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आईएफएससीए अधिकारियों के लिए आईआईसीए में एक सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

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मानेसर: भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण के सहायक प्रबंधकों के लिए 13 से 18 अप्रैल 2026 तक एक सप्ताह का इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम अपने मानेसर परिसर में शुरू किया है।

यह कार्यक्रम दोनों संस्थाओं के बीच 20 फरवरी 2026 को गुजरात के गिफ्ट सिटी में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत आयोजित किया जा रहा है। इस समझौते पर आईआईसीए के महानिदेशक एवं सीईओ ज्ञानेश्वर कुमार सिंह और आईएफएससीए के अध्यक्ष के. राजारामन ने हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा पारिस्थितिकी तंत्र को क्षमता निर्माण, नीति अनुसंधान और ज्ञान साझेदारी के माध्यम से मजबूत करना है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य आईएफएससीए अधिकारियों को कॉर्पोरेट कानून, गवर्नेंस ढांचे, वित्तीय नियमों और सीमा-पार लेनदेन की व्यापक समझ प्रदान करना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन आईआईसीए के महानिदेशक ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में आईएफएससीए के गठन को भारत की नियामकीय दूरदर्शिता का उदाहरण बताते हुए इसे एक “चमत्कार” बताया। उन्होंने फिनटेक के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देने और विकसित भारत के विजन में आईएफएससीए की भूमिका पर जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को सेबी और पीएफआरडीए जैसे नियामक संस्थानों से जुड़े विभिन्न कानूनों और ढांचों की जानकारी भी दी जाएगी।

इस अवसर पर डॉ. नीरज गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया, जबकि डॉ. पायला नारायण राव ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।

प्रशिक्षण के तहत प्रतिभागी 16 और 17 अप्रैल को “संसद प्राइड” का भी दौरा करेंगे, जिससे उन्हें संसदीय कार्यवाही और विधायी प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी मिल सके।

इस कार्यक्रम में कॉर्पोरेट गवर्नेंस, सिक्योरिटीज रेगुलेशन, कॉर्पोरेट फाइनेंस, वित्तीय रिपोर्टिंग और सीमा-पार दिवालियापन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

यह पहल आईआईसीए की क्षमता निर्माण और नीति समर्थन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कार्यक्रम का समापन 18 अप्रैल 2026 को प्रमाणपत्र वितरण के साथ होगा।


भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने हेतु IFSCA और IICA के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

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भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा पारिस्थितिकी तंत्र (IFSC) को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (IICA) ने गिफ्ट सिटी, गुजरात स्थित IFSCA परिसर में एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

यह MoU 20 फरवरी 2026 को ज्ञानेश्वर कुमार सिंह, महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, IICA और के. राजारामन, अध्यक्ष, IFSCA द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों और विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया।

IFSCA और IICA की भूमिका

भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र के एकीकृत नियामक के रूप में IFSCA, कंपनियों अधिनियम, 2013 के व्यापक कानूनी ढांचे के तहत संचालित वित्तीय संस्थानों के बढ़ते पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी करता है, जिसमें IFSC में कार्यरत संस्थाओं को विशेष नियामकीय छूट भी प्राप्त है।

कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख थिंक टैंक के रूप में IICA, कॉर्पोरेट गवर्नेंस ढांचे को आगे बढ़ाने, नियामकीय क्षमता निर्माण और नीति परामर्श सेवाओं के लिए संस्थागत सहयोग प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

समझौता ज्ञापन का उद्देश्य

इस MoU के माध्यम से IFSCA और IICA के बीच क्षमता निर्माण, नीति अनुसंधान और ज्ञान साझेदारी के क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक संरचित ढांचा स्थापित किया गया है, ताकि GIFT-IFSC में नियामकीय प्रभावशीलता और कॉर्पोरेट गवर्नेंस मानकों को मजबूत किया जा सके।

प्रशिक्षण और नीति सहयोग

IICA, IFSCA और IFSC में पंजीकृत संस्थाओं को प्रशिक्षण और नीति समर्थन प्रदान करेगा ताकि वे विकसित हो रहे नियामकीय मानकों और वैश्विक गवर्नेंस प्रथाओं का पालन कर सकें।

IICA, IFSCA अधिकारियों के लिए ऑनलाइन प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, इंडक्शन और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा, जिनमें निम्नलिखित विषय शामिल होंगे:

  • कॉर्पोरेट और संबद्ध कानून

  • कॉर्पोरेट गवर्नेंस

  • पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस (ESG)

  • सीमा-पार लेनदेन और पुनर्गठन

प्रमुख वक्तव्य

ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने कहा कि IICA, IFSCA के साथ निकट सहयोग की अपेक्षा करता है ताकि एक मानकीकृत कॉर्पोरेट गवर्नेंस पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सके। उन्होंने बताया कि सहयोग के तत्काल प्रमुख क्षेत्र होंगे:

  • अनुकूलित क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का शुभारंभ

  • इंडक्शन और नेतृत्व विकास पहल

  • नीति अनुसंधान और परामर्श समर्थन

के. राजारामन ने IICA की पहल की सराहना करते हुए सहयोग को क्रियान्वित करने के लिए तत्काल कार्य योजना का उल्लेख किया। उन्होंने GIFT सिटी में प्रतिवर्ष संयुक्त कॉर्पोरेट गवर्नेंस कार्यक्रमों और IFSC क्षेत्राधिकार में स्थापित होने वाली कंपनियों के लिए विशेष पाठ्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया।


IFSCA–IRDAI ग्लोबल रीइंश्योरेंस समिट में बोले एम. नागराजू, “2047 तक ‘सभी के लिए बीमा’ के लक्ष्य में गिफ्ट सिटी की अहम भूमिका”

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मुंबई में आयोजित IFSCA–IRDAI–GIFT City ग्लोबल रीइंश्योरेंस समिट के तीसरे संस्करण को संबोधित करते हुए वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने कहा कि भारत का रीइंश्योरेंस (पुनर्बीमा) क्षेत्र परिवर्तनकारी विकास के दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि समिट की थीम “Bridging India Today, Insuring India Tomorrow – the India Evolution Roadmap” सरकार के “2047 तक सभी के लिए बीमा” के विजन से पूरी तरह मेल खाती है।

अपने संबोधन की शुरुआत में नागराजू ने IFSC गिफ्ट सिटी के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की और इसे भारत को वैश्विक रीइंश्योरेंस हब बनाने की दिशा में एक मजबूत मंच बताया। उन्होंने कहा कि बीमा और पुनर्बीमा क्षेत्र भारत की आर्थिक आकांक्षाओं को गति देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, विशेषकर तब जब भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है।

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए सचिव ने कहा कि 1.46 अरब से अधिक जनसंख्या वाला भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

वैश्विक बीमा परिदृश्य पर स्विस री सिग्मा रिपोर्ट (02/2025) का हवाला देते हुए नागराजू ने बताया कि 2024 में मजबूत प्रदर्शन के बाद वैश्विक बीमा उद्योग में प्रीमियम वृद्धि की रफ्तार धीमी हुई है। इसके बावजूद, 2024 में भारत नाममात्र प्रीमियम के आधार पर दुनिया का 10वां सबसे बड़ा बीमा बाजार रहा, जिसकी वैश्विक हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत है। भारत में बीमा पैठ 3.7 प्रतिशत रही, जिसमें जीवन बीमा 2.7 प्रतिशत और गैर-जीवन बीमा 1 प्रतिशत शामिल है, जो अभी भी बड़े अप्रयुक्त बाजार की संभावनाओं को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024–25 में भारतीय बीमा क्षेत्र ने 41.84 करोड़ पॉलिसियां जारी कीं, ₹11.93 लाख करोड़ का प्रीमियम संग्रह किया, ₹8.36 लाख करोड़ के दावे निपटाए और 31 मार्च 2025 तक ₹74.44 लाख करोड़ की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां दर्ज कीं। इसी अवधि में भारत का कुल रीइंश्योरेंस बाजार ₹1.12 लाख करोड़ का रहा।

नागराजू ने सरकार और बीमा नियामक द्वारा किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है। साथ ही सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत पॉलिसीधारकों की शिक्षा एवं संरक्षण कोष की स्थापना, डेटा संरक्षण कानून के अनुरूप प्रावधान और IRDAI की नियामक शक्तियों को मजबूत किया गया है।

अपने संबोधन के समापन में सचिव ने कहा कि IFSCA और गिफ्ट सिटी IFSC भारत को वैश्विक रीइंश्योरेंस हब बनाने में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने भारतीय बीमाकर्ताओं और पुनर्बीमाकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गिफ्ट सिटी के माध्यम से वैश्विक अवसरों का लाभ उठाएं और सभी हितधारकों के साथ मिलकर “2047 तक सभी के लिए बीमा” के लक्ष्य को साकार करें।

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