Media24Media.com: जनजातीय गौरव दिवस: बिरसा मुंडा और आदिवासी वीरों को राष्ट्र का नमन

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

जनजातीय गौरव दिवस: बिरसा मुंडा और आदिवासी वीरों को राष्ट्र का नमन

Document Thumbnail

15 नवंबर: जनजातीय गौरव दिवस

15 नवंबर को भारत जनजातीय गौरव दिवस मनाता है, जो महान स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। वर्ष 2024–25 को उनकी 150वीं जयंती के अवसर पर जनजातीय गौरव वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। 1 से 15 नवंबर तक पूरे देश में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें बिरसा मुंडा और अन्य जनजातीय वीरों के बलिदान, संघर्ष और समृद्ध जनजातीय संस्कृति को सम्मान दिया जा रहा है।

भारत सरकार का जनजातीय मंत्रालय जनजातीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएँ चलाता है। इसी उद्देश्य से, देशभर में 11 ‘जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय’ स्थापित किए जा रहे हैं, जो विभिन्न जनजातीय आंदोलनों को संरक्षित करेंगे।

जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय पहल

भारतीय जनजातीय नेताओं ने अंग्रेजी शासन और सामंती अत्याचार के खिलाफ महत्वपूर्ण लड़ाइयाँ लड़ीं। हालांकि इन ऐतिहासिक आंदोलनों को मुख्यधारा के इतिहास में पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाया। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार विभिन्न राज्यों में संग्रहालय स्थापित कर रही है।

इन संग्रहालयों के लिए धनराशि जनजातीय अनुसंधान संस्थान समर्थन योजना के तहत दी जा रही है।

संग्रहालयों का विवरण (राज्य, स्थान, लागत, स्वीकृत अनुदान)

  • राज्य            
  • स्थान            
  •  परियोजना लागत (करोड़ रु.)
  • मंत्रालय द्वारा स्वीकृत अनुदान (करोड़ रु.)
  • झारखंड
  • रांची
  • 34.22
  • 25.00
  • गुजरात
  • राजपीपला
  • 257.94
  • 50.00
  • आंध्र प्रदेश
  • लांबासिंगी
  • 45.00
  • 25.00
  • छत्तीसगढ़
  • रायपुर
  • 53.13
  • 42.47
  • केरल
  • वायनाड
  • 16.66
  • 15.00
  • मध्य प्रदेश
  • छिंदवाड़ा
  • 40.69
  • 25.69
  • मध्य प्रदेश
  • जबलपुर
  • 14.39
  • 14.39
  • तेलंगाना
  • हैदराबाद
  • 34.00
  • 25.00
  • मणिपुर
  • तमेंगलॉन्ग
  • 51.38
  • 15.00
  • मिजोरम
  • केलसिह
  • 25.59
  • 25.59
  • गोवा
  • फोंडा
  • 27.55
  • 15.00

छत्तीसगढ़, झारखंड और मध्य प्रदेश में चार संग्रहालय पहले ही उद्घाटित किए जा चुके हैं।

मुख्य संग्रहालय

1. शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय — रायपुर, छत्तीसगढ़

1 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित।

  • कुल लागत: ₹53.13 करोड़

  • मंत्रालय का योगदान: ₹42.47 करोड़

  • 16 गैलरी, 650 मूर्तियाँ

  • डिजिटल इंस्टॉलेशन, टोपोग्राफिक मैप, एआई फोटो बूथ, कर्व स्क्रीन, RFID स्क्रीन

यह संग्रहालय वीर नारायण सिंह के आंदोलन, हल्बा क्रांति, भूमकाल क्रांति, कोया क्रांति आदि जैसे बड़े जनजातीय विद्रोहों को दर्शाता है।

वीर नारायण सिंह:

  • सोनाखान के जमींदार

  • 1856 में अकाल के दौरान ब्रिटिश अनाज भंडार से अनाज निकालकर लोगों को खिलाया

  • कैद से भागकर सेना बनाई

  • 29 नवंबर 1856 को अंग्रेजों को हराया

  • 10 दिसंबर 1857 को शहीद हुए

2. भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय — रांची

  • उद्घाटन: 15 नवंबर 2021

  • बिरसा मुंडा का "उलगुलान" (1899–1900) जनजातीय स्वशासन और भूमि अधिकारों के लिए ऐतिहासिक आंदोलन था।

  • उन्हें "धरती आबा" कहा जाता है।

  • 25 वर्ष की आयु में शहीद हुए।

3. बादल भोई राज्य जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय — छिंदवाड़ा

  • उद्घाटन: 15 नवंबर 2024

  • बादल भोई (ज. 1845) ने 1923 में बड़ा आंदोलन चलाया, कई बार गिरफ्तार हुए

  • 1940 में जेल में शहीद हुए।

4. राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह संग्रहालय — जबलपुर

  • उद्घाटन: 15 नवंबर 2024

  • 1857 में जनजातीय आंदोलन के प्रमुख नेता

  • कवि, जिन्होंने गीतों और पदों के माध्यम से अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई

  • 18 सितंबर 1858 को दोनों को अंग्रेजों ने फाँसी दी।

जनजातीय गौरव वर्ष: देशभर में कार्यक्रम

भारत के विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक, शैक्षिक और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इनमें कला प्रदर्शनियाँ, कार्यशालाएँ, भाषा संरक्षण कार्यक्रम, खेल आयोजन, शोध संगोष्ठियाँ, तथा जनजातीय इतिहास पर प्रदर्शनियाँ शामिल हैं।

अन्य प्रमुख जनजातीय सांस्कृतिक पहलें

  • पहल उद्देश्य मुख्य विशेषताएँ
    • आदि संस्कृति परियोजना
    • जनजातीय कला रूपों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म
    • 100 कोर्स, 5000 डिजिटल अभिलेख
    • आदि वाणी
    • एआई आधारित भाषा अनुवाद
    • हिंदी–अंग्रेजी–जनजातीय भाषाओं में त्वरित अनुवाद
    • ट्राइबल डिजिटल डॉक्यूमेंट रिपॉजिटरी
    • जनजातीय शोध सामग्री का डिजिटल संग्रह
    • ऑनलाइन अभिलेखागार
    • वर्णमाला और मौखिक साहित्य पहल
    • जनजातीय भाषाओं व कथाओं का संरक्षण
    • लोककथाएँ, गीतों का प्रकाशन
    • स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों का अध्ययन
    • पारंपरिक चिकित्सा, कृषि, कला का दस्तावेजीकरण
    • शोध, प्रकाशन, महोत्सव
    • आदि महोत्सव
    • राष्ट्रीय जनजातीय संस्कृति उत्सव
    • कला, संगीत, भोजन, हस्तशिल्प
    • जनजातीय कला मेले
    • जनजातीय कलाकारों को मंच
    • प्रदर्शनी, कार्यशालाएँ

निष्कर्ष

जनजातीय गौरव दिवस और जनजातीय गौरव वर्ष देश के जनजातीय समुदायों के संघर्ष, संस्कृति, इतिहास और योगदान को राष्ट्रीय चेतना में स्थान देने का महत्वपूर्ण प्रयास है। 11 स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों की स्थापना और विभिन्न सांस्कृतिक पहलों के माध्यम से भारत सरकार “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को सुदृढ़ कर रही है।


Advertisement Sushasan Divas Advertisement Mohan Chandrakar Chhattisgarh Tourism Chhattisgarh Tourism
Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.