Media24Media.com: राष्ट्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान, कोट्टायम में दो दिवसीय राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन आयोजित

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राष्ट्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान, कोट्टायम में दो दिवसीय राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन आयोजित

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कोट्टायम- राष्ट्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान मानसिक स्वास्थ्य (NHRIMH), कोट्टायम, जो कि केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH), आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एक शीर्ष संस्थान है, ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2025 के अवसर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन का आयोजन किया। 

सम्मेलन का केंद्रीय विषय था:‘सेवाओं तक पहुँच–आपदाओं और आपात स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य’।

सम्मेलन में देशभर से होम्योपैथी और मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञ, शोधकर्ता और चिकित्सक शामिल हुए। इसमें विशेष रूप से मनोवैज्ञानिक आपात स्थितियों में होम्योपैथी की बढ़ती भूमिका, नवाचार आधारित अनुसंधान और समग्र मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

उद्घाटन सत्र में देशभर के गणमान्य व्यक्तियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। डॉ. सुभाष कौशिक, महानिदेशक, CCRH, नई दिल्ली, ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि होम्योपैथी को पोस्ट-डिजास्टर पुनर्वास और लचीलापन बढ़ाने के कार्यक्रमों में समाहित करना आवश्यक है, और यह वैज्ञानिक शोध पर आधारित होना चाहिए।

चेतन कुमार मीना, IAS, कलेक्टर कोट्टायम ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने NHRIMH के समग्र मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में योगदान की सराहना की और कहा कि होम्योपैथी को आपदा प्रतिक्रिया रणनीतियों में शामिल करना मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करेगा।

डॉ. देबदत्त नायक, सहायक निदेशक (H) एवं संस्थान प्रभारी, ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने सम्मेलन के वैश्विक महत्व और आपदाओं एवं आपात स्थितियों में सुलभ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. आर. सितार्थन, प्राचार्य, NHRIMH, ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत कर सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजन टीम को सफलता में योगदान देने के लिए आभार व्यक्त किया।

पहले दिन के वैज्ञानिक सत्रों में निम्नलिखित विषयों पर चर्चा हुई:

  • आपदा मानसिक स्वास्थ्य: अनुभव और उभरते रुझान

  • हाइड्रोलॉजिकल आपदाओं में मानसिक स्वास्थ्य संकट: वायनाड, केरल में समुदाय आधारित प्रबंधन

  • आपदा प्रबंधन में होम्योपैथिक दृष्टिकोण

  • संकट स्थितियों में लचीलापन

  • N-of-1 ट्रायल्स और होम्योपैथी में ट्रांसलेशनल नेटवर्क

  • ADHD में भावनात्मक असंतुलन और होम्योपैथिक उपचार

दूसरे दिन के सत्रों में चर्चा हुई:

  • मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान में पद्धतिगत ढाँचे

  • नैदानिक और प्रयोगशाला आधारित मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन

  • आघात और मानसिक आपात स्थितियों में मानव प्रतिक्रिया

  • PTSD, ADHD, ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, साइकॉटिक डिसऑर्डर्स, और मादक पदार्थ वापसी पर केस-आधारित अध्ययन

  • तीव्र मानसिक लक्षणों के प्रबंधन में व्यक्तिगत होम्योपैथिक उपचार पर प्रस्तुति

NHRIMH के स्नातकोत्तर प्रशिक्षुओं ने बाइपोलर डिसऑर्डर, इंटरनेट एडिक्शन, सिज़ोफ्रेनिया, मेजर डिप्रेशन, OCD, शराब और गांजा उपयोग विकार, ऑटिज़्म, पार्किंसंस रोग सहित विभिन्न मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों पर शोध प्रस्तुत किया।

अन्य प्रमुख प्रतिभागियों में डॉ. के.सी. मुरलीधरन, सहायक निदेशक (H), CCRH, नई दिल्ली, ने समुदाय आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में होम्योपैथी की बढ़ती भूमिका और अंतर्विषय सहयोग की आवश्यकता पर विशेष संबोधन दिया। डॉ. सी.टी. अरविंद कुमार, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, कोट्टायम के कुलपति, ने सम्मेलन का उद्घाटन किया और संकट एवं आपातकालीन परिस्थितियों में समग्र और व्यक्ति-केंद्रित मानसिक स्वास्थ्य समर्थन प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

दो दिवसीय सम्मेलन का समापन सफलतापूर्वक हुआ। प्रतिभागियों ने अकादमिक संवाद में भाग लेने और आपातकालीन मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में होम्योपैथी की संभावनाओं को जानने के अवसर की सराहना की।

सम्मेलन ने साक्ष्य-आधारित, समग्र और सुलभ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता को दोहराया और मानसिक स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन में होम्योपैथी की सहायक भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।


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