Media24Media.com: हिमाचल में लैंडस्लाइड

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हिमाचल लैंडस्लाइड में अब तक 15 शव बरामद, रेस्क्यू अभियान अभी भी जारी

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हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में हुए लैंडस्लाइड में अब तक 15 शव बरामद हुए हैं। खोज और बचाव अभियान अभी भी जारी है। बता दें कि 11 अगस्त को हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में अचानक लैंडस्लाइड हो गई थी, जिसके मलबे में  एक बस सहित अन्य वाहन दब गए थे। 


ITBP के प्रवक्ता विवेक पांडे ने बताया है कि ITBP की तीन बटालियनों के 200 जवान रेस्क्यू अभियान में जुटे हुए हैं। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बताया है कि बचाए गए लोगों को अस्पताल ले जाया गया है। उन्होंने बताया कि ITBP के साथ NDRF और पुलिस की टीम भी घटनास्थल पर मौजूद हैं और जल्द ही स्थिति पर काबू पा लिया जाएगा।

 

ठाकुर ने बताया कि इस हादसे के बाद 50 से 60 लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। उन्होंने ये भी बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें हर तरह की मदद के लिए आश्वासन दिया है। ठाकुर ने बताया कि भारतीय सेना ने भी मदद की पेशकश की है। उन्होंने बताया कि भूस्खलन की चपेट में एक ट्रक और HRTC समेत चार गाड़ियां दबी हुई हैं।

PM मोदी ने किया मुआवजे का ऐलान

वहीं प्रधानमंत्री ने मृतक परिजन और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है।सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि कुछ लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है।पत्थरों के लगातार गिरने की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में परेशानी आ रही है।सीएम ठाकुर ने कहा कि फंसे हुए लोगों की संख्या के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।


सीएम ने बताया कि हादसे को लेकर उनकी बात केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से हुई है और उन्होंने ने एनडीआरएफ की टीम को बचाव के लिए मौकेपर पहुंचने के आदेश दिए हैं। वहीं रेस्क्यू ऑपरेशन में दो हेलिकॉप्टर भी लगाए गए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिजन को दो लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए देने की घोषणा की है।साथ ही उन्होंने हादसे पर दुख प्रकट करते हुए, मृतकों के परिजन को सांत्वना प्रकट की है।जानकारी के अनुसार हादसे की सूचना मिलते ही सीएम जयराम ठाकुर मौके के लिए रवाना हो गए।घटनास्‍थल शिमला से करीब 200 किमी दूर है।सीएम ने आश्वासन दिया है कि जल्द से जल्द लोगों को मलबे से बाहर निकाल लिया जाएगा और सभी को सुरक्षित स्‍थानों पर पहुंचाया जाएगा।

हिमाचल में लगातार हो रहे हादसे

इससे पहले 25 जुलाई को किन्नौर जिले में बटसेरी के पास हुए कई भूस्खलनों में नौ लोगों की मौत हो गई थी और तीन अन्य घायल हो गए थे। इसी तरह 27 जुलाई को लाहौल-स्पीति जिले में बादल फटने से अचानक आई बाढ़ में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई थी, दो अन्य घायल हो गए थे और दो लापता हो गए थे। जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने 4 अगस्त को राज्य विधानसभा को सूचित किया था कि हिमाचल प्रदेश में इस मानसून मौसम में कुल 218 लोगों की मौत हुई है और 12 लोग लापता हैं।

गाड़ियों पर टूटकर गिरा पहाड़ का हिस्सा, अब तक 13 लोगों की मौत, मृतकों में छत्तीसगढ़ के 2 पर्यटक भी शामिल

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हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में एक बार फिर लैंडस्लाइड के चलते बड़ा हादसा हुआ है। दरअसल, किन्नौर के रामपुर में अचानक लैंडस्लाइड हो गई, जिसके मलबे में  एक बस सहित अन्य वाहन दब गए। जानकारी के मुताबिक अभी भी बस मलबे में ही दबी हुई है। वहीं बचाव दल मौके पर पहुंच कर राहत और बचाव कार्य में जुट गया है। अब तक 14 लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है। 


वहीं 13 लोगों की हादसे में मौत हो चुकी है। इसमें से 10 शव कल मिले थे। वहीं 3 शव ITBP को रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मिले हैं। एक बस, बोलेरो और उसके यात्री अभी तक मलबे में नहीं मिले हैं। कल रात अंधेरा होने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन बंद कर दिया गया था। डीसी आबिद हुसैन ने जानकारी दी है कि अभी भी मलबे में कई गाड़ियों के दबे होने की आशंका है। मृतकों में मां और उसके बेटी-बेटे समेत राजस्थान के 4, छत्तीसगढ़ के 2, महाराष्ट्र और दिल्ली के एक-एक पर्यटक शामिल है। सभी पर्यटक दिल्ली से ट्रैवल एजेंसी के वाहन में किन्नौर घूमने गए थे।



ITBP के प्रवक्ता विवेक पांडे ने बताया है कि ITBP की तीन बटालियनों के 200 जवान रेस्क्यू अभियान में जुटे हुए हैं। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बताया है कि बचाए गए लोगों को अस्पताल ले जाया गया है। उन्होंने बताया कि ITBP के साथ NDRF और पुलिस की टीम भी घटनास्थल पर मौजूद हैं और जल्द ही स्थिति पर काबू पा लिया जाएगा।

 


ठाकुर ने बताया कि इस हादसे के बाद 50 से 60 लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। उन्होंने ये भी बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें हर तरह की मदद के लिए आश्वासन दिया है। ठाकुर ने बताया कि भारतीय सेना ने भी मदद की पेशकश की है। उन्होंने बताया कि भूस्खलन की चपेट में एक ट्रक और HRTC समेत चार गाड़ियां दबी हुई हैं।

PM मोदी ने किया मुआवजे का ऐलान

वहीं प्रधानमंत्री ने मृतक परिजन और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है।सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि कुछ लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है।पत्थरों के लगातार गिरने की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में परेशानी आ रही है।सीएम ठाकुर ने कहा कि फंसे हुए लोगों की संख्या के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।





सीएम ने बताया कि हादसे को लेकर उनकी बात केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से हुई है और उन्होंने ने एनडीआरएफ की टीम को बचाव के लिए मौकेपर पहुंचने के आदेश दिए हैं। वहीं रेस्क्यू ऑपरेशन में दो हेलिकॉप्टर भी लगाए गए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिजन को दो लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए देने की घोषणा की है।साथ ही उन्होंने हादसे पर दुख प्रकट करते हुए, मृतकों के परिजन को सांत्वना प्रकट की है।जानकारी के अनुसार हादसे की सूचना मिलते ही सीएम जयराम ठाकुर मौके के लिए रवाना हो गए।घटनास्‍थल शिमला से करीब 200 किमी दूर है।सीएम ने आश्वासन दिया है कि जल्द से जल्द लोगों को मलबे से बाहर निकाल लिया जाएगा और सभी को सुरक्षित स्‍थानों पर पहुंचाया जाएगा।


ड्राइवर और कंडक्टर  का रेस्क्यू

किन्नौर के चौरा के पास नेशनल हाई-वे पर चट्टान गिरने की वजह से यह हादसा हुआ है। HRTC की बस  पर चट्टान गिरने की वजह से 12 से ज्यादा लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। दबे हुए बस ड्राइवर से फोन के जरिए संपर्क किया गया। चट्टान गिरने से हुए हादसे में बस ड्राइवर और कंडक्टर घायल (Driver Injured) हो गए। किन्नौर के विधायक ने बताया कि ITBP के जवानों ने ड्राइवर और कंडक्टर को मलबे से बाहर निकाल लिया है। बस में सवार यात्रियों को बाहर निकालने का काम जारी है। बता दें कि चील जंगल के पास चट्टानें गिरने की वजह से यह हादसा हुआ है।  

हिमाचल में लगातार हो रहे हादसे

इससे पहले 25 जुलाई को किन्नौर जिले में बटसेरी के पास हुए कई भूस्खलनों में नौ लोगों की मौत हो गई थी और तीन अन्य घायल हो गए थे। इसी तरह 27 जुलाई को लाहौल-स्पीति जिले में बादल फटने से अचानक आई बाढ़ में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई थी, दो अन्य घायल हो गए थे और दो लापता हो गए थे। जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने 4 अगस्त को राज्य विधानसभा को सूचित किया था कि हिमाचल प्रदेश में इस मानसून मौसम में कुल 218 लोगों की मौत हुई है और 12 लोग लापता हैं।

हिमाचल में लैंडस्लाइड के बाद अभी भी फंसे हैं 150 से ज्यादा पर्यटक, 3 पंचायतों की गुल हुई बिजली

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हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में लैंडस्लाइड के चलते अभी भी लगभग 150 लोग फंसे हुए हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सोमवार को कहा कि लगभग 150 लोग अभी भी फंसे हुए हैं, जिनमें पर्यटक और स्थानीय लोग शामिल हैं। हम उन्हें बचाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। जिले में भारी बारिश की चेतावनी होने के बाद प्रशासन हाई अलर्ट पर है। दरअसल, छितकुल और रकछम में भारी बारिश और रास्ता बंद होने से अभी भी 150 सैलानी फंसे हुए हैं। साथ ही छितकुल, रकछम और बटसेरी गांव की पंचायतों में बिजली गुल है। इस हादसे से कई विभागों और प्राइवेट संपत्ति को लगभग 2.50 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचा है। घाटी में फंसे सैलानियों और स्थानीय लोगों को निकालने के लिए जिला प्रशासन की टीमें सेना के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं।



हादसे में हुई थी 9 पर्यटकों की  मौत


बता दें कि किन्नौर जिले में सांगला-छितकुल रोड़ पर रविवार को बटसेरी में पहाड़ी से दरकी चट्टानों की चपेट में आए पर्यटकों के शव पोस्टमॉर्टम के बाद हिमाचल भवन दिल्ली भेजे गए हैं। वहां आवासीय आयुक्त मृतकों के शवों को उनके परिवार वालों को सौंपेंगे। मृतकों में शामिल एक पर्यटक अमोच बापत नेवी के लेफ्टिनेंट थे। इनका शव कड़छम स्थित सेना के अधिकारियों को सौंपा गया है। इस हादसे में राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और दिल्ली के 9 सैलानियों की मौत हुई थी।


हिमाचल में लैंडस्लाइड के कारण पुल टूटने से 9 लोगों की मौत, मृतकों में छत्तीसगढ़ के 2 लोग भी शामिल, देंखे हादसे का लाइव वीडियो


CM ने की आर्थिक मदद की घोषणा


CM जयराम ठाकुर ने शिमला में कहा कि मृतकों के परिजन को प्रदेश सरकार 4-4 लाख रुपए मुआवजा देगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से मृतकों के परिजनों को राहत के तौर पर 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए देने की घोषणा की। इस दौरान सोमवार को एसडीएम कल्पा और जिला पर्यटन अधिकारी स्वाति डोगरा ने घटनास्थल का दौरा किया। उपायुक्त किन्नौर ने कहा कि सांगला-छितकुल संपर्क मार्ग पर गुंसा के पास 300 मीटर बंद पड़ी सड़क को बहाल करने के लिए मशीनरी जुटी हुई है। यहां सुरक्षा घेरा भी बनाया गया है। लगभग डेढ़ करोड़ की लागत से बने 120 मीटर लंबे वैली ब्रिज की मरम्मत भी जल्द शुरू की जाएगी।


पत्थरों की चपेट में आ गई गाड़ी


बता दें कि रविवार को बड़े-बड़े पत्थर पहाड़ से फिसलते हुए तेजी से नीचे आए और पुल को अपनी चपेट में ले लिया। वहां चल रहे कंस्ट्रक्शन के काम को भी भारी नुकसान पहुंचने की जानकारी मिल रही है। वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल फोन में इस भयावह दृश्य को कैद किया। रविवार को दोपहर डेढ़ बजे के करीब पहाड़ से बड़ी-बड़ी चट्टानें नीचे आने लगीं। जब चट्टानें नीचे की तरफ आ रही थीं तो बारूद या बम फटने जैसी आवाज निकल रही थी। इसने पुल को अपनी चपेट में ले लिया और ये दो टुकड़ों में टूट गई। पुलिस ने बताया कि एक टेम्पो पर भारी चट्टानों के गिरने की वजह से उसमें सवार 11 लोगों में से 9 की मौत हो गई और 2 घायल हो गए। जिस दौरान पहाड़ से चट्टानें गिर रही थीं तभी पर्यटकों से भरी गाड़ी छितकुल से सांगली की ओर आ रही थी और इसी दौरान उनकी गाड़ियों पर भी बड़े-बड़े पत्थर गिरने लगे। जब तक पर्यटक कुछ समझ पाते तब तक उनकी गाड़ियां पूरी तरह पत्थरों से दब गईं। 

हिमाचल में लैंडस्लाइड के कारण पुल टूटने से 9 लोगों की मौत, मृतकों में छत्तीसगढ़ के 2 लोग भी शामिल, देंखे हादसे का लाइव वीडियो

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हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में लैंडस्लाइड के चलते बड़ा हादसा हुआ है। सांग्ला घाटी में पुल टूटने की वजह से 9 लोगों की मौत हो गई है। जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हैं। मरने वालों में छत्तीसगढ़ के 2 पर्यटक भी शामिल हैं। किन्नौर जिले के SP साजू राम राणा ने कहा कि 9 लोगों की मौत हो गई है और 3 घायल हुए हैं। इस घटना में बटसेरी पुल टूट गया। इस हादसे में जान गंवाने वालों के परिजन को PM नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।



जानकारी के मुताबिक सांग्ला जा रही पर्यटकों से भरी गाड़ी लैंडस्लाइड की चपेट में आ गई। पर्यटक छत्तीसगढ़ के बताए जा रहे हैं। मरने वालों का आंकड़ा और बढ़ सकता है। बड़े-बड़े पत्थर पहाड़ से फिसलते हुए तेजी से नीचे आए और पुल को अपनी चपेट में ले लिया। वहां चल रहे कंस्ट्रक्शन के काम को भी भारी नुकसान पहुंचने की जानकारी मिल रही है। वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल फोन में इस भयावह दृष्य को कैद किया।



हिमाचल प्रदेश के CM जयराम ठाकुर ने ट्वीट करते हुए कहा कि 'किन्नौर के बटसेरी में पहाड़ी दरकने से हुआ हादसा हृदयविदारक है। इसकी चपेट में आया पर्यटकों से सवार वाहन जिसमें 9 की मौत और 2 घायल होने की खबर अत्यंत दुखद है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति और शोकग्रस्त परिवार को संबल प्रदान करें। मैंने किन्नौर जिला प्रशासन से बात करके हादसे की जानकारी ली और उन्हें उचित दिशा-निर्देश दिए। प्रशासन घटनास्थल पर राहत काम में जुट गया है और प्रभावितों को फौरी राहत प्रदान की जा रही है। घायल हुए व्यक्तियों को स्वास्थ्य लाभ शीघ्र प्राप्त हो, ईश्वर से यही कामना करता हूं। ॐ शांति।'



जानकारी के मुताबिक बड़े-बड़े पत्थर पहाड़ से फिसलते हुए तेजी से नीचे आए और पुल को अपनी चपेट में ले लिया। वहां चल रहे कंस्ट्रक्शन के काम को भी भारी नुकसान पहुंचने की जानकारी मिल रही है। वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल फोन में इस भयावह दृश्य को कैद किया। आज दोपहर डेढ़ बजे के करीब पहाड़ से बड़ी-बड़ी चट्टानें नीचे आने लगीं। जब चट्टानें नीचे की तरफ आ रही थीं तो बारूद या बम फटने जैसी आवाज निकल रही थी। इसने पुल को अपनी चपेट में ले लिया और ये दो टुकड़ों में टूट गई।


हादसे का शिकार होने वाले लोग



सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो


पुलिस ने बताया कि एक टेम्पो पर भारी चट्टानों के गिरने की वजह से उसमें सवार 11 लोगों में से आठ की मौत हो गई और तीन घायल हो गए। पुलिस के अनुसार बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। इस घटना में छत्तीसगढ़ के दो यात्री भी हताहत हुए हैं। जिनमें से एक अमोघ बापट है जिनके पिता प्रशांत बापट HTPS (CSEB) कोरबा पश्चिम में अधीक्षण अभियंता हैं। दूसरा नाम सतीश कटकबार का है। जिस दौरान पहाड़ से चट्टानें गिर रही थीं तभी पर्यटकों से भरी गाड़ी छितकुल से सांगली की ओर आ रही थी और इसी दौरान उनकी गाड़ियों पर भी बड़े-बड़े पत्थर गिरने लगे। जब तक पर्यटक कुछ समझ पाते तब तक उनकी गाड़ियां पूरी तरह पत्थरों से दब गईं। वहीं आस-पास खड़ी गाड़ियां भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। इस हादसे का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वारयल हो रहा है।


महाराष्ट्र में भी हुआ था भीषण हादसा


बता दें कि महाराष्ट्र के रायगढ़, रत्नागिरी और सतारा में भूस्खलन की घटनाओं में 73 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा रायगढ़ के महाड में 44 लोगों की भूस्खलन से जान गई। वहीं तीनों जिलों में 47 लोग अभी भी लापता हैं। महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक बाढ़ से जुड़ीं घटनाओं में राज्य में अब तक 112 लोगों की मौत हो चुकी है। NDRF की 34 टीमें रेस्क्यू अभियान में जुटी हैं।

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