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भारत की GDP ग्रोथ 7.8% पर पहुंची, आंकड़ों की विश्वसनीयता पर उठे सवाल; सरकार ने दी सफाई

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नई दिल्ली- भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 में 7.8 प्रतिशत की मजबूत GDP ग्रोथ दर्ज की है। यह आंकड़ा बाजार के अनुमान और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुमान से बेहतर रहा। हालांकि, मजबूत आर्थिक वृद्धि के आंकड़े जारी होने के बाद अब इसकी गणना और विश्वसनीयता को लेकर आर्थिक जगत में बहस छिड़ गई है।

अनुमान से बेहतर रही आर्थिक वृद्धि

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। यह RBI के करीब 7 प्रतिशत के अनुमान और अर्थशास्त्रियों के 7.1 प्रतिशत के औसत अनुमान से अधिक है। इससे वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत मिला है।

इस वृद्धि में मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और सेवा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वित्तीय, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सेवाओं में भी मजबूत विस्तार दर्ज किया गया। घरेलू मांग और सरकारी खर्च ने भी आर्थिक गतिविधियों को समर्थन दिया।

GDP के आंकड़ों पर क्यों उठे सवाल?

GDP के 7.8 प्रतिशत आंकड़े सामने आने के बाद पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग समेत कुछ अर्थशास्त्रियों ने इसकी गणना पर सवाल उठाए। उनका तर्क है कि नई GDP सीरीज में पिछले साल के आंकड़ों में बड़े संशोधन किए गए हैं, जिससे मौजूदा वृद्धि दर की तुलना को लेकर सवाल पैदा होते हैं। पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने भी पूछा कि यदि अर्थव्यवस्था इतनी तेज गति से बढ़ रही है, तो इसका असर रोजगार, घरेलू निवेश और विदेशी निवेश जैसे संकेतकों में अधिक स्पष्ट रूप से क्यों नहीं दिखाई दे रहा।

एक अन्य प्रमुख मुद्दा GDP Deflator को लेकर है। आलोचकों का कहना है कि अप्रैल-जून तिमाही में कीमतों के समायोजन के लिए इस्तेमाल किया गया डिफ्लेटर अपेक्षाकृत कम रहा, जिससे वास्तविक GDP वृद्धि अधिक दिखाई दे सकती है। हालांकि, इस मुद्दे पर अर्थशास्त्रियों की राय एक जैसी नहीं है।

सरकार ने आंकड़ों का किया बचाव

आंकड़ों पर उठे सवालों के बाद केंद्र सरकार और सांख्यिकी मंत्रालय ने GDP गणना की नई पद्धति का बचाव किया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि GDP की नई सीरीज में आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया है। साथ ही डेटा स्रोतों और कीमतों के समायोजन की प्रक्रिया में भी बदलाव किए गए हैं।

सरकार का कहना है कि नए आंकड़े अधिक विस्तृत और आधुनिक डेटा पर आधारित हैं तथा संशोधन का उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों की वास्तविक तस्वीर को बेहतर तरीके से सामने लाना है। सरकार ने यह भी कहा कि अलग-अलग GDP सीरीज के आंकड़ों की सीधे तुलना करना सही तरीका नहीं है।

मजबूत ग्रोथ के बीच चुनौती भी बरकरार

जहां GDP के आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत दे रहे हैं, वहीं महंगे कच्चे तेल, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, रुपये पर दबाव और कमजोर वैश्विक मांग जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में विकास की गति कैसी रहती है, इस पर बाजार और अर्थशास्त्रियों की नजर रहेगी।

फिलहाल 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ भारत की आर्थिक क्षमता का सकारात्मक संकेत है, लेकिन आंकड़ों की गणना को लेकर शुरू हुई बहस ने पारदर्शिता और डेटा की विश्वसनीयता को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले महीनों में नए आंकड़े और संशोधन इस बहस को और स्पष्ट कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ ने लागू किया 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026', निवेश और उद्योगों को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने उद्योगों और निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल को अधिक सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026' लागू किया है। इस कानून का उद्देश्य उद्योगों की स्थापना और संचालन से जुड़ी सरकारी प्रक्रियाओं को तेज, सरल और समयबद्ध बनाना है, जिससे राज्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

नए कानून के तहत ट्रस्ट-बेस्ड (विश्वास आधारित) और रिस्क-बेस्ड (जोखिम आधारित) नियामक व्यवस्था अपनाई जाएगी। इसके तहत उद्योगों का वर्गीकरण उनके आकार, निवेश और जोखिम के आधार पर किया जाएगा। कम जोखिम वाले उद्योगों को बार-बार निरीक्षण और अनावश्यक कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी, जबकि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में आवश्यक निगरानी जारी रहेगी।

सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से उद्योगों को विभिन्न विभागों से समयबद्ध मंजूरी मिलेगी। निर्धारित समय सीमा के भीतर अनुमति नहीं मिलने पर कई मामलों में 'डीम्ड अप्रूवल' (स्वतः स्वीकृति) का प्रावधान भी लागू होगा। साथ ही, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को स्व-प्रमाणन (Self-Certification) जैसी सुविधाएं दी जाएंगी, जिससे अनुपालन लागत और प्रशासनिक बोझ कम होगा।

राज्य सरकार का मानना है कि यह कानून पारंपरिक निरीक्षण-आधारित व्यवस्था की जगह पारदर्शी, जवाबदेह और निवेशक-अनुकूल शासन प्रणाली को बढ़ावा देगा। इससे घरेलू और विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा तथा औद्योगिक परियोजनाओं को तेजी से गति मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ में विनिर्माण, एमएसएमई, कृषि-आधारित उद्योग, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य उभरते क्षेत्रों में निवेश को नई रफ्तार मिल सकती है। इससे प्रदेश के औद्योगिक विकास के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को देश के सबसे निवेश-अनुकूल राज्यों में शामिल करना है। नया ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है, जो उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाकर आर्थिक विकास को नई गति देने में अहम भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 8 जुलाई को करेंगे डूमरतराई के नवीन थोक बाजार का नामकरण एवं लोकार्पण

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आधुनिक अधोसंरचना से व्यापार, रोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगी नई गति

प्रदेशवासियों एवं व्यापारियों को मिलेगा आधुनिक, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय व्यापारिक परिसर

रायपुर- छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा रायपुर के डूमरतराई में विकसित अत्याधुनिक नवीन थोक बाजार का नामकरण एवं लोकार्पण समारोह अब 8 जुलाई 2026 को आयोजित किया जाएगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इस आधुनिक व्यापारिक परिसर का लोकार्पण एवं नामकरण कर इसे प्रदेशवासियों और व्यापारियों को समर्पित करेंगे। समारोह की अध्यक्षता आवास एवं पर्यावरण, वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री ओ.पी. चौधरी करेंगे।

उल्लेखनीय है कि यह कार्यक्रम पूर्व में 5 जुलाई 2026 को प्रस्तावित था, किन्तु अपरिहार्य कारणों से इसे स्थगित कर दिया गया था। अब यह समारोह 8 जुलाई को आयोजित किया जा रहा है।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर लगभग 36 एकड़ क्षेत्र में विकसित यह अत्याधुनिक थोक बाजार व्यापारियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। परिसर में चौड़ी सड़कें, पर्याप्त पार्किंग, सुगम यातायात व्यवस्था, सुव्यवस्थित व्यापारिक अवसंरचना तथा आवश्यक नागरिक सुविधाओं का समुचित प्रावधान किया गया है। यह बाजार रायपुर सहित पूरे प्रदेश के व्यापारिक विकास को नई दिशा देने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करेगा।

डूमरतराई व्यापारिक परिसर का विकास चरणबद्ध रूप से किया गया है। प्रथम चरण में लगभग 76 करोड़ रुपये की लागत से 536 व्यावसायिक दुकानें एवं हॉल निर्मित किए गए, जिससे व्यापारियों को आधुनिक एवं सुव्यवस्थित व्यावसायिक सुविधाएँ उपलब्ध हुईं। वहीं द्वितीय चरण में लगभग 145 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति से विभिन्न श्रेणियों की 154 स्वतंत्र व्यावसायिक दुकानों का निर्माण किया गया है। दोनों चरणों के पूर्ण होने के साथ प्रदेश को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित एवं समग्र थोक व्यापारिक परिसर की सौगात मिलेगी।

यह नवीन थोक बाजार प्रदेश के व्यापार, निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा। साथ ही रोजगार के नए अवसरों का सृजन करते हुए रायपुर को एक सुदृढ़ एवं सुव्यवस्थित व्यापारिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। व्यापारियों की वर्षों पुरानी आवश्यकता को पूरा करने वाली यह परियोजना उन्हें सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक व्यावसायिक वातावरण उपलब्ध कराएगी।

लोकार्पण एवं नामकरण समारोह में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक राजेश मूणत, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा एवं सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव, रायपुर महापौर मीनल चौबे, जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष नवीन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, व्यापारी, गणमान्य नागरिक तथा मंडल के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहेंगे।

डूमरतराई का नवीन थोक बाजार छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की गुणवत्ता, नवाचार एवं जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। यह परियोजना आने वाले वर्षों में प्रदेश के व्यापार, निवेश, रोजगार सृजन तथा समग्र आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

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पंचायतों के वित्तीय सशक्तिकरण एवं ग्रामीण विकास के विभिन्न पहलुओं पर हुई चर्चा

रायपुर- नई दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा शामिल हुए। कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर ग्रामीण स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधनों के आवंटन, पंचायतों की वित्तीय क्षमता को सुदृढ़ करने तथा 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

कार्यशाला में स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता, बेहतर सेवा प्रदायगी, पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रदर्शन आधारित अनुदान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में सहभागिता करते हुए पंचायतों एवं ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर आयोजित प्रस्तुतियों और विचार-विमर्श का अवलोकन किया।

छत्तीसगढ़ को ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 11,664 करोड़ रुपए का अनुदान

कार्यशाला के दौरान 16वें वित्त आयोग द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies) के लिए प्रस्तावित अनुदान की जानकारी साझा की गई। आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि में छत्तीसगढ़ को कुल 11,664 करोड़ रुपए का अनुदान प्राप्त होगा। इसमें 9,331 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट तथा 2,333 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट शामिल हैं। वहीं, ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए अंतर-राज्यीय अनुदान वितरण में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी 2.68 प्रतिशत निर्धारित की गई है।

वर्षवार आवंटन के अनुसार 2026-27 में राज्य को 1,498 करोड़ रुपए की बेसिक ग्रांट मिलेगी। 2027-28 में 1,663 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 248 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट, 2028-29 में 1,846 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 624 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट, 2029-30 में 2,049 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 693 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट तथा 2030-31 में 2,275 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 768 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट का प्रावधान किया गया है।

यह अनुदान ग्राम पंचायतों एवं अन्य ग्रामीण स्थानीय निकायों के माध्यम से आधारभूत अधोसंरचना के विकास, नागरिक सुविधाओं के विस्तार तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

त्रिपुरा के उदयपुर में क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रम: 4,577 लाभार्थियों को ₹105.40 करोड़ के ऋण वितरित

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26 मई 2026 को त्रिपुरा के गोमती जिले के उदयपुर में एक क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता वित्तीय सेवा विभाग (DFS), वित्त मंत्रालय के सचिव एम. नगराजू ने की।

इस कार्यक्रम के दौरान उदयपुर में विभिन्न बैंकों द्वारा 4,577 लाभार्थियों को ₹105.40 करोड़ के ऋण वितरित किए गए। NABARD और SIDBI ने विभिन्न परियोजनाओं के लिए ₹2 करोड़ से अधिक की मंजूरी की घोषणा की। बैंकों ने स्कूलों और आंगनवाड़ियों के बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए CSR गतिविधियों के तहत भी सहायता स्वीकृत की। MSME क्षेत्र को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय उधारकर्ताओं को समर्थन देने के लिए उदयपुर में SIDBI की एक क्लस्टर डेवलपमेंट शाखा का उद्घाटन किया गया, जबकि DFS द्वारा “Financial Inclusion 2.0 Vision Document” भी जारी किया गया।

कार्यक्रम में वित्तीय समावेशन पर बोलते हुए सचिव (DFS) ने कहा कि वित्तीय समावेशन केवल बैंक खाते खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना है। उन्होंने ऋण के उत्पादक उपयोग और उद्यमिता आधारित रोजगार सृजन के महत्व पर जोर दिया और लाभार्थियों से अपील की कि वे ऋण का सही उपयोग करें ताकि उनके खाते NPA (Non-Performing Assets) में न बदलें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी और बैंकिंग योजनाओं के तहत सहायता प्राप्त करने वाले लाभार्थियों को व्यवहार्य आर्थिक गतिविधियाँ स्थापित करनी चाहिए और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

इस कार्यक्रम में त्रिपुरा के वित्त सचिव प्रशांत गोयल, SBI के MD अश्विनी कुमार तिवारी, PNB के ED एम. परमसिवम, NABARD के DMD जी. रावत सहित DFS, राज्य सरकार, जिला प्रशासन और बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इकोनॉमी के विकास के लिए वैल्यू एडिशन आधारित उत्पादन करना होगा -राज्यपाल डेका

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वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई फसल किस्मों और आधुनिक तकनीकों से किसानों को मिल रहा है लाभ - मुख्यमंत्री साय

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 11 वें दीक्षांत समारोह मे शामिल हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री

1880 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, 13 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक मिले

रायपुर- छत्तीसगढ़ की लगभग 80 प्रतिशत अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। आज भूमि लगातार संकुचित होती जा रही है। अतएव हमें कम जमीन में ज्यादा से ज्यादा उत्पादन के लिए कार्य करना होगा। अर्थव्यवस्था के तेजी से विकास के लिए वैल्यू एडिशन उत्पादन आज की महती आवश्यकता है।

राज्यपाल रमेन डेका एवं कुलाधिपति इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर ने विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में यह बात कही। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विशिष्ट अतिथि के रूप में कृषि मंत्री राम विचार नेताम और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के पूर्व निदेशक और प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह उपस्थित थे ।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के सभागार में आयोजित भव्य एवं गरिमामय दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को पदक एवं उपाधियां वितरित की गई। विभिन्न संकायों में प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को 13 स्वर्ण, 7 रजत एवं 2 कांस्य पदक सहित 128 शोधार्थियों को पी.एच.डी, 518 विधार्थियों को स्नातकोत्तर और 1234 विधार्थियों को स्नातक उपाधि प्रदान की गई।

कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यपाल रमेन डेका ने इन उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह छात्र जीवन का एक बहुत बड़ा अवसर होता है। यह केवल डिग्री प्राप्त करने का दिन नही बल्कि भविष्य की शुरूआत का प्रतीक है। जब यह विश्वविद्यालय स्थापित हुआ था तब यहां केवल दो या तीन स्ट्रीम ही उपलब्ध थी। लेकिन समय के साथ शिक्षा और अवसरों का विस्तार हुआ है। 

राज्यपाल डेका ने कहा कि आज कृषि परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। अब यह विज्ञान तकनीकी, नवाचार और उद्यमिता से संचालित हो रही है। विश्वभर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, उपग्रह मानचित्र, सटीक कृषि जलवायु अनुकूल तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी और डेटा विश्लेषण का उपयोग बढ़ रहा है। 

भारत भी तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। ड्रोन द्वारा उर्वरक एवं कीटनाशक छिड़काव, डिजिटल उपकरणों से मृदा स्वास्थ्य निगरानी, मोबाइल ऐप द्वारा किसान परामर्श और ई-नाम बाजार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल रहे हैं। किसानों और युवाओं को भी आधुनिक और उन्नत खेती की ओर बढ़ना चाहिए। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। लेकिन अब हमें बासमती जैसे उच्च गुणवत्ता वाले धान के उत्पादन पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे कार्पोरेट कंपनियों द्वारा खरीद आसान होगी और किसानों को बेहतर लाभ मिल सकेगा। हाइड्रोपोनिक्स और प्राकृतिक खेती के लिए भी भविष्य में बड़ी संभावनाएं है। विद्यार्थियों को भी कृषि के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए।  

 राज्यपाल डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भूमि और जल संरचना कृषि के लिए अनुकूल है। यहां पानी आसानी से नीचे नहीं जाता जिससे उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलती है। सही तकनीक और सोच के साथ कृषि को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है तथा वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई फसल किस्मों और आधुनिक तकनीकों से किसानों को बड़ा लाभ मिल रहा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए खेती को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन,फल-सब्जी और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार, कृषि उपकरणों की उपलब्धता तथा मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने विद्यार्थियों से ड्रोन, एआई और डिजिटल तकनीकों को खेती से जोड़कर किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सेतु बनने का आव्हान किया।कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्रदेश में कृषि को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचार किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान की सबसे ज्यादा प्रजातियां है। सुगन्धित धान के लिए हमारा राज्य जाना जाता है। फल, फूल और मसाले की भी अपार संभावनाएं यहां है। उन्होंने विद्यार्थियों से शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे आने का आग्रह करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के ज्ञान का लाभ छत्तीसगढ़ को मिलेगा।

समारोह में दीक्षांत भाषण डॉ. अशोक कुमार सिंह ने दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने दीक्षांत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया उन्होंने विश्वविद्यालय की गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर विस्तृत प्रकाश डाला। साथ ही उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को दीक्षा उपदेश दिया। आभार प्रदर्शन कुलसचिव द्वारा किया गया। दीक्षांत समारोह में क्षेत्र के विधायक पद्मश्री अनुज शर्मा, विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलपति, विश्वविद्यालय के प्रबंध मण्डल, विद्या परिषद तथा प्रशासनिक परिषद के सदस्यगण, प्राध्यापक, वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय के अधिकारी, उपाधि तथा पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी तथा उनके पालकगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से जापान के प्रतिनिधिमंडल की सौजन्य मुलाकात: निवेश, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विस्तार को लेकर हुई विस्तृत चर्चा

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जापान से आए प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। 

मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत करते हुए छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक विकास और तकनीकी सहयोग के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। 

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर अपने जापान प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार की उद्योगोन्मुखी और निवेश प्रोत्साहनकारी नीतियों के कारण छत्तीसगढ़ वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जापान तकनीकी दृष्टि से अग्रणी देश है और वहां की उन्नत विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के निवेश और सहयोग से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

जापान से आए प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ सरकार की नई औद्योगिक नीति की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में निवेश के लिए अनुकूल और पारदर्शी वातावरण तैयार हुआ है, जिससे उद्योगों के विस्तार के लिए बेहतर संभावनाएं उपलब्ध हो रही हैं। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश में अपने निवेश को और बढ़ाने की इच्छा भी व्यक्त की।

इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, एफसेनल के डायरेक्टर युकीहिरो मोमोसे, कोनोइके ट्रांसपोर्ट के एक्जीक्यूटिव ऑफिसर तोशीहीरो फूजीवारा, एफएसएनएल के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील कुमार दीक्षित तथा हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के पूर्व सीएमडी के. डी. दीवान उपस्थित थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने CPES और IES अधिकारियों को किया संबोधित, राष्ट्र निर्माण में योगदान पर दिया जोर

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केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा (CPES) और भारतीय आर्थिक सेवा (IES) के अधिकारियों ने आज (27 मार्च 2026) राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे भारत की प्रगति के अग्रिम पंक्ति में खड़े हैं और उनके निर्णय एक मजबूत तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी नीतियों के निर्माण और सुधारों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिससे समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को समर्पण और जुनून के साथ कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में कई चुनौतियाँ आएंगी, लेकिन ये चुनौतियाँ राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने के अवसर भी प्रदान करती हैं। उन्होंने जिज्ञासा, नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता और निरंतर सीखने की भावना बनाए रखने पर जोर दिया।

केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा (CPES) के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बिजली औद्योगिक विकास, नवाचार, बेहतर जीवन स्तर और देश की समग्र सामाजिक-आर्थिक प्रगति की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि CPES ने विद्युत उत्पादन, संचरण और वितरण के क्षेत्रों में योजना और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, साथ ही बिजली प्रणालियों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि सुदृढ़ इंजीनियरिंग प्रथाओं और नवाचार के माध्यम से देश की ऊर्जा संरचना को मजबूत करने में CPES अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

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भारतीय आर्थिक सेवा (IES) के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक और घरेलू परिदृश्य में आर्थिक योजना और उसके क्रियान्वयन की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि IES अधिकारियों की भूमिका सतत विकास सुनिश्चित करने, महंगाई को नियंत्रित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, असमानताओं को कम करने और जटिल आर्थिक परिस्थितियों में अर्थव्यवस्था का मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने अधिकारियों को यह याद रखने की सलाह दी कि हर आंकड़े के पीछे एक मानवीय कहानी होती है। किसी भी आर्थिक नीति का वास्तविक माप केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि उसके परिणामों में होता है—जो लोगों के जीवन में सुधार लाए, विशेषकर सबसे कमजोर वर्गों के लिए।

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23 मार्च 2026 को क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स की 7वीं नीलामी शुरू करेंगे केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी

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नई दिल्ली- केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी और राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे 23 मार्च 2026 को क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की 7वीं नीलामी (7th Tranche) की शुरुआत करेंगे।

देश के आर्थिक विकास और खनिज सुरक्षा के लिए क्रिटिकल मिनरल्स बेहद महत्वपूर्ण हैं। वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों की ओर बढ़ते रुझान के कारण लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE), टंगस्टन, वैनेडियम, टाइटेनियम जैसे खनिजों की मांग तेजी से बढ़ी है। इनकी सीमित उपलब्धता और कुछ क्षेत्रों में केंद्रित भंडार वैश्विक सप्लाई चेन के लिए चुनौती बन रहे हैं।

इन खनिजों के महत्व को देखते हुए भारत सरकार ने 17 अगस्त 2023 को खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) में संशोधन किया, जिसके तहत 24 खनिजों को क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल घोषित किया गया। इस संशोधन से केंद्र सरकार को इन खनिजों के लिए माइनिंग लीज और कंपोजिट लाइसेंस की नीलामी करने का अधिकार मिला है। इन नीलामियों से होने वाली आय संबंधित राज्य सरकारों को प्राप्त होती है।

अब तक खान मंत्रालय ने 6 चरणों में सफल नीलामी आयोजित की है, जिसमें 46 क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी हो चुकी है। इससे उद्योग जगत की मजबूत भागीदारी और भारत के खनिज क्षेत्र में बढ़ते विश्वास का संकेत मिलता है।

इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए, 7वें चरण में विभिन्न राज्यों के 19 ब्लॉक्स नीलामी के लिए पेश किए जाएंगे। इन ब्लॉक्स में ऐसे खनिज शामिल हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत तकनीक, उर्वरक और रणनीतिक उद्योगों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

सरकार ने नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी, प्रभावी और तेज बनाने के लिए लगातार सुधार किए हैं। मिनरल (ऑक्शन) सेकंड अमेंडमेंट रूल्स, 2025 के तहत नीलामी के बाद की प्रक्रियाओं जैसे परफॉर्मेंस सिक्योरिटी, अग्रिम भुगतान और लेटर ऑफ इंटेंट को सरल बनाया गया है। वहीं मिनरल (ऑक्शन) अमेंडमेंट रूल्स, 2026 में बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड की सुविधा दी गई है, जिससे बोलीदाताओं को अधिक लचीलापन मिलेगा।

यह नीलामी पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी दो-चरणीय आरोही बोली प्रक्रिया (two-stage ascending forward auction) के माध्यम से होगी, जिसमें सबसे अधिक प्रतिशत बोली लगाने वाले को विजेता चुना जाएगा।


निर्यात क्लस्टरों के पुनरुद्धार पर मंथन, NICDC की अहम बैठक

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नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NICDC) ने निर्यात-उन्मुख औद्योगिक क्लस्टरों के पुनरुद्धार से संबंधित केंद्रीय बजट घोषणा पर नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में एक परामर्श बैठक आयोजित की।

यह परामर्श “सतत और सुदृढ़ आर्थिक विकास” विषय पर आयोजित पोस्ट-बजट वेबिनार के अनुवर्ती के रूप में बुलाया गया था, ताकि क्लस्टर पुनर्जीवन पर हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाया जा सके और बजट घोषणाओं को उद्योग के सतत सहयोग के माध्यम से व्यावहारिक रणनीतियों में बदला जा सके। बैठक में निर्यात प्रोत्साहन परिषदों (EPCs), उद्योग संघों, वित्तीय संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और सरकारी हितधारकों के प्रतिनिधियों ने व्यापक भागीदारी की।

चर्चा के दौरान हितधारकों ने क्लस्टर पुनर्जीवन के लिए एक समग्र और संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें बुनियादी ढांचे के उन्नयन के साथ-साथ क्षमता निर्माण, तकनीक अपनाने और बाजार तक बेहतर पहुंच को शामिल किया जाए। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां आयात पर निर्भरता अधिक है, घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के महत्व को रेखांकित किया गया। प्रतिभागियों ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और विदेशी सुविधाओं पर निर्भरता कम करने के लिए मजबूत परीक्षण, प्रमाणन और गुणवत्ता अवसंरचना की आवश्यकता पर भी बल दिया।

चर्चाओं में क्लस्टरों के भीतर नवाचार, अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के महत्व को भी उजागर किया गया। MSME को लक्षित समर्थन देकर उनकी उत्पादकता बढ़ाने और उन्हें वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।

हितधारकों ने प्रभावी प्रशासनिक तंत्र की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला, जिसमें विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के माध्यम से उद्योग-नेतृत्व वाली भागीदारी और निवेशकों व उद्यमों के समर्थन के लिए क्लस्टर स्तर पर सुविधा तंत्र की स्थापना शामिल है। नियामक प्रक्रियाओं के सरलीकरण, सरकारी योजनाओं की बेहतर जानकारी और पहुंच, तथा राज्य और जिला स्तर पर लचीलेपन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

परामर्श में एकीकृत और भविष्य के लिए तैयार औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के महत्व को भी रेखांकित किया गया, जिसमें कार्यबल को बनाए रखने और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सामाजिक और शहरी अवसंरचना शामिल हो। डिजाइन, नवाचार और बौद्धिक संपदा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, सतत वित्तपोषण मॉडल विकसित करने और उच्च संभावनाओं वाले क्लस्टरों को बढ़ाने के लिए सरकारी पहलों का लाभ उठाने पर भी चर्चा हुई।

एक व्यापक सहमति बनी कि MSME को क्लस्टर विकास के केंद्र में रखा जाए, जिसमें वित्त तक पहुंच सुधारने, क्षमताओं को बढ़ाने और निर्यात बाजारों में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान दिया जाए। वैश्विक मांग के रुझानों के साथ क्लस्टर विकास को संरेखित करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

यह परामर्श उद्योग और सरकार के बीच रचनात्मक संवाद का एक मंच बना और औद्योगिक क्लस्टर पुनर्जीवन पर बजट घोषणा के कार्यान्वयन के लिए ठोस सुझावों के आदान-प्रदान को संभव बनाया। यह बैठक बजट प्राथमिकताओं को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

चर्चाओं का मार्गदर्शन NICDC के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक रजत कुमार सैनी ने किया, जिन्होंने क्लस्टर विकास ढांचे को बेहतर बनाने और लागू करने के लिए हितधारकों की निरंतर भागीदारी के महत्व पर जोर दिया।

इस परामर्श में ASSOCHAM, FICCI, CII, PHDCCI, NASSCOM, SIDBI, CSIR, नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल (NPC), इंडियन डेयरी एसोसिएशन, अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC), ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA), इंडियन मशीन टूल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IMTMA), इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन फाउंड्रीमेन, वेयरहाउसिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स सहित कई प्रमुख उद्योग संगठनों और संस्थानों की भागीदारी रही। रिलायंस, टाटा केमिकल्स, रिलैक्सो, ब्यूमर ग्रुप और JLL जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी की।

बैठक की अध्यक्षता उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने की।

NICDC के बारे में:

नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NICDC) भारत सरकार की एक नोडल एजेंसी है, जो ग्रीनफील्ड औद्योगिक स्मार्ट शहरों की योजना, विकास और कार्यान्वयन के माध्यम से भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र और लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने का कार्य करती है।

IFSCA–IRDAI ग्लोबल रीइंश्योरेंस समिट में बोले एम. नागराजू, “2047 तक ‘सभी के लिए बीमा’ के लक्ष्य में गिफ्ट सिटी की अहम भूमिका”

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मुंबई में आयोजित IFSCA–IRDAI–GIFT City ग्लोबल रीइंश्योरेंस समिट के तीसरे संस्करण को संबोधित करते हुए वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने कहा कि भारत का रीइंश्योरेंस (पुनर्बीमा) क्षेत्र परिवर्तनकारी विकास के दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि समिट की थीम “Bridging India Today, Insuring India Tomorrow – the India Evolution Roadmap” सरकार के “2047 तक सभी के लिए बीमा” के विजन से पूरी तरह मेल खाती है।

अपने संबोधन की शुरुआत में नागराजू ने IFSC गिफ्ट सिटी के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की और इसे भारत को वैश्विक रीइंश्योरेंस हब बनाने की दिशा में एक मजबूत मंच बताया। उन्होंने कहा कि बीमा और पुनर्बीमा क्षेत्र भारत की आर्थिक आकांक्षाओं को गति देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, विशेषकर तब जब भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है।

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए सचिव ने कहा कि 1.46 अरब से अधिक जनसंख्या वाला भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

वैश्विक बीमा परिदृश्य पर स्विस री सिग्मा रिपोर्ट (02/2025) का हवाला देते हुए नागराजू ने बताया कि 2024 में मजबूत प्रदर्शन के बाद वैश्विक बीमा उद्योग में प्रीमियम वृद्धि की रफ्तार धीमी हुई है। इसके बावजूद, 2024 में भारत नाममात्र प्रीमियम के आधार पर दुनिया का 10वां सबसे बड़ा बीमा बाजार रहा, जिसकी वैश्विक हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत है। भारत में बीमा पैठ 3.7 प्रतिशत रही, जिसमें जीवन बीमा 2.7 प्रतिशत और गैर-जीवन बीमा 1 प्रतिशत शामिल है, जो अभी भी बड़े अप्रयुक्त बाजार की संभावनाओं को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024–25 में भारतीय बीमा क्षेत्र ने 41.84 करोड़ पॉलिसियां जारी कीं, ₹11.93 लाख करोड़ का प्रीमियम संग्रह किया, ₹8.36 लाख करोड़ के दावे निपटाए और 31 मार्च 2025 तक ₹74.44 लाख करोड़ की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां दर्ज कीं। इसी अवधि में भारत का कुल रीइंश्योरेंस बाजार ₹1.12 लाख करोड़ का रहा।

नागराजू ने सरकार और बीमा नियामक द्वारा किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है। साथ ही सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत पॉलिसीधारकों की शिक्षा एवं संरक्षण कोष की स्थापना, डेटा संरक्षण कानून के अनुरूप प्रावधान और IRDAI की नियामक शक्तियों को मजबूत किया गया है।

अपने संबोधन के समापन में सचिव ने कहा कि IFSCA और गिफ्ट सिटी IFSC भारत को वैश्विक रीइंश्योरेंस हब बनाने में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने भारतीय बीमाकर्ताओं और पुनर्बीमाकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गिफ्ट सिटी के माध्यम से वैश्विक अवसरों का लाभ उठाएं और सभी हितधारकों के साथ मिलकर “2047 तक सभी के लिए बीमा” के लक्ष्य को साकार करें।

निर्मला सीतारमण ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बजट पूर्व परामर्श बैठक की अध्यक्षता की

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केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज नई दिल्ली में राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बजट पूर्व परामर्श बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक में राज्य मंत्री वित्त पंकज चौधरी, मणिपुर के राज्यपाल, गोवा, हरियाणा, मेघालय, सिक्किम के मुख्यमंत्री, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी, अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री, राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री और अन्य मंत्री उपस्थित थे। इसके अलावा आर्थिक मामले, व्यय और राजस्व विभागों के सचिव तथा केंद्रीय वित्त मंत्रालय और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।

बैठक में उपस्थित प्रतिभागियों ने वित्त मंत्री को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट में विचार हेतु कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विशेष रूप से कई प्रतिभागियों ने राज्यों के पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना (SASCI) को उच्च आवंटन के साथ जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह योजना संपत्ति निर्माण को तेज़ करने में मदद करती है और विधानमंडल वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूंजीगत निवेश को बढ़ावा देती है।

यह उल्लेखनीय है कि 2020-21 से अब तक केंद्र सरकार ने SASCI के तहत राज्यों को 50-वर्षीय ब्याज मुक्त ऋण के रूप में 4.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक जारी किए हैं।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने सभी गणमान्य व्यक्तियों का धन्यवाद किया और आश्वस्त किया कि उनके दिए गए सुझावों का उचित रूप से विश्लेषण कर बजट 2026-27 तैयार करने में विचार किया जाएगा।


सैरांग रेलवे स्टेशन ने संभाला पहला डायरेक्ट ऑटोमोबाइल रेक, मिजोरम में ऑटो क्षेत्र और कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा

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 सैरांग रेलवे स्टेशन ने पहली बार डायरेक्ट इनवर्ड ऑटोमोबाइल रेक को संभाला, जिसमें चंगसारी (गुवाहाटी के पास) से 119 मारुति कारें लाई गईं। यह ऐतिहासिक कदम ऐजॉल में वाहन उपलब्धता को बढ़ाएगा, लंबी सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करेगा और मिजोरम के ऑटोमोबाइल क्षेत्र को—जिसमें डीलर, सेवा प्रदाता और ग्राहक शामिल हैं—लाभ पहुंचाएगा। यह राज्य के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और भारतीय रेलवे की कनेक्टिविटी विस्तार, क्षेत्रीय विकास और समावेशी वृद्धि के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ऑटोमोबाइल अनलोडिंग

बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन मिजोरम के लिए एक प्रमुख बुनियादी ढांचा उपलब्धि है। चुनौतीपूर्ण भूभाग के माध्यम से सावधानीपूर्वक बनाई गई इस लाइन की लंबाई 51.38 किमी है और इसमें 45 सुरंगें हैं। यह रेलवे लाइन क्षेत्र को देश के बाकी हिस्सों के साथ सामरिक रूप से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यह लाइन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 13 सितंबर 2025 को उद्घाटित की गई थी। इस अवसर पर उन्होंने ऐजॉल (सैरांग) और दिल्ली (आनंद विहार टर्मिनल) के बीच राजधानी एक्सप्रेस, ऐजॉल (सैरांग) और गुवाहाटी के बीच मिजोरम एक्सप्रेस, और ऐजॉल (सैरांग) और कोलकाता के बीच एक एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इस कदम के साथ मिजोरम का भारत के राष्ट्रीय रेल नेटवर्क में पूर्ण एकीकरण सुनिश्चित हुआ।

नए ट्रेन सेवाओं के प्रति यात्री प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही है। तीनों ट्रेनों की उच्च बैठने की दर रही:

  • सैरांग–आनंद विहार टर्मिनल राजधानी एक्सप्रेस: 147%

  • सैरांग–गुवाहाटी मिजोरम एक्सप्रेस: 115%

  • सैरांग–कोलकाता एक्सप्रेस: 139%

यात्री इन ट्रेनों को सुविधाजनक, किफायती और समय की बचत वाला मानते हैं। रेल कनेक्टिविटी ने प्रमुख शहरों और आर्थिक केंद्रों तक यात्रा को आसान बनाया है और पास के राज्यों में शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाई है।

बैराबी-सैरांग लाइन पर माल ढुलाई का संचालन उद्घाटन के तुरंत बाद शुरू हुआ। 14 सितंबर 2025 को पहली बार 21 सीमेंट वैगन असम से ऐजॉल भेजे गए। इसके बाद इस मार्ग से सीमेंट, निर्माण सामग्री, ऑटोमोबाइल, रेत और पत्थर के टुकड़े जैसे आवश्यक वस्त्र ढोए गए।

सैरांग से पहली पार्सल खेप 19 सितंबर 2025 को बुक की गई, जब एन्थुरियम फूल पार्सल वैन (सैरांग–आनंद विहार टर्मिनल राजधानी एक्सप्रेस) के माध्यम से भेजे गए। 17 सितंबर से 12 दिसंबर 2025 के बीच कुल 17 रेक्स हैंडल किए गए। ये विकास दिखाते हैं कि यह लाइन एक विश्वसनीय लॉजिस्टिक कॉरिडोर बन रही है, परिवहन लागत को कम कर रही है और मिजोरम के आर्थिक और बुनियादी ढांचा विकास का समर्थन कर रही है।

ज्ञान अर्थव्यवस्था के मूल्यांकन के लिए ढांचे के विकास हेतु आयोजित मंथन कार्यशाला

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30 सितंबर 2025 को ज्ञान अर्थव्यवस्था को मापने के लिए एक मंथन कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, अकादमिक संस्थानों, शोध, उद्योग और नीति थिंक टैंकों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में ज्ञान उत्पादों का संभावित वर्गीकरण, पारंपरिक ज्ञान सहित, और ज्ञान अर्थव्यवस्था के विभिन्न घटकों का मापन करने में आने वाली चुनौतियों पर विचार किया गया।

तकनीकी परामर्श समूह (TAG) भी बनाया गया है, जो ज्ञान अर्थव्यवस्था के मुख्य घटकों की पहचान करेगा, ज्ञान आधारित आर्थिक गतिविधियों के मूल्यांकन की पद्धतियाँ सुझाएगा, और ज्ञान अर्थव्यवस्था संकेतकों को अन्य मैक्रो-आर्थिक और सामाजिक संकेतकों से जोड़ने का कार्य करेगा। अब तक हुए खर्च केवल कार्यशालाओं और TAG बैठक के संचालन खर्च तक सीमित हैं।

Source: Lok Sabha में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, योजना मंत्रालय एवं संस्कृति मंत्रालय, राव इंदरजीत सिंह द्वारा दी गई जानकारी।

छत्तीसगढ़ देश का सबसे भरोसेमंद और तेज़ी से उभरता औद्योगिक गंतव्य- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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छत्तीसगढ़ को मिले 6800 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव, उद्योग और पर्यटन को मिलेगा बूस्ट 

दिल्ली में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में 3,000 से ज्यादा रोजगार का खुला रास्ता

नई दिल्ली- राजधानी दिल्ली आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ को अभूतपूर्व निवेश प्रस्ताव मिले। स्टील, ऊर्जा और पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियों ने राज्य में उद्योग स्थापित करने, क्षमता विस्तार, होटल निर्माण और वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए रुचि दिखाई। कार्यक्रम में शामिल कंपनियों ने कुल 6321.25 करोड़ के औद्योगिक निवेश और 505 करोड़ का पर्यटन निवेश का प्रस्ताव दिया है। इन परियोजनाओं से आगामी वर्षों में 3,000 से अधिक रोजगार अवसर सृजित होने की उम्मीद है। इस निवेश प्रस्ताव के साथ अब तक छत्तीसगढ़ को कुल 7.90 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।

दिल्ली स्थित होटल द ललित में आज आयोजित कार्यक्रम में स्टील और टूरिज़्म सेक्टर को केंद्र में रखते हुए नए निवेश अवसरों पर फोकस किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उद्योग जगत के प्रमुख निवेशकों, विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की एवं स्टील और टूरिज़्म सेक्टर की कई कंपनियों को निवेश प्रस्ताव पत्र सौंपे।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, भारत सरकार के केमिकल और उर्वरक मंत्रालय के सचिव अमित अग्रवाल, इस्पात मंत्रालय के सचिव संदीप पौंडरिक भी उपस्थित रहे। 

मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों को निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ आज देश के सबसे भरोसेमंद, स्थिर और तेज़ी से उभरते हुए औद्योगिक गंतव्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य में ऊर्जा, खनिज, सक्षम मानव संसाधन और निवेशक-हितैषी नीति का ऐसा संयोजन मौजूद है, जो किसी भी उद्योग के लिए अत्यंत उपयुक्त वातावरण तैयार करता है।

उन्होंने बताया कि सिंगल विंडो सिस्टम के तहत अनुमतियाँ अब पहले की तुलना में अधिक तेज़ी और पारदर्शिता के साथ जारी हो रही हैं। छत्तीसगढ़ में उद्योग लगाना आज पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है। राज्य में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, टिन, लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की उपस्थिति बड़े औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्र के लिए वरदान है। उन्होंने कहा कि हाल ही में आयोजित 'एनर्जी समिट' में राज्य को साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और कई परियोजनाओं में कार्य प्रारंभ भी हो चुका है।

मुख्यमंत्री साय ने स्टील सेक्टर का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ देश का स्टील हब है, जहां भिलाई स्टील प्लांट, नगरनार स्टील प्लांट और एमएसएमई आधारित स्टील इकाइयां राज्य की औद्योगिक पहचान को मजबूती प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा भिलाई स्टील प्लांट पिछले 70 वर्षों से देश की औद्योगिक प्रगति का स्तंभ रहा है और इसकी उपस्थिति ने स्टील आधारित उद्योगों का प्राकृतिक इकोसिस्टम तैयार किया है। ग्रीन स्टील और नवीकरणीय ऊर्जा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य राज्य के लिए नए अवसर लेकर आया है और छत्तीसगढ़ इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

टूरिज़्म सेक्टर पर बात करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर आज बहुत बदल रहा है। नक्सल हिंसा में कमी आई है, सड़कें, इंटरनेट और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हुई है। उन्होंने कहा कि बस्तर अब निवेश और पर्यटन दोनों का नया केंद्र बन रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि 26 मार्च 2026 तक बस्तर पूरी तरह नक्सल-मुक्त हो जाए। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है और राज्य सरकार होम-स्टे नीति, ट्राइबल टूरिज्म व सस्टेनेबल टूरिज्म पर फोकस कर रही है। 

इस अवसर पर सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, पर्यटन विभाग के सचिव रोहित यादव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, संचालक प्रभात मलिक, सीएसआईडीसी के महाप्रबंधक विश्वेश कुमार, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य, इन्वेस्टमेंट कमिश्नर ऋतु सेन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ को मिले प्रमुख निवेश प्रस्ताव

  1. ग्रीन एनर्जी इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने कचरे से बिजली उत्पादन करने वाले 50 मेगावॉट के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की स्थापना के लिए ₹3,769 करोड़ का निवेश प्रस्तावित किया है, जिससे 150 लोगों को रोजगार मिलेगा। यह प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ में कचरा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
  2. आरती कोटेड स्टील द्वारा 315 करोड़ निवेश प्रस्ताव दिया गया है, एवं 550 रोजगार सृजन की संभावना है। 
  3. एसडीआरएम मेटैलिक्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्टील प्लांट एवं पावर यूनिट के लिए ₹195.75 करोड़ का निवेश प्रस्ताव दिया है, जिससे रोजगार 492 रोजगार सृजन की संभावना है। 
  4. आरएसएलडी बायोफ्यूल प्राइवेट लिमिटेड, चंडीगढ़ द्वारा इथेनॉल प्लांट हेतु ₹200 करोड़ का निवेश प्रस्ताव दिया है, एवं 213 रोजगार सृजन की संभावना है। 
  5. जे.के. लक्ष्मी सीमेंट, राजस्थान द्वारा क्षमता विस्तार हेतु 1816.5 करोड़ से अधिक निवेश प्रस्ताव, 110 रोजगार सृजन 
  6. अरमानी ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज़, रायपुर द्वारा मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्माण हेतु ₹25 करोड़ का प्रस्ताव, जिससे 200 युवाओं को रोजगार प्राप्त होगा।

पर्यटन क्षेत्र में मिले 505 करोड़ के निवेश प्रस्ताव

  1. मार्स विवान प्राइवेट लिमिटेड, रायपुर द्वारा 217 कमरों वाले होटल के लिए ₹220 करोड़ निवेश इससे 522 लोगों को रोजगार प्राप्त होगी। 
  2. हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट, तेलंगाना द्वारा वेलनेस रिसॉर्ट एवं शिक्षा केंद्र हेतु ₹200 करोड़ निवेश
  3. विद्या इन, जशपुर द्वारा 52 कमरों के होटल हेतु ₹25 करोड़ निवेश
  4. पीएसए रिज़ॉर्ट, जगदलपुर द्वारा 150 कमरों के एडवेंचर होटल एवं रिसॉर्ट हेतु ₹60 करोड़ निवेश, जिससे बस्तर में पर्यटन गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। इससे 200 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

एपीएल अपोलो इंडस्ट्रीज ने छत्तीसगढ़ में 1200 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया, 100 बिस्तरों का चैरिटी अस्पताल भी बनाएगी कंपनी

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रायपुर- एपीएल अपोलो इंडस्ट्रीज ग्रुप के चेयरमैन संजय गुप्ता ने अपनी टीम के साथ आज नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाक़ात की। मुलाक़ात के दौरान कंपनी ने राज्य में लगभग ₹1200 करोड़ के औद्योगिक निवेश का बड़ा प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा।

कंपनी ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि वह छत्तीसगढ़ में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए औद्योगिक संयंत्रों की स्थापना पर गंभीरता से काम कर रही है। निवेश प्रस्ताव राज्य की नई औद्योगिक नीति और तेज़ी से विकसित हो रहे औद्योगिक बुनियादी ढांचे को देखते हुए पेश किया गया है।

बैठक में एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल की घोषणा भी की गई। एपीएल अपोलो ग्रुप ने बताया कि वह छत्तीसगढ़ में 100 बिस्तरों का एक आधुनिक चैरिटी अस्पताल भी जल्द शुरू करेगा, जिससे आम जनता को किफ़ायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सकेंगी।

केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने स्पेशलिटी स्टील के लिए पीएलआई योजना के तीसरे चरण (PLI 1.2) का शुभारंभ किया

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केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने स्पेशलिटी स्टील (विशेष इस्पात) के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के तीसरे चरण का शुभारंभ किया। इस्पात मंत्रालय की इस पीएलआई योजना के तहत अब तक ₹43,874 करोड़ का निवेश संकल्पित किया जा चुका है, जिससे 30,760 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं और 14.3 मिलियन टन स्पेशलिटी स्टील के उत्पादन का अनुमान है। सितंबर 2025 तक, पहले दो चरणों में भाग लेने वाली कंपनियों ने ₹22,973 करोड़ का निवेश किया है और 13,284 रोजगार उत्पन्न किए हैं।

स्पेशलिटी स्टील के लिए पीएलआई योजना, जिसे जुलाई 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया था, आत्मनिर्भर भारत दृष्टिकोण के अंतर्गत एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य भारत को उच्च गुणवत्ता वाले स्टील उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाना है। योजना का तीसरा चरण (PLI 1.2) उभरते और उन्नत इस्पात उत्पादों जैसे सुपर एलॉय, सीआरजीओ, स्टेनलेस स्टील (लॉन्ग और फ्लैट), टाइटेनियम एलॉय और कोटेड स्टील में निवेश आकर्षित करने पर केंद्रित है। यह पहल उच्च मूल्य वाले इस्पात के उत्पादन को बढ़ावा देने, नए रोजगार सृजन और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने में सहायक होगी।

तीसरे चरण (PLI 1.2) की प्रमुख विशेषताएं:

  • आवेदन अवधि: लॉन्च की तारीख से 30 दिनों तक ऑनलाइन पोर्टल https://plimos.mecon.co.in के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

  • पात्रता: भारत में पंजीकृत वे कंपनियाँ जो अधिसूचित उत्पादों के एंड-टू-एंड विनिर्माण में संलग्न हैं, आवेदन के लिए पात्र हैं।

  • उत्पाद कवरेज: योजना के तीसरे चरण में पाँच प्रमुख लक्ष्य वर्गों में 22 उत्पाद उप-श्रेणियाँ शामिल हैं, जिनमें रणनीतिक स्टील ग्रेड, वाणिज्यिक ग्रेड (श्रेणी 1 और 2) तथा कोटेड/वायर उत्पाद सम्मिलित हैं।

  • प्रोत्साहन दरें: प्रोत्साहन दरें उत्पाद श्रेणी और उत्पादन वर्ष के आधार पर 4% से 15% तक होंगी।

  • प्रोत्साहन अवधि: वित्त वर्ष 2025–26 से अधिकतम पाँच वर्षों तक लाभ उपलब्ध रहेगा, जबकि भुगतान वित्त वर्ष 2026–27 से प्रारंभ होगा।

  • अन्य परिवर्तन: मूल्य निर्धारण के लिए आधार वर्ष 2019–20 से संशोधित कर 2024–25 कर दिया गया है ताकि वर्तमान रुझानों को बेहतर तरीके से दर्शाया जा सके।

यह कदम न केवल इस्पात क्षेत्र में तकनीकी उन्नति और आत्मनिर्भरता को सशक्त करेगा, बल्कि भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी वैश्विक स्तर पर नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएगा।

सिक्किम में नई GST सुधार: पर्यटन, फार्मा, चाय और खाद्य प्रसंस्करण में विकास और रोजगार के नए अवसर

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सिक्किम में नई GST सुधारों का प्रभाव: विकास और रोजगार के नए अवसर

परिचय

नई GST सुधारें आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर कर बोझ कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। ये नई दरें मांग को बढ़ावा देंगी, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाएंगी और देश में विकास व रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करेंगी।सिक्किम, जो एक छोटा हिमालयी राज्य है और जहाँ फार्मास्यूटिकल्स, पर्यटन और जैविक खाद्य उत्पादों में हिस्सेदारी है, के लिए ये GST सुधार समय पर आए हैं। कर कटौती सिक्किम के व्यापक विकास लक्ष्यों से मेल खाती हैं, जैसे औद्योगिक विविधीकरण, पर्यटन संवर्धन और ग्रामीण आजीविका का उत्थान। कम GST दरें सिक्किम के प्रमुख क्षेत्रों को अधिक लागत-प्रतिस्पर्धी बनाएंगी, जिससे मांग और बाजार पहुंच बढ़ेगी। ये सुधार स्थानीय आजीविकाओं को मजबूत करेंगे, निर्यात का विस्तार करेंगे और सिक्किम की आर्थिक वृद्धि में योगदान देंगे।

पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र

पर्यटन उद्योग सिक्किम की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें होटल, होमस्टे, यात्रा एजेंसियां, टैक्सी ऑपरेटर, गाइड और भोजनालय शामिल हैं, जो स्थानीय आय और रोजगार का समर्थन करते हैं। अनुमानित 7.8 लाख लोग इस क्षेत्र से अपनी आजीविका प्राप्त करते हैं।

मुख्य पर्यटन स्थल जैसे कंचनजंगा नेशनल पार्क, लाचन, लाचुंग और युमथांग वैली लगातार अधिक संख्या में पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। गंगटोक को भारत सरकार द्वारा “सबसे सुरक्षित पर्यटन स्थल” के रूप में मान्यता दी जा चुकी है। नए GST सुधारों के तहत, ₹7,500 प्रति रात तक के होटल आवास पर केवल 5% GST लगाया जाएगा। यह कर कटौती सीधे पर्यटकों की जेब में पैसे बचाएगी, जिससे होटल की बुकिंग बढ़ेगी और प्रवास लंबा होगा। उच्च होटल ऑक्युपेंसी से इस क्षेत्र में रोजगार भी बढ़ेगा।

सौंदर्य और वेलनेस सेवाओं पर GST को 18% से घटाकर 5% किया गया है। सिक्किम वेलनेस टूरिज्म के लिए जाना जाता है और राज्य में कई पारंपरिक और हर्बल चिकित्सा केंद्र हैं। 5% GST के कारण वेलनेस टूरिज्म पैकेज अब अधिक किफायती हो गए हैं। पर्यटन को कर राहत के माध्यम से प्रोत्साहित करना सिक्किम की अर्थव्यवस्था को और विविधित करने में मदद करेगा और ग्रामीण क्षेत्रों का उत्थान करेगा।

फार्मा और दवा क्षेत्र

सिक्किम ने फार्मास्यूटिकल उत्पादन में महत्वपूर्ण पहचान बनाई है। राज्य में 50 से अधिक फार्मा कंपनियां हैं, जिनमें Sun Pharma, Cipla, Zydus Cadila जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

GST सुधारों के तहत दवाओं और चिकित्सा उपकरणों पर कर या तो समाप्त कर दिया गया है या काफी घटा दिया गया है। विशेष रूप से 30 कैंसर दवाएँ अब पूर्णतः GST-मुक्त हैं और अन्य दवाओं पर GST 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। अधिकतर चिकित्सा और शल्य उपकरण, थर्मामीटर आदि पर भी केवल 5% GST लागू होगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की लागत कम होगी और दवाओं की उपलब्धता सस्ती होगी।

सिक्किम के फार्मा उत्पादकों को निर्यात प्रतिस्पर्धा और बाजार विस्तार में लाभ होगा। फार्मा फार्मुलेशन, बायोलॉजिकल्स और मेडिकल उपकरण राज्य के कुल निर्यात का लगभग 63% बनाते हैं। 5% से शून्य GST होने से उत्पादकों पर कर बोझ कम होगा और उत्पादन लागत घटेगी।

प्रीमियम चाय

सिक्किम के टेमी एस्टेट की चाय अंतरराष्ट्रीय बाजारों जैसे USA, Germany, UK और Japan में लोकप्रिय है। यहाँ लगभग 450 श्रमिक काम करते हैं। पहले पैकेज्ड और इंस्टेंट चाय पर 18% GST लगता था। अब इसे 5% GST पर लाया गया है। इससे अंतिम उपभोक्ता कीमत में लगभग 11% की कमी आएगी। टेमी चाय के लिए यह GST कटौती घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद करेगी। श्रमिकों और छोटे उत्पादकों के लिए इससे आय बढ़ेगी।

फूड प्रोसेसिंग सेक्टर

सिक्किम में विविध फूड प्रोसेसिंग उद्योग है। पकीयांग में बेकरी, स्नैक्स और कन्फेक्शनरी उत्पाद बनते हैं, सोरेंग में मांस आधारित उत्पाद, मंगल में बड़ी इलायची, और गंगटोक में Dalley Khorsani मिर्च का उत्पादन होता है।

नई GST सुधारों के तहत अचार, फल और सब्जियों का जूस 5% GST पर है, जबकि पेस्ट्री, केक, सूप आदि पर GST 18% से घटाकर 5% हुआ है। इससे उपभोक्ता कीमत में 6-13% की कमी आएगी और मांग बढ़ेगी। यह क्षेत्र PMFME योजना के तहत 1300+ उद्यमों द्वारा संचालित है। इन इकाइयों में आटा, चाय, फल, बेकरी उत्पाद और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल हैं। मांग बढ़ने से उत्पादन और रोजगार दोनों बढ़ेंगे।

निष्कर्ष

सिक्किम के प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों पर कर बोझ कम करके नई GST सुधारें राज्य की संपूर्ण आर्थिक विकास की प्रक्रिया को गति देंगी।

इन सुधारों के प्रभाव को हम फार्मा प्लांट में अतिरिक्त दवा पैकेट भेजते, गंगटोक होटल में लंबे प्रवास वाले खुशहाल पर्यटकों, टेमी चाय एस्टेट के बढ़ते ऑर्डर, या गांव की महिला सहकारी समिति द्वारा दाल्ली खोरसानी अचार उत्पादन दोगुना करते देखकर देख सकते हैं। नई GST सुधारें सिक्किम में सस्ती वस्तुएँ, मजबूत निर्यात और रोजगार के नए अवसर लाने के लिए तैयार हैं।

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