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भारत में परमाणु अपशिष्ट प्रबंधन: सुरक्षित, वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यवस्था

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परमाणु विद्युत संयंत्रों के संचालन एवं अनुरक्षण के दौरान उत्पन्न होने वाला परमाणु अपशिष्ट मुख्यतः निम्न तथा मध्यम स्तर की रेडियोधर्मिता वाला होता है, जिसका प्रबंधन उसी स्थल पर किया जाता है। इन अपशिष्टों का उपचार, सघनीकरण, संपीड़न किया जाता है तथा इन्हें सीमेंट जैसे ठोस पदार्थों में स्थिरीकृत कर विशेष रूप से निर्मित संरचनाओं—जैसे प्रबलित कंक्रीट की खाइयों/टाइल होल्स—में निपटान अथवा भंडारण हेतु रखा जाता है, जो संयंत्र परिसर में ही स्थित होती हैं।

इसके अतिरिक्त, भारत में लगभग बंद परमाणु ईंधन चक्र (Nearly Closed Nuclear Fuel Cycle) अपनाया गया है, जिसके अंतर्गत घरेलू स्रोतों से प्राप्त प्रयुक्त ईंधन (Spent Fuel) का पुनःप्रसंस्करण (रीप्रोसेसिंग) किया जाता है, ताकि अपशिष्ट भार को कम किया जा सके और उपयोगी तत्वों की पुनर्प्राप्ति कर उनका पुनर्चक्रण/पुनःउपयोग किया जा सके। प्रयुक्त ईंधन के पुनःप्रसंस्करण से प्राप्त विखंडनीय तत्वों को भविष्य के रिएक्टरों के लिए ईंधन के रूप में पुनः उपयोग किया जाता है। पुनःप्रसंस्करण के दौरान उत्पन्न उच्च-स्तरीय रेडियोधर्मी अपशिष्ट को कांचीय निष्क्रिय मैट्रिक्स में स्थिरीकृत (विट्रिफिकेशन) किया जाता है तथा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के दिशानिर्देशों के अनुरूप, अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के समान, ठोस भंडारण निगरानी सुविधाओं (Solid Storage Surveillance Facilities) में अंतरिम भंडारण के लिए रखा जाता है।

सभी परमाणु विद्युत संयंत्र स्थलों पर एक सुदृढ़ एवं सुव्यवस्थित परमाणु अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली स्थापित है। भारत ने “लगभग बंद ईंधन चक्र” को अपनाया है, जिसमें प्रयुक्त परमाणु ईंधन को एक संसाधन सामग्री के रूप में माना जाता है। बंद ईंधन चक्र का उद्देश्य प्रयुक्त ईंधन का पुनःप्रसंस्करण कर विखंडनीय पदार्थों की पुनर्प्राप्ति एवं उन्हें ईंधन के रूप में उपयोग करना है। इससे अंततः प्रयुक्त परमाणु ईंधन में उपस्थित अवशिष्ट पदार्थ का केवल अत्यंत छोटा प्रतिशत ही परमाणु अपशिष्ट के रूप में प्रबंधन हेतु शेष रहता है। वर्तमान में विद्यमान स्थलों पर निकट सतह निपटान सुविधाओं (Near Surface Disposal Facilities – NSDF) की क्षमता परमाणु विद्युत संयंत्रों से उत्पन्न अपशिष्ट के सुरक्षित भंडारण के लिए पर्याप्त है।

अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में नई प्रौद्योगिकियों के विकास हेतु अनुसंधान एवं विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें दीर्घजीवी रेडियोधर्मी घटकों—विशेषकर एक्टिनाइड्स—के पृथक्करण के लिए पार्टिशनिंग तकनीकें, समाजोपयोगी अनुप्रयोगों हेतु उपयोगी रेडियोआइसोटोप्स का निष्कर्षण तथा अपशिष्ट आयतन में कमी लाने की तकनीकें शामिल हैं।

रेडियोधर्मी अपशिष्ट के भंडारण एवं निपटान की प्रथाएँ अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के दिशानिर्देशों के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय मानकों के समकक्ष हैं। अब तक विभिन्न स्थलों पर निपटान क्षेत्रों की निगरानी से यह पुष्टि हुई है कि निपटान प्रणाली अपशिष्ट के सुरक्षित संरोधन में अत्यंत प्रभावी है। आज तक निपटित अपशिष्ट से रेडियोधर्मिता के उत्सर्जन की कोई घटना नहीं हुई है तथा न ही निपटित अपशिष्ट से जनसामान्य या पर्यावरण पर विकिरण का कोई प्रतिकूल प्रभाव देखा गया है।

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