Media24Media.com: शिक्षा व्यवस्था

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label शिक्षा व्यवस्था. Show all posts
Showing posts with label शिक्षा व्यवस्था. Show all posts

अब जीपीएम जिले की कोई भी शाला शिक्षकविहीन या एकल शिक्षकीय नहीं

No comments Document Thumbnail

रायपुर। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में अब कोई भी शाला न तो शिक्षकविहीन है और न ही एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रही है। यह सफलता शिक्षकों के प्रभावी युक्तियुक्तकरण के जरिए प्राप्त हुई है।

शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, युक्तियुक्तकरण से पहले जिले में 4 प्राथमिक शालाएं शिक्षकविहीन थीं, वहीं 130 प्राथमिक एवं 10 पूर्व माध्यमिक शालाएं एकल शिक्षकीय थीं। अब इन सभी विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है। यह जिले की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, जो विद्यार्थियों के हित में एक समर्पित प्रयास को दर्शाता है।

जिले में कुल 13 शालाओं का समायोजन किया गया, जबकि 844 में से 831 शालाएं पूर्ववत संचालित रहेंगी। जिन विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक थी, वहाँ से अतिशेष शिक्षकों का स्थानांतरण कर उन्हें आवश्यकता वाले विद्यालयों में पदस्थ किया गया है।

जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की समन्वित पहल से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई बाधित न हो। युक्तियुक्तकरण के परिणामस्वरूप अब संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा — जैसे कि अच्छी भवन, पुस्तकालय, प्रयोगशाला और अन्य सुविधाओं को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराया जा सकेगा।

शिक्षकों का संतुलित पदस्थापना से मिलेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

No comments Document Thumbnail

रायपुर। कोरिया जिले में शिक्षकों और स्कूलों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया से शिक्षा व्यवस्था को नया आयाम मिलने की उम्मीद है। जिला कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने 5 जून को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि यह प्रक्रिया शिक्षा में समानता, गुणवत्ता और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर अपर कलेक्टर अरुण मरकाम एवं जिला शिक्षा अधिकारी जितेन्द्र गुप्ता भी मौजूद थे।

कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने बताया कि नगरीय और ग्रामीण अंचलों में शिक्षकों के पदस्थापना में असंतुलन है। शहरी क्षेत्रों में शिक्षक अपेक्षाकृत अधिक हैं, जबकि दूरस्थ गांवों में शिक्षकों की भारी कमी से शिक्षण गुणवत्ता और छात्र प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेंगे विषय विशेषज्ञ शिक्षक

कलेक्टर ने बताया कि अब गणित, भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान जैसे विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक भी ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित होगा और विद्यार्थियों को विषयवस्तु की बेहतर समझ मिलेगी। इन शिक्षकों का पुनः समायोजन कर जरूरतमंद विद्यालयों में पदस्थापना की जा रही है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया किसी भी प्रकार की कटौती नहीं, बल्कि शिक्षा सुधार की दिशा में उठाया गया व्यावहारिक कदम है। यह समूचा प्रयास शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। कलेक्टर ने कहा कि यह परिवर्तन जिले के शैक्षिक और समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस अवसर पर उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे इस पहल को सकारात्मक रूप में जनमानस तक पहुंचाएं, ताकि समाज में शिक्षा को लेकर विश्वास और जागरूकता बढ़ सके।

दो प्राथमिक शालाएं शिक्षकविहीन और 57 एकल शिक्षक स्कूल

जिले की स्थिति का विवरण देते हुए कलेक्टर ने बताया कि कोरिया जिले में 2 प्राथमिक शालाएं शिक्षकविहीन और 57 एकल शिक्षक स्कूल हैं। वहीं, 95 प्राथमिक और 75 पूर्व माध्यमिक शिक्षक जिले में अतिशेष हैं। इनका पुनः समायोजन कर शिक्षकविहीन और एकल शिक्षकीय शालाओं में पदस्थापना की जा रही है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया किसी भी प्रकार की कटौती नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शिक्षा में सुधार लाना है।

एक भी स्कूल का समायोजन नहीं

 जिले में 145 में से एक भी स्कूल का समायोजन नहीं किया गया है। राज्य में भी केवल 241 स्कूलों का समायोजन किया गया है, जबकि 10,297 स्कूल यथावत संचालित रहेंगे। युक्तियुक्तकरण के लाभों को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि इससे विद्यार्थियों को बेहतर भवन, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं एक ही परिसर में मिल सकेंगी। साथ ही, बच्चों की ड्रॉपआउट दर में कमी, तीन बार प्रवेश प्रक्रिया से मुक्ति और पढ़ाई की निरंतरता सुनिश्चित होगी।

शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण से कोरिया जिले की शिक्षा व्यवस्था होगी सुदृढ़, 121 शिक्षकों को नई पदस्थापना

No comments Document Thumbnail

रायपुर। शासन के निर्देशानुसार शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया आज कोरिया जिले में कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी की अध्यक्षता में जिला पंचायत के मंथन कक्ष में सम्पन्न हुई। इस अवसर पर अपर कलेक्टर अरुण कुमार मरकाम, जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारीगण उपस्थित रहे।

जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता ने जानकारी दी कि कोरिया जिले में कुल 121 शिक्षकों, जिनमें 81 सहायक शिक्षक, 33 शिक्षक, तथा 7 व्याख्याता शामिल हैं, को काउंसलिंग के पश्चात नवीन पदस्थापना आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि युक्तियुक्तकरण की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि कुछ शहरी स्कूलों में छात्र संख्या की तुलना में अधिक शिक्षक पदस्थ थे, जबकि कई दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की भारी कमी थी। इस समायोजन प्रक्रिया से अब उन विद्यालयों में भी शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी, जहां पहले शिक्षक उपलब्ध नहीं थे।

कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने कहा कि यह प्रक्रिया न केवल छात्रों के हित में है, बल्कि इससे शिक्षा व्यवस्था में संतुलन भी स्थापित होगा। इससे परीक्षा परिणामों में भी सुधार की संभावना है और शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ की गई है। शिक्षक युक्तियुक्तकरण को शिक्षा व्यवस्था के लिए एक सुदृढ़ और सकारात्मक पहल माना जा रहा है, जिससे न केवल शिक्षकों का उचित उपयोग संभव हो रहा है, बल्कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी प्राप्त हो रही है।

 

 

छत्तीसगढ़ में होगी शिक्षकों की भर्ती, प्रथम चरण में 5,000 पदों पर होगी नियुक्ति

No comments Document Thumbnail

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ एवं प्रभावशील बनाने के लिए शिक्षकों के रिक्त पदों पर चरणबद्ध भर्ती की जाएगी। प्रथम चरण में 5,000 शिक्षकों की भर्ती होगी। इस निर्णय से प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययन अध्यापन व्यवस्था को गति मिलेगी और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होगी। शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती को लेकर विभागीय स्तर पर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इन्हीं पहल में शामिल है शालाओं एवं शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण। युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया राज्य में शुरू कर दी गई है। इसके पूरा होेने के बाद शिक्षकों के रिक्त पदों का आकलन कर नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

गौरतलब है कि शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को बेहतर बनाने की पहल के तहत छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि जहां जरूरत है वहां शिक्षक उपलब्ध हों और बच्चों को अच्छी शिक्षा, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और बेहतर सुविधाएं मिल सकें। युक्तियुक्तकरण का मतलब है स्कूलों और शिक्षकों की व्यवस्था को इस तरह से सुधारना कि सभी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित हो और कोई भी स्कूल बिना शिक्षक के न रहे।

राज्य की 30,700 प्राथमिक शालाओं में औसतन 21.84 बच्चे प्रति शिक्षक हैं और 13,149 पूर्व माध्यमिक शालाओं में 26.2 बच्चे प्रति शिक्षक हैं, जो कि राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर है। हालांकि 212 प्राथमिक स्कूल अभी भी शिक्षक विहीन हैं और 6,872 प्राथमिक स्कूलों में केवल एक ही शिक्षक कार्यरत है। पूर्व माध्यमिक स्तर पर 48 स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और 255 स्कूलों में केवल एक शिक्षक है। 362 स्कूल ऐसे भी हैं जहां शिक्षक तो हैं, लेकिन एक भी छात्र नहीं है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में 527 स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 10 या उससे कम है। 1,106 स्कूलों में यह अनुपात 11 से 20 के बीच है। 837 स्कूलों में यह अनुपात 21 से 30 के बीच है। लेकिन 245 स्कूलों में यह अनुपात 40 या उससे भी ज्यादा है, यानी छात्रों की दर्ज संख्या के अनुपात में शिक्षक कम हैं।

युक्तियुक्तकरण के अंतर्गत जिन स्कूलों में ज्यादा शिक्षक हैं लेकिन छात्र नहीं, वहां से शिक्षकों को निकालकर उन स्कूलों में भेजा जा रहा है, जहां शिक्षक नहीं हैं। इससे शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक वाले स्कूलों की समस्या दूर होगी। स्कूल संचालन का खर्च भी कम होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। एक ही परिसर में ज्यादा कक्षाएं और सुविधाएं मिलने से बच्चों को बार-बार एडमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी। यानी एक ही परिसर में संचालित प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल संचालित होंगे तो प्राथमिक कक्षाएं पास करने के बाद विद्यार्थियों को आगे की कक्षाओं में एडमिशन कराने की प्रक्रिया से छुटकारा मिल जाएगा। इससे बच्चों को पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी। बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर (ड्रॉपआउट रेट) भी घटेगी। अच्छी बिल्डिंग, लैब, लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं एक ही जगह देना आसान होगा।

शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार शालाओं के युक्तियुक्तकरण के तहत राज्य के कुल 10,463 स्कूलों में से सिर्फ 166 स्कूलों का समायोजन होगा। इन 166 स्कूलों में से ग्रामीण इलाके के 133 स्कूल ऐसे हैं, जिसमें छात्रों की संख्या 10 से कम है और एक किलोमीटर के अंदर में दूसरा स्कूल संचालित है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में 33 स्कूल ऐसे हैं, जिसमें दर्ज संख्या 30 से कम हैं और 500 मीटर के दायरे में दूसरा स्कूल संचालित है। इस कारण 166 स्कूलों को बेहतर शिक्षा के उद्देश्य से समायोजित किया जा रहा है, इससे किसी भी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। शेष 10,297 स्कूल पूरी तरह से चालू रहेंगे।

दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के शहरी और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए स्कूलों और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण यानि तर्कसंगत समायोजन कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि जहां जरूरत ज्यादा है, वहां संसाधनों और शिक्षकों का बेहतर ढंग से उपयोग सुनिश्चित हो। उन स्कूलों को जो कम छात्रों के कारण समुचित शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं, उन्हें नजदीकी अच्छे स्कूलों के साथ समायोजित किया जाए, ताकि  बच्चों को बेहतर माहौल, संसाधन और पढ़ाई का समान अवसर उपलब्ध हो सके।

शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण से बच्चों को ज्यादा योग्य और विषय के हिसाब से विशेषज्ञ शिक्षक मिलेंगे। स्कूलों में लाइब्रेरी, लैब, कंप्यूटर आदि की सुविधाएं सुलभ होंगी। शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में अब पर्याप्त शिक्षक मिलेंगे। जिन स्कूलों में पहले गिनती के ही छात्र होते थे, वे अब पास के अच्छे स्कूलों में जाकर बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस बदलाव से शिक्षा का स्तर सुधरेगा। छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा है कि हर बच्चे को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।यह पहल राज्य की शिक्षा व्यवस्था को ज्यादा सशक्त और संतुलित बनाएगी। युक्तियुक्तकरण से न सिर्फ शिक्षकों का समुचित उपयोग होगा, बल्कि बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी मिल सकेगी।

 

जिला मुख्यालय मे स्कूल का है बुरा हाल, कांग्रेस का शिक्षा का दावा सिर्फ कागजों में - भूपेंद्र चन्द्राकर

No comments Document Thumbnail

 महासमुंद। जिले के स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था भगवान  भरोसे चल रही हैं। यहां शिक्षा का बेहद बुरा हाल है। ज्यादा दूर जाने की जरुरत नहीं है, जिला मुख्यालय मे कलेक्टर कार्यालय से एक किलोमीटर और नगर पालिका महासमुन्द से 500 मीटर की दूरी पर स्थित महावीर शासकीय प्राथमिक शाला कुर्मी पारा महासमुन्द स्कूल का पूरा मैदान और सड़क नाली के गंदे पानी का तालाब बना हुआ है। 


पानी की निकासी तक नहीं है, बच्चे घुटनों तक गन्दे कीचड़ और पानी मे चल कर स्कूल जा रहे हैं।  इसी तरह जिले की कई स्कूलों की हालत बेहद जर्जर है, बच्चों के लिए बैठने के लिए जगह तक नहीं है।  जिला मुख्यालय के स्कूल का ये हाल है तो आप गांव के स्कूलों का अंदाजा सहज लगा सकते हैं।

आम आदमी पार्टी के  जिलाध्यक्ष भूपेन्द्र चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस की सरकार आत्मानंद स्कूल के नाम पर लीपापोती भर कर रही है। जबकि जमीनी हकीकत जीरो है। गांव की सरकारी स्कूलों की हालत बेहद खराब है। कई स्कूलों में शिक्षक पढ़ाने तक नहीं जा रहे हैं। शिक्षा के नाम पर सिर्फ तुष्टीकरण किया जा रहा है । अब इस सरकार को बदलने की जरूरत है। आम आदमी पार्टी के केजरीवाल की सरकार ने दिल्ली में शिक्षा के लिए जो काम किया है, वह जगजाहिर है । 

उनके बनाए हुए सरकारी स्कूल आज प्राइवेट स्कूलों को मात दे रहे हैं। वहाँ से पढ़े हुए बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बन रहे हैं। आज दिल्ली की केजरीवाल सरकार अपने कुल बजट का 25% राशि शिक्षा पर खर्च कर रही है। ईमानदारी के कारण ही आज वहां पर शिक्षा की क्रांति आई है । यही बदलाव अब छत्तीसगढ़ में लाने की जरूरत है,आम आदमी पार्टी चेतावनी देती है शिक्षकों एवं भवनों तथा पहुंच मार्ग की कमी को तत्काल दूर करें अन्यथा आम आदमी पार्टी बच्चों और पालकों के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगी।

महासमुन्द जिले के स्कूलों में शिक्षा का है बुरा हाल- आम आदमी पार्टी

No comments Document Thumbnail

महासमुंद जिले के स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। यहां शिक्षा व्यवस्था का बेहद बुरा हाल है। एकल शिक्षक के भरोसे पूरी स्कूल चलाई जा रही है। कई स्कूलों की हालत बेहद जर्जर है। बच्चों के लिए बैठने के लिए जगह तक नहीं है। आर टी ई क़ानून ( शिक्षा के अधिकार) के तहत भी बच्चों को शिक्षा नहीं मिल रही है। इन्हीं सब मामलों को लेकर आम आदमी पार्टी ने जिला अध्यक्ष भूपेंद्र चंद्राकर, प्रदेश सचिव अभिषेक जैन एवं लोकसभा सचिव संजय यादव  के नेतृत्व में  जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया है कि सिरपुर के पास अमलोर स्कूल में शिक्षकों की कमी के चलते हुए बच्चे सड़कों पर उतर आए हैं। 


उन्होंने शिक्षा मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक को ज्ञापन सौंपा है। आज बच्चे जिला शिक्षा अधिकारी के पास अपना बस्ता जमा करने के लिए आए हुए थे।  सिरपुर के हाईस्कूल में शिक्षक और क्लासरूम की कमी को बताते हुए बच्चों को एडमिशन नहीं दिया जा रहा है।  बागबाहरा ब्लॉक के सोनापुटी गांव में शिक्षकों की कमी के चलते पालक विकासखंड शिक्षा अधिकारी को शिक्षकों की मांग के लिए ज्ञापन सौंप रहे हैं। महासमुंद की बात करें तो ड्रीम इंडिया स्कूल के बच्चे शिक्षा के अधिकार के तहत शिक्षा वंचित हो गए हैं। संचालक कब स्कूल बंद करके चला गया और नया स्कूल खोल लिया, जिला शिक्षा कार्यालय को पता ही नहीं है। 

आज वहां के बच्चे शिक्षा के अभाव में दर-दर भटकने को मजबूर हैं । पालक चिंतित हैं। प्राइवेट स्कूलों की बात करें तो शिक्षा के अधिकार के तहत 25% बच्चों को उनको एडमिशन देना है।  पढ़ाने के एवज में स्कूलों को ग्रांट राशि दी जाती है जो कि पिछले 1 साल से स्कूलों को मिली ही नहीं है। जिले में ऐसे 44 स्कूल हैं जिनको अभी तक पेमेंट हुआ ही नहीं है। आज उनकी हालत खराब है, जिसके कारण ड्रीम इंडिया स्कूल जैसी हालात पैदा हो रहे हैं।

 जिलाध्यक्ष भूपेन्द्र चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस की सरकार आत्मानंद स्कूल के नाम पर लीपापोती कर रही है। जबकि जमीनी हकीकत जीरो है। गांव के सरकारी स्कूलों की हालत बेहद खराब है। कई स्कूलों में शिक्षक पढ़ाने तक नहीं जा रहे हैं। शिक्षा के नाम पर सिर्फ तुष्टीकरण किया जा रहा है। अब इस सरकार को बदलने की जरूरत है। आम आदमी पार्टी के केजरीवाल की सरकार ने दिल्ली में शिक्षा के लिए जो काम किया है, वह जगजाहिर है। उनके बनाए हुए सरकारी स्कूल आज प्राइवेट स्कूलों को मात दे रहे हैं। 

वहाँ से पढ़े हुए बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बन रहे हैं। दिल्ली की केजरीवाल सरकार अपने कुल बजट का 25% राशि शिक्षा पर खर्च कर रही है। ईमानदारी के कारण ही आज वहां पर शिक्षा की क्रांति आई है। यही बदलाव अब छत्तीसगढ़ में लाने की जरूरत है। आज आम आदमी पार्टी ने जिला शिक्षा अधिकारी को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि शिक्षकों एवं भवनों की कमी को तत्काल दूर करें अन्यथा आम आदमी पार्टी बच्चों और पालकों के साथ मिल कर धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होगी।

जिस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने व्यवस्था को दुरुस्त करने की बात कही है। ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से भूपेंद्र चंद्राकर,संजय यादव,अभिषेक जैन, संतोष चंद्राकर शकील खान,कादिर चौहान, राकेश झाबक,महेंद्र साहू, पुनाराम निषाद, इमरान खान, भोलाराम निषाद,  मुकेश कुर्रे श्री राम ध्रुव,भीम कुमार साहू,अनवर खान, दिलीप साहू, शिवा राम साहू, मधु यादव,अगेश्वर यादव, कोमल खुसरो, नीलम ध्रुव, केशव पटेल आदि आम आदमी पार्टी कार्यकर्त्ता उपस्थित थे।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.