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भारत–ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA): व्यापार, निवेश और रोज़गार के नए अवसर

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भारत–ओमान CEPA वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, पेशेवर गतिशीलता और विनियामक सहयोग को कवर करने वाला एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है।

  • वित्त वर्ष 2024–25 में द्विपक्षीय व्यापार USD 10.61 बिलियन रहा, जो भारत–ओमान आर्थिक साझेदारी के बढ़ते विस्तार को दर्शाता है।

  • भारत को ओमान में 98.08% टैरिफ लाइनों पर 100% शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुंच प्राप्त हुई है, जो भारत के 99.38% निर्यात मूल्य को कवर करती है—यह लाभ समझौते के पहले दिन से लागू होगा।

  • इंजीनियरिंग वस्तुओं, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य, समुद्री उत्पाद, वस्त्र, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक और रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों में नए निर्यात अवसर खुलेंगे।

  • संतुलित उदारीकरण और एक्सक्लूज़न लिस्ट के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए MSMEs, श्रम-प्रधान उद्योगों और क्षेत्रीय निर्यात वृद्धि को समर्थन।

परिचय

व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA)

CEPA एक ऐसा व्यापक समझौता है जो केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित न रहकर सेवाओं, निवेश, सरकारी खरीद, विवाद निपटान और अन्य विनियामक पहलुओं को भी शामिल करता है। इसमें म्यूचुअल रिकग्निशन एग्रीमेंट्स (पारस्परिक मान्यता) भी शामिल हैं, जिससे विभिन्न देशों की नियामक प्रणालियों को समान परिणामों के आधार पर स्वीकार किया जाता है।

भारत–ओमान CEPA दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, पेशेवर गतिशीलता और नियामक सहयोग को एक समग्र ढांचे में समाहित करता है, जिससे दीर्घकालिक और स्थिर आर्थिक जुड़ाव को बढ़ावा मिलेगा।

भारत–ओमान आर्थिक जुड़ाव

वित्त वर्ष 2024–25 में द्विपक्षीय व्यापार USD 10.61 बिलियन रहा, जो 2023–24 के USD 8.94 बिलियन से अधिक है।
अप्रैल–अक्टूबर 2025 के दौरान व्यापार USD 6.48 बिलियन दर्ज किया गया।

वस्तु व्यापार

  • भारत का ओमान को निर्यात: USD 4.06 बिलियन (FY 2024–25)

  • ओमान से आयात: USD 6.55 बिलियन (FY 2024–25)

सेवा व्यापार

  • भारत की सेवा निर्यात: 2020 में USD 397 मिलियन से बढ़कर 2023 में USD 617 मिलियन

  • ओमान से सेवा आयात: USD 101 मिलियन से बढ़कर USD 159 मिलियन

वस्तुओं में बाज़ार पहुंच: भारत के लाभ

CEPA के तहत भारत को ओमान में लगभग पूर्ण शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त हुई है। पहले MFN व्यवस्था में जहां केवल 15.33% निर्यात मूल्य ही शून्य शुल्क पर जाता था, वहीं अब लगभग पूरा निर्यात शुल्क-मुक्त होगा। इससे भारतीय उत्पादों की मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

भारत की बाज़ार पहुंच पेशकश और सुरक्षा उपाय

भारत ने 77.79% टैरिफ लाइनों पर उदारीकरण की पेशकश की है, जबकि कई संवेदनशील क्षेत्रों को एक्सक्लूज़न लिस्ट में रखा गया है, जैसे—

  • परिवहन उपकरण, प्रमुख रसायन, अनाज, मसाले, चाय–कॉफी

  • डेयरी, खाद्य तेल, फल-सब्ज़ियां

  • रबर, चमड़ा, वस्त्र, पेट्रोलियम उत्पाद

इससे घरेलू उद्योगों और किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे।

क्षेत्रवार प्रभाव

इंजीनियरिंग वस्तुएं

  • FY 2024–25 में निर्यात: USD 875.83 मिलियन

  • CEPA के तहत सभी इंजीनियरिंग उत्पादों पर शून्य शुल्क

  • 2030 तक निर्यात USD 1.3–1.6 बिलियन तक पहुंचने की संभावना

फार्मास्यूटिकल्स

  • ओमान का फार्मा बाज़ार 2031 तक USD 473.71 मिलियन होने का अनुमान

  • दवाओं और APIs पर शुल्क-मुक्त पहुंच

  • USFDA, EMA आदि से स्वीकृत दवाओं के लिए फास्ट-ट्रैक अनुमोदन

समुद्री उत्पाद

  • ओमान का आयात: USD 118.91 मिलियन

  • CEPA से झींगा और मछली निर्यात में वृद्धि, तटीय क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य

  • FY 2024 में भारत ओमान का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता

  • बासमती चावल, अंडे, मांस, बिस्कुट, मक्खन, शहद आदि पर बड़ा लाभ

  • संवेदनशील उत्पादों के लिए चरणबद्ध शुल्क कटौती

वस्त्र, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक, रत्न एवं आभूषण

  • इन सभी क्षेत्रों में शून्य शुल्क से प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त

  • MSME आधारित उद्योगों को विशेष लाभ

सेवाएं, निवेश और पेशेवर गतिशीलता

  • 2024 में सेवा व्यापार: USD 863 मिलियन

  • ओमान ने 127 सेवा उप-क्षेत्रों में बाज़ार पहुंच प्रतिबद्धताएं दीं

  • आईटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, पेशेवर सेवाओं में अवसर

  • इंट्रा-कॉरपोरेट ट्रांसफरीज़ (ICT) की सीमा 20% से बढ़ाकर 50%

  • सामाजिक सुरक्षा समझौते (SSA) पर भविष्य में वार्ता का प्रावधान

निष्कर्ष

भारत–ओमान CEPA एक संतुलित, व्यापक और भविष्यन्मुखी समझौता है, जो व्यापार, निवेश, रोज़गार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करेगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी, रोज़गार सृजन और क्षेत्रीय एकीकरण को मजबूती प्रदान करेगा।

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