विद्यालयों की तरह पेरेंट्स-टीचर मीटिंग आयोजित की जा रही है। विशेष अवसरों पर अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा न्योता भोज जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि बच्चों को मध्यान्ह भोजन के अतिरिक्त पौष्टिक भोजन भी मिल सके। जवाहर उत्कर्ष योजना के माध्यम से बच्चों को निजी विद्यालयों में भी प्रवेश दिलाया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में शासकीय विद्यालय निजी विद्यालयों से भी बेहतर बनेंगे।

जगदलपुर की छात्रा दिलेश्वरी साहू ने युवाओं की राजनीति एवं प्रशासन में भागीदारी को लेकर प्रश्न पूछा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता। डॉक्टर बनकर भी समाज और राष्ट्र की बड़ी सेवा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने सपनों के अनुरूप नौकरी, कृषि, राजनीति, जनसेवा अथवा व्यापार जैसे किसी भी क्षेत्र का चयन करना चाहिए, लेकिन अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठा और संस्कार हमेशा सर्वोपरि होने चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति सेवा का एक प्रभावी माध्यम है और लोकतंत्र के माध्यम से समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। सेवा और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं।सरगुजा के छात्र समीर करकेट्टा के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ लगभग चार से पांच दशकों तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा। डबल इंजन सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से 31 मार्च 2026 को प्रदेश नक्सलमुक्त हुआ। उन्होंने कहा कि अब बस्तर और सरगुजा में पर्यटन की अपार संभावनाएं विकसित हो रही हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़ और रानीदाह जैसे प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के साथ अबूझमाड़ का विशाल वन क्षेत्र विश्वभर के पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व के 60 देशों के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों में बस्तर के धुड़मारास को स्थान दिया गया है। नई उद्योग नीति 2024-30 में पर्यटन क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है तथा होमस्टे योजना के माध्यम से जनजातीय परिवारों को पांच कमरों के मकान निर्माण के लिए ऋण एवं अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भोरमदेव मंदिर को भारत सरकार की प्रसाद योजना में शामिल किया गया है, जिसके लिए 168 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। साथ ही दंतेश्वरी, बम्लेश्वरी, चंद्रहासिनी, महामाया एवं बागेश्वरी शक्तिपीठों का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है। राम वन गमन पथ के माध्यम से भगवान श्रीराम से जुड़े स्थलों का विकास भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर में पर्यटन उद्योग के माध्यम से लाखों रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

महासमुंद के छात्र हेमंत यादव के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है। यह देश के मध्य में स्थित राज्य है और चारों महानगरों से बेहतर संपर्क रखता है। प्रदेश खनिज संपदा से समृद्ध है। देश के लगभग 19 से 20 प्रतिशत लौह अयस्क का उत्पादन छत्तीसगढ़ में होता है। यहां कोयला, बॉक्साइट, हीरा, सोना, लिथियम और यूरेनियम जैसे बहुमूल्य खनिज उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद सुरक्षा शिविरों को सेवा डेरे के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां स्कूल, अस्पताल और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। प्रदेश बिजली उत्पादन में सरप्लस राज्य है। वर्तमान में लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है तथा ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 3.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए हैं, जिनसे भविष्य में अतिरिक्त 30 हजार मेगावाट उत्पादन होगा। इससे रोजगार और राजस्व दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है तथा 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सिंचाई योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। बस्तर संभाग में देउरगांव और मटनार सिंचाई परियोजनाओं पर लगभग 1700 करोड़ रुपये तथा सिकासार-कोड़ार पाइपलाइन परियोजना पर लगभग 2500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को समृद्ध बनाने के लिए पशुपालन, मत्स्य पालन, हर्बल उत्पादन, राइस मिल, कोल्ड स्टोरेज तथा मूल्य संवर्धन आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। नई उद्योग नीति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य बनेगा।

सरगुजा के छात्र कोमल पटेल के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने कॉमनवेल्थ एवं ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय खेलों में बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में कॉमनवेल्थ गेम्स में छत्तीसगढ़ की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने वेटलिफ्टिंग में रजत पदक जीतकर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया एवं फिट इंडिया जैसे अभियान युवाओं को नई दिशा दे रहे हैं। जशपुर में 67 करोड़ रुपये की लागत से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तथा 60 करोड़ रुपये से आर्चरी अकादमी का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार ने खेल अलंकरण समारोह प्रारंभ किया है, जिसके तहत उत्कृष्ट खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता, प्रशस्ति पत्र तथा शासकीय सेवा का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की खेल नीति के अनुसार ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को 21 लाख रुपये, स्वर्ण पदक विजेता को 3 करोड़ रुपये, रजत पदक विजेता को 2 करोड़ रुपये तथा कांस्य पदक विजेता को 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।  उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तथा उत्कृष्ट खेल मिशन का भी उल्लेख किया।राजनांदगांव की छात्रा प्राची मलगामे के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने अपने जीवन संघर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि 10 वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। उन्होंने खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का कोई पूर्व निर्धारित लक्ष्य नहीं था, लेकिन जो भी दायित्व मिला, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में आज भी वे प्रदेश की साढ़े तीन करोड़ जनता के विश्वास पर खरा उतरने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कोई भी कार्य छोटा नहीं होता, केवल उसे पूरी ईमानदारी और समर्पण से करना चाहिए।

सरगुजा की शाहिना अंसारी के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वच्छता को जनजीवन का महत्वपूर्ण आधार माना था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से इसे जनआंदोलन का रूप दिया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2014 को लाल किले से दिए गए आह्वान के बाद देश में स्वच्छता के प्रति व्यापक जागरूकता आई है। गांव-गांव में शौचालय बने हैं और लोगों की आदतों में सकारात्मक परिवर्तन आया है। 

दुर्ग के छात्र निखिल कुमार ठाकुर के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। युवाओं में संस्कार, बड़ों के प्रति सम्मान, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्राचीन काल में भारत विश्वगुरु था और नालंदा तथा तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय विश्वभर के विद्यार्थियों को आकर्षित करते थे। लंबे समय तक विदेशी शासन के कारण यह परंपरा प्रभावित हुई, लेकिन आज भारत आर्थिक दृष्टि से विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर, मेक इन इंडिया, स्वदेशी वैक्सीन निर्माण और ब्रह्मोस जैसी उपलब्धियां नए भारत की शक्ति का परिचायक हैं। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को बताया कि हाल ही में प्रारंभ की गई सीएम हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्रदेशवासी अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे शासन तक पहुंचा सकते हैं। इस व्यवस्था में लगभग 8 हजार अधिकारियों को शिकायतों के निराकरण के लिए जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी भी अपने हॉस्टल अथवा शिक्षा से जुड़ी समस्याओं और सुझावों को इस माध्यम से दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रारंभ के डेढ़ माह में ही इस व्यवस्था को अच्छा प्रतिसाद मिला है और बिजली, पानी, नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन जैसी अनेक समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने अंत में बताया कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री डैशबोर्ड भी विकसित कर रही है, जिसके माध्यम से प्रदेश के सभी शासकीय संस्थानों को जोड़ा जाएगा। इस डैशबोर्ड के जरिए मुख्यमंत्री निवास से ही स्कूलों, अस्पतालों, शिक्षकों की उपस्थिति, राशन की उपलब्धता सहित विभिन्न सेवाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। उन्होंने कहा कि सुशासन, पारदर्शिता और तकनीक आधारित प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक बेहतर सेवाएं पहुंचाना राज्य सरकार का संकल्प है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एकलव्य के विद्यार्थियों का बढ़ाया उत्साह

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जनजातीय प्रतिभाओं के सपनों को नई उड़ान: मुख्यमंत्री साय ने नीट सफल विद्यार्थियों से किया आत्मीय संवाद

खूब पढ़िए, आगे बढ़िए और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भागीदार बनिए - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

जनजातीय युवाओं की नई पहचान बन रहे एकलव्य विद्यालय: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

एकलव्य की तरह लक्ष्य साधिए, सफलता निश्चित मिलेगी - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

अच्छा आचरण और सेवा भाव ही एक डॉक्टर की सबसे बड़ी पहचान है - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित एकलव्य संवाद कार्यक्रम में प्रदेश के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों से नीट-2026 में सफल विद्यार्थियों से आत्मीय चर्चा की। मुख्यमंत्री साय ने सभी विद्यार्थियों को उनकी उल्लेखनीय सफलता पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर जनजातीय समाज के लिए गर्व का विषय है। 

उन्होंने कहा कि एकलव्य विद्यालयों के विद्यार्थियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि अवसर, संसाधन और संकल्प मिलने पर प्रतिभा किसी भी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती।

सफलता का सबसे बड़ा मंत्र निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास - मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आपके विद्यालय का नाम 'एकलव्य' है और भारतीय इतिहास में एकलव्य का स्थान अद्वितीय है। उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य को अपना आदर्श मानकर कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर साधना और समर्पण के बल पर धनुर्विद्या में असाधारण दक्षता प्राप्त की। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उसी प्रकार आप भी अथक परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ निश्चय के साथ अपने जीवन का लक्ष्य प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि खूब पढ़िए, आगे बढ़िए और और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भागीदार बनिए।

मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों को संत कबीर के प्रसिद्ध दोहे "गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूँ पाय; बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय" का उल्लेख करते हुए गुरु के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि गुरु का स्थान ईश्वर से भी श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि गुरु ही हमें ज्ञान देकर जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने गुरुजनों का सदैव सम्मान करने और उनसे प्राप्त ज्ञान को समाज के हित में उपयोग करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत सरकार द्वारा देशभर में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं और छत्तीसगढ़ के लिए यह गर्व की बात है कि प्रदेश में  एकलव्य विद्यालय संचालित हैं, जहां जनजातीय समुदाय के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि एकलव्य की तरह लक्ष्य साधिए, सफलता निश्चित मिलेगी। उन्होंने कहा कि नीट जैसी कठिन राष्ट्रीय परीक्षा में सफलता प्राप्त करना आपके परिश्रम, आपके माता-पिता के आशीर्वाद और गुरुजनों के समर्पण का परिणाम है। उन्होंने इस अवसर पर सभी अभिभावकों और शिक्षकों को भी बधाई दी।

मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से कहा कि डॉक्टर का स्थान समाज में अत्यंत सम्माननीय होता है। भगवान हमें जन्म देते हैं, लेकिन डॉक्टर जीवन की रक्षा करते हैं और लोगों को नया जीवन प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल कुशल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, सहृदय और विनम्र डॉक्टर भी बनें। उन्होंने कहा कि मरीज के प्रति मधुर व्यवहार और संवेदनशीलता भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई बार डॉक्टर का अपनापन ही मरीज को मानसिक शक्ति प्रदान करता है।

शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन, विद्यार्थियों के लिए बढ़े अवसरएकलव्य संवाद के दौरान धमतरी जिले से आए छात्र राधेश्याम के प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। पहले विद्यालयों की संख्या सीमित थी और छात्रों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जबकि आज सरकार गांव-गांव तक शिक्षा पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों का व्यापक विस्तार किया गया है तथा प्रत्येक विकासखंड में महाविद्यालय स्थापित करने की दिशा में कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज निजी एवं शासकीय संस्थानों सहित 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं और पांच नए शासकीय मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किए जा रहे हैं, जिससे मेडिकल शिक्षा की सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में आईआईटी, ट्रिपल आईटी, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय सहित अनेक उच्च शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, शिक्षा ऋण तथा मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान जैसी अनेक सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली में स्थापित ट्राइबल यूथ हॉस्टल की क्षमता 50 से बढ़ाकर 200 सीट कर दी गई है, जहां विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास एवं भोजन की सुविधा के साथ यूपीएससी, मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि इस वर्ष ट्राइबल यूथ हॉस्टल से 13 विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेशभर में 34 नालंदा परिसर स्थापित किए गए हैं, जहां विद्यार्थी सप्ताह के सातों दिन चौबीसों घंटे ऑनलाइन और ऑफलाइन अध्ययन सामग्री के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए सरकार संसाधनों की कोई कमी नहीं आने देगी। उन्होंने बताया कि श्रम विभाग द्वारा श्रमिक परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रतिवर्ष दो लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है तथा विदेशों में अध्ययन करने वाले पात्र विद्यार्थियों का व्यय भी सरकार वहन करती है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076  सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल - मुख्यमंत्री

गरियाबंद जिले से आए विद्यार्थी अवधेश कुमार के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने हाल ही में प्रारंभ की गई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जानकारी देते हुए कहा कि यह सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से प्रदेश का कोई भी नागरिक अपनी समस्या, सुझाव अथवा शिकायत सीधे शासन तक पहुंचा सकता है। उन्होंने बताया कि इसके लिए  लगभग आठ हजार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि छात्रावास अथवा अध्ययन से संबंधित कोई समस्या हो तो वे भी हेल्पलाइन के माध्यम से शासन को अवगत करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि अल्प अवधि में ही इस व्यवस्था को व्यापक जनसमर्थन मिला है और लोग बिजली, पानी, नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन सहित अनेक समस्याओं के समाधान के लिए इसका प्रभावी उपयोग कर रहे हैं।

महासमुंद जिले की छात्रा मंजुला के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में मेडिकल शिक्षा हिंदी माध्यम में भी उपलब्ध कराई जा रही है। जिन विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा में कठिनाई होती है, उनके लिए हिंदी में पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं ताकि भाषा किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी की प्रगति में बाधा न बने।

राजनांदगांव जिले के विद्यार्थी देवानंद द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार छात्रवृत्ति, शिक्षा ऋण तथा मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, जिससे आर्थिक अभाव किसी भी विद्यार्थी के सपनों के बीच बाधा न बने।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा और विकास की नई इबारत

कांकेर जिले की छात्रा कशिश नेताम द्वारा दूरस्थ वनांचलों में शिक्षा सुविधाओं के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अंचल लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा, जिससे विकास कार्य बाधित हुए। लेकिन पिछले ढाई वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से नक्सलवाद समाप्त हुआ है। अब बस्तर में तेजी से सड़कें, विद्यालय, स्वास्थ्य संस्थान और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग में बंद पड़े विद्यालयों को पुनः संचालित किया जा रहा है तथा नए विद्यालय भी स्थापित किए जा रहे हैं। जावंगा एजुकेशन हब की तर्ज पर नारायणपुर जिले के जगरगुंडा और ओरछा में आधुनिक एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अपने क्षेत्र में उपलब्ध हो सके।

सुकमा जिले की छात्रा अंकिता के प्रश्न पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध करा रही है। इसलिए विद्यार्थियों का भी दायित्व है कि वे अपनी शिक्षा का लाभ प्रदेश और समाज को दें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक डॉक्टर के निर्माण में सरकार बड़े पैमाने पर संसाधन निवेश करती है और सरकार चाहती है कि प्रदेश के युवा चिकित्सक छत्तीसगढ़ में रहकर विशेषकर दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों के लोगों की सेवा करें। उन्होंने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत डॉक्टरों को अतिरिक्त वेतन और अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।

जनसेवा को पूजा मानकर पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करना प्रदान करता है ऊर्जा - मुख्यमंत्री

अपने सार्वजनिक जीवन और स्वास्थ्य संबंधी दिनचर्या पर विद्यार्थियों के प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पिछले लगभग 35 वर्षों से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि जनसेवा को पूजा मानकर पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करना ही उन्हें ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित योग, व्यायाम, संतुलित आहार और अनुशासित जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है और अनुशासित जीवन ही दीर्घकालिक सफलता का आधार है।

कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी विद्यार्थियों को पुनः शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपनी प्रतिभा, ज्ञान और संस्कार के बल पर समाज की सेवा करें तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें। उन्होंने कहा कि आपकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और आप सभी अपने उत्कृष्ट आचरण, सेवा भावना तथा समर्पण से प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेंगे।

छत्तीसगढ़ को खेल हब बनाने नई सोच और विजन के साथ करें काम - अरुण साव

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’अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खुद को अपडेट रखें कोच व खेल अधिकारी’

उप मुख्यमंत्री ने खेल विभाग के कार्यों की समीक्षा की

सभी खेल आयोजनों में मौजूद रहकर खेल प्रतिभाओं पर नजर रखने के दिए निर्देश

हर जिले में सभी खेलों के संघ बनाने कहा

रायपुर- उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने आज खेल विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों और प्रशिक्षकों को छत्तीसगढ़ में नई खेल संस्कृति विकसित करने तथा खेल हब बनाने नई सोच एवं विजन के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, आदिम जाति कल्याण, पुलिस और वन विभाग सहित विभिन्न विभागों के खेल आयोजनों में मौजूद रहकर कम उम्र की प्रतिभाओं को खोजने तथा उनके समुचित प्रशिक्षण व मार्गदर्शन की व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने इन आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए आयोजकों को आवश्यक सुझाव, सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान करने को भी कहा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार और संचालक तनुजा सलाम भी बैठक में शामिल हुईं।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बैठक में विभाग द्वारा आयोजित किए जाने वाले ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविरों के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ ही ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों एवं खेल संघों को इससे जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये प्रशिक्षण शिविर स्थानीय स्तर पर खेलों का वातावरण तैयार करने का बड़ा माध्यम है। उन्होंने खेल एवं खिलाड़ियों के लिए अच्छा वातावरण तैयार करने हर जिले में सभी खेलों के संघ बनाने को कहा। उन्होंने शासन द्वारा सहयोग प्रदान करने सभी खेल संघों एवं एशोसिएशन्स का पंजीयन कराने को भी कहा।

उप मुख्यमंत्री साव ने राज्य शासन द्वारा निर्मित खेल अधोसंरचनाओं के साथ ही खेलो इंडिया सेंटर्स की प्रशिक्षण सुविधाओं और प्रशिक्षकों के माध्यम से राज्य के खिलाड़ियों को तराशने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रतिभावान खिलाड़ियों की कम उम्र में ही पहचान कर उनके प्रशिक्षण एवं ग्रूमिंग के लिए अच्छी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सभी जिलों के खेल अधिकारियों को अपने-अपने जिले के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ ही अच्छी संभावनाओं वाले खिलाड़ियों की विस्तृत प्रोफाइल तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने खिलाड़ियों को बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का सहयोग लेने को भी कहा।

उप मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों में निर्माणाधीन खेल परिसरों, खेल मैदानों एवं स्टेडियमों के निर्माण के दौरान नियमित रूप से कार्यों का अवलोकन कर खिलाड़ियों की जरूरतों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने संबंधित जिले के लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता के नियमित संपर्क में रहकर कार्यों को तेजी से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। साव ने बैठक में मौजूद लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता वी.एस. कोरम को खेल अधोसंरचनाओं से जुड़े निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ जल्द से जल्द पूर्ण करने को कहा। उन्होंने सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को तेजी से पूर्ण कर अप्रारंभ कार्यों को यथाशीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने उप मुख्यमंत्री कार्यालय को हर महीने इन कार्यों की प्रगति की रिपोर्ट देने को भी कहा।

साव ने सभी खेल अधिकारियों को अपने-अपने जिले में विकासखंड शिक्षा अधिकारियों से मिलकर स्कूलों में प्रतिदिन खेलों का एक पीरिएड सुनिश्चत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों के माध्यम से हर गांव के सरपंच और सचिव की बैठक कर उन्हें गांवों में खेलों के लिए अच्छा माहौल तैयार करने के लिए प्रेरित करने को कहा। उप मुख्यमंत्री साव ने प्रशिक्षकों और खेल अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नई तकनीकों, खेल उपकरणों, नए नियमों और नियामक संस्थाओं से अपडेट रहने के निर्देश दिए। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संयुक्त संचालक प्रभाकर पाण्डेय, उप संचालक रश्मि ठाकुर और रवि अग्रवाल सहित सभी जिलों के खेल अधिकारी, वरिष्ठ प्रशिक्षक एवं प्रशिक्षक समीक्षा बैठक में मौजूद थे।

PM-SETU योजना को मिली बड़ी मंजूरी: देशभर के 200 आईटीआई क्लस्टरों में होगा विस्तार, ₹1,237.58 करोड़ के निवेश को स्वीकृति

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नई दिल्ली- कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की सचिव देबाश्री मुखर्जी की अध्यक्षता में आज प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (PM-SETU) की चौथी राष्ट्रीय संचालन समिति (National Steering Committee) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में महानिदेशक (DGT) दिलीप कुमार, संयुक्त सचिव मानसी सहाय ठाकुर, विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और अन्य प्रमुख हितधारक शामिल हुए।

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए समिति ने PM-SETU योजना को पायलट चरण से आगे बढ़ाकर देशभर के 200 चिन्हित आईटीआई क्लस्टरों में लागू करने की मंजूरी दे दी। अब राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी औद्योगिक क्षमता और तैयारियों के आधार पर इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू कर सकेंगे।

समिति ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले भी लिए। इनमें उद्योगों की अधिक भागीदारी, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) की भूमिका बढ़ाने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने जैसे कदम शामिल हैं।

बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि ₹1,237.58 करोड़ की स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को मंजूरी देना रही। इसके तहत देश के विभिन्न राज्यों में उद्योगों की साझेदारी से आईटीआई संस्थानों का आधुनिकीकरण किया जाएगा।

राज्यवार प्रमुख निवेश

ओडिशा

  • गवर्नमेंट आईटीआई बरबिल को हब बनाया गया है।

  • जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड एंकर इंडस्ट्री पार्टनर होगी।

  • प्रस्तावित निवेश: ₹240.21 करोड़

गुजरात

  • गवर्नमेंट आईटीआई सूरत को हब बनाया गया है।

  • आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया एंकर इंडस्ट्री पार्टनर होगी।

  • प्रस्तावित निवेश: ₹240.18 करोड़

तेलंगाना
तीन आईटीआई क्लस्टरों को मंजूरी दी गई है—

  • गवर्नमेंट आईटीआई ओल्ड सिटी – एंकर पार्टनर: अपोलो मेड-स्किल्स लिमिटेड (₹241.01 करोड़)

  • गवर्नमेंट आईटीआई पटानचेरू – एंकर पार्टनर: श्री सिद्धार्थ इंफ्राटेक एंड सर्विसेज (SSISPL) (₹275.24 करोड़)

  • गवर्नमेंट आईटीआई संगारेड्डी – एंकर पार्टनर: न्यूलैंड फाउंडेशन (₹240.94 करोड़)

PM-SETU योजना क्या है?

PM-SETU केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य देश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) को आधुनिक बनाना है। इस योजना के तहत उद्योगों के सहयोग से आईटीआई में आधुनिक मशीनें, बेहतर आधारभूत संरचना, भविष्य की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल मिल सके और रोजगार के अवसर बढ़ें।

स्टेयरिंग ने बदली जिंदगी: पुनर्वास केंद्र से निकलकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े सुकमा के युवा

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रायपुर- कभी भय और अनिश्चितता से घिरे जीवन जीने वाले सुकमा जिले के कई युवाओं के लिए आज नई सुबह की शुरुआत हो चुकी है। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास पहल और जिला प्रशासन के प्रयासों से ये युवा अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनके हाथों में अब बंदूक नहीं, बल्कि रोजगार और सम्मानजनक जीवन की नई उम्मीद है।

पुनेम ज्योति

सोड़ी सोमड़ी

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), सुकमा द्वारा पुनर्वासित युवाओं के लिए 30 दिवसीय एलएमवी (लाइट मोटर व्हीकल) ऑनर ड्राइवर प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। 13 जून से 12 जुलाई तक चल रहे इस प्रशिक्षण में 31 युवा भाग ले रहे हैं।

प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को केवल वाहन चलाना ही नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, यातायात नियम, रोड संकेतों की जानकारी और वाहन की सामान्य मरम्मत का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने पर जिला प्रशासन सभी प्रतिभागियों का ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा रहा है, ताकि वे आसानी से रोजगार या स्वरोजगार से जुड़ सकें।

इस प्रशिक्षण से जुड़ी सोड़ी सोमड़ी बताती हैं कि यहां हमें सुरक्षित तरीके से गाड़ी चलाना सिखाया जा रहा है। अब हमें विश्वास है कि हम अपने पैरों पर खड़े होकर सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगे। इसके लिए हम सरकार और प्रशासन के आभारी हैं।

इसी तरह पुनेम ज्योति कहती हैं कि रोजाना मिलने वाले प्रशिक्षण से हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है। ड्राइविंग सीखने के बाद हम रोजगार प्राप्त कर अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा सकेंगे।

कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन का उद्देश्य पुनर्वासित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। कौशल विकास, ड्राइविंग प्रशिक्षण और लाइसेंस जैसी सुविधाओं के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

यह पहल साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है। आज सुकमा के ये युवा आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों की ओर बढ़ रहे हैं और अपने साथ-साथ अपने परिवार के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं। यह बदलाव छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास और कौशल विकास योजनाओं की सार्थक सफलता का प्रेरक उदाहरण है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मेधावी विद्यार्थियों का किया सम्मान

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समर्पण, अनुशासन और निरंतर परिश्रम से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

राज्य एवं जिला स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों से किया आत्मीय संवाद, उज्ज्वल भविष्य के लिए दी शुभकामनाएं

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज सक्ती जिला कार्यालय में आयोजित मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह में राज्य एवं जिला स्तर पर बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं का सम्मान किया। मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं तथा उन्हें जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनके भविष्य के लक्ष्य, करियर की योजनाओं और रुचियों की जानकारी ली। विद्यार्थियों ने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने की इच्छा व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने उनके आत्मविश्वास और ऊँचे सपनों की सराहना करते हुए कहा कि समर्पण, अनुशासन, निरंतर अध्ययन और कठिन परिश्रम ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी बड़े लक्ष्य निर्धारित करते हैं और पूरी निष्ठा से उन्हें प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, सफलता स्वयं उनके कदम चूमती है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधनों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़े और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्रसेवा की भावना को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज सम्मानित हुए विद्यार्थी केवल अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे जिले और प्रदेश का गौरव हैं। उनकी सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगी और उत्कृष्टता की नई संस्कृति को आगे बढ़ाएगी।

इस अवसर पर प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहब, सांसद कमलेश जांगड़े सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर अमृत विकास तोपनो, पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

नशा मुक्त भारत सप्ताह 2026 में 1.31 करोड़ से अधिक लोगों की भागीदारी, हरिद्वार में राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम के साथ हुआ समापन

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17 जून से 26 जून 2026 तक आयोजित नशा मुक्त भारत सप्ताह के दौरान देशभर में 1.31 करोड़ से अधिक नागरिकों ने विभिन्न जागरूकता एवं जनभागीदारी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस अभियान के तहत नशा मुक्ति मित्र पंजीकरण अभियान, सेमिनार, वेबिनार, बच्चों एवं युवाओं के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, लघु नाटिकाएं, स्लोगन लेखन प्रतियोगिताएं, ई-प्रतिज्ञा, रैलियां, योग सत्र, हस्ताक्षर अभियान, निबंध लेखन और चित्रकला प्रतियोगिताएं सहित अनेक सामुदायिक गतिविधियों का आयोजन किया गया।

यह सप्ताह अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसका समापन 26 जून 2026 को देव संस्कृति विश्वविद्यालय (DSVV), हरिद्वार, उत्तराखंड में आयोजित राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम के साथ हुआ।

कार्यक्रम में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. चिन्मय पंड्या सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया।

4,000 लोगों ने निकाली नशा मुक्त रैली

कार्यक्रम के दौरान डॉ. वीरेन्द्र कुमार के नेतृत्व में नशा मुक्त रैली निकाली गई, जिसमें लगभग 4,000 नागरिकों ने भाग लेकर नशामुक्त भारत के राष्ट्रीय अभियान के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने उपस्थित लोगों को नशा मुक्ति की शपथ तथा गरिमापूर्ण वृद्धावस्था (Ageing with Dignity) की शपथ दिलाई और नशामुक्त एवं समावेशी समाज के निर्माण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

देशभर से हजारों लोगों की सहभागिता

कार्यक्रम में छात्रों, युवाओं, विभिन्न आध्यात्मिक संगठनों के स्वयंसेवकों, उत्तराखंड सरकार के प्रतिनिधियों तथा स्थानीय हितधारकों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इसके अलावा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों, विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों, अनुदान प्राप्त संस्थानों, नशा मुक्ति उपचार केंद्रों और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में शामिल होकर नशा मुक्त भारत के संकल्प को मजबूत किया।

दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा अखिल विश्व गायत्री परिवार के बीच दो समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर रहा।

ये समझौते—

  • नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) तथा

  • अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY)

के अंतर्गत किए गए।

इनका उद्देश्य देशभर में जन-जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता, नशीले पदार्थों की मांग में कमी तथा गरिमापूर्ण वृद्धावस्था के संदेश को बढ़ावा देकर वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को मजबूत करना है।

उत्कृष्ट योगदान देने वालों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, जिलों, विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और अनुदान प्राप्त संस्थानों द्वारा नशा मुक्त भारत अभियान के तहत किए गए कार्यों की सराहना की गई।

साथ ही, नशा मुक्ति मित्रों को समुदाय में जागरूकता फैलाने और लोगों को जोड़ने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

राज्य सरकारों द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हितधारकों को भी सम्मानित किया गया।

नशा मुक्त भारत के लिए जनभागीदारी का आह्वान

नशा मुक्त भारत सप्ताह 2026 और अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के सफल आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि भारत सरकार 'सम्पूर्ण सरकार और सम्पूर्ण समाज' (Whole-of-Government & Whole-of-Society) दृष्टिकोण के माध्यम से नशामुक्त समाज बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने सभी नागरिकों, शैक्षणिक संस्थानों, युवा संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और समुदायों से इस राष्ट्रीय जनआंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाने और "नशा मुक्त भारत, खुशहाल भारत" के लक्ष्य को साकार करने का आह्वान किया।

वंदे मातरम् शिविर का शुभारंभ: राष्ट्रीय एकता और युवा नेतृत्व को मिलेगा नया आयाम

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कोलकाता- भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अधीन मेरा युवा भारत (MY Bharat), पश्चिम बंगाल एवं अंडमान-निकोबार द्वीप समूह द्वारा आयोजित पहला सात दिवसीय ‘वंदे मातरम् शिविर’ ब्रेनवेयर यूनिवर्सिटी, बारासात (कोलकाता) में प्रारंभ हुआ। यह शिविर 24 से 30 जून 2026 तक आयोजित किया जा रहा है और इसका उद्देश्य राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ का स्मरण करना है। इस अमर रचना के स्रष्टा बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय हैं।

उद्घाटन समारोह में ब्रेनवेयर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. (डॉ.) संकर गंगोपाध्याय, MY Bharat पश्चिम बंगाल एवं अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के राज्य निदेशक देब कुमार चटर्जी, उपनिदेशक रिज़वी शहनाज़ रहमान, छात्र कल्याण अधिष्ठाता अनूप कुमार मैती तथा NSS अधिकारी माधब बंद्योपाध्याय उपस्थित रहे।

इस शिविर में गुजरात, मेघालय, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह से आए 150 युवा प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता का प्रतिनिधित्व करते हैं। “एक गीत, एक भावना, एक राष्ट्र” विषय पर आधारित यह पहल राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति तथा भारत के संवैधानिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने का प्रयास है। साथ ही, यह एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को सुदृढ़ करने हेतु विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच सांस्कृतिक संवाद और आपसी समझ को प्रोत्साहित करेगी।

शिविर के पहले दिन विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से आए प्रतिभागियों का पंजीकरण किया गया, जिसके बाद परिचयात्मक सत्र और आपसी संवाद आयोजित हुए। उद्घाटन समारोह की शुरुआत गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। ब्रेनवेयर यूनिवर्सिटी की NSS इकाई ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की सामूहिक प्रस्तुति दी।

समारोह का समापन NSS इकाई द्वारा ‘वंदे मातरम्’ विषय पर आधारित समूह नृत्य और राष्ट्रीय गीत के सामूहिक गायन के साथ हुआ। शाम को आयोजित सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी क्षेत्रीय परंपराओं की झलक प्रस्तुत की, जिसने भारत की “विविधता में एकता” की भावना को साकार किया।

सप्ताहभर चलने वाले इस शिविर के दौरान प्रतिभागी संवैधानिक एवं नागरिक मूल्यों, ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व, युवा नेतृत्व विकास, सांस्कृतिक आदान-प्रदान गतिविधियों तथा युवाओं से जुड़े समसामयिक विषयों पर आयोजित सत्रों में भाग लेंगे। यह कार्यक्रम जागरूक, जिम्मेदार और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित युवाओं के निर्माण के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

नई दिल्ली में ‘विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट 2026’ का आयोजन, युवाओं को मिलेगा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव

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नई दिल्ली- युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय 15 से 17 जून 2026 तक नई दिल्ली में ‘विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट 2026’ का आयोजन कर रहा है। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के नेतृत्व में आयोजित यह राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, नीति-निर्माण और संसदीय कार्यप्रणाली से जोड़ने की एक महत्वपूर्ण पहल है।

कार्यक्रम का राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक उद्घाटन 16 जून 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा किया जाएगा। पूर्व संस्करणों की सफलता को आगे बढ़ाते हुए यह पहल युवाओं को शासन और लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर प्रदान करेगी।

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अनुसार, विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसा जनआंदोलन है जो देश के युवाओं की ऊर्जा, विचारों और आकांक्षाओं को राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ता है। कार्यक्रम के दौरान तैयार किए गए संकल्प और सुझाव विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।

यह कार्यक्रम तीन चरणों में आयोजित किया गया है।

जिला स्तरीय चरण में देशभर के 757 नोडल विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में “आपातकाल के 50 वर्ष : भारतीय लोकतंत्र के लिए सीख” विषय पर व्यापक चर्चा आयोजित की गई। प्रत्येक जिले से शीर्ष पांच प्रतिभागियों को राज्य स्तरीय चरण में भाग लेने का अवसर मिला।

राज्य स्तरीय चरण विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं और प्रमुख सरकारी परिसरों में आयोजित किया गया, जहां “केंद्रीय बजट 2026 : युवा शक्ति संचालित बजट” विषय पर विचार-विमर्श हुआ। इन सत्रों की अध्यक्षता राज्य विधानसभाओं के अध्यक्षों और राज्यपालों ने की, जिससे युवाओं को क्षेत्रीय शासन व्यवस्था को समझने का अवसर मिला।

अब राष्ट्रीय चरण में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चयनित प्रतिभागी नई दिल्ली में एकत्रित हुए हैं। 15 से 17 जून तक चलने वाले इस चरण में कई महत्वपूर्ण गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

कार्यक्रम के तहत प्रत्येक राज्य की टीम का एक प्रतिनिधि “नारी शक्ति वंदन : समावेशिता और विकसित भारत 2047 को गति देने वाला अभियान” विषय पर तीन मिनट का संबोधन देगा।

इसके बाद प्रश्नकाल आयोजित होगा, जिसमें प्रतिभागी संसदीय परंपराओं के अनुरूप प्रश्न पूछेंगे और उत्तर देंगे। प्रत्येक प्रश्न और उत्तर के लिए तीन-तीन मिनट का समय निर्धारित किया गया है।

प्रतिभागियों के नेतृत्व और संवाद कौशल को निखारने के लिए एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व द्वारा वक्तृत्व कला और सार्वजनिक भाषण पर विशेष मास्टरक्लास भी आयोजित की जाएगी।

कार्यक्रम के दौरान युवा प्रतिनिधियों को प्रधानमंत्री संग्रहालय (PM Sangrahalaya) का भ्रमण कराया जाएगा, जहां वे भारत की राजनीतिक विरासत और नेतृत्व की यात्रा को समझ सकेंगे। साथ ही उन्हें नए संसद भवन का भी दौरा कराया जाएगा, जिससे वे देश के लोकतंत्र के सर्वोच्च संस्थान को निकट से देख सकें।

कार्यक्रम का समापन 17 जून 2026 को पुरस्कार समारोह के साथ होगा, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट 2026 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

मंत्रालय का मानना है कि यह पहल युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए एक नई पीढ़ी के जागरूक और जिम्मेदार नेतृत्व का निर्माण करेगी।

लद्दाख के सीमावर्ती गांवों में पहुंचीं रक्षा खडसे, युवाओं को बताया विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति

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लद्दाख- केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने 11 से 13 जून तक लद्दाख के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों का तीन दिवसीय दौरा सफलतापूर्वक पूरा किया। यह दौरा केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमावर्ती गांवों के विकास, युवा सशक्तिकरण और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

दौरे की शुरुआत लेह स्थित प्रसिद्ध हॉल ऑफ फेम स्मारक से हुई, जहां मंत्री ने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों का साहस, अनुशासन और देशभक्ति हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

12 जून को रक्षा खडसे ने सीमावर्ती गांव हेम्या का दौरा किया, जहां स्थानीय लोगों और MY Bharat के स्वयंसेवकों ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों और स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिन्होंने लद्दाख की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया।

इस दौरान वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से जुड़े युवाओं ने अपने अनुभव, आकांक्षाएं और गांवों के विकास के लिए सुझाव साझा किए। मंत्री ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के युवा देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

रक्षा खडसे ने आईटीबीपी के डीआईजी ताशी नामग्याल, डिप्टी कमांडेंट प्रियंजन, ग्राम सरपंच और स्थानीय कलाकारों को सामुदायिक विकास एवं राष्ट्रीय एकता में योगदान के लिए सम्मानित भी किया।

मंत्री ने आईटीबीपी शिविर का दौरा कर जवानों से बातचीत की और कठिन परिस्थितियों में उनकी सेवा, समर्पण और साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि आईटीबीपी केवल सीमा सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और स्थानीय समुदायों के विश्वास को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

दौरे के अंतिम दिन रक्षा खडसे ने प्रसिद्ध थिकसे मठ में प्रार्थना सभा में भाग लिया और देश की शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति के लिए प्रार्थना की।

अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के सीमावर्ती गांव अब देश के "पहले गांव" और विकास के प्रवेश द्वार बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेल, कौशल विकास, सामुदायिक भागीदारी और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमावर्ती गांवों के युवा केवल विकास के लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदार हैं। MY Bharat और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम जैसी पहलें उन्हें देश की प्रगति में सार्थक योगदान देने के अवसर प्रदान कर रही हैं।


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