Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार से संचालित है भारत की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’: डॉ. जितेंद्र सिंह

Document Thumbnail

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री; तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार से संचालित हो रही है, जिसमें तकनीक शासन, प्रशासन और आर्थिक परिवर्तन की केंद्रीय शक्ति के रूप में कार्य कर रही है।

वर्ष 2025 के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की उपलब्धियों पर दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि आने वाले दो दशकों में भारत की विकास यात्रा का नेतृत्व अंतरिक्ष, महासागर, जैव प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे नवाचार-आधारित क्षेत्र करेंगे।

इस अवसर पर भारत की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं के शीर्ष नेतृत्व उपस्थित थे, जिनमें भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. ए. के. सूद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले, सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलाईसेल्वी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन शामिल थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज सरकार द्वारा किए जा रहे प्रत्येक बड़े सुधार—चाहे वह किसी भी मंत्रालय या विभाग से संबंधित हों—तकनीक-सक्षम हैं। उन्होंने बताया कि यह परिवर्तन 2014 से राष्ट्रीय नीति-निर्माण में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को निरंतर प्राथमिकता देने का परिणाम है। प्रधानमंत्री के 2014 के बाद से प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस संबोधन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की झलक मिलने का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे सरकार की दीर्घकालिक सोच और वैश्विक दृष्टि का प्रतिबिंब बताया।

मंत्री ने डीप ओशन मिशन और गगनयान जैसे प्रमुख मिशनों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत एक साथ मानव अंतरिक्ष उड़ान और गहरे समुद्र अन्वेषण की तैयारी कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2027 में जहां एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में जाएगा, वहीं भारत 6,000 मीटर गहराई तक मानव-युक्त पनडुब्बी भी भेजेगा—जो एक ऐतिहासिक दोहरी उपलब्धि होगी।

उन्होंने ₹1 लाख करोड़ के रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड को वर्ष की प्रमुख उपलब्धि बताते हुए कहा कि इसके तहत सरकार निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास को प्रत्यक्ष समर्थन दे रही है, जो वैश्विक स्तर पर एक अभूतपूर्व कदम है। इसके साथ ही अनुसंधान निधि के लोकतंत्रीकरण और उद्योग व परोपकार सहित गैर-सरकारी स्रोतों से 50–60% संसाधन जुटाने के उद्देश्य से अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की स्थापना की गई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने नेशनल क्वांटम मिशन, NIDHI, PRERNA/PURSE और VAIBHAV कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पहलें स्टार्टअप्स, अनुसंधान अवसंरचना और वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग को सशक्त बना रही हैं, साथ ही भारतीय वैज्ञानिक प्रवासी समुदाय के साथ संरचित सहभागिता को बढ़ावा दे रही हैं।

सीएसआईआर की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने स्टील स्लैग से बनी टिकाऊ सड़कों, स्वदेशी पैरासिटामोल उत्पादन, भारत की पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक ‘नैफिथ्रोमाइसिन’, मिलेट आधारित खाद्य नवाचारों और पीपीपी मॉडल पर विकसित हंसा-एनजी प्रशिक्षण विमान जैसी वैश्विक स्तर पर मान्य नवाचारों को रेखांकित किया। उन्होंने इसे “स्वदेशी नवाचार को विदेशी बाजारों की स्वीकृति” का उदाहरण बताया। छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने हेतु ‘वन डे ऐज़ ए साइंटिस्ट’ जैसे जन-संपर्क कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया गया।

पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में मंत्री ने आईएमडी की ‘नाउकास्टिंग’ क्षमता के माध्यम से तीन घंटे पूर्व सटीक मौसम पूर्वानुमान में हुई प्रगति, लक्षद्वीप में समुद्री संसाधनों से सतत मीठे पानी के उत्पादन हेतु स्थापित अलवणीकरण संयंत्र, महासागरीय ऊर्जा, समुद्री अवलोकन प्रणालियों और जलवायु अनुकूलन में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला।

समापन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब उच्च तकनीक—जैसे टीके और चिकित्सा उपकरण—का आयातक नहीं, बल्कि निर्यातक बन चुका है और भारत की बायोइकोनॉमी एक प्रमुख विकास चालक के रूप में उभर रही है। उन्होंने कहा, “सबसे अच्छा अभी आना बाकी है,” और विश्वास जताया कि विज्ञान-आधारित सुधार भारत को 2047 से पहले ही विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कर देंगे।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.