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भारतीय फार्माकोपिया आयोग को WHO-SEARN का फार्माकोविजिलेंस में क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र और गुणवत्ता के तकनीकी केंद्र का दर्जा

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नई दिल्ली- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) ने 4–5 अगस्त 2026 को नेपाल के काठमांडू में आयोजित दक्षिण-पूर्व एशिया नियामक नेटवर्क (SEARN) की 10वीं वर्षगांठ बैठक में भाग लिया। इस बैठक में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरणों (NRAs), फार्माकोपिया संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य चिकित्सा उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना था।

SEARN विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय (SEARO) द्वारा वर्ष 2016 में स्थापित एक सहयोगात्मक मंच है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों की नियामक प्रणालियों को ज्ञान साझा करने, नियामकीय समन्वय, क्षमता निर्माण तथा सहयोगात्मक तंत्र के माध्यम से सुदृढ़ बनाना है। यह नेटवर्क गुणवत्ता आश्वासन, फार्माकोविजिलेंस, क्लीनिकल ट्रायल निगरानी, नियामकीय तैयारी और चिकित्सा उपकरणों के विनियमन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कार्य करता है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल में डॉ. वी. कलैसेलवन (सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक), डॉ. जय प्रकाश (वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी), डॉ. रॉबिन कुमार (वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी) तथा अरविंद कुमार शर्मा (वैज्ञानिक अधिकारी) शामिल थे।

बैठक के दौरान IPC ने भारत की मजबूत दवा नियामक प्रणाली तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय फार्माकोपिया, इंडियन फार्माकोपिया रेफरेंस सब्स्टेंस (IPRS), इम्प्योरिटी रेफरेंस स्टैंडर्ड्स (IMPRS), फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (PvPI), मैटेरियोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (MvPI), क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक पहलों की जानकारी साझा की।

बैठक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) को WHO-SEARN का फार्माकोविजिलेंस में क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र (Regional Centre of Excellence in Pharmacovigilance) तथा गुणवत्ता के तकनीकी केंद्र (Technical Centre in Quality) के रूप में मान्यता मिलना रही।

यह प्रतिष्ठित मान्यता फार्माकोविजिलेंस प्रणाली को मजबूत करने, दवा गुणवत्ता मानकों को आगे बढ़ाने तथा WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में नियामकीय क्षमता निर्माण में IPC के निरंतर योगदान की पुष्टि करती है। यह सम्मान फार्माकोपिया विज्ञान एवं मानकों के क्षेत्र में IPC की अग्रणी भूमिका तथा सदस्य देशों के बीच सहयोग, ज्ञान साझा करने और मानकों के सामंजस्य को बढ़ावा देने की उसकी प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है।

बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने वैज्ञानिक ज्ञान, नियामकीय अनुभवों और दवा नियमन से जुड़ी उभरती चुनौतियों—जैसे गुणवत्ता आश्वासन, दवा सुरक्षा, नियामकीय सहयोग, डिजिटल परिवर्तन और क्षेत्रीय समन्वय—पर विस्तृत चर्चा की।

भारतीय फार्माकोपिया आयोग ने पुनः दोहराया कि वह WHO-SEARN की पहलों का समर्थन जारी रखेगा तथा दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नियामकीय उत्कृष्टता और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

29 जून को होगी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद की 16वीं बैठक, स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख नीतियों पर होगा मंथन

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नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय 29 जून 2026 (सोमवार) को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (Central Council of Health and Family Welfare - CCHFW) की 16वीं बैठक आयोजित करेगा। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा करेंगे।

इस सम्मेलन में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और प्रतापराव जाधव भी शामिल होंगे। इसके अलावा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, गैर-सरकारी सदस्य तथा स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ भी भाग लेंगे।

स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं पर होगी चर्चा

बैठक में केंद्र और राज्यों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को मजबूत बनाने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण नीतिगत विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इस वर्ष सम्मेलन के प्रमुख विषय होंगे—

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): सतत विकास लक्ष्य (SDGs) एवं प्राथमिकताएं

  • खाद्य एवं औषधि सुधार (Food & Drug Reforms)

  • सहायक स्वास्थ्य सेवाएं (Allied Health Services)

इन विषयों पर चल रही योजनाओं की समीक्षा, राज्यों के सफल अनुभवों का आदान-प्रदान, नई चुनौतियों की पहचान और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए साझा रणनीति तैयार की जाएगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सर्वोच्च सलाहकार निकाय

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत गठित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का सर्वोच्च सलाहकार निकाय है। यह परिषद चिकित्सा एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा करती है तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों को आवश्यक सुझाव देती है।

सहकारी संघवाद को मिलेगा और बल

यह सम्मेलन स्वास्थ्य क्षेत्र में सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। इसके माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारें राष्ट्रीय महत्व के स्वास्थ्य मुद्दों पर विचार-विमर्श कर सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बेहतर नियोजन और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए साझा रणनीति तैयार करती हैं।

सरकार का मानना है कि इस बैठक से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, नीति निर्माण में बेहतर समन्वय और देशभर में जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन को नई दिशा मिलेगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), PM-ABHIM और अन्य प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की।

बैठक में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीबी उन्मूलन, वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम, गैर-संचारी रोगों (NCDs) की शुरुआती जांच और सरकारी अस्पतालों में दवाइयों व जांच सुविधाओं की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया गया।

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पश्चिम बंगाल को 3505.59 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जिसमें से पहली किस्त के रूप में 527.58 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। साथ ही PM-ABHIM और 15वें वित्त आयोग के स्वास्थ्य अनुदान का शीघ्र उपयोग करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में “टीबी मुक्त भारत अभियान” को तेज करने, HPV वैक्सीनेशन शुरू करने और खसरा-रूबेला उन्मूलन अभियान को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मातृ मृत्यु दर (MMR), नवजात मृत्यु दर (NMR) और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) में सुधार के लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं।

उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के विस्तार, गांव स्तर पर स्वास्थ्य जांच बढ़ाने और आयुष्मान भारत PM-JAY योजना को जल्द लागू करने पर जोर दिया। इस योजना से राज्य के लगभग 1.45 करोड़ परिवारों और वरिष्ठ नागरिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

बैठक में कालाजार, डेंगू, मलेरिया और लिम्फेटिक फाइलेरिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए सतर्क निगरानी और समय पर कार्रवाई पर भी चर्चा हुई।

सुवेंदु अधिकारी ने केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया तथा राज्य में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने पश्चिम बंगाल के उत्तर क्षेत्र में एक नए AIIMS संस्थान और मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए केंद्र से सहयोग की मांग भी की।

JANANI प्लेटफॉर्म लॉन्च: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा डिजिटल मजबूती

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देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘JANANI’ डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करेगा।


JANANI प्लेटफॉर्म गर्भावस्था, प्रसव, नवजात शिशु देखभाल और परिवार नियोजन जैसी सेवाओं की ट्रैकिंग करेगा। इसमें QR आधारित डिजिटल मदर एंड चाइल्ड हेल्थ कार्ड, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी अलर्ट, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और समय पर स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा दी गई है।

यह प्लेटफॉर्म U-WIN और POSHAN जैसी राष्ट्रीय योजनाओं से भी जुड़ा होगा, जिससे लाभार्थियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। अब तक JANANI पर 1.34 करोड़ से अधिक लाभार्थियों का पंजीकरण किया जा चुका है।

दुर्लभ रोगों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम: राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज नई दिल्ली में दो दिवसीय राष्ट्रीय दुर्लभ रोग सम्मेलन (National Conference on Rare Diseases) का उद्घाटन किया, जो 5 और 6 मई 2026 को आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन देश में दुर्लभ बीमारियों से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य सचिव पुन्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हितधारकों की चुनौतियों को समझना, नवाचार को बढ़ावा देना और देश में दुर्लभ रोगों के बेहतर प्रबंधन के लिए नए विचार विकसित करना है।

उन्होंने बताया कि दुर्लभ रोगों से निपटने की आवश्यकता को सबसे पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में रेखांकित किया गया था और बाद में 2021 की राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति के माध्यम से इसे एक औपचारिक ढांचा प्रदान किया गया।

उन्होंने कहा कि इस नीति के तहत देशभर में उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) स्थापित किए गए हैं, जिनकी संख्या 8 से बढ़कर 15 हो गई है, जिनमें उत्तर-पूर्व भारत के दो केंद्र भी शामिल हैं।

स्वास्थ्य सचिव ने यह भी बताया कि दुर्लभ रोगों के मरीजों के इलाज के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी गई है। इसके साथ ही जीवनरक्षक दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में छूट दी गई है, और आगे भी नई दवाओं को इस सूची में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

उन्होंने UMMID पहल और NIDAN केंद्रों के माध्यम से जेनेटिक काउंसलिंग और उपचार सहायता को मजबूत किए जाने की जानकारी दी। अब तक लगभग 1,800 मरीजों को इस नीति के तहत सहायता मिल चुकी है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्था दुर्लभ रोगों के लिए स्वदेशी शोध और उपचार विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ. राजीव बहल ने कहा कि पिछले तीन दशकों में दुर्लभ रोगों के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि आज भारत न केवल निदान बल्कि उपचार और वित्तीय सहायता के क्षेत्र में भी बेहतर स्थिति में है।

डॉ. बहल ने यह भी कहा कि भारत को अपनी परिस्थितियों के अनुसार दुर्लभ रोगों के लिए स्वदेशी मॉडल विकसित करना चाहिए, जिसमें डिजिटल तकनीक, एआई और जेनेटिक रिसर्च की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

इस सम्मेलन में विशेषज्ञों ने जेनेटिक तकनीक, सस्ती उपचार रणनीतियों, शोध सहयोग और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य मॉडल पर चर्चा की। मंत्रालय ने सभी हितधारकों के सहयोग से दुर्लभ रोगों से प्रभावित मरीजों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।

देशभर में 4 से 10 मई तक ‘फायर सेफ्टी वीक’ का आयोजन, स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा पर जोर

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स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 4 मई से 10 मई 2026 तक देशभर में ‘फायर सेफ्टी वीक’ की शुरुआत की है। इस अभियान में सभी राज्य, केंद्र शासित प्रदेश और संबंधित केंद्रीय मंत्रालय शामिल हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने “Fire Safety in Health Facilities” थीम के तहत शपथ दिलाई और कहा कि अस्पतालों व स्कूलों में सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित फायर ऑडिट, प्रशिक्षण और आपातकालीन तैयारी को मजबूत करने पर जोर दिया।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य कृष्ण एस. वात्सा ने कहा कि अस्पतालों में फायर सेफ्टी के लिए एक व्यवस्थित और सक्रिय दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। वहीं अग्निशमन सेवाओं के महानिदेशक सुनील कुमार झा ने सुरक्षा मानकों के पालन, नियमित जांच और प्रशिक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

इस दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय ने “National Guidelines on Fire and Life Safety in Healthcare Facilities (2026)” भी जारी कीं। इन दिशानिर्देशों में जोखिम प्रबंधन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, आपातकालीन प्रतिक्रिया, प्रशिक्षण और जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है।

फायर सेफ्टी वीक के दौरान देशभर में मॉक ड्रिल, फायर ऑडिट, जागरूकता अभियान, पोस्टर प्रतियोगिता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंत्रालय ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों से इन दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सुरक्षित और सतर्क स्वास्थ्य व्यवस्था बनाने का आह्वान किया है।

हर जिले में डे केयर कैंसर सेंटर की दिशा में बड़ा कदम: स्वास्थ्य मंत्रालय की दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 27 एवं 28 नवंबर को नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में कैंसर देखभाल और शहरी स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का उद्घाटन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव पुन्य सलिला श्रीवास्तव ने किया। इसमें प्रिंसिपल सेक्रेटरी, मिशन डायरेक्टर्स (NHM), वरिष्ठ अधिकारी, तथा कैंसर नियंत्रण, एनसीडी और शहरी स्वास्थ्य से जुड़े राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के नोडल अधिकारियों ने भाग लिया।

कैंसर सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष बल

मुख्य संबोधन देते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुन्य सलिला श्रीवास्तव ने देशभर में कैंसर सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की सरकार की प्राथमिकता को दोहराया। उन्होंने केंद्रीय बजट 2025–26 की उस घोषणा का उल्लेख किया, जिसके तहत हर जिले में डे केयर कैंसर सेंटर (DCCC) स्थापित किए जाएंगे, ताकि कैंसर उपचार को विकेंद्रीकृत किया जा सके, तृतीयक केंद्रों पर भार कम हो सके और समय पर कीमोथेरेपी एवं फॉलो-अप देखभाल सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने सामुदायिक स्तर पर कैंसर स्क्रीनिंग से लेकर जिला स्तर पर उपचार और उन्नत देखभाल तक कैंसर केयर की एक मजबूत निरंतर प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय एनसीडी रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (NP-NCD) व्यापक सेवाएं बढ़ाने और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

महत्वपूर्ण नीतिगत दस्तावेज जारी

उद्घाटन सत्र के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कई प्रमुख नीतिगत दस्तावेज जारी किए, जिनमें शामिल हैं—

  • NP-NCD प्रशिक्षण मॉड्यूल

  • FRU दिशा-निर्देश 2025

  • फ्री डायग्नोस्टिक्स इनिशिएटिव के तहत प्रयोगशाला सेवाओं को मजबूत करने हेतु संचालन दिशानिर्देश

कार्यशाला में DCCC मॉडलों, सामान्य कैंसरों के मानक उपचार वर्कफ्लो, क्रियान्वयन निगरानी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, वायरल हेपेटाइटिस स्क्रीनिंग के एकीकरण और NQAS के माध्यम से गुणवत्ता आश्वासन पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं।

विशेषज्ञों और राज्यों की भागीदारी

NHSRC, टाटा मेमोरियल सेंटर, AHPGIC ओडिशा, NCDC और ICMR के विशेषज्ञों ने नैदानिक एवं प्रोग्राम संबंधी प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने पर अपने विचार साझा किए। ओडिशा, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश ने कैंसर स्क्रीनिंग, सामुदायिक भागीदारी और जिला-स्तरीय सेवा वितरण में अपनी सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं को प्रस्तुत किया, जो अन्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रेरक मॉडल हैं।

एक राष्ट्रीय पैनल ने एकीकृत कैंसर देखभाल प्रणाली विकसित करने, बहु-विषयक समन्वय को बढ़ाने, शीघ्र पहचान में सुधार और जिला स्तर की क्षमता बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने DCCC लागू करने, मानक उपचार वर्कफ्लो अपनाने, सामान्य कैंसरों की स्क्रीनिंग मजबूत करने और आयुष्मान आरोग्य मंडिरों से उच्च केंद्रों तक रेफरल प्रणाली सुधारने की प्रतिबद्धता दोहराई।

दूसरा दिन: शहरी स्वास्थ्य पर केंद्रित

कार्यशाला के दूसरे दिन का फोकस राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (NUHM) के तहत शहरी स्वास्थ्य एजेंडा पर रहा। इस दौरान संबोधित करते हुए स्वास्थ्य सचिव पुन्य सलिला श्रीवास्तव ने तेजी से बढ़ती शहरी आबादी और उभरती जरूरतों को देखते हुए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से शहरी स्वास्थ्य चुनौतियों के प्रति सक्रिय प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया।

अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक (NHM) अराधना पटनायक ने शहर-विशिष्ट और एकीकृत रणनीतियाँ अपनाकर शहरी स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई। सौरभ जैन, संयुक्त सचिव (पॉलिसी), स्वास्थ्य मंत्रालय ने संशोधित NUHM ढाँचे का मसौदा प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य देशभर में शहरी स्वास्थ्य सेवा वितरण को सुदृढ़ करना है।

चर्चाओं में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला गया, जिनमें शामिल हैं—

  • बुनियादी ढांचे को मजबूत करना

  • सेवा वितरण में सुधार

  • रेफरल प्रणाली को मजबूत करना

  • शहरी स्थानीय निकायों और राज्य स्वास्थ्य विभागों के बीच बेहतर तालमेल

राज्यों ने शहरी स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए अपने नवाचारपूर्ण मॉडल और श्रेष्ठ प्रथाएँ भी साझा कीं।

मंत्रालय की प्रतिबद्धता

मंत्रालय ने NUHM ढांचे को और परिष्कृत करने, शासन और निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने, और यह सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई कि शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं सभी नागरिकों—विशेषकर सबसे गरीब और कमजोर वर्गों—के लिए अधिक सुलभ, न्यायसंगत और मजबूत बनें।


भारत में नर्सिंग नीति और सुधारों को सशक्त बनाने हेतु तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

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केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और ज्हपाइगो (Jhpiego) के सहयोग से भारत में नर्सिंग नीति प्राथमिकताओं और सर्वोत्तम प्रथाओं पर राष्ट्रीय परामर्श एवं अनुभव साझा करने पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य नर्सिंग और दाई (मिडवाइफरी) क्षेत्र में नीति संवाद को सशक्त बनाना और सुधारों को आगे बढ़ाना है।

इस परामर्श में नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, नियामकों, नर्सिंग शिक्षकों, व्यावसायिक संघों और विकास सहयोगियों सहित देशभर के प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य चल रही पहलों की समीक्षा करना, नई चुनौतियों की पहचान करना और नर्सिंग प्रशासन, शिक्षा और कार्यबल प्रबंधन को भारत की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप मजबूत करने के लिए नवोन्मेषी मॉडल साझा करना था।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुन्या सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि नर्स और दाइयां भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर और आशा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर नर्सें सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने बताया कि भारत में हाल के सुधार, जैसे राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग (NNMC) की स्थापना, क्षमता-आधारित पाठ्यक्रमों को अपनाना, और नियामक ढांचे का आधुनिकीकरण — नर्सिंग इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

स्वास्थ्य सचिव ने यह भी कहा कि राज्यों से प्राप्त सर्वोत्तम प्रथाएं (Best Practices) राष्ट्रीय नीति निर्माण के लिए मार्गदर्शक इनपुट के रूप में कार्य करेंगी और अन्य राज्यों को भी इन मॉडलों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए ताकि पूरे देश में नर्सिंग क्षेत्र में सुधार लाया जा सके।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रो. वी.के. पॉल ने मंत्रालय और WHO को इस महत्वपूर्ण परामर्श के आयोजन के लिए सराहा। उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली वैश्विक स्तर पर अपनी गुणवत्ता और नर्सिंग कार्यबल की प्रतिबद्धता के कारण सम्मानित है। उन्होंने नर्सिंग को भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ बताते हुए नर्सों के प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार और सेवा के दौरान प्रशिक्षण एवं कौशल संवर्धन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

इस अवसर पर भारत में WHO की प्रतिनिधि डॉ. पेडेन ने नर्सिंग और मिडवाइफरी क्षेत्र में भारत की प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व के सबसे बड़े नर्सिंग कार्यबल योगदानकर्ताओं में से एक है। उन्होंने बताया कि WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में 2030 तक नर्सों की कमी में अपेक्षित कमी का श्रेय भारत की नीतियों और सुधारों को जाता है।

कार्यशाला में प्रतिभागियों ने नीति प्राथमिकताओं जैसे कार्यबल का समान वितरण, शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता सुनिश्चित करना, नेतृत्व विकास और नर्सिंग पेशेवरों के लिए करियर प्रगति के अवसरों पर विचार-विमर्श किया।

तीन दिवसीय कार्यशाला में तकनीकी सत्र, पैनल चर्चा और राज्यों की प्रस्तुतियाँ होंगी, जिनमें नर्सिंग शिक्षा, कार्यबल योजना और डिजिटल लर्निंग में नवाचारों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रमाण-आधारित नीतिगत निर्णय लेना और राज्यों के बीच पारस्परिक सीख को प्रोत्साहित करना है, ताकि भारत में एक मजबूत, कुशल और सशक्त नर्सिंग कार्यबल सुनिश्चित किया जा सके।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की “स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स नर्सिंग रिपोर्ट” में वैश्विक नर्सिंग कार्यबल की प्रवृत्तियों और प्राथमिकताओं का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह रिपोर्ट यहां देखी जा सकती है:

केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2025 के तहत ली और दिलाई सतर्कता प्रतिज्ञा: नैतिक शासन और पारदर्शिता पर दिया जोर

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सतर्कता प्रतिज्ञा ली और दिलाई। यह कार्यक्रम सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2025 के अवसर पर आयोजित किया गया।

देशभर में यह सप्ताह 27 अक्टूबर से 2 नवंबर 2025 तक “सतर्कता: हमारी साझा जिम्मेदारी” (Vigilance: Our Shared Responsibility) विषय पर मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना है, जैसा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के निर्देशों में निर्धारित किया गया है।

प्रतिज्ञा दिलाते हुए, मंत्री नड्डा ने नैतिक मूल्यों को संस्थागत रूप देने और शासन के प्रत्येक स्तर पर सतर्कता की संस्कृति विकसित करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा —

“हमें एक ऐसी ‘करने और न करने योग्य कार्यों की सूची’ तैयार करनी चाहिए, जिसे आम व्यक्ति आसानी से समझ सके, ताकि कोई व्यक्ति सद्भावना या सहानुभूति में आकर भी गलत कार्य न कर बैठे। इसके साथ ही प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण एक नियमित प्रक्रिया होनी चाहिए, जिससे सभी जागरूक और सतर्क बने रहें।”

सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2025 की पूर्व संध्या पर, केंद्रीय सतर्कता आयोग ने इस वर्ष अगस्त माह में सभी संगठनों को 18 अगस्त से 17 नवंबर 2025 तक तीन माह का ‘निवारक सतर्कता अभियान’ चलाने की सलाह दी थी। यह अभियान पाँच प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है —

  1. लंबित शिकायतों का निपटान

  2. लंबित मामलों का निपटान

  3. क्षमता निर्माण कार्यक्रम

  4. परिसंपत्ति प्रबंधन

  5. डिजिटल पहल

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य कर्मियों ने इस अवसर पर भाग लिया और ईमानदारी, पारदर्शिता तथा जवाबदेही के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने एम्स नई दिल्ली के 50वें दीक्षांत समारोह में युवा चिकित्सकों को सेवा, नैतिकता और नवाचार के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने आज नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के 50वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।

अपने संबोधन में मंत्री नड्डा ने सभी स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि AIIMS ने चिकित्सा विज्ञान, शिक्षा और रोगी देखभाल के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान दिया है। उन्होंने युवा डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे सहानुभूति के साथ सेवा करें, उच्चतम नैतिक मानकों को बनाए रखें और नवाचार के माध्यम से देश की बदलती स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करें।

AIIMS, नई दिल्ली की सराहना करते हुए मंत्री नड्डा ने कहा, “चिकित्सा विज्ञान, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में AIIMS ने न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।” उन्होंने संस्थान की चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी सेवा में उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता की प्रशंसा की।

मंत्री नड्डा ने पिछले एक दशक में भारत के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां पिछली सदी के अंत तक भारत में केवल एक AIIMS था, वहीं आज देशभर में 23 AIIMS संस्थान कार्यरत हैं, जो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा प्रशिक्षण को हर क्षेत्र तक पहुँचाने के सरकार के संकल्प को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 819 हो गई है। इसी तरह, एमबीबीएस सीटें 51,000 से बढ़कर 1,29,000 और पीजी सीटें 31,000 से बढ़कर 78,000 हो गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगले पांच वर्षों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर अतिरिक्त 75,000 सीटें जोड़ी जाएंगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि भारत ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किया है — मातृ मृत्यु दर (MMR) 130 से घटकर 88, शिशु मृत्यु दर (IMR) 39 से घटकर 27 हो गई है। 5 वर्ष से कम आयु मृत्यु दर (U5MR) और नवजात मृत्यु दर (NMR) में भी क्रमशः 42% और 39% की कमी आई है, जो वैश्विक औसत से बेहतर है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत में टीबी के मामलों में 17.7% की कमी आई है, जो वैश्विक दर 8.3% से दोगुनी है — जैसा कि द लैंसेट रिपोर्ट में बताया गया है।

अपने समापन भाषण में मंत्री नड्डा ने छात्रों से आग्रह किया कि वे शिक्षा और अनुसंधान में सक्रिय योगदान दें और AIIMS की गौरवशाली परंपरा और प्रतिष्ठा को बनाए रखें। उन्होंने उन्हें आजीवन सीखने वाले और नवोन्मेषी बनने की प्रेरणा दी, ताकि वे चिकित्सा विज्ञान को आगे बढ़ाते हुए समाज की सेवा कर सकें।

इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. वी. के. पॉल ने कहा, “हम पर समाज के प्रति गहरी जिम्मेदारी है, जिसने हमें संवारने का अवसर दिया। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ें, उत्कृष्टता को अपनी आदत बनाएं और नवाचार को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत।”

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अकादमिक क्षेत्र में आएं, ताकि वे अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य पेशेवरों को शिक्षित, मार्गदर्शन और प्रेरित कर सकें, जिससे ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में योगदान हो सके।

इस समारोह में कुल 326 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 50 पीएच.डी. विद्वान, 95 डीएम/एम.सी.एच. विशेषज्ञ, 69 एम.डी., 15 एम.एस., 4 एम.डी.एस., 45 एम.एससी., 30 एम.एससी. (नर्सिंग) और 18 एम.बायोटेक स्नातक शामिल थे। इसके अलावा, AIIMS में उत्कृष्ट सेवा और योगदान के लिए सात डॉक्टरों को आजीवन उपलब्धि पुरस्कार (Lifetime Achievement Award) से सम्मानित किया गया।


स्वास्थ्य मंत्रालय ने पूरे भारत में CPR जागरूकता सप्ताह 2025 का सफल आयोजन किया

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स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 13 से 17 अक्टूबर 2025 तक पूरे भारत में CPR जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया

उद्देश्य:

इस पहल का उद्देश्य सार्वजनिक समझ और व्यावहारिक क्षमता को बढ़ाना था, विशेष रूप से Compression-only Cardiopulmonary Resuscitation (CPR) के क्षेत्र में। इसका लक्ष्य नागरिकों को हृदयाघात और अन्य चिकित्सा आपात स्थितियों में त्वरित बाईस्टैंडर हस्तक्षेप के महत्व के प्रति जागरूक करना था।

हालांकि CPR जीवन रक्षक साबित हो चुका है, भारत में बाईस्टैंडर CPR की दरें वैश्विक मानकों से कम हैं। इस सप्ताह-लंबे अभियान के माध्यम से मंत्रालय ने व्यापक CPR प्रशिक्षण, जागरूकता और व्यवहारिक तत्परता को बढ़ावा देने का प्रयास किया।

मुख्य उद्देश्य:

  • CPR के महत्व पर सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना।

  • विभिन्न हितधारकों के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण और प्रदर्शन प्रदान करना।

  • युवाओं की भागीदारी और समुदायिक तैयारी को प्रोत्साहित करना।

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके व्यापक सार्वजनिक पहुँच और सहभागिता सुनिश्चित करना।

कार्यान्वयन:

इस पहल को पूरे देश में कई हितधारकों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से लागू किया गया।

  • राज्य और संघ शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने क्षेत्र स्तर पर प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की।

  • केंद्रीय मंत्रालय/संस्थान जैसे गृह मंत्रालय, रक्षा, श्रम एवं रोजगार, युवा मामले, खेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता, रेलवे, स्वास्थ्य अनुसंधान और NDMA ने विभिन्न समाज वर्गों तक पहुंच सुनिश्चित की।

  • केंद्रीय सरकारी अस्पताल, AIIMS, राष्ट्रीय महत्व के संस्थान और मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त संस्थान प्रशिक्षण और जागरूकता सत्र आयोजित किए।

  • भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी ने राज्य, संघ शासित प्रदेश और जिला स्तर पर सामुदायिक CPR प्रशिक्षण में योगदान दिया।

  • पेशेवर संगठन अपने राज्य अध्यायों के माध्यम से प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए।

  • डिजिटल पहुँच और युवा सहभागिता को MyGov और MyBharat प्लेटफॉर्म के माध्यम से बढ़ावा दिया गया।

अभियान की प्रमुख गतिविधियाँ:

  • उद्घाटन लाइव प्रण और CPR प्रदर्शन में 14,701 प्रतिभागियों ने ECHO प्लेटफॉर्म और YouTube Live के माध्यम से भाग लिया।

  • डिजिटल प्रण में 79,870 नागरिकों ने CPR जागरूकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता ली।

  • “CPR तकनीक और बाईस्टैंडर की भूमिका” पर पैनल चर्चा में AIIMS नई दिल्ली, Dr. RML Hospital, Safdarjung Hospital और SGT Medical College के 6 विशेषज्ञ शामिल हुए। 10,129 प्रतिभागियों ने ECHO और YouTube Live के माध्यम से सत्र में भाग लिया।

  • देश भर में Compression-only CPR का व्यापक प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें कुल 6,06,374 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

  • निर्माण भवन में केंद्रीय कर्मचारियों, CISF कर्मियों, हाउसकीपिंग स्टाफ और विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 264 प्रतिभागियों ने लाभ लिया।

  • 16 अक्टूबर को PMO के 70 अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया।

  • MyGov और MyBharat प्लेटफॉर्म पर CPR क्विज़ आयोजित की गई, जिसमें 36,040 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

  • Volunteer for Bharat पहल के तहत 368 युवाओं ने सप्ताह भर CPR जागरूकता में सक्रिय योगदान दिया।

  • सोशल मीडिया और डिजिटल गतिविधियों के माध्यम से व्यापक जागरूकता उत्पन्न की गई, जिसमें CPR पर शैक्षिक वीडियो और विशेषज्ञ साक्षात्कार शामिल थे।

  • 13 अक्टूबर को सचिव (स्वास्थ्य) की उपस्थिति में CPR का लाइव प्रदर्शन कई समाचार एजेंसियों द्वारा कवरेज किया गया। 19 अक्टूबर को DD News पर “Total Health – Medical Emergency” विशेष कार्यक्रम प्रसारित हुआ।

परिणाम:

इन बहुआयामी गतिविधियों के माध्यम से 7,47,000 से अधिक नागरिकों को शामिल किया गया और 6,06,374 प्रतिभागियों को देश भर में व्यावहारिक CPR प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

राष्ट्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान, कोट्टायम में दो दिवसीय राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन आयोजित

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कोट्टायम- राष्ट्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान मानसिक स्वास्थ्य (NHRIMH), कोट्टायम, जो कि केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH), आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एक शीर्ष संस्थान है, ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2025 के अवसर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन का आयोजन किया। 

सम्मेलन का केंद्रीय विषय था:‘सेवाओं तक पहुँच–आपदाओं और आपात स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य’।

सम्मेलन में देशभर से होम्योपैथी और मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञ, शोधकर्ता और चिकित्सक शामिल हुए। इसमें विशेष रूप से मनोवैज्ञानिक आपात स्थितियों में होम्योपैथी की बढ़ती भूमिका, नवाचार आधारित अनुसंधान और समग्र मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

उद्घाटन सत्र में देशभर के गणमान्य व्यक्तियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। डॉ. सुभाष कौशिक, महानिदेशक, CCRH, नई दिल्ली, ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि होम्योपैथी को पोस्ट-डिजास्टर पुनर्वास और लचीलापन बढ़ाने के कार्यक्रमों में समाहित करना आवश्यक है, और यह वैज्ञानिक शोध पर आधारित होना चाहिए।

चेतन कुमार मीना, IAS, कलेक्टर कोट्टायम ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने NHRIMH के समग्र मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में योगदान की सराहना की और कहा कि होम्योपैथी को आपदा प्रतिक्रिया रणनीतियों में शामिल करना मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करेगा।

डॉ. देबदत्त नायक, सहायक निदेशक (H) एवं संस्थान प्रभारी, ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने सम्मेलन के वैश्विक महत्व और आपदाओं एवं आपात स्थितियों में सुलभ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. आर. सितार्थन, प्राचार्य, NHRIMH, ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत कर सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजन टीम को सफलता में योगदान देने के लिए आभार व्यक्त किया।

पहले दिन के वैज्ञानिक सत्रों में निम्नलिखित विषयों पर चर्चा हुई:

  • आपदा मानसिक स्वास्थ्य: अनुभव और उभरते रुझान

  • हाइड्रोलॉजिकल आपदाओं में मानसिक स्वास्थ्य संकट: वायनाड, केरल में समुदाय आधारित प्रबंधन

  • आपदा प्रबंधन में होम्योपैथिक दृष्टिकोण

  • संकट स्थितियों में लचीलापन

  • N-of-1 ट्रायल्स और होम्योपैथी में ट्रांसलेशनल नेटवर्क

  • ADHD में भावनात्मक असंतुलन और होम्योपैथिक उपचार

दूसरे दिन के सत्रों में चर्चा हुई:

  • मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान में पद्धतिगत ढाँचे

  • नैदानिक और प्रयोगशाला आधारित मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन

  • आघात और मानसिक आपात स्थितियों में मानव प्रतिक्रिया

  • PTSD, ADHD, ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, साइकॉटिक डिसऑर्डर्स, और मादक पदार्थ वापसी पर केस-आधारित अध्ययन

  • तीव्र मानसिक लक्षणों के प्रबंधन में व्यक्तिगत होम्योपैथिक उपचार पर प्रस्तुति

NHRIMH के स्नातकोत्तर प्रशिक्षुओं ने बाइपोलर डिसऑर्डर, इंटरनेट एडिक्शन, सिज़ोफ्रेनिया, मेजर डिप्रेशन, OCD, शराब और गांजा उपयोग विकार, ऑटिज़्म, पार्किंसंस रोग सहित विभिन्न मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों पर शोध प्रस्तुत किया।

अन्य प्रमुख प्रतिभागियों में डॉ. के.सी. मुरलीधरन, सहायक निदेशक (H), CCRH, नई दिल्ली, ने समुदाय आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में होम्योपैथी की बढ़ती भूमिका और अंतर्विषय सहयोग की आवश्यकता पर विशेष संबोधन दिया। डॉ. सी.टी. अरविंद कुमार, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, कोट्टायम के कुलपति, ने सम्मेलन का उद्घाटन किया और संकट एवं आपातकालीन परिस्थितियों में समग्र और व्यक्ति-केंद्रित मानसिक स्वास्थ्य समर्थन प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

दो दिवसीय सम्मेलन का समापन सफलतापूर्वक हुआ। प्रतिभागियों ने अकादमिक संवाद में भाग लेने और आपातकालीन मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में होम्योपैथी की संभावनाओं को जानने के अवसर की सराहना की।

सम्मेलन ने साक्ष्य-आधारित, समग्र और सुलभ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता को दोहराया और मानसिक स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन में होम्योपैथी की सहायक भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।


सीपीआर जागरूकता सप्ताह का उद्घाटन, हर घर और सार्वजनिक स्थल पर जीवनरक्षक प्रशिक्षण का लक्ष्य

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नई दिल्ली- हृदयाघात के गंभीर मामलों में जीवन बचाने के लिए कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) एक महत्वपूर्ण और जीवनरक्षक आपातकालीन प्रक्रिया है। आम जनता में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज CPR जागरूकता सप्ताह (13–17 अक्टूबर 2025) का उद्घाटन किया। यह अभियान CPR प्रशिक्षण, प्रशिक्षण में भागीदारी और समुदाय आधारित सक्रियता को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया है।

इस उद्घाटन समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने मुख्य रूप से उद्घाटन किया, जिसमें स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, स्वास्थ्य पेशेवर, और चिकित्सा संस्थानों व नागरिक समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य सचिव ने CPR कौशल के प्रति सार्वजनिक क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा,

“केवल हाथों द्वारा CPR करने की सरल प्रक्रिया महत्वपूर्ण अंगों में रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह बनाए रख सकती है जब तक कि पेशेवर मदद नहीं पहुँचती, जिससे जीवन रक्षा की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।”

स्वास्थ्य सचिव ने यह भी बताया कि CPR जागरूकता सप्ताह का लक्ष्य है कि हर घर, स्कूल, कार्यालय और सार्वजनिक स्थल पर कम से कम एक व्यक्ति इस जीवनरक्षक तकनीक में प्रशिक्षित हो। उन्होंने कहा,

“हृदयाघात भारत में अचानक मृत्यु का एक प्रमुख कारण बना हुआ है, जिसमें लगभग 70% मामले अस्पताल के बाहर होते हैं, जहां तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं होती। ऐसे समय में किसी बायस्टैंडर द्वारा समय पर CPR देना जीवन रक्षा की संभावना को काफी बढ़ा सकता है।”

उद्घाटन कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने CPR जागरूकता बढ़ाने और अन्य लोगों को यह प्रशिक्षण सीखने के लिए प्रेरित करने की प्रतिज्ञा भी ली। कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा हैंड्स-ओनली CPR का लाइव प्रदर्शन किया गया, जिसमें दर्शाया गया कि किसी भी व्यक्ति द्वारा सरल कदमों का पालन करके हृदय आपातकालीन स्थिति में किसी की जान बचाई जा सकती है।

कम बायस्टैंडर CPR प्रशासन दर और समुदाय-केंद्रित प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय पूरे भारत में 13-17 अक्टूबर, 2025 तक CPR जागरूकता सप्ताह मना रहा है। सप्ताह के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिज्ञा समारोह, भौतिक और वर्चुअल CPR प्रदर्शन, विशेषज्ञ बातचीत, पैनल चर्चा और अन्य IEC गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। उद्घाटन में देशभर से 15,000 से अधिक स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिभागी और चिकित्सा संस्थानों एवं नागरिक समाज के प्रतिनिधि मौजूद थे।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने MyGov और MyBharat प्लेटफ़ॉर्म के सहयोग से ऑनलाइन प्रतिज्ञा और CPR क्विज़ भी प्रकाशित किया है। प्रतिज्ञा और क्विज़ निम्नलिखित लिंक से एक्सेस किए जा सकते हैं:


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