Media24Media.com: चेच और अमारी भाजी के रेशे से बने नवाचार उत्पादों ने छात्रों को किया प्रभावित

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

चेच और अमारी भाजी के रेशे से बने नवाचार उत्पादों ने छात्रों को किया प्रभावित

Document Thumbnail

जांजगीर-चाम्पा- जय भारत इंग्लिश मिडियम स्कूल बलौदा के छात्रों और शिक्षकों ने बहेराडीह गांव में स्थित देश के पहले किसान स्कूल बहेराडीह का भ्रमण किया, जहां पर वे पहली बार चेच भाजी और अमारी भाजी के रेशे से बनाई गई रंग-बिरंगी राखियां और कपड़े को देखकर खूब प्रभावित हुए.

जय भारत इंग्लिश मिडियम स्कूल बलौदा की शिक्षका रूबी दास, आरती विश्वकर्मा और शरद राजपूत ने बताया कि जिले के जैविक क़ृषि ग्राम बहेराडीह में स्थित वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल का अपने स्कूली छात्र-छात्राओं के साथ भ्रमण किया, जहां पर किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव, केंद्रीय रेशम बोर्ड, तसर अनुसन्धान केंद्र, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार के सलाहकार रामाधार देवांगन, पार्वती देवांगन, पशु सखी पुष्पा यादव व उनकी टीम द्वारा बनाई गई चेच भाजी व अमारी भाजी के रेशे से रंग बिरंगी राखियां, कपड़ा को देखकर खूब प्रभावित हुए, वहीं किसान स्कूल परिसर में प्राकृतिक खेती तकनीक का बारीकी से अवलोकन किया। स्कूल के छात्र वीर प्रताप सोनी ईशान श्रीवास, शिवम सिंह और हरि गुप्ता ने बताया कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की 36 भाजी एक साथ कभी नहीं देखा था, मगर यहां पर 56 प्रकार की भाजियों का संरक्षण और संवर्धन पहली बार देखा। छात्र हेमंत भार्गव, कुश अग्रवाल, प्रशांत गोयल और गौरी अग्रवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य राज्यों के किसानों के सहयोग से विलुप्त चीजों का बड़े पैमाने पर संरक्षित सामग्री की संग्रहालय जो कि अपने आप में सराहनीय है, जिसे धरोहर का स्वरूप दिया गया है। छात्र सिमरन अग्रवाल माहि सोनी, सोना बैनर्जी तनीषा साहू और आशिता खान ने बताया कि यहां पर क़ृषि क्षेत्र में कई प्रकार की नवाचार का काम हो रही है, जिसमें केला, अलसी, भिंडी, चेच भाजी तथा अमारी भाजी के रेशे से रंग बिरंगी आकर्षक राखियों समेत कपड़ा बनाने के साथ वर्मीवाश बनाने का काम हो रहा है।



Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.