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केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने जे.जे. अस्पताल में उन्नत यूनानी शोध केंद्र का उद्घाटन किया, यूनानी दिवस 2026 समारोह में हुए शामिल

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मुंबई- केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने मुंबई के जे.जे. अस्पताल परिसर में क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM) के नवीनीकरण किए गए को-लोकेशन सेंटर का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने यूनानी दिवस 2026 समारोह और “यूनानी चिकित्सा में नवाचार और प्रमाण आधारित अभ्यास” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता भी की। यह दो दिवसीय कार्यक्रम आयुष मंत्रालय के तहत केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CCRUM) द्वारा आयोजित किया गया है।


3.84 करोड़ रुपये की लागत से हुआ उन्नयन

1984 में स्थापित RRIUM को-लोकेशन सेंटर को लगभग 3.84 करोड़ रुपये की लागत से उन्नत किया गया है, जिससे नैदानिक सेवाओं, शोध सुविधाओं और रोगी देखभाल को बेहतर बनाया जा सके। यह उन्नयन जे.जे. अस्पताल परिसर में यूनानी चिकित्सा को मजबूत करने और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी के विजन को बताया प्रेरणा

उद्घाटन समारोह में प्रतापराव जाधव ने कहा कि जे.जे. अस्पताल में यूनानी शोध केंद्र का उन्नयन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प को दर्शाता है, जिसमें पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य ढांचे का महत्वपूर्ण स्तंभ बनाने का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि यूनानी और आधुनिक चिकित्सा को एक ही छत के नीचे लाकर मरीजों को सुरक्षित, प्रभावी और समग्र उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, जो वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रमाणों पर आधारित होगा।

नवाचार और वैज्ञानिक प्रमाण पर जोर

राष्ट्रीय सम्मेलन के विषय पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि नवाचार और प्रमाण यूनानी चिकित्सा के भविष्य के दो प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने शोधकर्ताओं से जीनोमिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक डायग्नोस्टिक्स जैसी तकनीकों का उपयोग कर यूनानी अवधारणाओं और उपचारों की वैज्ञानिक समझ को गहरा करने का आह्वान किया।

महाराष्ट्र की भूमिका महत्वपूर्ण

महाराष्ट्र सरकार के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने यूनानी दिवस के आयोजन और उन्नत सुविधा के उद्घाटन की सराहना करते हुए इसे आम लोगों के लिए किफायती और जन-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यूनानी चिकित्सा विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्गों के लिए प्रभावी और सस्ती उपचार प्रणाली प्रदान करती है।

यूनानी चिकित्सा में पिछले दशक में उल्लेखनीय प्रगति

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि पिछले दशक में यूनानी चिकित्सा में अनुसंधान, रोगी देखभाल और संस्थागत विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ मिलकर यूनानी चिकित्सा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक स्थापित करने पर काम कर रहा है।

भारतीय चिकित्सा प्रणालियों की ‘एकता में विविधता’

राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (NCISM) की अध्यक्ष डॉ. मनीषा वी. कोठेकर ने कहा कि यूनानी, आयुर्वेद, सिद्ध और सोवा-रिग्पा चिकित्सा प्रणालियाँ “एकता में विविधता” की भावना का प्रतीक हैं, जो समाज के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए कार्य करती हैं।

महत्वपूर्ण पहल और समझौते

कार्यक्रम के दौरान यूनानी चिकित्सा पर वीडियो टीज़र, CCRUM प्रकाशनों का विमोचन, सहयोगी वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च, एक अंतरराष्ट्रीय और आठ राष्ट्रीय समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान तथा मानव स्वभाव (मिज़ाज-ए-इंसान) के आकलन के लिए प्रश्नावली जारी की गई। RRIUM मुंबई की जैव रसायन और पैथोलॉजी प्रयोगशाला को NABL प्रमाणन भी प्राप्त हुआ।


केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने RRIUM मुंबई के नवीनीकृत को-लोकेशन सेंटर का उद्घाटन किया

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केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव कल मुंबई में जे.जे. अस्पताल परिसर में स्थित क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM) के नवीनीकृत को-लोकेशन सेंटर का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन के बाद यूनानी दिवस 2026 का औपचारिक समारोह तथा “यूनानी चिकित्सा में नवाचार और साक्ष्य” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन होगा, जिसका आयोजन आयुष मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CCRUM) द्वारा किया जा रहा है।

लगभग 3.84 करोड़ रुपये की लागत से नवीनीकृत RRIUM को-लोकेशन सेंटर, यूनानी चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करने और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के साथ समन्वित स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 1984 में स्थापित यह केंद्र नैदानिक अनुसंधान, शैक्षणिक प्रशिक्षण और रोगी देखभाल के लिए एक प्रमुख सुविधा के रूप में कार्य करता रहा है। उन्नत बुनियादी ढांचे से अब साक्ष्य-आधारित अनुसंधान और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा उपलब्ध होगी, विशेष रूप से मुंबई के प्रमुख आधुनिक चिकित्सा परिसरों में से एक में।

राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन सत्र 14 फरवरी को सुबह 10:30 बजे आयोजित होगा, जिसमें महाराष्ट्र सरकार के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश अबितकर, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, भारतीय चिकित्सा प्रणाली राष्ट्रीय आयोग की अध्यक्ष डॉ. मनीषा उपेंद्र कोठेकर, आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दास, आयुष मंत्रालय के यूनानी सलाहकार डॉ. एम. ए. कासमी, राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान के निदेशक प्रो. सैयद शाह आलम और CCRUM के महानिदेशक डॉ. एन. ज़हीर अहमद सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।

दो दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य नवाचार, अनुसंधान सत्यापन और समन्वित स्वास्थ्य मॉडल पर विचार-विमर्श के माध्यम से यूनानी चिकित्सा में साक्ष्य-आधारित प्रगति को बढ़ावा देना है। इसमें मुख्य व्याख्यान, वैज्ञानिक सत्र, पैनल चर्चा और प्रदर्शनी शामिल होगी, जिसमें यूनानी औषधि उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के योगदान को प्रदर्शित किया जाएगा। सम्मेलन के दौरान कई संस्थागत पहलों का शुभारंभ किया जाएगा, जिनमें CCRUM का नया सहयोगात्मक वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप्स, नई प्रकाशनों का विमोचन, समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान, यूनानी चिकित्सा पर वीडियो तथा अनुसंधान और व्यवहार में उत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कार प्रदान करना शामिल है।

हर वर्ष 11 फरवरी को हकीम अजमल खान की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला यूनानी दिवस, यूनानी चिकित्सा की समृद्ध परंपरा के संरक्षण और प्रचार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट करता है।प्रतापराव जाधव के नेतृत्व में यूनानी दिवस 2026 का आयोजन पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को मुख्यधारा में लाने और नवाचार, अनुसंधान तथा स्वास्थ्य सेवा एकीकरण के माध्यम से उनकी वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए भारत सरकार की दृष्टि को रेखांकित करता है।


आयुष मंत्रालय 2025: पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक मान्यता और मुख्यधारा में लाने में महत्वपूर्ण वर्ष

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साल 2025 भारत के आयुष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष रहा, जिसमें पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को मुख्यधारा में लाने, शोध, वैश्विक सहयोग और डिजिटल एकीकरण के माध्यम से नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने का प्रयास किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुष मंत्रालय ने “विकसित भारत@2047” के विजन के अनुरूप भारत की पारंपरिक चिकित्सा नेतृत्व क्षमता को मजबूत किया और लाखों नागरिकों तक स्वास्थ्य लाभ पहुँचाया।

मुख्य उपलब्धियाँ और कार्यक्रम:

  • सीएआरआई का नया परिसर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI) के 2.92 एकड़ में बने नए ₹187 करोड़ के अत्याधुनिक परिसर की आधारशिला रखी। इस परिसर में 100-बेड का अनुसंधान अस्पताल, विशेष क्लीनिक, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और प्रशिक्षण सुविधाएं होंगी।

  • अंतरराष्ट्रीय उन्नीस सम्मेलन: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय परिषद फॉर रिसर्च इन यूनानी मेडिसिन (CCRUM) द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने अनुसंधान और नवाचार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की यूनानी प्रणाली विश्व में सर्वमान्य हो रही है।

  • महाकुंभ में आयुष सेवाएं: प्रयागराज महाकुंभ में आयुष सेवाओं के माध्यम से 9 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों को लाभ मिला। OPD, मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों, योग सत्रों और औषधीय पौधों के वितरण के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता और जीवन शैली सुधार पर जोर दिया गया।

  • भारत-इंडोनेशिया सहयोग: पारंपरिक चिकित्सा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भारत और इंडोनेशिया के बीच MoU का आदान-प्रदान हुआ। इस सहयोग से वैश्विक मानक, प्रशिक्षण और ज्ञान का आदान-प्रदान मजबूत होगा।

  • WHO द्वारा ICD-11 अपडेट: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2025 में ICD-11 में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी के लिए समर्पित मॉड्यूल को शामिल किया, जिससे वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा के डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग में मजबूती आई।

  • ‘देश का प्रकृति परीक्षण अभियान’ में रिकॉर्ड: अभियान के पहले चरण में 1.29 करोड़ प्रकृति आकलन हुए और भारत ने 5 गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए।

  • योग महोत्सव और 11वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: योग महोत्सव 2025 का उद्घाटन करते हुए आयुष मंत्री श्री प्रताप राव जाधव ने 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की 100-दिन गिनती शुरू की। प्रधानमंत्री ने विश्व के सबसे बड़े योग कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए 3 लाख प्रतिभागियों के साथ भारत की योग विश्वसनीयता को उजागर किया।

  • बीमस्टेक शिखर सम्मेलन: प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक चिकित्सा के लिए उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की घोषणा की, जिससे क्षेत्रीय सहयोग और क्षमता निर्माण को बल मिलेगा।

  • विश्व होम्योपैथी दिवस और राष्ट्रीय सम्मेलन: गैंधीनगर में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में 8,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने शिक्षा, अनुसंधान और अभ्यास पर चर्चा की।

  • WHO–IRCH हर्बल मेडिसिन कार्यशाला: 17 देशों ने भाग लिया और आयुष मंत्रालय ने गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता में वैश्विक सहयोग को मजबूत किया।

  • Ayush Nivesh Saarthi पोर्टल: निवेशकों और उद्यमियों के लिए डिजिटल निवेश पोर्टल लॉन्च किया गया, जो पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र को निवेश-योग्य बनाने में सहायक होगा।

  • WHO Global Summit on Traditional Medicine: नई दिल्ली में आयोजित दूसरे सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और आयुष मंत्री जाधव ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा में वैश्विक नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित किया। सम्मेलन में 16 द्विपक्षीय बैठकें और कई वैश्विक पहलें हुईं।

निष्कर्ष:

साल 2025 ने आयुष मंत्रालय को पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने, वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने और नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए निर्णायक रूप से आगे बढ़ाया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने स्वास्थ्य, अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और वैश्विक सहयोग में नई ऊंचाइयों को छुआ, जिससे आयुष प्रणाली विश्व स्वास्थ्य परिदृश्य में एक मजबूत और विश्वसनीय विकल्प बनकर उभरी।


द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन में आयुष एक्सपो होगा प्रमुख आकर्षण, भारत मंडपम में 17–19 दिसंबर को आयोजन

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भारत सरकार का आयुष मंत्रालय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन (Global Traditional Medicine Summit) के अंतर्गत आयुष एक्सपो का आयोजन करेगा। यह शिखर सम्मेलन 17 से 19 दिसंबर 2024 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।

आयुष एक्सपो इस शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख और केंद्रीय मंच होगा, जिसमें भारत की आयुष प्रणालियों के साथ-साथ दुनिया भर की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को एक साथ प्रस्तुत किया जाएगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक संवाद, नीति विमर्श और नवाचार को बढ़ावा देना है, ताकि पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों में सुरक्षित, समावेशी और प्रमाण-आधारित तरीके से एकीकृत किया जा सके।

आयुष की समग्र और वैज्ञानिक प्रस्तुति

आयुष एक्सपो में आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी का व्यापक और क्यूरेटेड प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शनी में इमर्सिव अनुभव, वैज्ञानिक व्याख्याएं और डिजिटल इंटरफेस के माध्यम से भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को वैश्विक संदर्भ में प्रस्तुत किया जाएगा, जो आधुनिक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं से जुड़ा होगा।

प्रो. (डॉ.) तनुजा मनोज नेसरी, निदेशक, आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (ITRA) ने कहा कि यह एक्सपो भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैज्ञानिक आधार और वैश्विक प्रासंगिकता के साथ प्रस्तुत करने के लिए डिजाइन किया गया है। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय ज्ञान, प्रमाण-आधारित अभ्यास और उभरती तकनीकों को एक मंच पर लाकर यह एक्सपो शोध सहयोग को मजबूत करेगा और पारंपरिक चिकित्सा के जिम्मेदार एकीकरण को बढ़ावा देगा।

प्रमुख आकर्षण

आयुष एक्सपो के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं:

  • औषधीय पौधे एवं बीज मंडप, जिसमें लगभग 40 जीवित औषधीय पौधों और दुर्लभ बीजों का प्रदर्शन किया जाएगा, जो भारत की वनस्पति विरासत और पारंपरिक चिकित्सा की पारिस्थितिक नींव को दर्शाएगा।

  • स्पाइसेज़ ऑफ इंडिया पवेलियन, जिसमें आमतौर पर उपयोग होने वाले मसालों के वैज्ञानिक गुणों और निवारक स्वास्थ्य में उनकी भूमिका को प्रदर्शित किया जाएगा।

  • मेटालोथेरेप्यूटिक्स ज़ोन, जहां शोधन प्रक्रियाओं, भस्म निर्माण और सुरक्षा मानकों की वैज्ञानिक जानकारी दी जाएगी।

  • दिनचर्या, ऋतुचर्या और पंचकर्म से जुड़े अनुभाग, जो निवारक स्वास्थ्य देखभाल और उपचारात्मक पद्धतियों को पारंपरिक उपकरणों और व्याख्यात्मक प्रारूपों के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे।

  • पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL), जिसे जैव-चोरी रोकने और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त पहल के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा।

परंपरा और तकनीक का संगम

एक्सपो में आयुष नेक्स्टजेन स्टार्ट-अप्स पवेलियन भी होगा, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रेडिक्टिव डायग्नोस्टिक्स, वेलनेस डिवाइसेज़ और डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म्स से जुड़े नवाचार प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके साथ ही, होलोग्राफिक डिस्प्ले, वर्चुअल रियलिटी आधारित योग और पंचकर्म अनुभव तथा आयुष ग्रिड का प्रदर्शन किया जाएगा, जो शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भारत की डिजिटल संरचना को दर्शाता है।

आगंतुक सहभागिता और वैश्विक सहभाग

आगंतुकों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण (स्वास्थ्य परीक्षा), प्रकृति परीक्षण, ध्यान एवं योग सत्र, पोषण आधारित प्रदर्शन और बच्चों के लिए वेलनेस लर्निंग ज़ोन जैसी सहभागितापूर्ण गतिविधियां भी होंगी।

इसके अतिरिक्त, एक्सपो में एक विशेष WHO ज़ोन भी होगा, जहां WHO सदस्य देशों की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों, सामुदायिक स्वास्थ्य मॉडल और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को प्रदर्शित किया जाएगा। ये वैश्विक प्रदर्शन स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र, सामाजिक नवाचार और प्रकृति-आधारित स्वास्थ्य समाधानों पर केंद्रित होंगे।

वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा लाइब्रेरी का शुभारंभ

आयुष एक्सपो का एक प्रमुख आकर्षण WHO द्वारा वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा लाइब्रेरी (GTML) का शुभारंभ होगा। यह डिजिटल रिपॉजिटरी दुनिया भर की पारंपरिक चिकित्सा से संबंधित ज्ञान, डेटा और शोध साक्ष्यों को एक मंच पर लाएगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग, प्रमाण-आधारित नीति निर्माण और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की वैश्विक पहचान को बढ़ावा मिलेगा।

वैश्विक स्वास्थ्य में भारत की भूमिका

अधिकारियों के अनुसार, आयुष एक्सपो अपनी वैश्विक रूपरेखा, वैज्ञानिक क्यूरेशन, उन्नत डिजिटल तकनीकों और नवाचार व जवाबदेही पर जोर के कारण विशिष्ट है। यह प्रदर्शनी दर्शाएगी कि कैसे पारंपरिक ज्ञान, जब प्रमाण, नैतिकता और जिम्मेदार शासन से समर्थित हो, तो आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

आयुष मंत्रालय ने द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के अंतर्गत आयुष एक्सपो में भाग लेने के लिए प्रतिनिधियों, वैश्विक भागीदारों और मीडिया को आमंत्रित किया है, जिससे भारत और WHO की साझेदारी में पारंपरिक चिकित्सा को समान, सतत और जन-केंद्रित वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों का हिस्सा बनाने की प्रतिबद्धता को और सशक्त किया जा सके।

भारत-जर्मनी सहयोग: आयुष मंत्रालय की पारंपरिक और एकीकृत चिकित्सा पर तीसरी संयुक्त कार्य समूह बैठक बर्लिन में संपन्न

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भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और जर्मनी के संघीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच वैकल्पिक चिकित्सा पर तीसरी संयुक्त कार्य समूह (JWG) बैठक 18 से 20 नवंबर 2025 को बर्लिन में आयोजित की गई, जो पारंपरिक और एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में भारत-जर्मनी सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मोनालिशा दाश, संयुक्त सचिव, आयुष मंत्रालय ने किया। इसमें प्रो. (डॉ.) रबिनारायण आचार्य, महानिदेशक, CCRAS; डॉ. सुभाष कौशिक, महानिदेशक, CCRH; डॉ. कौस्तभ उपाध्याय, सलाहकार, आयुष मंत्रालय; और डॉ. काशीनाथ समागंदी, निदेशक, MDNY शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए प्रमुख जर्मन संस्थानों के साथ वार्ता की।

जर्मनी की ओर से कार्यक्रम का नेतृत्व पॉल जुबाइल, हेड ऑफ डिवीजन यूरोपियन एंड इंटरनेशनल हेल्थ पॉलिसी, जर्मन स्वास्थ्य मंत्रालय; प्रो. डॉ. मेड. गियोर्ग सिफ़र्ट, हेड ऑफ कॉम्पिटेंस सेंटर फॉर ट्रेडिशनल एंड इंटीग्रेटिव मेडिसिन, चारिटी बर्लिन; आंद्रेया गैले, सीईओ, BKK mkk (स्टैच्यूटरी हेल्थ इंश्योरेंस फंड); और डॉ. जैकलीन वीसनर, हेड ऑफ डिपार्टमेंट फॉर विटामिन्स, मिनरल्स, स्पेशल थेरेप्यूटिक अप्रोचेज, फेडरल इंस्टिट्यूट फॉर ड्रग्स एंड मेडिकल डिवाइसेज (BfArM) ने किया।

वार्ता के तीन मुख्य स्तंभ रहे—

  1. पारंपरिक चिकित्सा को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में समाहित करना।

  2. रोगियों की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिपूर्ति (reimbursement) मार्ग स्थापित करना।

  3. नियामक अनुमोदन तंत्र को मजबूत करना।

इन विषयों में दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता पर बल दिया गया कि वे सबूत-आधारित और नागरिक-केंद्रित पारंपरिक चिकित्सा प्रथाओं को बढ़ावा देंगे।

मुख्य कार्यक्रम में निम्नलिखित शामिल थे:

  • कॉम्पिटेंस सेंटर फॉर ट्रेडिशनल एंड इंटीग्रेटिव मेडिसिन, चारिटी यूनिवर्सिटी, जहां सहयोगी अनुसंधान के अवसरों की खोज और आयुष मंत्रालय के साथ प्रस्तावित एमओयू को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

  • कम्युनिटी हॉस्पिटल हावेल्होहे – क्लिनिक फॉर एन्थ्रोपोसॉफिक मेडिसिन, जहां एकीकृत देखभाल और अनुसंधान प्रथाओं की समीक्षा की गई।

  • फेडरल जॉइंट कमिटी (G-BA), जहां पारंपरिक चिकित्सा से संबंधित बीमा और प्रतिपूर्ति तंत्र पर विस्तृत चर्चा हुई।

यह मिशन आयुष मंत्रालय के रणनीतिक प्रयासों को दर्शाता है, जिसमें आयुष प्रणालियों का वैश्विकरण, सबूत-आधारित एकीकरण के लिए मजबूत ढांचे का निर्माण, और उच्च-मूल्य वाले अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करना शामिल है, जिससे भारत का वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र में प्रभाव बढ़े।

मंत्रालय ने पुष्टि की कि जर्मनी के साथ सतत सहयोग अनुसंधान, नियामक समन्वय, और रोगियों की पहुँच को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और वैज्ञानिक प्रमाण पर आधारित एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल समाधान प्रदान करने में तेजी लाएगा।

“आयुर्वेद के माध्यम से यकृत-पित्तीय स्वास्थ्य: पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वय” — भुवनेश्वर में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

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साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आयुष मंत्रालय अपने अनुसंधान संगठन केंद्रीय आयुर्वेद विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) और उसके केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI), भुवनेश्वर, के माध्यम से, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और उसके क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (RMRC), भुवनेश्वर के सहयोग से, “आयुर्वेद के माध्यम से यकृत-पित्तीय स्वास्थ्य : पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वय” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 25 से 26 अक्टूबर 2025 तक भुवनेश्वर में करने जा रहा है।

इस संगोष्ठी का विषय “यकृत सुरक्षा, जीवित रक्षा” (Yakrut Suraksha, Jiveeta Raksha) है, जो यकृत और पित्तीय स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुर्वेद और आधुनिक जैव-चिकित्सा विज्ञान के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रो. रबिनारायण आचार्य ने कहा कि “आयुर्वेदिक विज्ञान यकृत-पित्तीय स्वास्थ्य के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करता है, जो रोकथाम, संतुलन और सतत स्वास्थ्य सेवा पर बल देता है। सहयोगात्मक अनुसंधान के माध्यम से हम आयुर्वेद के सिद्धांतों और औषधियों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कर रहे हैं। इस तरह के प्रयास न केवल आयुर्वेद की वैश्विक विश्वसनीयता को मजबूत करते हैं, बल्कि साक्ष्य-आधारित समाधानों के लिए नए मार्ग भी खोलते हैं।”

आईसीएमआर की अतिरिक्त महानिदेशक और आरएमआरसी भुवनेश्वर की निदेशक डॉ. संगमित्रा पाटी ने कहा कि “यकृत-पित्तीय विकार जटिल स्वास्थ्य चुनौतियाँ हैं, जिनके समाधान के लिए अंतःविषय अनुसंधान आवश्यक है। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के बीच सहयोग रोगों की बेहतर समझ, सुरक्षित उपचार और रोगी देखभाल के नए अवसर प्रदान करता है।”

दो दिवसीय इस संगोष्ठी में पाँच प्रमुख विषयों पर चर्चा होगी, जिसमें यकृत-पित्तीय स्वास्थ्य पर सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष बल रहेगा।

  • पहले दिन आयुर्वेदिक आहार, दिनचर्या, ऋतुचर्या, पंचकर्म और डिटॉक्सिफिकेशन थैरेपी जैसे समग्र निवारक और उपचारात्मक दृष्टिकोणों पर विचार-विमर्श होगा। साथ ही NAFLD, हेपेटाइटिस और लिवर सिरोसिस के रोग-विशिष्ट प्रबंधन पर भी सत्र आयोजित किए जाएंगे।

  • दूसरे दिन वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित एकीकृत दृष्टिकोण, औषधीय अनुसंधान, और आधुनिक अस्पताल प्रणालियों के साथ आयुर्वेद के समन्वय पर चर्चा होगी।

संगोष्ठी में 58 वैज्ञानिक प्रस्तुतियाँ (22 मौखिक और 36 पोस्टर) शामिल होंगी, जिनमें नैदानिक परिणाम और अनुसंधान के व्यावहारिक पहलुओं को रेखांकित किया जाएगा।

कार्यक्रम में एक विशेष सत्र “हेपेटोबिलियरी विकारों में जनजातीय चिकित्सा” पर भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें ओडिशा के विभिन्न हिस्सों से आए 20 जनजातीय वैद्य पारंपरिक उपचार पद्धतियाँ साझा करेंगे।

यह सहयोगात्मक पहल सीसीआरएएस और आईसीएमआर के बीच अंतःविषय अनुसंधान और साक्ष्य-आधारित परिणामों को बढ़ावा देने की दिशा में आयुष मंत्रालय की वैज्ञानिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

आयुष मंत्रालय के अधीन सीसीआरएएस द्वारा लिवर स्वास्थ्य के लिए विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों पर वैज्ञानिक अनुसंधान किया जा रहा है, जैसे पिक्रोराइज़ा कुरोआ (कुटकी) और आयुष-PTK पर पूर्व-नैदानिक अध्ययन, जो यकृत-संरक्षण में प्रभावी पाए गए हैं। सीएसआईआर-सीडीआरआई लखनऊ के साथ संयुक्त अनुसंधान एटीटी-प्रेरित यकृत विषाक्तता पर भी केंद्रित है। इसके अतिरिक्त, आयोग्यवर्धिनी वटी और पिप्पल्यासव पर बहुकेन्द्रित नैदानिक अध्ययन ने MASLD के प्रबंधन में आशाजनक परिणाम दिए हैं।

संगोष्ठी में देश के प्रमुख विशेषज्ञ और वैज्ञानिक शामिल होंगे, जिनमें एआईआईएमएस भुवनेश्वर के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) अशुतोष बिस्वास, केआईआईएमएस भुवनेश्वर के प्रो-चांसलर प्रो. सुब्रत कुमार आचार्य, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स नई दिल्ली के कार्यकारी निदेशक, तथा सीएआरआई भुवनेश्वर की प्रभारी सहायक निदेशक डॉ. सरदा ओटा शामिल हैं।

यह संगोष्ठी आयुर्वेद के माध्यम से यकृत-पित्तीय स्वास्थ्य पर वैज्ञानिक विमर्श को नई दिशा देगी और पारंपरिक चिकित्सा व आधुनिक विज्ञान के समन्वय से भारत को वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में मदद करेगी।

राष्ट्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान, कोट्टायम में दो दिवसीय राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन आयोजित

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कोट्टायम- राष्ट्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान मानसिक स्वास्थ्य (NHRIMH), कोट्टायम, जो कि केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH), आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एक शीर्ष संस्थान है, ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2025 के अवसर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन का आयोजन किया। 

सम्मेलन का केंद्रीय विषय था:‘सेवाओं तक पहुँच–आपदाओं और आपात स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य’।

सम्मेलन में देशभर से होम्योपैथी और मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञ, शोधकर्ता और चिकित्सक शामिल हुए। इसमें विशेष रूप से मनोवैज्ञानिक आपात स्थितियों में होम्योपैथी की बढ़ती भूमिका, नवाचार आधारित अनुसंधान और समग्र मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

उद्घाटन सत्र में देशभर के गणमान्य व्यक्तियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। डॉ. सुभाष कौशिक, महानिदेशक, CCRH, नई दिल्ली, ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि होम्योपैथी को पोस्ट-डिजास्टर पुनर्वास और लचीलापन बढ़ाने के कार्यक्रमों में समाहित करना आवश्यक है, और यह वैज्ञानिक शोध पर आधारित होना चाहिए।

चेतन कुमार मीना, IAS, कलेक्टर कोट्टायम ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने NHRIMH के समग्र मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में योगदान की सराहना की और कहा कि होम्योपैथी को आपदा प्रतिक्रिया रणनीतियों में शामिल करना मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करेगा।

डॉ. देबदत्त नायक, सहायक निदेशक (H) एवं संस्थान प्रभारी, ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने सम्मेलन के वैश्विक महत्व और आपदाओं एवं आपात स्थितियों में सुलभ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. आर. सितार्थन, प्राचार्य, NHRIMH, ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत कर सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजन टीम को सफलता में योगदान देने के लिए आभार व्यक्त किया।

पहले दिन के वैज्ञानिक सत्रों में निम्नलिखित विषयों पर चर्चा हुई:

  • आपदा मानसिक स्वास्थ्य: अनुभव और उभरते रुझान

  • हाइड्रोलॉजिकल आपदाओं में मानसिक स्वास्थ्य संकट: वायनाड, केरल में समुदाय आधारित प्रबंधन

  • आपदा प्रबंधन में होम्योपैथिक दृष्टिकोण

  • संकट स्थितियों में लचीलापन

  • N-of-1 ट्रायल्स और होम्योपैथी में ट्रांसलेशनल नेटवर्क

  • ADHD में भावनात्मक असंतुलन और होम्योपैथिक उपचार

दूसरे दिन के सत्रों में चर्चा हुई:

  • मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान में पद्धतिगत ढाँचे

  • नैदानिक और प्रयोगशाला आधारित मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन

  • आघात और मानसिक आपात स्थितियों में मानव प्रतिक्रिया

  • PTSD, ADHD, ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, साइकॉटिक डिसऑर्डर्स, और मादक पदार्थ वापसी पर केस-आधारित अध्ययन

  • तीव्र मानसिक लक्षणों के प्रबंधन में व्यक्तिगत होम्योपैथिक उपचार पर प्रस्तुति

NHRIMH के स्नातकोत्तर प्रशिक्षुओं ने बाइपोलर डिसऑर्डर, इंटरनेट एडिक्शन, सिज़ोफ्रेनिया, मेजर डिप्रेशन, OCD, शराब और गांजा उपयोग विकार, ऑटिज़्म, पार्किंसंस रोग सहित विभिन्न मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों पर शोध प्रस्तुत किया।

अन्य प्रमुख प्रतिभागियों में डॉ. के.सी. मुरलीधरन, सहायक निदेशक (H), CCRH, नई दिल्ली, ने समुदाय आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में होम्योपैथी की बढ़ती भूमिका और अंतर्विषय सहयोग की आवश्यकता पर विशेष संबोधन दिया। डॉ. सी.टी. अरविंद कुमार, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, कोट्टायम के कुलपति, ने सम्मेलन का उद्घाटन किया और संकट एवं आपातकालीन परिस्थितियों में समग्र और व्यक्ति-केंद्रित मानसिक स्वास्थ्य समर्थन प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

दो दिवसीय सम्मेलन का समापन सफलतापूर्वक हुआ। प्रतिभागियों ने अकादमिक संवाद में भाग लेने और आपातकालीन मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में होम्योपैथी की संभावनाओं को जानने के अवसर की सराहना की।

सम्मेलन ने साक्ष्य-आधारित, समग्र और सुलभ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता को दोहराया और मानसिक स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन में होम्योपैथी की सहायक भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।


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