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भारत-फिलीपींस संयुक्त कार्य समूह (JWGTI) की 14वीं बैठक मनीला में आयोजित

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फिलीपींस- भारत और फिलीपींस के बीच व्यापार एवं निवेश सहयोग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से भारत-फिलीपींस संयुक्त कार्य समूह (JWGTI) की 14वीं बैठक 5 जून 2026 को मनीला में आयोजित की गई।

बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव अमित वर्मा तथा फिलीपींस के व्यापार एवं उद्योग विभाग (इंटरनेशनल ट्रेड ग्रुप) के अवर सचिव एलन बी. गेप्ती ने की। दोनों देशों के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लिया।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने भारत और फिलीपींस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में हुई उल्लेखनीय वृद्धि का स्वागत किया। वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार 3.9 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो मजबूत आर्थिक संबंधों को दर्शाता है।

चर्चा में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के रुझानों, प्राथमिकता वाले उत्पादों एवं सेवाओं की पहचान तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने फिल्म, ऊर्जा, निर्माण एवं बुनियादी ढांचा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), आईटी-बीपीएम, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा औषधि क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

व्यापार को सुगम बनाने के लिए कारोबारी माहौल में सुधार भी बैठक का प्रमुख विषय रहा। इस दौरान सीमा शुल्क सहयोग, कृषि क्षेत्र में सहयोग, विशेष उत्पादों के लिए बाजार पहुंच तथा राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापारिक लेन-देन जैसे मुद्दों पर विचार किया गया।

बैठक में आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) की समीक्षा को शीघ्र पूरा करने और उसके बाद भारत-फिलीपींस प्राथमिकता व्यापार समझौते (PTA) पर आगे बढ़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

बैठक ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने की रणनीतिक आवश्यकता को रेखांकित किया तथा एक गतिशील और पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दोहराया।

इसके अलावा, 4 जून 2026 को 14वीं JWGTI बैठक के अवसर पर फिलीपींस में कार्यरत भारतीय व्यवसायों के प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में व्यापार, निवेश, बाजार अवसरों और भारत-फिलीपींस वाणिज्यिक संबंधों को और गहरा करने के उपायों पर चर्चा की गई।

JWGTI की अगली बैठक नई दिल्ली, भारत में आयोजित की जाएगी। यह मंच दोनों देशों को वैश्विक, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करने तथा वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार और निवेश संबंधों को और सुदृढ़ बनाने का अवसर प्रदान करता है।


भारत–ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA): व्यापार, निवेश और रोज़गार के नए अवसर

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भारत–ओमान CEPA वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, पेशेवर गतिशीलता और विनियामक सहयोग को कवर करने वाला एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है।

  • वित्त वर्ष 2024–25 में द्विपक्षीय व्यापार USD 10.61 बिलियन रहा, जो भारत–ओमान आर्थिक साझेदारी के बढ़ते विस्तार को दर्शाता है।

  • भारत को ओमान में 98.08% टैरिफ लाइनों पर 100% शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुंच प्राप्त हुई है, जो भारत के 99.38% निर्यात मूल्य को कवर करती है—यह लाभ समझौते के पहले दिन से लागू होगा।

  • इंजीनियरिंग वस्तुओं, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य, समुद्री उत्पाद, वस्त्र, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक और रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों में नए निर्यात अवसर खुलेंगे।

  • संतुलित उदारीकरण और एक्सक्लूज़न लिस्ट के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए MSMEs, श्रम-प्रधान उद्योगों और क्षेत्रीय निर्यात वृद्धि को समर्थन।

परिचय

व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA)

CEPA एक ऐसा व्यापक समझौता है जो केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित न रहकर सेवाओं, निवेश, सरकारी खरीद, विवाद निपटान और अन्य विनियामक पहलुओं को भी शामिल करता है। इसमें म्यूचुअल रिकग्निशन एग्रीमेंट्स (पारस्परिक मान्यता) भी शामिल हैं, जिससे विभिन्न देशों की नियामक प्रणालियों को समान परिणामों के आधार पर स्वीकार किया जाता है।

भारत–ओमान CEPA दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, पेशेवर गतिशीलता और नियामक सहयोग को एक समग्र ढांचे में समाहित करता है, जिससे दीर्घकालिक और स्थिर आर्थिक जुड़ाव को बढ़ावा मिलेगा।

भारत–ओमान आर्थिक जुड़ाव

वित्त वर्ष 2024–25 में द्विपक्षीय व्यापार USD 10.61 बिलियन रहा, जो 2023–24 के USD 8.94 बिलियन से अधिक है।
अप्रैल–अक्टूबर 2025 के दौरान व्यापार USD 6.48 बिलियन दर्ज किया गया।

वस्तु व्यापार

  • भारत का ओमान को निर्यात: USD 4.06 बिलियन (FY 2024–25)

  • ओमान से आयात: USD 6.55 बिलियन (FY 2024–25)

सेवा व्यापार

  • भारत की सेवा निर्यात: 2020 में USD 397 मिलियन से बढ़कर 2023 में USD 617 मिलियन

  • ओमान से सेवा आयात: USD 101 मिलियन से बढ़कर USD 159 मिलियन

वस्तुओं में बाज़ार पहुंच: भारत के लाभ

CEPA के तहत भारत को ओमान में लगभग पूर्ण शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त हुई है। पहले MFN व्यवस्था में जहां केवल 15.33% निर्यात मूल्य ही शून्य शुल्क पर जाता था, वहीं अब लगभग पूरा निर्यात शुल्क-मुक्त होगा। इससे भारतीय उत्पादों की मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

भारत की बाज़ार पहुंच पेशकश और सुरक्षा उपाय

भारत ने 77.79% टैरिफ लाइनों पर उदारीकरण की पेशकश की है, जबकि कई संवेदनशील क्षेत्रों को एक्सक्लूज़न लिस्ट में रखा गया है, जैसे—

  • परिवहन उपकरण, प्रमुख रसायन, अनाज, मसाले, चाय–कॉफी

  • डेयरी, खाद्य तेल, फल-सब्ज़ियां

  • रबर, चमड़ा, वस्त्र, पेट्रोलियम उत्पाद

इससे घरेलू उद्योगों और किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे।

क्षेत्रवार प्रभाव

इंजीनियरिंग वस्तुएं

  • FY 2024–25 में निर्यात: USD 875.83 मिलियन

  • CEPA के तहत सभी इंजीनियरिंग उत्पादों पर शून्य शुल्क

  • 2030 तक निर्यात USD 1.3–1.6 बिलियन तक पहुंचने की संभावना

फार्मास्यूटिकल्स

  • ओमान का फार्मा बाज़ार 2031 तक USD 473.71 मिलियन होने का अनुमान

  • दवाओं और APIs पर शुल्क-मुक्त पहुंच

  • USFDA, EMA आदि से स्वीकृत दवाओं के लिए फास्ट-ट्रैक अनुमोदन

समुद्री उत्पाद

  • ओमान का आयात: USD 118.91 मिलियन

  • CEPA से झींगा और मछली निर्यात में वृद्धि, तटीय क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य

  • FY 2024 में भारत ओमान का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता

  • बासमती चावल, अंडे, मांस, बिस्कुट, मक्खन, शहद आदि पर बड़ा लाभ

  • संवेदनशील उत्पादों के लिए चरणबद्ध शुल्क कटौती

वस्त्र, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक, रत्न एवं आभूषण

  • इन सभी क्षेत्रों में शून्य शुल्क से प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त

  • MSME आधारित उद्योगों को विशेष लाभ

सेवाएं, निवेश और पेशेवर गतिशीलता

  • 2024 में सेवा व्यापार: USD 863 मिलियन

  • ओमान ने 127 सेवा उप-क्षेत्रों में बाज़ार पहुंच प्रतिबद्धताएं दीं

  • आईटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, पेशेवर सेवाओं में अवसर

  • इंट्रा-कॉरपोरेट ट्रांसफरीज़ (ICT) की सीमा 20% से बढ़ाकर 50%

  • सामाजिक सुरक्षा समझौते (SSA) पर भविष्य में वार्ता का प्रावधान

निष्कर्ष

भारत–ओमान CEPA एक संतुलित, व्यापक और भविष्यन्मुखी समझौता है, जो व्यापार, निवेश, रोज़गार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करेगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी, रोज़गार सृजन और क्षेत्रीय एकीकरण को मजबूती प्रदान करेगा।

भारत–कनाडा आर्थिक सहयोग में नई ऊर्जा: पीयूष गोयल ने क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी और एआई में अपार संभावनाएँ बताईं

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में इंडो-कनाडियन बिजनेस चैंबर को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और कनाडा के बीच क्रिटिकल मिनरल्स, मिनरल प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी, न्यूक्लियर एनर्जी और सप्लाई-चेन विविधीकरण में सहयोग की व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग और नेक्स्ट-जनरेशन डेटा सेंटर्स जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत की क्षमता दुनिया में तेजी से बढ़ रही है और भारत हर वर्ष सबसे बड़ा STEM टैलेंट पूल तैयार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा प्राकृतिक सहयोगी हैं, जिनकी पूरक क्षमताएँ—व्यापार, निवेश और नई तकनीकों में व्यापक अवसर पैदा करती हैं।

भारत–कनाडा के मजबूत संबंध और CEPA पर प्रगति

पीयूष गोयल ने G20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई सकारात्मक बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने उच्च महत्त्वाकांक्षी CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) पर बातचीत शुरू करने और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने पर सहमति व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि CEPA दोनों देशों के बीच विश्वास, निवेश सुरक्षा और सम्मानजनक संवाद को मजबूत करेगा।

क्लीन एनर्जी और एआई–ड्रिवन इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारत अग्रणी

पीयूष गोयल ने बताया कि भारत की 500 GW की राष्ट्रीय पावर ग्रिड—जिसमें 250 GW नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है—एआई आधारित प्रणालियों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है।

भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 GW क्लीन एनर्जी क्षमता हासिल करना है, जिससे भारत दुनिया के सबसे भरोसेमंद और किफायती स्वच्छ ऊर्जा प्रदाताओं में शामिल होगा।

भारत की अर्थव्यवस्था: मजबूती, स्थिरता और वैश्विक विश्वास

उन्होंने बताया कि भारत “Fragile Five” की सूची से आगे बढ़कर आज दुनिया की शीर्ष पाँच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है और अगले 2–2.5 वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।

भारत के पास—

  • कम मुद्रास्फीति,

  • मजबूत बैंकिंग प्रणाली,

  • ऊँचे विदेशी मुद्रा भंडार,

  • तेज़ी से विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर,

  • और सशक्त कैपिटल मार्केट है।

उन्होंने यह भी बताया कि बीते 11 वर्षों में भारतीय शेयर बाजार 4.5 गुना तक बढ़ा है, जो निवेशकों के विश्वास का प्रमाण है।

भारत–कनाडा साझेदारी को मज़बूत करने के लिए पाँच–बिंदु प्रस्ताव

पीयूष गोयल ने दोनों देशों के बीच संबंध को गति देने के लिए पाँच प्रमुख सुझाव दिए—

  1. संवाद को परिणामों में बदलना
    — स्पष्ट रोडमैप, लक्ष्य और मापनीय प्रगति।

  2. सीईओ फोरम को सक्रिय करना
    — उद्योगों के बीच सीधे सहयोग को बढ़ावा देना।

  3. कनाडा को भारत के आगामी AI Summit में भाग लेने के लिए आमंत्रण।

  4. संयुक्त नवाचार को बढ़ावा
    — भारत की मजबूत IPR व्यवस्था, विशाल डेटा सेट और किफायती अनुसंधान माहौल का लाभ उठाना।

  5. प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी
    — क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी, एयरोस्पेस, रक्षा और मेक इन इंडिया के तहत निर्माण।

उन्होंने कहा कि कनाडाई नवाचार और भारतीय क्षमताएँ मिलकर दुनिया के लिए नई संभावनाएँ पैदा कर सकती हैं।

भारत–कनाडा सहयोग: 2047 के विकसित भारत की यात्रा में साथ

अंत में,पीयूष गोयल ने कनाडाई कंपनियों को भारत की विकसित राष्ट्र 2047 की यात्रा में सहयोगी बनने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि भारत स्थिर, पारदर्शी और अवसरों से भरपूर वातावरण प्रदान करता है और आने वाले वर्षों में भारत–कनाडा साझेदारी और अधिक मजबूत होगी।


भारत–दक्षिण अफ्रीका संबंध मजबूत: PM मोदी और राष्ट्रपति रामाफोसा की G20 के दौरान द्विपक्षीय मुलाकात

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माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जोहान्सबर्ग में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति महामहिम सिरिल रामाफोसा से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति रामाफोसा का गर्मजोशी भरे स्वागत और सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका द्वारा नई दिल्ली G20 शिखर सम्मेलन में लिए गए निर्णयों को आगे बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की।

भारत–दक्षिण अफ्रीका के ऐतिहासिक संबंधों को याद करते हुए दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और व्यापार एवं निवेश, खाद्य सुरक्षा, कौशल विकास, खनन, युवा आदान–प्रदान और जनता से जनता के संबंध सहित विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।

नेताओं ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति का स्वागत किया और बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी, नवाचार, खनन और स्टार्ट-अप क्षेत्र में पारस्परिक निवेश को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने भारत में दक्षिण अफ्रीकी चीता पुनर्वास के लिए राष्ट्रपति रामाफोसा को धन्यवाद दिया और उन्हें भारत की पहल इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस में शामिल होने का आमंत्रण दिया।

दोनों नेताओं ने ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने पर सहमति जताई। इस संदर्भ में, प्रधानमंत्री ने IBSA नेताओं की बैठक आयोजित करने की दक्षिण अफ्रीका की पहल की प्रशंसा की। राष्ट्रपति रामाफोसा ने 2026 में भारत की आगामी BRICS अध्यक्षता के लिए पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पियुष गोयल ने वेनेजुएला के खनन विकास मंत्री से की द्विपक्षीय बैठक

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विजयवाड़ा- वाणिज्य और उद्योग मंत्री पियुष गोयल ने 14–15 नवंबर 2025 को विशाखापत्तनम में आयोजित 30वें CII पार्टनरशिप समिट के अवसर पर वेनेजुएला के मंत्री ऑफ इकोलॉजिकल माइनिंग डेवलपमेंट, Mr. Hector Silva के साथ द्विपक्षीय बैठक की।

बैठक के दौरान, वेनेजुएला की ओर से भारत के साथ तेल क्षेत्र से परे आर्थिक सहयोग बढ़ाने में रुचि दिखाई गई, जिसमें महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग और भारतीय निवेश आकर्षित करना शामिल है।

मंत्री गोयल ने इंडिया–वेनेजुएला जॉइंट कमिटी मैकेनिज्म को पुनः सक्रिय करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसकी पिछली बैठक एक दशक पहले हुई थी। उन्होंने कहा कि ONGC के वेनेजुएला में चल रहे संचालन खनन और अन्वेषण में गहन सहयोग की संभावना प्रदान करते हैं।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने सुझाव दिया कि वेनेजुएला भारतीय फार्माकोपिया को स्वीकार कर सकता है, ताकि फार्मास्यूटिकल ट्रेड को सुगम बनाया जा सके।मंत्री गोयल ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि भारत वेनेजुएला में निवेश की संभावनाओं का पता लगाने वाले व्यवसायों के साथ सक्रिय रूप से संवाद करेगा।

भारत–कनाडा 7वें मंत्रीस्तरीय व्यापार और निवेश संवाद का सारांश (MDTI 2025)

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भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के आमंत्रण पर, कनाडा के निर्यात प्रोत्साहन, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक विकास मंत्री, माननीय मनींदर सिद्धू ने 11 से 14 नवंबर 2025 तक भारत की आधिकारिक यात्रा की।

कनाडा के कananaskis में हुए G7 सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की द्विपक्षीय बैठक में प्रदान किए गए निर्देशों, तथा 13 अक्टूबर 2025 को जारी विदेश मंत्रियों के संयुक्त बयान “एक मजबूत साझेदारी की ओर नवीनीकृत गति”—जिसमें व्यापार को द्विपक्षीय आर्थिक वृद्धि और लचीलापन का आधार स्तंभ बताया गया था—के अनुरूप, दोनों व्यापार मंत्रियों ने व्यापार और निवेश पर मंत्रीस्तरीय संवाद (MDTI) के 7वें संस्करण का आयोजन किया।

मंत्रियों ने भारत–कनाडा आर्थिक साझेदारी की मजबूती और निरंतरता की पुनः पुष्टि की और सतत संवाद, पारस्परिक सम्मान, और भावी पहलों के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

मंत्रियों ने वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार में मजबूत वृद्धि का उल्लेख किया, जो 2024 में 23.66 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें माल व्यापार का मूल्य लगभग 8.98 अरब अमेरिकी डॉलर था—जो पिछले वर्ष की तुलना में 10% की महत्वपूर्ण वृद्धि है। मंत्रियों ने भारत–कनाडा आर्थिक साझेदारी की ताकत और लचीलापन दोहराया और व्यापार और निवेश के नए अवसरों को खोलने के लिए निजी क्षेत्र के साथ निरंतर सहभागिता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने द्विपक्षीय निवेश प्रवाह में steady विस्तार का स्वागत किया, जिसमें भारत में कनाडा के संस्थागत निवेश और कनाडा में भारतीय कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति शामिल है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं में हजारों नौकरियों का समर्थन करती हैं। मंत्रियों ने एक खुला, पारदर्शी और पूर्वानुमेय निवेश माहौल बनाए रखने और प्राथमिकता एवं उभरते क्षेत्रों में गहरी साझेदारी के नए रास्तों की तलाश करने की प्रतिबद्धता जताई।

मंत्रियों ने टिकाऊ विकास और नवाचार को बढ़ावा देने वाले रणनीतिक क्षेत्रों में भारत और कनाडा के बीच मजबूत पूरकताओं का भी उल्लेख किया, जो व्यापार के लिए नए अवसर प्रदान करती हैं। यह स्वीकार करते हुए कि इन क्षेत्रों में दोनों पक्षों के संबंधित हितधारकों के बीच अलग-अलग डोमेन-स्तरीय सहभागिता की आवश्यकता होगी, मंत्रियों ने:

• ऊर्जा संक्रमण और नई औद्योगिक वृद्धि के लिए आवश्यक क्रिटिकल मिनरल्स और स्वच्छ ऊर्जा सहयोग में दीर्घकालिक आपूर्ति शृंखला साझेदारी को प्रोत्साहित करने पर सहमति व्यक्त की।

• भारत में कनाडा की स्थापित उपस्थिति और भारत के विमानन क्षेत्र की वृद्धि का उपयोग करते हुए एयरोस्पेस और द्वि-उपयोग क्षमताओं में निवेश और व्यापारिक अवसरों की पहचान और विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की।

सप्लाई चेन लचीलापन के महत्व को स्वीकार करते हुए, मंत्रियों ने वैश्विक घटनाक्रम पर विचार-विमर्श किया और हालिया व्यवधानों से मिले सबक पर चर्चा की। उन्होंने कृषि सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लचीलापन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए विविध और विश्वसनीय सप्लाई चेन की अनिवार्यता पर बल दिया।

मंत्रियों ने द्विपक्षीय आर्थिक सहभागिता को मजबूत करने में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और वैश्विक विकास तथा बदलती सप्लाई चेन और व्यापार गतिशीलता को प्रतिबिंबित करने के लिए आर्थिक साझेदारी को ऊंचा उठाने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने द्विपक्षीय संवाद में गति बनाए रखने और लोगों-से-लोगों के संबंधों को समर्थन देने के महत्व पर जोर दिया, जो साझेदारी की मजबूत नींव प्रदान करते हैं।

मंत्रियों ने आने वाले वर्ष की शुरुआत में कनाडा और भारत दोनों में व्यापार और निवेश समुदाय के साथ सतत मंत्रीस्तरीय सहभागिता के लिए सहमति व्यक्त की।

उन्होंने अगले कदमों पर विचार करते हुए निकट संपर्क में बने रहने पर सहमति व्यक्त की और नई दिल्ली में आयोजित रचनात्मक और दूरदर्शी चर्चाओं को स्वीकार करते हुए बैठक का समापन किया।


भारत–कनाडा मंत्री स्तरीय संवाद: व्यापार और निवेश में साझेदारी को नई गति

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नई दिल्ली में आज भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री,पीयूष गोयल, और कनाडा के निर्यात संवर्धन, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक विकास मंत्री, मनींदर सिद्धू, ने 7वें भारत–कनाडा मंत्री स्तरीय संवाद (MDTI) की सह-अध्यक्षता की। यह बैठक द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को पुनर्जीवित करने और सहयोग के लिए भविष्य की रूपरेखा तय करने की दिशा में एक नया चरण थी, जो 13 अक्टूबर 2025 के संयुक्त बयान "Renewing Momentum towards a Stronger Partnership" के अनुरूप थी, जिसमें व्यापार को द्विपक्षीय आर्थिक वृद्धि और स्थिरता की नींव के रूप में देखा गया।

मंत्रियों ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, सांस्कृतिक विविधता और बढ़ती आर्थिक सामर्थ्य पर आधारित भारत–कनाडा संबंधों की मजबूती की पुष्टि की। उन्होंने कनाडा में लगभग 29 लाख भारतीय प्रवासी और 4,27,000 से अधिक भारतीय छात्रों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला, जिनका योगदान दोनों समाजों को समृद्ध करता है और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देता है।

भारत और कनाडा के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 2023 में 18.38 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। मंत्रियों ने द्विपक्षीय निवेश में निरंतर वृद्धि का स्वागत किया और सतत एवं समावेशी विकास के लिए एक खुला, पारदर्शी और अनुमानित व्यावसायिक वातावरण बनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

मंत्री स्तरीय संवाद में पोषण सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला मजबूती, स्वास्थ्य क्षेत्र सहयोग और निवेश संवर्धन जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। साथ ही व्यापार नीतियों, सेवाओं और वस्तुओं में बाजार पहुँच बढ़ाने, नियामक समन्वय को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के उपायों की समीक्षा की गई।

संवाद के निष्कर्ष में, मंत्रियों ने साझा दृष्टि की पुष्टि की कि वे भारत–कनाडा आर्थिक साझेदारी को पुनर्जीवित और सशक्त करेंगे, जो परस्पर सम्मान, विश्वास और सहयोग की भावना पर आधारित होगी। उन्होंने आज की रचनात्मक चर्चाओं को ठोस परिणामों में बदलने और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सहमति व्यक्त की।

भारत–न्यूजीलैंड संबंधों में नई ऊर्जा: रोटोरुआ में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की उच्च-स्तरीय वार्ताएं

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूजीलैंड की अपनी आधिकारिक यात्रा के दूसरे दिन व्यापार, निवेश, संपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से कई उच्च-स्तरीय बैठकों में भाग लिया।

दिन की शुरुआत में, रोटोरुआ जाते समय मंत्री ने एयर न्यूजीलैंड के सीईओ निखिल रविशंकर से मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक संपर्क को बढ़ाने में एयर न्यूजीलैंड की भूमिका पर चर्चा हुई। पीयूष गोयल ने भारत के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र पर प्रकाश डाला और एयर सेवाओं तथा पर्यटन को मजबूत करने के लिए सहयोग के बड़े अवसरों का उल्लेख किया।

रोटोरुआ पहुंचने पर, रोटोरुआ की मेयर तानिया टैप्सेल ने मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। पीयूष गोयल ने शहर की प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि बढ़ते द्विपक्षीय संबंध व्यापार और पर्यटन के क्षेत्र में नए अवसर लेकर आएंगे।

इसके बाद, न्यूजीलैंड के ट्रेड मंत्री टॉड मैक्ले की उपस्थिति में, पीयूष गोयल का ते पुइया — माओरी संस्कृति और कला के राष्ट्रीय केंद्र — में पारंपरिक माओरी स्वागत समारोह (पोह्विरी) के साथ स्वागत किया गया। समारोह में पारंपरिक गीतों और "होंगी" अभिवादन ने दोनों देशों के बीच गहरे सम्मान और गर्मजोशी को दर्शाया। मंत्री ने माओरी समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की प्रशंसा की और कहा कि माओरी मूल्यों और भारतीय सभ्यता के सिद्धांतों में गहरा साम्य है — विशेष रूप से प्रकृति और समुदाय के प्रति आदर में।

इसके बाद, पीयूष गोयल और मंत्री टॉड मैक्ले ने भारत–न्यूजीलैंड सीईओ राउंडटेबल की संयुक्त अध्यक्षता की, जिसमें दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों ने भाग लिया। इस अवसर पर पीयूष गोयल ने भारत की तेजी से बदलती आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डाला और तकनीक, कृषि, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, पर्यटन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाओं पर बल दिया। उन्होंने न्यूजीलैंड के उद्योग जगत को भारत के साथ और गहरी साझेदारी की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

पीयूष गोयल ने मंत्री टॉड मैक्ले को उनके गृह नगर रोटोरुआ में मिले स्नेहपूर्ण आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि भारत और न्यूजीलैंड आपसी मित्रता, समृद्धि और साझा प्रगति के मार्ग पर अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।


भारत और रोमानिया के बीच व्यापार, निवेश एवं आपूर्ति श्रृंखला सहयोग को सुदृढ़ करने पर द्विपक्षीय बैठक

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वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने आज रोमानिया की विदेश मंत्री महामहिम ओआना-सिल्विया त्सोइउ के साथ बुखारेस्ट में द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में व्यापार विस्तार, निवेश आकर्षण और भारत–यूरोपीय संघ (EU) के व्यापक आर्थिक ढांचे के अंतर्गत मजबूत एवं लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने पर चर्चा की गई।

दोनों पक्षों ने इस वर्ष के भीतर एक न्यायसंगत, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभदायक भारत–ईयू मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में कार्य करने पर सहमति व्यक्त की, जो चल रही वार्ताओं के लिए निर्धारित राजनीतिक मार्गदर्शन के अनुरूप है।

बैठक के दौरान मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच स्थिर व्यापार और निवेश संबंधों की समीक्षा की। भारत का रोमानिया को निर्यात वित्तीय वर्ष 2024–25 में 1.03 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा, जबकि कुल द्विपक्षीय व्यापार FY 2023–24 में लगभग 2.98 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। दोनों पक्षों ने पेट्रोलियम उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएं, दवाइयाँ और सिरेमिक जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला संबंधों को और गहरा करने तथा मानकों, परीक्षण और निवेश साझेदारियों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की ताकि दोनों देशों के बाजारों तक पहुँच को सुदृढ़ किया जा सके। उन्होंने उत्पादन के विविधीकरण और विश्वसनीय साझेदारों के रूप में मजबूत, अधिक लचीली आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने के लिए मिलकर कार्य करने का भी निर्णय लिया, जिससे दोनों देशों के व्यवसायों में स्थिरता और विश्वास सुनिश्चित हो सके।

भारत और रोमानिया के नेतृत्व के बीच हालिया उच्च-स्तरीय संवादों पर आधारित होकर, दोनों पक्षों ने इस गति को बनाए रखने और नियमित द्विपक्षीय संपर्क कार्यक्रम जारी रखने पर सहमति जताई। साथ ही, उन्होंने व्यापार को सुगम बनाने, मोबिलिटी टूलकिट विकसित करने और निवेशकों तक पहुंच को मजबूत करने के लिए फॉलो-अप कार्रवाइयों का समन्वय करने का निर्णय लिया ताकि संभावनाओं को ठोस परिणामों में बदला जा सके।

यह यात्रा दोनों देशों की भारत–रोमानिया आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है — जो व्यापार का विस्तार करती है, निवेश प्रवाह को बढ़ाती है, और कौशल-आधारित गतिशीलता के नए मार्ग खोलती है, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को पारस्परिक लाभ प्राप्त होगा।

भारत–यूरोप आर्थिक संबंधों का नया अध्याय: भारत–EFTA व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA)

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भारत–यूरोप आर्थिक संबंधों में एक निर्णायक क्षण

WHAT IS EFTA? / EFTA क्या है?

EFTA (European Free Trade Association) एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसमें आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, नॉर्वे और स्विट्ज़रलैंड शामिल हैं। इसकी स्थापना 1960 में सात सदस्य देशों द्वारा मुक्त व्यापार और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। यूरोप में यह तीन प्रमुख आर्थिक समूहों में से एक है — अन्य दो हैं यूरोपीय संघ (EU) और यूनाइटेड किंगडम (UK)

भारत–EFTA व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA), 10 मार्च 2024 को नई दिल्ली में हस्ताक्षरित हुआ और 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हुआ। यह भारत की बाह्य व्यापार नीति में एक ऐतिहासिक और निर्णायक क्षण है।
यह समझौता भारत का चार विकसित यूरोपीय देशों — स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टाइन — के साथ पहला मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है, जो अपने पैमाने और दृष्टिकोण दोनों में अत्यंत महत्वाकांक्षी है।
यह भारत के “आत्मनिर्भर भारत” दृष्टिकोण और EFTA के लचीले व विविधीकृत साझेदारी की खोज के बीच रणनीतिक एकता को दर्शाता है।

यह समझौता 14 अध्यायों से मिलकर बना है, जिनमें प्रमुख रूप से निम्न विषय शामिल हैं —

  • वस्तुओं के लिए बाज़ार पहुँच,

  • उत्पत्ति के नियम,

  • व्यापार सुगमीकरण,

  • व्यापार उपचार,

  • स्वास्थ्य और फाइटोसैनिटरी उपाय,

  • तकनीकी व्यापार अवरोध,

  • निवेश संवर्धन,

  • सेवाएँ,

  • बौद्धिक संपदा अधिकार,

  • सतत विकास और अन्य कानूनी प्रावधान।

इस समझौते का मुख्य लक्ष्य अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश को आकर्षित करना और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करना है। यह भारत के आर्थिक इतिहास के सबसे दूरदर्शी समझौतों में से एक माना जा रहा है।

WHAT IS TEPA? / TEPA क्या है?

TEPA (Trade and Economic Partnership Agreement) एक आधुनिक और महत्वाकांक्षी समझौता है, जिसमें पहली बार भारत द्वारा किए गए किसी भी FTA में निवेश और रोजगार सृजन पर बाध्यकारी प्रतिबद्धताएँ शामिल की गई हैं।

मुख्य विशेषताएँ (Key Features of TEPA)

1. उद्देश्यपूर्ण निवेश (Investment with Purpose)

अनुच्छेद 7.1 के तहत, चारों EFTA देश भारत में पहले 10 वर्षों में 50 अरब डॉलर, और अगले 5 वर्षों में अतिरिक्त 50 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

ये निवेश दीर्घकालिक और क्षमता-विकास आधारित हैं, जो विनिर्माण, नवाचार और अनुसंधान पर केंद्रित रहेंगे। इससे अगले 15 वर्षों में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है, जो भारत के कुशल श्रमिक बल को यूरोप की प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी से जोड़ेंगे।

भारत–EFTA डेस्क (स्थापित फरवरी 2025) निवेशकों के लिए एक सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य कर रही है, जो नवीकरणीय ऊर्जा, जीवन विज्ञान, इंजीनियरिंग और डिजिटल परिवर्तन जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है।

2. संतुलित बाजार पहुँच (Balanced Market Access)

TEPA में महत्वाकांक्षा और सावधानी के बीच संतुलन बनाया गया है।

  • EFTA ने 92.2% टैरिफ लाइनों पर छूट दी है, जो भारत के 99.6% निर्यात को कवर करती है।

  • भारत ने 82.7% टैरिफ लाइनों पर पहुँच दी है, जो EFTA के 95.3% निर्यात को कवर करती है, लेकिन इसमें मजबूत सुरक्षा उपाय भी शामिल हैं।

80% से अधिक आयात सोने से संबंधित हैं, जिन पर कोई बदलाव नहीं किया गया है।
डेयरी, सोया, कोयला, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण, और कुछ खाद्य उत्पादों को अपवर्जन सूची में रखा गया है।
“मेक इन इंडिया” और PLI योजना के अंतर्गत आने वाले उत्पादों के लिए शुल्क कटौती 5–10 वर्षों में चरणबद्ध रूप से लागू की जाएगी।

3. सेवाओं और कुशल प्रतिभा के लिए अवसर (Gateway for Services and Skilled Talent)

सेवाओं का क्षेत्र भारत के GVA का 55% से अधिक योगदान देता है। TEPA डिजिटल और ज्ञान-आधारित सेवाओं के लिए नया प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।

भारत ने 105 उप-क्षेत्रों में प्रतिबद्धताएँ दी हैं, जबकि
EFTA देशों ने —

  • स्विट्ज़रलैंड: 128

  • नॉर्वे: 114

  • आइसलैंड: 110

  • लिकटेंस्टाइन: 107

इसमें IT, बिज़नेस सर्विसेज़, शिक्षा, मीडिया, सांस्कृतिक और पेशेवर सेवाएँ शामिल हैं।

TEPA में नर्सिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंसी और आर्किटेक्चर जैसी प्रोफेशन के लिए पारस्परिक मान्यता समझौते (MRAs) भी शामिल हैं, जिससे पेशेवर गतिशीलता में सुगमता आएगी।

4. बौद्धिक संपदा, नवाचार और विश्वास (IPR, Innovation and Trust)

TEPA के IPR प्रावधान TRIPS समझौते के अनुरूप हैं।
भारत को सार्वजनिक स्वास्थ्य और जेनेरिक दवाओं पर अपनी लचीलापन बनाए रखने की अनुमति है।
स्विट्ज़रलैंड जैसे नवाचार-प्रधान देशों के लिए यह भारत के नियामक ढाँचे पर विश्वास का प्रतीक है।
यह अध्याय नवाचार और समावेशन के बीच संतुलित सहयोग का मॉडल प्रस्तुत करता है।

5. सतत और समावेशी विकास (Sustainable and Inclusive Development)

TEPA सतत विकास, सामाजिक प्रगति, और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देता है।
यह व्यापार प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, दक्षता और सरलीकरण को प्रोत्साहित करेगा।

क्षेत्रवार अवसर (Sectoral Opportunities)

कृषि और संबद्ध उत्पाद (Agriculture and Allied Goods)

वित्त वर्ष 2024–25 में भारत का EFTA को निर्यात 72.37 मिलियन डॉलर रहा, जिसमें मुख्य रूप से ग्वार गम, प्रसंस्कृत सब्ज़ियाँ, बासमती चावल, दालें, फल और अंगूर शामिल हैं।
TEPA के तहत स्विट्ज़रलैंड और नॉर्वे में इन पर शुल्कों में बड़ी कटौती हुई है, जिससे भारतीय किसानों और निर्यातकों को सीधा लाभ होगा।

देशवार लाभ (Country-Specific Gains)

  • देश

  • उत्पाद

  • टैरिफ रियायतें / अवसर

  • स्विट्ज़रलैंड

  • खाद्य उत्पाद, बिस्किट, अंगूर, मेवे और सब्जियाँ

  • 127.5 CHF/100kg तक के शुल्क समाप्त; भारतीय निर्यात को बड़ा अवसर

  • नॉर्वे

  • खाद्य उत्पाद, चावल, सब्जियाँ, पेय पदार्थ

  • कई उत्पादों पर शुल्क-मुक्त पहुँच; भारतीय ब्रांडों के लिए बाजार खुला

  • आइसलैंड   

  • प्रसंस्कृत खाद्य, चॉकलेट, सब्जियाँ

  • उच्च शुल्क (97 ISK/kg तक) समाप्त; भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य के लिए नए अवसर

कॉफी और चाय (Coffee and Tea)

EFTA देश विश्व के कॉफी आयात का लगभग 3% ($175 मिलियन) हिस्सा हैं।
TEPA के तहत सभी कॉफी उत्पादों पर शून्य शुल्क (Zero Duty) लागू है, जिससे भारतीय कॉफी उत्पादकों को प्रीमियम बाजारों तक पहुँच मिलेगी।

चाय के निर्यात में भी लाभ हुआ है —
2024–25 में भारत की औसत निर्यात कीमत $6.77/kg रही, जो पिछले वर्ष के $5.93/kg से अधिक है।

समुद्री उत्पाद (Marine Products)

TEPA के अंतर्गत, भारतीय मछली, झींगा, स्क्विड आदि उत्पादों पर प्रमुख EFTA देशों में महत्वपूर्ण शुल्क कटौती की गई है —

  • नॉर्वे: मछली और झींगा फीड पर 13.16% तक की शुल्क छूट।

  • आइसलैंड: 10% तक शुल्क समाप्त; झींगा, स्क्विड, फिश फीड पर 55% तक कमी।

  • स्विट्ज़रलैंड: मछली के तेल (लिवर ऑयल को छोड़कर) पर शून्य शुल्क।

औद्योगिक और विनिर्माण लाभ (Industrial and Manufacturing Gains)

EFTA को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात FY 2024–25 में $315 मिलियन रहा, जो 18% की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है।
TEPA से इलेक्ट्रिकल मशीनरी, कॉपर उत्पाद, ऊर्जा-कुशल प्रणालियों और सटीक इंजीनियरिंग के निर्यात में नए अवसर खुलेंगे।
टेक्सटाइल्स, चमड़ा, फुटवियर, खेल सामग्री, और खिलौनों को भी शून्य शुल्क और मानकीकरण में सुगमता का लाभ मिलेगा।
रत्न और आभूषण क्षेत्र में, समझौते से स्थायी शुल्क-मुक्त पहुँच सुनिश्चित हुई है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर (Electronics and Software)

$100 अरब निवेश प्रतिबद्धता और उच्च-आय यूरोपीय बाजारों तक पहुँच के साथ, TEPA भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और MSME क्षेत्रों के लिए वैश्विक विस्तार का आधार बनेगा।

देशवार अवसर:

  • स्विट्ज़रलैंड: मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्ट सेंसर, फिनटेक संचार प्रणालियाँ

  • नॉर्वे: ईवी बैटरी सिस्टम, मरीन इलेक्ट्रॉनिक्स

  • आइसलैंड: स्मार्ट होम, शिक्षा तकनीक उपकरण

  • लिकटेंस्टाइन: औद्योगिक नियंत्रण प्रणाली, बैंकिंग हार्डवेयर

रसायन, प्लास्टिक और संबंधित उत्पाद (Chemicals, Plastics & Allied Products)

EFTA ने भारत के 95% रासायनिक निर्यात पर शुल्क समाप्त या कम किए हैं।
निर्यात $49 मिलियन से बढ़कर $65–70 मिलियन तक पहुँचने की उम्मीद है।
प्लास्टिक और शेलक उत्पादों के लिए भी उच्च-मूल्य यूरोपीय बाजारों में विविधीकरण के अवसर बढ़ेंगे।

विश्वास पर आधारित साझेदारी (A Partnership Rooted in Mutual Confidence)

भारत के लिए TEPA केवल व्यापार समझौता नहीं, बल्कि नियम-आधारित, पारदर्शी और नवाचार-केंद्रित अर्थव्यवस्थाओं के साथ एक रणनीतिक विश्वास का प्रतीक है।
यह घरेलू हितों की रक्षा करते हुए भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का विश्वसनीय भागीदार बनाता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

भारत–EFTA व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
यह भारत का चार विकसित यूरोपीय देशों के साथ पहला FTA है, जिसमें अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियों की प्रतिबद्धता शामिल है।
यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाजार पहुँच को बढ़ाता है, बौद्धिक संपदा अधिकारों को सुदृढ़ करता है, और सतत व समावेशी विकास को प्रोत्साहित करता है — जिससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को नई गति मिलती है।


मुंबई में भारत–यूके व्यापार और निवेश साझेदारी को नई दिशा देने के लिए द्विपक्षीय बैठक

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मुंबई में आज केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री,पीयूष गोयल, और यूके के बिज़नेस एवं ट्रेड सचिव, राइट ऑनर पिटर काइल के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसका उद्देश्य भारत–यूके व्यापार और निवेश साझेदारी को पुनः सशक्त करना था।

इस बैठक ने India–UK Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का संकेत दिया। दोनों मंत्रियों ने Joint Economic and Trade Committee (JETCO) को पुनः सशक्त करने और इसके कार्यान्वयन की निगरानी करने पर सहमति व्यक्त की।

दोनों पक्षों ने समझौते के त्वरित, समन्वित और परिणामोन्मुख कार्यान्वयन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि दोनों देशों के व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए इसके पूर्ण लाभ सुनिश्चित किए जा सकें।

2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

मंत्रियों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की साझा महत्वाकांक्षा को दोहराया, जिसमें उन्नत विनिर्माण, डिजिटल ट्रेड, स्वच्छ ऊर्जा और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में दोनों अर्थव्यवस्थाओं के पूरक पहलुओं का लाभ उठाने पर जोर दिया गया।

CETA के लाभ और सहयोग

CETA की व्यापक संभावनाओं पर चर्चा करते हुए, दोनों मंत्रियों ने नियामक सहयोग, गैर-शुल्कीय बाधाओं का समाधान और सप्लाई चेन इंटीग्रेशन के माध्यम से इसके लाभ को अधिकतम करने के उपायों पर विचार किया।

क्षेत्रीय राउंडटेबल और CEO फोरम

बैठक से पहले, उन्नत विनिर्माण, उपभोक्ता वस्तुएँ, खाद्य एवं पेय, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, निर्माण, अवसंरचना और स्वच्छ ऊर्जा, वित्तीय, पेशेवर और व्यावसायिक सेवाएँ जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में राउंडटेबल आयोजित किए गए। इन संवादों में भारत और यूके के उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया और कार्यान्वयन मार्गदर्शन के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

साथ ही, India–UK CEO Forum का आयोजन भी हुआ, जिसमें दोनों देशों के व्यवसायिक नेताओं ने व्यापार, निवेश और नवाचार के नए अवसरों पर चर्चा की। यह मंच द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को गहरा करने और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने के लिए अहम साबित हुआ।

वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था पर विचार

दोनों मंत्रियों ने वैश्विक व्यापार और आर्थिक परिदृश्य पर भी विचार साझा किए। पीयूष गोयल ने भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रमुख विकास इंजन के रूप में उभरने का ज़िक्र किया, जबकि सचिव काइल ने कहा कि यह यूके का अब तक का सबसे अच्छा समझौता है, जो ब्रिटिश व्यवसायों को भारत के विशाल बाजार तक प्राथमिक पहुँच प्रदान करेगा और घर में रोजगार, समृद्धि और विकास को बढ़ावा देगा।

समापन

बैठक का समापन दोनों देशों के वरिष्ठ उद्योग प्रतिनिधियों की उपस्थिति में एक बिज़नेस प्लेनरी के साथ हुआ। दोनों पक्षों ने आधुनिक, समावेशी और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे विकास, निवेश और नवाचार के नए अवसर सृजित होंगे।

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