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IFSCA–IRDAI ग्लोबल रीइंश्योरेंस समिट में बोले एम. नागराजू, “2047 तक ‘सभी के लिए बीमा’ के लक्ष्य में गिफ्ट सिटी की अहम भूमिका”

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मुंबई में आयोजित IFSCA–IRDAI–GIFT City ग्लोबल रीइंश्योरेंस समिट के तीसरे संस्करण को संबोधित करते हुए वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने कहा कि भारत का रीइंश्योरेंस (पुनर्बीमा) क्षेत्र परिवर्तनकारी विकास के दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि समिट की थीम “Bridging India Today, Insuring India Tomorrow – the India Evolution Roadmap” सरकार के “2047 तक सभी के लिए बीमा” के विजन से पूरी तरह मेल खाती है।

अपने संबोधन की शुरुआत में नागराजू ने IFSC गिफ्ट सिटी के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की और इसे भारत को वैश्विक रीइंश्योरेंस हब बनाने की दिशा में एक मजबूत मंच बताया। उन्होंने कहा कि बीमा और पुनर्बीमा क्षेत्र भारत की आर्थिक आकांक्षाओं को गति देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, विशेषकर तब जब भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है।

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए सचिव ने कहा कि 1.46 अरब से अधिक जनसंख्या वाला भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

वैश्विक बीमा परिदृश्य पर स्विस री सिग्मा रिपोर्ट (02/2025) का हवाला देते हुए नागराजू ने बताया कि 2024 में मजबूत प्रदर्शन के बाद वैश्विक बीमा उद्योग में प्रीमियम वृद्धि की रफ्तार धीमी हुई है। इसके बावजूद, 2024 में भारत नाममात्र प्रीमियम के आधार पर दुनिया का 10वां सबसे बड़ा बीमा बाजार रहा, जिसकी वैश्विक हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत है। भारत में बीमा पैठ 3.7 प्रतिशत रही, जिसमें जीवन बीमा 2.7 प्रतिशत और गैर-जीवन बीमा 1 प्रतिशत शामिल है, जो अभी भी बड़े अप्रयुक्त बाजार की संभावनाओं को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024–25 में भारतीय बीमा क्षेत्र ने 41.84 करोड़ पॉलिसियां जारी कीं, ₹11.93 लाख करोड़ का प्रीमियम संग्रह किया, ₹8.36 लाख करोड़ के दावे निपटाए और 31 मार्च 2025 तक ₹74.44 लाख करोड़ की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां दर्ज कीं। इसी अवधि में भारत का कुल रीइंश्योरेंस बाजार ₹1.12 लाख करोड़ का रहा।

नागराजू ने सरकार और बीमा नियामक द्वारा किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है। साथ ही सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत पॉलिसीधारकों की शिक्षा एवं संरक्षण कोष की स्थापना, डेटा संरक्षण कानून के अनुरूप प्रावधान और IRDAI की नियामक शक्तियों को मजबूत किया गया है।

अपने संबोधन के समापन में सचिव ने कहा कि IFSCA और गिफ्ट सिटी IFSC भारत को वैश्विक रीइंश्योरेंस हब बनाने में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने भारतीय बीमाकर्ताओं और पुनर्बीमाकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गिफ्ट सिटी के माध्यम से वैश्विक अवसरों का लाभ उठाएं और सभी हितधारकों के साथ मिलकर “2047 तक सभी के लिए बीमा” के लक्ष्य को साकार करें।

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