Media24Media.com: #LBSNAA

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #LBSNAA. Show all posts
Showing posts with label #LBSNAA. Show all posts

द्रौपदी मुर्मु से 128वें इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम के आईएएस अधिकारियों ने की मुलाकात

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- राज्य सिविल सेवाओं से पदोन्नत होकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल हुए अधिकारियों ने, जो Lal Bahadur Shastri National Academy of Administration में आयोजित 128वें इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं, आज राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट की।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब उनकी जिम्मेदारियां केवल किसी जिले या राज्य तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे राष्ट्रीय स्तर की व्यापक जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। इन जिम्मेदारियों के लिए विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर समन्वित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आपसी सहयोग से संस्थागत समन्वय को सुदृढ़ किया जा सकता है और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि अब वे किसी एक क्षेत्र के प्रशासक नहीं, बल्कि पूरे देश में सुशासन के मानकों के संरक्षक हैं। उनके प्रत्येक निर्णय में वर्ष 2047 तक विकसित भारत (विकसित भारत) के लक्ष्य की झलक दिखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक आईएएस अधिकारी के रूप में उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन कर जनता की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं को पूरा करें। उनका अनुभव और ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना जटिल चुनौतियों का सामना करने में मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए।

राष्ट्रपति ने समावेशी विकास में योगदान देने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भारत का विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब इसका लाभ समाज के सबसे वंचित और कमजोर वर्गों तक पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे सुनिश्चित करें कि भौगोलिक, सामाजिक या आर्थिक कारणों से कोई भी समुदाय पीछे न छूटे।

सतत विकास और जलवायु अनुकूल शासन को भी उन्होंने प्राथमिकता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ प्रशासकों के रूप में उन्हें हरित पहलों को बढ़ावा देना, जलवायु-संवेदनशील नीतियों को अपनाना और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना होगा। आज के सामूहिक प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों के जीवन की गुणवत्ता तय करेंगे।

LBSNAA में रक्षा मंत्री का संबोधन: तकनीक, पारदर्शिता और जनसेवा पर दिया बल

No comments Document Thumbnail

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर नागरिक–सैन्य समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां प्रशासनिक तंत्र और सशस्त्र बलों ने मिलकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की और जनता में विश्वास कायम किया।” वे 29 नवंबर 2025 को उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में 100वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सशस्त्र सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ठिकानों को संतुलित और गैर-उत्तेजक तरीके से नष्ट किया, लेकिन पड़ोसी देश के अनुचित व्यवहार के कारण सीमा पर सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो पाई। उन्होंने सैनिकों की वीरता की सराहना करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यों की भी प्रशंसा की, जिन्होंने देशभर में सफल मॉक ड्रिल्स और सूचना प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच और अधिक तालमेल आवश्यक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ और ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ के मंत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सिविल सेवकों की भूमिका आत्मनिर्भर और विकसित भारत की आकांक्षाओं को गति देने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।राजनाथ सिंह ने कहा, “2014 में हमारी सरकार बनने के समय भारत विश्व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। पिछले 9–10 वर्षों में हम चौथे स्थान पर आ गए हैं। प्रतिष्ठित वैश्विक वित्तीय संस्थान भी मानते हैं कि भारत अगले 2–3 वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। आप जनता के सेवक हैं, शासक नहीं। आपका चरित्र निष्कलंक होना चाहिए, आपकी कार्यशैली ईमानदारी से भरी होनी चाहिए। ईमानदारी को अपवाद नहीं, सामान्य जीवन का हिस्सा बनाना होगा।”

राजनाथ सिंह ने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीक-प्रधान युग में नवाचार को अपनाएं और जनता की समस्याओं के समाधान खोजें। उन्होंने जनधन योजना, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और आयकर विभाग की फेसलेस असेसमेंट योजना जैसी तकनीक-संचालित पहलों का उल्लेख किया। रक्षा मंत्रालय की SAMPURNA पहल का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह एक एआई-आधारित प्रणाली है जो रक्षा खरीद और भुगतान प्रक्रियाओं का पारदर्शी विश्लेषण करती है। उन्होंने कहा कि तकनीक अंत नहीं, केवल साधन है—इसे पारदर्शिता, सुगमता और जन-सम्पर्क बढ़ाने के लिए उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने सिविल सेवकों से कहा कि वे प्रत्येक नागरिक से सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ पेश आएं। “विशेषकर जब आप समाज के वंचित या कमजोर वर्गों से मिलें, तो समझें कि उनकी मुश्किलें केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होती हैं। यही गुण एक प्रशासक को जन-केंद्रित और करुणामय बनाता है।”

रक्षा मंत्री ने सिविल सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि नवीनतम UPSC परीक्षा में एक महिला ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है और शीर्ष पाँच में से तीन स्थान महिलाओं ने हासिल किए हैं। उन्हें विश्वास है कि 2047 तक अनेक महिलाएँ कैबिनेट सचिव जैसी उच्च प्रशासनिक भूमिकाओं में पहुँचेंगी।

राजनाथ सिंह ने फाउंडेशन कोर्स को मात्र प्रशिक्षण नहीं, बल्कि एक सक्षम, संवेदनशील और कुशल प्रशासनिक ढांचा बनाने की प्रतिबद्धता बताया। उन्होंने LBSNAA की व्यापक प्रशिक्षण व्यवस्था की सराहना की, जो राष्ट्र की प्रशासनिक क्षमताओं को मजबूत बनाती है।

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रेरणादायक विरासत को स्मरण करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह अकादमी साहस, सादगी और ईमानदारी का प्रतीक है। उन्होंने 1965 के युद्ध, हरित क्रांति और “जय जवान, जय किसान” के संदेश का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से शास्त्री जी के आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि UPSC के 100 वर्ष पूरे होने पर UPSC और LBSNAA की साझेदारी ने पीढ़ियों को दिशा दी है और आगे भी भारत की प्रशासनिक संरचना को मजबूत करती रहेगी।

इससे पहले, राजनाथ सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने अकादमी परिसर में ODOP पवेलियन का भी उद्घाटन किया।

LBSNAA और भूमि संसाधन विभाग द्वारा ‘नक्शा कार्यक्रम’ पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का शुभारंभ — “वन नेशन, वन लैंड रिकॉर्ड” की दिशा में ऐतिहासिक पहल

No comments Document Thumbnail

लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) और भूमि संसाधन विभाग (DoLR) के संयुक्त तत्वावधान में ‘नक्शा कार्यक्रम’ पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का शुभारंभ

लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत भूमि संसाधन विभाग (DoLR) के सहयोग से आज दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का शुभारंभ किया। यह कार्यशाला देशभर के जिलाधिकारियों और कलेक्टरों को एक साथ लाकर शहरी भूमि संसाधन के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम — नक्शा (NAKSHA) कार्यक्रम — के राष्ट्रीय स्तर पर क्रियान्वयन के लिए तैयार करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

नक्शा कार्यक्रम डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के तहत एक वर्ष की पायलट पहल है, जिसका उद्देश्य उन्नत जियोस्पैशल मैपिंग और डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से शहरी भूमि शासन में पारदर्शिता, दक्षता और सुगमता लाना है।

यह कार्यक्रम अत्याधुनिक जियोस्पैशल तकनीक, ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) और वेब-जीआईएस उपकरणों का उपयोग करके भूमि स्वामित्व की अस्पष्टता को समाप्त करेगा, संपत्ति कर प्रणाली को सुचारू बनाएगा, और शहरी नियोजन एवं शासन के लिए मजबूत आधार प्रदान करेगा। यह पहल “वन नेशन, वन लैंड रिकॉर्ड” की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसके तहत देश के हर शहरी भूमि खंड को डिजिटल रूप से मैप और प्रमाणित किया जाएगा।

6–7 अक्टूबर, 2025 तक आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य जिलाधिकारियों और कलेक्टरों को प्रशासनिक और तकनीकी रूप से इस कार्यक्रम के राष्ट्रीय कार्यान्वयन के लिए तैयार करना है।

कार्यशाला का आयोजन LBSNAA के बी. एन. युगंधर सेंटर फॉर रूरल स्टडीज़ द्वारा किया जा रहा है, जिसमें नक्शा पहल के तकनीकी, कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर गहन चर्चा होगी।

कार्यक्रम का उद्घाटन भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज जोशी ने किया। उन्होंने अपने मुख्य वक्तव्य में कहा कि यह पहल पारदर्शी, अद्यतन और सुलभ शहरी भूमि अभिलेख सुनिश्चित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

कार्यक्रम में कुणाल सत्यार्थी (संयुक्त सचिव, DoLR) और एस. के. सिन्हा (अतिरिक्त सर्वेक्षक जनरल, सर्वे ऑफ इंडिया) सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (MPSEDC) और राष्ट्रीय भू-सूचना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (NIGST), हैदराबाद के विशेषज्ञों ने भी तकनीकी सत्रों का संचालन किया।

वरिष्ठ सिविल सेवकों जैसे एस. संबसिवा राव (निदेशक, सर्वे एवं भूमि अभिलेख, केरल सरकार), एन. के. सुधांशु (महानिदेशक, यशवंतराव चव्हाण प्रशासन अकादमी, महाराष्ट्र) और एस. चोकलिंगम (प्रधान सचिव, महाराष्ट्र सरकार) ने भी अपने अनुभव साझा किए।

कार्यशाला की मुख्य विशेषताएं:

  • व्यापक अवलोकन: नक्शा कार्यक्रम की कार्यप्रणाली, लक्ष्यों और ज़मीनी सत्यापन प्रक्रियाओं की जानकारी।

  • तकनीकी प्रशिक्षण: प्रतिभागियों को GIS और Web-GIS उपकरणों से परिचित कराया गया तथा GNSS/ETS आधारित भूमि सर्वे तकनीकों पर प्रायोगिक सत्र आयोजित किया गया।

  • व्यावहारिक अनुभव: विशेषज्ञों ने हवाई डेटा संग्रहण और क्षेत्रीय चुनौतियों पर चर्चा की।

  • क्रियान्वयन ढांचा: प्रशासनिक और कानूनी ढांचे के साथ जन-जागरूकता अभियानों के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं पर विचार-विमर्श।

यह कार्यशाला जिलाधिकारियों को नक्शा कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक तकनीकी दक्षता और स्पष्ट समझ प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित की गई है।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.