Media24Media.com: प्रेस क्लब में ललित सुरजन को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

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प्रेस क्लब में ललित सुरजन को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

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महासमुन्द। वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, समाजसेवी, साहित्यकार ललित सुरजन (Press club pay tribute to Lalit surjan)को प्रेस क्लब महासमुन्द में भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत वरिष्ठ पत्रकार सालिकराम कन्नौजे ने ललित सुरजन के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर किया। उन्होंने कहा कि सुरजन समय के पाबंद थे। उन्हें लेटलतीफी बिल्कुल भी पसंद नहीं था। यह गुण मैंने उनसे सीखा है। सभी पत्रकारों को समय का पाबंद होना चाहिए।
प्रेस क्लब महासमुन्द के अध्यक्ष आनंदराम साहू ने सुरजन के पत्रकारिता जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्हें महामानव बताया। वे पत्रकार होने से कहीं ज्यादा अच्छे इंसान थे। उन्होंने छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ी को वैश्विक स्तर पर अलग पहचान दिलाई। उनके बताए मार्ग पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।





पत्रकारिता के एक युग का अवसान, आज पंचतत्व में विलीन हो जाएंगे सुरजन





प्रेस क्लब के महासचिव रविन्द्र विदानी ने कहा कि सुरजन की पत्रकारिता हमेशा अमर रहेगी। उनके व्यक्तित्व में बड़प्पन था। वे समाजवादी विचारधारा के थे। गरीबों के साथ बैठकर भोजन करना उनका शौक था। वे समतावादी समाज निर्माण के लिए निरंतर प्रयास करते रहे।





बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे सुरजन





इंटैक के जिला समन्वयक दाऊलाल चंद्राकर ने कहा कि ललित सुरजन बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने कर्मवीर होने का प्रमाण दिया। अस्वस्थ होते हुए भी लिखते रहे। पहले पेज पर उनके देहावसान का समाचार और संपादकीय पेज पर संपादकीय प्रकाशित हुआ है। उन्होंने कोडार और नैनी नाला जलयात्रा का स्मरण करते हुए कहा कि यह सुरजन जी की प्रेरणा से ही संभव हो पाया।





भाजी था प्रिय





इस अवसर पर बाबूलाल साहू ने कहा कि हमेशा मुस्कुराता चेहरा ललित जी का था। उनकी स्मरणशक्ति जबरदस्त थी। महासमुन्द से उनका खासा लगाव रहा। भाजी उनकी पसंदीदा सब्जी थी। वे जिस भी कार्यक्रम में जाते, भाजी की सब्जी चाव से खाते थे।





वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन का 74 वर्ष की उम्र में हुआ निधन, सीएम ने जताया शोक
छत्तीसगढ़ी साहित्यकार बंधु राजेश्वर खरे ने कहा कि उनकी पहली छत्तीसगढ़ी कहानी 'कुभारज बेटा' का प्रकाशन 1980 में देशबंधु में प्रकाशित हुआ। तब से 40 साल से ललित सुरजन से जुड़ाव रहा। वे आराम हराम है के नारे को जीते थे। हम सबने सोचा नहीं था कि कभी आराम नहीं करने वाले ललित भैया इतनी जल्दी चिरनिद्रा में सो जाएंगे।





पारिवारिक कलह रोकने चलाया अभियान





वरिष्ठ महिला पत्रकार उत्तरा विदानी ने कहा कि सुरजन के सान्निध्य में बहुत कुछ सीखने को मिला। जो आजीवन पत्रकारिता जीवन में यादगार रहेगा। उन्होंने पारिवारिक कलह रोकने एक अभियान चलाया था। किसी के घर विवाद सुनाई दे तो पड़ोसी का फर्ज बनता है कि दरवाजा खटखटाया जाए और उनके झगड़े को खत्म करने में मददगार बनें।





श्रीराम कुमार तिवारी 'सुमन' ने कहा कि ललित सुरजन ने पत्रकारों के हित में जो काम किया है, वह अविष्मरणीय है। पत्रकारिता कार्यशाला से उन्होंने सैकड़ों को पत्रकार बनाया। वे पहले पत्रकार हैं, जिनकी अंत्येष्टि राजकीय सम्मान के साथ की गई।
प्रेस क्लब के पदाधिकारियों में कोषाध्यक्ष देवीचंद राठी, उपाध्यक्ष संजय महंती, प्रचार-संगठन मंत्री प्रभात महंती, केपी साहू, विपिन दुबे, एतराम साहू, विजय चौहान आदि ने पुष्पांजलि अर्पित किया। अंत में दो मिनट का मौन धारण कर सभी प्रबुद्धजनों ने श्रद्धासुमन अर्पित किया।






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