Media24Media.com: सिंचाई के लिए पानी

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label सिंचाई के लिए पानी. Show all posts
Showing posts with label सिंचाई के लिए पानी. Show all posts

मनेरगा, DMF और सिंचाई विभाग के सहयोग से पानी बचाने का काम शुरू

No comments Document Thumbnail

किसानों को खेत-किसानी के काम के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता हो, गांव के निस्तारी के समस्या का समाधान और साथ ही भूजल स्तर में बढ़ाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार अलग-अलग काम कर रही है। कवर्धा जिले में ग्रामीण किसानों के मांग पर वन मंत्री मोहम्मद अकबर के प्रयासों से जल संवर्धन और जल संरक्षण की दिशा में बरसात की पानी को सहेजने का काम किया जा रहा है। 

बारिश की पानी का समुचित उपयोग करने की दृष्टि से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के साथ जिला खनिज न्यास निधि फंड का विभागीय मद से अभिसरण से पिपरिया एनीकेट डिसिलिंटग, गेट रिपेयर और मरम्मत काम को जल संसाधन विभाग के साथ मिलकर कराया जा रहा है। कार्य शुरू होते ही इसके बेहतर परिणाम स्थानीय ग्रामीणों को मिलने लगा हैं।

3 गांवों के किसानों को मिलने लगा सीधा लाभ

तीन विभागों को मिलाकर 27 लाख 88 हजार रुपए की लागत से हो रहे इस कार्य में मनरेगा योजना से 8 लाख रुपए मजदूरी पर और 5 लाख 29 हजार रुपए सामग्री पर व्यय निर्धारित था और बाकी राशि 13 लाख 13 हजार रुपये डीएमएफ मद से और 1 लाख 46 हजार रुपए जल संसाधन विभाग के विभागीय मद से स्वीकृति दी गई है। इस कार्य में ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है। चालू वित्त वर्ष 2021-22 में 25 जून से हो रहे इस कार्य में  4145 मानव दिवस रोजगार का सृजन होना प्रस्तावित है, जिसमें 193 रुपये प्रति दिवस के दर से मजदूरी भुगतान किया जाना है। 

64 हजार 8 सौ 48 रुपये का मजदूरी भुगतान

कार्य में अभी तक 336 मानव दिवस रोजगार ग्रामीणों को मिला है, जिसमें 64 हजार 8 सौ 48 रुपये का मजदूरी भुगतान हुआ है। साथ ही वर्तमान में कार्य प्रगतिरत है। जल संसाधन संभाग विभाग के कार्यपालन अभियंता दिनेश भगोरिया ने बताया कि सकरी नदी पर बांध कम रोड बनी हुई है, जो कि झिरना, ग्राम पंचायत चारडोंगरी विकासखंड कवर्धा में स्थित है। एनीकेट और उसके आसपास पानी के बहाव क्षेत्र में बड़ी मात्रा पर गाद (सिल्ट) जमा हो जाने के कारण पानी का बहाव आगे नहीं बढ़ पाता था।

वहीं जल संवर्धन की दिशा में बरसात का पानी यूं ही जाया हो जाता था। स्थानीय ग्रामीणों की मांग पर महात्मा गांधी नरेगा योजना, डीएमएफ फंड  और जल संसाधन विभाग के मद को मिलाकर पिपरिया एटीकेटी डिसिलिंटग, गेट रिपेयर और मरम्मत का काम कराया गया। काम 200 मीटर लंबा और 70 मीटर चौड़ा सहित कुल 14000 वर्ग मीटर में हुआ है। 

कृषि कार्य के लिए पानी की उपलब्धता 

इस काम के हो जाने से आसपास क्षेत्र के लगभग तीन गांव जिसमें मुख्य रुप से झिरना, पिपरिया और परसवारा के ग्रामीणों को अत्यधिक लाभ हो रहा है। खेतों के लिए पानी सीधे मिलने लगा है और साथ में ग्रामीणों को रोजगार भी मिला है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विजय दयाराम के. ने बताया कि शासन की मंशा अनुरूप गांव में जल स्रोतों का उन्नायन कर स्थानीय ग्रामीणों को कृषि कार्य के लिए पानी की उपलब्धता हो यह सुनिश्चित किया जाना है। 

यही कारण है कि कवर्धा जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, जल संसाधन विभाग कवर्धा और डीएमएफ के अभिसरण से यह कार्य नरवा उन्नयन की दिशा में एक और कदम है। मनरेगा योजना से 13 लाख 29 हजार रुपए की स्वीकृति दी गई है। साथ ही बाकी काम के लिए राशि डीएमएफ और विभागीय मद के माध्यम से  योजनाओं का अभिसरण करते कार्य हो रहा है।

ग्रामीणों की मदद 

कार्य से स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है। साथ ही उनके खेतों के लिए पानी की व्यवस्था सहज रूप से उपलब्ध हो रहा है, जो सीधे तौर पर धान, गन्ना और अन्य फसलों के काम में आ रहा है। इसके अतिरिक्त निस्तारी के लिए उपयोग हो रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसे कार्यों को प्राथमिकता के तौर पर तकनीकी रूप से प्रशिक्षित विभाग द्वारा कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को इसका सही लाभ मिल सके। ग्रामीणों को उनका उपज बढ़ाने में मदद मिल सके, जो सीधे तौर पर उनके आर्थिक लाभ से जुड़ा हुआ है।

आज से सिंचाई के लिए गंगरेल बांध से छोड़ा जाएगा पानी, इन 4 जिले के किसानों को मिलेगा फायदा

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसान संगठनों के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मांग पर जलाशयों से सिंचाई के लिए पानी छोड़ने का फैसला लिया है। इसके लिए उन्होंने जल संसाधन विभाग को आज यानी 30 सितंबर से गंगरेल बांध सहित सिंचाई जलाशयों से पानी छोड़ने के निर्देश दिए हैं। जल संसाधन मंत्री रविंद्र चौबे ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के परिपालन में विभागीय अधिकारियों को गंगरेल बांध (रविशंकर जलाशय) से  बांध के कमांड एरिया में खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए पानी छोड़ने के लिए निर्देशित किया है। 


गंगरेल बांध से धमतरी, बालोद, रायपुर, बलौदाबाजार जिले के किसानों को खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। जल संसाधन मंत्री चौबे ने बताया कि गंगरेल बांध में वर्तमान में 79 प्रतिशत जल भराव है। किसानों की आवश्यकता को देखते हुए महानदी परियोजना समूह के जलाशय माडमसिल्ली और सोंढूर से दुधावा से भी पानी गंगरेल में लाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि किसान संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग को देखते हुए तांदूला-खरखरा जलाशय से भी सिंचाई के लिए पानी छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। 

छत्तीसगढ़ में अब तक 1103 मिमी औसत बारिश दर्ज 

राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष की ओर से संकलित जानकारी के मुताबिक 1 जून 2021 से अब तक राज्य में 1103 मिमी औसत बारिश दर्ज की जा चुकी है। राज्य के सभी जिलों में 01 जून से 29 सितंबर तक रिकॉर्ड की गई बारिश के मुताबिक कोरबा में सर्वाधिक 1496.8 मिमी और कवर्धा जिले में सबसे कम 914.3 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई है।

जांजगीर-चांपा में 1130.2 मिमी औसत बारिश दर्ज

राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के मुताबिक एक जून से अब तक सरगुजा में 944 मिमी, सूरजपुर में 1269.6 मिमी, बलरामपुर में 1062.6 मिमी, जशपुर में 1105.4 मिमी, कोरिया में 1014.5 मिमी, रायपुर में 950.7 मिमी, बलौदाबाजार में 999.3 मिमी, गरियाबंद में 1062 मिमी, महासमुंद में 925.1 मिमी, धमतरी में 1016.3 मिमी, बिलासपुर में 1096.4 मिमी, मुंगेली में 1118.2 मिमी, रायगढ़ में 929.4 मिमी, जांजगीर चांपा में 1130.2 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई है।

बीजापुर में 1216.4 मिमी औसत बारिश रिकॉर्ड

वहीं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 1385.8 मिमी, दुर्ग में 1003.2 मिमी, राजनांदगांव में 977.4 मिमी, बालोद में 936.1 मिमी, बेमेतरा में 1211.8 मिमी, बस्तर में 1107.7 मिमी, कोंडागांव में 1091.5 मिमी, कांकेर में 1016.9 मिमी, नारायणपुर में 1281.1 मिमी, दंतेवाड़ा में 1204..4 मिमी, सुकमा में 1416.5 मिमी, और बीजापुर में 1216.4 मिमी औसत बारिश रिकॉर्ड की गई है।

जलाशयों से खरीफ सिंचाई के लिए छोड़ा जा रहा पानी

No comments Document Thumbnail

महासमुंद जिले में लगातार अवर्षा की स्थिति में खरीफ फसल की सिंचाई के लिए कोडार जलाशय परियोजना और लघु जलाशयों से पिछले 13 तारीख से पानी छोड़ जा रहा है। कार्यपालन अभियंता जल संसाधन जे.के. चन्द्राकर ने बताया कि जिले के सबसे बड़े कोडार जलाशय छोड़े गए पानी से 21 ग्रामों की 7000 हेक्टेयर में प्रथम सिंचाई पूर्णत की ओर है। उन्होंने बताया कि 33 ग्रामों की 9000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई जारी है। जिले के 20 एनीकटों में से 5 एनीकटों में उपलब्ध जल भराव से कृषकों द्वारा स्वयं के साधन से अपने खेतों को सिंचित किया जा रहा है। 


जिले में चालू मानसून के दौरान लगातार अवर्षा की स्थिति बनी हुई है। इसके कारण जिले के अधिकांश नालों में पानी शेष नहीं है। जिससे व्यपवर्तन एनीकट में जल भराव खत्म हो गया है। जिले के शेष 53 लघु जलाशयों में 5 से 20 प्रतिशत तक ही जल भराव हुआ है। जल संसाधन अधिकारी ने बताया कि वर्तमान स्थिति में सिंचाई के लिए पानी देना सम्भव नहीं हो पा रहा। उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव द्वारा 19 अगस्त को वीडियों कॉन्फ्रेंस के जरिए सिंचाई के लिए बांधों, जलाशयों में जल प्रदाय की समीक्षा की गई थी। उन्होंने बांधों में 16 प्रतिशत जल भराव या उससे कम स्थिति में सिंचाई के लिए जल प्रदाय नहीं किए जाने के निर्देश दिए गए थे।

जल संसाधन अधिकारी ने दी जानकारी

जल संसाधन अधिकारी चंद्राकर ने जानकारी देते हुए बताया कि कोडार जलाशय में 24 अगस्त की स्थिति में मात्र 23 प्रतिशत जल भराव ही शेष है। ऐसे स्थिति इस जलाशय से आगामी 6 दिन तक ही खरीफ सिंचाई के लिए पानी दिया जाना संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार की स्थिति जिले के लघु जलाशयों की भी बनी हुई है। उन्होंने जिले के किसानों से पुन अपील की है कि सिंचाई के लिए नहरों से छोड़े जा रहें पानी का विभागीय जल प्रबंधन में समन्वय करते हुए इसका सदुपयोग करें। खेतों की सिंचाई हो जाने के बाद कुलाबों को बंद करें और किसी भी स्थिति में पानी का अपव्यय न हो या खेतों से छलककर पानी नालों में ना जाएं इसका विशेष ध्यान रखा जाए।

बांधों और जलाशयों से किसानों को सिंचाई के लिए मिलेगा पानी

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर जल संसाधन विभाग ने गंगरेल सहित राज्य के सभी बांधों और जलाशयों से खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए तत्काल पानी छोड़ने का फैसला लिया है। कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविंद्र चौबे की अध्यक्षता में  उनके निवास कार्यालय में आयोजित विभागीय अधिकारियों की बैठक में यह फैसला लिया गया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुलाकात कर खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए बांधों और जलाशयों से पानी छोड़ने का आग्रह किया था। इस पर मुख्यमंत्री ने दुर्ग और रायपुर संभाग के कुछ इलाकों में अल्प वर्षा की वजह से खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए बांधों और जलाशयों से पानी छोड़ने के संबंध में कृषि एवं जल संसााधन मंत्री रविंद्र चौबे को तत्परता से आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे।  


मुख्यमंत्री  बघेल द्वारा किसानों को सिंचाई के लिए पानी दिए जाने के निर्देश के परिपालन में कृषि एवं जल संसाधन मंत्री चौबे ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक ली और राज्य के सभी बांधों और जलाशयों में जल भराव और पानी छोड़ने की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की। मंत्री चौबे ने कहा कि  गंगरेल बांध में वर्तमान में मात्र 39 प्रतिशत जल भराव है। उन्होंने अधिकारियों को अल्प वर्षा और खरीफ फसलों की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप गंगरेल से तत्काल सिंचाई के लिए पानी छोड़ने के निर्देश दिए। 

सिंचाई के लिए की जा रही जलापूर्ति की जानकारी

मंत्री चौबे ने राज्य के अन्य इलाकों के सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए की जा रही जलापूर्ति की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि ऐसी सिंचाई परियोजना जिनसे पेयजल के लिए भी पानी दिया जाता है, उनमें पीने के पानी को सुरक्षित रख शेष जल की आपूर्ति सिंचाई के लिए की जानी चाहिए, ताकि खरीफ की फसलों को वर्तमान स्थिति में बचाया जा सके।  

गंगरेल से कमांड एरिया में सिंचाई 

बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत ने बताया कि 15 अगस्त की स्थिति में राज्य की 12 वृहद परियोजनाओं में 68.13 प्रतिशत जल भराव है, जबकि 34 मध्यम सिंचाई परियोजनाओं में 51.14 प्रतिशत पानी है। बीते साल इसी अवधि में सिंचाई परियोजनाओं में क्रमश 78 प्रतिशत और 67 प्रतिशत जल भराव था। उन्होंने बताया कि गंगरेल में आज की स्थिति में मात्र 39 प्रतिशत जल उपलब्ध है। गंगरेल के कैचमेंट के इलाके में अल्प वर्षा की वजह से यह स्थिति बनी है। उन्होंने बताया अगर बारिश नहीं हुई तो गंगरेल से कमांड एरिया में सिंचाई के लिए एक हफ्ते तक पानी दिया जा सकेगा। 

सिंचाई के लिए जलापूर्ति

बैठक में मुख्य अभियंता महानदी-गोदावरी कछार  डी.सी. जैन ने बताया कि भानुप्रतापपुर अंचल में इस साल अब तक मात्र 289 मि.मि. वर्षा हुई है। इस वजह से तांदुला जलाशय में जल भराव 17 प्रतिशत है, ऐसी स्थिति में तांदूला से अल्प मात्रा में ही सिंचाई के लिए जलापूर्ति हो सकेगी। उन्होंने बताया कि सिकासार और जोंक परियोजना से लगातार सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक दोनों परियोजनाओं के कमांड क्षेत्र में खरीफ फसलों की एक सिंचाई के लिए पानी दिया जा चुका है। बैठक में प्रमुख अभियंता इंद्रकुमार उइके ने बताया कि कोडार परियोजना से सिंचाई के लिए 3 दिन पहले पानी छोड़ दिया गया है। 

खरीफ फसलों के लिए लगातार दिया जा रहा पानी 

राजनांदगांव जिले के पिपरिया जलाशय, मोंगरा बैराज, सूखा नाला बैराज, रूसे जलाशय कवर्धा जिले के सरोदा, छीरपानी, बैहराखार, दुर्ग जिले के खपरी जलाशय, महासमुंद के टेसवा, रायपुर के कुम्हारी, बलौदाबाजार के बलार, धमतरी के सोंढूर जलाशय, कांकेर के घुघवा, बस्तर के कोसारटेडा, मुंगेली जिले के मनियारी जलाशय, बिलासपुर जिले के अरपा-भैसाझार, खारंग, कांकेर जिले के पलारकोट जलाशय, कोरबा के बांगो परियोजना, रायगढ़ के केलो बैराज, सरगुजा के श्यामघुनघुटा परियोजना, बरनाई और कुंवरपुर जलाशय परियोजना, कोरिया जिले के गेज और झुमका जलाशय से खरीफ फसलों के सिंचाई के लिए लगातार पानी दिया जा रहा है। 

बैठक में ये रहे उपस्थित

उन्होंने बताया कि राज्य के वृहद और मध्यम परियोजनाओं के अलावा अन्य परियोजनाओं से जलापूर्ति की जा रही है। बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत, प्रमुख अभियंता इन्द्रकुमार उइके, मुख्य अभियंता महानदी-गोदावरी कछार डी.सी. जैन, मुख्य अभियंता महानदी परियोजना आर. के. नगरिया, मुख्य अभियंता जल संसाधन बिलासपुर ए.के. सोमावार एवं मुख्य अभियंता अंबिकापुर एस. के. रवि उपस्थित थे। 

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.