Media24Media.com: प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में आयुष मंत्रालय का राष्ट्रीय आयुष मिशन व राज्यों में क्षमता निर्माण पर शिखर सम्मेलन

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प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में आयुष मंत्रालय का राष्ट्रीय आयुष मिशन व राज्यों में क्षमता निर्माण पर शिखर सम्मेलन

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 नई दिल्ली- आयुष मंत्रालय 3 और 4 सितंबर, 2025 को राष्ट्रीय आयुष मिशन और राज्यों में क्षमता निर्माण” विषय पर दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है। यह सम्मेलन नई दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA), सरिता विहार में होगा। सम्मेलन की अध्यक्षता प्रतापराव जाधव, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), आयुष मंत्रालय एवं राज्य मंत्री, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय करेंगे।

इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारियों से प्राप्त स्टेट-स्पेसिफिक नोट्स और फ़ीडबैक नोट्स पर विस्तृत चर्चा के लिए एक मंच प्रदान करना है, जिनमें जमीनी स्तर से प्राप्त इनपुट भी शामिल हैं। इस तरह की सहभागितापूर्ण प्रक्रिया का उद्देश्य राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) को और मज़बूत बनाना एवं रणनीतिक रूप से विस्तार करना है। यह प्रमुख कार्यक्रम आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी प्रणालियों को एकीकृत कर समग्र स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देता है।

यह आगामी शिखर सम्मेलन वर्ष 2025 में आयोजित प्रधानमंत्री द्वारा बल दिए गए छह विषयगत शिखर सम्मेलनों की अंतिम कड़ी है, जिन पर चौथे मुख्य सचिव सम्मेलन में चर्चा की गई थी। ये शिखर सम्मेलन वर्षभर आयोजित किए गए, जिनमें केंद्र सरकार और सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारी शामिल हुए। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श को बढ़ावा देना और जूनियर अधिकारियों तक की भागीदारी सुनिश्चित करना था, ताकि क्षमता निर्माण को मज़बूत किया जा सके।

इस दृष्टिकोण के अनुरूप, नीति आयोग ने छह विषयगत क्षेत्रों की पहचान की थी। इनमें छठा और अंतिम विषय “राष्ट्रीय आयुष मिशन और राज्यों में क्षमता निर्माण” चुना गया, जिसके लिए आयुष मंत्रालय को नोडल मंत्रालय नियुक्त किया गया तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सहयोग दिया।

नीति आयोग के निर्देशानुसार आयुष मंत्रालय ने सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए ओरिएंटेशन सत्र आयोजित किए और 6 मई, 2025 को अवधारणा पत्र (Concept Note) साझा किया। फोकस्ड डायलॉग के लिए छह विषयगत उप-समूह गठित किए गए हैं, जिनमें प्रत्येक में 6–7 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं। ये उप-समूह निम्नलिखित विषयों और नोडल राज्यों के साथ बनाए गए हैं:

1]वित्तीय प्रबंधन, निगरानी एवं मूल्यांकन, परियोजना प्रबंधन

*राज्य/केन्द्रशासित प्रदेश: राजस्थान, मिज़ोरम, मेघालय, चंडीगढ़, पश्चिम बंगाल, लक्षद्वीप

*नोडल राज्य: राजस्थान एवं मिज़ोरम

2]संगठनात्मक संरचना की समीक्षा, मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण एवं क्षमता निर्माण

*राज्य/केन्द्रशासित प्रदेश: मध्य प्रदेश, सिक्किम, गोवा, बिहार, दिल्ली, नागालैंड

*नोडल राज्य: मध्य प्रदेश एवं सिक्किम

3]आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ आयुष का एकीकरण, जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम भी शामिल

*राज्य/केन्द्रशासित प्रदेश: छत्तीसगढ़, जम्मू एवं कश्मीर, हरियाणा, ओडिशा, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश

*नोडल राज्य: छत्तीसगढ़ एवं अरुणाचल प्रदेश

4]आयुष संस्थानों के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ: अवसंरचना, IPHS आयुष मानक, स्वास्थ्य सेवा

*राज्य/केन्द्रशासित प्रदेश: उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, अंडमान एवं निकोबार द्वीप, त्रिपुरा, मणिपुर

*नोडल राज्य: उत्तर प्रदेश एवं हिमाचल प्रदेश

5]आयुष औषधियों की गुणवत्ता आश्वासन एवं खरीद प्रणाली, ब्रांडिंग और पैकेजिंग

*राज्य/केन्द्रशासित प्रदेश: कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, झारखंड, पुडुचेरी, असम

*नोडल राज्य: कर्नाटक एवं असम

5]विभिन्न क्षेत्रों में आईटी-सक्षम डिजिटल सेवाएँ

*राज्य/केन्द्रशासित प्रदेश: आंध्र प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, दमन एवं दीव, केरल

*नोडल राज्य: केरल एवं महाराष्ट्र

सम्मेलन में देशभर से वरिष्ठ अधिकारी जैसे अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, महानिदेशक, मिशन निदेशक और आयुष आयुक्त शामिल होंगे। साथ ही आयुर्वेद, शोध, स्वास्थ्य नीति और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ एवं पैनलिस्ट भी सत्रों को समृद्ध करेंगे। इनमें डॉ. वी. के. पॉल (सदस्य, नीति आयोग), जे. एल. एन. शास्त्री (आयुर्वेद विद्वान), डॉ. वी. एम. कटोच (पूर्व महानिदेशक, ICMR), प्रो. भूषण पाटवर्धन और कई अन्य शामिल हैं।

इन विषयों और राज्य/केंद्रशासित प्रदेश समूहों की रूपरेखा बड़ी सावधानी से तय की गई है, जो वित्तीय प्रबंधन और संगठनात्मक सुधार से लेकर गुणवत्ता आश्वासन और आईटी-समर्थित सेवाओं तक के क्षेत्रों को कवर करती है। प्रत्येक उप-विषय का संचालन दो नोडल राज्यों द्वारा किया जाएगा ताकि केंद्रित और प्रभावी विमर्श सुनिश्चित हो सके।

यह विभागीय शिखर सम्मेलन भारत सरकार की इस प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करता है कि आयुष प्रणालियों को देश की स्वास्थ्य देखभाल संरचना का अभिन्न अंग बनाया जाए, जिससे सेवाओं की पहुँच, गुणवत्ता और दक्षता में वृद्धि हो सके। यह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के स्तर पर क्षमता निर्माण के महत्व को भी रेखांकित करता है, ताकि राष्ट्रीय आयुष मिशन की पूरी क्षमता को साकार किया जा सके।


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