बलरामपुर में नाबालिग (Gangrape with minor in Balrampur CG) से दुष्कर्म करने वाले सभी आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया हैं।बता दें कि दो आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। जबकि बाकी 6 आरोपियों की तलाश जारी थी, जिन्हें बलरामपुर पुलिस ने सोमवार को धर दबोचा है। पुलिस के मुताबिक सोमवार को गिरफ्तार किए गए सभी 6 आरोपी नाबालिग हैं।
यह है पूरा मामला
बलरामपुर जिले में एक नाबालिग से 13 दिनों में 8 युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था। बलरामपुर पुलिस के मुताबिक जिले के राजपुर थाने क्षेत्र के बगाडी गांव रहने वाली एक नाबालिग 20 नवंबर को कुछ काम से घर से निकली थी, जिसके बाद उसके परिजनों ने थाने में शिकायक दर्ज कराई थी।
नाबालिग ने पुलिस को सुनाई आपबीती
परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने नाबालिग (Gangrape with minor in Balrampur CG) की तलाश के लिए एक टीम का गठन किया था। इसी बीच टीम को सूचना मिली की नाबालिग अंबिकापुर में है, सूचना मिलते ही टीम उसे लेने सरगुजा पहुंची, जहां नाबालिग ने अपने साथ हुए हैवानियत की आपबीती पुलिस को सुनाई।
दुष्कर्म पीड़िता ने गृहमंत्री से लगायी न्याय की गुहार
पुलिस के मुताबिक नाबालिग ने उन्हें बयान कि बीते 13 दिनों में 8 लड़कों ने मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था। पीड़िता के बयान के आधार पर बलरामपुर पुलिस ने 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
बलरामपुर में लगातार हो रही दुष्कर्म की घटना
- 16 अक्टूबर को वाड्रफनगर में 16 साल की नाबालिग से दुष्कर्म हुआ था। बता दें कि नाबालिग ने इस घटना के बाद आत्महत्या करने की कोशिश की थी।
- 15 अक्टूबर को एक युवती के साथ रेप हुआ था। पुलिस के मुताबिक युवती अपनी सहेली के घर गई थी। जहां एक युवक पीड़िता को जबरदस्ती अपने साथ एक सुनसान मकान में ले गया। जहां उसने पीड़िता को जान से मारने की धमकी देते हुए दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था।
- 13 अक्टूबर को वाड्रफनगर में पांच साल की मासूम के साथ दुष्कर्म।
- 3 अक्टूबर को वाड्रफनगर पुलिस थाना क्षेत्र की रहने वाली 14 साल की नाबालिग से दुष्कर्म।
- 19 सितंबर को शंकरगढ़ थाना इलाके 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म।
पुलिस और कोर्ट तक नहीं पहुंच पाते कई केस
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक भारत में महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा और रेप के मामले बहुत बार पुलिस और कोर्ट तक पहुंच ही नहीं पाते हैं। कोर्ट में मामला जाने के बाद भी पीड़िताओं को इंसाफ के लिए लम्बी लड़ाई लड़नी पड़ती है।NCRB के आंकड़ों के मुताबिक साल 2018 के अंत तक छत्तीसगढ़ में महिलाओं के उत्पीड़न से संबंधित 23 हजार 317 केस लंबित थे।